मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang, 24 मार्च 2026 का पंचांग,

मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang, 24 मार्च 2026 का पंचांग,

आप सभी को नवरात्री के छठे दिन की हार्दिक शुभकामनायें , जय माँ कात्यायनी


मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang,

Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)




पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए मंगलवार का पंचांग (Mangalvar Ka Panchang)।

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

आज का पंचांग, Aaj ka Panchangमंगलवार का पंचांग, Mangalvar Ka Panchang,

24 मार्च Ka Panchang 24 March का पंचांग, 2026 ka panchang,

हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।

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।। आज का दिन मंगलमय हो ।।

*विक्रम संवत् 2083,
*शक संवत – 194
3
*कलि सम्वत 5128
*अयन – 
उत्तरायण
*ऋतु – बसंत
 ऋतु
*मास –
 चैत्र माह,
*पक्ष – शुक्ल पक्ष
*चंद्र बल – वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु , मीन,

मंगलवार को मंगल की होरा :-

प्रात: 6.21 AM से 7.22 AM तक

दोपहर 01.29 PM से 2.30 PM तक

रात्रि 20.32 PM से 21.31 PM तक

मंगलवार को मंगल की होरा में हाथ की निम्न मंगल पर दो बूंद सरसो का तेल लगा कर उसे हल्के हल्के रगड़ते हुए अधिक से अधिक मंगल देव के मन्त्र का जाप करें ।

कृषि, भूमि, भवन, इंजीनियरिंग, खेलो, साहस, आत्मविश्वास

और भाई के लिए मंगल की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

मंगलवार के दिन मंगल की होरा में मंगल देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में मंगल मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

मंगल देव के मन्त्र

ॐ अं अंगारकाय नम: अथवा

ॐ भौं भौमाय नम:”

जरूर पढ़े :-  जीवन में समस्त संकटो को दूर करने, सफलता का द्वार खोलने के लिए नवरात्री के मंगलवार को अवश्य ही करें ये उपाय,

तिथि :- षष्टी 16.07 PM तक तत्पश्चात सप्तमी,

तिथि के स्वामी :- षष्टी तिथि के स्वामी भगवान कार्तिकेय जी और सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देव जी है ।

नवरात्रि का छठा दिन मां कात्यायनी को समर्पित है। मां कात्यायनी महर्षि कात्यायन की पुत्री के रूप में जानी जाती हैं।

 मां कात्यायनी ने महिषासुर नाम के असुर का वध किया था, जिस कारण मां कात्यायनी को असुरों और पापियों का संहार करने वाली देवी कहा जाता है। इनकी सवारी सिंह है।

मां कात्यायनी की चार भुजा हैं इनके एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में कमल तथा अन्य दोनों हाथों में वरमुद्रा और अभयमुद्रा है।

माता कात्यायनी की पूजा से विवाह में हो रही बाधाएं दूर होती है, देवगुरु बृहस्पति प्रसन्न होते हैं और कन्याओं को अच्छा मिलने के योग बनते हैं, दाम्पत्य जीवन में प्रेम और सहयोग बनता है।

मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए गोपियों ने माता कात्यायनी की पूजा की थी।

मां कात्यायनी की पूजा माता को लाल या पीले फूल, कच्‍ची हल्‍दी की गांठ एवं चांदी के या मिटटी के पात्र में शहद अर्पित करके, शहद का भोग लगाकर शाम को गोधुलि बेला में करनी चाहिए।

नवरात्रि के छठवें दिन अपनी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए गोबर के कंडे जलाकर माँ कात्यायनी के मंत्रो का जाप करते हुए उस पर लौंग व कपूर की आहुति दें।

नवरात्री के छठे दिन भक्तो को यहाँ दिए गए मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।

।।ॐ ह्रीं कात्यायन्यै स्वाहा ।।

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  • नक्षत्र (Nakshatra) – रोहिणी 19.04 PM तक तत्पश्चात मृगशिरा
  • नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी –  रोहिणी नक्षत्र के देवता ब्रम्हा और स्वामी चंद्र देव जी है ।

रोहिणी नक्षत्र, नक्षत्रों के क्रम में चौथे स्थान पर है तथा चंद्रमा का केंद्र माना जाता है। ‘रोहिणी’ का अर्थ ‘लाल’ होता है। इसे आकाश में सबसे चमकीले सितारों में से एक माना जाता है।

 यह 5 तारों का समूह है, जो धरती से किसी भूसा गाड़ी की तरह दिखाई देता है।

रोहिणी नक्षत्र का आराध्य वृक्ष जामुन और स्वभाव शुभ माना गया है ।

 पुराण कथा के अनुसार रोहिणी चंद्र की सत्ताईस पत्नियों में सबसे सुंदर, तेजस्वी, सुंदर वस्त्र धारण करने वाली है। ज्यों-ज्यों चंद्र रोहिणी के पास जाता है, त्यों-त्यों उसका रूप अधिक खिल उठता है।

