बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang, 16 सितम्बर 2026 का पंचांग,

 बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang, 16 सितम्बर 2026 का पंचांग



बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang, 16 सितम्बर 2026 का पंचांग,

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पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi) 2:- वार (Day) 3:- नक्षत्र (Nakshatra) 4:- योग (Yog) 5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए बुधवार का पंचांग, Budhvar Ka Panchang, आज का पंचांग, aaj ka panchang,


बुधवार का पंचांग (Budhwar Ka Panchang)


16 सितम्बर 2026 का पंचांग, ( Panchang ), 16 September 2026 ka Panchang,

गणेश गायत्री मंत्र :
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।

।। आज का दिन मंगलमय हो ।।

* दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।

जीवन में कोई भी मनोकामना हो हनुमान जी के जन्मोत्सव के दिन अवश्य ही करें ये उपाय,


मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है, अगर आप भी पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद

बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

इस उपाय से शरीर रहेगा निरोगी, शक्ति रहेगी भरपूर, बुढ़ापा पास भी नहीं आएगा, जानिए रोगनाशक दिव्य आहार,

* बुधवार को सभी ग्रहो के राजकुमार बुध देव की आराधना करने से ज्ञान मिलता है, वाकपटुता में प्रवीणता आती है, धन लाभ होता है ।

बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाने तथा रात को सोते समय फिटकरी से दाँत साफ करने से आर्थिक पक्ष मजबूत होता है ।

जानिए बजरंग बलि के परिवार के बारे में, अवश्य जानिए हनुमान जी के माता पिता और उनके भाइयों के बारे में,

*विक्रम संवत् – 2083,
*शक संवत – 1948
*कलि संवत – 5128
*अयन – दक्षिणयायन
*ऋतु – वर्षा ऋतु
*मास – भाद्रपद माह
*पक्ष – शुक्ल पक्ष
*चंद्र बल – वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुम्भ,

बुधवार को बुध की होरा :-

प्रात: 06.06 AM से 7.08 AM तक

दोपहर 01.17 PM से 2.19 PM तक

रात्रि 20.22 PM से 21.21 PM तक

बुधवार को बुध की होरा में हाथ की सबसे छोटी उंगली और बुध पर्वत को हल्के हल्के रगड़ते हुए अधिक से अधिक बुध देव के मन्त्र का जाप करें ।

ज्योतिष, पढ़ाई, लिखाई, सीखने, वाकपटुता, अपना प्रभाव डालने और व्यापार में सफलता के लिए बुध की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

बुधवार के दिन बुध की होरा में बुध देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

अवश्य पढ़ें :- पूरे वर्ष निरोगी काया के लिए सर्दियों में सेवन करें ये आहार,

आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,भारत की लगभग 150 करोड़ की आबादी में 0.001 % अर्थात लगभग 15 हज़ार आदमी ही नित्य पंचांग पढ़ पाते है।

आप पर ईश्वर की असीम कृपा है जो आपको नित्य पंचांग पढ़ने का, अपने भाग्य को प्रबल करने का, पापो के प्रायश्चित करने का अवसर मिल रहा है,

दुनिया के सारे उपाय एक तरफ है, और नित्य पंचाग पढ़ने का पुण्य उससे भी कहीं अधिक है,

इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है ।

बुध देव के मन्त्र

“ॐ बुं बुधाय नमः” अथवा

“ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।।”

अवश्य जानिए कैसे और किससे हुआ हनुमान जी का विवाह, इनकी पुत्री है हनुमान जी की पत्नी,

  • तिथि (Tithi) – पंचमी 08.59 AM तक तत्पश्चात षष्टी,
  • तिथि के स्वामी – पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता जी और षष्टी तिथि के स्वामी भगवान कार्तिकेय जी है । 

पञ्चमी तिथि के स्वामी नाग देवता और षष्टी तिथि के स्वामी भगवान शंकर के पुत्र भगवान कार्तिकेय जी है।

पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता है। पंचमी तिथि को नाग देवता की पूजा करने से काल सर्प दोष दूर होता है, नाग के काटने का भय नहीं रहता है ।

पंचमी तिथि के समय भगवान शिव का पूजन शुभ माना गया है, मान्यता है कि भगवान शिव कैलाश में निवास करते हैं। पंचमी तिथि को शिवलिंग का जिस पर नाग बना हो दूध या पंचामृत से अभिषेक करने से नाग देवता प्रसन्न होते है।

पंचमी जब शनिवार के दिन होती है, तो वह मृत्युदा योग बनाती है। यह अशुभ योग माना गया है।

जब पंचमी तिथि गुरुवार के दिन होती है तो बहुत ही शुभ सिद्धिदा योग बनता है। शास्त्रों के अनुसार सिद्धिदा योग में किए गए कार्य श्रेष्ठ फल प्रदान करते है।

प्रत्येक पंचमी के दिन नागो के अति पवित्र और पुण्यदायक नामो 1. अनंत (शेषनाग ), 2. वासुकि, 3. तक्षक, 4. कर्कोटक, 5. पद्म, 6. महापद्म, 7. शंख, 8. कुलिक, 9. धृतराष्ट्र और 10. कालिया का उच्चारण करने से काल सर्प दोष दूर होता है, कोई भी भय निकट नहीं रहता है, बल और साहस की प्राप्ति होती है ।

पंचमी को नागो के पौराणिक नाम “अनंत, वासुकि, तक्षक, कर्कोटल, पिंगल” का कम से कम 11 बार उच्चारण अवश्य ही करें।

हिन्दू पंचांग के अनुसार पंचमी  तिथि को  बसंत पंचमी,  रंग पंचमी, विवाह पंचमी, नाग पंचमी, ऋषि पंचमी, लाभ पंचमी  /  सौभाग्य पंचमी आदि कई शुभ पर्व आते है ।

पंचमी तिथि पूर्णा तिथियों की श्रेणी में आती है, इस तिथि में समस्त शुभ कार्य सिद्ध होते हैं, किन्तु पंचमी तिथि को कर्ज नहीं देना चाहिए।  

पंचमी को बेल खाना निषेध है, मान्यता है कि पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है।  

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इस तरह से मनाएं जन्माष्टमी का पर्व जीवन में लग जायेगा सुखो का अम्बार 

नक्षत्र (Nakshatra) – विशाखा 17.22 PM तक तत्पश्चात अनुराधा

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी-      विशाखा नक्षत्र के देवता इंद्राग्नी ( इंद्र और अग्नि ) और स्वामी बृहस्पति देव जी है ।

 विशाखा नक्षत्र, नक्षत्र मंडल में उपस्थित 27 नक्षत्रों में 16वां है।

विशाखा नक्षत्र देवी राधा के साथ सम्बंधित है जो उनकी प्रसन्नता को दर्शाता है, भगवान श्री कृष्ण के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता है।

विशाखा नक्षत्र वास्तव में पत्तियों से सजाया गया एक तोरण द्वार का प्रतीक है, जिसका मुख्य रूप से विवाह समारोहों में आवश्यकता है।

इस नक्षत्र का आराध्य वृक्ष : कटाई, नागकेशर तथा स्वाभाव अशुभ माना गया है। विशाखा नक्षत्र सितारे का लिंग महिला है।

इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक पर जीवन भर बृहस्पति देव जी का प्रभाव बना रहता है।

विशाखा नक्षत्र वालो को कभी धन की कमी नहीं सताती, या धन की परेशानी हो भी तो अधिक समय तक नहीं रहती।  विशाखा नक्षत्र वाले लोग बहुत भाग्यवान होते हैं।

विशाखा नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्तियों में अपने परिवार के प्रति विशेष लगाव रहता है। इन्हे एकल परिवार की बजाय संयुक्त परिवार में रहना ज्यादा पसंद होता है ।

विशाखा नक्षत्र वाले जातको के लिए भाग्यशाली संख्या 3 और 9,  भाग्यशाली रंग, सुनहरा,  भाग्यशाली दिन  मंगलवार, शुक्रवार और गुरुवार माना जाता है ।

विशाखा नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ इंद्राग्नीभ्यां नमः” अथवा “ॐ विशाखाभ्यां नमः”। मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।

