गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 3 September 2026 Ka Panchang,

मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर,9425203501/9044862881 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद

बृहस्पतिवार का पंचांग, Brahaspativar ka panchang,

  • Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।

* शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
* वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
* नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
* योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
* करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।

इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए । नित्य पंचाग पढ़ने से भाग्य चमकने लगता है ।

जानिए आज गुरुवार का पंचांग, Guruwar Ka Panchag,


आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है, आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,

इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है ।

मंगल श्री विष्णु मंत्र :-

मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥

आज का पंचांग, aaj ka panchang, गुरुवार का पंचाग, Guruvar Ka Panchag,

गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag,

3 सितम्बर 2026 का पंचांग, 3 September 2026 Ka Panchang,


  • गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 3 सितम्बर 2026 का पंचांग,
  • दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
  • गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए ।

    गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
  • गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
    इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
  • गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।
    इस उपाय को करने से कार्यो में अड़चने दूर होती है, भाग्य चमकने लगता है, बृहस्पति देव की कृपा मिलती है।

यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।
और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।

गुरुवार को विष्णु जी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, गुरुवार को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ परम फलदाई है

कोई भद्रा, चंद्र ग्रहण, पंचक से ना डरें, रक्षाबंधन के दिन सिर्फ इस समय को छोड़कर अपने भाइयों को बांधे राखी, यह है सबसे शुभ मुहूर्त, 

  • *विक्रम संवत् – 2083,
  • * शक संवत – 1948,
    *कलि संवत- 5128,
    * अयन – दक्षियायणं,
    * ऋतु – वर्षा ऋतु,
    * मास – भाद्रपद माह
    * पक्ष – कृष्ण पक्ष
    *चंद्र बल – वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन,

गुरुवार को बृहस्पति देव की होरा :-

प्रात: 06.00 AM से 7.03 AM तक

दोपहर 01.24 PM से 2.27 PM तक

रात्रि 20.34 PM से 21.31 PM तक

रक्षा बंधन के दिन राखी बांधते समय बहने बोले यह मन्त्र, भाइयों की सदैव होगी हर संकटो से होगी रक्षा 

आज गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा के समय दाहिने हाथ की तर्जनी ऊंगली ( अंगूठे के बगल वाली उंगली ) के नीचे गुरु पर्वत और उस पूरी ऊंगली पर बृहस्पति देव के मंत्र का जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य ) I

गुरुवार को बृहस्पति की होरा में अधिक से अधिक बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करें । शिक्षा, मान – सम्मान, व्यापार, कारोबार, नए कार्यो के प्रारम्भ के लिए गुरुवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा में बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

बृहस्पति देव के मन्त्र

ॐ बृं बृहस्पतये नमः।। अथवा

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः।।


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तिथि (Tithi) :- सप्तमी तिथि 02.25 AM शुक्रवार 4 सितम्बर तक,

तिथि का स्वामी – सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देव जी है I

सप्तमी के स्वामी भगवान सूर्य देव हैं। इस दिन आदित्यह्रदय स्रोत्र का पाठ अवश्य करें ।

सप्तमी तिथि को शुभ प्रदायक माना गया है, इस तिथि में जातक को सूर्य का शुभ प्रभाव प्राप्त होता है ।

  सप्तमी तिथि में जन्मा जातक भाग्यशाली, गुणवान, तेजयुक्त होता है उसकी काबिलियत से उसे सभी क्षेत्रो में सम्मान प्राप्त होता  है।

सप्तमी के दिन भगवान सूर्य देव के मन्त्र “ॐ सूर्याय नम:”।। की एक माला का जाप अवश्य ही करें ।

सप्तमी का विशेष नाम ‘मित्रपदा’ है।  सप्तमी को काले, नीले वस्त्रो को धारण नहीं करना चाहिए।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सप्तमी तिथि को मां कालरात्रि की पूजा का भी दिन माना जाता है, जो समस्त संकटों का नाश करने वाली हैं। अत: इस दिन माँ काली की आराधना, स्मरण अवश्य करें ।

सप्तमी के दिन माँ काली जी के मन्त्र “ॐ क्रीं काल्यै नमः” का जाप करने से समस्त भय और संकट दूर होते है।  

 सप्तमी तिथि के दिन उत्साह से भरे,  शुभ मंगल कार्य करना शुभ माना जाता है।  किसी नए स्थान की यात्रा करना, नए कार्यो को करने के लिए भी यह तिथि शुभ मानी जाती है।  

नए वस्त्र एवं गहनों को धारण करना, विवाह, नृत्य- संगीत जैसे काम करना भी इस दिन उत्तम होता है। चूड़ा कर्म, अन्नप्राशन, उपनयन जैसे शुभ संस्कार इस तिथि समय पर किए जाते हैं ।

सप्तमी की दिशा वायव्य मानी गयी है ।

सप्तमी तिथि को ताड़ के फल का सेवन नहीं करना चाहिए । माना जाता है कि सप्तमी को ताड़ का सेवन करने से रोग बढ़ते है ।