इस नक्षत्र के जातक पतले, मिलनसार, दृढ़ निश्चयी, बुद्धिशाली, यशवान, ललित कलाओं के प्रेमी, ईश्वर में आस्था रखने वाले, किन्तु झूठ बोलने वाले, स्वार्थी होते है।

रोहिणी नक्षत्र में जन्मी स्त्रियाँ सुंदर, भाग्यशाली, पति से प्रेम करने वाली, माता-पिता की आज्ञाकारी, योग्य संतान वाली और ऐश्वर्यवान होती है।

रोहिणी नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 1, 2, 3, 6 और 9, भाग्यशाली रंग सफेद, पीला और नीला तथा भाग्यशाली दिन शनिवार, शुक्रवार और बुधवार है।

आज रोहिणी नक्षत्र के बीज मंत्र “ऊँ ऋं ऊँ लृं” अथवा “ॐ रौहिण्यै नमः”  l  का 108 बार जाप करें इससे रोहिणी नक्षत्र को बल मिलेगा।  

रोहिणी नक्षत्र में घी, दूध, का दान करना चाहिए।

  • योग :- प्रीति 09.07 AM तक तत्पश्चात आयुष्मान
  • योग के स्वामी :-  प्रीति  योग के स्वामी विष्णु एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है ।
  • प्रथम करण : – तैतिल 16.07 PM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-   तैतिल करण के स्वामी विश्वकर्मा जी और स्वभाव सौम्य है ।
  • द्वितीय करण : – गर 02.07 AM बुधवार 25 मार्च तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-      गर करण के स्वामी भूमि तथा स्वभाव सौम्य है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 04.46 AM से 5.34 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.30 PM से 15.19 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.33 PM से 18.57 PM तक
  • अमृत काल : 16.06 PM से 17.35 AM तक
  • दिशाशूल (Dishashool)- मंगलवार को उत्तर दिशा का दिकशूल होता है।

    यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से गुड़ खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – दोपहर 12:00 से 01:30 तक है ।
  • राहुकाल (Rahukaal) दिन – 3:00 से 4:30 तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 06:21
  • सूर्यास्त – सायं 18:34
  • विशेष – षष्ठी के दिन नीम की पत्ती खाना, दातुन करना या किसी भी तरह से  नीम का सेवन नहीं करना चाहिए । इस दिन नीम का सेवन करने से नीच योनि की प्राप्ति होती है।

    सप्तमी को ताड़ का सेवन नहीं करना चाहिए  । इस दिन ताड़ का सेवन करने से रोग लगते है ।
  • पर्व – त्यौहार- नवरात्री का छठा दिन, जय माँ कात्यायनी

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

24 मार्च 2026 का पंचांग, 24 March 2026 ka panchang, mangalwar ka panchang, aaj ka panchang, aaj ka rahu kaal, aaj ka shubh panchang,mangalwar ka rahu kaal, mangalwar ka shubh panchang, panchang, tuesday ka panchang, tuesday ka rahu kaal, आज का पंचांग, मंगलवार का पंचांग, आज का राहुकाल, आज का शुभ पंचांग, ट्यूसडे का पंचांग, ट्यूसडे का राहुकाल, पंचांग, मंगलवार का राहु काल, मंगलवार का शुभ पंचांग,

ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )
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07714070168 + 7000121183


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धन्यवाद ।

पंचांग, Panchang,सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang, 23 मार्च 2026 का पंचांग,


सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang, 23 मार्च 2026 का पंचांग,

आप सभी को नवरात्री के पांचवे दिन की हार्दिक शुभकामनाएं , जय माँ स्कन्द माता

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Panchang, पंचाग, आज का पंचांग, aaj ka panchang, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए, सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang।

सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang,

23 मार्च 2026 का पंचांग, 23 March 2026 ka Panchang,

महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।

  • दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।

    सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।

सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।

जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।

सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।

घर पर कैसा भी हो वास्तु दोष अवश्य करें ये उपाय, जानिए वास्तु दोष निवारण के अचूक उपाय

*विक्रम संवत् – 2083,
* शक संवत – 1948,
*कलि संवत – 5128
*कलयुग – 5128 वर्ष
* अयन – उत्तरायण,
* ऋतु – बसंत ऋतु,
* मास – चैत्र माह,
* पक्ष – शुक्ल पक्ष
*चंद्र बल – वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन,

सोमवार को चन्द्रमा की होरा :-

प्रात: 6.22 AM से 7.23 AM तक

दोपहर 01.29 PM से 2.30 PM तक

रात्रि 8.31 PM से 9.31 PM तक

सोमवार को चन्द्रमा की होरा में अधिक से अधिक चन्द्र देव के मन्त्र का जाप करें। यात्रा, प्रेम, प्रसन्नता, कला सम्बन्धी कार्यो के लिए चन्द्रमा की होरा अति उत्तम मानी जाती है।

