मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang, 11 अगस्त 2026 का पंचांग,

मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang, 11 अगस्त 2026 का पंचांग,

आप सभी शिवभक्तों को सावन माह की शिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें, आप पर भगवान शंकर जी की असीम कृपा बनी रहे ।


मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang,

Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)




पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए मंगलवार का पंचांग (Mangalvar Ka Panchang)।

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

आज का पंचांग, Aaj ka Panchang, मंगलवार का पंचांग, Mangalvar Ka Panchang,

11 अगस्त Ka Panchang, 11 August का पंचांग, 2026 ka panchang,

हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।

मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद


।। आज का दिन मंगलमय हो ।।

  • दिन (वार) – मंगलवार Mangalwar के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।

    मंगलवार Mangalwar को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।

    मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।

    नवरात्री में घर, कारोबार में इस विधि से करें कलश की स्थापना, अवश्य जानिए कलश स्थापना की सही और बहुत ही आसान विधि,

    मंगलवार के व्रत से सुयोग्‍य संतान की प्राप्ति होती है, बल, साहस और सम्मान में भी वृद्धि होती है।

    मंगलवार को धरती पुत्र मंगलदेव की आराधना करने से जातक को मुक़दमे, राजद्वार में सफलता मिलती है, उत्तम भूमि, भवन का सुख मिलता है, मांगलिक दोष दूर होता है।


    जीवन में समस्त संकटो को दूर करने, सफलता का द्वार खोलने के लिए नवरात्री के मंगलवार को अवश्य ही करें ये उपाय

    आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,
  • इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । नित्य पंचांग को पढ़ने से देवताओं का आशीर्वाद मिलता है, पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है ।

*विक्रम संवत्- 2083,
*शक संवत – 1948

*कलि सम्वत – 5128
*अयन –
दक्षिणायण
*ऋतु –
वर्षा ऋतु
*मास –
सावन माह,
*पक्ष – कृष्ण पक्ष
*चंद्र बल – वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर, कुम्भ ,

मंगलवार को मंगल की होरा :-

प्रात: 5.48 AM से 6.54 AM तक

दोपहर 01.32 PM से 2.39 PM तक

रात्रि 20.52 PM से 21.45 PM तक

मंगलवार को मंगल की होरा में हाथ की निम्न मंगल पर दो बूंद सरसो का तेल लगा कर उसे हल्के हल्के रगड़ते हुए अधिक से अधिक मंगल देव के मन्त्र का जाप करें ।

कृषि, भूमि, भवन, इंजीनियरिंग, खेलो, साहस, आत्मविश्वास

और भाई के लिए मंगल की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

मंगलवार के दिन मंगल की होरा में मंगल देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में मंगल मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

गुरु पूर्णिमा पर इस मन्त्र का अवश्य ही करें जाप, जानिए गुरु पूर्णिमा का उपाय,

मंगल देव के मन्त्र

ॐ अं अंगारकाय नम: अथवा

ॐ भौं भौमाय नम:”

जरूर पढ़े :-  जीवन में समस्त संकटो को दूर करने, सफलता का द्वार खोलने के लिए नवरात्री के मंगलवार को अवश्य ही करें ये उपाय,

तिथि :- चतुर्दर्शी तिथि 01.52 AM बुधवार 12 अगस्त तक,

तिथि के स्वामी :- चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी है ।

🕉️ सावन की शिवरात्रि 2026🕉️
भगवान शिव की आराधना, उपवास और आत्मशुद्धि का परम पावन पर्व

सावन का पूरा महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इसी पवित्र महीने में आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को सावन शिवरात्रि कहा जाता है। वर्ष 2026 में सावन शिवरात्रि मंगलवार, 11 अगस्त को मनाई जाएगी। उत्तर भारत की पंचांग परंपरा के अनुसार यह तिथि विशेष रूप से शिवभक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

🌿 सावन शिवरात्रि क्यों है इतनी विशेष ?

हर मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी शिवरात्रि कहलाती है। इनमें फाल्गुन की शिवरात्रि को “महाशिवरात्रि” के रूप में विशेष प्रतिष्ठा मिली है, जबकि श्रावण कृष्ण चतुर्दशी की शिवरात्रि सावन शिवरात्रि कहलाती है।

शिवरात्रि का अर्थ ही है—शिव की वह रात्रि जिसमें साधना, ध्यान, जप और आत्मसंयम का विशेष महत्व है।

श्रावण मास भगवान शिव की आराधना का विशेष मास माना जाता है। इस पूरे महीने में शिवलिंग पर जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र तथा “ॐ नमः शिवाय” का जाप करने की परंपरा है।

सावन शिवरात्रि पर इन साधनाओं का विशेष महत्व माना जाता है क्योंकि यह श्रावण मास की कृष्ण चतुर्दशी है। शैव परंपरा में शिवरात्रि को भगवान शिव की उपासना, जागरण और आत्मचिंतन की विशेष रात्रि माना गया है।

📖 वेद, पुराण और हिन्दू धर्मग्रंथों में महत्व

शिव की उपासना का आधार वैदिक परंपरा तक जाता है। ऋग्वेद में रुद्र की स्तुति मिलती है और यजुर्वेद के श्री रुद्रम में रुद्र-शिव की व्यापक उपासना की गई है।

शिव पुराण में शिवरात्रि-व्रत और भगवान शिव की उपासना की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है। शिवरात्रि-व्रत में उपवास, शिवलिंग का पूजन, अभिषेक, मंत्र-जप और रात्रि-जागरण को विशेष साधना माना गया है।

पुराणों में भगवान शिव को कल्याणकारी, आशुतोष, करुणामय और भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होने वाले देव के रूप में वर्णित किया गया है।

स्कन्द पुराण के नागर खण्ड में शिवरात्रि के प्रसंग में स्पष्ट रूप से उपवास और रात्रि-जागरण का उल्लेख मिलता है। इसके अनुदार शिवरात्रि आने पर जो व्यक्ति व्रत रखकर पवित्र रहता है और रातभर जागता है, उसे सभी शिवलिंगों के दर्शन के समान फल प्राप्त होता है।

अग्नि पुराण, अध्याय 193 — “शिवरात्रिव्रत” में शिवरात्रि-व्रत को “भुक्तिमुक्तिप्रदम्” कहा गया है—अर्थात ऐसा व्रत जो सांसारिक कल्याण और आध्यात्मिक मुक्ति, दोनों से जोड़ा गया है। उसी अध्याय में उपवास, रात्रि-जागरण और शिवपूजन का विधान आता है अर्थात जो भोग और मोक्ष दोनों प्रदान करने वाला है।

शिवरात्रि की सबसे अद्भुत बात—बिना जाने की गई शिव-पूजा भी स्वीकार हो जाती है ।

शिव पुराण की कोटिरुद्र संहिता में शिकारी गुरुद्रुह की कथा आती है उसने जीवन में बहुत पाप किया । एक बार उसे कई दिनों तक शिकार करने में सफलता नहीं मिली, वह और उसके परिवार के सदस्य भूख से बहुत व्याकुल हो गए।

परिवार के लिए भोजन की तलाश में वह जंगल गया, लेकिन शिकार नहीं मिला, कुछ ही देर में रात्रि हो गई । फिर उसे एक तालाब नज़र आया उसने सोचा कि कोई न कोई पशु पानी पीने अवश्य आएगा। मैं उसे मारकर घर ले जाऊँगा और अपने परिवार की भूख मिटाऊँगा।

वह अपने साथ पानी लेकर बेल के वृक्ष के ऊपर चढ़ गया और शिकार के इंतज़ार में पूरी रात जागता रहा। उस दिन शिवरात्रि का पर्व आया वह इस दिन के महत्त्व से बिलकुल अनजान था।

बेल पत्र के वृक्ष के नीचे शिवलिंग स्थापित था, जिसका उसे पता भी नहीं था। वह वृक्ष से बेलपत्र तोड़ता रहा और उसके साथ जल भी शिवलिंग पर गिरता रहा। इस प्रकार अनजाने में ही उससे उपवास + रात्रि-जागरण + जलाभिषेक + बेलपत्र अर्पण—शिवरात्रि के प्रमुख अंग पूरे हो गए । उस पर भगवान की कृपा हुई उसका ह्रदय परिवर्तन हुआ, उसने नीचे उतर का शिवलिंग को प्रणाम करके सोचा कि वह अबसे जीवन में कभी भी शिकार नहीं करेगा ।

