Ram Navami, राम नवमी, Ram Navami 2026,

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Ram Navami, राम नवमी 2026,

भगवान श्री राम का जन्मोत्सव राम नवमी Ram Navami का पर्व पूरे भारत में अत्यंत हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व अत्यंत प्राचीन काल से ही पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है ।

वर्ष 2026 में राम नवमी Ram navmi का पर्व शुक्रवार 27 मार्च को मनाया जायेगा ।

 मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम का सम्पूर्ण भारतीय जनमानस पर बहुत प्रभाव है । भगवान श्री राम भगवान विष्णु के अवतार कहे गए है उन्हें विष्णु जी vishnu ji का सातवाँ अवतार माना जाता है।

जानिए, रामनवमी क्यों मनाई जाती है, Ramnavmi kyon manai jati hai, रामनवमी, Ramnavmi, रामनवमी का महत्व, Ramnavmi ka Mahatva, रामनवमी 2026, Ramnavmi 2026,

नवरात्री में माँ दुर्गा की स्वरूप कन्याओं की इस तरह से पूजा, अवश्य जानिए नवरात्री में कन्या पूजन की सही विधि 

Ram Navami, राम नवमी,

प्राचीन काल में लंका पर रावण का राज था जो परम विद्वान् होने के साथ बहुत अत्याचारी भी था। उसके अत्याचार से ना केवल मनुष्य, ऋषि वरन देवतागण भी अत्यंत त्रस्त थे । रावण ने ब्रह्मा जी से अमर होने का वरदान ले रखा था इसीलिए कोई उसका बाल भी बांका नहीं कर पाता था ।  उसके अत्याचार से परेशान होकर सभी देवता भगवान विष्णु के पास जाकर कल्याण के लिए प्रार्थना करने लगे।

तब भगवान श्री विष्णु जी ने सम्पूर्ण सृष्टि के कल्याण , धर्म की पुन: स्थापना , रावण के वध के लिए प्रतापी राजा दशरथ के यहाँ जन्म लेने का निश्चय किया ।

शास्त्रो के अनुसार त्रेतायुग में चैत्र माह Chaitr Maah की नवमी तिथि को पुनर्वसु नक्षत्र तथा कर्क लग्न में भगवान श्री विष्णु जी ने राजा दशरथ की पत्नी कौशल्या को गर्भ से राम के रूप में जन्म लिया।
तभी से उस शुभ तिथि को रामनवमी Ramnavmi के रूप में मनाया जाने लगा ।

मान्यता है कि राम नवमी ram navami के दिन ही गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस की रचना शुरू की थी।

रामनवमी Ramnavmi का दिन नवरात्री navratri का नवां और अंतिम दिन होता है, इस दिन भक्त गण माँ सिद्धि दात्री की आराधना करते है और इस के साथ ही नवरात्र navratr की समाप्ति भी हो जाती है इसलिए नवां नवरात्र navratr और रामनवमी Ramnavmi दोनों पर्व एक साथ एक दिन होने पर इस दिन का महत्व और भी ज्यादा बड़ जाता है ।

राम नवमी Ramnavmi के अवसर पर पूरे देश के मंदिरो में विशेष पूजा अर्चना की जाती है लेकिन उत्तर प्रदेश के अयोध्या नगरी में भक्तों का विशेष उत्साह देखने को मिलता है। इस दिन अयोध्या नगरी में देश विदेश से लाखो लोग आकर पवित्र सरयू नदी पर स्नान कर भगवान श्री राम की अराधना करते हुए उनका जन्म उत्सव मानते है ।

नवरात्री के इस उपाय से मिलेगी सभी कार्यों में श्रेष्ठ सफलता, जानिए नवरात्री के अचूक उपाय 

रामनवमी Ramnavmi का पर्व पापों का नाश करने और शुभ फल प्रदान करने वाला है । इस दिन बहुत से भक्तगण ब्रत रखते है ।

इस दिन रामायण का पाठ करने से अक्षय पूण्य मिलता है अगर रामायण का पाठ संभव ना हो तो सुन्दर कांड अवश्य ही पढे ।

रामनवमी Ramnavmi के दिन रामरक्षा स्त्रोत का पाठ करने से जीवन के साथी कष्ट, संकट दूर होते  हैं।

इस दिन घरो, मंदिरो में  भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है।

 इस दिन भगवान राम के दर्शन और उनकी मूर्ति को फूल-माला से सजाने से जीवन में सुख – समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है ।

 रामनवमी Ramnavmi के दिन भगवान राम का जन्म होने के कारण बहुत से भक्त गण भगवान राम की मूर्ति को पालने में भी  झुलाते हैं।

 भगवान श्री राम shri ram सम्पूर्ण सृष्टि के राजा माने गए है अतः इस दिन उनकी विधि पूर्वक आराधना करने से जीवन के सभी मनोरथ निश्चय ही पूर्ण होते है ।

 रामनवमी Ramnavmi के दिन प्रात: स्नान आदि के पश्चात भगवान राम की मूर्ति / तस्वीर को शंख से स्नान कराकर उन्हें पीले चन्दन से तिलक करें ।

फिर उन्हें लौंग, इलाइची, शहद, सुपारी, नारियल, पान, फल, मीठा आदि अर्पित करें, उन्हें  पीला जनेऊ फिर पीले फूलो की माला पहनाये ।

 इस दिन भगवान राम को तुलसी अवश्य ही चढ़ाएं । तत्पश्चात राम रक्षा स्रोत्र का पाठ करे अंत में आरती करके प्रशाद वितरित करें ।

इस दिन किसी भी राम मंदिर ram mandir में जाकर भगवान को पीले फूलो अथवा गुलाब की माला पहनाये इससे परिवारिक जीवन सुखमय होता है, जीवन में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है ।

