मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang, 11 अगस्त 2026 का पंचांग,
आप सभी शिवभक्तों को सावन माह की शिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें, आप पर भगवान शंकर जी की असीम कृपा बनी रहे ।
मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang,
Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-
1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)
पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए मंगलवार का पंचांग (Mangalvar Ka Panchang)।
शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
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11 अगस्त Ka Panchang, 11 August का पंचांग, 2026 ka panchang,
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है, अगर आप भी पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।
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आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
।। आज का दिन मंगलमय हो ।।
- दिन (वार) – मंगलवार Mangalwar के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार Mangalwar को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
नवरात्री में घर, कारोबार में इस विधि से करें कलश की स्थापना, अवश्य जानिए कलश स्थापना की सही और बहुत ही आसान विधि,
मंगलवार के व्रत से सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है, बल, साहस और सम्मान में भी वृद्धि होती है।
मंगलवार को धरती पुत्र मंगलदेव की आराधना करने से जातक को मुक़दमे, राजद्वार में सफलता मिलती है, उत्तम भूमि, भवन का सुख मिलता है, मांगलिक दोष दूर होता है।
जीवन में समस्त संकटो को दूर करने, सफलता का द्वार खोलने के लिए नवरात्री के मंगलवार को अवश्य ही करें ये उपाय
आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है, - इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । नित्य पंचांग को पढ़ने से देवताओं का आशीर्वाद मिलता है, पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है ।
*विक्रम संवत्- 2083,
*शक संवत – 1948
*कलि सम्वत – 5128
*अयन – दक्षिणायण
*ऋतु – वर्षा ऋतु
*मास – सावन माह,
*पक्ष – कृष्ण पक्ष
*चंद्र बल – वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर, कुम्भ ,
मंगलवार को मंगल की होरा :-
प्रात: 5.48 AM से 6.54 AM तक
दोपहर 01.32 PM से 2.39 PM तक
रात्रि 20.52 PM से 21.45 PM तक
मंगलवार को मंगल की होरा में हाथ की निम्न मंगल पर दो बूंद सरसो का तेल लगा कर उसे हल्के हल्के रगड़ते हुए अधिक से अधिक मंगल देव के मन्त्र का जाप करें ।
कृषि, भूमि, भवन, इंजीनियरिंग, खेलो, साहस, आत्मविश्वास
और भाई के लिए मंगल की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।
मंगलवार के दिन मंगल की होरा में मंगल देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में मंगल मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।
गुरु पूर्णिमा पर इस मन्त्र का अवश्य ही करें जाप, जानिए गुरु पूर्णिमा का उपाय,

मंगल देव के मन्त्र
ॐ अं अंगारकाय नम: अथवा
ॐ भौं भौमाय नम:”
जरूर पढ़े :- जीवन में समस्त संकटो को दूर करने, सफलता का द्वार खोलने के लिए नवरात्री के मंगलवार को अवश्य ही करें ये उपाय,
तिथि :- चतुर्दर्शी तिथि 01.52 AM बुधवार 12 अगस्त तक,
तिथि के स्वामी :- चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी है ।
🕉️ सावन की शिवरात्रि 2026🕉️
भगवान शिव की आराधना, उपवास और आत्मशुद्धि का परम पावन पर्व
सावन का पूरा महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इसी पवित्र महीने में आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को सावन शिवरात्रि कहा जाता है। वर्ष 2026 में सावन शिवरात्रि मंगलवार, 11 अगस्त को मनाई जाएगी। उत्तर भारत की पंचांग परंपरा के अनुसार यह तिथि विशेष रूप से शिवभक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
🌿 सावन शिवरात्रि क्यों है इतनी विशेष ?
