Guruwar Ka Panchag, गुरुवार का पंचांग, 20 अगस्त 2026 का पंचांग,

Guruwar Ka Panchag, गुरुवार का पंचांग, 20 अगस्त 2026 का पंचांग,

गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 20 August 2026 Ka Panchang,

मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद

बृहस्पतिवार का पंचांग, Brahaspativar ka panchang,

  • Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।

* शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
* वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
* नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
* योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
* करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।

इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए । नित्य पंचाग पढ़ने से भाग्य चमकने लगता है ।

जानिए आज गुरुवार का पंचांग, Guruwar Ka Panchag,


आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है, आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,

इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है ।

मंगल श्री विष्णु मंत्र :-

मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥

आज का पंचांग, aaj ka panchang, गुरुवार का पंचाग, Guruvar Ka Panchag,

गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag,

20 अगस्त 2026 का पंचांग, 20 August 2026 Ka Panchang,


  • गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 20 अगस्त 2026 का पंचांग,
  • दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
  • गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए ।

    गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
  • गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
    इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
  • गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।
    इस उपाय को करने से कार्यो में अड़चने दूर होती है, भाग्य चमकने लगता है, बृहस्पति देव की कृपा मिलती है।

यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।
और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।

गुरुवार को विष्णु जी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, गुरुवार को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ परम फलदाई है

जीवन में कोई भी मनोकामना हो हनुमान जी के जन्मोत्सव के दिन अवश्य ही करें ये उपाय, 

  • *विक्रम संवत् – 2083,
  • * शक संवत – 1948,
    *कलि संवत- 5128,
    * अयन – दक्षियायणं,
    * ऋतु – वर्षा ऋतु,
    * मास – श्रावण माह
    * पक्ष – शुक्ल पक्ष
    *चंद्र बल – वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुम्भ,

गुरुवार को बृहस्पति देव की होरा :-

प्रात: 5.53 AM से 6.58 AM तक

दोपहर 01.30 PM से 2.35 PM तक

रात्रि 20.45 PM से 21.40 PM तक

आज गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा के समय दाहिने हाथ की तर्जनी ऊंगली ( अंगूठे के बगल वाली उंगली ) के नीचे गुरु पर्वत और उस पूरी ऊंगली पर बृहस्पति देव के मंत्र का जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य ) I

गुरुवार को बृहस्पति की होरा में अधिक से अधिक बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करें । शिक्षा, मान – सम्मान, व्यापार, कारोबार, नए कार्यो के प्रारम्भ के लिए गुरुवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा में बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

बृहस्पति देव के मन्त्र

ॐ बृं बृहस्पतये नमः।। अथवा

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः।।


अवश्य पढ़ें :- जानिए कैसा हो खिड़कियों का वास्तु , जिससे जिससे वहाँ के निवासियों को मिले श्रेष्ठ लाभ

  • तिथि (Tithi) :- अष्टमी 21.18 PM तक तत्पश्चात नवमी,
  • तिथि का स्वामी – अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान शंकर जी और नवमी तिथि की स्वामी माँ दुर्गा देवी है I
  • अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान शिव कहे गए है। अष्टमी तिथि को भगवान शिव की विधि पूर्वक पूजा भोलेनाथ जी प्रसन्न होते है भक्तो को समस्त सिद्धियां प्राप्त होती है।
  • अष्टमी तिथि को…….
  • श्री शिवाये नमस्तुभ्यंम, एवं
  • ॐ नम: शिवाये मन्त्र का अधिक से अधिक जाप अवश्य करें ।
  • 🌺 अष्टमी तिथि का धार्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व
  • अष्टमी तिथि हिन्दू पंचांग की अत्यंत महत्वपूर्ण एवं शक्तिशाली तिथियों में से एक मानी जाती है। यह तिथि विशेष रूप से भगवान शिव, माँ दुर्गा और माँ महागौरी की उपासना के लिए श्रेष्ठ मानी गई है। शास्त्रों में अष्टमी को “जया तिथि” कहा गया है, जो विजय, साहस और सफलता का प्रतीक है।
  • 🌼 अष्टमी तिथि का विशेष नाम
  • अष्टमी तिथि का विशेष नाम “कलावती” है।
  • ✨ अष्टमी तिथि का महत्व
  • अष्टमी जया तिथियों की श्रेणी में आती है। मान्यता है कि इस तिथि में आरम्भ किए गए कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
  • यदि किसी पक्ष की अष्टमी तिथि मंगलवार को पड़े, तो सिद्धिद्दा योग बनता है, जिसे अत्यंत शुभ माना गया है।
  • चैत्र मास के शुक्ल एवं कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कुछ मुहूर्त ग्रंथों में शून्य तिथि कहा गया है, इसलिए उस दिन विशेष शुभ कार्यों के लिए योग्य मुहूर्त देखकर ही कार्य करना चाहिए।
  • 🕉️ भगवान शिव की पूजा
  • अष्टमी तिथि पर भगवान शिव की पूजा विशेष फलदायी मानी गई है।
  • शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र एवं धतूरा अर्पित करें।
  • भगवान शिव को नारियल का भोग अर्पित करें अथवा शिवजी के प्रसाद में नारियल का उपयोग करें।
  • ध्यान रखें: इस दिन स्वयं नारियल का सेवन नहीं करना चाहिए, ऐसी धार्मिक मान्यता है।
  • 🌺 माँ दुर्गा की आराधना
  • अष्टमी तिथि माँ दुर्गा की उपासना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।
  • विशेषकर अष्टमी तिथि में जन्मे जातकों को भगवान शिव एवं माँ दुर्गा की नियमित पूजा करनी चाहिए। इससे—
  • निर्भयता प्राप्त होती है।
  • जीवन के संकट दूर होते हैं।
  • आत्मबल एवं सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
  • शत्रु एवं नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।
  • 🙏 अष्टमी का विशेष मंत्र
  • ॥ ॐ दुं दुर्गायै नमः ॥
  • इस मंत्र की कम से कम एक माला जप करने से माँ दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
  • 📚 अष्टमी में क्या करना शुभ है ?
  • अष्टमी तिथि में निम्न कार्य अत्यंत शुभ माने गए हैं—
  • नई विद्याओं का अध्ययन प्रारम्भ करना।
  • संगीत, नृत्य, चित्रकला एवं अन्य ललित कलाओं का अभ्यास।
  • आध्यात्मिक साधना एवं मंत्र-जप।
  • पूजा-पाठ एवं हवन।
  • साहस एवं पराक्रम से जुड़े कार्य।
  • 🎉 अष्टमी पर मनाए जाने वाले प्रमुख पर्व
  • वर्ष भर विभिन्न महीनों में अनेक महत्वपूर्ण अष्टमियाँ आती हैं, जैसे—
  • 🌸 राधाष्टमी
  • 👶 अहोई अष्टमी
  • 🌼 गौरी अष्टमी
  • ❄️ शीतला अष्टमी
  • 🌺 दुर्गाष्टमी (महाअष्टमी) – नवरात्रि की सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक।
  • ⚠️ अष्टमी तिथि में ध्यान रखने योग्य बातें
  • भगवान शिव को नारियल अर्पित करें, लेकिन स्वयं नारियल का सेवन न करें (धार्मिक मान्यता)।
  • क्रोध, विवाद और अपशब्दों से बचें।
  • माता-पिता, गुरु एवं देवताओं का सम्मान करें।
  • यथाशक्ति दान-पुण्य एवं सेवा करें।
  • 🌸 अष्टमी तिथि का संदेश
  • अष्टमी तिथि शक्ति, साहस, विजय और आध्यात्मिक उन्नति की तिथि है। इस दिन भगवान शिव और माँ दुर्गा की आराधना करने से भय, संकट एवं नकारात्मकता दूर होती है तथा जीवन में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • ॥ ॐ नमः शिवाय ॥ 🔱
  • ॥ ॐ दुं दुर्गायै नमः ॥ 🌺
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नक्षत्र (Nakshatra) – विशाखा 09.09 AM तक तत्पश्चात अनुराधा