जानिए नवरात्री में कन्या पूजन में माता के किन किन स्वरूपों की पूजा की जाती है, कैसे मिलेगी माँ की पूर्ण कृपा  

  राम नवमी के दिन भगवान श्री राम को शहद अर्पित करने से प्रेम में सफलता मिलती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है।

कहते है जो भक्त गण राम नवमी Ramnavmi के दिन भगवान श्री राम की विधि पूर्वक आराधना करते है उनको इस संसार के समस्त भौतिक सुखो की प्राप्ति होती है, उनके पुरखो को मोक्ष मिलता है, उनके परिवार में लोग संस्कारी होते है और अंत में जातक को स्वर्ग में स्थान प्राप्त होता है । 

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Guruwar Ka Panchag, गुरुवार का पंचांग, 26 मार्च 2026 का पंचांग,

Guruwar Ka Panchag, गुरुवार का पंचांग, 26 मार्च 2026 का पंचांग,

आप सभी को नवरात्री के आठवें दिन की, दुर्गा अष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें, जय माँ महा गौरी

गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 26 March 2026 Ka Panchang,

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बृहस्पतिवार का पंचांग, Brahaspativar ka panchang,

  • Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।

* शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
* वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
* नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
* योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
* करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।

इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
जानिए आज गुरुवार का पंचांग, Guruwar Ka Panchag,

मंगल श्री विष्णु मंत्र :-

मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥

आज का पंचांग, aaj ka panchang, गुरुवार का पंचाग, Guruvar Ka Panchag,

गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag,

26 मार्च 2026 का पंचांग, 26 March 2026 Ka Panchang,


  • गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 26 मार्च 2026 का पंचांग,
  • दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
  • गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए ।

    गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
  • गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
    इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।

    ऐसा होगा हिंदू नव संवत्सर, हिन्दू नव वर्ष के राजा और मंत्री होंगे यह देवता,
  • गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।
    इस उपाय को करने से कार्यो में अड़चने दूर होती है, भाग्य चमकने लगता है, बृहस्पति देव की कृपा मिलती है।

यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।
और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।

गुरुवार को विष्णु जी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, गुरुवार को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ परम फलदाई है

इस बार नवरात्री में माँ दुर्गा अपने इस वाहन पर सवार होकर आएगी और ऐसा रहेगा उसका फल, 

  • *विक्रम संवत् 2083,
  • * शक संवत – 1948,
    *कलि संवत 5128,
    * अयन – उत्तरायण,
    * ऋतु – बसंत ऋतु,
    * मास – चैत्र माह
    * पक्ष – शुक्ल पक्ष
    *चंद्र बल – मेष, मिथुन, सिंह, कन्या, धनु, मकर,

गुरुवार को बृहस्पति देव की होरा :-

प्रात: 6.18 AM से 7.20 AM तक

दोपहर 01.28 PM से 2.30 PM तक

रात्रि 20.33 PM से 9.31 PM तक

आज गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा के समय दाहिने हाथ की तर्जनी ऊंगली ( अंगूठे के बगल वाली उंगली ) के नीचे गुरु पर्वत और उस पूरी ऊंगली पर बृहस्पति देव के मंत्र का जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य ) I

गुरुवार को बृहस्पति की होरा में अधिक से अधिक बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करें । शिक्षा, मान – सम्मान, व्यापार, कारोबार, नए कार्यो के प्रारम्भ के लिए गुरुवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा में बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

बृहस्पति देव के मन्त्र

ॐ बृं बृहस्पतये नमः।। अथवा

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः।।


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  • तिथि (Tithi) :- अष्टमी 11.48 AM तक तत्पश्चात नवमी
  • तिथि का स्वामी – अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी और नवमी तिथि की स्वामी माँ गौरी और कुबेर देव जी है ।
  • आज नवरात्री का आठवें दिन, दुर्गा अष्टमी का दिन है। नवरात्री के आठवें दिन माँ महागौरी की पूजा की जाती है। महागौरी को भगवान गणेश की माता के रूप में भी जाना जाता है ।
  • इनकी उपासना से भक्तों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। कोई भी संकट, दुःख उसके पास भी नहीं आता है । मां गौरी ममता की मूर्ति कही जाती हैं जो अपने भक्तों को अपने पुत्र समान प्रेम करती हैं।
  • मां महागौरी का ये रूप बेहद सरस, सुलभ और मोहक है।
  • इनका वर्ण पूर्णतः गौर है, इनके सभी वस्त्र एवं आभूषण आदि भी श्वेत हैं। इनकी आयु आठ वर्ष की मानी गई है और इनकी मुद्रा अत्यंत शांत है।
  • महागौरी का वाहन वृषभ अर्थात बैल है। इन की चार भुजाएँ हैं, इनके ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है। ऊपरवाले बाएँ हाथ में डमरू और नीचे के बाएँ हाथ में वर-मुद्रा हैं।
  • अष्टमी के दिन महिलाएं अपने सुहाग के लिए देवी मां को चुनरी भेंट करती हैं। अष्टमी तिथि को माँ गौरी को दूध से बने नैवेद्य एवं नारियल का भोग लगाएं।
  • माँ गौरी की आराधना से सभी पाप नष्ट हो जाते है एवं धन, यश और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है । ये धन, वैभव और सुख-शांति की अधिष्ठात्री देवी हैं।
  • नवरात्री की अष्टमी के दिन मां गौरी की कृपा के लिए यहाँ दिए गए मन्त्र की एक माला का जाप करना चाहिए ।
  • ॐ महा गौरी देव्यै नम:”

