बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang, 4 मार्च 2026 का पंचांग,
आप सभी को रंगो के पर्व होली, धुलंडी की हार्दिक शुभकामनायें
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पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi) 2:- वार (Day) 3:- नक्षत्र (Nakshatra) 4:- योग (Yog) 5:- करण (Karan)
पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
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बुधवार का पंचांग (Budhwar Ka Panchang)
4 मार्च 2026 का पंचांग, ( Panchang ), 4 March 2026 ka Panchang,
गणेश गायत्री मंत्र :
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
।। आज का दिन मंगलमय हो ।।
* दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
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बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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* बुधवार को सभी ग्रहो के राजकुमार बुध देव की आराधना करने से ज्ञान मिलता है, वाकपटुता में प्रवीणता आती है, धन लाभ होता है ।
बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाने तथा रात को सोते समय फिटकरी से दाँत साफ करने से आर्थिक पक्ष मजबूत होता है ।
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*विक्रम संवत् 2082,
*शक संवत – 1947
*कलि संवत 5127
*अयन – उत्तरायण
*ऋतु – बसंत ऋतु
*मास – फाल्गुन माह
*पक्ष – शुक्ल पक्ष
*चंद्र बल – वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन ,
बुधवार को बुध की होरा :-
प्रात: 6.43 AM से 7.45 AM तक
दोपहर 01.18 PM से 2.19 PM तक
रात्रि 20.15 PM से 21.18 PM तक
बुधवार को बुध की होरा में हाथ की सबसे छोटी उंगली और बुध पर्वत को हल्के हल्के रगड़ते हुए अधिक से अधिक बुध देव के मन्त्र का जाप करें ।
ज्योतिष, पढ़ाई, लिखाई, सीखने, वाकपटुता, अपना प्रभाव डालने और व्यापार में सफलता के लिए बुध की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।
बुधवार के दिन बुध की होरा में बुध देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।
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बुध देव के मन्त्र
“ॐ बुं बुधाय नमः” अथवा
“ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।।”
कार्तिक पूर्णिमा के दिन इस तरह से करें स्नान, अक्षय पुण्य की होगी प्राप्ति,
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- तिथि (Tithi) – प्रतिपदा 16.48 PM तक तत्पश्चात द्वितीया,
- तिथि के स्वामी – प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव जी और द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्मा जी है ।
होलिका दहन के दूसरे दिन होली / धुलेंडी का पर्व मनाया जाता है । आज लोग एक दूसरे को रंग, अबीर-गुलाल लगाते हैं, इसे धुलेंडी कहा जाता है, इस दिन हुलियारों की टोलियाँ ढोल बजा बजा घूम,घूम कर होली खेलती है । इस दिन लोग एक दूसरे के घर जा कर रंग लगाते है और गले मिलते है।
इस बार रंगो का यह पर्व मंगलवार 3 मार्च को चंद्र ग्रहण लगने के कारण होलिका दहन के बाद एक दिन छोड़कर आया है ।
धुलेंडी / होली क्यों मनाते है : पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्री विष्णु जी ने त्रेतायुग के प्रारम्भ में धूलि वंदन किया था, इसलिए इस दिन को धुलेंडी कहा जाने लगा ।
प्रेम के देवता कामदेव जी का पुनर्जन्म : एक बार भगवान शंकर जी ने कामदेव को भस्म कर दिया था लेकिन रति के विलाप और देवताओं के अनुरोध पर उन्होंने कामदेव को दुबारा जीवित कर दिया था जो की होली / धुलंडी का दिन था । इसलिए धुलेंडी को कामदेव के पुनर्जन्म और उनकी पत्नी देवी रति को प्राप्त वरदान की खुशी में मनाया जाता है ।
असत्य पर सत्य की जीत : धुलेंडी जिस दिन रंग खेला जाता है, यह होलिका दहन के अगले दिन मनाई जाती है, जो असत्य पर सत्य की जीत का धोतक है ।

भक्त प्रह्लाद और होलिका की कथा : प्रह्लाद, जो राक्षस राज हिरण्यकश्यप का पुत्र और भगवान श्री विष्णु जी का परम भक्त था, उसको मरने के लिए होलिका उसे गॉड में लेकर अग्नि में बैठ गयी थी लेकिन प्रह्लादजी के प्राण बच गए परन्तु होलिका जल गई, इसलिए यह पर्व धुलेंडी असत्य पर सत्य की जीत के रूप में मनाया जाता है और लोग हर्ष उल्लास से आपस में रंग खेलते है ।
होली के दिन लोग पुरानी से पुरानी कटुता को भूला कर गले मिलकर फिर से दोस्त बन जाते हैं। होली में आपस में वैर भाव मिटा कर खुद पहल करके दुश्मनो से भी रंग खेलकर सभी से साफ मन से गले मिलना चाहिए ।
