रविवार का पंचांग, Raviwar Ka Panchag, 15 फरवरी का पंचांग 2026 का पंचांग,
आप सभी को महाशिवरात्रि के महा पर्व की हार्दिक शुभकामनायें
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15 फरवरी 2026 का पंचांग, 15 February 2026 ka Panchang,
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Panchang, पंचाग, आज का पंचांग, aaj ka panchang, Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-
1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)
पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे । जानिए रविवार का पंचांग, Ravivar Ka Panchang।
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भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
।। आज का दिन अत्यंत मंगलमय हो ।।
👉🏽दिन (वार) रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
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रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है । अत: रविवार के दिन मंदिर में भैरव जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।

* विक्रम संवत् – 2082, वर्ष
* शक संवत – 1947, वर्ष
* कलि संवत 5127, वर्ष
* कलयुग – 5127, वर्ष
* अयन – उत्तरायण,
* ऋतु – बसंत ऋतु,
* मास – फाल्गुन माह
* पक्ष – कृष्ण पक्ष
* चंद्र बल – मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, मकर,
रविवार को सूर्य देव की होरा :-
प्रात: 7.00 AM से 7.52 AM तक
दोपहर 01.09 PM से 02.09 PM तक
रात्रि 19.54 PM से 9.11 PM तक
रविवार को सूर्य की होरा में अधिक से अधिक अनामिका उंगली / रिंग फिंगर पर थोड़ा सा घी लगाकर मसाज करते हुए सूर्य देव के मंत्रो का जाप करें ।
सुख समृद्धि, मान सम्मान, सरकारी कार्यो, नौकरी, साहसिक कार्यो, राजनीती, कोर्ट – कचहरी आदि कार्यो में सफलता के लिए रविवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।
रविवार के दिन सूर्य देव की होरा में सूर्य देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में सूर्य ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

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सूर्य देव के मन्त्र :-
ॐ भास्कराय नमः।।
अथवा
ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
जीवन में सुख समृद्धि और ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को ऐसे करें प्रसन्न,
- तिथि (Tithi) – त्रियोदशी 17.04 PM तक तत्पश्चात चतुर्दर्शी,
- तिथि के स्वामी :- त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी और चतुर्दर्शी तिथि के स्वामी भगवान शंकर जी है ।
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त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी हैं। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते है । उन्हें सदैव युवा और आकर्षक रहने का वरदान है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार कामदेव, भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के पुत्र माने गए हैं। उनका विवाह प्रेम और आकर्षण की देवी रति से हुआ है।
कामदेव के हाथ में धनुष है जिसका एक कोना स्थिरता और दूसरा कोना चंचलता का प्रतीक है। कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है। कामदेव जब कमान से अपना तीर छोड़ते हैं, तो उसमें कोई आवाज नहीं होती है।
कामदेव के बाण की यह विशेष बात है कि इनसे घायल होने के बाद भी व्यक्ति आनंद का सुखद अहसास महसूस करता है।
कामदेव का सम्बन्ध शुभ, प्रेम, सुख, सौंदर्य, यौवन, आनंद और कामेच्छा से है ।
कामदेव का वाहन हाथी को माना गया है। शास्त्रों में कुछ जगह कामदेव का वाहन तोते को भी बताया गया है ।
त्रियोदशी के दिन मीठे वचन बोलने, प्रसन्न रहने से जातक रूपवान होता है, उसे अपने प्रेम में सफलता एवं इच्छित एवं योग्य जीवनसाथी प्राप्त होता है।