    अथवा
  • या देवी सर्वभू‍तेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

  • जिनके घरो में अष्टमी पूजी जाती है जो सात नवरात्री का ब्रत रखते है उनके यहाँ अष्टमी की पूजा के बाद नन्ही कुंवारी कन्याओं को भोजन कराना शुभ फल देने वाला माना जाता है।
  • अष्टमी के दिन नन्ही कन्याओं जिन्हे कंजक कहा जाता है की पूजा करना, उन्हें प्रेम पूर्वक भोजन करवाकर उन्हें उपहार देने से माँ दुर्गा की असीम कृपा मिलती है ।

अपनी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए नवरात्री के शुक्रवार और अष्टमी में अवश्य ही करें ये उपाय  

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नक्षत्र (Nakshatra) – आद्रा 16.19 PM तक तत्पश्चात पुनर्वसु

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी –   आर्द्रा नक्षत्र के देवता रुद्र (शिव) और नक्षत्र के स्वामी राहु जी है ।

आर्द्रा नक्षत्र आकाश मंडल में छठवां नक्षत्र है। यह मिथुन राशि में आता है और राहु का नक्षत्र है। आर्द्रा नक्षत्र कई तारों का समूह न होकर केवल एक तारा है। इसका आकार हीरे अथवा वज्र अथवा आँसू की तरह है।

आद्रा नक्षत्र का आराध्य वृक्ष कृष्णागरू,काला तेंदू और नक्षत्र स्वभाव तीक्ष्ण माना गया है ।

आर्द्रा नक्षत्र आकाश मंडल में छठवां नक्षत्र है। यह मिथुन राशि में आता है और राहु का नक्षत्र है। आर्द्रा नक्षत्र कई तारों का समूह न होकर केवल एक तारा है। इसका आकार हीरे अथवा वज्र अथवा आँसू की तरह है।

आर्द्रा नक्षत्र का आराध्य वृक्ष कृष्णागरू,काला तेंदू और नक्षत्र स्वभाव तीक्ष्ण माना गया है ।

आर्द्रा नक्षत्र में जन्मे जातको पर राहु का प्रभाव रहता है अत: इन्हे राहु का उपाय अवश्य करना चाहिए । इन्हे अनैतिक कार्यो से सदैव दूर रहना चाहिए अन्यथा इन्हे अपमान अपयश का सामना करना पड़ सकता है ।

आर्द्रा नक्षत्र के पुरुष हंसमुख, जिम्मेदार, आकर्षक व्यक्तित्व वाले, नए नए खोजो वाले लेकिन चालाक और अपना काम निकलने वाले होते है। लेकिन यदि बुध और रा‍हु खराब हो तो जातक घमंडी, बुरे विचारों वाले, पराई स्त्री में आसक्त रहने वाले, दुखी स्वाभाव वाले भी होते हैं।

आर्द्रा नक्षत्र में पैदा हुई महिला बुद्विमान, व्यवहार कुशल और शांतिप्रिय होती हैं। यह खूब खर्चा करने वाली, लेकिन हमेशा मीन मेख निकालने वाली भी होती है।

समान्यता इनके माता-पिता में बहुत ही अनबन रहती है, अर्थात इन्हे घर में कलह देखना पड़ता है।

आर्द्रा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 2, 4, 7 और 9, भाग्यशाली रंग, लाल और बैंगनी,  भाग्यशाली दिन मंगलवार तथा गुरुवार का माना जाता है ।

आद्रा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातको को तथा सभी मनुष्यों को जिस दिन आर्द्रा नक्षत्र हो उस दिन ॐ रुद्राय नम: मन्त्र की एक माला का जप करना चाहिए, इससे आर्द्रा नक्षत्र के शुभ फल मिलते है ।  

आर्द्रा नक्षत्र के जातक के लिए भगवान शिव की आराधना करना शुभदायक होता है।  भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप करना चाहिए. सोमवार का व्रत एवं जाप इत्यादि करना उत्तम फल प्रदान करने वाला होता है। 



कैसा भी सिर दर्द हो उसे करें तुरंत छूमंतर, जानिए सिर दर्द के अचूक पा

आज नवरात्री के आठवें दिन, दुर्गा अष्टमी के दिन बहुत से भक्त गण नन्ही नन्ही कन्याओं जिन्हे कंजके भी कहते है उनकी पूजा करते है, उनके भक्ति भाव से अपने घर में बुलाकर उन्हें भोजन कराकर उन्हें उपहार देकर, उनसे आशीर्वाद लेते है ।

मान्यता है कि जो भी भक्त गण नवरात्रि में माँ दुर्गा की पूजा करते है, नवरात्री का ब्रत रखते है उन्हें नवरात्री की अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं का पूजन अवश्य ही करना चाहिए । नवरात्री में कन्या पूजन के बिना ब्रत पूर्ण नहीं माना जाता है ।

शास्त्रों के अनुसार माँ दुर्गा होम, जप और दान से इतनी प्रसन्न नहीं होतीं जितनी कन्या पूजन से प्रसन्न होती हैं। कन्या पूजन से सभी तरह के वास्तु दोष,विघ्न, भय और शत्रुओं का नाश होता है।

देवी पुराण में लिखा है कि, इन्द्र ने एक बार ब्रह्मा जी से देवी दुर्गा को प्रसन्न करने की विधि पूछी तो ब्रह्मा जी ने माँ दुर्गा को प्रसन्न करने की सर्वोत्तम विधि कन्या पूजन को ही बताया, कन्या पूजन से सभी तरह के वास्तु दोष,विघ्न, भय और शत्रुओं का नाश होता है।