सोमवार के दिन चन्द्रमा की होरा में चंद्रदेव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में चंद्र देव मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

चन्द्रमा के मन्त्र

ॐ सों सोमाय नम:।

ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम: ।

  • तिथि (Tithi) – पंचमी 18.38 PM तक तत्पश्चात षष्टी,
  • तिथि का स्वामी – पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता जी और षष्टी तिथि के स्वामी भगवान कार्तिकेय जी है ।
     
  • शारदीय नवरात्रि का पांचवा दिन सुख और शांति की देवी मां स्कंदमाता को समर्पित है। स्कंदमाता की पूजा करने से भगवान कार्तिकेय की भी कृपा मिलती हैं ।
  • भगवान स्कंद, शंकर जी और पार्वती के दूसरे और छह मुख वाले पुत्र कार्तिकेय जी का एक नाम है ।
  • ऐसी मान्यता है कि स्कंदमाता की पूजा करने से संकट और शत्रुओं का नाश होता है, मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं। मां स्कंदमाता की 4 भुजाएं हैं, तथा मां का आसन कमल है।
  • ये दाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं। दूसरी व चौथी भुजा में कमल का फूल, तीसरी भुजा से माँ अपने भक्तो को आशीर्वाद देती है।
  • क्योंकि स्कंदमाता सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं इसलिये इनके चारों ओर सूर्य के जैसा ही अलौकिक तेज दिखाई देता है। सदैव कमल के आसन पर स्थित रहने के कारण स्कंदमाता को देवी पद्मासना भी कहा जाता है।
  • मां स्कंदमाता को केले का भोग अति प्रिय है। इसके साथ ही इन्हें केसर डालकर खीर का प्रसाद भी चढ़ाएं। माँ को इलाइची का भोग भी अत्यंत प्रिय है, स्कंदमाता को कमल का पुष्प अति प्रिय है ।
  • नवरात्री के पाँचवे दिन मां स्कंदमाता की कृपा के लिए यहाँ दिए गए मन्त्र की एक माला का जाप करना चाहिए ।
  • ॐ देवी स्कन्दमातायै नम:॥
  • या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता.
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥


    दिवाली पर माँ लक्ष्मी को लगाएं इन चीज़ो का भोग, सुख – समृद्धि की नहीं होगी कभी कमी, अवश्य जानिए माता लक्ष्मी के प्रिय भोग

अवश्य पढ़ें :- चाहते है बेदाग, गोरी त्वचा तो तुरंत करें ये उपाय, आप खुद भी आश्चर्य चकित हो जायेंगे, 

नक्षत्र (Nakshatra) – कृतिका 20.49 PM तक तत्पश्चात रोहिणी

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी-      कृतिका नक्षत्र के देवता अग्नि देव और स्वामी सूर्य देव जी है ।  

कृत्तिका नक्षत्र आकाश मंडल में तीसरा नक्षत्र है जो सात सितारों के एक समूह,आग को दर्शाता है और इसे शक्ति और ऊर्जा का अंतिम स्रोत माना जाता है। यह नक्षत्र भगवान अग्नि देव द्वारा शासित है ।

 कृत्तिका नक्षत्र स्टार का लिंग मादा है। कृतिका नक्षत्र का तत्व अग्नी, आराध्य वृक्ष उंबर, औदुंबर और नक्षत्र स्वभाव क्रूर माना गया है ।

कृतिका नक्षत्र में जन्मे जातक तेजस्वी, सुन्दर, महत्वाकांक्षी, गुणवान, आत्मवश्वासी एवं धर्म पर पूर्ण विश्वास रखने वाले होते हैं।

कृतिका नक्षत्र में जन्म लेने वाला व्यक्ति विलासता जीवन जीने में विश्वास रखता हैं। यह बड़ी ही आसानी से विपरीत लिंग को आकर्षित कर लेते हैं। इनका वैवाहिक जीवन सुखमय होता है।

इनकी सबसे बड़ी कमजोरी इनका जिद्दीपन है और यह कई बार बहुत ही जल्दी लड़ने पर भी उतारू हो जाते है ।

कृत्तिका नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 1, 2, 3 और 9, भाग्यशाली रंग पीला और लाल , भाग्यशाली दिन मंगलवार और रविवार होता है ।

कृतिका नक्षत्र में जन्मे जातको को नित्य तथा अन्य सभी को आज गायत्री मन्त्र  “ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्॥” मन्त्र की एक माला का जाप करना चाहिए इससे जीवन की सभी बाधाएं दूर होती है।

कृत्तिका नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातको को  गूलर के पेड़ की पूजा करनी चाहिए और अपने  घर अथवा मंदिर में गूलर के पेड को लगाकर उसकी सेवा करनी चाहिए ।