हर मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी शिवरात्रि कहलाती है। इनमें फाल्गुन की शिवरात्रि को “महाशिवरात्रि” के रूप में विशेष प्रतिष्ठा मिली है, जबकि श्रावण कृष्ण चतुर्दशी की शिवरात्रि सावन शिवरात्रि कहलाती है।
शिवरात्रि का अर्थ ही है—शिव की वह रात्रि जिसमें साधना, ध्यान, जप और आत्मसंयम का विशेष महत्व है।
श्रावण मास भगवान शिव की आराधना का विशेष मास माना जाता है। इस पूरे महीने में शिवलिंग पर जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र तथा “ॐ नमः शिवाय” का जाप करने की परंपरा है।
सावन शिवरात्रि पर इन साधनाओं का विशेष महत्व माना जाता है क्योंकि यह श्रावण मास की कृष्ण चतुर्दशी है। शैव परंपरा में शिवरात्रि को भगवान शिव की उपासना, जागरण और आत्मचिंतन की विशेष रात्रि माना गया है।
📖 वेद, पुराण और हिन्दू धर्मग्रंथों में महत्व
शिव की उपासना का आधार वैदिक परंपरा तक जाता है। ऋग्वेद में रुद्र की स्तुति मिलती है और यजुर्वेद के श्री रुद्रम में रुद्र-शिव की व्यापक उपासना की गई है।
शिव पुराण में शिवरात्रि-व्रत और भगवान शिव की उपासना की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है। शिवरात्रि-व्रत में उपवास, शिवलिंग का पूजन, अभिषेक, मंत्र-जप और रात्रि-जागरण को विशेष साधना माना गया है।
पुराणों में भगवान शिव को कल्याणकारी, आशुतोष, करुणामय और भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होने वाले देव के रूप में वर्णित किया गया है।
स्कन्द पुराण के नागर खण्ड में शिवरात्रि के प्रसंग में स्पष्ट रूप से उपवास और रात्रि-जागरण का उल्लेख मिलता है। इसके अनुदार शिवरात्रि आने पर जो व्यक्ति व्रत रखकर पवित्र रहता है और रातभर जागता है, उसे सभी शिवलिंगों के दर्शन के समान फल प्राप्त होता है।
अग्नि पुराण, अध्याय 193 — “शिवरात्रिव्रत” में शिवरात्रि-व्रत को “भुक्तिमुक्तिप्रदम्” कहा गया है—अर्थात ऐसा व्रत जो सांसारिक कल्याण और आध्यात्मिक मुक्ति, दोनों से जोड़ा गया है। उसी अध्याय में उपवास, रात्रि-जागरण और शिवपूजन का विधान आता है अर्थात जो भोग और मोक्ष दोनों प्रदान करने वाला है।
शिवरात्रि की सबसे अद्भुत बात—बिना जाने की गई शिव-पूजा भी स्वीकार हो जाती है ।
शिव पुराण की कोटिरुद्र संहिता में शिकारी गुरुद्रुह की कथा आती है उसने जीवन में बहुत पाप किया । एक बार उसे कई दिनों तक शिकार करने में सफलता नहीं मिली, वह और उसके परिवार के सदस्य भूख से बहुत व्याकुल हो गए।
परिवार के लिए भोजन की तलाश में वह जंगल गया, लेकिन शिकार नहीं मिला, कुछ ही देर में रात्रि हो गई । फिर उसे एक तालाब नज़र आया उसने सोचा कि कोई न कोई पशु पानी पीने अवश्य आएगा। मैं उसे मारकर घर ले जाऊँगा और अपने परिवार की भूख मिटाऊँगा।
वह अपने साथ पानी लेकर बेल के वृक्ष के ऊपर चढ़ गया और शिकार के इंतज़ार में पूरी रात जागता रहा। उस दिन शिवरात्रि का पर्व आया वह इस दिन के महत्त्व से बिलकुल अनजान था।
बेल पत्र के वृक्ष के नीचे शिवलिंग स्थापित था, जिसका उसे पता भी नहीं था। वह वृक्ष से बेलपत्र तोड़ता रहा और उसके साथ जल भी शिवलिंग पर गिरता रहा। इस प्रकार अनजाने में ही उससे उपवास + रात्रि-जागरण + जलाभिषेक + बेलपत्र अर्पण—शिवरात्रि के प्रमुख अंग पूरे हो गए । उस पर भगवान की कृपा हुई उसका ह्रदय परिवर्तन हुआ, उसने नीचे उतर का शिवलिंग को प्रणाम करके सोचा कि वह अबसे जीवन में कभी भी शिकार नहीं करेगा ।
उसके ऐसे विचार से भगवान शिव उससे प्रसन्न हो गए। भगवान शिव ने उसे अपना दिव्य स्वरूप दिखाया और प्रेमपूर्वक कहा—
मैं तुम्हारी भक्ति से प्रसन्न हूँ तुम्हारी जो मनोकामना हो वो वरदान मांगो। उसने भगवान शिव के चरणों में गिरकर कहा— “अब मुझे सब कुछ प्राप्त हो गया।”
भगवान शिव ने उसे “गुह” नाम दिया और उसे दिव्य वरदान प्रदान किया। भगवान शिव ने कहा कि वह शृंगवेरपुर में अपना निवास बनाए, सुखपूर्वक जीवन बिताए और उसकी वंश-परंपरा सुरक्षित रहे।
भगवान शिव ने यह भी वरदान दिया कि भविष्य में देवताओं द्वारा भी पूजित भगवान श्रीराम उसके घर आएंगे और उससे मित्रता करेंगे। और अंततः भगवान शिव की सेवा करते हुए वह दुर्लभ मोक्ष प्राप्त करेगा।
इसीलिए शिवरात्रि केवल किसी मनोकामना की पूर्ति के लिए पूजा करने का दिन नहीं, बल्कि अपने मन, वाणी और कर्म को शिवमय बनाने का अवसर भी है।
🔱 सावन शिवरात्रि पर क्या करें?
