आप सभी को शनि देव के प्राकट्य दिवस, शनि जयंती, वट सावित्री ब्रत की हार्दिक शुभकामनायें
Shaniwar Ka Panchang, शनिवार का पंचांग, 16 मई 2026 ka Panchang,
मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है, अगर आप भी पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।
कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।
आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
💰🔝💰🔝💰🔝💰🔝💰🔝💰🔝💰🔝💰
- Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-
1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)
पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए शनिवार का पंचांग, (Shanivar Ka Panchang), आज का पंचांग, aaj ka panchang, saturday ka panchang।
- शनिवार का पंचांग, (Shanivar Ka Panchang, )
16 मई 2026 का पंचांग, 16 May 2026 ka Panchang,
- शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
।। आज का दिन मंगलमय हो ।।
- दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
- शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
अगर धन की लगातार परेशानी रहती है, धन नहीं रुकता हो, सर पर कर्ज चढ़ा तो अवश्य करें ये उपाय
- शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
- शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
पितृ पक्ष में तिथिनुसार इस तरह से पितरो के निमित घर पर कराएं ब्राह्मण भोजन, पूरे वर्ष पितरो का मिलेगा आशीर्वाद
*विक्रम संवत् – 2083,
* शक संवत – 1948,
* कलि संवत – 5128,
* कलयुग – 5128 वर्ष
* अयन – उत्तरायण,
* ऋतु – ग्रीष्म ऋतु,
* मास – ज्येष्ठ माह,
* पक्ष – कृष्ण पक्ष,
*चंद्र बल – मेष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, कुम्भ,
शनिवार को शनि महाराज की होरा :-
प्रात: 5.30 AM से 6.38 AM तक
दोपहर 01.27 PM से 2.37 PM तक
रात्रि 20.37 PM से 9.48 PM तक
शनिवार को शनि की होरा में अधिक से अधिक शनि देव के मंत्रो का जाप करें । श्रम, तेल, लोहा, नौकरो, जीवन में ऊंचाइयों, त्याग के लिए शनि की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।
शनिवार के दिन शनि की होरा में शनि देव देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में शनि ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।
आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,भारत की लगभग 150 करोड़ की आबादी में 0.001 % अर्थात लगभग 15 हज़ार आदमी ही नित्य पंचांग पढ़ पाते है।
आप पर ईश्वर की असीम कृपा है जो आपको नित्य पंचांग पढ़ने का, अपने भाग्य को प्रबल करने का, पापो के प्रायश्चित करने का अवसर मिल रहा है,
दुनिया के सारे उपाय एक तरफ है, और नित्य पंचाग पढ़ने का पुण्य उससे भी कहीं अधिक है,
इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है ।

शनि देव के मन्त्र :-
ॐ शं शनैश्चराय नमः।
अथवा
ऊँ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।
- तिथि (Tithi) – अमावस्या तिथि पूर्ण रात्री तक
- तिथि का स्वामी – अमावस्या तिथि के स्वामी पितृ देव जी है ।
आज ज्येष्ठा माह की अमावस्या और शनि जयंती का दिव्य संयोग है । अमावस्या के स्वामी पितृ देव जी को माना गया है । आज शनि देव जी का प्राकट्य दिवस मनाया जाता है ।