उसके ऐसे विचार से भगवान शिव उससे प्रसन्न हो गए। भगवान शिव ने उसे अपना दिव्य स्वरूप दिखाया और प्रेमपूर्वक कहा—

मैं तुम्हारी भक्ति से प्रसन्न हूँ तुम्हारी जो मनोकामना हो वो वरदान मांगो। उसने भगवान शिव के चरणों में गिरकर कहा— “अब मुझे सब कुछ प्राप्त हो गया।”

भगवान शिव ने उसे “गुह” नाम दिया और उसे दिव्य वरदान प्रदान किया। भगवान शिव ने कहा कि वह शृंगवेरपुर में अपना निवास बनाए, सुखपूर्वक जीवन बिताए और उसकी वंश-परंपरा सुरक्षित रहे।

भगवान शिव ने यह भी वरदान दिया कि भविष्य में देवताओं द्वारा भी पूजित भगवान श्रीराम उसके घर आएंगे और उससे मित्रता करेंगे। और अंततः भगवान शिव की सेवा करते हुए वह दुर्लभ मोक्ष प्राप्त करेगा।

इसीलिए शिवरात्रि केवल किसी मनोकामना की पूर्ति के लिए पूजा करने का दिन नहीं, बल्कि अपने मन, वाणी और कर्म को शिवमय बनाने का अवसर भी है।

🔱 सावन शिवरात्रि पर क्या करें?

  1. प्रातः स्नान करके संकल्प लें : सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान शिव के सामने अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत एवं पूजा का संकल्प लें।
  2. शिवलिंग पर जलाभिषेक करें : शिवलिंग पर स्वच्छ जल अर्पित करें। सामर्थ्य हो तो गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और जल से विधिपूर्वक अभिषेक किया जा सकता है।
  3. बेलपत्र अर्पित करें : भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय माना जाता है। बेलपत्र अर्पित करते समय श्रद्धा से कहें: “ॐ नमः शिवाय”
  4. “महामृत्युंजय मंत्र” एवं ” शिव पंचाक्षर” मंत्र का अधिक से अधिक जाप करें :

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

ॐ नमः शिवाय

यह शिव उपासना का अत्यंत प्रसिद्ध पंचाक्षरी मंत्र है। शिवरात्रि पर शांत मन से इसका जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

  1. रात्रि में शिव पूजा करें: शिवरात्रि की विशेषता रात्रि-पूजन में है। परंपरागत रूप से रात्रि को चार प्रहरों में शिवपूजन करने की परंपरा है।

प्रथम प्रहर — शिव पूजन एवं जलाभिषेक, शरीर का संयम
द्वितीय प्रहर — अभिषेक एवं मंत्र-जप, मन की शुद्धि
तृतीय प्रहर — शिव स्तुति, महामृत्युंजय मंत्र अहंकार का त्याग
चतुर्थ प्रहर — ध्यान, जप एवं आरती आत्मचिंतन और शिव में समर्पण

जो लोग पूरी रात जागरण नहीं कर सकते, वे अपनी सुविधा और श्रद्धा के अनुसार रात्रि में एक बार भी भगवान शिव का पूजन कर सकते हैं।

6. दान-पुण्य करें : इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार— अन्न दान, वस्त्र दान, गौसेवा, जरूरतमंदों की सहायता, गरीबों को भोजन, जल की व्यवस्था करना पुण्यकारी माना जाता है।

🌸 सावन शिवरात्रि पर क्या चढ़ाएं?

भगवान शिव को श्रद्धा से अर्पित किए जा सकते हैं:

💧 जल
🌿 बेलपत्र
🌸 पुष्प
🌾 अक्षत
🥥 नारियल
🍎 फल
🥛 दूध
🍯 शहद
🌿 भांग — जहाँ स्थानीय/परंपरागत पूजा-विधि में मान्य हो

सबसे महत्वपूर्ण वस्तु आपकी श्रद्धा है।

🚫 सावन शिवरात्रि पर क्या न करें?

शिवरात्रि का व्रत केवल भोजन छोड़ने का नाम नहीं है। यह मन, वाणी और व्यवहार पर संयम का पर्व भी है।

इसलिए इस दिन यथासंभव:

❌ मांसाहार न करें ❌ शराब अथवा नशे से दूर रहें ❌ क्रोध न करें ❌ किसी का अपमान न करें ❌ झूठ और छल से बचें❌ किसी के प्रति ईर्ष्या या द्वेष न रखें ❌ अनावश्यक विवाद न करें ❌ अपशब्द न बोलें ❌ हिंसा से बचें ❌ दिखावे के लिए पूजा न करें

इस दिन ब्रत रखें, व्रत रखने वाले सामान्यतः सात्त्विक फलाहार करते हैं। फल, दूध, मखाना, साबूदाना, कुट्टू आदि का सेवन परंपरा के अनुसार किया जाता है।

व्रत स्वास्थ्य और अपनी क्षमता के अनुसार ही रखें। केवल धार्मिक उत्साह में अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक कठोर उपवास करना आवश्यक नहीं है।

आज सावन माह की शिवरात्रि और कल सावन माह की अमावस्या, हरियाली अमावस्या की रात्रि में किसी भी शिवमंदिर में एक ऐसा बड़ा घी का दीपक जरूर जलाएं जो पूरी रात भर जलता रहे ।

🕉️ 🔱 ॐ नमः शिवाय 🔱 🕉️

🕉️ 🔱 हर हर महादेव 🔱 🕉️

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  • नक्षत्र (Nakshatra) – पुनर्वसु 10.09 AM तक तत्पश्चात पुष्य नक्षत्र,
  • नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी –      पुनर्वसु नक्षत्र के देवता अदिति (पृथ्वी देवी), बृहस्पति, एवं नक्षत्र के स्वामी गुरु बृहस्पति जी है ।

 पुनर्वसु अर्थ पुन: शुभ या पुन: बसना होता है। पुनर्वसु नक्षत्र आकाश मंडल में  7वां नक्षत्र है ।

ज्योतिषशास्त्र में पुनर्वसु नक्षत्र को सबसे बड़ा और बहुत ही शुभ माना जाता है । यह मर्यादा पुरषोतम भगवान श्री राम जी का जन्म नक्षत्र है। मान्यता है कि पुनर्वसु जातक के यहा केवल पुत्र ही होता है।

माना जाता है कि जिसका जन्म इस नक्षत्र में होता है, वे दूसरों की सेवा करने, भलाई करने के लिए सदैव तैयार रहते हैं  । पुनर्वसु प्रत्येक कार्य के शुभारम्भ के लिए, नयी शुरुआत के लिए श्रेष्ठ होता है। 

पुनर्वसु नक्षत्र का आराध्य वृक्ष: बांस / बांबू और नक्षत्र का स्वभाव चर माना गया है ।

इस नक्षत्र  में जन्मे जातक व्यव्हार कुशल, शांत, परोपकारी, धार्मिक,सुखी, दानी, न्यायप्रिय, लोकप्रिय, पुत्रवान होते हैं।

लेकिन यदि गुरु, बुध और चन्द्रमा शुभ ना जो तो ऐसा जातक कामुक, दब्बू,, बुद्धिहीन, कंजूस और थोड़े में ही संतुष्ट रहने वाला होता है।

इस नक्षत्र की स्त्रियां शांत लेकिन अकस्मात उग्र होने वाली, विलासी जीवन जीने वाली, कामुक, सौन्दर्यप्रेमी और आशावादी मानी जाती  है ।

पुनर्वसु नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 3, भाग्यशाली रंग, सुनहरा, भाग्यशाली दिन गुरुवार का माना जाता है ।

पुनर्वसु नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ आदित्याय नम:”। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।

  • योग :- सिद्धि 18.51 PM तक तत्पश्चात व्यतिपात
  • योग केस्वामी:-    सिद्धि योग के स्वामी भगवान गणेश जी एवं स्वभाव श्रेष्ठ है ।
  • प्रथम करण : – विष्टि 15.22 PM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :- विष्टि करण के स्वामी यम और स्वभाव क्रूर है ।
  • द्वितीय करण : – शकुनि 01.52 AM बुधवार 12 अगस्त तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :- शकुनि करण की स्वामी माँ काली और स्वभाव क्रूर है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 04.22 AM से 5.05 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.39 PM से 15.32 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 19.04 PM से 19.26 PM तक
  • अमृत काल : 07.59 AM से 09.25 PM तक

  • शिव वास :- शमशान में 01.52 AM बुधवार 12 अगस्त तक

  • शिव वास  :  श्मशान में   जब भगवान शिव का श्मशान में वास होता हैं, तो रुद्र अभिषेक आदि  करना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ जी का  श्मशान में वास के दौरान अभिषेक करने से मृत्यु समान  परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