  अगर पश्चिम मुख का है आपका घर तो ऐसा रहना चाहिए आपके घर का वास्तु, जानिए पश्चिम दिशा के अचूक वास्तु टिप्स 


  • योग – विष्वकंभ 12.22 PM एक तत्पश्चात प्रीति

  • योग के स्वामी :- विष्कम्भ योग के स्वामी यम एवं स्वभाव हानिकारक है ।
  • प्रथम करण : – बव 07.56 AM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-      बव करण के स्वामी इंद्र देव और स्वभाव सौम्य है ।

    अवश्य पढ़ें :- कुंडली में केतु अशुभ हो तो आत्मबल की होती है कमी, भय लगना, बुरे सपने आना, डिप्रेशन का होता है शिकार, केतु के शुभ फलो के लिए करे ये उपाय
  • द्वितीय करण : – बालव 18.38 PM तक तत्पश्चात कौलव
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-  बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.47 AM से 5.35 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.30 PM से 15.18 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.33 PM से 16.56 PM तक
  • अमृत काल : 18.37 PM से 20.05 PM तक
  • विशेष – पंचमी तिथि को बेल का सेवन नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि पंचमी को बेल का सेवन करने से अपयश मिलता है।
  • पंचमी तिथि को कर्ज भी नहीं देना चाहिए, पंचमी को कर्ज देने से धन डूब जाता है तथा धन के आगमन में भी रुकावटें आने लगती है ।
  • पर्व त्यौहार- नवरात्री का पांचवा दिन, जय माँ स्कन्द माता
  • मुहूर्त (Muhurt) –

“हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

अपने धर्म, अपनी संस्कृति अपने नैतिक मूल्यों के प्रचार, प्रसार के लिए तन – मन – धन से अपना बहुमूल्य सहयोग करें । आप हमें अपनी इच्छा – सामर्थ्य के अनुसार सहयोग राशि 9425203501 पर Google Pay कर सकते है ।
आप पर ईश्वर की असीम अनुकम्पा की वर्षा होती रहे ।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )
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रविवार का पंचांग, Raviwar Ka Panchag, 22 मार्च का पंचांग 2026 का पंचांग,

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22 मार्च 2026 का पंचांग, 22 March 2026 ka Panchang,

अवश्य पढ़ें :-  मनचाही नौकरी चाहते हो, नौकरी मिलने में आती हो परेशानियाँ  तो अवश्य करें ये उपाय 

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पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे । जानिए रविवार का पंचांग, Ravivar Ka Panchang।

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22 मार्च 2026 का पंचांग, 22 March 2026 ka Panchang,

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जानिए नवरात्री में कन्या पूजन में माता के किन किन स्वरूपों की पूजा की जाती है

भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
।। आज का दिन अत्यंत मंगलमय हो ।।

👉🏽दिन (वार) रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।

इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।

घर पर कैसा भी हो वास्तु दोष अवश्य करें ये उपाय, जानिए वास्तु दोष निवारण के अचूक उपाय

रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है । अत: रविवार के दिन मंदिर में भैरव जी के दर्शन अवश्य करें ।

रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।

1593 Revisions

* विक्रम संवत् – 2083, वर्ष
* शक संवत – 1948, वर्ष
* कलि संवत 5128, वर्ष
* कलयुग – 5128, वर्ष
* अयन – उत्तरायण,
* ऋतु – बसंत ऋतु,
* मास – चैत्र माह
* पक्ष – शुक्ल पक्ष
* चंद्र बल – वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक,धनु, मीन,

रविवार को सूर्य देव की होरा :-

प्रात: 6.23 AM से 7.24 AM तक

दोपहर 01.29 PM से 02.30 PM तक

रात्रि 20.31 PM से 9.30 PM तक

रविवार को सूर्य की होरा में अधिक से अधिक अनामिका उंगली / रिंग फिंगर पर थोड़ा सा घी लगाकर मसाज करते हुए सूर्य देव के मंत्रो का जाप करें ।

सुख समृद्धि, मान सम्मान, सरकारी कार्यो, नौकरी, साहसिक कार्यो, राजनीती, कोर्ट – कचहरी आदि कार्यो में सफलता के लिए रविवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

रविवार के दिन सूर्य देव की होरा में सूर्य देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में सूर्य ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

अवश्य जानिए देव दीपावली किस दिन मनाई जाएगी, देव दीपावली क्यों मनाते है 

सूर्य देव के मन्त्र :-

ॐ भास्कराय नमः।।

अथवा

ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।

ऐसे करें होलिका दहन, जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का होगा संचार, अवश्य जानिए होलिका दहन की विधि

नवरात्री के चौथे दिन माँ कुष्मांडा की पूजा की जाती है। जब सृष्टि नहीं थी, चारों तरफ अंधकार ही अंधकार था, तब इसी देवी ने अपने हास्य से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसीलिए माँ कुष्मांडा कोआदि शक्ति कहा गया है।