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  • योग (Yog) – वैधृति 12.23 PM तक तत्पश्चात विष्कम्भ
  • योग के स्वामी, स्वभाव :-    वैधृति योग के स्वामी दिति और स्वभाव हानिकारक है   ।
  • प्रथम करण : – बालव 08.59 AM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :- बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।
  • द्वितीय करण : – कौलव 21.49 PM तक तत्पश्चात तैतिल
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-    कौलव करण के स्वामी मित्र और स्वभाव सौम्य है ।

  • ब्रह्म मुहूर्त : 04.33 AM से 5.20 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.19 PM से 15.08 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.25 PM से 18.49 PM तक
  • अमृत काल : 07.50 AM से 09.34 AM तक

  • अग्निवास : पाताल में 08.59 AM तक तत्पश्चात पृथ्वी पर


     जब पाताल में अग्नि वास है तो वह हवन से सम्बन्धित अनुष्ठानों के लिये शुभ नहीं मानी जाती है, यह अशुभ मानी गई है । अग्नि के पाताल  वास के दौरान किये जाने वाले हवन  सम्बन्धित अनुष्ठानों व्यक्ति को आर्थिक नुकसान करना पड़ता है उसका  धन नष्ट हो सकता है।

    अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।


  • शिव वास : कैलाश में 8.29 AM तक तत्पश्चात नंदी पर


    शिव वास कैलाश पर:-  जब भगवान भोलेनाथ जी कैलाश पर होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार  भगवान शंकर जी के  कैलाश पर्वत पर रहने के दौरान रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सुखो की प्राप्ति होती है।

    शिव वास नन्दी जी पर :–  जब भगवान भोलेनाथ नन्दी जी पर विराजमान होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना सदैव बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों केअनुसार भगवान शंकर जी के नन्दी पर विराजमान के समय रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सफलता, शुभ समाचारो की प्राप्ति  होती है।



    इन उपायों से धन संपत्ति खींची चली आएगी, किसी चीज़ का नहीं रहेगा अभाव
  • दिशाशूल (Dishashool)- बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।

    इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – बुधवार का गुलिक काल 10:30 AM से 12 PM बजे तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal) : – बुधवार का राहुकाल दिन 12:00 PM से 1:30 PM तक ।
  • सूर्योदय – प्रातः 6.06 AM
  • सूर्यास्त – सायं 18.25 PM
  • विशेष – पंचमी तिथि को बेल का सेवन नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि पंचमी को बेल का सेवन करने से अपयश मिलता है।
  • पंचमी तिथि को कर्ज भी नहीं देना चाहिए, पंचमी को कर्ज देने से धन डूब जाता है तथा धन के आगमन में भी रुकावटें आने लगती है ।
  • षष्ठी के दिन नीम की पत्ती खाना, दातुन करना या किसी भी तरह से  नीम का सेवन नहीं करना चाहिए । इस दिन नीम का सेवन करने से नीच योनि की प्राप्ति होती है।
  • मुहूर्त :-
  • पर्व त्यौहार

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हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

मित्रो हम इस साईट के माध्यम से वर्ष 2010 से निरंतर आप लोगो के साथ जुड़े है। आप भारत या विश्व के किसी भी स्थान पर रहते है, अपने धर्म अपनी संस्कृति को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए www.memorymuseum.net के साथ अवश्य जुड़ें, हमारा सहयोग करें ।

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।

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### ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय*
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मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang, 15 सितम्बर 2026 का पंचांग,

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मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang,

Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)




पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए मंगलवार का पंचांग (Mangalvar Ka Panchang)।

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

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हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।

मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

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आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद


।। आज का दिन मंगलमय हो ।।

  • दिन (वार) – मंगलवार Mangalwar के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।

    मंगलवार Mangalwar को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।

    मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।

    नवरात्री में घर, कारोबार में इस विधि से करें कलश की स्थापना, अवश्य जानिए कलश स्थापना की सही और बहुत ही आसान विधि,

    मंगलवार के व्रत से सुयोग्‍य संतान की प्राप्ति होती है, बल, साहस और सम्मान में भी वृद्धि होती है।

    मंगलवार को धरती पुत्र मंगलदेव की आराधना करने से जातक को मुक़दमे, राजद्वार में सफलता मिलती है, उत्तम भूमि, भवन का सुख मिलता है, मांगलिक दोष दूर होता है।


    जीवन में समस्त संकटो को दूर करने, सफलता का द्वार खोलने के लिए नवरात्री के मंगलवार को अवश्य ही करें ये उपाय

    आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,
  • इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । नित्य पंचांग को पढ़ने से देवताओं का आशीर्वाद मिलता है, पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है ।

*विक्रम संवत्- 2083,
*शक संवत – 1948

*कलि सम्वत – 5128
*अयन –
दक्षिणायण
*ऋतु –
वर्षा ऋतु
*मास –
भाद्रपद माह,
*पक्ष – शुक्ल पक्ष
*चंद्र बल – मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, मकर,

मंगलवार को मंगल की होरा :-

प्रात: 06.06 AM से 7.08 AM तक

दोपहर 01.18 PM से 2.20 PM तक

रात्रि 20.23 PM से 21.21 PM तक

मंगलवार को मंगल की होरा में हाथ की निम्न मंगल पर दो बूंद सरसो का तेल लगा कर उसे हल्के हल्के रगड़ते हुए अधिक से अधिक मंगल देव के मन्त्र का जाप करें ।

कृषि, भूमि, भवन, इंजीनियरिंग, खेलो, साहस, आत्मविश्वास

और भाई के लिए मंगल की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

मंगलवार के दिन मंगल की होरा में मंगल देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में मंगल मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

गुरु पूर्णिमा पर इस मन्त्र का अवश्य ही करें जाप, जानिए गुरु पूर्णिमा का उपाय,

मंगल देव के मन्त्र

ॐ अं अंगारकाय नम: अथवा

ॐ भौं भौमाय नम:”

जरूर पढ़े :-  जीवन में समस्त संकटो को दूर करने, सफलता का द्वार खोलने के लिए नवरात्री के मंगलवार को अवश्य ही करें ये उपाय,

तिथि :- चतुर्थी 07.44 AM तक तत्पश्चात पंचमी ,

तिथि के स्वामी :- चतुर्थी तिथि के स्वामी विघ्हर्ता गणेश जी और पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता जी है ।

आज चतुर्थी तिथि है । चतुर्थी तिथि के स्वामी देवताओं में प्रथम पूज्य, भगवान शिव और माता पार्वती के सबसे छोटे पुत्र भगवान गणेश जी माने गए हैं ।

हिन्दू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नविनाशक, बुद्धि के अधिपति और शुभारंभ के देवता के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। गणेश जी की उपासना के लिए चतुर्थी तिथि विशेष मानी जाती है। मान्यता है कि किसी भी कार्य के प्रारम्भ में विघ्हर्ता की पूजा आराधना करने से सभी ग्रह दोष शांत होते है ।

नारद महापुराण के अध्याय 113 में चतुर्थी के व्रत और पूजा का वर्णन दिया गया है। कि जिस प्रकार पक्ष की तृतीया तिथि देवी से संबंधित मानी गई है, उसी प्रकार पक्ष की चतुर्थी भगवान गणपति गणेश जी को समर्पित है।

शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी और मंगलवार को पड़ने वाली चतुर्थी को अंगारक चतुर्थी कहते है, लेकिन भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का अलग ही महत्त्व है, इस दिन गणपति जी का अवतरण दिवस माना जाता है ।

चतुर्थी को गणपित जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके, लड्डुओं या गुड़ का भोग लगाकर “ॐ गण गणपतये नम:” मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करें ।

गणेश जी को मोदक / लड्डू, लाल रंग के फूल, दुर्वा (दूब), शमी-पत्र, और केला अति प्रिय है, बुधवार और चतुर्थी को गजानन को यह वस्तुएं अर्पित करने से जीवन में शुभ समय आता है ।

चतुर्थी को गणेश जी की आराधना से किसी भी कार्य में विघ्न नहीं आते है, कार्यो में श्रेष्ठ सफलता मिलती है ।

चतुर्थी को गणेश जी के परिवार के सदस्यों के नामो का स्मरण, उच्चारण करने से भाग्य चमकता है, शुभ समय आता है 

