आप सभी को श्री कृष्ण जन्माष्टमी के महा पर्व की हार्दिक शुभकामनायें

गुरुवार का पंचांग शनिवार का पंचांग

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  • Panchang, पंचाग, Panchang 2026 हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang, पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-

    1:- तिथि (Tithi)
    2:- वार (Day)
    3:- नक्षत्र (Nakshatra)
    4:- योग (Yog)
    5:- करण (Karan)


    पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है, नित्य पंचांग पढ़ने से कुंडली के ग्रहो के शुभ फल मिलने लगते है, इसीलिए भगवान श्रीराम भी नित्य पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।

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    4 सितम्बर 2026 का पंचांग, 4 September  2026 ka Panchang,

  • महालक्ष्मी मन्त्र : ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥

  • ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥

    मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।
  • कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
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आज का पंचांग, aaj ka panchang,

दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।

शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय

“श्री सूक्त”,“महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नामो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।

शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में जीवन में समस्त सुख 🎁 , ऐश्वर्य 🎉 की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन 💝 सुखमय होता है बड़ा भवन 🏬, विदेश यात्रा ✈️ के योग बनते है।

* विक्रम संवत् – 2083 वर्ष
* शक संवत – 1948 वर्ष
* कलि संवत – 5128 वर्ष
* कलयुग – 5128 वर्ष
* अयन – दक्षिणायन,
* ऋतु – वर्षा ऋतु,
* मास – भाद्रपद माह
* पक्ष – कृष्ण पक्ष
* चंद्र बल – वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन,

इस तरह से मनाएं जन्माष्टमी का पर्व भगवान श्री कृष्ण की बरसेगी असीम कृपा 


आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,
इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं ।
पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है, देवता प्रसन्न होते है ।

शुक्रवार को शुक्र देव की होरा :-

प्रात: 06.00 AM से 7.04 AM तक

दोपहर 01.23 PM से 2.26 PM तक

रात्रि 20.33 PM से 21.30 PM तक

दाहिने हाथ के अंगूठे से नीचे के हिस्से ( शुक्र का स्थान ) और अंगूठे पर थोड़ा सा इत्र लगाकर, ( इत्र ना मिले तो उसके बिना भी कर सकते है) बाएं हाथ के अंगूठे से उस हिस्से को शुक्र की होरा में “ॐ शुक्राये नम:” या

ॐ द्रांम द्रींम द्रौंम स: शुक्राय नम:।’ मंत्र का अधिक से अधिक जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य )I

यह उपाय आप कोई भी काम करते हुए चुपचाप कर सकते है इसके लिए किसी भी विधि विधान की कोई आवश्यकता नहीं है I

सुख समृद्धि 💰, ऐश्वर्य 💎, बड़ा भवन 🏬, विदेश यात्रा ✈️, प्रेम, रोमांस 💞, सुखी दाम्पत्य जीवन 👩‍❤️‍👨 के लिए शुक्रवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

शुक्रवार के दिन शुक्र की होरा में शुक्रदेव देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में शुक ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो 🎉 की प्राप्ति होती है ।

शुक्र देव के मन्त्र :-

ॐ शुं शुक्राय नमः।। अथवा

” ॐ द्राम द्रीम द्रौम सः शुक्राय नमः “।।

किसी भी मनोकामना पूर्ति के लिए वर्ष की चार सर्वश्रेष्ठ रात्रियों में एक है श्री कृष्ण जन्माष्टमी। जानिए जन्माष्टमी के सुख – समृद्धि के अचूक उपाय

🕉️ शुक्रवार को अवश्य लें 10 महाविद्याओं के नाम 🕉️

  • तिथि, (Tithi): अष्टमी तिथि 12.13 AM शनिवार 5 सितम्बर तक, तिथि, (Tithi) :-,
  • तिथि के स्वामी – अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी है I