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नक्षत्र (Nakshatra) – कृतिका 12.29 AM शुक्रवार 4 सितम्बर तक

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी –        कृतिका नक्षत्र के देवता अग्नि देव और स्वामी सूर्य देव जी है ।

कृत्तिका नक्षत्र आकाश मंडल में तीसरा नक्षत्र है जो सात सितारों के एक समूह,आग को दर्शाता है और इसे शक्ति और ऊर्जा का अंतिम स्रोत माना जाता है। यह नक्षत्र भगवान अग्नि देव द्वारा शासित है ।

 कृत्तिका नक्षत्र स्टार का लिंग मादा है। कृतिका नक्षत्र का तत्व अग्नी, आराध्य वृक्ष उंबर, औदुंबर और नक्षत्र स्वभाव क्रूर माना गया है ।

कृतिका नक्षत्र में जन्मे जातक तेजस्वी, सुन्दर, महत्वाकांक्षी, गुणवान, आत्मवश्वासी एवं धर्म पर पूर्ण विश्वास रखने वाले होते हैं। कृतिका नक्षत्र में जन्म लेने वाला व्यक्ति विलासता जीवन जीने में विश्वास रखता हैं। यह बड़ी ही आसानी से विपरीत लिंग को आकर्षित कर लेते हैं। इनका वैवाहिक जीवन सुखमय होता है।

इनकी सबसे बड़ी कमजोरी इनका जिद्दीपन है और यह कई बार बहुत ही जल्दी लड़ने पर भी उतारू हो जाते है ।

कृत्तिका नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 1, 2, 3 और 9, भाग्यशाली रंग पीला और लाल , भाग्यशाली दिन मंगलवार और रविवार होता है ।

कृतिका नक्षत्र में जन्मे जातको को नित्य तथा अन्य सभी को आज गायत्री मन्त्र  “ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्॥” मन्त्र की एक माला का जाप करना चाहिए इससे जीवन की सभी बाधाएं दूर होती है।

कृत्तिका नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातको को  गूलर के पेड़ की पूजा करनी चाहिए और अपने  घर अथवा मंदिर में गूलर के पेड को लगाकर उसकी सेवा करनी चाहिए ।

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योग :- व्याघात 18.33 PM तक तत्पश्चात हर्षण

योग के स्वामी, स्वभाव :-    व्याघात योग के स्वामी वायु देव एवं स्वभाव हानिकारक माना जाता है ।

प्रथम करण :- विष्टि 15.27 PM तक

करण के स्वामी, स्वभाव :-   विष्टि करण के स्वामी यम और स्वभाव क्रूर है ।

द्वितीय करण :- बव 02.25 AM शुक्रवार 4 सितम्बर तक

करण के स्वामी, स्वभाव :-    बव करण के स्वामी इंद्र देव और स्वभाव सौम्य है ।

ब्रह्म मुहूर्त : 4.30 AM से 5.15 AM तक

विजय मुहूर्त : 14.27 PM से 15.18 PM तक

गोधूलि मुहूर्त : 18.41 PM से 19.03 PM तक

अमृत काल : 22.12 PM से 23.45 AM शुक्रवार 4 सितम्बर तक

राशिनुसार इस तरह से  बंधवाएं राखी, कुंडली के ग्रहो के मिलेंगे शुभ फल


अग्नि वास : पृथ्वी 02.25 AM शुक्रवार 4 सितम्बर तक

अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।
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शिव वास : शमशान में 02.25 AM शुक्रवार 4 सितम्बर तक


शिव वास    श्मशान में –  जब भगवान शिव का श्मशान में वास होता हैं, तो रुद्र अभिषेक आदि  करना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ जी का  श्मशान में वास के दौरान अभिषेक करने से मृत्यु समान  परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

  • दिशाशूल (Dishashool)– बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – गुलिक 09:30 AM से 11 AM बजे तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)– दिन – 1:30 PM से 3:00 PM तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 06:00
  • सूर्यास्त – सायं 18.41

विशेष – सप्तमी को ताड़ का सेवन नहीं करना चाहिए  । इस दिन ताड़ का सेवन करने से रोग लगते है । 

  • पर्व त्यौहार
  • मुहूर्त (Muhurt)

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“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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### ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय*
## ( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ)
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 हर समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है आपकी प्रत्येक इच्छा, महत्वकांक्षा, जीवन में बुलंदियों पर पहुंचना या किसी भी तरह की समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है *व्यापार बढ़ोतरी किया कराया शादी के लिए माता-पिता को मनाना जब कहीं ना ही हो काम तो हमसे में समाधान हर मुश्किल से मुश्किल समस्या का समाधान ज्योतिष मेरा काम नहीं मेरी साधना है जब कहीं ना हो काम तो हमसे ले समाधान https://devlinai.co.in/own_projects/acharya-main/
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