माता का निवास सूर्यमंडल के भीतर के लोक में माना गया है।

शास्त्रों के अनुसार मां कुष्मांडा की पूजा करने से यश, बल, आयु, और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। मां कुष्मांडा संसार को अनेक कष्टों और संकटों से मुक्ति दिलाती हैं।

संस्कृत भाषा में कूष्माण्डा को कुम्हड़ कहते हैं। बलियों में कुम्हड़े की बलि इन्हें सर्वाधिक प्रिय है। इस कारण से भी माँ कूष्माण्डा कहलाती हैं।

क्योंकि मां कुष्मांडा को लाल रंग के फूल अधिक प्रिय बताए गए हैं इसलिए इस दिन लाल रंग के फूलों से माँ की पूजा करने का विधान है।

माँ कुष्मांडा देवी को अष्टभुजा भी कहा जाता है, इनकी आठ भुजाएं हैं। मां के हाथों में धनुष-बाण, चक्र, गदा, अमृत कलश, कमल, कमंडल सुशोभित है। मां के हाथों में सिद्धियों और निधियों से युक्त जप की माला भी है। माँ कुष्मांडा की सवारी सिंह है।

चौथे नवरात्रि के दिन माता कुष्मांडा को मालपुआ का भोग लगाने से समस्त इच्छाओं की पूर्ति होती है । माँ कूष्माण्डा को फल, सूखे मेवे और सौभाग्य का सामान भेंट करने से माँ शीघ ही प्रसन्न होती हैं।

आज माँ के यहाँ पर दिए गए दोनों में इसी भी मन्त्र का जाप अवश्य करें।
ॐ देवी कूष्माण्डायै नम:॥

अथवा

या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

अवश्य पढ़ें :अवश्य पढ़ें :- चेहरे से कील मुहाँसे हटाने हो तो तुरंत करें ये उपाय, कील मुहांसों को जड़ से हटाने के अचूक उपाय,

नक्षत्र :- भरणी 22.42 PM तक तत्पश्चात कृतिका

नक्षत्र के स्वामी :-        भरणी नक्षत्र के देवता यमराज जी और नक्षत्र के स्वामी शुक्र जी है ।  

भरणी नक्षत्र 27 नक्षत्रों में से दूसरा नक्षत्र है और त्रिकोण का प्रतीक है। यह नक्षत्र प्रकृति के स्त्री वाले पहलू को इंगित करता है।

भरणी नक्षत्र बलिदान, ईर्ष्या, सहनशीलता और शुद्धि का प्रतीक भी माना जाता है। यह संयम का एक सितारा माना जाता है और गर्भ का प्रतिनिधित्व करता है। भरणी नक्षत्र सितारा का लिंग मादा है। 

भरणी नक्षत्र का आराध्य वृक्ष आँवला और नक्षत्र स्वभाव क्रूर माना गया है ।

भरणी नक्षत्र में पैदा होने वाले एक बड़े दिल वाले व्यक्ति माने जाते हैं, यह लोगो की बातो का बुरा नहीं मानते है। आपकी ताकत आपकी मुस्कुराहट है आप हमेशा शांत और प्रसन्न रहते हैं। आप ईमानदार है और सकारात्मक रहते है। इनका पारिवारिक जीवन सुखमय रहता है ।

भरणी नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 9, 3 और 12, भाग्यशाली रंग पीला, लाल, और हरा एवं भाग्यशाली दिन मंगलवार तथा गुरुवार माना जाता है । 

भरणी नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातको को तथा सभी मनुष्यों को जिस दिन भारणी नक्षत्र हो उस दिन नक्षत्र देवता नाममंत्र:- “ॐ यमाय् नमः” l  मन्त्र की एक माला का जप करना चाहिए, इससे भारणी नक्षत्र के शुभ फल मिलते है ।  

भरणी नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातको को भगवान शंकर जी की आराधना परम फलदाई है, इन्हे इस नक्षत्र के दिन महा मृत्युंजय मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।


घर के बैडरूम में अगर है यह दोष तो दाम्पत्य जीवन में आएगी परेशानियाँ, जानिए बैडरूम के वास्तु टिप्स

  • योग (Yog) – वैधृति 15.42 PM तक तत्पश्चात विष्वकंभ
  • योग के स्वामी :-     वैधृति योग के स्वामी दिति और स्वभाव हानिकारक है । 
  • प्रथम करण : – वणिज 10.36 AM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-  वणिज करण की स्वामी लक्ष्मी देवी और स्वभाव सौम्य है ।
  • द्वितीय करण : – विष्टि 21.16 PM तक तत्पश्चात बव
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-    विष्टि करण के स्वामी यम और स्वभाव क्रूर है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.48 AM से 5.36 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.30 PM से 15.19 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.32 PM से 18.56 PM तक
  • अमृत काल :- अमृत काल 18.17 PM से 19.46 PM तक
  • दिशाशूल (Dishashool)- रविवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से पान या घी खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – अपराह्न – 3:00 से 4:30 तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)-सायं – 4:30 से 6:00 तक ।
  • सूर्योदय – प्रातः 06:23
  • सूर्यास्त – सायं 18:33