नवरात्री की अष्टमी तथा नवमी के दिन कन्या पूजन में 9 कन्याओं का पूजन करना चाहिए, साथ ही एक छोटे बालक को भी साथ में पूज कर उसे भी भोजन करवाना चाहिए ।

नवरात्रि में कन्या पूजन में ध्यान रखे कि कन्याओ की उम्र दो वर्ष से कम और दस वर्ष से ज्यादा भी न हो ।

पूजी जाने वाली कन्याओं को देवी के शक्ति स्वरूप का प्रतीक मानकर उनको श्रद्धा से जीमाना चाहिए ।

नवरात्र में नौ कन्याओं को माता के नौ रूपों क्रमश: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी एवं सिद्धिदात्री का रूप मानकर उनकी पूजा का विधान है।

शास्त्रों के अनुसार नवरात्र में की गयी पूजा-पाठ, आराधना और कन्या पूजा कभी निष्फल नहीं होती भक्तो को उसका फल अवश्य ही मिलता है।

कन्या पूजन में सभी कन्याओं और एक बालक के पहले चरण धोकर, साफ कर के उन्हें साफ आसान पर बिठायें फिर उन सभी के मस्तक पर रोली का तिलक करके उनके हाथ में कलावा बांधें । फिर जो भी श्रद्धा पूर्वक बना हो उन्हें इन कन्याओं के आगे परोसे ।

इसके बाद कन्या पूजन के दिन जिस प्रशाद से मां दुर्गा को भोग लगाया हो उस प्रशाद को भोग के बाद सबसे पहले कन्याओं को ही खिलाना चाहिए।

कन्याओं के भोजन करने के उपरांत उन्हें अपनी सामर्थनुसार उपहार और दक्षिणा देकर उन सब के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लें, मन ही मन मे माँ का ध्यान करके हुए अपनी गलतियों, पापो के लिए क्षमा मांगते हुए अपनी मनोकामना भी कहे, और उन कंजको को अगले नवरात्री में फिर से अपने घर में आने का निमंत्रण दें ।

ऐसा करने से माँ की कृपा से सभी विघ्नो, रोगो, सभी दोषो का नाश होता है, निश्चय ही सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है ।

रामनवमी के दिन इन उपायों से मिलेगा भगवान श्री राम का आशीर्वाद,  घर में हर्ष और प्रेम की होगी वर्षा। जानिए राम नवमी के अचूक उपाय

योग :- शोभन 12.32 AM शुक्रवार 27 मार्च तक

योग के स्वामी, स्वभाव :-  शोभन योग के स्वामी बृहस्पति देव एवं स्वभाव श्रेष्ठ है ।

प्रथम करण :- बव 11.48 AM तक

करण के स्वामी, स्वभाव :-  बव करण के स्वामी इंद्र देव और स्वभाव सौम्य है ।

द्वितीय करण :- बालव 22.55 PM तक तत्पश्चात कौलव

करण के स्वामी, स्वभाव :-       बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।

ब्रह्म मुहूर्त : 4.45 AM से 5.31 AM तक

विजय मुहूर्त : 14.30 PM से 15.19 PM तक

गोधूलि मुहूर्त : 18.34 PM से 18.58 PM तक

अमृत काल : 06.50 PM से 08.21 PM तक

  • दिशाशूल (Dishashool)– बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – गुलिक 09:30 AM से 11 AM बजे तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)– दिन – 1:30 PM से 3:00 PM तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 06:18
  • सूर्यास्त – सायं 18.36
  • विशेष – अष्टमी को नारियल का सेवन नहीं करना चाहिए, अष्टमी को नारियल का सेवन करने से बुध्दि का नाश होता है  ।
  • शास्त्रों के अनुसार किसी भी पक्ष की नवमी तिथि में लौकी और कद्दू का सेवन नहीं करना चाहिए । 
  • पर्व त्यौहार– नवरात्री का आठवाँ दिन, दुर्गा अष्टमी, जय माँ महा गौरी
  • मुहूर्त (Muhurt) 

अवश्य पढ़ें :- अगर गिरते हो बाल तो ना होएं परेशान तुरंत करें ये उपाय, जानिए बालो का गिरना कैसे रोकें,

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )
9425203501 + 7587346995

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बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang, 25 मार्च 2026 का पंचांग,

बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang, 25 मार्च 2026 का पंचांग,

आप सभी को नवरात्री के सातवें दिन की हार्दिक शुभकामनायें , जय माँ कालरात्रि


बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang, 25 मार्च 2026 का पंचांग,

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पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi) 2:- वार (Day) 3:- नक्षत्र (Nakshatra) 4:- योग (Yog) 5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए बुधवार का पंचांग, Budhvar Ka Panchang, आज का पंचांग, aaj ka panchang,

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आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
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बुधवार का पंचांग (Budhwar Ka Panchang)


25 मार्च 2026 का पंचांग, ( Panchang ), 25 March 2026 ka Panchang,

गणेश गायत्री मंत्र :
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।

।। आज का दिन मंगलमय हो ।।

* दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।

इस बार नवरात्री में माँ दुर्गा अपने इस वाहन पर सवार होकर आएगी और ऐसा रहेगा उसका फल,


बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

इस उपाय से शरीर रहेगा निरोगी, शक्ति रहेगी भरपूर, बुढ़ापा पास भी नहीं आएगा, जानिए रोगनाशक दिव्य आहार,

* बुधवार को सभी ग्रहो के राजकुमार बुध देव की आराधना करने से ज्ञान मिलता है, वाकपटुता में प्रवीणता आती है, धन लाभ होता है ।

बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाने तथा रात को सोते समय फिटकरी से दाँत साफ करने से आर्थिक पक्ष मजबूत होता है ।