- प्रातः स्नान करके संकल्प लें : सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान शिव के सामने अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत एवं पूजा का संकल्प लें।
- शिवलिंग पर जलाभिषेक करें : शिवलिंग पर स्वच्छ जल अर्पित करें। सामर्थ्य हो तो गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और जल से विधिपूर्वक अभिषेक किया जा सकता है।
- बेलपत्र अर्पित करें : भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय माना जाता है। बेलपत्र अर्पित करते समय श्रद्धा से कहें: “ॐ नमः शिवाय”
- “महामृत्युंजय मंत्र” एवं ” शिव पंचाक्षर” मंत्र का अधिक से अधिक जाप करें :
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
ॐ नमः शिवाय
यह शिव उपासना का अत्यंत प्रसिद्ध पंचाक्षरी मंत्र है। शिवरात्रि पर शांत मन से इसका जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- रात्रि में शिव पूजा करें: शिवरात्रि की विशेषता रात्रि-पूजन में है। परंपरागत रूप से रात्रि को चार प्रहरों में शिवपूजन करने की परंपरा है।
प्रथम प्रहर — शिव पूजन एवं जलाभिषेक, शरीर का संयम
द्वितीय प्रहर — अभिषेक एवं मंत्र-जप, मन की शुद्धि
तृतीय प्रहर — शिव स्तुति, महामृत्युंजय मंत्र अहंकार का त्याग
चतुर्थ प्रहर — ध्यान, जप एवं आरती आत्मचिंतन और शिव में समर्पण
जो लोग पूरी रात जागरण नहीं कर सकते, वे अपनी सुविधा और श्रद्धा के अनुसार रात्रि में एक बार भी भगवान शिव का पूजन कर सकते हैं।
6. दान-पुण्य करें : इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार— अन्न दान, वस्त्र दान, गौसेवा, जरूरतमंदों की सहायता, गरीबों को भोजन, जल की व्यवस्था करना पुण्यकारी माना जाता है।
🌸 सावन शिवरात्रि पर क्या चढ़ाएं?
भगवान शिव को श्रद्धा से अर्पित किए जा सकते हैं:
💧 जल
🌿 बेलपत्र
🌸 पुष्प
🌾 अक्षत
🥥 नारियल
🍎 फल
🥛 दूध
🍯 शहद
🌿 भांग — जहाँ स्थानीय/परंपरागत पूजा-विधि में मान्य हो
सबसे महत्वपूर्ण वस्तु आपकी श्रद्धा है।
🚫 सावन शिवरात्रि पर क्या न करें?