शास्त्रों के अनुसार, ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि में ग्रहो में न्यायाधीश भगवान शनिदेव का जन्म को हुआ था, इसीलिए इस दिन को शनि देव जी का प्राकट्य दिवस / शनि जयंती shani jyanti, के रूप में मनाया जाता है ।
शनि देव न्याय के देवता कहे गए है, शनिदोषो से मुक्ति पाने, शनि देव की कृपा प्राप्त करने के लिए शनि अमावस्या और शनि जयंती का दिन बहुत ही विशेष माना जाता है।
पीपल के पेड़ पर पितरों का वास माना गया है। अमावस्या के दिन सुबह के समय लोहे के बर्तन में, दूध, पानी, काले तिल, शहद एवं जौ मिला कर समस्त सामग्री पीपल की जड़ में अर्पित करके पीपल की 7 परिक्रमा करें, तथा इस दौरान “ॐ सर्व पितृ देवताभ्यो नमः” मंत्र का जाप भी लगातार करते रहें ।
शनि देव को काला / नीला रंग अति प्रिय है। आज शनि जयंती के दिन सांय काल शनि मंदिर में शनि देव पर तिल का अथवा कड़वा तेल, काला वस्त्र, और सुरमा अवश्य ही चढाएं।
शनिवार के दिन शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं, सांय काल प्रदोष काल में ( 6 बजे से 8 बजे के बीच ) पीपल पर भी दीपक अवश्य ही जलाएं ।
शनि जयंती पर कड़वा तेल ( सरसो का तेल ) काले उड़द, काले तिल, लोहा, गुड़ एवं नीले या काले पुष्पों चढ़ाने से शनि देव प्रसन्न होते है ।
शनि जयंती के दिन कड़वे तेल में अपना चेहरा देखकर उसका दान अर्थात छाया दान करें ।
शनि जयंती के दिन किसी गरीब मजदूर या सफाई कर्मचारियों को कपडे धोने का नीला साबुन और चाय की पत्ती का पैकेट दक्षिणा के साथ दान में दें ।
इस दिन मजदूरों, सफाई कर्मचारियों को समोसे / पकौड़े / नमकीन खिलायें, उन्हें चाय पिलायें तथा बिस्कुट / पाव आदि खाने को दें । उनकी इस तरह से श्रद्धा से खातिर करें जैसा कि आप अपने किसी अभिन्न की करते है । ऐसा करने से शनि देव प्रसन्न होते है जातक को कष्टों से छुटकारा मिलता है ।
शनि की दशा / साढ़े के दुष्प्रभावों को दूर करने, शनि देव को अपने अनुकूल करने के लिए आज दशरथ कृत शनि स्तोत्र, हनुमान चालीसा एवं बजरंग बाण का पाठ अवश्य करें ।
आज पितरों की कृपा प्राप्त करने के लिए घर पर ब्राह्मण को भोजन कराएं एवं उसे यथा शक्ति दान – दक्षिणा प्रदान करें ।
अमावस्या के दिन घी, नमक, चावल, चीनी, आटा, सत्तू, काले तिल, अनाज, वस्त्र, आदि दक्षिणा के साथ योग्य ब्राह्मण को दान में अवश्य ही दें , ऐसा करने से पितरो का आशीर्वाद मिलता है ।
अमावस्या के दिन घर पर खीर अवश्य बनायें फिर उसमें थोड़ी सी खीर दोने पर निकाल कर पित्रों के निमित पीपल पर रख आएं ।
हर अमावस्या को गहरे गड्ढे या कुएं में एक चम्मच दूध डालें इससे कार्यों में बाधाओं का निवारण होता है ।
इसके अतिरिक्त अमावस्या को आजीवन जौ दूध में धोकर बहाएं, आपका भाग्य सदैव आपका साथ देगा ।
अमावस्या पर तुलसी के पत्ते या बिल्व पत्र बिलकुल भी नहीं तोडऩा चाहिए। अमावस्या पर देवी-देवताओं को तुलसी के पत्ते और शिवलिंग पर बिल्व पत्र चढ़ाने के लिए उन्हें एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।
राशिनुसार होली खेलकर अपने भाग्य को ऐसे करें मजबूत,
कैसा भी सिर दर्द हो उसे करें तुरंत छूमंतर, जानिए सिर दर्द के अचूक उपाय
आज वट सावित्री ब्रत है, यह ब्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को रखा जाता है । हिंदू धर्म में बट सावित्री का ब्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास पर्व माना जाता है ।