यदि चतुर्थी तिथि यदि गुरुवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है, इस समय में शुभ कार्य करना वर्जित है।

लेकिन यदि चतुर्थी तिथि शनिवार को होती है तो वह सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय में किया गया कार्य सिद्ध होता है।

किसी भी पक्ष की चतुर्थी तिथि में मूली और बैंगन का सेवन करना मना है। चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है, और चतुर्थी को बैगन खाने से रोग बढ़ते है  ।

अवश्य पढ़ें :- चाहिए परिवार में सुख-समृद्धि, प्रेम और आरोग्य तो ऐसा होना चाहिए किचन का वास्तु, जानिए किचन के वास्तु टिप्स,

अवश्य जानें कैसे हुआ गणेश जी का अवतरण, कैसे गणेश जी का सर हाथी के सर में बदल गया, कैसे गणपति जी कहलाएं भगवान गजानन

  • नक्षत्र (Nakshatra) – स्वाति 15.21 PM तक तत्पश्चात विशाखा,
  • नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी – स्वाति नक्षत्र के देवता वायु और सरस्वती जी और स्वामी राहु जी है । 

 स्वाति नक्षत्र, नक्षत्र मंडल में उपस्थित 27 नक्षत्रों में 15वां है। स्वाति नक्षत्र राहु का दूसरा नक्षत्र है। स्वाति नक्षत्र के देवता पवन देव हैं।  स्वाति नक्षत्र का संबंध विद्या की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती से भी है।

स्वाति नक्षत्र ‘शुद्धता’,  ‘स्वतंत्रता’ को दर्शाता है ।  यह अत्यंत शुद्ध और पवित्र बारिश की पहली बूंद का भी प्रतीक है ।

स्वाति नक्षत्र के पानी का महत्व ज्यादा होता है। इसकी एक बूंद से पपैया पक्षी अपनी प्यास बुझा लेता है। केले के पत्ते पर जल की बूंद गिरने से कपूर बनता है। इसी जल की बूंद समुद्र में गिरने से मोती बनता है।

इस नक्षत्र का आराध्य वृक्ष : अर्जुन तथा स्वाभाव शुभ माना गया है। स्वाति नक्षत्र सितारे का लिंग महिला है।

इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक पर जीवन भर शुक्र एवं राहु ग्रह का प्रभाव बना रहता है।

इस नक्षत्र में जन्मा जातक धार्मिक, लोकप्रिय, बुद्धिमान, चतुर, परिश्रमी, अनुशासित, आध्यात्मिक होता हैं, सामन्यता इन्हे भूमि, भवन और पूर्ण सुख मिलता है।

लेकिन यदि शुक्र ख़राब हो तो जातक क्रोधी, घमंडी, अति कामुक, मदिरा प्रेमी होता है उसको धन और स्त्री का सुख भी नहीं मिलता है ।

स्वाति नक्षत्र में पैदा हुई स्त्री सुन्दर, मिलनसार, धार्मिक, दयालु,  दूसरो को जल्द प्रभावित करने वाली होती हैं। इनका पारिवारिक दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।

स्वाति नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 4 और 6,  भाग्यशाली रंग, गहरा भूरा, काला,  भाग्यशाली दिन  शनिवार, सोमवार और मंगलवार माना जाता है ।

स्वाति नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को वायु देव के  “ॐ वायवे नमः”। मन्त्र माला का जाप अवश्य करना चाहिए, इससे जीवन में श्रेष्ठ सफलता मिलती है  ।


  • योग :- इंद्र 12.20 PM तक तत्पश्चात वैधृति
  • योग केस्वामी:-      इंद्र योग के स्वामी पितृ देव जी एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है ।
  • प्रथम करण : – विष्टि 07.44 AM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :- विष्टि करण के स्वामी यम और स्वभाव क्रूर है ।
  • द्वितीय करण : – बव 20.17 PM तक तत्पश्चात बालव
  • करण के स्वामी, स्वभाव :- बव करण के स्वामी इंद्र देव और स्वभाव सौम्य ह ।।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 04.33 AM से 5.19 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.20 PM से 15.09 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.26 PM से 18.50 PM तक
  • अमृत काल : 10.40 AM से 12.10 PM तक

  • शिव वास :- क्रीड़ा में 07.44 AM तक तत्पश्चात कैलाश पर

  • जब भगवान शंकर जी क्रीड़ा में होते हैं, तो उस समय भी रुद्र अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान भोलेनाथ जी के कार्य अथवा क्रीड़ा के समय रूद्र अभिषेक करने से जीवन में तरह तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।  

  • शिव वास :-  जब भगवान भोलेनाथ जी कैलाश पर होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार  भगवान शंकर जी के  कैलाश पर्वत पर रहने के दौरान रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सुखो की प्राप्ति होती है।

  • अग्नि वास : पृथ्वी पर 07.44 AM तक तत्पश्चात आकाश पर

    अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।

    अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।
  • दिशाशूल (Dishashool)- मंगलवार को उत्तर दिशा का दिकशूल होता है।

    यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से गुड़ खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – दोपहर 12:00 से 01:30 तक है ।
  • राहुकाल (Rahukaal) दिन – 3:00 से 4:30 तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 06:06
  • सूर्यास्त – सायं 18:26
  • विशेष – चतुर्थी को मूली का सेवन नहीं करना चाहिए, चतुर्थी को मूली का सेवन करने से धन का नाश होता है   ।
  • पंचमी तिथि को बेल का सेवन नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि पंचमी को बेल का सेवन करने से अपयश मिलता है।
  • पंचमी तिथि को कर्ज भी नहीं देना चाहिए, पंचमी को कर्ज देने से धन डूब जाता है तथा धन के आगमन में भी रुकावटें आने लगती है ।
  • पर्व – त्यौहार-

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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 ### ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय*
## ( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ)
### *अध्यात्म ज्योतिष परामर्श केंद्र*  
### *श्याम नगर, रायपुर, छत्तीसगढ़*  
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 हर समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है आपकी प्रत्येक इच्छा, महत्वकांक्षा, जीवन में बुलंदियों पर पहुंचना या किसी भी तरह की समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है *व्यापार बढ़ोतरी किया कराया शादी के लिए माता-पिता को मनाना जब कहीं ना ही हो काम तो हमसे में समाधान हर मुश्किल से मुश्किल समस्या का समाधान ज्योतिष मेरा काम नहीं मेरी साधना है जब कहीं ना हो काम तो हमसे ले समाधान https://devlinai.co.in/own_projects/acharya-main/
*ॐ नमः शिवाय | जय सनातन* 

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सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang, 14 सितम्बर 2026 का पंचांग,

सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang, 14 सितम्बर 2026 का पंचांग,

सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang, 14 सितम्बर 2026 का पंचांग, 14 September 2026 ka Panchang,

मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद


Panchang, पंचाग, आज का पंचांग, aaj ka panchang, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए, सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang।

सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang,

14 सितम्बर 2026 का पंचांग, 14 September 2026 ka Panchang,

महा मृत्युंजय मंत्रॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।

  • दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।

    सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।

सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।

जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।

सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।

घर पर कैसा भी हो वास्तु दोष अवश्य करें ये उपाय, जानिए वास्तु दोष निवारण के अचूक उपाय

*विक्रम संवत् – 2083,
* शक संवत – 1948,
*कलि संवत – 5128
*कलयुग – 5128 वर्ष
* अयन – दक्षिणायण,
* ऋतु – वर्षा ऋतु,
* मास – भाद्रपद माह,
* पक्ष – शुक्ल पक्ष
*चंद्र बल – मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, मकर,

सोमवार को चन्द्रमा की होरा :-

प्रात: 6.05 AM से 7.07 AM तक

दोपहर 01.18 PM से 2.20 PM तक

रात्रि 20.24 PM से 21.22 PM तक

सोमवार को चन्द्रमा की होरा में अधिक से अधिक चन्द्र देव के मन्त्र का जाप करें। यात्रा, प्रेम, प्रसन्नता, कला सम्बन्धी कार्यो के लिए चन्द्रमा की होरा अति उत्तम मानी जाती है।


आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,भारत की लगभग 150 करोड़ की आबादी में 0.001 % अर्थात लगभग 15 हज़ार आदमी ही नित्य पंचांग पढ़ पाते है।