  • अग्नि वास : आकाश में

    अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।
  • दिशाशूल (Dishashool)- मंगलवार को उत्तर दिशा का दिकशूल होता है।

    यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से गुड़ खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – दोपहर 12:00 से 01:30 तक है ।
  • राहुकाल (Rahukaal) दिन – 3:00 से 4:30 तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 05:48
  • सूर्यास्त – सायं 19:04
  • विशेष – चतुर्दशी, श्राद्ध और व्रत के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना, सहवास करना, क्रोध करना, हिंसा करना निषिद्ध कहा गया है ।
  • पर्व – त्यौहार- सावन माह की शिवरात्रि

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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### *प्रस्तुतकर्ता*:  
### *आचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय*  
### *अध्यात्म ज्योतिष परामर्श केंद्र*  
### *श्याम नगर, रायपुर, छत्तीसगढ़*  
### _📞 _9425203501 | 7000121183 | 7587346995 | 0771-4070168__
 हर समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है
*ॐ नमः शिवाय | जय सनातन* 🚩

दोस्तों यह साईट बिलकुल निशुल्क है। यदि आपको इस साईट से कुछ भी लाभ प्राप्त हुआ हो, आपको इस साईट के कंटेंट पसंद आते हो तो मदद स्वरुप आप इस साईट को प्रति दिन ना केवल खुद ज्यादा से ज्यादा विजिट करे वरन अपने सम्पर्कियों को भी इस साईट के बारे में अवश्य बताएं …..
धन्यवाद ।

सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang, 10 अगस्त 2026 का पंचांग,

सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang, 10 अगस्त 2026 का पंचांग,

आप सभी शिव भक्तो को सावन के सोमवार, सोम प्रदोष ब्रत की हार्दिक शुभकामनायें, हर हर महादेव

सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang, 10 अगस्त 2026 का पंचांग, 10 August 2026 ka Panchang,

मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

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आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद


Panchang, पंचाग, आज का पंचांग, aaj ka panchang, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए, सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang।

सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang,

10 अगस्त 2026 का पंचांग, 10 August 2026 ka Panchang,

महा मृत्युंजय मंत्रॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।

  • दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।

    सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।

सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।

जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।

सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।

घर पर कैसा भी हो वास्तु दोष अवश्य करें ये उपाय, जानिए वास्तु दोष निवारण के अचूक उपाय

*विक्रम संवत् – 2083,
* शक संवत – 1948,
*कलि संवत – 5128
*कलयुग – 5128 वर्ष
* अयन – दक्षिणायण,
* ऋतु – वर्षा ऋतु,
* मास – सावन माह,
* पक्ष – कृष्ण पक्ष
*चंद्र बल – वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर, कुम्भ,

सोमवार को चन्द्रमा की होरा :-

प्रात: 5.47 AM से 6.54 AM तक

दोपहर 01.33 PM से 2.39 PM तक

रात्रि 8.52 PM से 9.46 PM तक

सोमवार को चन्द्रमा की होरा में अधिक से अधिक चन्द्र देव के मन्त्र का जाप करें। यात्रा, प्रेम, प्रसन्नता, कला सम्बन्धी कार्यो के लिए चन्द्रमा की होरा अति उत्तम मानी जाती है।


आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,भारत की लगभग 150 करोड़ की आबादी में 0.001 % अर्थात लगभग 15 हज़ार आदमी ही नित्य पंचांग पढ़ पाते है।

आप पर ईश्वर की असीम कृपा है जो आपको नित्य पंचांग पढ़ने का, अपने भाग्य को प्रबल करने का, पापो के प्रायश्चित करने का अवसर मिल रहा है,

दुनिया के सारे उपाय एक तरफ है, और नित्य पंचाग पढ़ने का पुण्य उससे भी कहीं अधिक है, नित्य पंचांग पढ़ने से देवताओं का आशीर्वाद मिलता है, कार्य सिद्ध होने लगते है,

इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है ।

सोमवार के दिन चन्द्रमा की होरा में चंद्रदेव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में चंद्र देव मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

चन्द्रमा के मन्त्र

ॐ सों सोमाय नम:।

ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम: ।

  • तिथि (Tithi) – द्वादशी 08.00 AM तक तत्पश्चात त्रियोदशी,
  • तिथि का स्वामी – द्वादशी तिथि के स्वामी भगवन श्री हरी विष्णु जी और त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी है ।
     
  • हिंदू पंचाग की बाहरवीं तिथि द्वादशी (Dwadashi) कहलाती है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि, श्री विष्णु जी है ।
  • इस तिथि का नाम यशोबला भी है, क्योंकि इस दिन भगवान श्री विष्णु जी / भगवान श्रीकृष्ण जी का आंवले, इलाइची, पीले फूलो से पूजन करने से यश,  बल और साहस की प्राप्ति होती है।  
  • द्वादशी को श्री विष्णु जी की पूजा , अर्चना करने से मनुष्य को समस्त भौतिक सुखो और ऐश्वर्यों की प्राप्ति होती है, उसे समाज में सर्वत्र आदर मिलता है, उसकी समस्त मनोकामनाएं निश्चय ही पूर्ण होती है।
  • द्वादशी तिथि के दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना अत्यन्त श्रेयकर होता है।  द्वादशी के दिन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करें ।
  • भगवान विष्णु के भक्त बुध ग्रह का जन्म भी द्वादशी तिथि के दिन माना जाता है। इस दिन विष्णु भगवान के पूजन से बुध ग्रह भी मजबूत होता है ।
  • यदि द्वादशी तिथि सोमवार और शुक्रवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। द्वादशी यदि रविवार के दिन पड़ती है तो क्रकच योग बनाती है, यह अशुभ माना जाता है, इसमें भी शुभ कार्य करना मना किया गया हैं।
  • लेकिन द्वादशी तिथि जब बुधवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है,  ऐसे समय में किये गए कार्य कार्य सिद्ध होते है।
  • द्वादशी तिथि में विष्टि करण होने के कारण इस तिथि को भद्रा तिथि भी कहते है।
  • द्वादशी तिथि के दिन विवाह, तथा अन्य शुभ कार्य किये जाते है लेकिन इस तिथि में नए घर का निर्माण, ग्रह प्रवेश करना मना किया जाता है ।
  • द्वादशी के दिन तुलसी तोड़ना निषिद्ध है।  द्वादशी के दिन यात्रा नहीं करनी चाहिए, इस दिन यात्रा करने से धन हानि एवं असफलता की सम्भावना रहती है।  द्वादशी के दिन मसूर का सेवन वर्जित है। 
  • द्वादशी की दिशा नैऋत्य मानी गई है इस दिन इस दिशा की ओर किए गए कार्य शुभ फल देने वाले माने जाते हैं।

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आज सावन माह का दूसरा सोमवार है । सावन माह गुरुवार 30 जुलाई से प्रारम्भ हो चूका है, भगवान भोलनाथ को सावन का सोमवार अत्यंत प्रिय है । मान्यता है की सावन माह में शिवलिंग पर मात्र जल चढ़ाने से भगवान शंकर जी अत्यंत प्रसन्न हो जाते है ।

ऐसी मान्यता है कि सावन के सोमवार का ब्रत रखने, इस दिन शिवलिंग का विधि पूर्वक अभिषेक करने से जीवन से सभी संकटो का नाश होता है, इस वर्ष सावन में 4 सोमवार पड़ रहे है ।

समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने समस्त सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था, और वह नीलकंठ महादेव कहलाएं । देवताओं ने उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए जल अर्पित किया। तभी से सावन में जलाभिषेक की परंपरा प्रचलित हुई।

सावन में भगवान शंकर और माँ पारवती की पूजा करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है, परिवार में प्रेम और सौहर्द का वातावरण बनता है ।

मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या सफल होने पर शिव-पार्वती का दिव्य मिलन हुआ। इसलिए अविवाहित कन्याएँ तथा युवक भी उत्तम जीवनसाथी की कामना से सावन के सोमवार का व्रत रखते हैं।

सावन के सोमवार का ब्रत रहने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन मधुर बनता है, स्वास्थ्य एवं मानसिक शांति मिलती है, संतान सुख एवं परिवार में मंगल बना रहता है, शिव कृपा से जीवन की समस्त बाधाएँ दूर होती हैं।