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी –      विशाखा नक्षत्र के देवता इंद्राग्नी ( इंद्र और अग्नि ) और स्वामी बृहस्पति देव जी है ।

विशाखा नक्षत्र, नक्षत्र मंडल में उपस्थित 27 नक्षत्रों में 16वां है।

विशाखा नक्षत्र देवी राधा के साथ सम्बंधित है जो उनकी प्रसन्नता को दर्शाता है, भगवान श्री कृष्ण के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता है।

विशाखा नक्षत्र वास्तव में पत्तियों से सजाया गया एक तोरण द्वार का प्रतीक है, जिसका मुख्य रूप से विवाह समारोहों में आवश्यकता है।

इस नक्षत्र का आराध्य वृक्ष : कटाई, नागकेशर तथा स्वाभाव अशुभ माना गया है। विशाखा नक्षत्र सितारे का लिंग महिला है।

इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक पर जीवन भर बृहस्पति देव जी का प्रभाव बना रहता है।

विशाखा नक्षत्र वालो को कभी धन की कमी नहीं सताती, या धन की परेशानी हो भी तो अधिक समय तक नहीं रहती।  विशाखा नक्षत्र वाले लोग बहुत भाग्यवान होते हैं।

विशाखा नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्तियों में अपने परिवार के प्रति विशेष लगाव रहता है। इन्हे एकल परिवार की बजाय संयुक्त परिवार में रहना ज्यादा पसंद होता है ।

विशाखा नक्षत्र वाले जातको के लिए भाग्यशाली संख्या 3 और 9,  भाग्यशाली रंग, सुनहरा,  भाग्यशाली दिन  मंगलवार, शुक्रवार और गुरुवार माना जाता है ।

विशाखा नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ इंद्राग्नीभ्यां नमः” अथवा “ॐ विशाखाभ्यां नमः”। मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।

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योग :- इंद्र 04.25 AM शुक्रवार 21 अगस्त तक

योग के स्वामी, स्वभाव :-    इंद्र 04.25 AM शुक्रवार 21 अगस्त तक ।

प्रथम करण :- विष्टि 08.15 AM तक

करण के स्वामी, स्वभाव :-   विष्टि करण के स्वामी यम और स्वभाव क्रूर है ।

द्वितीय करण :- बव 21.18 PM तक तत्पश्चात बालव

करण के स्वामी, स्वभाव :-    बव करण के स्वामी इंद्र देव और स्वभाव सौम्य है ।

ब्रह्म मुहूर्त : 4.25 AM से 5.09 AM तक

विजय मुहूर्त : 14.35 PM से 15.27 PM तक

गोधूलि मुहूर्त : 18.56 PM से 19.18 PM तक

अमृत काल : 12.17 AM से 02.04 AM शुक्रवार 21 अगस्त तक


अग्नि वास : पाताल में 21.18 PMतक तत्पश्चात पृथ्वी पर

 जब पाताल में अग्नि वास है तो वह हवन से सम्बन्धित अनुष्ठानों के लिये शुभ नहीं मानी जाती है, यह अशुभ मानी गई है । अग्नि के पाताल  वास के दौरान किये जाने वाले हवन  सम्बन्धित अनुष्ठानों व्यक्ति को आर्थिक नुकसान करना पड़ता है उसका  धन नष्ट हो सकता है।


अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।


शिव वास : शमशान में 21.18 PM तक तत्पश्चात माँ गौरी के साथ

शिव वास    श्मशान में –  जब भगवान शिव का श्मशान में वास होता हैं, तो रुद्र अभिषेक आदि  करना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ जी का  श्मशान में वास के दौरान अभिषेक करने से मृत्यु समान  परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

जब भगवान शंकर  गौरी मइय्या के साथ होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शंकर जी के देवी गौरी के साथ रहने के समय किये गए  रूद्रअभिषेक से घर कारोबार में सुख-समृद्धि आती है, स्थाई लक्ष्मी का वास होता है ।

  • दिशाशूल (Dishashool)– बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – गुलिक 09:30 AM से 11 AM बजे तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)– दिन – 1:30 PM से 3:00 PM तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 05:53
  • सूर्यास्त – सायं 18.56
  1. विशेष – अष्टमी को नारियल का सेवन नहीं करना चाहिए, अष्टमी को नारियल का सेवन करने से बुध्दि का नाश होता है  ।
  • पर्व त्यौहार
  • मुहूर्त (Muhurt)

अवश्य पढ़ें :- अगर गिरते हो बाल तो ना होएं परेशान तुरंत करें ये उपाय, जानिए बालो का गिरना कैसे रोकें,

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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### *प्रस्तुतकर्ता*:  आचार्य मुक्ति नारायण पांडेय
### *प्रस्तुतकर्ता*:  
### *आचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय*  
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 हर समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है आपकी प्रत्येक इच्छा, महत्वकांक्षा, जीवन में बुलंदियों पर पहुंचना या किसी भी तरह की समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है *व्यापार बढ़ोतरी किया कराया शादी के लिए माता-पिता को मनाना जब कहीं ना ही हो काम तो हमसे में समाधान हर मुश्किल से मुश्किल समस्या का समाधान ज्योतिष मेरा काम नहीं मेरी साधना है जब कहीं ना हो काम तो हमसे ले समाधान https://devlinai.co.in/own_projects/acharya-main/
*ॐ नमः शिवाय | जय सनातन* 🚩

दोस्तों यह साईट बिलकुल निशुल्क है। यदि आपको इस साईट से कुछ भी लाभ प्राप्त हुआ हो, आपको इस साईट के कंटेंट पसंद आते हो तो मदद स्वरुप आप इस साईट को प्रति दिन ना केवल खुद ज्यादा से ज्यादा विजिट करे वरन अपने सम्पर्कियों को भी इस साईट के बारे में अवश्य बताएं …..धन्यवाद ।

बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang, 19 अगस्त 2026 का पंचांग,

बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang, 19 अगस्त 2026 का पंचांग,


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पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi) 2:- वार (Day) 3:- नक्षत्र (Nakshatra) 4:- योग (Yog) 5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए बुधवार का पंचांग, Budhvar Ka Panchang, आज का पंचांग, aaj ka panchang,


बुधवार का पंचांग (Budhwar Ka Panchang)


19 अगस्त 2026 का पंचांग, ( Panchang ), 19 August 2026 ka Panchang,

गणेश गायत्री मंत्र :
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।

।। आज का दिन मंगलमय हो ।।

* दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।

जीवन में कोई भी मनोकामना हो हनुमान जी के जन्मोत्सव के दिन अवश्य ही करें ये उपाय,


मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है, अगर आप भी पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

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आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
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बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