आज अति शुभ श्री कृष्ण जन्माष्टमी का महापर्व है । शास्त्रों में जन्माष्टमी के पर्व को बहुत ही पुण्यदायक दायक मन गया है ।

वर्ष 2026 में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व शुक्रवार 4 सितम्बर के दिन मनाया जायेगा ।

भगवान श्री कृष्ण का अवतरण द्वापर युग में भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रात्रि 12 बजे मथुरा नगरी के कारागार में वासुदेव जी की पत्नी देवकी के गर्भ से रोहिणी नक्षत्र में एवं वृषभ के चंद्रमा की स्थिति में बुधवार के दिन हुआ था।

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत शुक्रवार 4 सितम्बर को तड़के सुबह 02 बजकर 25 AM पर होगी, जो शनिवार 5 सितम्बर को रात्रि 12 बजकर 13 AM तक रहेगी।

इस दिन रोहिणी नक्षत्र शुक्रवार 4 सितम्बर को 12.29 AM से प्रारम्भ होगा जो शनिवार 5 सितम्बर को रात 11.04 PM तक रहेगा, इस दिन दोपहर 15.44 तक हर्षण योग तत्पश्चात वज्र योग रहेगा ।

इस वर्ष जन्माष्टमी का पर्व इस लिए भी अत्यंत विशेष है क्योंकि इस दिन अष्टमी तिथि के स्वामी रोहणी नक्षत्र का भी विशिष्ट संयोग मिल रहा है इसी तिथि और नक्षत्र के योग में ही कान्हा का जन्म हुआ था ।

भगवान श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का पूर्णावतार माना गया है और उनके प्राकट्य का वर्णन विशेष रूप से श्रीमद्भागवत महापुराण, विष्णु पुराण, हरिवंश तथा महाभारत में मिलता है।

मथुरा की कारागार में देवकी और वसुदेव जी के पुत्र के रूप में भगवान श्रीकृष्ण प्रकट हुए। उस समय अत्याचारी राजा कंस का शासन था। आकाशवाणी के अनुसार देवकी का आठवाँ पुत्र कंस के विनाश का कारण बनने वाला था।

श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध में श्रीकृष्ण के जन्म का अत्यंत सुंदर वर्णन मिलता है।

भगवान के प्रकट होने के समय कारागार दिव्य प्रकाश से प्रकाशित हो उठी। भगवान ने पहले चतुर्भुज रूप में दर्शन दिए और शंख, चक्र, गदा तथा पद्म धारण किए हुए दिखाई दिए।

भगवान ने देवकी और वसुदेव को अपने पूर्वजन्मों और उनके साथ अपने संबंध की स्मृति भी कराई तथा उन्हें आश्वस्त किया कि वे पृथ्वी पर धर्म की स्थापना और दुष्टों के विनाश के लिए अवतरित हुए हैं।

इसके बाद भगवान ने बालक का रूप धारण किया।

भगवान ने अवतार क्यों लिया ?

भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण स्वयं अपने अवतार का उद्देश्य बताते हैं:

“परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥”

अर्थात—साधु पुरुषों की रक्षा, दुष्कर्म करने वालों के विनाश और धर्म की पुनः स्थापना के लिए भगवान युग-युग में प्रकट होते हैं।

जन्माष्टमी का व्रत अनंत गुना पुण्यदायक माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार एकादशी का व्रत रखे से हजारों-लाखों पाप नष्ट हो जाते है लेकिन एक जन्माष्टमी का व्रत हजार एकादशी व्रत के पुण्य के बराबर का माना है।

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार “जो प्राणी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत करता है, वह सौ जन्मों के पापों से मुक्त हो जाता है”।

भविष्य पुराण के अनुसार “जन्माष्टमी का व्रत अकाल मृत्यु नहीं होने देता है । जो जन्माष्टमी का व्रत करते हैं, उन्हें आरोग्य और दीर्घायु प्राप्त होती है”।