नवरात्री में माँ को प्रत्येक दिन इन खाद्य पदार्थों का लगाएं भोग माँ की मिलेगी असीम कृपा, जानिए नवरात्री में माता के प्रत्येक दिन के भोग,

*विक्रम संवत् 2083,
*शक संवत – 1948
*कलि संवत 5128
*अयन – उत्तरायण
*ऋतु – बसंत ऋतु
*मास – चैत्र माह
*पक्ष – शुक्ल पक्ष
*चंद्र बल – मेष, मिथुन, सिंह, कन्या, धनु, मकर,

बुधवार को बुध की होरा :-

प्रात: 6.20 AM से 7.21 AM तक

दोपहर 01.29 PM से 2.30 PM तक

रात्रि 20.32 PM से 21.31 PM तक

बुधवार को बुध की होरा में हाथ की सबसे छोटी उंगली और बुध पर्वत को हल्के हल्के रगड़ते हुए अधिक से अधिक बुध देव के मन्त्र का जाप करें ।

ज्योतिष, पढ़ाई, लिखाई, सीखने, वाकपटुता, अपना प्रभाव डालने और व्यापार में सफलता के लिए बुध की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

बुधवार के दिन बुध की होरा में बुध देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

अवश्य पढ़ें :- पूरे वर्ष निरोगी काया के लिए सर्दियों में सेवन करें ये आहार,

बुध देव के मन्त्र

“ॐ बुं बुधाय नमः” अथवा

“ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।।”

आज इस तरह से मनाये हिन्दू नव संवत्सर पूरे वर्ष मिलेंगे शुभ समाचार,

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  • तिथि (Tithi) – सप्तमी 13.50 PM तक तत्पश्चात अष्टमी,
  • तिथि के स्वामी – सप्तमी तिथि के स्वामी सूर्य देव जी और अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी है ।

नवरात्रि के सातवें दिन देवी दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा- आराधना की जाती है। काल रात्रि का अर्थ है अँधेरी रात, माता काल रात्रि का स्वरूप माँ दुर्गा के 9 स्वरूपों में क्रोध का रूप है ।

मां के माता कालरात्रि के स्वरूप की पूजा करने से सभी तरह के पापो, शत्रुओं, नकारात्मक शक्तियों और काल का नाश होता है। माता कालरात्रि अपने भक्तो की काल से भी रक्षा करने वाली शक्ति है, इनकी पूजा से अकाल मृत्यु का भी भी समाप्त होता है ।

मां का रूप अत्यंत भयानक है एवं बाल सभी दिशाओं में बिखरे हुए हैं। मां कालरात्रि के तीन नेत्र हैं, इनकी सांसों से अग्नि निकलती रहती है और ये गर्दभ की सवारी करती हैं।

माँ काल रात्रि की चार भुजाएं है । माँ के ऊपर उठे हुए दाहिने हाथ की वर मुद्रा भक्तों को वर देती है। दाहिनी तरफ का नीचे वाला हाथ अभय मुद्रा में है जो भक्तों को निर्भय रहने का आशीर्वाद देता है अर्थात माँ कालरात्रि के भक्तो की समस्त संकटो से रक्षा होती है।

वहीँ बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में लोहे का कांटा तथा नीचे वाले हाथ में खड्ग है ।

माता काल रात्रि के गले में बिजली से चमकती हुई विधुत की माला सुशोभित रहती है  ।

 माँ काल रात्रि को लाल गुड़हल का पुष्प अत्यंत प्रिय है, माँ को गुड़हल के पुष्प की माला अर्पित करनी चाहिए  ।  मां को गुड का भोग अर्पित करके पूजा के बाद सबको गुड का प्रसाद वितरित करना चाहिए ।

नवरात्री के सातवें दिन मां कालरात्रि की कृपा के लिए रात्रि में मां कालरात्रि के समक्ष दीपक जलाकर श्वेत या लाल वस्त्र धारण करके माँ की पूजा करें, एवं यहाँ दिए गए मन्त्र की एक माला का जाप करना चाहिए ।

 “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ”    

अथवा

‘ॐ कालरात्र्यै नम:।’

नवरात्री के इस उपाय से मिलेगी सभी कार्यों में श्रेष्ठ सफलता, जानिए नवरात्री के अचूक उपाय 

इस तरह से मनाएं जन्माष्टमी का पर्व जीवन में लग जायेगा सुखो का अम्बार 

नक्षत्र (Nakshatra) – मृगशिरा 17.33 PM तक तत्पश्चात आद्रा

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी-   मृगशिरा नक्षत्र के देवता ‘चंद्र देव’ एवं नक्षत्र स्वामी: ‘मंगळ देव’ जी है ।

नक्षत्रों के गणना क्रम में मृगशिरा नक्षत्र का स्थान पांचवां है। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल होने के कारण इस नक्षत्र में जन्मे जातको पर मंगल का प्रभाव अधिक रहता है। यह नक्षत्र एक हिरण के सिर जैसा प्रतीत होता है।

इस नक्षत्र का आराध्य वृक्ष खैर तथा स्वाभाव शुभ माना जाता है। मृगशिरा नक्षत्र सितारा का लिंग तटस्थ है।

चन्द्रमा का असर होने के कारण इस राशि के जातक कल्पनाशील, भावुक, सौंदर्य प्रेमी, बुद्धिमान, परिश्रमी, उत्साहीऔर ज्ञानवान होते हैं।

लेकिन आप लोगो पर शक बहुत करते है, व्यापार में साझेदारी करने से इन्हे अधिकतर नुकसान ही उठाना पड़ता है । इस नक्षत्र में जन्मी स्त्रियाँ हंसमुख, धनवान, जीवन साथी के प्रति समर्पित लेकिन उस पर हावी रहती है ।