    आँखों की रौशनी बढ़ाने, आँखों से चश्मा उतारने के लिए अवश्य करें ये उपाय

  • विशेष – रविवार को बिल्ब के वृक्ष / पौधे की पूजा अवश्य करनी चाहिए इससे समस्त पापो का नाश होता है, पुण्य बढ़ते है।

    रविवार के दिन भगवान सूर्य देव को आक का फूल अर्पण करना किसी भी यज्ञ के फल से कम नहीं है, इससे सूर्य देव की सदैव कृपा बनी रहती है ।

    रविवार को तुलसी जी को जल देना, तुलसी जी को तोड़ना वर्जित है ऐसा करने से पुण्य नष्ट होते है 1
  • चतुर्थी को मूली का सेवन नहीं करना चाहिए, चतुर्थी को मूली का सेवन करने से धन का नाश होता है   ।

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत शुभ फलो वाला हो ।

मित्रो हम इस साईट के माध्यम से वर्ष 2010 से निरंतर आप लोगो के साथ जुड़े है। आप भारत या विश्व के किसी भी स्थान पर रहते है, अपने धर्म अपनी संस्कृति को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए आचार्य मुक्तिनारायण पाण्डेय अध्याल ज्योतिष परामर्श केंद्र श्याम नगर रायपुर www.memorymuseum.net के साथ अवश्य जुड़ें, हमारा सहयोग करें ।

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )
 संपर्क सूत्र: हर समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है  9425203501 +7000121183
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शनिवार का पंचांग, Shaniwar Ka Panchang, 21 मार्च 2026 का पंचांग ,

शनिवार का पंचांग, Shaniwar Ka Panchang, 21 मार्च 2026 का पंचांग ,

आप सभी को नवरात्री के तीसरे दिन की हार्दिक शुभकामनायें , जय माँ चंद्रघंटा


Shaniwar Ka Panchang, शनिवार का पंचांग, 21 March 2026 ka Panchang,

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  • Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)


पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए शनिवार का पंचांग, (Shanivar Ka Panchang), आज का पंचांग, aaj ka panchang, saturday ka panchang।

  • शनिवार का पंचांग, (Shanivar Ka Panchang, )

    21 मार्च
     2026 का पंचांग, 21 March 2026 ka Panchang,
  • दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
  • शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।

*विक्रम संवत् – 2083,
* शक संवत – 1948,
* कलि संवत – 5128,

* कलयुग 51278वर्ष
* अयन – उत्तरायण,
* ऋतु – बसंत
 ऋतु,
* मास – 
चैत्र माह,
* पक्ष – 
शुक्ल पक्ष,
*चंद्र बल – 
मेष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, कुम्भ,

शनिवार को शनि महाराज की होरा :-

प्रात: 6.25 AM से 7.26 AM तक

दोपहर 01.29 PM से 2.30 PM तक

रात्रि 20.30 PM से 9.30 PM तक

शनिवार को शनि की होरा में अधिक से अधिक शनि देव के मंत्रो का जाप करें । श्रम, तेल, लोहा, नौकरो, जीवन में ऊंचाइयों, त्याग के लिए शनि की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

शनिवार के दिन शनि की होरा में शनि देव देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में शनि ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

ऐसे करें होलिका दहन, सभी कष्ट रहेंगे दूर, अवश्य जानिए होलिका दहन की विधि

शनि देव के मन्त्र :-

ॐ शं शनैश्चराय नमः।

अथवा

ऊँ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्‌। छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्‌।।

  • तिथि (Tithi) – तृतीया 23.56 PM तक तत्पश्चात चतुर्थी
  • तिथि का स्वामी – तृतीया तिथि की स्वामी माँ गौरी और कुबेर देव जी तथा चतुर्थी तिथि के स्वामी विघ्हर्ता गणेश जी है ।

नवरात्री के तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। माँ का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है, इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी के नाम से जाना जाता है।

माँ चंद्रघंटा के शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है। माता के दस हाथ हैं जिनमे तलवार, त्रिशूल, खड्ग, बाण आदि अस्त्र विभूषित हैं।  माता का वाहन सिंह है।  

मां चंद्रघंटा देवी देवी पार्वती का विवाहित रूप हैं। भगवान भोलेनाथ जी से विवाह करने के बाद माता  ने अपने मस्तक पर अर्धचंद्र को सजाना शुरू कर दिया था, इसीलिए मां पार्वती को मां चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है।