विष्णु पुराण और पद्मपुराण में भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण जी के जन्मदिवस के महत्व को बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार जो भक्त श्री कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखते हैं इस दिन श्रीकृष्ण जी की पूजा करते हैं, उन्हें अंत में स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य मध्यरात्रि में हुआ माना जाता है। इसलिए जन्माष्टमी की पूजा में मध्यरात्रि का विशेष महत्व है। जन्माष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्ण जी के लड्डू गोपाल स्वरूप की पूजा की जाती है ।

जन्माष्टमी पर खीरे के डंठल काटना भगवान के जन्म का प्रतीक माना जाता है । जिस प्रकार बच्चे को गर्भनाल काटकर जन्म दिया जाता है, उसी प्रकार रात 12 बजे खीरे का डंठल काट कर कान्हा का जन्म कराया जाता है । स्नान अभिषेक के बाद उनको अच्छी तरह से कपडे से साफ कर के कान्हा को नए वस्त्र पहनाये जाते है ।

तत्पश्चात उन्हें झूले में बैठाकर झूला झुलाया जाता है । भगवान को माखन मिश्री अत्यंत प्रिय है इसलिए उनको माखन, मिश्री, फल, नारियल का भोग लगाया जता है, भगवान को तुलसी अत्यंत प्रिय है इसलिए उन्हें तुलसी जी भी अर्पित की जाती है ।

जन्माष्टमी की पूजा में श्री कृष्ण जी को पीले पुष्प, मोर पंख और बांसुरी भी अवश्य जी चढ़ानी चाहिए ।

उत्तर भारत में विशेषकर मथुरा, बृंदाबन, गोकुल, महाराष्ट्र और गुजरात में द्वारिकादीश में इस पर्व की धूम देखते ही बनती है । जन्माष्टमी के दिन सभी मंदिरो में दिन भर भजन, कीर्तन, चलते रहते है, बहुत ही मनोहरी झांकियां सजाई जाती है और जन्म के समय रात 12 बजे यह उत्साह अपने चरम पर होता है ।

जन्माष्टमी पर अवश्य जानिए भगवान श्री कृष्ण की नगरी, द्वारिका नगरी कहाँ थी, किसने बसाई, इसके शिल्पकार कौन थे, यह दिखती कैसी थी और यहाँ पर कौन कौन रहते है,

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नक्षत्र ( Nakshatra ) : रोहिणी 23.04 PM तक तत्पश्चात मृगशिरा

नक्षत्र के स्वामी :–            रोहिणी नक्षत्र के देवता ब्रम्हा और स्वामी चंद्र देव जी है ।

रोहिणी नक्षत्र, नक्षत्रों के क्रम में चौथे स्थान पर है तथा चंद्रमा का केंद्र माना जाता है। ‘रोहिणी’ का अर्थ ‘लाल’ होता है। इसे आकाश में सबसे चमकीले सितारों में से एक माना जाता है।

 यह 5 तारों का समूह है, जो धरती से किसी भूसा गाड़ी की तरह दिखाई देता है।

रोहिणी नक्षत्र का आराध्य वृक्ष जामुन और स्वभाव शुभ माना गया है ।

 पुराण कथा के अनुसार रोहिणी चंद्र की सत्ताईस पत्नियों में सबसे सुंदर, तेजस्वी, सुंदर वस्त्र धारण करने वाली है। ज्यों-ज्यों चंद्र रोहिणी के पास जाता है, त्यों-त्यों उसका रूप अधिक खिल उठता है।

इस नक्षत्र के जातक पतले, मिलनसार, दृढ़ निश्चयी, बुद्धिशाली, यशवान, ललित कलाओं के प्रेमी, ईश्वर में आस्था रखने वाले, किन्तु झूठ बोलने वाले, स्वार्थी होते है।

रोहिणी नक्षत्र में जन्मी स्त्रियाँ सुंदर, भाग्यशाली, पति से प्रेम करने वाली, माता-पिता की आज्ञाकारी, योग्य संतान वाली और ऐश्वर्यवान होती है।