इस दिन महिलाएं पूरे दिन व्रत रखती हैं और वट वृक्ष की पूजा करती है । मान्यता है कि इस व्रत को करने से पति की उम्र लंबी होती है और दांपत्य जीवन सुखमय होता है ।
इस बार शनि जयंती, शनि अमावस्या के साथ बट सावित्री ब्रत पड़ने के कारण इस और भी अधिक महत्व हो गया है ।
शास्त्रों के अनुसार, माता सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे ही अपने मृत पति सत्यवान को यमराज से वापस पाया था, तभी से वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व माना गया है ।
इस ब्रत में सुहागिन महिलाएं अपने पति की लम्बी उम्र के लिए निर्जल ब्रत रखती है, इस दिन महिलाएं लाल, पीले, गुलाबी आदि वस्त्र पहन कर सोलह श्रंगार करके बट बृक्ष की पूजा करती है ।
इस दिन महिलाएं वट वृक्ष के नीचे बैठकर वट सावित्री व्रत कथा सुनती हैं, बिना इस कथा को सुने व्रत पूरा नहीं माना जाता है । वट सावित्री व्रत के समय सुहागिन महिलाएं पूजा के दौरान बरगद के पेड़ के तने के चारों ओर 7 बार कच्चा सूत लपेटती हैं, इसे पति-पत्नी के सात जन्मों के अटूट बंधन का प्रतीक माना जाता है ।
वट सावित्री ब्रत में सुहागिन महिलाएं माँ गौरी अर्थात पार्वती मैय्या की भी पूर्ण विधि विधान से पूजा करती है ।
इस दिन महिलाएं अपने दाम्पत्य जीवन और सुख – सौभाग्य के लिए भीगे चने और फल का ‘बायना’ निकालकर अपनी सास या किसी बुजुर्ग महिला को देकर उनका आशीर्वाद लेती है ।
नक्षत्र (Nakshatra) – भरणी नक्षत्र 17.30 PM तक तत्पश्चात कृतिका नक्षत्र
नक्षत्र के स्वामी :- भरणी नक्षत्र के देवता यमराज जी और नक्षत्र के स्वामी शुक्र जी है ।
भरणी नक्षत्र 27 नक्षत्रों में से दूसरा नक्षत्र है और त्रिकोण का प्रतीक है। यह नक्षत्र प्रकृति के स्त्री वाले पहलू को इंगित करता है।
भरणी नक्षत्र बलिदान, ईर्ष्या, सहनशीलता और शुद्धि का प्रतीक भी माना जाता है। यह संयम का एक सितारा माना जाता है और गर्भ का प्रतिनिधित्व करता है। भरणी नक्षत्र सितारा का लिंग मादा है।
भरणी नक्षत्र का आराध्य वृक्ष आँवला और नक्षत्र स्वभाव क्रूर माना गया है ।
भरणी नक्षत्र में पैदा होने वाले एक बड़े दिल वाले व्यक्ति माने जाते हैं, यह लोगो की बातो का बुरा नहीं मानते है। आपकी ताकत आपकी मुस्कुराहट है आप हमेशा शांत और प्रसन्न रहते हैं। आप ईमानदार है और सकारात्मक रहते है। इनका पारिवारिक जीवन सुखमय रहता है ।
भरणी नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 9, 3 और 12, भाग्यशाली रंग पीला, लाल, और हरा एवं भाग्यशाली दिन मंगलवार तथा गुरुवार माना जाता है ।
भरणी नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातको को तथा सभी मनुष्यों को जिस दिन भारणी नक्षत्र हो उस दिन नक्षत्र देवता नाममंत्र:- “ॐ यमाय् नमः” l मन्त्र की एक माला का जप करना चाहिए, इससे भारणी नक्षत्र के शुभ फल मिलते है ।
भरणी नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातको को भगवान शंकर जी की आराधना परम फलदाई है, इन्हे इस नक्षत्र के दिन महा मृत्युंजय मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।
- योग (Yog) – सौभाग्य 10-26 AM तक तत्पश्चात शोभन
- योग के स्वामी, स्वभाव :- सौभाग्य योग के स्वामी ब्रह्मा जी एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है ।
- प्रथम करण : – चतुष्पाद 15.22 PM तक
- करण के स्वामी, स्वभाव :- चतुष्पाद करण के स्वामी रूद्र और स्वभाव क्रूर है ।
- द्वितीय करण : – नाग 01.30 AM रविवार 17 मई तक