मृगशिरा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 9, भाग्यशाली रंग, चमकीला भूरा, कत्थई रंग,  भाग्यशाली दिन मंगलवार तथा गुरुवार का माना जाता है ।

मृगशिरा नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ चन्द्रमसे नम:” मन्त्र की एक माला का जाप करना चाहिए ।

मॄगशिरा नक्षत्र के जातको को माँ पार्वती की आराधना अत्यंत शुभ फलदाई है ।  मॄगशिरा नक्षत्र के दिन चावल और दही के दान से भी इस नक्षत्र के अशुभ फलो को दूर किया जा सकता है ।

जरूर पढ़े :- नवरात्री में माँ दुर्गा की स्वरूप कन्याओं की इस तरह से करें पूजा, अवश्य जानिए नवरात्री में कन्या पूजन की सही विधि,

अवश्य पढ़ें :- चाहिए परिवार में सुख-समृद्धि, प्रेम और आरोग्य तो ऐसा होना चाहिए किचन का वास्तु, जानिए किचन के वास्तु टिप्स 

  • योग (Yog) – सौभाग्य 03.09 AM गुरुवार 26 मार्च तक
  • योग के स्वामी, स्वभाव :-    सौभाग्य योग के स्वामी ब्रह्मा जी एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है । 
  • प्रथम करण : – वणिज 13.50 PM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-   वणिज करण की स्वामी लक्ष्मी देवी और स्वभाव सौम्य है ।
  • दिशाशूल (Dishashool)- बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।

    इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – बुधवार का गुलिक काल 10:30 AM से 12 PM बजे तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal) : – बुधवार का राहुकाल दिन 12:00 PM से 1:30 PM तक ।
  • सूर्योदय – प्रातः 6.20 AM
  • सूर्यास्त – सायं 18.35 PM
  • विशेष – सप्तमी को ताड़ का सेवन नहीं करना चाहिए  । इस दिन ताड़ का सेवन करने से रोग लगते है ।
  • अष्टमी को नारियल का सेवन नहीं करना चाहिए, अष्टमी को नारियल का सेवन करने से बुध्दि का नाश होता है  । 
  • मुहूर्त :- नवरात्री का सातवां दिन, जय माँ कालरात्रि
  • पर्व त्यौहार – चैत्र माह की अमावस्या

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हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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अवश्य जानिए :- नैत्रत्यमुखी भवन के वास्तु के अचूक उपाय, 

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )
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मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang, 24 मार्च 2026 का पंचांग,

मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang, 24 मार्च 2026 का पंचांग,

आप सभी को नवरात्री के छठे दिन की हार्दिक शुभकामनायें , जय माँ कात्यायनी


मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang,

Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)




पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए मंगलवार का पंचांग (Mangalvar Ka Panchang)।

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

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हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।

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।। आज का दिन मंगलमय हो ।।

*विक्रम संवत् 2083,
*शक संवत – 194
3
*कलि सम्वत 5128
*अयन – 
उत्तरायण
*ऋतु – बसंत
 ऋतु
*मास –
 चैत्र माह,
*पक्ष – शुक्ल पक्ष
*चंद्र बल – वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु , मीन,

मंगलवार को मंगल की होरा :-

प्रात: 6.21 AM से 7.22 AM तक

दोपहर 01.29 PM से 2.30 PM तक

रात्रि 20.32 PM से 21.31 PM तक

मंगलवार को मंगल की होरा में हाथ की निम्न मंगल पर दो बूंद सरसो का तेल लगा कर उसे हल्के हल्के रगड़ते हुए अधिक से अधिक मंगल देव के मन्त्र का जाप करें ।

कृषि, भूमि, भवन, इंजीनियरिंग, खेलो, साहस, आत्मविश्वास

और भाई के लिए मंगल की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

मंगलवार के दिन मंगल की होरा में मंगल देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में मंगल मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

मंगल देव के मन्त्र

ॐ अं अंगारकाय नम: अथवा

ॐ भौं भौमाय नम:”

जरूर पढ़े :-  जीवन में समस्त संकटो को दूर करने, सफलता का द्वार खोलने के लिए नवरात्री के मंगलवार को अवश्य ही करें ये उपाय,

तिथि :- षष्टी 16.07 PM तक तत्पश्चात सप्तमी,

तिथि के स्वामी :- षष्टी तिथि के स्वामी भगवान कार्तिकेय जी और सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देव जी है ।

नवरात्रि का छठा दिन मां कात्यायनी को समर्पित है। मां कात्यायनी महर्षि कात्यायन की पुत्री के रूप में जानी जाती हैं।

 मां कात्यायनी ने महिषासुर नाम के असुर का वध किया था, जिस कारण मां कात्यायनी को असुरों और पापियों का संहार करने वाली देवी कहा जाता है। इनकी सवारी सिंह है।

मां कात्यायनी की चार भुजा हैं इनके एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में कमल तथा अन्य दोनों हाथों में वरमुद्रा और अभयमुद्रा है।

माता कात्यायनी की पूजा से विवाह में हो रही बाधाएं दूर होती है, देवगुरु बृहस्पति प्रसन्न होते हैं और कन्याओं को अच्छा मिलने के योग बनते हैं, दाम्पत्य जीवन में प्रेम और सहयोग बनता है।

मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए गोपियों ने माता कात्यायनी की पूजा की थी।

मां कात्यायनी की पूजा माता को लाल या पीले फूल, कच्‍ची हल्‍दी की गांठ एवं चांदी के या मिटटी के पात्र में शहद अर्पित करके, शहद का भोग लगाकर शाम को गोधुलि बेला में करनी चाहिए।