नवरात्री के तीसरे दिन माता के भक्त का मन ‘मणिपूर’ चक्र में प्रविष्ट होता है।  माँ चंद्रघंटा  के घंटे की ध्वनि सदा अपने भक्तों की  रक्षा करती है।

मां चंद्रघंटा की कृपा से भक्तो के समस्त संकटो और पापो का नाश हो जाता हैं।   मान्यता है कि मां अपने भक्तों पर प्रसन्न होकर उन्हें उन्हें सुख-शांति व समृद्धि प्रदान करती हैं ।

आज माँ के मन्त्र का जाप अवश्य करें

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

 मां चन्द्रघंटा को नारंगी रंग प्रिय है। माँ की पूजां के समय भक्तो को नारंग, गेरुए  रंग के वस्त्र धारण करना चाहिए।

तीसरे  नवरात्रि Navratri के दिन माता चंद्रघंटा को मिश्री, खीर या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाकर इसका प्रसाद वितरित करें, इससे माता  के भक्तों के सभी दुख और भय दूर हो जाते है ।

राशिनुसार होली खेलकर अपने भाग्य को ऐसे करें मजबूत,

कैसा भी सिर दर्द हो उसे करें तुरंत छूमंतर, जानिए सिर दर्द के अचूक उपाय

नक्षत्र (Nakshatra) – अश्विन 12.35 AM रविवार 22 मार्च तक

नक्षत्र के स्वामी :-        अश्विनी नक्षत्र के देवता अश्विनीकुमार जी,  नक्षत्र का  स्वामी ग्रह मंगल एवं अधिपति ग्रह केतु जी है । 

अश्विन नक्षत्र 27 नक्षत्रों में से पहला नक्षत्र है और यह नक्षत्र अश्व मुख अर्थात घोड़े के सिर का प्रतीक है। अश्विनी नक्षत्र 3 तारो का समूह है जो अश्विनी नक्षत्र साहस, जीवन, और शक्ति का प्रतीक है।

अश्विनी एक देवता नक्षत्र है जिसे अत्यधिक शुभ माना जाता है। यह नाम अश्विनी-कुमारों से संबंधित है जो हिंदू देवता माने जाते हैं।

अश्विनी नक्षत्र का लिंग पुरुष है। अश्विन नक्षत्र का आराध्य वृक्ष कुचला और स्वभाव शुभ माना गया है । अश्विन नक्षत्र में जन्मे जातक समान्यता धनवान तथा भाग्यवान होते  है।  

इस नक्षत्र में चन्द्र देव जी  के होने के कारण जातक को आभूषण से प्रेम रहता है एवं जातक सुन्दर, सुखी और सौभाग्यशाली होता है।

मान्यता है कि इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक धन, स्त्री,आभूषण तथा पुत्रादि  का पूर्ण सुख प्राप्त करते है।  ऐसे जातक सक्रिय, उत्साही होते है यह अपने फैसलों पर दृढ़ रहते हैं।  

अश्विनी नक्षत्र के जातको के लिए भाग्यशाली संख्या 2, 7 और 9, भाग्यशाली रंग पीला, मैरून, ऑरेंज, गुलाबी, एवं भाग्यशाली दिन मंगलवार तथा गुरुवार होता है ।

आज अश्विनी नक्षत्र के मंत्र “ॐ अश्विनी कुमाराभ्यां नमः” का 108 बार जाप करें इससे अश्विनी नक्षत्र को बल मिलेगा।  

दाम्पत्य जीवन में हो परेशानी या घेरे हो आर्थिक संकट होली के दिन अवश्य ही करें ये उपाय

अगर 50 की जगह 25, 60 की जगह 30 की उम्र चाहते है, जीवन में डाक्टर के पास ना जाना हो तो अवश्य करे ये उपाय   

  • योग (Yog) – इंद्र 19.01 PM तक तत्पश्चात वैधृति
  • योग के स्वामी, स्वभाव :-    इंद्र योग के स्वामी पितृ देव जी एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है ।
  • प्रथम करण : – तैतिल 13.14 PM तक,
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-     तैतिल करण के स्वामी विश्वकर्मा जी और स्वभाव सौम्य है ।
  • द्वितीय करण : – गर 23.56 PM तक तत्पश्चात वणिज
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-    गर करण के स्वामी भूमि तथा स्वभाव सौम्य है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.49 AM से 5.37 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.30 PM से 15.18 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.32 PM से 18.55 PM तक
  • अमृत काल : अमृत काल 17.58 PM से 19.27 PM तक
  • गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
  • दिशाशूल (Dishashool)- शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।

    यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
  • राहुकाल (Rahukaal)-सुबह – 9:00 से 10:30 तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 06:24 AM
  • सूर्यास्त – सायं 18:33 PM
  • विशेष – तृतीया तिथि को परवल का सेवन नहीं करना चाहिए, तृतीया तिथि को परवल का सेवन करने से शत्रुओं में वृद्धि होती है ।