इस उपाय से शरीर रहेगा निरोगी, शक्ति रहेगी भरपूर, बुढ़ापा पास भी नहीं आएगा, जानिए रोगनाशक दिव्य आहार,

* बुधवार को सभी ग्रहो के राजकुमार बुध देव की आराधना करने से ज्ञान मिलता है, वाकपटुता में प्रवीणता आती है, धन लाभ होता है ।

बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाने तथा रात को सोते समय फिटकरी से दाँत साफ करने से आर्थिक पक्ष मजबूत होता है ।

जानिए बजरंग बलि के परिवार के बारे में, अवश्य जानिए हनुमान जी के माता पिता और उनके भाइयों के बारे में,

*विक्रम संवत् – 2083,
*शक संवत – 1948
*कलि संवत – 5128
*अयन – दक्षिणयायन
*ऋतु – वर्षा ऋतु
*मास – सावन माह
*पक्ष – शुक्ल पक्ष
*चंद्र बल – वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुम्भ,

बुधवार को बुध की होरा :-

प्रात: 5.52 AM से 6.58 AM तक

दोपहर 01.30 PM से 2.35 PM तक

रात्रि 20.46 PM से 21.41 PM तक

बुधवार को बुध की होरा में हाथ की सबसे छोटी उंगली और बुध पर्वत को हल्के हल्के रगड़ते हुए अधिक से अधिक बुध देव के मन्त्र का जाप करें ।

ज्योतिष, पढ़ाई, लिखाई, सीखने, वाकपटुता, अपना प्रभाव डालने और व्यापार में सफलता के लिए बुध की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

बुधवार के दिन बुध की होरा में बुध देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

अवश्य पढ़ें :- पूरे वर्ष निरोगी काया के लिए सर्दियों में सेवन करें ये आहार,

आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,भारत की लगभग 150 करोड़ की आबादी में 0.001 % अर्थात लगभग 15 हज़ार आदमी ही नित्य पंचांग पढ़ पाते है।

आप पर ईश्वर की असीम कृपा है जो आपको नित्य पंचांग पढ़ने का, अपने भाग्य को प्रबल करने का, पापो के प्रायश्चित करने का अवसर मिल रहा है,

दुनिया के सारे उपाय एक तरफ है, और नित्य पंचाग पढ़ने का पुण्य उससे भी कहीं अधिक है,

इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है ।

बुध देव के मन्त्र

“ॐ बुं बुधाय नमः” अथवा

“ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।।”

अवश्य जानिए कैसे और किससे हुआ हनुमान जी का विवाह, इनकी पुत्री है हनुमान जी की पत्नी,

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  • तिथि (Tithi) – सप्तमी 19.19 PM तक तत्पश्चात अष्टमी,
  • तिथि के स्वामी – सप्तमी तिथि के स्वामी सूर्य देव जी और अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी है । 

🌞सप्तमी के अधिष्ठाता देव भगवान सूर्य हैं।

इस पावन तिथि पर आदित्यहृदय स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ अवश्य करें। ऐसा करने से आत्मबल, स्वास्थ्य, यश एवं सफलता की प्राप्ति होती है।

सप्तमी तिथि अत्यंत शुभ एवं मंगलकारी मानी गई है।

इस दिन जन्म लेने वाले जातक सामान्यतः भाग्यशाली, गुणवान, तेजस्वी, परिश्रमी तथा सम्मानित होते हैं। अपनी योग्यता और प्रतिभा के बल पर वे जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिष्ठा प्राप्त करते हैं।

आज का विशेष मंत्र (भगवान सूर्य):
॥ ॐ सूर्याय नमः ॥
इस मंत्र की कम से कम एक माला जप करने से सूर्यदेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है तथा आत्मविश्वास, ऊर्जा और सकारात्मकता में वृद्धि होती है।

सप्तमी का विशेष नाम – “मित्रपदा”
इस दिन काले एवं नीले रंग के वस्त्र धारण करने से बचना चाहिए। इसके स्थान पर लाल, केसरिया, पीले अथवा सफेद रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।

माँ कालरात्रि (माँ काली) की आराधना :
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सप्तमी तिथि पर माँ कालरात्रि की उपासना भी अत्यंत फलदायी मानी गई है। उनकी कृपा से समस्त भय, बाधाएँ एवं संकट दूर होते हैं।

माँ काली का मंत्र:
॥ ॐ क्रीं काल्यै नमः ॥
इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करने से नकारात्मक शक्तियों, भय एवं संकटों से रक्षा होती है।

सप्तमी तिथि में करने योग्य शुभ कार्य

नए कार्य का शुभारंभ
नई यात्रा प्रारंभ करना
विवाह एवं मांगलिक कार्य
नए वस्त्र एवं आभूषण धारण करना
नृत्य, संगीत एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम
चूड़ाकर्म, अन्नप्राशन, उपनयन आदि शुभ संस्कार

🧭 सप्तमी की शुभ दिशा:
वायव्य (उत्तर-पश्चिम)

आज क्या न करें?
सप्तमी तिथि को ताड़ (Palm) के फल का सेवन नहीं करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार इस दिन ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ने की आशंका मानी गई है।

🙏 भगवान सूर्यदेव एवं माँ कालरात्रि की कृपा से सभी के जीवन में उत्तम स्वास्थ्य, तेज, यश, समृद्धि और सुख-शांति का वास हो।

ॐ सूर्याय नमः। 

ॐ क्रीं काल्यै नमः। 


गुरु पूर्णिमा अपने गुरु की कृपा दृष्टि प्राप्त करने, अपने सभी संकटो को दूर करने का दिन है। जानिए गुरु पूर्णिमा के अचूक उपाय

इस तरह से मनाएं जन्माष्टमी का पर्व जीवन में लग जायेगा सुखो का अम्बार 

आज हरियाली अमावस्या को लगने वाले सूर्य ग्रहण के दिन इन उपायों को करने से सभी बंद दरवाजे खुल जायेंगे, जानिए सूर्य ग्रहण के अचूक उपाय

नक्षत्र (Nakshatra) – स्वाति 06.46 AM तक तत्पश्चात विशाखा

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी-       स्वाति नक्षत्र के देवता वायु और सरस्वती जी और स्वामी राहु जी है ।



स्वाति नक्षत्र, नक्षत्र मंडल में उपस्थित 27 नक्षत्रों में 15वां है। स्वाति नक्षत्र राहु का दूसरा नक्षत्र है। स्वाति नक्षत्र के देवता पवन देव हैं।  स्वाति नक्षत्र का संबंध विद्या की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती से भी है।

स्वाति नक्षत्र ‘शुद्धता’,  ‘स्वतंत्रता’ को दर्शाता है ।  यह अत्यंत शुद्ध और पवित्र बारिश की पहली बूंद का भी प्रतीक है ।

स्वाति नक्षत्र के पानी का महत्व ज्यादा होता है। इसकी एक बूंद से पपैया पक्षी अपनी प्यास बुझा लेता है। केले के पत्ते पर जल की बूंद गिरने से कपूर बनता है। इसी जल की बूंद समुद्र में गिरने से मोती बनता है।

इस नक्षत्र का आराध्य वृक्ष : अर्जुन तथा स्वाभाव शुभ माना गया है। स्वाति नक्षत्र सितारे का लिंग महिला है।

इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक पर जीवन भर शुक्र एवं राहु ग्रह का प्रभाव बना रहता है।