नवरात्रि के छठवें दिन अपनी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए गोबर के कंडे जलाकर माँ कात्यायनी के मंत्रो का जाप करते हुए उस पर लौंग व कपूर की आहुति दें।

नवरात्री के छठे दिन भक्तो को यहाँ दिए गए मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।

।।ॐ ह्रीं कात्यायन्यै स्वाहा ।।

अवश्य पढ़ें :- चाहिए परिवार में सुख-समृद्धि, प्रेम और आरोग्य तो ऐसा होना चाहिए किचन का वास्तु, जानिए किचन के वास्तु टिप्स,

अवश्य जानें कैसे हुआ गणेश जी का अवतरण, कैसे गणेश जी का सर हाथी के सर में बदल गया, कैसे गणपति जी कहलाएं भगवान गजानन

  • नक्षत्र (Nakshatra) – रोहिणी 19.04 PM तक तत्पश्चात मृगशिरा
  • नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी –  रोहिणी नक्षत्र के देवता ब्रम्हा और स्वामी चंद्र देव जी है ।

रोहिणी नक्षत्र, नक्षत्रों के क्रम में चौथे स्थान पर है तथा चंद्रमा का केंद्र माना जाता है। ‘रोहिणी’ का अर्थ ‘लाल’ होता है। इसे आकाश में सबसे चमकीले सितारों में से एक माना जाता है।

 यह 5 तारों का समूह है, जो धरती से किसी भूसा गाड़ी की तरह दिखाई देता है।

रोहिणी नक्षत्र का आराध्य वृक्ष जामुन और स्वभाव शुभ माना गया है ।

 पुराण कथा के अनुसार रोहिणी चंद्र की सत्ताईस पत्नियों में सबसे सुंदर, तेजस्वी, सुंदर वस्त्र धारण करने वाली है। ज्यों-ज्यों चंद्र रोहिणी के पास जाता है, त्यों-त्यों उसका रूप अधिक खिल उठता है।

इस नक्षत्र के जातक पतले, मिलनसार, दृढ़ निश्चयी, बुद्धिशाली, यशवान, ललित कलाओं के प्रेमी, ईश्वर में आस्था रखने वाले, किन्तु झूठ बोलने वाले, स्वार्थी होते है।

रोहिणी नक्षत्र में जन्मी स्त्रियाँ सुंदर, भाग्यशाली, पति से प्रेम करने वाली, माता-पिता की आज्ञाकारी, योग्य संतान वाली और ऐश्वर्यवान होती है।

रोहिणी नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 1, 2, 3, 6 और 9, भाग्यशाली रंग सफेद, पीला और नीला तथा भाग्यशाली दिन शनिवार, शुक्रवार और बुधवार है।

आज रोहिणी नक्षत्र के बीज मंत्र “ऊँ ऋं ऊँ लृं” अथवा “ॐ रौहिण्यै नमः”  l  का 108 बार जाप करें इससे रोहिणी नक्षत्र को बल मिलेगा।  

रोहिणी नक्षत्र में घी, दूध, का दान करना चाहिए।

  • योग :- प्रीति 09.07 AM तक तत्पश्चात आयुष्मान
  • योग के स्वामी :-  प्रीति  योग के स्वामी विष्णु एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है ।
  • प्रथम करण : – तैतिल 16.07 PM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-   तैतिल करण के स्वामी विश्वकर्मा जी और स्वभाव सौम्य है ।
  • द्वितीय करण : – गर 02.07 AM बुधवार 25 मार्च तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-      गर करण के स्वामी भूमि तथा स्वभाव सौम्य है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 04.46 AM से 5.34 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.30 PM से 15.19 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.33 PM से 18.57 PM तक
  • अमृत काल : 16.06 PM से 17.35 AM तक
  • दिशाशूल (Dishashool)- मंगलवार को उत्तर दिशा का दिकशूल होता है।

    यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से गुड़ खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – दोपहर 12:00 से 01:30 तक है ।
  • राहुकाल (Rahukaal) दिन – 3:00 से 4:30 तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 06:21
  • सूर्यास्त – सायं 18:34
  • विशेष – षष्ठी के दिन नीम की पत्ती खाना, दातुन करना या किसी भी तरह से  नीम का सेवन नहीं करना चाहिए । इस दिन नीम का सेवन करने से नीच योनि की प्राप्ति होती है।

    सप्तमी को ताड़ का सेवन नहीं करना चाहिए  । इस दिन ताड़ का सेवन करने से रोग लगते है ।
  • पर्व – त्यौहार- नवरात्री का छठा दिन, जय माँ कात्यायनी

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
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पंचांग, Panchang,सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang, 23 मार्च 2026 का पंचांग,


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सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang, 23 मार्च 2026 का पंचांग, 23 March 2026 ka Panchang,

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Panchang, पंचाग, आज का पंचांग, aaj ka panchang, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए, सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang।

सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang,

23 मार्च 2026 का पंचांग, 23 March 2026 ka Panchang,

महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।

  • दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।

    सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।

सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।

जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।

सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।

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*विक्रम संवत् – 2083,
* शक संवत – 1948,
*कलि संवत – 5128
*कलयुग – 5128 वर्ष
* अयन – उत्तरायण,
* ऋतु – बसंत ऋतु,
* मास – चैत्र माह,
* पक्ष – शुक्ल पक्ष
*चंद्र बल – वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन,

सोमवार को चन्द्रमा की होरा :-

प्रात: 6.22 AM से 7.23 AM तक

दोपहर 01.29 PM से 2.30 PM तक

रात्रि 8.31 PM से 9.31 PM तक

सोमवार को चन्द्रमा की होरा में अधिक से अधिक चन्द्र देव के मन्त्र का जाप करें। यात्रा, प्रेम, प्रसन्नता, कला सम्बन्धी कार्यो के लिए चन्द्रमा की होरा अति उत्तम मानी जाती है।