आप पर ईश्वर की असीम कृपा है जो आपको नित्य पंचांग पढ़ने का, अपने भाग्य को प्रबल करने का, पापो के प्रायश्चित करने का अवसर मिल रहा है,

दुनिया के सारे उपाय एक तरफ है, और नित्य पंचाग पढ़ने का पुण्य उससे भी कहीं अधिक है, नित्य पंचांग पढ़ने से देवताओं का आशीर्वाद मिलता है, कार्य सिद्ध होने लगते है,

इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है ।

अगर आज को चन्द्र देव के हो गए दर्शन, तो अपयश, झूंठा लांछन से बचने के लिए क्या करें उपाय

सोमवार के दिन चन्द्रमा की होरा में चंद्रदेव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में चंद्र देव मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

चन्द्रमा के मन्त्र

ॐ सों सोमाय नम:।

ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम: ।

आज 14 सितम्बर जीवन में किसी भी प्रकार के कलंक से बचने, चंद्रमा दर्शन के दोष को दूर करने के लिए गणेश चतुर्थी के दिन अवश्य करें ये उपाय

  • तिथि (Tithi) – तृतीया 07.06 AM तक तत्पश्चात चतुर्थी तिथि,
  • तिथि का स्वामी – तृतीया तिथि के स्वामी माँ गौरी और कुबेर देव जी और चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान गणपति गणेश जी है ।
     
  • तृतीया: किसी भी पक्ष की तीसरी तारीख को तृतीया तिथि या तीज कहते है।  तृतीया तिथि को जया तिथि भी कहा गया है।
  • अपने नाम के अनुसार ही यह तिथि सभी शुभ कार्यों में जय दिलाने अर्थात सफलता दिलाने वाली कही गई है। लेकिन बुधवार को तृतीया तिथि होने से मृत्युदा कहलाती है, इसलिए बुधवार की तृतीया को कोई भी नया कार्य शुरु करना शुभ नहीं माना जाता  है।
  • तृतीया तिथि में माँ गौरी जी की पूजा अर्चना करने से जीवन में सुख सौभाग्य की वृद्धि होती है। तृतीया के दिन माँ गौरी का ध्यान करते हुए उन्हें दूध की मिठाई, फूल और चावल अर्पित करें एवं श्रद्धानुसार घी का दीपक जलाकर ’’ऊँ गौर्ये नमः’’ की एक माला का अवश्य ही जाप करें । 
  • कुबेर जी भी तृतीया तिथि के स्वामी माने गये हैं। शास्त्रों के अनुसार कुबेर जी देवताओं के कोषाध्यक्ष है अतः इस दिन इनकी भी पूजा करने से जातक को विपुल धन-धान्य, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
  • कुबेर देव Kuber dev धन सम्पदा की दिशा उत्तर के लोकपाल हैं। ये भूगर्भ के भी स्वामी कहे गए हैं।
  • जैसे देवताओं के गुरु बृहस्पति और राजा इन्द्र कहे गए है उसी प्रकार सम्पूर्ण ब्राह्मांडों के धनाधिपति कुबेर देव  कहे गए है।
  • कुबेर देव के पिता विश्रवा तथा माता का नाम इडविडा हैं ।
  • कुबेर देव  की पत्नी का नाम देवी श्रद्धा तथा दोनों पुत्रों के नाम ‘नल कुबेर’ व ‘नील ग्रीव’ है ।
  • कुबेर देव रावण के सौतेले भाई है और या भगवान शिव जी के प्रिय सेवक , परम मित्र भी माने जाती है। घर में कुबेर देवता की फोटो को उत्तर दिशा की ओर लगाना चाहिए  और इस दिशा को बिलकुल साफ रखना चाहिए । 
  • शास्त्रों के अनुसार जो भी जातक किसी भी पक्ष की तृतीया को घी का दीपक जलाकर नियम से नीचे दिए गए कुबेर मंत्र का जप दक्षिण दिशा की ओर मुख करके करता है उसे कुबेर देव की कृपा अवश्य ही प्राप्त होती है, उसे अपने कार्यक्षेत्र , व्यापार में आशातीत सफलता मिलती है। 
  • कुबेर मंत्र: “ऊँ श्रीं, ऊँ ह्रीं श्रीं, ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय: नम:”। यदि इस मंत्र का जप किसी शिव मंदिर में अथवा बिल्वपत्र वृक्ष की जड़ों के समीप बैठकर करा जाये तो या बहुत अधिक उत्तम होता है, उस जातक को भगवान भोलेनाथ और कुबेर जी दोनों की पूर्ण कृपा प्राप्त होती है ।
  • तृतीया को परवल का सेवन नहीं करना चाहिए, तृतीया को परवल का सेवन करने से शत्रुओं में वृद्धि होती है ।

अवश्य पढ़ें :- चाहते है बेदाग, गोरी त्वचा तो तुरंत करें ये उपाय, आप खुद भी आश्चर्य चकित हो जायेंगे, 

आज भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी अति शुभ गणेश चतुर्थी का पर्व है । पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश का जन्म हुआ था इसीलिए भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश का जन्मोत्सव विधि-विधान और धूम-धाम के साथ मनाया जाता है।

वास्तव में गणेश उत्सव का पर्व पूरे हर्ष और उल्लास के साथ भाद्र माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से चतुर्दशी / अनंत चतुर्दशी तक 10 दिनों तक बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इन दस दिनों में विघ्ननाशक भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है।

गणेश चतुर्थी / गणेश उत्सव में भक्त गण पूर्ण श्रद्धा और अपने सामर्थ्य के अनुसार अपने घर / प्रतिष्ठान में भगवान गणपति की स्थापना करते है या इन दिनों प्रभु गजानन की पूजा अर्चना करते है ।

गणेशजी को किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में स्मरण किया जाता है—

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभकार्येषु सर्वदा॥

भावार्थ: हे विशाल स्वरूप वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी गणेशजी! मेरे सभी शुभ कार्यों को सदैव विघ्नरहित करें।

वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी की शुरुआत 14 सितम्बर सोमवार से हो रही है जिसका समापन 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के दिन किया जाएगा ।

गणेश जी की स्थापना का शुभ मुहूर्त, आज सोमवार 14 सितम्बर को सुबह 11 बजकर 42 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक रहेगा, एवं

दोपहर 01 बजकर 40 मिनट से लेकर सांय 06 बजकर 02 मिनट तक का समय गणपति जी की मूर्ति की स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त रहेगा। आप इस अवधि में गणपति जी की मूर्ति की स्थापना कर सकते हैं।

गणेशजी से संबंधित कथाएँ और महात्म्य विशेष रूप से गणेश अथर्वशीर्ष, गणेश पुराण और मुद्गल पुराण में मिलते हैं। इनके अतिरिक्त विभिन्न पुराणों तथा स्मृति-परंपरा में भी गणपति की पूजा और उनके विघ्नहर्ता स्वरूप का उल्लेख मिलता है।

घर में बैठे हुए गणेश जी Ganesh ji और कार्यस्थल पर खड़े गणपतिजी का चित्र लगाना ही हितकर होता है। लेकिन ये ध्यान रखें कि गणेशजी Ganesh ji के दोनों पैर जमीन का स्पर्श करते हुए हों, ताकि कार्य में स्थिरता आए।

गणेश जी की स्थापना करते, उनकी पूजा आराधना करते समय घी का दीपक जलाकर मूर्ति पर सिंदूर / रोली से तिलक करते हुए उनकी मूर्ति पर 11 /21 / 51 /101 दूर्वा चढ़ाएँ । इन दिनों भगवान गजानन को नित्य मोदक / गुड़ या बूंदी के लड्डुओं का भी भोग लगाएं। लेकिन ध्यान रखें कि उन्हें तुलसी कतई ना चढ़ाएँ ।

गणेश जी की पूजा में लाल फूल और शमी पत्र चढ़ाना चाहिए । गणेश जी को सफ़ेद चन्दन और गेंदे का फूल भी नहीं चढ़ाना चाहिए ।

सबसे अंत में सभी गलतियों की छमा याचना करते हुए भगवान को प्रणाम करना चाहिए। गणपति का पूजन शुद्ध आसन पर बैठकर अपना मुख पूर्व अथवा उत्तर दिशा की तरफ करके करें।