त्रियोदशी को कामदेव जी का स्मरण करने से वैवाहिक सुख भी पूर्णरूप से मिलता है।
अपने रूप और आकर्षण शक्ति को बढ़ाने के लिए त्रियोदशी को कामदेव जी का मन्त्र ‘ॐ कामदेवाय विद्महे, रति प्रियायै धीमहि, तन्नो अनंग प्रचोदयात्’ की एक माला जाप अवश्य करें ।
इस तिथि का खास नाम जयकारा भी है। समान्यता त्रयोदशी तिथि यात्रा एवं शुभ कार्यो के लिए श्रेष्ठ होती है।
त्रियोदशी को बैगन नहीं खाना चाहिए , त्रियोदशी को बैगन खाने से पुत्र को कष्ट मिलता है।
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आज महाशिवरात्रि का महापर्व है जो फाल्गुन माह की कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाता है ।
ऐसा माना जाता है कि सृष्टि के प्रारम्भ में इसी दिन मध्यरात्रि को भगवान भोलेनाथ कालेश्वर के रूप में प्रकट हुए थे , भगवान शंकर का ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था ।
प्रलय की बेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए पूरे ब्रह्मांड को अपने तीसरे नेत्र की ज्वाला से भस्म कर देते हैं, इसीलिए इसे महाशिवरात्रि अथवा कालरात्रि भी कहा गया है ।
यह भी मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन ही शंकर जी का विवाह देवी पार्वती जी से हुआ था, इस दिन भगवान शिव की बरात निकली थी। इस दिन शिव भक्त ब्रत रखकर भगवान आशुतोष की पूजा करते है ,महाशिवरात्रि के दिन व्रत धारण करने से मनुष्य के सभी पापों का नाश होता है।
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण चतुर्दशी तिथि रविवार 15 फरवरी को पशाम 17 बजकर 7 मिनट से प्रारम्भ होगी जो सोमवार 16 फरवरी को शाम 17 बजकर 36 मिनट तक रहेगी चूँकि शिवरात्रि के पर्व में रात्रि का महत्व है इसलिए महाशिवरात्रि का पर्व रविवार 15 फरवरी को मनाया जायेगा ।
माना जाता है कि इस दिन शिवपुराण का पाठ सभी जातको को अवश्य ही करना / सुनना चाहिए। महाशिवरात्रि की रात्रि को जागरण कर शिवपुराण का पाठ करने सुनने से जीवन के समस्त घोर से घोर संकट दूर होते है, सभी मनोकामनाएँ अवश्य ही पूर्ण होती है ।
महाशिवरात्रि के दिन प्रात: स्नान करके सर्वप्रथम सूर्य देव को जल अर्पित करें । उसके बाद मंदिर में उत्तर की तरफ मुँह करके भगवान भोलनाथ के शिवलिंग का पंचामृत, / दूध, दही, घी, गंगाजल, शहद, गन्ने का रस, अनार का रस आदि से अभिषेक करें ।
शिवलिंग पर बेल पत्र, शमी पत्र, भांग, धतूरा, काले तिल, अक्षत, सफ़ेद पुष्प, गन्ने के टुकड़े, नारियल, बेर, सफ़ेद मिठाई चढ़ाएं तत्पश्चात सफ़ेद चन्दन से त्रिपुण्ड बनायें, या शिवलिंग पर तिलक लगाएं ।
फिर वहीँ बैठकर शिवरक्षा स्त्रोत्र का पाठ करें, ॐ नम: शिवाये एवं श्री शिवाये नमस्तुभ्यम की माला का जाप करें । शिवरात्रि के दिन महा मृत्युंजय मन्त्र का जाप घोर से घोर संकटो को दूर करने वाला माना गया है ।
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् |
उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ||
धार्मिक मान्यता है कि शिवरात्रि को शिव जगत् में विचरण करते है और जो जातक शिवरात्रि की रात्रि में जाग कर भगवान भोले नाथ की आराधना करते है उनपर शिव शम्भु की असीम कृपा बरसती है । शिवरात्रि समस्त मनुष्यो के लिए महान उपलब्धि प्राप्त करने का दिन भी है ।
चूँकि शिवरात्रि भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है । इसी लिए मान्यता है कि जो लोग इस दिन भगवान शंकर की आराधना करते है, वह परम भाग्यशाली बनते है ।
वैसे तो प्रत्येक हिन्दू का शिवरात्रि का ब्रत अवश्य ही रखना चाहिए लेकिन अगर आप ब्रत ना भी रख पाएं तो शिवरात्रि के दिन फलाहार, सात्विक भोजन ही करना चाहिए । इस दिन माँस, मदिरा, प्याज, लहसुन आदि तामसी चीज़ो का भूल कर भी सेवन नहीं करना चाहिए ।
महाशिवरात्रि के दिन अपनी इन्द्रियों को अवश्य ही वश में रखें, इस दिन क्रोध, हिंसा, सहवास आदि से भी बिलकुल दूर रहना चाहिए ।