सोमवार के दिन चन्द्रमा की होरा में चंद्रदेव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में चंद्र देव मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

चन्द्रमा के मन्त्र

ॐ सों सोमाय नम:।

ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम: ।

  • तिथि (Tithi) – पंचमी 18.38 PM तक तत्पश्चात षष्टी,
  • तिथि का स्वामी – पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता जी और षष्टी तिथि के स्वामी भगवान कार्तिकेय जी है ।
     
  • शारदीय नवरात्रि का पांचवा दिन सुख और शांति की देवी मां स्कंदमाता को समर्पित है। स्कंदमाता की पूजा करने से भगवान कार्तिकेय की भी कृपा मिलती हैं ।
  • भगवान स्कंद, शंकर जी और पार्वती के दूसरे और छह मुख वाले पुत्र कार्तिकेय जी का एक नाम है ।
  • ऐसी मान्यता है कि स्कंदमाता की पूजा करने से संकट और शत्रुओं का नाश होता है, मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं। मां स्कंदमाता की 4 भुजाएं हैं, तथा मां का आसन कमल है।
  • ये दाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं। दूसरी व चौथी भुजा में कमल का फूल, तीसरी भुजा से माँ अपने भक्तो को आशीर्वाद देती है।
  • क्योंकि स्कंदमाता सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं इसलिये इनके चारों ओर सूर्य के जैसा ही अलौकिक तेज दिखाई देता है। सदैव कमल के आसन पर स्थित रहने के कारण स्कंदमाता को देवी पद्मासना भी कहा जाता है।
  • मां स्कंदमाता को केले का भोग अति प्रिय है। इसके साथ ही इन्हें केसर डालकर खीर का प्रसाद भी चढ़ाएं। माँ को इलाइची का भोग भी अत्यंत प्रिय है, स्कंदमाता को कमल का पुष्प अति प्रिय है ।
  • नवरात्री के पाँचवे दिन मां स्कंदमाता की कृपा के लिए यहाँ दिए गए मन्त्र की एक माला का जाप करना चाहिए ।
  • ॐ देवी स्कन्दमातायै नम:॥
  • या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता.
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥


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नक्षत्र (Nakshatra) – कृतिका 20.49 PM तक तत्पश्चात रोहिणी

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी-      कृतिका नक्षत्र के देवता अग्नि देव और स्वामी सूर्य देव जी है ।  

कृत्तिका नक्षत्र आकाश मंडल में तीसरा नक्षत्र है जो सात सितारों के एक समूह,आग को दर्शाता है और इसे शक्ति और ऊर्जा का अंतिम स्रोत माना जाता है। यह नक्षत्र भगवान अग्नि देव द्वारा शासित है ।

 कृत्तिका नक्षत्र स्टार का लिंग मादा है। कृतिका नक्षत्र का तत्व अग्नी, आराध्य वृक्ष उंबर, औदुंबर और नक्षत्र स्वभाव क्रूर माना गया है ।

कृतिका नक्षत्र में जन्मे जातक तेजस्वी, सुन्दर, महत्वाकांक्षी, गुणवान, आत्मवश्वासी एवं धर्म पर पूर्ण विश्वास रखने वाले होते हैं।

कृतिका नक्षत्र में जन्म लेने वाला व्यक्ति विलासता जीवन जीने में विश्वास रखता हैं। यह बड़ी ही आसानी से विपरीत लिंग को आकर्षित कर लेते हैं। इनका वैवाहिक जीवन सुखमय होता है।

इनकी सबसे बड़ी कमजोरी इनका जिद्दीपन है और यह कई बार बहुत ही जल्दी लड़ने पर भी उतारू हो जाते है ।

कृत्तिका नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 1, 2, 3 और 9, भाग्यशाली रंग पीला और लाल , भाग्यशाली दिन मंगलवार और रविवार होता है ।

कृतिका नक्षत्र में जन्मे जातको को नित्य तथा अन्य सभी को आज गायत्री मन्त्र  “ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्॥” मन्त्र की एक माला का जाप करना चाहिए इससे जीवन की सभी बाधाएं दूर होती है।

कृत्तिका नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातको को  गूलर के पेड़ की पूजा करनी चाहिए और अपने  घर अथवा मंदिर में गूलर के पेड को लगाकर उसकी सेवा करनी चाहिए ।

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  • योग – विष्वकंभ 12.22 PM एक तत्पश्चात प्रीति

  • योग के स्वामी :- विष्कम्भ योग के स्वामी यम एवं स्वभाव हानिकारक है ।
  • प्रथम करण : – बव 07.56 AM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-      बव करण के स्वामी इंद्र देव और स्वभाव सौम्य है ।

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  • द्वितीय करण : – बालव 18.38 PM तक तत्पश्चात कौलव
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-  बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.47 AM से 5.35 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.30 PM से 15.18 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.33 PM से 16.56 PM तक
  • अमृत काल : 18.37 PM से 20.05 PM तक
  • विशेष – पंचमी तिथि को बेल का सेवन नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि पंचमी को बेल का सेवन करने से अपयश मिलता है।
  • पंचमी तिथि को कर्ज भी नहीं देना चाहिए, पंचमी को कर्ज देने से धन डूब जाता है तथा धन के आगमन में भी रुकावटें आने लगती है ।
  • पर्व त्यौहार- नवरात्री का पांचवा दिन, जय माँ स्कन्द माता
  • मुहूर्त (Muhurt) –

“हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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आप पर ईश्वर की असीम अनुकम्पा की वर्षा होती रहे ।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )
9425203501 +7587346995
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