रोहिणी नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 1, 2, 3, 6 और 9, भाग्यशाली रंग सफेद, पीला और नीला तथा भाग्यशाली दिन शनिवार, शुक्रवार और बुधवार है।

आज रोहिणी नक्षत्र के बीज मंत्र “ऊँ ऋं ऊँ लृं” अथवा “ॐ रौहिण्यै नमः”  l  का 108 बार जाप करें इससे रोहिणी नक्षत्र को बल मिलेगा।  

रोहिणी नक्षत्र में घी, दूध, का दान करना चाहिए।

आज जन्माष्टमी के दिन अवश्य जानिए अपने प्रभु के परिवार के बारे में, भगवान श्री कृष्ण की पटरानियाँ और उनकी कितनी संताने थी 

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योग(Yog) :- हर्षण 15.44 PM तक तत्पश्चात वज्र

योग के स्वामी, स्वभाव :-    हर्षण योग के स्वामी भग देव जी और स्वभाव श्रेष्ठ है ।

प्रथम करण : – बालव 13.20 PM तक

करण के स्वामी, स्वभाव :-     बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।

द्वितीय करण :- कौलव 12.13 AM शनिवार 5 सितम्बर तक

करण के स्वामी, स्वभाव :-   कौलव करण के स्वामी मित्र और स्वभाव सौम्य है ।

  • दिशाशूल (Dishashool)- शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है ।

  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.30 AM से 5.15 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.26 PM से 15.17 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.39 PM से 19.02 PM तक
  • अमृत काल : 20.03 PM से 21.33 PM तक
  • अग्नि वास : पाताल में 12.13 AM शनिवार 5 सितम्बर तक


     जब पाताल में अग्नि वास है तो वह हवन से सम्बन्धित अनुष्ठानों के लिये शुभ नहीं मानी जाती है, यह अशुभ मानी गई है । अग्नि के पाताल  वास के दौरान किये जाने वाले हवन  सम्बन्धित अनुष्ठानों व्यक्ति को आर्थिक नुकसान करना पड़ता है उसका  धन नष्ट हो सकता है।


  • शिव वास : मां गौरी के साथ 12.13 AM शनिवार 5 सितम्बर तक


    जब भगवान शंकर  गौरी मइय्या के साथ होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शंकर जी के देवी गौरी के साथ रहने के समय किये गए  रूद्रअभिषेक से घर कारोबार में सुख-समृद्धि आती है, स्थाई लक्ष्मी का वास होता है ।


    दिशा शूल : शास्त्रों के अनुसार शुक्रवार को पश्चिम दिशा में दिशा शूल होता है, यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।

  • गुलिक काल : – शुक्रवार का गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)– दिन – 10:30 AM से 12:00 PM तक ।
  • सूर्योदय – प्रातः 06:00
  • सूर्यास्त – सायं : 18:39
  • विशेष – अष्टमी को नारियल का सेवन नहीं करना चाहिए, अष्टमी को नारियल का सेवन करने से बुध्दि का नाश होता है  ।
  • पर्व त्यौहार–

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“हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो । श्री कृष्ण जन्माष्टमी की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं 

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### ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय*
## ( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ)
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### *श्याम नगर, रायपुर, छत्तीसगढ़*  
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 हर समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है आपकी प्रत्येक इच्छा, महत्वकांक्षा, जीवन में बुलंदियों पर पहुंचना या किसी भी तरह की समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है *व्यापार बढ़ोतरी किया कराया शादी के लिए माता-पिता को मनाना जब कहीं ना ही हो काम तो हमसे में समाधान हर मुश्किल से मुश्किल समस्या का समाधान ज्योतिष मेरा काम नहीं मेरी साधना है जब कहीं ना हो काम तो हमसे ले समाधान https://devlinai.co.in/own_projects/acharya-main/
*ॐ नमः शिवाय | जय सनातन* 🚩🕉️🌹🌹


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