गणेश चतुर्थी Ganesh Chaturthi के 10 दिनों में प्रातः एवं संध्या के समय गणेश चालीसा, गणेश स्तुति, श्रीगणेश सहस्रनामावली, गणेश जी Ganesh ji की आरती, संकटनाशन गणेश स्तोत्र आदि का पाठ करें।

गणेश चतुर्थी के दिन सभी को बहुत ही सात्विक रहना चाहिए । इस दिन विघ्हर्ता गणपति जी पृथ्वी पर अपने भक्तो के दुःख हरने, उनके समस्त संकटो को दूर करने, उनके जीवन को हर्ष – उल्लास, सुख – समृद्धि से भरने के लिए आते है अत: इन दिनों बहुत ही श्राद्ध और प्रेम पूर्वक गणेश जी की आराधना करनी चाहिए ।

मान्यता है कि गणेश उत्सव के इन 10 दिनों में घर आये अतिथियों का बहुत ही आदर, सत्कार करना चाहिए इससे ग्रह दोषो का निवारण होता है, जीवन में शुभ समय आता है ।

गणेश उत्सव, गणेश चतुर्थी के दिन ऐसे करें गणपति जी की आराधना, स्थापना,  कष्ट होंगे दूर, पूरी होगी सभी मनोकामना

आज विनायक चतुर्थी तिथि है। प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी कहते है  । चतुर्थी तिथि के स्वामी देवताओं में प्रथम पूज्य, भगवान शिव और माता पार्वती के सबसे छोटे पुत्र भगवान गणेश जी माने गए हैं।  

इस दिन भगवान गणेश की पूजा अर्चना से निश्चय ही समस्त मनोवाँछित फलो की प्राप्ति होती है।

अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी तो पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। विनायक चतुर्थी के दिन गणेश जी की पूजा दोपहर के समय में की जाती है ।

मान्यता है कि किसी भी कार्य के प्रारम्भ में विघ्हर्ता की पूजा आराधना करने से सभी ग्रह दोष शांत होते है ।

चतुर्थी को गणपित जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके, लड्डुओं या गुड़ का भोग लगाकर “ॐ गण गणपतये नम: मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करें ।

गणेश जी को मोदक / लड्डू, लाल रंग के फूल, दुर्वा (दूब), शमी-पत्र, और केला अति प्रिय है, बुधवार और चतुर्थी को गजानन को यह वस्तुएं अर्पित करने से जीवन में शुभ समय आता है ।

चतुर्थी को गणेश जी की आराधना से किसी भी कार्य में विघ्न नहीं आते है, कार्यो में श्रेष्ठ सफलता मिलती है ।

चतुर्थी को गणेश जी के परिवार के सदस्यों के नामो का स्मरण, उच्चारण करने से भाग्य चमकता है, शुभ समय आता है ।

चतुर्थी तिथि को रिक्ता तिथि कहते है इस दिन शुभ कार्यो का प्रारम्भ शुभ नहीं समझा जाता है ।

किसी भी पक्ष की चतुर्थी तिथि में मूली और बैंगन का सेवन करना मना है। चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है, और चतुर्थी को बैगन खाने से रोग बढ़ते है ।

क्या आप जानते है कि गणेश जी का दाँत कैसे टूटा था, चारो युग में गणेश जी के कौन कौन से वाहन है, अवश्य जानिए गणपति जी के बारे में विशेष बातें

नक्षत्र (Nakshatra) – चित्रा 13.55 PM तक तत्पश्चात स्वाति

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी-   चित्रा नक्षत्र के देवता विश्‍वकर्मा जी एवं चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल देव जी है ।

  चित्रा नक्षत्र नक्षत्र मंडल में उपस्थित 27 नक्षत्रों में 14 वां है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, चित्रा नक्षत्र का शासक ग्रह चंद्र देव जी है।  

यह एक मोती या उज्ज्वल गहने की तरह है जो चमकते प्रकाश सा हमारे भीतर की आत्मा का प्रतीक है।  27 नक्षत्रों में चित्रा नक्षत्र सबसे ज्यादा चमकने वाला नक्षत्र भी बताया जाता है ।

चित्रा नक्षत्र कलात्मकता, रचनात्मकता का प्रतीक है, इसीलिए इस नक्षत्र के लोग अपने क्षेत्र में बहुत ही प्रवीण होते है वह साधारण चीज़ को भी और भी अधिक खूबसूरत, विशेष बनाते है,  उसके मूल्य को बढ़ा देते हैं।

चित्रा नक्षत्र में जन्म लेने वाले पुरुष बहुत मेहनती होते हैं। इसके बावजूद सफलता प्राप्त करने में इन्हें 32 साल की उम्र तक संघर्ष करना पड़ता है।

इस नक्षत्र का आराध्य वृक्ष : बेल तथा स्वाभाव तीक्ष्ण माना गया है। चित्रा नक्षत्र स्टार का लिंग मादा है।

चित्रा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 5, 6 और 9,  भाग्यशाली रंग, काला,  भाग्यशाली दिन रविवार और बुधवार माना जाता है ।

चित्रा नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ चित्रायै नमः”l। मन्त्र माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।

गणेश उत्सव के दिन अवश्य जानें कैसे हुआ गणेश जी का अवतरण, कैसे गणेश जी का सर हाथी के सर में बदल गया, कैसे कहलाएं भगवान गजानन

  अगर पश्चिम मुख का है आपका घर तो ऐसा रहना चाहिए आपके घर का वास्तु, जानिए पश्चिम दिशा के अचूक वास्तु टिप्स 


  • योग – ब्रह्म 12.47 PM तक तत्पश्चात इंद्र
  • योग केस्वामी:-    ब्रह्म योग के स्वामी अश्विनी कुमार जी एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है  ।।
  • प्रथम करण : – गर 07.06 AM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-     गर करण के स्वामी भूमि तथा स्वभाव सौम्य है ।

    अवश्य पढ़ें :- कुंडली में केतु अशुभ हो तो आत्मबल की होती है कमी, भय लगना, बुरे सपने आना, डिप्रेशन का होता है शिकार, केतु के शुभ फलो के लिए करे ये उपाय
  • द्वितीय करण : – वणिज 19.20 PM तक तत्पश्चात विष्टि
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-   वणिज करण की स्वामी लक्ष्मी देवी और स्वभाव सौम्य है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.32 AM से 5.19 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.20 PM से 15.10 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.28 PM से 18.51 PM तक
  • अमृत काल :- 07.18 AM से 08.57 AM तक
  • शिव वास :- सभा में 07.06 AM तक तत्पश्चात क्रीड़ा में

  • शिव वास जब सभा में होता है अर्थात जब भगवान शंकर अपनी सभा में होते हैं, तो उस सामान्य रुद्र अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शिव के सभा में होने पर रूद्र अभिषेक करने से दुःख का सामना करना पड़ सकता है।
  • जब भगवान शंकर जी क्रीड़ा में होते हैं, तो उस समय भी रुद्र अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान भोलेनाथ जी के कार्य अथवा क्रीड़ा के समय रूद्र अभिषेक करने से जीवन में तरह तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।  


  • अग्निवास : पाताल में 07.06 AM तक तत्पश्चात पृथ्वी पर


    जब पाताल में अग्नि वास है तो वह हवन से सम्बन्धित अनुष्ठानों के लिये शुभ नहीं मानी जाती है, यह अशुभ मानी गई है । अग्नि के पाताल  वास के दौरान किये जाने वाले हवन  सम्बन्धित अनुष्ठानों व्यक्ति को आर्थिक नुकसान करना पड़ता है उसका  धन नष्ट हो सकता है।

    अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।

  • विशेष –
  • पर्व त्यौहार- विनायक चतुर्थी, गणेश उत्सव प्रारम्भ
  • मुहूर्त (Muhurt) –

“हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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Acharya Mukti Naraya Pandey ( ) आचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय अध्यात्म ज्योतिष परामर्श केंद्र हर समस्या का सामाधन आपके कुंडली में ही है👇

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आप पर ईश्वर की असीम अनुकम्पा की वर्षा होती रहे ।