इस नक्षत्र में जन्मा जातक धार्मिक, लोकप्रिय, बुद्धिमान, चतुर, परिश्रमी, अनुशासित, आध्यात्मिक होता हैं, सामन्यता इन्हे भूमि, भवन और पूर्ण सुख मिलता है।

लेकिन यदि शुक्र ख़राब हो तो जातक क्रोधी, घमंडी, अति कामुक, मदिरा प्रेमी होता है उसको धन और स्त्री का सुख भी नहीं मिलता है ।

स्वाति नक्षत्र में पैदा हुई स्त्री सुन्दर, मिलनसार, धार्मिक, दयालु,  दूसरो को जल्द प्रभावित करने वाली होती हैं। इनका पारिवारिक दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।

स्वाति नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 4 और 6,  भाग्यशाली रंग, गहरा भूरा, काला,  भाग्यशाली दिन  शनिवार, सोमवार और मंगलवार माना जाता है ।

स्वाति नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को वायु देव के  “ॐ वायवे नमः”। मन्त्र माला का जाप अवश्य करना चाहिए, इससे जीवन में श्रेष्ठ सफलता मिलती है  ।

जरूर पढ़े :- दुश्मनो से छुटकारा पाना हो अथवा कारोबार में चाहिए आशातीत सफलता हनुमान जयंती के दिन अवश्य ही करें ये उपाय,

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  • योग (Yog) – ब्रह्म 03.44 AM गुरुवार 20 अगस्त तक
  • योग के स्वामी, स्वभाव :-    ब्रह्म योग के स्वामी अश्विनी कुमार जी एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है  ।
  • प्रथम करण : – गर 06.30 AM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :- गर करण के स्वामी भूमि तथा स्वभाव सौम्य है ।
  • द्वितीय करण : – वणिज 19.19 PM तक तत्पश्चात विष्टि
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-   वणिज करण की स्वामी लक्ष्मी देवी और स्वभाव सौम्य है ।

  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.25 AM से 5.09 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.35 PM से 15.28 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.57 PM से 19.19 PM तक
  • अमृत काल : 23.28 PM से 01.13 AM गुरुवार 20 अगस्त तक

  • अग्निवास : पृथ्वी पर

    अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।

  • शिव वास : भोजन में 19.19 PM तक तत्पश्चात शमशान में


    शिव वास  :   भोजन में   जब भगवान भोलेनाथ जी भोजन कर रहे हों या ध्यान में मग्न हों तो उस समय रुद्र अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। भगवान शंकर जी के रात्रि भोजन अथवा ध्यान करते समय रुद्रभिषेक करने से परेशानी का सामना करना पड़ता है।

    शिव वास  :  श्मशान में   जब भगवान शिव का श्मशान में वास होता हैं, तो रुद्र अभिषेक आदि  करना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ जी का  श्मशान में वास के दौरान अभिषेक करने से मृत्यु समान  परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।


    इन उपायों से धन संपत्ति खींची चली आएगी, किसी चीज़ का नहीं रहेगा अभाव
  • दिशाशूल (Dishashool)- बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।

    इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – बुधवार का गुलिक काल 10:30 AM से 12 PM बजे तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal) : – बुधवार का राहुकाल दिन 12:00 PM से 1:30 PM तक ।
  • सूर्योदय – प्रातः 5.52 AM
  • सूर्यास्त – सायं 18.57 PM
  • विशेष – सप्तमी को ताड़ का सेवन नहीं करना चाहिए  । इस दिन ताड़ का सेवन करने से रोग लगते है । 
  • मुहूर्त :-
  • पर्व त्यौहार

सबसे ज्यादा पढ़ी गयी :- ऐसा होगा घर के पूजा घर का वास्तु तो पूरी होंगी सभी मनोकमनाएं, जानिए पूजा घर के वास्तु टिप्स,

हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।

अवश्य जानिए :- नैत्रत्यमुखी भवन के वास्तु के अचूक उपाय, 

19 अगस्त 2026 का पंचांग, 19 August 2026 ka panchang, aaj ka panchang, aaj ka rahu kaal, aaj ka shubh panchang, Budhwar Ka Panchang, budhwar ka rahu kaal, budhwar ka shubh panchang, kal ka panchang, panchang, Wednesday ka panchang, आज का पंचांग, आज का राहुकाल, आज का शुभ पंचांग, कल का पंचांग, पंचांग, बुधवार का पंचांग, बुधवार का राहु काल, बुधवार का शुभ पंचांग, वेडनेस डे का पंचांग,


### *प्रस्तुतकर्ता*:  
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 हर समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है आपकी प्रत्येक इच्छा, महत्वकांक्षा, जीवन में बुलंदियों पर पहुंचना या किसी भी तरह की समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है *व्यापार बढ़ोतरी किया कराया शादी के लिए माता-पिता को मनाना जब कहीं ना ही हो काम तो हमसे में समाधान हर मुश्किल से मुश्किल समस्या का समाधान ज्योतिष मेरा काम नहीं मेरी साधना है जब कहीं ना हो काम तो हमसे ले समाधान https://devlinai.co.in/own_projects/acharya-main/
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मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang, 18 अगस्त 2026 का पंचांग,

मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang, 18 अगस्त 2026 का पंचांग,


मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang,

Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)




पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए मंगलवार का पंचांग (Mangalvar Ka Panchang)।

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

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हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।

मित्रो हम पिछले 35 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद


।। आज का दिन मंगलमय हो ।।

  • दिन (वार) – मंगलवार Mangalwar के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।

    मंगलवार Mangalwar को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।

    मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।

    नवरात्री में घर, कारोबार में इस विधि से करें कलश की स्थापना, अवश्य जानिए कलश स्थापना की सही और बहुत ही आसान विधि,

    मंगलवार के व्रत से सुयोग्‍य संतान की प्राप्ति होती है, बल, साहस और सम्मान में भी वृद्धि होती है।

    मंगलवार को धरती पुत्र मंगलदेव की आराधना करने से जातक को मुक़दमे, राजद्वार में सफलता मिलती है, उत्तम भूमि, भवन का सुख मिलता है, मांगलिक दोष दूर होता है।


    जीवन में समस्त संकटो को दूर करने, सफलता का द्वार खोलने के लिए नवरात्री के मंगलवार को अवश्य ही करें ये उपाय

    आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,
  • इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । नित्य पंचांग को पढ़ने से देवताओं का आशीर्वाद मिलता है, पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है ।

*विक्रम संवत्- 2083,
*शक संवत – 1948

*कलि सम्वत – 5128
*अयन –
दक्षिणायण
*ऋतु –
वर्षा ऋतु
*मास –
सावन माह,
*पक्ष – शुक्ल पक्ष
*चंद्र बल – मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, मकर,

मंगलवार को मंगल की होरा :-

प्रात: 5.52 AM से 6.57 AM तक

दोपहर 01.30 PM से 2.36 PM तक

रात्रि 20.47 PM से 21.41 PM तक

मंगलवार को मंगल की होरा में हाथ की निम्न मंगल पर दो बूंद सरसो का तेल लगा कर उसे हल्के हल्के रगड़ते हुए अधिक से अधिक मंगल देव के मन्त्र का जाप करें ।

कृषि, भूमि, भवन, इंजीनियरिंग, खेलो, साहस, आत्मविश्वास

और भाई के लिए मंगल की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

मंगलवार के दिन मंगल की होरा में मंगल देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में मंगल मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