सावन के सोमवार के दिन शिवलिंग का पंचामृत, दूध, दही, घी, शहद, गन्ने का रस से अभिषेक करके, बेल पत्र, शमी पत्र, भांग, धतूरा, आक का पुष्प, काले तिल, अक्षत चढ़ाकर पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है ।

सावन के सोमवार के दिन ॐ नम: शिवाये,

श्री शिवाये नमस्तुभ्यं अथवा

महामृत्युंजय मन्त्र :-

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

का अधिक से अधिक जाप अवश्य ही करें ।

भगवान शिव की पूजा में रुद्राभिषेक का अत्यंत महत्व है। वैसे अन्य सभी माह में रुद्राभिषेक के लिए मुहूर्त देखना पड़ता है लेकिन सावन मास में प्रत्येक दिन ‘रुद्राभिषेक’ किया जाना बहुत शुभ माना जाता है।

‘शिवपुराण’ में लिखा भी है कि भगवान भोलेनाथ स्वयं ही जल हैं, इसलिए इसमें कोई भी संशय नहीं है की जल द्वारा शिवजी का अभिषेक उनकी कृपा प्राप्त करने के सर्वोत्तम मार्ग है।

कहते है कि भगवान शिव सावन के महीने में पृथ्वी पर अवतरित होकर अपनी ससुराल गए थे और वहां पर उनका स्वागत भव्य रूप से अभिषेक द्वारा किया गया था, इसलिए भी यह माह शिवजी को विशेष रूप से प्रिय है।

तभी से माना जाता है कि भगवान शिव प्रत्येक वर्ष सावन माह में अपनी ससुराल आते हैं और सभी मनुष्यो के लिए भगवान शिव की कृपा पाने का यह स्वर्णिम अवसर होता है।

सावन सोमवार के दिन क्या करें ?

प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग का गंगाजल, जल, दूध, दही, शहद, घी एवं शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करें।

बेलपत्र (तीन पत्तियों वाला), शमी पत्र, धतूरा, आक के फूल, भांग, सफ़ेद पुष्प, सफेद चंदन एवं फल अर्पित करें।

ॐ नमः शिवाय मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें।

इस दिन शिव चालीसा, शिव तांडव स्तोत्र, महामृत्युंजय मंत्र तथा रुद्राभिषेक का पाठ करें।

गरीबों एवं जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र एवं दक्षिणा का दान करें।

सावन के सोमवार के दिन यथाशक्ति व्रत रखें और इस दिन सात्विक भोजन करें।

इस दिन शिवलिंग पर हल्दी, केतकी का फूल तथा तुलसी दल अर्पित न करें।

“सावन का प्रत्येक सोमवार आपके जीवन में भगवान भोलेनाथ की असीम कृपा, उत्तम स्वास्थ्य, सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति लेकर आए।

हर हर महादेव! ॐ नमः शिवाय!”

आज सावन माह के सोमवार के दिन प्रदोष ब्रत का अति पुण्यदायक संयोग है, सोमवार को होने के कारण इसे सोम प्रदोष ब्रत कहा जायेगा । सावन माह में आने के कारण इस प्रदोष ब्रत का और भी अधिक महत्व हो गया है ।

प्रदोष तिथि को भगवान भोलेनाथ जी का ब्रत रखा जाता है। मान्यता है कि जो जातक प्रदोष का व्रत रख कर संध्या के समय शंकर जी की आराधना करते हैं उन्हें योग्य जीवन साथी मिलता है, दाम्पत्य जीवन में प्रेम और सहयोग बना रहता है ।

मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती का पूजन करने से जीवन में सुख – सौभाग्य की वर्षा होती है, साथ ही जातक के सभी संकट दूर हो जाते हैं । ।

प्रदोष व्रत में सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक पूजा करने का विशेष महत्त्व है । इस दिन सम्पूर्ण शिव परिवार का पूजन करने से भगवान शिव अपने भक्त पर बहुत प्रसन्न होते है ।

प्रदोष व्रत को महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखती हैं।प्रदोष ब्रत रखने वाले जातक के पूरे परिवार पर भगवान भोलनाथ और माँ पार्वती की सदैव असीम कृपा बनी रहती है ।

प्रदोष ब्रत के दिन शिव पंचाक्षर मन्त्र ॐ नम: शिवाय तथा

महामृत्युंजय मन्त्र :- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
का जाप करने से सहस्त्र गुना पुण्य की प्राप्ति होती है ।

प्रदोष को प्रदोष कहने के शास्त्रों में एक मिलती है। माना जाता है कि एक बार चंद्र देव को क्षय रोग हो गया, जिसके कारण उन्हें बहुत कष्ट हो रहा था।

अपने रोग के निवारण के लिए चंद्र देव जी भगवान शिव के पास गए, प्रभु ने चंद्र देव के क्षय रोग का निवारण त्रयो करके उन्हें त्रियोदशी के दिन ही पुन:जीवन प्रदान किया था तभी से इस दिन को प्रदोष कहा जाने लगा है ।

प्रदोष व्रत में फलाहार किया जाता है इस व्रत में अन्न, चावल, लाल मिर्च, सादा नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

नक्षत्र (Nakshatra) – आद्रा 12.26 PM तक तत्पश्चात पुनर्वसु

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी-        आर्द्रा नक्षत्र के देवता रुद्र (शिव) और नक्षत्र के स्वामी राहु जी है ।

  आर्द्रा नक्षत्र आकाश मंडल में छठवां नक्षत्र है। यह मिथुन राशि में आता है और राहु का नक्षत्र है। आर्द्रा नक्षत्र कई तारों का समूह न होकर केवल एक तारा है। इसका आकार हीरे अथवा वज्र अथवा आँसू की तरह है।

आद्रा नक्षत्र का आराध्य वृक्ष कृष्णागरू,काला तेंदू और नक्षत्र स्वभाव तीक्ष्ण माना गया है ।

आर्द्रा नक्षत्र आकाश मंडल में छठवां नक्षत्र है। यह मिथुन राशि में आता है और राहु का नक्षत्र है। आर्द्रा नक्षत्र कई तारों का समूह न होकर केवल एक तारा है। इसका आकार हीरे अथवा वज्र अथवा आँसू की तरह है।

आर्द्रा नक्षत्र का आराध्य वृक्ष कृष्णागरू,काला तेंदू और नक्षत्र स्वभाव तीक्ष्ण माना गया है ।

आर्द्रा नक्षत्र में जन्मे जातको पर राहु का प्रभाव रहता है अत: इन्हे राहु का उपाय अवश्य करना चाहिए । इन्हे अनैतिक कार्यो से सदैव दूर रहना चाहिए अन्यथा इन्हे अपमान अपयश का सामना करना पड़ सकता है ।

आर्द्रा नक्षत्र के पुरुष हंसमुख, जिम्मेदार, आकर्षक व्यक्तित्व वाले, नए नए खोजो वाले लेकिन चालाक और अपना काम निकलने वाले होते है। लेकिन यदि बुध और रा‍हु खराब हो तो जातक घमंडी, बुरे विचारों वाले, पराई स्त्री में आसक्त रहने वाले, दुखी स्वाभाव वाले भी होते हैं।

आर्द्रा नक्षत्र में पैदा हुई महिला बुद्विमान, व्यवहार कुशल और शांतिप्रिय होती हैं। यह खूब खर्चा करने वाली, लेकिन हमेशा मीन मेख निकालने वाली भी होती है।

समान्यता इनके माता-पिता में बहुत ही अनबन रहती है, अर्थात इन्हे घर में कलह देखना पड़ता है।

आर्द्रा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 2, 4, 7 और 9, भाग्यशाली रंग, लाल और बैंगनी,  भाग्यशाली दिन मंगलवार तथा गुरुवार का माना जाता है ।

आद्रा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातको को तथा सभी मनुष्यों को जिस दिन आर्द्रा नक्षत्र हो उस दिन ॐ रुद्राय नम: मन्त्र की एक माला का जप करना चाहिए, इससे आर्द्रा नक्षत्र के शुभ फल मिलते है ।  

आर्द्रा नक्षत्र के जातक के लिए भगवान शिव की आराधना करना शुभदायक होता है।  भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप करना चाहिए. सोमवार का व्रत एवं जाप इत्यादि करना उत्तम फल प्रदान करने वाला होता है। 

  अगर पश्चिम मुख का है आपका घर तो ऐसा रहना चाहिए आपके घर का वास्तु, जानिए पश्चिम दिशा के अचूक वास्तु टिप्स 