7 सितम्बर 2026 का पंचांग, 7 September 2026 ka Panchang, aaj ka panchang, aaj ka rahu kaal, aaj ka shubh panchang, monday ka panchang, monday ka rahu kaal, panchang, somvar ka panchang, somvar ka rahu kaal, somvar ka shubh panchang,

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 ### ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय*
## ( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ)
### *अध्यात्म ज्योतिष परामर्श केंद्र*  
### *श्याम नगर, रायपुर, छत्तीसगढ़*  
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 हर समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है आपकी प्रत्येक इच्छा, महत्वकांक्षा, जीवन में बुलंदियों पर पहुंचना या किसी भी तरह की समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है *व्यापार बढ़ोतरी किया कराया शादी के लिए माता-पिता को मनाना जब कहीं ना ही हो काम तो हमसे में समाधान हर मुश्किल से मुश्किल समस्या का समाधान ज्योतिष मेरा काम नहीं मेरी साधना है जब कहीं ना हो काम तो हमसे ले समाधान https://devlinai.co.in/own_projects/acharya-main/
*ॐ नमः शिवाय | जय सनातन* 


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रविवार का पंचांग, Raviwar Ka Panchag, 13 सितम्बर का पंचांग 2026 का पंचांग,

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13 सितम्बर 2026 का पंचांग, 13 September 2026 ka Panchang,

अवश्य पढ़ें :-  मनचाही नौक री चाहते हो, नौकरी मिलने में आती हो परेशानियाँ  तो अवश्य करें ये उपाय 

Panchang, पंचाग, आज का पंचांग, aaj ka panchang, Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)



पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे । जानिए रविवार का पंचांग, Ravivar Ka Panchang।

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13 सितम्बर
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मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद

जानिए नवरात्री में कन्या पूजन में माता के किन किन स्वरूपों की पूजा की जाती है

भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
।। आज का दिन अत्यंत मंगलमय हो ।।

👉🏽दिन (वार) रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।

इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।

घर पर कैसा भी हो वास्तु दोष अवश्य करें ये उपाय, जानिए वास्तु दोष निवारण के अचूक उपाय

रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है । अत: रविवार के दिन मंदिर में भैरव जी के दर्शन अवश्य करें ।

रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।

आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,

इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । नित्य पंचांग को पढ़ने से देवताओं का आशीर्वाद मिलता है, पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है ।

* विक्रम संवत् – 2083, वर्ष
* शक संवत – 1948, वर्ष
* कलि संवत — 5128, वर्ष
* कलयुग – 5128, वर्ष
* अयन – दक्षिणयान,
* ऋतु – वर्षा ऋतु,
* मास – भाद्रपद माह,
* पक्ष – शुक्ल पक्ष
* चंद्र बल – मेष, वृषभ, सिंह, तुला , धनु, मकर,

रविवार को सूर्य देव की होरा :-

प्रात: 06.05 AM से 7.07 AM तक

दोपहर 01.19 PM से 02.21 PM तक

रात्रि 20.25 PM से 9.23 PM तक

रविवार को सूर्य की होरा में अधिक से अधिक अनामिका उंगली / रिंग फिंगर पर थोड़ा सा घी लगाकर मसाज करते हुए सूर्य देव के मंत्रो का जाप करें ।

सुख समृद्धि, मान सम्मान, सरकारी कार्यो, नौकरी, साहसिक कार्यो, राजनीती, कोर्ट – कचहरी आदि कार्यो में सफलता के लिए रविवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

रविवार के दिन सूर्य देव की होरा में सूर्य देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में सूर्य ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

अवश्य जानिए देव दीपावली किस दिन मनाई जाएगी, देव दीपावली क्यों मनाते है 

सूर्य देव के मन्त्र :-

ॐ भास्कराय नमः।।

अथवा

ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।

 द्वितीया तिथि के स्वामी सृष्टि के रचियता भगवान ‘ब्रह्मा’ जी हैं। इसका विशेष नाम ‘सुमंगला’ है। यह भद्रा संज्ञक तिथि है।

सोमवार और शुक्रवार को द्वितीया तिथि मृत्युदा होती है।

लेकिन बुधवार के दिन दोनों पक्षों की द्वितीया में विशेष सामर्थ होता है और यह सिद्धिदा हो जाती है, अर्थात इसमें किये गये सभी कार्य शुभ और सफल होते हैं।

द्वितीया तिथि को चारो वेदो के रचियता ब्रह्मा जी का स्मरण करने से कार्य सिद्ध होते है। द्वितीया तिथि को ब्रह्मा जी का ॐ ब्रह्मणे नमः। मन्त्र से स्मरण करना चाहिए

व्यासलिखित पुराणों के अनुसार ब्रह्मा जी के चार मुख हैं, जो चार दिशाओं में देखते हैं। शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मा को स्वयंभू (स्वयं जन्म लेने वाला) और चार वेदों का निर्माता माना गया है।

ब्रह्मा जी की उत्पत्ति विष्णु की नाभि से निकले कमल से मानी गयी है। मान्यता है कि ब्रह्मा जी के एक मुँह से हर वेद निकला था।

देवी सावित्री ब्रह्मा जी की पत्नी, माँ सरस्वती ब्रह्मा जी की पुत्री, सनकादि ऋषि,नारद मुनि और दक्ष प्रजापति इनके पुत्र और इनका वाहन हंस है। भारतीय दर्शन में हंस को विवेक का प्रतीक माना गया है।

ब्रह्मा जी ने अपने चारो हाथों में क्रमश: वरमुद्रा, अक्षरसूत्र, वेद तथा कमण्डलु धारण किया है।

द्वितीया तिथि को ब्रह्मचारी ब्राह्मण की पूजा करना एवं उन्हें भोजन, अन्न, वस्त्र आदि का दान देना बहुत शुभ माना गया है।

भारत के राजस्थान के पुष्कर में ब्रह्मा जी का विश्व प्रसिद्द मंदिर है, ब्रह्मा जी की पूजा भारत में केवल यहीं पुष्कर तीर्थ के ब्रह्मा मंदिर में ही की जाती है । यहाँ पर ब्रह्मा जी के दर्शन पूजा से समस्त कार्य सिद्ध होने लगते है ।

ऐसा माना जाता है कि पुष्कर तीर्थ को स्वयं सृष्टि के हिंदू देवता ब्रह्मा द्वारा निर्मित किया गया था । इस तीर्थ में हर साल लाखो हिन्दू ब्रह्मा जी के दर्शन, उनकी पूजा करने के लिए आते है ।

शुक्ल पक्ष की द्वितीया में भगवान शंकर जी माँ पार्वती के संग होते हैं इसलिए भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं।

जानिए कौन है भगवान विश्वकर्मा जी , अवश्य जाने इनके माता पिता, इनके पूरे परिवार के बारे में

अवश्य पढ़ें :अवश्य पढ़ें :- चेहरे से कील मुहाँसे हटाने हो तो तुरंत करें ये उपाय, कील मुहांसों को जड़ से हटाने के अचूक उपाय,

नक्षत्र :- हस्त 13.07 PM तक तत्पश्चात चित्रा

नक्षत्र के स्वामी :-     हस्त नक्षत्र के स्वामी चंद्र देव जी एवं राशि के स्वामी बुध देव जी है । 


आकाश मंडल में हस्त नक्षत्र को 13 वां नक्षत्र माना जाता है। यह आकाश में हाथ के पंजे के आकार में फैला सा नज़र आता है जो शक्ति, एकता, ताकत तथा भाग्य का प्रतीक है, इसमें सकारात्मक ऊर्जा मानी जाती है ।  

यह नक्षत्र विजय, बुद्दिमता और जीवन जीने की ललक को प्रदर्शित करता है। इस नक्षत्र का आराध्य वृक्ष : चमेली रीठा तथा स्वाभाव शुभ माना गया है।

हस्त नक्षत्र सितारे का लिंग पुरुष है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक पर जीवन भर चंद्र और बुध का प्रभाव बना रहता है।

इस नक्षत्र में जन्मा जातक शांत, दयालु, आकर्षक और वफादार होते हैं। यह एक अवसर तलाशने वाले, बुद्धिमान, मिलनसार, शांत और विनम्र स्वभाव के होते हैं ।