गुरु पूर्णिमा पर इस मन्त्र का अवश्य ही करें जाप, जानिए गुरु पूर्णिमा का उपाय,

मंगल देव के मन्त्र

ॐ अं अंगारकाय नम: अथवा

ॐ भौं भौमाय नम:”

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तिथि :- षष्ठी तिथि 02.20 PM फिर सप्तमी तिथि 

तिथि के स्वामी :- षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान कार्तिकेय जी है ।

षष्ठी (छठ) के देवता भगवान भोलेनाथ  और माँ पार्वती  के बड़े पुत्र और देवताओं के सेनापति कार्तिकेय जी है, लेकिन वह पार्वतीजी के गर्भ से नहीं जन्‍मे है ।

दक्षिण भारत में इन्हे भगवान मुरुगन के रूप में पूजा जाता है। यह दक्षिण भारत के  तमिल नाडु राज्य के रक्षक देव भी माने जाते हैं।

भारत के आलावा विश्व के अन्य देशों जैसे श्रीलंका, मलेशिया, सिंगापुर आदि में भी कार्तिकेय जी को इष्ट देव के रूप में स्वीकार किया गया है।

भगवान कुमार कार्तिकेय जी के 6 मुख हैं, कार्तिकेय जी को युवा और बाल्य रूप में ही पूजा जाता है। भगवान कार्तिकेय जी को सदेव युवा रहने का वरदान प्राप्त है ।

भगवान कार्तिकेय जी अवतार रूप मे ब्रम्हचारी माने गए हैँ।  ऋषि जरत्कारू और राजा नहुष के बहनोई हैं और जरत्कारू और इनकी छोटी बहन मनसा देवी के पुत्र महर्षि आस्तिक के मामा ।

  स्कन्द पुराण के अनुसार भगवान कार्तिकेय ने देवताओं और असुरो के संग्राम में देवताओं का नेतृत्व कर राक्षस तारकासुर का संहार किया।

तारकासुर के वध करने के बाद कार्तिकेय जी को देवताओ से सदैव युवा रहने का वरदान प्राप्त हुआ ।  

इस तिथि में कार्तिकेय जी की पूजा करने से मनुष्य श्रेष्ठ मेधावी, रूपवान, दीर्घायु और कीर्ति को बढ़ाने वाला हो जाता है। यह यशप्रदा अर्थात सिद्धि देने वाली तिथि हैं।  

भगवान कार्तिकेय की पूजा करने से भक्तो को बल और साहस की प्राप्ति होती है, विवाद, मुक़दमो में सफलता मिलती है, शत्रु परास्त होते है।

कार्तिकेय गायत्री मंत्र : – ‘ॐ तत्पुरुषाय विद्महे: महा सैन्या धीमहि तन्नो स्कन्दा प्रचोदयात’. यह मंत्र हर प्रकार के दुख एवं कष्टों का नाश करने के लिए प्रभावशाली है ।

षष्टी को नीम का सेवन नहीं करना चाहिए । षष्टी को नीम का सेवन करने से नीच योनि मिलती है ।

अवश्य पढ़ें :- चाहिए परिवार में सुख-समृद्धि, प्रेम और आरोग्य तो ऐसा होना चाहिए किचन का वास्तु, जानिए किचन के वास्तु टिप्स,

अवश्य जानें कैसे हुआ गणेश जी का अवतरण, कैसे गणेश जी का सर हाथी के सर में बदल गया, कैसे गणपति जी कहलाएं भगवान गजानन

  • नक्षत्र (Nakshatra) – स्वाति नक्षत्र पूर्ण रात्रि तक,
  • नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी –      स्वाति नक्षत्र के देवता वायु और सरस्वती जी और स्वामी राहु जी है ।

 स्वाति नक्षत्र, नक्षत्र मंडल में उपस्थित 27 नक्षत्रों में 15वां है। स्वाति नक्षत्र राहु का दूसरा नक्षत्र है। स्वाति नक्षत्र के देवता पवन देव हैं।  स्वाति नक्षत्र का संबंध विद्या की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती से भी है।

स्वाति नक्षत्र ‘शुद्धता’,  ‘स्वतंत्रता’ को दर्शाता है ।  यह अत्यंत शुद्ध और पवित्र बारिश की पहली बूंद का भी प्रतीक है ।

स्वाति नक्षत्र के पानी का महत्व ज्यादा होता है। इसकी एक बूंद से पपैया पक्षी अपनी प्यास बुझा लेता है। केले के पत्ते पर जल की बूंद गिरने से कपूर बनता है। इसी जल की बूंद समुद्र में गिरने से मोती बनता है।

इस नक्षत्र का आराध्य वृक्ष : अर्जुन तथा स्वाभाव शुभ माना गया है। स्वाति नक्षत्र सितारे का लिंग महिला है।

इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक पर जीवन भर शुक्र एवं राहु ग्रह का प्रभाव बना रहता है।

इस नक्षत्र में जन्मा जातक धार्मिक, लोकप्रिय, बुद्धिमान, चतुर, परिश्रमी, अनुशासित, आध्यात्मिक होता हैं, सामन्यता इन्हे भूमि, भवन और पूर्ण सुख मिलता है।

लेकिन यदि शुक्र ख़राब हो तो जातक क्रोधी, घमंडी, अति कामुक, मदिरा प्रेमी होता है उसको धन और स्त्री का सुख भी नहीं मिलता है ।

स्वाति नक्षत्र में पैदा हुई स्त्री सुन्दर, मिलनसार, धार्मिक, दयालु,  दूसरो को जल्द प्रभावित करने वाली होती हैं। इनका पारिवारिक दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।

स्वाति नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 4 और 6,  भाग्यशाली रंग, गहरा भूरा, काला,  भाग्यशाली दिन  शनिवार, सोमवार और मंगलवार माना जाता है ।

स्वाति नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को वायु देव के  “ॐ वायवे नमः”। मन्त्र माला का जाप अवश्य करना चाहिए, इससे जीवन में श्रेष्ठ सफलता मिलती है  ।

  • योग :- शुक्ल 03.23 AM बुधवार 19 अगस्त तक
  • योग केस्वामी:-     शुक्ल योग की स्वामी माँ पार्वती जी और और स्वभाव श्रेष्ठ है ।
  • प्रथम करण : – तैतिल 17.50 PM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :- तैतिल करण के स्वामी विश्वकर्मा जी और स्वभाव सौम्य है ।
  • द्वितीय करण : – गर पूर्ण रात्रि तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :- गर करण के स्वामी भूमि तथा स्वभाव सौम्य है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 04.25 AM से 5.08 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.36 PM से 15.28 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.58 PM से 19.20 PM तक
  • अमृत काल : 21.19 AM से 23.02 PM तक

  • शिव वास :- नंदी पर 17.50 PM तक तत्पश्चात भोजन पर

  • शिव वास :-  जब भगवान भोलेनाथ नन्दी जी पर विराजमान होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना सदैव बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों केअनुसार भगवान शंकर जी के नन्दी पर विराजमान के समय रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सफलता, शुभ समाचारो की प्राप्ति  होती है।


    शिव वास  :   भोजन में   जब भगवान भोलेनाथ जी भोजन कर रहे हों या ध्यान में मग्न हों तो उस समय रुद्र अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। भगवान शंकर जी के रात्रि भोजन अथवा ध्यान करते समय रुद्रभिषेक करने से परेशानी का सामना करना पड़ता है।