मान्यता है कि इस दिन पहल करके शत्रुता भुलाने से वर्ष भर आप के शत्रु आपसे पराजित होते रहेंगे ।होली पर रंग सभी व्यक्तियों को जरूर ही खेलना चाहिए, इससे घर परिवार में प्रेम, सौहार्द्य और सुख का वास होता है ।
होली के दिन जिस दिन रंग खेलते है उस दिन सुबह स्नान के बाद लाल गुलाल लेकर उसे सबसे पहले घर के मंदिर में देवी देवताओं की मूर्ति / चित्र पर लगाएं
फिर घर के बड़े बुजुर्गों को रंग लगाकर उनसे आशीर्वाद लेकर ही रंग खेलना शुरू करना चाहिए ।
शास्त्रों के अनुसार देवता भी होली खेलते है, जो कार्य देवताओं को भी प्रिय है उसे तो हमें अवश्य करना ही चाहिए ।
इस तरह से मनाएं जन्माष्टमी का पर्व जीवन में लग जायेगा सुखो का अम्बार
नक्षत्र (Nakshatra) – पूर्वाफाल्गुनी 07.39 AM तक तत्पश्चात उत्तराफाल्गुनी
नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी- पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के देवता भग (धन व ऐश्वर्य के देवता) और स्वामी शुक्र देव जी है ।
आकाश मंडल में पूर्वा फाल्गुनी को 11वां नक्षत्र माना जाता है। इस नक्षत्र का प्रतीक बिस्तर के सामने के दो पैर हैं जो आराम, अच्छे भाग्य का भी प्रतीक है।
यह नक्षत्र सुख, धन, कामुक प्रसन्नता, प्रेम और मनोरंजन को दर्शाता हैं। इस नक्षत्र काआराध्य वृक्ष : पलाश तथा स्वाभाव शुभ माना गया है। पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र सितारे का लिंग महिला है।
इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक पर जीवनभर सूर्य और शुक्र का प्रभाव बना रहता है।
पूर्वा फाल्गुनी में जन्मा जातक सुन्दर, विलासी, स्त्रियों का प्रिय, साहसी, चतुर, वाकपटु, खुले दिल वाला और घूमने फिरने का शौक़ीन होता है, इन्हे स्त्री और धन-संपत्ति का पूर्ण सुख मिलता है।
लेकिन यदि सूर्य और शुक्र शुभ नहीं है तो जातक बहुत कामुक, विलासी, धूर्त, घमंडी, जुए – सट्टे का लती और क्रोधी हो सकता है।
इस नक्षत्र में जन्म लेने वाली स्रियाँ धार्मिक, दयालु, आकर्षक, मिलनसार, आसानी से दूसरो को प्रभावित करने वाली, वैसी प्रवर्ति की होती है। यह आसानी से जीवन में सफलता प्राप्त कर लेती हैं।
पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 9, भाग्यशाली रंग, चाकलेटी, हल्का भूरा, भाग्यशाली दिन शुक्रवार और रविवार माना जाता है ।
पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ भगाय नमः”। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।
संकटो से रक्षा के लिए इस नक्षत्र के जातको को नित्य भगवान शंकर की आराधना करनी चाहिए । पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे जातको को नित्य तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन माँ लक्ष्मी जी की आराधना से कभी भी धन की कमी नहीं होती है ।
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- योग (Yog) – धृति 08.52 AM तक तत्पश्चात शूल
- योग के स्वामी, स्वभाव :- धृति योग के स्वामी जल एवं स्वभाव श्रेष्ठ है ।
- प्रथम करण : – कौलव 16.48 PM तक
- करण के स्वामी, स्वभाव :- कौलव करण के स्वामी मित्र और स्वभाव सौम्य है ।
- द्वितीय करण : – तैतिल 04.51 AM गुरुवार 5 मार्च तक
- करण के स्वामी, स्वभाव :- तैतिल करण के स्वामी विश्वकर्मा जी और स्वभाव सौम्य है ।
- ब्रह्म मुहूर्त : 5.04 AM से 5.54 AM तक
- विजय मुहूर्त : 14.30 PM से 15.16 PM तक
- गोधूलि मुहूर्त : 18.20 PM से 18.45 PM तक
- अमृत काल : 12.54 AM से 02.32 AM तक गुरुवार 5 मार्च तक
इन उपायों से धन संपत्ति खींची चली आएगी, किसी चीज़ का नहीं रहेगा अभाव
- दिशाशूल (Dishashool)- बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।
इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ । - गुलिक काल : – बुधवार का गुलिक काल 10:30 AM से 12 PM बजे तक ।
- राहुकाल (Rahukaal) : – बुधवार का राहुकाल दिन 12:00 PM से 1:30 PM तक ।
- सूर्योदय – प्रातः 6.43 AM
- सूर्यास्त – सायं 18.23 PM
- विशेष – प्रतिपदा के दिन कद्दू / पेठे का सेवन नहीं करना चाहिए, प्रतिपदा के दिन इनका सेवन करने से धन की हानि होती है ।
- मुहूर्त :-
- पर्व त्यौहार – होली का पर्व, धुलंडी
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“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।
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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
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