यदि चन्द्र और बुध की जन्म कुंडली में स्थिति खराब हो तो जातक दब्बू, डरपोक, शीघ्र क्रोध करने वाला,अनैतिक कार्यो में लिप्त रहने वाला शराब का लती भी हो सकता है ।

इन नक्षत्र के लोगो का 30 से 42 वर्ष की आयु के बीच का समय सबसे भाग्यशाली होता है।

हस्त नक्षत्र में पैदा हुई स्त्री, आकर्षक, मिलनसार बड़ो का सम्मान करने वाली होती हैं।  किसी के भी अधीन रहना इनको पसंद नहीं होता है, समान्यता इनका पारिवारिक दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।

हस्त नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 2 और 5,  भाग्यशाली रंग, गहरा हरा, भाग्यशाली दिन  सोमवार, शुक्रवार और बुधवार माना जाता है ।

हस्त नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ सावित्रे नम: “। मन्त्र माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।


घर के बैडरूम में अगर है यह दोष तो दाम्पत्य जीवन में आएगी परेशानियाँ, जानिए बैडरूम के वास्तु टिप्स

  • योग (Yog) – शुक्ल 13.43 PM तक तत्पश्चात ब्रह्मा
  • योग के स्वामी :- शुक्ल योग की स्वामी माँ पार्वती जी और और स्वभाव श्रेष्ठ है ।
  • प्रथम करण : – कौलव 07.08 AM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-    कौलव करण के स्वामी मित्र और स्वभाव सौम्य है ।
  • द्वितीय करण : – तैतिल 19.02 PM तक तत्पश्चात गर
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-    तैतिल करण के स्वामी विश्वकर्मा जी और स्वभाव सौम्य है ।

  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.32 AM से 5.19 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.21 PM से 15.10 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.29 PM से 18.52 PM तक
  • अमृत काल :- 07.04 AM से 08.40 AM तक


    शिव वास – माँ गौरी के साथ 07.08 AM तक तत्पश्चात सभा में

    शिव वास माँ गौरी के साथ : जब भगवान शंकर  गौरी मइय्या के साथ होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शंकर जी के देवी गौरी के साथ रहने के समय किये गए  रूद्रअभिषेक से घर कारोबार में सुख-समृद्धि आती है, स्थाई लक्ष्मी का वास होता है ।

      शिव वास सभा में : जब भगवान शंकर अपनी सभा में होते हैं, तो उस सामान्य रुद्र अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शिव के सभा में होने पर रूद्र अभिषेक करने से दुःख का सामना करना पड़ सकता है।


    अग्नि वास : – पृथ्वी पर 07.08 AM तक तत्पश्चात आकाश में

    अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।

    अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।
  • दिशाशूल (Dishashool)- रविवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से पान या घी खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – अपराह्न – 3:00 से 4:30 तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)-सायं – 4:30 से 6:00 तक ।
  • सूर्योदय – प्रातः 06:05
  • सूर्यास्त – सायं 18:29

    आँखों की रौशनी बढ़ाने, आँखों से चश्मा उतारने के लिए अवश्य करें ये उपाय

  • विशेष – रविवार को बिल्ब के वृक्ष / पौधे की पूजा अवश्य करनी चाहिए इससे समस्त पापो का नाश होता है, पुण्य बढ़ते है।

    रविवार के दिन भगवान सूर्य देव को आक का फूल अर्पण करना किसी भी यज्ञ के फल से कम नहीं है, इससे सूर्य देव की सदैव कृपा बनी रहती है ।

    रविवार को तुलसी जी को जल देना, तुलसी जी को तोड़ना वर्जित है ऐसा करने से पुण्य नष्ट होते है 1
  • द्वितीया को बैगन, कटहल और नींबू का सेवन नहीं करना चाहिए ।
  • तृतीया तिथि को परवल का सेवन नहीं करना चाहिए, तृतीया तिथि को परवल का सेवन करने से शत्रुओं में वृद्धि होती है

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत शुभ फलो वाला हो ।

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आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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शनिवार का पंचांग, Shaniwar Ka Panchang, 12 सितम्बर 2026 का पंचांग

शनिवार का पंचांग, Shaniwar Ka Panchang, 12 सितम्बर 2026 का पंचांग


Shaniwar Ka Panchang, शनिवार का पंचांग, 12 सितम्बर 2026 ka Panchang,

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आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद

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  • Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)


पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए शनिवार का पंचांग, (Shanivar Ka Panchang), आज का पंचांग, aaj ka panchang, saturday ka panchang।

  • शनिवार का पंचांग, (Shanivar Ka Panchang, )

    12 सितम्बर
    2026 का पंचांग, 12 September 2026 ka Panchang,
  • दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
  • शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।

*विक्रम संवत् – 2083,
* शक संवत – 1948,
* कलि संवत – 5128,

* कलयुग – 5128 वर्ष
* अयन – दक्षिणयान,
* ऋतु – वर्षा
ऋतु,
* मास –
भाद्रपद माह,
* पक्ष –
शुक्ल पक्ष,
*चंद्र बल –
मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु, मीन,

शनिवार को शनि महाराज की होरा :-

प्रात: 06.04 AM से 7.07 AM तक

दोपहर 01.19 PM से 2.21 PM तक

रात्रि 20.26 PM से 9.24 PM तक

शनिवार को शनि की होरा में अधिक से अधिक शनि देव के मंत्रो का जाप करें । श्रम, तेल, लोहा, नौकरो, जीवन में ऊंचाइयों, त्याग के लिए शनि की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

शनिवार के दिन शनि की होरा में शनि देव देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में शनि ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,भारत की लगभग 150 करोड़ की आबादी में 0.001 % अर्थात लगभग 15 हज़ार आदमी ही नित्य पंचांग पढ़ पाते है।
आप पर ईश्वर की असीम कृपा है जो आपको नित्य पंचांग पढ़ने का, अपने भाग्य को प्रबल करने का, पापो के प्रायश्चित करने का अवसर मिल रहा है,
दुनिया के सारे उपाय एक तरफ है, और नित्य पंचाग पढ़ने का पुण्य उससे भी कहीं अधिक है,
इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है ।


शनि देव के मन्त्र :-

ॐ शं शनैश्चराय नमः।

अथवा

ऊँ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्‌। छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्‌।।

  • तिथि (Tithi) – प्रतिपदा 07.46 AM तक तत्पश्चात द्वितीया
  • तिथि का स्वामी – प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव जी और द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्मा जी है ।

आज प्रतिपदा तिथि  है । प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव हैं। प्रतिपदा को आनंद देने वाली कहा गया है।

रविवार एवं मंगलवार के दिन प्रतिपदा होने पर मृत्युदा होती है, लेकिन शुक्रवार को प्रतिपदा सिद्धिदा हो जाती है।

अग्नि देव इस पृथ्वी पर साक्षात् देवता हैं, देवताओं में सर्वप्रथम अग्निदेव की उत्पत्ति हुई थी । ऋग्वेद का प्रथम मंत्र एवं प्रथम शब्द अग्निदेव की आराधना से ही प्रारम्भ होता है।

ऋग्वेद का प्रथम मंत्र है:

अग्निमीळे पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम्।
होतारं रत्नधातमम्॥


अर्थात— मैं  उन अग्नि देव की स्तुति करता हूँ, जो यज्ञ के पुरोहित, देवताओं तक आहुति पहुँचाने वाले और समस्त श्रेष्ठ फल प्रदान करने वाले हैं।

हिन्दू धर्म ग्रंथो में  देवताओं में प्रथम स्थान अग्नि देव का ही दिया  गया  है। अग्नि देव सोने के भगवान के रूप में वर्णित है।

पुराणों में आठ दिशाओं के आठ रक्षक देवता हैं जिन्हें अष्ट-दिक‌्पाल कहते हैं। इनमें दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) दिशा के रक्षक अग्निदेव हैं। इसीलिए अग्निदेव की प्रतिमा मंदिर के दक्षिण-पूर्वी कोण में स्थापित होती है।

पौराणिक युग में अग्नि देव के ऊपर अग्नि पुराण नामक एक ग्रन्थ भी रचित हुआ। अग्निदेव सब देवताओं के मुख हैं और यज्ञ में इन्हीं के द्वारा देवताओं को समस्त यज्ञ-वस्तु प्राप्त होती है।  देवताओं के दूत — अग्नि को देवदूत या देवताओं तक संदेश पहुँचाने वाला माना जाता है।