  • अग्नि वास : पाताल पर 17.50 PM तक तत्पश्चात पृथ्वी पर

     जब पाताल में अग्नि वास है तो वह हवन से सम्बन्धित अनुष्ठानों के लिये शुभ नहीं मानी जाती है, यह अशुभ मानी गई है । अग्नि के पाताल  वास के दौरान किये जाने वाले हवन  सम्बन्धित अनुष्ठानों व्यक्ति को आर्थिक नुकसान करना पड़ता है उसका  धन नष्ट हो सकता है।

    अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।
  • दिशाशूल (Dishashool)- मंगलवार को उत्तर दिशा का दिकशूल होता है।

    यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से गुड़ खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – दोपहर 12:00 से 01:30 तक है ।
  • राहुकाल (Rahukaal) दिन – 3:00 से 4:30 तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 05:52
  • सूर्यास्त – सायं 18:58
  • विशेष – षष्ठी के दिन नीम की पत्ती खाना, दातुन करना या किसी भी तरह से  नीम का सेवन नहीं करना चाहिए । इस दिन नीम का सेवन करने से नीच योनि की प्राप्ति होती है।
  • पर्व – त्यौहार-

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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### *प्रस्तुतकर्ता*:  
### *आचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय*  
### *अध्यात्म ज्योतिष परामर्श केंद्र*  
### *श्याम नगर, रायपुर, छत्तीसगढ़*  
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सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang, 17 अगस्त 2026 का पंचांग,

सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang, 17 अगस्त 2026 का पंचांग,

आप सभी शिव भक्तो को सावन के सोमवार की हार्दिक शुभकामनायें, हर हर महादेव

सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang, 17 अगस्त 2026 का पंचांग, 17 August 2026 ka Panchang,

मित्रो हम पिछले 35 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

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आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद


Panchang, पंचाग, आज का पंचांग, aaj ka panchang, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए, सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang।

सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang,

17 अगस्त 2026 का पंचांग, 17 August 2026 ka Panchang,

महा मृत्युंजय मंत्रॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।

  • दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।

    सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।

सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।

जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।

सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।

घर पर कैसा भी हो वास्तु दोष अवश्य करें ये उपाय, जानिए वास्तु दोष निवारण के अचूक उपाय

*विक्रम संवत् – 2083,
* शक संवत – 1948,
*कलि संवत – 5128
*कलयुग – 5128 वर्ष
* अयन – दक्षिणायण,
* ऋतु – वर्षा ऋतु,
* मास – सावन माह,
* पक्ष – शुक्ल पक्ष
*चंद्र बल – वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर, कुम्भ,

सोमवार को चन्द्रमा की होरा :-

प्रात: 5.51 AM से 6.57 AM तक

दोपहर 01.31 PM से 2.36 PM तक

रात्रि 20.48 PM से 21.42 PM तक

सोमवार को चन्द्रमा की होरा में अधिक से अधिक चन्द्र देव के मन्त्र का जाप करें। यात्रा, प्रेम, प्रसन्नता, कला सम्बन्धी कार्यो के लिए चन्द्रमा की होरा अति उत्तम मानी जाती है।


आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,भारत की लगभग 150 करोड़ की आबादी में 0.001 % अर्थात लगभग 15 हज़ार आदमी ही नित्य पंचांग पढ़ पाते है।

आप पर ईश्वर की असीम कृपा है जो आपको नित्य पंचांग पढ़ने का, अपने भाग्य को प्रबल करने का, पापो के प्रायश्चित करने का अवसर मिल रहा है,

दुनिया के सारे उपाय एक तरफ है, और नित्य पंचाग पढ़ने का पुण्य उससे भी कहीं अधिक है, नित्य पंचांग पढ़ने से देवताओं का आशीर्वाद मिलता है, कार्य सिद्ध होने लगते है,

इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है ।

सोमवार के दिन चन्द्रमा की होरा में चंद्रदेव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में चंद्र देव मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

चन्द्रमा के मन्त्र

ॐ सों सोमाय नम:।

ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम: ।

  • तिथि (Tithi) – पंचमी 17 PM तक तत्पश्चात षष्टी,
  • तिथि का स्वामी – पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता जी और षष्टी तिथी के स्वामी भगवान कार्तिकेय जी है ।
     