महाशिवरात्रि पर राशिनुसार इस तरह से करें भगवन भोलेनाथ का अभिषेक मिलेगी सर्वत्र सफलता

नक्षत्र :- उत्तराषाढ़ा 19.48 PM तक तत्पश्चात श्रवण
नक्षत्र के स्वामी :- उत्तराषाढा नक्षत्र के देवता दस विश्वदेव जी एवं नक्षत्र के स्वामी सूर्य देव जी है । ।
उत्तराषाढा नक्षत्र 21 वें नंबर का नक्षत्र है। उत्तराषाढ़ा’ का अर्थ होता है अजेय, विजय के पश्चात। यह एक हाथी के दांत जैसा प्रतीत होता है।
उत्तराषाढ़ नक्षत्र तारे का लिंग स्त्री है। उत्तराषाढा नक्षत्र का आराध्य वृक्ष कटहल और नक्षत्र का स्वभाव स्थिर माना गया है ।
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में जन्मे जातक पर सूर्य, शनि और गुरु का प्रभाव बना रहता है।
उत्तराषाढा नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति एक सफल एवं स्वतंत्र व्यक्ति होते हैं। इन्हे ईश्वर में आस्था होती है, इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति प्रसन्न चित्त और मित्रो में लोकप्रिय होते है ।
विवाह के उपरान्त इनको जीवन में और अधिक सफलता प्राप्त होती है, इन्हे उत्तम पुत्र सुख मिलता है। यह घूमने फिरने के बहुत शौक़ीन होते है ।
उत्तराषाढा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 1, 3 और 8, भाग्यशाली रंग, तांबे का रंग, हल्का भूरा, भाग्यशाली दिन गुरुवार और शुक्रवार का माना जाता है ।
उत्तराषाढा नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ उत्तराषाढाभ्यां नमः”। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।
उत्तराषाढा नक्षत्र में जन्मे जातको को नित्य गणेश संकट स्रोत्र का पाठ करना चाहिए इससे कार्यो में आने वाली बाधाओं का निवारण होता है ।
घर के बैडरूम में अगर है यह दोष तो दाम्पत्य जीवन में आएगी परेशानियाँ, जानिए बैडरूम के वास्तु टिप्स
- योग (Yog) – व्यतिपात 02.47 AM सोमवार 16 फरवरी तक
- योग के स्वामी :- व्यतिपात योग के स्वामी रूद्र देव जी एवं स्वभाव अशुभ माना जाता है ।
- प्रथम करण : – वणिज 17 .04 तक
- करण के स्वामी, स्वभाव :- वणिज करण की स्वामी लक्ष्मी देवी और स्वभाव सौम्य है ।
- द्वितीय करण : – विष्टि 05.23 AM सोमवार 16 फरवरी तक
- करण के स्वामी, स्वभाव :- विष्टि करण के स्वामी यम और स्वभाव क्रूर है ।
- ब्रह्म मुहूर्त : 5.21 AM से 6.13 AM तक
- विजय मुहूर्त : 14.26 PM से 15.10 PM तक
- गोधूलि मुहूर्त : 18.03 PM से 18.29 PM तक
- अमृत काल :- अमृत काल 19.18 PM से 21.04 PM
- दिशाशूल (Dishashool)- रविवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से पान या घी खाकर जाएँ ।
- गुलिक काल : – अपराह्न – 3:00 से 4:30 तक ।
- राहुकाल (Rahukaal)-सायं – 4:30 से 6:00 तक ।
- सूर्योदय – प्रातः 07:00
- सूर्यास्त – सायं 18:11
आँखों की रौशनी बढ़ाने, आँखों से चश्मा उतारने के लिए अवश्य करें ये उपाय - विशेष – रविवार को बिल्ब के वृक्ष / पौधे की पूजा अवश्य करनी चाहिए इससे समस्त पापो का नाश होता है, पुण्य बढ़ते है।
रविवार के दिन भगवान सूर्य देव को आक का फूल अर्पण करना किसी भी यज्ञ के फल से कम नहीं है, इससे सूर्य देव की सदैव कृपा बनी रहती है ।
रविवार को तुलसी जी को जल देना, तुलसी जी को तोड़ना वर्जित है ऐसा करने से पुण्य नष्ट होते है 1 - शास्त्रों में चतुर्दशी को हिंसा, अनैतिक कार्य, मांस-मदिरा का सेवन, तिल का तेल, लाल रंग का साग, काँसे के बर्तन में भोजन एवं शारीरिक संबंध बनाना मना किया गया है ।
- पर्व त्यौहार- महाशिवरात्रि
- मुहूर्त (Muhurt) –
एकादशी के इन उपायों से पाप होंगे दूर, सुख – समृद्धि की कोई कमी नहीं रहेगी
“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
आप का आज का दिन अत्यंत शुभ फलो वाला हो ।
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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।
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