  • योग – वज्र 22.27 PM तक तत्पश्चात सिद्धि
  • योग केस्वामी:-    वज्र योग के स्वामी वरुण जी और स्वभाव हानिकारक माना जाता है ।
  • प्रथम करण : – तैतिल 08.00 AM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-    तैतिल करण के स्वामी विश्वकर्मा जी और स्वभाव सौम्य है ।

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  • द्वितीय करण : – गर 18.27 PM तक तत्पश्चात वणिज
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-    गर करण के स्वामी भूमि तथा स्वभाव सौम्य है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.22 AM से 5.05 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.39 PM से 15.32 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 19.05 PM से 19.27 PM तक
  • अमृत काल :- 17.07 PM से 18.42 PM तक
  • शिव वास :- नंदी पर 08.00 AM तक तत्पश्चात भोजन पर


    शिव वास :-  जब भगवान भोलेनाथ नन्दी जी पर विराजमान होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना सदैव बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों केअनुसार भगवान शंकर जी के नन्दी पर विराजमान के समय रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सफलता, शुभ समाचारो की प्राप्ति  होती है।


    शिव वास  :  शिव वास  :   भोजन में   जब भगवान भोलेनाथ जी भोजन कर रहे हों या ध्यान में मग्न हों तो उस समय रुद्र अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। भगवान शंकर जी के रात्रि भोजन अथवा ध्यान करते समय रुद्रभिषेक करने से परेशानी का सामना करना पड़ता है।

  • अग्निवास : पाताल पर 08.00 AM तक तत्पश्चात पृथ्वी पर

     जब पाताल में अग्नि वास है तो वह हवन से सम्बन्धित अनुष्ठानों के लिये शुभ नहीं मानी जाती है, यह अशुभ मानी गई है । अग्नि के पाताल  वास के दौरान किये जाने वाले हवन  सम्बन्धित अनुष्ठानों व्यक्ति को आर्थिक नुकसान करना पड़ता है उसका  धन नष्ट हो सकता है।


    अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।
  • विशेष – द्वादशी के दिन तुलसी तोड़ना,  मसूर का सेवन करना  वर्जित है।
  • द्वादशी के दिन यात्रा नहीं करनी चाहिए, इस दिन यात्रा करने से धन हानि एवं असफलता की सम्भावना रहती है।
  •  त्रियोदशी को बैगन नहीं खाना चाहिए , त्रियोदशी को बैगन खाने से पुत्र को कष्ट मिलता है ।
  • पर्व त्यौहार- सावन का दूसरा सोमवार, सोम प्रदोष ब्रत
  • मुहूर्त (Muhurt) –

“हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

अपने धर्म, अपनी संस्कृति अपने नैतिक मूल्यों के प्रचार, प्रसार के लिए तन – मन – धन से अपना बहुमूल्य सहयोग करें । आप हमें अपनी इच्छा – सामर्थ्य के अनुसार सहयोग राशि 94252 03501 पर Google Pay कर सकते है ।
आप पर ईश्वर की असीम अनुकम्पा की वर्षा होती रहे ।

10 अगस्त 2026 का पंचांग, 10 August 2026 ka Panchang, aaj ka panchang, aaj ka rahu kaal, aaj ka shubh panchang, monday ka panchang, monday ka rahu kaal, panchang, somvar ka panchang, somvar ka rahu kaal, somvar ka shubh panchang,

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 ### *प्रस्तुतकर्ता*:  
### *आचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय*  
### *अध्यात्म ज्योतिष परामर्श केंद्र*  
### *श्याम नगर, रायपुर, छत्तीसगढ़*  
### _📞 _9425203501 | 7000121183 | 7587346995 | 0771-4070168__

*ॐ नमः शिवाय | जय सनातन* 🚩


दोस्तों यह साईट बिलकुल निशुल्क है। यदि आपको इस साईट से कुछ भी लाभ प्राप्त हुआ हो, आपको इस साईट के कंटेंट पसंद आते हो तो मदद स्वरुप आप इस साईट को प्रति दिन ना केवल खुद ज्यादा से ज्यादा विजिट करे वरन अपने सम्पर्कियों को भी इस साईट के बारे में अवश्य बताएं …..धन्यवाद ।

रविवार का पंचांग, Raviwar Ka Panchag, 9 अगस्त का पंचांग 2026 का पंचांग,

रविवार का पंचांग, Raviwar Ka Panchag, 9 अगस्त का पंचांग 2026 का पंचांग,

आप सभी को कामिका एकादशी की हार्दिक शुभकामनायें


रविवार का पंचांग, Raviwar Ka Panchag,

9 अगस्त 2026 का पंचांग, 9 August 2026 ka Panchang,

अवश्य पढ़ें :-  मनचाही नौक री चाहते हो, नौकरी मिलने में आती हो परेशानियाँ  तो अवश्य करें ये उपाय 

Panchang, पंचाग, आज का पंचांग, aaj ka panchang, Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)



पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे । जानिए रविवार का पंचांग, Ravivar Ka Panchang।

रविवार का पंचांग, Ravivar Ka Panchang,
9 अगस्त
2026 का पंचांग, 9 August 2026 ka Panchang,

मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 94252 03501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद

जानिए नवरात्री में कन्या पूजन में माता के किन किन स्वरूपों की पूजा की जाती है

भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
।। आज का दिन अत्यंत मंगलमय हो ।।

👉🏽दिन (वार) रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।

इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।

घर पर कैसा भी हो वास्तु दोष अवश्य करें ये उपाय, जानिए वास्तु दोष निवारण के अचूक उपाय

रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है । अत: रविवार के दिन मंदिर में भैरव जी के दर्शन अवश्य करें ।

रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।

आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,

इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । नित्य पंचांग को पढ़ने से देवताओं का आशीर्वाद मिलता है, पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है ।

1593 Revisions

* विक्रम संवत् – 2083, वर्ष
* शक संवत – 1948, वर्ष
* कलि संवत — 5128, वर्ष
* कलयुग – 5128, वर्ष
* अयन – दक्षिणयान,
* ऋतु – वर्षा ऋतु,
* मास – सावन माह,
* पक्ष – कृष्ण पक्ष
* चंद्र बल – मेष, मिथुन, सिंह, कन्या, धनु, मकर,

रविवार को सूर्य देव की होरा :-

प्रात: 5.47 AM से 6.53 AM तक

दोपहर 01.33 PM से 02.40 PM तक

रात्रि 20.53 PM से 9.4 PM तक

रविवार को सूर्य की होरा में अधिक से अधिक अनामिका उंगली / रिंग फिंगर पर थोड़ा सा घी लगाकर मसाज करते हुए सूर्य देव के मंत्रो का जाप करें ।

सुख समृद्धि, मान सम्मान, सरकारी कार्यो, नौकरी, साहसिक कार्यो, राजनीती, कोर्ट – कचहरी आदि कार्यो में सफलता के लिए रविवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

रविवार के दिन सूर्य देव की होरा में सूर्य देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में सूर्य ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

अवश्य जानिए देव दीपावली किस दिन मनाई जाएगी, देव दीपावली क्यों मनाते है 

सूर्य देव के मन्त्र :-

ॐ भास्कराय नमः।।

अथवा

ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।

आज सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी अति शुभ “कामिका एकादशी” है । सनातन धर्म में एकादशी तिथि को भगवान श्री विष्णु की सर्वाधिक प्रिय तिथि माना गया है। इस दिव्य दिन भगवान श्रीहरि विष्णु एवं श्रीकृष्ण की उपासना, भक्ति और नाम-स्मरण करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।

शास्त्रों में कहा गया है कि जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक एकादशी व्रत का पालन करता है, वह भगवान श्री विष्णु को अत्यंत प्रिय हो जाता है तथा उस पर श्रीहरि की विशेष कृपा सदैव बनी रहती है।

वर्ष 2026 में कामिका एकादशी रविवार, 9 अगस्त 2026 को है। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 8 अगस्त को दोपहर 1:59 बजे शुरू होकर 9 अगस्त को सुबह 11:04 बजे समाप्त होगी।

यह देवशयनी एकादशी के बाद चातुर्मास में आने वाली महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक है। भगवान विष्णु की आराधना और व्रत के लिए इसे विशेष फलदायी माना जाता है।

‘कामिका’ शब्द का संबंध कामनाओं की पूर्ति से माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से मनुष्य के पापों का क्षय, मन की शुद्धि और भगवान की कृपा प्राप्त होती है।

कामिका एकादशी का विशेष संदेश है कि मनुष्य अपनी इच्छाओं को भगवान के चरणों में समर्पित करके भक्ति, संयम और सदाचार का मार्ग अपनाए।