  • आज नाग पंचमी का पर्व है, नाग पंचमी का पर्व सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है । इस नाग देवता की पूजा करने का विधान है ।
    मान्यताओं के अनुसार इस दिन नागो का पूजन करने वाले जातकों और उनके परिवार पर नागों की कृपा होती है, कुंडली के कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है ।
  • इस बार सावन के सोमवार के दिन नाग पंचमी का पर्व आने पर इस पर का पर्व और भी अधिक बढ़ गया है। पंचमी तिथि का प्रारम्भ रविवार 16 अगस्त को सांय 16.53 से हुआ है इस तिथि का समापन आज सोमवार 17 अगस्त को सांय 17.00 होगा इसलिए उदया तिथि के अनुसार नाग पंचमी का पर्व सोमवार 17 अगस्त को मनाया जायेगा ।
  • भविष्य पुराण के ब्रह्मा पर्व में नाग पंचमी की कथा के बारे में उल्लेख्य है उस के अनुसार सुमंतु मुनि ने शतानीक राजा को नाग पंचमी की कथा के बारे में बताया है । ऐसा मन जाता है कि सावन माह के शुक्ल पक्ष के पंचमी के दिन नाग लोक में बहुत बड़ा उत्सव मनाया जाता है ।
  • वैसे तो वर्ष की सभी पंचमियों के दिन नाग देवता की पूजा स्मरण किया जाता है लेकिन सावन माह की पंचमी जिसे नाग पंचमी कहते है, इसके बारे में मान्यता है की जो व्यक्ति इस दिन नागों की पूजा करता है, उन्हें गाय के दूध से स्नान कराता है, नागो से उसके कुल को अभय दान मिल जाता हैं, उसको और उसके परिजनों को को सर्प का कभी भय नहीं रहता है, कुंडली के घातक दोषो, काल सर्प दोष से छुटकारा मिलता है ।
  • सनातन परंपरा में नागों का भगवान शिव से अत्यंत गहरा संबंध है। भगवान शिव के कंठ में नागराज वासुकि सुशोभित होते हैं, उन्हें नागो का राजा भी कहा जाता है । समुद्र मंथन के दौरान वासुकि नाग को मंदराचल पर्वत पर रस्सी के रूप में लपेटा गया था। इसलिए श्रावण मास, शिव आराधना और नाग पूजा का संबंध विशेष रूप से दिखाई देता है।
  • भगवान विष्णु का शेषनाग पर शयन भी नागों के दिव्य और ब्रह्मांडीय स्वरूप को दर्शाता है।
  • नाग पंचमी के संदर्भ में भगवान श्रीकृष्ण का यह श्लोक विशेष रूप से महत्वपूर्ण है:
  • ॥ अनन्तश्चास्मि नागानां ॥ — श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 10, श्लोक 29
  • अर्थात्: “नागों में मैं अनन्त (शेषनाग) हूँ।”
  • यहाँ भगवान श्रीकृष्ण नागों में अनन्त नाग को अपनी विभूति बताते हैं। इसलिए नाग पूजा को केवल सर्प पूजा न मानकर, भगवान की दिव्य शक्तियों के प्रति श्रद्धा के रूप में भी समझा जाता है।
  • प्रसिद्ध ग्रन्थ महाभारत में जन्मेजय के नाग यज्ञ की कहानी का भी उल्लेख्य है जिसके अनुसार जन्मेजय द्वारा किये गए नाग यज्ञ के दौरान बड़े-बड़े विशाल, विकराल नाग अग्नि में आकर जलने लगे ।
  • उस समय आचार्य आस्तिक जी ने इस सर्प यज्ञ को रोककर नागों की रक्षा की थी यह सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि ही थी, इसके बाद से ही इस दिन नाग पंचमी का पर्व मानाने की प्रथा का प्रारम्भ हो गया ।
  • ऐसी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति आस्तिक ऋषि जी का 3 बार नाम लेता है उसे कभी भी सांप के काटे जाने का भय नहीं होता है ।
  • नाग पंचमी व्रत-कथा परंपरा में राजा शतानिक और सुमन्तु मुनि का संवाद मिलता है। इसमें पंचमी तिथि को नागों के लिए विशेष प्रिय बताया गया है ।
  • नाग पंचमी के दिन वाराणसी में “नाग कुआँ” नामक स्थान पर बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है । ऐसा माना जाता है कि इस स्थान वाराणसी में नाग राज तक्षक, गरूड़ जी के भय से बालक के रूप में काशी संस्कृत की शिक्षा लेने हेतु आये, परन्तु गूरू पत्नी के सखियों से गरुड़ जी तक्षक रुपी बालक के बारे में पता लग गया और उन्होंने तक्षक पर हमला कर दिया, परन्तु फिर अपने गुरू जी के प्रभाव के कारण गरूड़ जी ने शरणागत तक्षक नाग को अभय दान दे दिया ।
  • उसी समय से वाराणसी में इस स्थान पर नाग पंचमी के दिन से नाग देवता की पूजा की जाती है, मान्यता है, कि जो भी नाग पंचमी के दिन वाराणसी में “नाग कुँआ” पर पूजा अर्चना कर नाग कुआँ का दर्शन करता है, उसकी कुन्डली से काल सर्प दोष का निवारण हो जाता है।
  • नाग पंचमी के दिन घर की दीवाल पर गेरू पोतकर पूजा करने का स्थान बनाया जाता है। उसके बाद कच्चे दूध में कोयला घिसकर उससे गेरू पुती दीवाल के ऊपर घर जैसा चित्र बनाकर उसमें अनेक नागो की आकृति बनाई जाती हैं।
  • कई स्थानों पर हल्दी व चंदन की स्याही से अथवा गोबर से घर के मुख्य दरवाजे के दोनों तरफ पाँच फन वाले नागदेव की आकृति बनाकर उसकी पूजा की जाती हैं।
  • नाग पंचमी के दिन “ॐ कुरुकुल्ये हुं फट् स्वाहा” का जाप करने से नाग देवता का आशीर्वाद मिलता है, भय बाधाएं दूर होती है ।
  • इस दिन नागदेव का दर्शन करना बहुत शुभ माना जाता है । इस दिन बहुत सी जगहों पर सांप की बाँबी की भी पूजा की जाती है । नाग पंचमी के दिन जमीन को नहीं खोदना चाहिए अन्यथा साँप रुष्ट हो जाते है ।
  • इस दिन भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग के ऊपर बनी सांप की आकृति पर दूध चढ़ाकर नाग की पूजा करने, शिवलिंग पर चांदी अथवा तांबे के नाग नागिन का जोड़ा अर्पित करने से भी काल सर्पदोष दूर होता है, कुंडली में राहु के शुभ फल मिलने लगते है ।
  • नाग पंचमी के दिन नागो के अति पवित्र और पुण्यदायक नामो 1. अनंत (शेषनाग ), 2. वासुकि, 3. तक्षक, 4. कर्कोटक, 5. पद्म, 6. महापद्म, 7. शंख, 8. कुलिक, 9. धृतराष्ट्र और 10. कालिया का उच्चारण करने से काल सर्प दोष दूर होता है, कोई भी भय निकट नहीं रहता है, बल और साहस की प्राप्ति होती है ।
  • पंचमी को नागो के पौराणिक नाम “अनंत, वासुकि, तक्षक, कर्कोटल, पिंगल” का कम से कम 11 बार उच्चारण अवश्य ही करें।
  • हिन्दू पंचांग के अनुसार पंचमी तिथि को बसंत पंचमी, रंग पंचमी, विवाह पंचमी, नाग पंचमी, ऋषि पंचमी, लाभ पंचमी / सौभाग्य पंचमी आदि कई शुभ पर्व आते है ।
  • पंचमी तिथि पूर्णा तिथियों की श्रेणी में आती है, इस तिथि में समस्त शुभ कार्य सिद्ध होते हैं, किन्तु पंचमी तिथि को कर्ज नहीं देना चाहिए।
  • पंचमी को बेल खाना निषेध है, मान्यता है कि पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है।


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आज सावन माह का तीसरा सोमवार, और नाग पंचमी का पर्व का उत्तम संयोग है । सावन माह गुरुवार 30 जुलाई से प्रारम्भ हो चूका है, भगवान भोलनाथ को सावन का सोमवार अत्यंत प्रिय है । मान्यता है की सावन माह में शिवलिंग पर मात्र जल चढ़ाने से भगवान शंकर जी अत्यंत प्रसन्न हो जाते है ।

ऐसी मान्यता है कि सावन के सोमवार का ब्रत रखने, इस दिन शिवलिंग का विधि पूर्वक अभिषेक करने से जीवन से सभी संकटो का नाश होता है, इस वर्ष सावन में 4 सोमवार पड़ रहे है ।

समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने समस्त सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था, और वह नीलकंठ महादेव कहलाएं । देवताओं ने उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए जल अर्पित किया। तभी से सावन में जलाभिषेक की परंपरा प्रचलित हुई।

सावन में भगवान शंकर और माँ पारवती की पूजा करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है, परिवार में प्रेम और सौहर्द का वातावरण बनता है ।

मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या सफल होने पर शिव-पार्वती का दिव्य मिलन हुआ। इसलिए अविवाहित कन्याएँ तथा युवक भी उत्तम जीवनसाथी की कामना से सावन के सोमवार का व्रत रखते हैं।

सावन के सोमवार का ब्रत रहने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन मधुर बनता है, स्वास्थ्य एवं मानसिक शांति मिलती है, संतान सुख एवं परिवार में मंगल बना रहता है, शिव कृपा से जीवन की समस्त बाधाएँ दूर होती हैं।

सावन के सोमवार के दिन शिवलिंग का पंचामृत, दूध, दही, घी, शहद, गन्ने का रस से अभिषेक करके, बेल पत्र, शमी पत्र, भांग, धतूरा, आक का पुष्प, काले तिल, अक्षत चढ़ाकर पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है ।

सावन के सोमवार के दिन ॐ नम: शिवाये,

श्री शिवाये नमस्तुभ्यं अथवा

महामृत्युंजय मन्त्र :-

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

का अधिक से अधिक जाप अवश्य ही करें ।

भगवान शिव की पूजा में रुद्राभिषेक का अत्यंत महत्व है। वैसे अन्य सभी माह में रुद्राभिषेक के लिए मुहूर्त देखना पड़ता है लेकिन सावन मास में प्रत्येक दिन ‘रुद्राभिषेक’ किया जाना बहुत शुभ माना जाता है।

‘शिवपुराण’ में लिखा भी है कि भगवान भोलेनाथ स्वयं ही जल हैं, इसलिए इसमें कोई भी संशय नहीं है की जल द्वारा शिवजी का अभिषेक उनकी कृपा प्राप्त करने के सर्वोत्तम मार्ग है।

कहते है कि भगवान शिव सावन के महीने में पृथ्वी पर अवतरित होकर अपनी ससुराल गए थे और वहां पर उनका स्वागत भव्य रूप से अभिषेक द्वारा किया गया था, इसलिए भी यह माह शिवजी को विशेष रूप से प्रिय है।

तभी से माना जाता है कि भगवान शिव प्रत्येक वर्ष सावन माह में अपनी ससुराल आते हैं और सभी मनुष्यो के लिए भगवान शिव की कृपा पाने का यह स्वर्णिम अवसर होता है।

सावन सोमवार के दिन क्या करें ?