शिवरात्रि का व्रत केवल भोजन छोड़ने का नाम नहीं है। यह मन, वाणी और व्यवहार पर संयम का पर्व भी है।
इसलिए इस दिन यथासंभव:
❌ मांसाहार न करें ❌ शराब अथवा नशे से दूर रहें ❌ क्रोध न करें ❌ किसी का अपमान न करें ❌ झूठ और छल से बचें❌ किसी के प्रति ईर्ष्या या द्वेष न रखें ❌ अनावश्यक विवाद न करें ❌ अपशब्द न बोलें ❌ हिंसा से बचें ❌ दिखावे के लिए पूजा न करें
इस दिन ब्रत रखें, व्रत रखने वाले सामान्यतः सात्त्विक फलाहार करते हैं। फल, दूध, मखाना, साबूदाना, कुट्टू आदि का सेवन परंपरा के अनुसार किया जाता है।
व्रत स्वास्थ्य और अपनी क्षमता के अनुसार ही रखें। केवल धार्मिक उत्साह में अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक कठोर उपवास करना आवश्यक नहीं है।
आज सावन माह की शिवरात्रि और कल सावन माह की अमावस्या, हरियाली अमावस्या की रात्रि में किसी भी शिवमंदिर में एक ऐसा बड़ा घी का दीपक जरूर जलाएं जो पूरी रात भर जलता रहे ।
🕉️ 🔱 ॐ नमः शिवाय 🔱 🕉️
🕉️ 🔱 हर हर महादेव 🔱 🕉️
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- नक्षत्र (Nakshatra) – पुनर्वसु 10.09 AM तक तत्पश्चात पुष्य नक्षत्र,
- नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी – पुनर्वसु नक्षत्र के देवता अदिति (पृथ्वी देवी), बृहस्पति, एवं नक्षत्र के स्वामी गुरु बृहस्पति जी है ।
पुनर्वसु अर्थ पुन: शुभ या पुन: बसना होता है। पुनर्वसु नक्षत्र आकाश मंडल में 7वां नक्षत्र है ।
ज्योतिषशास्त्र में पुनर्वसु नक्षत्र को सबसे बड़ा और बहुत ही शुभ माना जाता है । यह मर्यादा पुरषोतम भगवान श्री राम जी का जन्म नक्षत्र है। मान्यता है कि पुनर्वसु जातक के यहा केवल पुत्र ही होता है।
माना जाता है कि जिसका जन्म इस नक्षत्र में होता है, वे दूसरों की सेवा करने, भलाई करने के लिए सदैव तैयार रहते हैं । पुनर्वसु प्रत्येक कार्य के शुभारम्भ के लिए, नयी शुरुआत के लिए श्रेष्ठ होता है।
पुनर्वसु नक्षत्र का आराध्य वृक्ष: बांस / बांबू और नक्षत्र का स्वभाव चर माना गया है ।
इस नक्षत्र में जन्मे जातक व्यव्हार कुशल, शांत, परोपकारी, धार्मिक,सुखी, दानी, न्यायप्रिय, लोकप्रिय, पुत्रवान होते हैं।
लेकिन यदि गुरु, बुध और चन्द्रमा शुभ ना जो तो ऐसा जातक कामुक, दब्बू,, बुद्धिहीन, कंजूस और थोड़े में ही संतुष्ट रहने वाला होता है।
इस नक्षत्र की स्त्रियां शांत लेकिन अकस्मात उग्र होने वाली, विलासी जीवन जीने वाली, कामुक, सौन्दर्यप्रेमी और आशावादी मानी जाती है ।
पुनर्वसु नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 3, भाग्यशाली रंग, सुनहरा, भाग्यशाली दिन गुरुवार का माना जाता है ।
पुनर्वसु नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ आदित्याय नम:”। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।
- योग :- सिद्धि 18.51 PM तक तत्पश्चात व्यतिपात
- योग केस्वामी:- सिद्धि योग के स्वामी भगवान गणेश जी एवं स्वभाव श्रेष्ठ है ।
- प्रथम करण : – विष्टि 15.22 PM तक
- करण के स्वामी, स्वभाव :- विष्टि करण के स्वामी यम और स्वभाव क्रूर है ।
- द्वितीय करण : – शकुनि 01.52 AM बुधवार 12 अगस्त तक
- करण के स्वामी, स्वभाव :- शकुनि करण की स्वामी माँ काली और स्वभाव क्रूर है ।
- ब्रह्म मुहूर्त : 04.22 AM से 5.05 AM तक
- विजय मुहूर्त : 14.39 PM से 15.32 PM तक
- गोधूलि मुहूर्त : 19.04 PM से 19.26 PM तक
- अमृत काल : 07.59 AM से 09.25 PM तक
- शिव वास :- शमशान में 01.52 AM बुधवार 12 अगस्त तक
- शिव वास : श्मशान में जब भगवान शिव का श्मशान में वास होता हैं, तो रुद्र अभिषेक आदि करना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ जी का श्मशान में वास के दौरान अभिषेक करने से मृत्यु समान परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
- अग्नि वास : आकाश में
अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।
- दिशाशूल (Dishashool)- मंगलवार को उत्तर दिशा का दिकशूल होता है।
यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से गुड़ खाकर जाएँ । - गुलिक काल : – दोपहर 12:00 से 01:30 तक है ।
- राहुकाल (Rahukaal) दिन – 3:00 से 4:30 तक।
- सूर्योदय – प्रातः 05:48
- सूर्यास्त – सायं 19:04
- विशेष – चतुर्दशी, श्राद्ध और व्रत के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना, सहवास करना, क्रोध करना, हिंसा करना निषिद्ध कहा गया है ।
- पर्व – त्यौहार- सावन माह की शिवरात्रि
“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।
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