✨ एकादशी के दिन अधिक से अधिक भगवान विष्णु के पवित्र मंत्रों का जाप करें —

🔸 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

या

🔸 ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

इन मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जप करने से मन, बुद्धि और आत्मा शुद्ध होती है तथा भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

🌿 एकादशी के दिन भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित कर पूजा अवश्य करें। ध्यान रहे कि तुलसी दल एकादशी के दिन नहीं तोड़ना चाहिए, बल्कि उसे एक दिन पूर्व दशमी तिथि में ही संग्रह कर लेना चाहिए।

🚿 शास्त्रों के अनुसार एकादशी के दिन जल में आँवले का चूर्ण या आँवले का रस मिलाकर स्नान करने से पापों का क्षय होता है और शरीर व मन दोनों पवित्र होते हैं।

🪔 रात्रि के समय भगवान विष्णु के समक्ष नौ बत्तियों वाला दीपक प्रज्ज्वलित करें तथा एक अखंड दीपक ऐसा जलाएँ जो पूरी रात प्रकाशित रहे। यह दीपक जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का प्रकाश फैलाता है।

🚫 एकादशी के दिन चावल तथा अन्न का सेवन वर्जित माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन चावल खाने से पाप और रोग बढ़ते हैं तथा दूसरे का अन्न ग्रहण करने से संचित पुण्यों का क्षय होता है।

🌺 एकादशी का व्रत केवल उपवास नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, भक्ति, संयम और भगवान श्रीहरि की कृपा प्राप्त करने का दिव्य साधन है।

🙏 “हरि स्मरण ही जीवन का सबसे बड़ा कल्याण है।”

श्रीहरि विष्णु की कृपा आप सभी पर सदैव बनी रहे।

🕉️ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥ 🕉️

अवश्य पढ़ें :अवश्य पढ़ें :- चेहरे से कील मुहाँसे हटाने हो तो तुरंत करें ये उपाय, कील मुहांसों को जड़ से हटाने के अचूक उपाय,

नक्षत्र :- मृगशिरा 14.43 PM तक तत्पश्चात आद्रा

नक्षत्र के स्वामी :-      मृगशिरा नक्षत्र के देवता ‘चंद्र देव’ एवं नक्षत्र स्वामी: ‘मंगळ देव’ जी है ।


नक्षत्रों के गणना क्रम में मृगशिरा नक्षत्र का स्थान पांचवां है। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल होने के कारण इस नक्षत्र में जन्मे जातको पर मंगल का प्रभाव अधिक रहता है। यह नक्षत्र एक हिरण के सिर जैसा प्रतीत होता है।

इस नक्षत्र का आराध्य वृक्ष खैर तथा स्वाभाव शुभ माना जाता है। मृगशिरा नक्षत्र सितारा का लिंग तटस्थ है।

चन्द्रमा का असर होने के कारण इस राशि के जातक कल्पनाशील, भावुक, सौंदर्य प्रेमी, बुद्धिमान, परिश्रमी, उत्साहीऔर ज्ञानवान होते हैं।

लेकिन आप लोगो पर शक बहुत करते है, व्यापार में साझेदारी करने से इन्हे अधिकतर नुकसान ही उठाना पड़ता है । इस नक्षत्र में जन्मी स्त्रियाँ हंसमुख, धनवान, जीवन साथी के प्रति समर्पित लेकिन उस पर हावी रहती है ।

मृगशिरा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 9, भाग्यशाली रंग, चमकीला भूरा, कत्थई रंग,  भाग्यशाली दिन मंगलवार तथा गुरुवार का माना जाता है ।

मृगशिरा नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ चन्द्रमसे नम:” मन्त्र की एक माला का जाप करना चाहिए ।

मॄगशिरा नक्षत्र के जातको को माँ पार्वती की आराधना अत्यंत शुभ फलदाई है ।  मॄगशिरा नक्षत्र के दिन चावल और दही के दान से भी इस नक्षत्र के अशुभ फलो को दूर किया जा सकता है ।


घर के बैडरूम में अगर है यह दोष तो दाम्पत्य जीवन में आएगी परेशानियाँ, जानिए बैडरूम के वास्तु टिप्स

  • योग (Yog) – हर्षण 02.04 AM सोमवार 10 अगस्त तक
  • योग के स्वामी :-        हर्षण योग के स्वामी भग देव जी और स्वभाव श्रेष्ठ है ।
  • प्रथम करण : – बालव 11.04 AM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-    बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।
  • द्वितीय करण : – कौलव 21.33 PM तक तत्पश्चात तैतिल
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-     कौलव करण के स्वामी मित्र और स्वभाव सौम्य है ।

  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.22 AM से 5.04 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.40 PM से 15.33 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 19.06 PM से 19.27 PM तक
  • अमृत काल :- अमृत काल 06.22 AM से 08.09 AM तक


    शिव वास – कैलाश पर 11.04 AM तक तत्पश्चात नंदी जी पर


    शिव वास :-  कैलाश पर :- जब भगवान भोलेनाथ जी कैलाश पर होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार  भगवान शंकर जी के  कैलाश पर्वत पर रहने के दौरान रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सुखो की प्राप्ति होती है।

    शिव वास  :   नन्दी जी पर:-  जब भगवान भोलेनाथ नन्दी जी पर विराजमान होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना सदैव बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों केअनुसार भगवान शंकर जी के नन्दी पर विराजमान के समय रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सफलता, शुभ समाचारो की प्राप्ति  होती है।



    अग्नि वास : – पृथ्वी पर 11.04 AM तक तत्पश्चात आकाश पर

    अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।

    अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।
  • दिशाशूल (Dishashool)- रविवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से पान या घी खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – अपराह्न – 3:00 से 4:30 तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)-सायं – 4:30 से 6:00 तक ।
  • सूर्योदय – प्रातः 05:47
  • सूर्यास्त – सायं 19:06

    आँखों की रौशनी बढ़ाने, आँखों से चश्मा उतारने के लिए अवश्य करें ये उपाय

  • विशेष – रविवार को बिल्ब के वृक्ष / पौधे की पूजा अवश्य करनी चाहिए इससे समस्त पापो का नाश होता है, पुण्य बढ़ते है।

    रविवार के दिन भगवान सूर्य देव को आक का फूल अर्पण करना किसी भी यज्ञ के फल से कम नहीं है, इससे सूर्य देव की सदैव कृपा बनी रहती है ।

    रविवार को तुलसी जी को जल देना, तुलसी जी को तोड़ना वर्जित है ऐसा करने से पुण्य नष्ट होते है 1
  • एकादशी के दिन सेम फली, चावल का सेवन और दूसरो के अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए ।
  •  एकादशी के दिन चावल खाने से रोग बढ़ते है और दूसरे का अन्न खाने से पुण्य नष्ट होते है ।
  • एकादशी के दिन माँ तुलसी एकादशी का ब्रत रखती है इसलिए इस दिन तुलसी जी पर जल चढ़ाना, तुलसी जी को तोड़ना सख्त मना है ।

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत शुभ फलो वाला हो ।

मित्रो हम इस साईट के माध्यम से वर्ष 2010 से निरंतर आप लोगो के साथ जुड़े है। आप भारत या विश्व के किसी भी स्थान पर रहते है, अपने धर्म अपनी संस्कृति को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए www.memorymuseum.net के साथ अवश्य जुड़ें, हमारा सहयोग करें ।

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

9 अगस्त 2026 का पंचांग, 9 August 2026 ka panchang, aaj ka panchang, aaj ka rahu kaal, aaj ka shubh panchang, panchang, Ravivar Ka Panchang, ravivar ka rahu kaal, ravivar ka shubh panchang, sunday ka panchang, Sunday ka rahu kaal, आज का पंचांग, आज का राहुकाल, आज का शुभ पंचांग, पंचांग, रविवार का पंचांग, रविवार का राहु काल, रविवार का शुभ पंचांग, संडे का पंचांग, संडे का राहुकाल,

### *प्रस्तुतकर्ता*:  
### *आचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय*  
### *अध्यात्म ज्योतिष परामर्श केंद्र*  
### *श्याम नगर, रायपुर, छत्तीसगढ़*  
### _📞 _9425203501 | 7000121183 | 7587346995 | 0771-4070168__

*ॐ नमः शिवाय | जय सनातन* 🚩

दोस्तों यह साईट बिलकुल निशुल्क है। यदि आपको इस साईट से कुछ भी लाभ प्राप्त हुआ हो, आपको इस साईट के कंटेंट पसंद आते हो तो मदद स्वरुप आप इस साईट को प्रति दिन ना केवल खुद ज्यादा से ज्यादा विजिट करे वरन अपने सम्पर्कियों को भी इस साईट के बारे में अवश्य बताएं …..धन्यवाद ।