प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग का गंगाजल, जल, दूध, दही, शहद, घी एवं शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करें।

बेलपत्र (तीन पत्तियों वाला), शमी पत्र, धतूरा, आक के फूल, भांग, सफ़ेद पुष्प, सफेद चंदन एवं फल अर्पित करें।

ॐ नमः शिवाय मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें।

इस दिन शिव चालीसा, शिव तांडव स्तोत्र, महामृत्युंजय मंत्र तथा रुद्राभिषेक का पाठ करें।

गरीबों एवं जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र एवं दक्षिणा का दान करें।

सावन के सोमवार के दिन यथाशक्ति व्रत रखें और इस दिन सात्विक भोजन करें।

इस दिन शिवलिंग पर हल्दी, केतकी का फूल तथा तुलसी दल अर्पित न करें।

“सावन का प्रत्येक सोमवार आपके जीवन में भगवान भोलेनाथ की असीम कृपा, उत्तम स्वास्थ्य, सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति लेकर आए।

हर हर महादेव! ॐ नमः शिवाय!”

नक्षत्र (Nakshatra) – चित्रा नक्षत्र 04.58 AM सोमवार 18 अगस्त तक

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी-        चित्रा नक्षत्र के देवता विश्‍वकर्मा जी एवं चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल देव जी है ।

  चित्रा नक्षत्र नक्षत्र मंडल में उपस्थित 27 नक्षत्रों में 14 वां है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, चित्रा नक्षत्र का शासक ग्रह चंद्र देव जी है।  

यह एक मोती या उज्ज्वल गहने की तरह है जो चमकते प्रकाश सा हमारे भीतर की आत्मा का प्रतीक है।  27 नक्षत्रों में चित्रा नक्षत्र सबसे ज्यादा चमकने वाला नक्षत्र भी बताया जाता है ।

चित्रा नक्षत्र कलात्मकता, रचनात्मकता का प्रतीक है, इसीलिए इस नक्षत्र के लोग अपने क्षेत्र में बहुत ही प्रवीण होते है वह साधारण चीज़ को भी और भी अधिक खूबसूरत, विशेष बनाते है,  उसके मूल्य को बढ़ा देते हैं।

चित्रा नक्षत्र में जन्म लेने वाले पुरुष बहुत मेहनती होते हैं। इसके बावजूद सफलता प्राप्त करने में इन्हें 32 साल की उम्र तक संघर्ष करना पड़ता है।

इस नक्षत्र का आराध्य वृक्ष : बेल तथा स्वाभाव तीक्ष्ण माना गया है। चित्रा नक्षत्र स्टार का लिंग मादा है।

चित्रा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 5, 6 और 9,  भाग्यशाली रंग, काला,  भाग्यशाली दिन रविवार और बुधवार माना जाता है ।

चित्रा नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ चित्रायै नमः”l। मन्त्र माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।

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  • योग – शुभ 03.29 AM सोमवार 18 अगस्त तक
  • योग केस्वामी:-    शुभ योग की स्वामी माँ लक्ष्मी जी और स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है ।
  • प्रथम करण : – बालव 17.00 PM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-    बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।

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  • द्वितीय करण : – कौलव 05.20 AM सोमवार 18 अगस्त तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-    कौलव करण के स्वामी मित्र और स्वभाव सौम्य है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.24 AM से 5.08 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.36 PM से 15.29 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.59 PM से 19.20 PM तक
  • अमृत काल :- 22.16 PM से 23.57 PM तक
  • शिव वास :- कैलाश पर 17.00 PM तक तत्पश्चात नंदी पर


    शिव वास :-  जब भगवान भोलेनाथ जी कैलाश पर होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार  भगवान शंकर जी के  कैलाश पर्वत पर रहने के दौरान रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सुखो की प्राप्ति होती है।


    शिव वास :-  जब भगवान भोलेनाथ नन्दी जी पर विराजमान होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना सदैव बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों केअनुसार भगवान शंकर जी के नन्दी पर विराजमान के समय रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सफलता, शुभ समाचारो की प्राप्ति  होती है।

  • अग्निवास : पृथ्वी पर 17.00 PM तक तत्पश्चात आकाश पर

    अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।


    अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।
  • विशेष – पंचमी तिथि को बेल का सेवन नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि पंचमी को बेल का सेवन करने से अपयश मिलता है।
  • पंचमी तिथि को कर्ज भी नहीं देना चाहिए, पंचमी को कर्ज देने से धन डूब जाता है तथा धन के आगमन में भी रुकावटें आने लगती है ।
  • पर्व त्यौहार- सावन का दूसरा सोमवार, नाग पंचमी का पर्व
  • मुहूर्त (Muhurt) –

“हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

अपने धर्म, अपनी संस्कृति अपने नैतिक मूल्यों के प्रचार, प्रसार के लिए तन – मन – धन से अपना बहुमूल्य सहयोग करें । आप हमें अपनी इच्छा – सामर्थ्य के अनुसार सहयोग राशि 9425203501 पर Google Pay कर सकते है ।
आप पर ईश्वर की असीम अनुकम्पा की वर्षा होती रहे ।

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### *प्रस्तुतकर्ता*:  
### *आचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय*  
### *अध्यात्म ज्योतिष परामर्श केंद्र*  
### *श्याम नगर, रायपुर, छत्तीसगढ़*  
### _📞 _9425203501 | 7000121183 | 7587346995 | 0771-4070168__
 हर समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है आपकी प्रत्येक इच्छा, महत्वकांक्षा, जीवन में बुलंदियों पर पहुंचना या किसी भी तरह की समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है *व्यापार बढ़ोतरी किया कराया शादी के लिए माता-पिता को मनाना जब कहीं ना ही हो काम तो हमसे में समाधान हर मुश्किल से मुश्किल समस्या का समाधान ज्योतिष मेरा काम नहीं मेरी साधना है जब कहीं ना हो काम तो हमसे ले समाधान https://devlinai.co.in/own_projects/acharya-main/
*ॐ नमः शिवाय | जय सनातन* 🚩


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Guruwar Ka Panchag, गुरुवार का पंचांग, 20 अगस्त 2026 का पंचांग,

Guruwar Ka Panchag, गुरुवार का पंचांग, 20 अगस्त 2026 का पंचांग, गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 20 August 2026 Ka Panchang, मित्रो हम ...