- करण के स्वामी, स्वभाव :- नाग करण के स्वामी नागदेव और स्वभाव क्रूर है ।
- ब्रह्म मुहूर्त : 4.07 AM से 4.48 AM तक
- विजय मुहूर्त : 14.34 PM से 15.28 PM तक
- गोधूलि मुहूर्त : 19.04 PM से 19.25 PM तक
- अमृत काल : अमृत काल 13.15 PM से 14.40 PM तक
- अग्नि वास : पाताल में 01.30 AM रविवार 17 मई तक
जब पाताल में अग्नि वास है तो वह हवन से सम्बन्धित अनुष्ठानों के लिये शुभ नहीं मानी जाती है, यह अशुभ मानी गई है । अग्नि के पाताल वास के दौरान किये जाने वाले हवन सम्बन्धित अनुष्ठानों व्यक्ति को आर्थिक नुकसान करना पड़ता है उसका धन नष्ट हो सकता है। - शिव वास : माँ गौरी के साथ 01.30 AM रविवार 17 मई तक
जब भगवान शंकर गौरी मइय्या के साथ होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शंकर जी के देवी गौरी के साथ रहने के समय किये गए रूद्रअभिषेक से घर कारोबार में सुख-समृद्धि आती है, स्थाई लक्ष्मी का वास होता है ।
- गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
- दिशाशूल (Dishashool)- शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।
यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
- राहुकाल (Rahukaal)-सुबह – 9:00 से 10:30 तक।
- सूर्योदय – प्रातः 05:30 AM
- सूर्यास्त – सायं 19:05 PM
- विशेष – अमावस्या, पूर्णिमा, संक्रांति, चतुर्दशी, श्राद्ध और व्रत के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना, सहवास करना निषिद्ध है।
- अमावस्या के दिन तुलसी के पत्ते, बिल्व पत्र या किसी भी तरफ के फूल पत्तो को बिलकुल भी नहीं तोडऩा चाहिए।
अवश्य पढ़ें :-राशिनुसार इन वृक्षों की करें सेवा, चमकने लगेगा भाग्य,
- पर्व त्यौहार- ज्येष्ठ माह की अमावस्या, शनि अमावस्या, शनि देव का प्राकट्य दिवस, शनि जयंती, वट सावित्री ब्रत
- मुहूर्त (Muhurt) –
“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।
मित्रो हम इस साईट के माध्यम से वर्ष 2010 से निरंतर आप लोगो के साथ जुड़े है। आप भारत या विश्व के किसी भी स्थान पर रहते है, अपने धर्म अपनी संस्कृति को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए www.memorymuseum.net के साथ अवश्य जुड़ें, हमारा सहयोग करें ।
अगर नित्य पंचाग पढ़ने से आपको लाभ मिल रहा है, आपका आत्मविश्वास बढ़ रहा है, आपका समय आपके अनुकूल हो रहा है तो आप हमें अपनी इच्छा – सामर्थ्य के अनुसार कोई भी सहयोग राशि 6306516037 पर Google Pay कर सकते है ।
आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।
16 मई 2026 का पंचांग, 16 May 2026 ka panchang, aaj ka panchang, aaj ka rahu kaal, aaj ka shubh panchang, panchang, saturday ka panchang, shanivar ka panchang, Shaniwar Ka Panchag, shanivar ka rahu kaal, shanivar ka shubh panchang, आज का पंचांग, आज का राहुकाल, आज का शुभ पंचांग, पंचांग, शनिवार का पंचांग, शनिवार का राहु काल, शनिवार का शुभ पंचांग, सैटरडे का पंचांग,

( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )
दोस्तों यह साईट बिलकुल निशुल्क है। यदि आपको इस साईट से कुछ भी लाभ प्राप्त हुआ हो, आपको इस साईट के कंटेंट पसंद आते हो तो मदद स्वरुप आप इस साईट को प्रति दिन ना केवल खुद ज्यादा से ज्यादा विजिट करे वरन अपने सम्पर्कियों को भी इस साईट के बारे में अवश्य बताएं …..धन्यवाद ।
