_27 नक्षत्र - देवता और स्वामी_ 🪷_https://lookmybiz.in/आचार्य-मुक्ति-नारायण-पाण्डेय-अध्यात्म--ज्योतिष-परामर्श-केंद्रआपने बिल्कुल सही क्रम में भेजे हैं। इसे पंचांग में जोड़कर रख लेंगे।

_जय जय श्री राम 🚩🙏_  
_बहुत सुंदर जानकारी भेजी प्रभु जी_
### _🪷 _27 नक्षत्र - देवता और स्वामी_ 🪷_
https://lookmybiz.in/आचार्य-मुक्ति-नारायण-पाण्डेय-अध्यात्म--ज्योतिष-परामर्श-केंद्र
आपने बिल्कुल सही क्रम में भेजे हैं। इसे पंचांग में जोड़कर रख लेंगे।
_क्रम_ _नक्षत्र_ _देवता_ _स्वामी ग्रह_
1 _अश्विनी_ _अश्विनी कुमार_ _केतु_
2 _भरणी_ _यमराज_ _शुक्र_
3 _कृत्तिका_ _अग्नि देव_ _सूर्य_
4 _रोहिणी_ _ब्रह्मा जी_ _चन्द्रमा_
5 _मृगशिरा_ _चन्द्रमा_ _मंगल_
6 _आर्द्रा_ _शिव जी_ _राहु_
7 _पुनर्वसु_ _अदिति माता_ _गुरु_
8 _पुष्य_ _बृहस्पति देव_ _शनि_
9 _आश्लेषा_ _नागदेव_ _बुध_
10 _मघा_ _पितृदेव_ _केतु_
11 _पूर्वाफाल्गुनी_ _भग देव_ _शुक्र_
12 _उत्तराफाल्गुनी_ _अर्यमा देव_ _सूर्य_
13 _हस्त_ _सूर्य देव_ _चन्द्रमा_
14 _चित्रा_ _विश्वकर्मा_ _मंगल_
15 _स्वाति_ _पवन देव_ _राहु_
16 _विशाखा_ _इन्द्र + अग्नि_ _गुरु_
17 _अनुराधा_ _मित्र देव_ _शनि_
18 _ज्येष्ठा_ _इन्द्र देव_ _बुध_
19 _मूल_ _निर्ऋति देव_ _केतु_
20 _पूर्वाषाढ़ा_ _जल देव_ _शुक्र_
21 _उत्तराषाढ़ा_ _विश्वेदेव_ _सूर्य_
22 _श्रवण_ _विष्णु जी_ _चन्द्र_
23 _धनिष्ठा_ _अष्टवसु_ _मंगल_
24 _शतभिषा_ _वरुण देव_ _राहु_
25 _पूर्वाभाद्रपद_ _अजैकपाद_ _गुरु_
26 _उत्तराभाद्रपद_ _अहिर्बुध्न्य_ _शनि_
27 _रेवती_ _पूषा/सूर्य देव_ _बुध_
### __याद रखने के 3 सूत्र__

1.  _केतु_: अश्विनी, मघा, मूल = 3 नक्षत्र
2.  _शुक्र_: भरणी, पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा = 3 नक्षत्र  
3.  _सूर्य_: कृत्तिका, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा = 3 नक्षत्र

_राहु_: आर्द्रा, स्वाति, शतभिषा  
_गुरु_: पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वाभाद्रपद  
_शनि_: पुष्य, अनुराधा, उत्तराभाद्रपद  
_मंगल_: मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा  
_चन्द्र_: रोहिणी, हस्त, श्रवण  
_बुध_: आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती

### __विशेष उपयोग__
- _विवाह मिलान_: नक्षत्र देवता देखकर पूजा तय होती है
- _नामकरण_: जन्म नक्षत्र के देवता के नाम पर
- _यात्रा-मुहूर्त_: नक्षत्र स्वामी का वार देखकर
- _शांति_: जिस नक्षत्र में ग्रहण/संकट हो उसके देवता की पूजा

आपने बहुत उत्तम ज्ञान साझा किया 🙏 इसे आगे से पंचांग के साथ जोड़ देंगे।
### *प्रस्तुतकर्ता*:  
### *आचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय*  
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शनिवार का पंचांग, Shaniwar Ka Panchang, 8 अगस्त 2026 का पंचांग ,



Shaniwar Ka Panchang, शनिवार का पंचांग, 8 अगस्त 2026 ka Panchang,

मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
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  • Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)


पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए शनिवार का पंचांग, (Shanivar Ka Panchang), आज का पंचांग, aaj ka panchang, saturday ka panchang।

  • शनिवार का पंचांग, (Shanivar Ka Panchang, )

    8 अगस्त
    2026 का पंचांग, 8 August 2026 ka Panchang,
  • दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
  • शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।

*विक्रम संवत् – 2083,
* शक संवत – 1948,
* कलि संवत – 5128,

* कलयुग – 5128 वर्ष
* अयन – दक्षिणयान,
* ऋतु – वर्षा
ऋतु,
* मास –
सावन माह,
* पक्ष –
कृष्ण पक्ष,
*चंद्र बल –
मेष, मिथुन, सिंह, कन्या, धनु, मकर,

शनिवार को शनि महाराज की होरा :-

प्रात: 5.46 AM से 6.53 AM तक

दोपहर 01.33 PM से 2.40 PM तक

रात्रि 20.54 PM से 9.47 PM तक

शनिवार को शनि की होरा में अधिक से अधिक शनि देव के मंत्रो का जाप करें । श्रम, तेल, लोहा, नौकरो, जीवन में ऊंचाइयों, त्याग के लिए शनि की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

शनिवार के दिन शनि की होरा में शनि देव देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में शनि ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,भारत की लगभग 150 करोड़ की आबादी में 0.001 % अर्थात लगभग 15 हज़ार आदमी ही नित्य पंचांग पढ़ पाते है।
आप पर ईश्वर की असीम कृपा है जो आपको नित्य पंचांग पढ़ने का, अपने भाग्य को प्रबल करने का, पापो के प्रायश्चित करने का अवसर मिल रहा है,
दुनिया के सारे उपाय एक तरफ है, और नित्य पंचाग पढ़ने का पुण्य उससे भी कहीं अधिक है,
इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है ।


शनि देव के मन्त्र :-

ॐ शं शनैश्चराय नमः।

अथवा

ऊँ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्‌। छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्‌।।

  • तिथि (Tithi) – दशमी 13.59 PM तक तत्पश्चात एकादशी
  • तिथि का स्वामी – दशमी तिथि के स्वामी यमराज जी और एकादशी तिथि के स्वामी विश्वदेव जी है ।

दशमी तिथि के देवता यमराज जी हैं। यह दक्षिण दिशा के स्वामी है। इनका निवास स्थान यमलोक है।  शास्त्रों के अनुसार यमराज जी मृत्यु के देवता कहे गए हैं।

गरुड़ पुराण के अनुसार यमराज के महल को कालित्री महल कहते हैं और उनके सिंहासन को विचार-भू कहते हैं।

पद्म पुराण में उल्लेख मिलता है कि यमलोक पृथ्वी से 86,000 योजन यानी करीब 12 लाख किलोमीटर दूर है।

गरुड़ पुराण में यमलोक में चार द्वार बताए गए हैं। पूर्वी द्वारा से प्रवेश सिर्फ धर्मात्मा और पुण्यात्माओं को मिलता है जबकि दक्षिण द्वार से पापियों का प्रवेश होता है जिसे यमलोक में यातनाएं भुगतनी पड़ती है।

साधु-संतों को उत्तर दरवाजे से और दान पुण्य करने वाले मनुष्यों को पश्चिम द्वार से प्रवेश मिलता है।

यमराज जी भगवान सूर्य और उनकी पत्नी संज्ञा के पुत्र है, यमुना अर्थात (यमी)  इनकी जुड़वां बहन और मनु इनके भाई कहे गए है।

यमराज की पत्नी  का नाम देवी धुमोरना तथा इनके पुत्र का नाम कतिला है।

यमराज जी का वाहन महिष / भैंसे को माना गया हैं। वे समस्त जीवों के शुभ अशुभ कर्मों का निर्णय करते हैं।