अग्नि देव की सात जिह्वाएँ :  वैदिक परंपरा में अग्नि की सात जिह्वाओं का वर्णन मिलता है। एक प्रसिद्ध सूची है:

काली, कराली, मनोजवा, सुलोहिता, सुधूम्रवर्णा, स्फुलिंगिनी, विश्वनरि

इन नामों को अग्नि की अलग-अलग ज्वालाओं और शक्तियों के प्रतीक के रूप में समझा जाता है।

साक्षी — हिंदू विवाह संस्कार में अग्नि को अत्यंत पवित्र साक्षी माना जाता है। विवाह संस्कार में अग्नि को साक्षी मानकर सप्तपदी ली जाती है। वर-वधू अग्नि के चारों ओर फेरे लेते हैं और सप्तपदी के माध्यम से वैवाहिक जीवन के संकल्प लेते हैं।

गृहस्थ जीवन के रक्षक — वैदिक परंपरा में घर की अग्नि का विशेष महत्व था, यह गृहस्थ जीवन को चलाने वाले कहे गए है ।

अग्नि देव को सामान्यतः लाल या स्वर्णिम आभा वाले देवता के रूप में चित्रित किया जाता है। उनके:

दो या अधिक मुख, सात जिह्वाएँ, सात किरणें/ज्वालाएँ, हाथों में यज्ञ-संबंधी वस्तुएँ बताई जाती हैं। उनका वाहन मेढ़ा (राम) माना जाता है।

वास्तुशास्त्र में दक्षिण-पूर्व दिशा को अग्नेय कोण कहा जाता है। इसे अग्नि तत्व से जोड़ा जाता है। परंपरागत रूप से रसोई और अग्नि से जुड़े कार्यों के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा को उपयुक्त माना गया है।

अग्निदेव में प्रेम पूर्वक ‘‘स्वाहा‘‘ कहकर दी हुई आहुतियों को अग्नि देव अपनी सातो जिह्वाओं से ग्रहण करते है, इससे  तीनो देव ब्रह्मा – विष्णु – महेश तथा समस्त देव स्वत: ही तृप्त हो जाते है ।

प्रतिपदा तिथि को इष्टि भी कहते है, मान्यता है कि माह में दो बार आने वाली इस तिथि पर भगवान को प्रशाद चढ़ाने, भोग लगाने से पूरे 15 दिन का भोग लगाने का फल मिलता है अर्थात इस दिन दैनिक पूजा में अथवा मंदिर में भगवान, अपने इष्ट को भोग अवश्य ही लगाएं

अग्नि देव की पत्नी का नाम स्वाहा हैं जो कि दक्ष प्रजापति तथा आकूति की पुत्री थीं। अग्निदेव की पत्नी स्वाहा के पावक, पवमान और शुचि नामक तीन पुत्र और पुत्र-पौत्रों की संख्या उनंचास है।

प्रतिपदा तिथि के दिन अग्नि देव के मन्त्र “ॐ अग्नये स्वाहा” का जाप अवश्य ही करें । शास्त्रों में अग्निदेव का बीजमन्त्र “रं” तथा मुख्य मन्त्र “रं वह्निचैतन्याय नम:” है।

शास्त्रों के अनुसार अग्नि देव की उपासना से धन, धान्य, यश, शक्ति, सुख – समृद्धि प्राप्त होती है, परिवारिक सुख मिलता है । 

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नक्षत्र (Nakshatra) – उत्तरफाल्गुनी 12.55 PM तक तत्पश्चात हस्त

नक्षत्र के स्वामी :-        उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के देवता आर्यमन और स्वामी सूर्य, बुध देव जी है ।

 आकाश मंडल में उत्तरा फाल्गुनी को 12 वां नक्षत्र माना जाता है। ‘उत्तरा फाल्गुनी’ का अर्थ है ‘बाद का लाल नक्षत्र’। यह एक बिस्तर या बिस्तर के पिछले दो पाए को दर्शाता है जो आराम और विलासिता के जीवन का प्रतीक है।  

यह नक्षत्र रोमांस, कामुक, ऐश्वर्य, रोमांच और अनैतिक आचरण को प्रदर्शित करता है। इस नक्षत्र काआराध्य वृक्ष : पाकड़ तथा स्वाभाव शुभ माना गया है।

उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र सितारे का लिंग महिला है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक पर जीवन भर सूर्य और बुध का प्रभाव बना रहता है।

इस नक्ष‍त्र में जन्मे व्यक्ति दानी, दयालु, साहसी, विद्वान, चतुर, उग्र स्वभाव, सही निर्णय लेने वाले होते है।  इन्हे पूर्ण संतान, भूमि का सुख मिलता है।

लेकिन यदि सूर्य और बुध की स्थिति जन्म कुंडली में खराब है तो जातक का रुझान गलत कार्यों में रहने लगता है, उसका झुकाव विपरीत लिंगी की तरफ बहुत आसानी से हो जाता है।

उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में पैदा हुई स्त्री, सरल, शांत लेकिन खुशमिज़ाज़ होती हैं। यह आसानी से सबको प्रभावित कर लेती है ।इनका पारिवारिक दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।

उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 12, भाग्यशाली रंग, चमकदार नीला, भाग्यशाली दिन  बुधवार, शुक्रवार, और रविवार  माना जाता है ।

उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ अर्यमणे नम: “। मन्त्र माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।

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  • योग (Yog) – शुभ 15.09 PM तक तत्पश्चात शुक्ल
  • योग के स्वामी, स्वभाव :-       शुभ योग की स्वामी माँ लक्ष्मी जी और स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है ।
  • प्रथम करण : – बव 7.46 AM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-       बव करण के स्वामी इंद्र देव और स्वभाव सौम्य है ।
  • द्वितीय करण : – बालव 19.22 PM तक तत्पश्चात कौलव
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-     बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.32 AM से 5.18 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.21 PM से 15.11 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.30 PM से 18.53 PM तक
  • अमृत काल : अमृत काल 13.17 PM से 14.46 PM तक
  • त्रिपुष्कर योग : प्रात: 07.46 AM से दोपहर 12.55 PM तक मान्यता है कि त्रिपुष्कर योग में किये गए शुभ कार्यो का एक माह में तीन गुना फल मिलता है, इसलिए इस योग में सदैव शुभ कार्य ही करने चाहिए ।

  • अग्नि वास : आकाश में 07.46 AM तक तत्पश्चात पाताल में


    अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।

     जब पाताल में अग्नि वास है तो वह हवन से सम्बन्धित अनुष्ठानों के लिये शुभ नहीं मानी जाती है, यह अशुभ मानी गई है । अग्नि के पाताल  वास के दौरान किये जाने वाले हवन  सम्बन्धित अनुष्ठानों व्यक्ति को आर्थिक नुकसान करना पड़ता है उसका  धन नष्ट हो सकता है।

  • शिव वास : शमशान में 07.46 AM तक तत्पश्चात माँ गौरी के साथ

    शिव वास  श्मशान में :  जब भगवान शिव का श्मशान में वास होता हैं, तो रुद्र अभिषेक आदि  करना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ जी का  श्मशान में वास के दौरान अभिषेक करने से मृत्यु समान  परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
  • शिव वास माँ गौरी के साथ : जब भगवान शंकर  गौरी मइय्या के साथ होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शंकर जी के देवी गौरी के साथ रहने के समय किये गए  रूद्रअभिषेक से घर कारोबार में सुख-समृद्धि आती है, स्थाई लक्ष्मी का वास होता है ।

  • गुलिक काल : – शनिवार को गुलिक काल प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
  • दिशाशूल (Dishashool)- शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।

    यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
  • राहुकाल (Rahukaal)-सुबह – 9:00 से 10:30 तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 06:04 AM
  • सूर्यास्त – सायं 18:30 PM
  • विशेष – प्रतिपदा के दिन कद्दू  /  पेठे का सेवन नहीं करना चाहिए, प्रतिपदा के दिन इनका सेवन करने से धन की हानि होती है । 

    द्वितीया को बैगन, कटहल और नींबू का सेवन नहीं करना चाहिए ।


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  • पर्व त्यौहार-
  • मुहूर्त (Muhurt) –

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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