इस दिन इनकी पूजा करने, इनसे अपने पापो के लिए क्षमा माँगने से जीवन की समस्त बाधाएं दूर होती हैं, निश्चित ही सभी रोगों से छुटकारा मिलता है,  नरक के दर्शन नहीं होते है अकाल मृत्यु के योग भी समाप्त हो जाते है।

मथुरा में स्थित यमराज और उनकी बहन यमुना जी का एक प्राचीन मंदिर है  उस मंदिर को यमुना धर्मराज मंदिर कहते है। देश में भाई-बहन का ये एकमात्र मंदिर है।

मान्यता है कि, भाई बहन इस मंदिर में भैया दूज के दिन एक साथ स्नान करते हैं। इससे उन्हें मृत्यु के बाद बैकुंठ की प्राप्ति होती है।

 इस तिथि को धर्मिणी भी कहा गया है। समान्यता यह तिथि धर्म और धन प्रदान करने वाली मानी गयी है ।

दशमी तिथि में नया वाहन खरीदना शुभ माना गया है। इस तिथि को सरकार से संबंधी कार्यों का आरम्भ किया जा सकता है।  

यमराज जी का समस्त रोगों को बाधाओं को दूर करने वाले मन्त्र :- “ॐ क्रौं ह्रीँ आं वैवस्वताय धर्मराजाय भक्तानुग्रहकृते नम : “॥ की एक माला का जाप अथवा कम से कम 21 बार इस मन्त्र का जाप करें ।  

दशमी को परवल नहीं खाना चाहिए।    

कल रविवार 9 अगस्त को सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी कामिका एकादशी है । एकादशी के दिन भगवान श्री विष्णु जी की पूजा की जाती है और उनकी पूजा तुलसी जी को चढ़ाये बिना पूरी नहीं होती है, और एकादशी के दिन तुलसी जी को पानी देना और उसे तोड़ना दोनों ही मना है ।

इसलिए एकादशी के दिन श्री विष्णु जी की पूजा के लिए तुलसी जी को आज ही तोड़ कर रख लें ।

राशिनुसार होली खेलकर अपने भाग्य को ऐसे करें मजबूत,

कैसा भी सिर दर्द हो उसे करें तुरंत छूमंतर, जानिए सिर दर्द के अचूक उपाय

नक्षत्र (Nakshatra) – रोहिणी 16.51 PM तक तत्पश्चात मृगशिरा

नक्षत्र के स्वामी :-         रोहिणी नक्षत्र के देवता ब्रम्हा और स्वामी चंद्र देव जी है ।

 रोहिणी नक्षत्र, नक्षत्रों के क्रम में चौथे स्थान पर है तथा चंद्रमा का केंद्र माना जाता है। ‘रोहिणी’ का अर्थ ‘लाल’ होता है। इसे आकाश में सबसे चमकीले सितारों में से एक माना जाता है।

 यह 5 तारों का समूह है, जो धरती से किसी भूसा गाड़ी की तरह दिखाई देता है।

रोहिणी नक्षत्र का आराध्य वृक्ष जामुन और स्वभाव शुभ माना गया है ।

 पुराण कथा के अनुसार रोहिणी चंद्र की सत्ताईस पत्नियों में सबसे सुंदर, तेजस्वी, सुंदर वस्त्र धारण करने वाली है। ज्यों-ज्यों चंद्र रोहिणी के पास जाता है, त्यों-त्यों उसका रूप अधिक खिल उठता है।

इस नक्षत्र के जातक पतले, मिलनसार, दृढ़ निश्चयी, बुद्धिशाली, यशवान, ललित कलाओं के प्रेमी, ईश्वर में आस्था रखने वाले, किन्तु झूठ बोलने वाले, स्वार्थी होते है।

रोहिणी नक्षत्र में जन्मी स्त्रियाँ सुंदर, भाग्यशाली, पति से प्रेम करने वाली, माता-पिता की आज्ञाकारी, योग्य संतान वाली और ऐश्वर्यवान होती है।

रोहिणी नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 1, 2, 3, 6 और 9, भाग्यशाली रंग सफेद, पीला और नीला तथा भाग्यशाली दिन शनिवार, शुक्रवार और बुधवार है।

आज रोहिणी नक्षत्र के बीज मंत्र “ऊँ ऋं ऊँ लृं” अथवा “ॐ रौहिण्यै नमः”  l  का 108 बार जाप करें इससे रोहिणी नक्षत्र को बल मिलेगा।  

रोहिणी नक्षत्र में घी, दूध, का दान करना चाहिए।

अगर 50 की जगह 25, 60 की जगह 30 की उम्र चाहते है, जीवन में डाक्टर के पास ना जाना हो तो अवश्य करे ये उपाय   

  • योग (Yog) – ध्रुव 09.02 AM तक तत्पश्चात व्याघात
  • योग के स्वामी, स्वभाव :-        ध्रुव योग की स्वामी भूमि एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है ।
  • प्रथम करण : – विष्टि 13.59 PM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-       विष्टि करण के स्वामी यम और स्वभाव क्रूर है ।
  • द्वितीय करण : – बव 12.33 AM रविवार 9 अगस्त तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-     बव करण के स्वामी इंद्र देव और स्वभाव सौम्य है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.21 AM से 5.04 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.40 PM से 15.33 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 19.07 PM से 19.28 PM तक
  • अमृत काल : अमृत काल 13.54 PM से 15.22 PM तक

  • अग्नि वास : आकाश 13.59 PM तक तत्पश्चात पाताल में

    अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।


     जब पाताल में अग्नि वास है तो वह हवन से सम्बन्धित अनुष्ठानों के लिये शुभ नहीं मानी जाती है, यह अशुभ मानी गई है । अग्नि के पाताल  वास के दौरान किये जाने वाले हवन  सम्बन्धित अनुष्ठानों व्यक्ति को आर्थिक नुकसान करना पड़ता है उसका  धन नष्ट हो सकता है।

  • शिव वास : क्रीड़ा में 13.59 PM तक तत्पश्चात कैलाश पर

    जब भगवान शंकर जी क्रीड़ा में होते हैं, तो उस समय भी रुद्र अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान भोलेनाथ जी के कार्य अथवा क्रीड़ा के समय रूद्र अभिषेक करने से जीवन में तरह तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।  


    शिव वास :-  जब भगवान भोलेनाथ जी कैलाश पर होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार  भगवान शंकर जी के  कैलाश पर्वत पर रहने के दौरान रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सुखो की प्राप्ति होती है।
  • गुलिक काल : – शनिवार को गुलिक काल प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
  • दिशाशूल (Dishashool)- शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।

    यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
  • राहुकाल (Rahukaal)-सुबह – 9:00 से 10:30 तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 05:46 AM
  • सूर्यास्त – सायं 19:07 PM
  • विशेष – दशमी के दिन कलम्बी, परवल का सेवन नहीं करना चाहिए ।


अवश्य पढ़ें :-राशिनुसार इन वृक्षों की करें सेवा, चमकने लगेगा भाग्य,

  • पर्व त्यौहार-
  • मुहूर्त (Muhurt) –

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

मित्रो हम इस साईट के माध्यम से वर्ष 2010 से निरंतर आप लोगो के साथ जुड़े है। आप भारत या विश्व के किसी भी स्थान पर रहते है, अपने धर्म अपनी संस्कृति को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए www.memorymuseum.net के साथ अवश्य जुड़ें, हमारा सहयोग करें ।

अगर नित्य पंचाग पढ़ने से आपको लाभ मिल रहा है, आपका आत्मविश्वास बढ़ रहा है, आपका समय आपके अनुकूल हो रहा है तो आप हमें अपनी इच्छा – सामर्थ्य के अनुसार कोई भी सहयोग राशि 9425203501 पर Google Pay कर सकते है ।

आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

8 अगस्त 2026 का पंचांग, 8 August 2026 ka panchang, aaj ka panchang, aaj ka rahu kaal, aaj ka shubh panchang, panchang, saturday ka panchang, shanivar ka panchang, Shaniwar Ka Panchag, shanivar ka rahu kaal, shanivar ka shubh panchang, आज का पंचांग, आज का राहुकाल, आज का शुभ पंचांग, पंचांग, शनिवार का पंचांग, शनिवार का राहु काल, शनिवार का शुभ पंचांग, सैटरडे का पंचांग,

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Aacharya Mukti Narayan Pandey Adhyatma Jyotish paramarsh Kendra Raipur

मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang, 11 अगस्त 2026 का पंचांग,

मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang, 11 अगस्त 2026 का पंचांग, आप सभी शिवभक्तों को सावन माह की शिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें, आप पर भ...