अवश्य पढ़ें :-राशिनुसार इन वृक्षों की करें सेवा, चमकने लगेगा भाग्य,

  • पर्व त्यौहार- नवरात्री का तीसरा दिन, जय माँ चंद्रघंटा
  • मुहूर्त (Muhurt) –

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

21 मार्च 2026 का पंचांग, 21 March 2026 ka panchang, aaj ka panchang, aaj ka rahu kaal, aaj ka shubh panchang, panchang, saturday ka panchang, shanivar ka panchang, Shaniwar Ka Panchag, shanivar ka rahu kaal, shanivar ka shubh panchang, आज का पंचांग, आज का राहुकाल, आज का शुभ पंचांग, पंचांग, शनिवार का पंचांग, शनिवार का राहु काल, शनिवार का शुभ पंचांग, सैटरडे का पंचांग,

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Shukrwar ka panchag, शुक्रवार का पंचांग, 20 मार्च 2026 का पंचांग,


Shukrwar ka panchag, शुक्रवार का पंचांग, 20 मार्च 2026 का पंचांग,

आप सभी को नवरात्री के दूसरे दिन की हार्दिक शुभकामनायें , जय माँ ब्रह्मचारिणी

गुरुवार का पंचांग शनिवार का पंचांग

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शुक्रवार का पंचांग, shukrwar ka panchang,

  • Panchang, पंचाग, Panchang 2026 हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang, पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-

    1:- तिथि (Tithi)
    2:- वार (Day)
    3:- नक्षत्र (Nakshatra)
    4:- योग (Yog)
    5:- करण (Karan)


    पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी नित्य पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।

    जानिए, Shukravar Ka Panchang, शुक्रवार का पंचांग, आज का पंचांग, aaj ka panchang,

    20 मार्च 2026 का पंचांग, 20 March  2026 ka Panchang,

  • महालक्ष्मी मन्त्र : ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥

  • ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥

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आज का पंचांग, aaj ka panchang,

दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।

शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय 
“श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।

शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।

  • * विक्रम संवत् – 2083 वर्ष
  • * शक संवत – 1948 वर्ष
    * कलि संवत – 5128 वर्ष
    * कलयुग – 5128 वर्ष
    * अयन – उत्तरायण,
    * ऋतु – बसंत ऋतु,
    * मास – चैत्र माह
    * पक्ष – शुक्ल पक्ष
    * चंद्र बल – मेष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, कुम्भ,

शुक्रवार को शुक्र देव की होरा :-

प्रात: 6.33 AM से 7.33 AM तक

दोपहर 01.30 PM से 2.30 PM तक

रात्रि 20.24 PM से 21.26 PM तक

दाहिने हाथ के अंगूठे से नीचे के हिस्से ( शुक्र का स्थान ) और अंगूठे पर थोड़ा सा इत्र लगाकर, ( इत्र ना मिले तो उसके बिना भी कर सकते है) बाएं हाथ के अंगूठे से उस हिस्से को शुक्र की होरा में “ॐ शुक्राये नम:” या

ॐ द्रांम द्रींम द्रौंम स: शुक्राय नम:।’ मंत्र का अधिक से अधिक जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य )I

यह उपाय आप कोई भी काम करते हुए चुपचाप कर सकते है इसके लिए किसी भी विधि विधान की कोई आवश्यकता नहीं है I

सुख समृद्धि, ऐश्वर्य, बड़ा भवन, विदेश यात्रा, प्रेम, रोमांस, सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए शुक्रवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

शुक्रवार के दिन शुक्र की होरा में शुक्रदेव देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में शुक ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

शुक्र देव के मन्त्र :-

ॐ शुं शुक्राय नमः।। अथवा

” ॐ द्राम द्रीम द्रौम सः शुक्राय नमः “।।

अपनी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए नवरात्री में अवश्य करें ये उपाय  

  • तिथि, (Tithi) द्वितीया 02.30 AM शनिवार 21 मार्च तक, तिथि, (Tithi) :-,
  • तिथि के स्वामी – द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्मा जी है I

आज चैत्र नवरात्री का दूसरा दिन है । नवरात्र के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली।

अर्थात ब्रह्मचारिणी का अर्थ है तप, त्याग और वैराग्य का आचरण करने वाली। इन्होंने भगवान भोलेनाथ जी को अपने पति के रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी।

इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएँ हाथ में कमण्डल सुशोभित है।

मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से सभी परेशानियां भी खत्म होती हैं, समस्त रूके हुए कार्य पूरे हो जाते हैं।

माँ ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से भक्तो को सर्व सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है। इस दिन ऐसी कन्याओं का पूजन किया जाता है कि जिनका विवाह तय हो गया है लेकिन शादी ना हुई हो।

अपनी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए नवरात्रि के द्वितीय दिन माँ ब्रह्मचारिणी के इस मन्त्र का जाप करना चाहिए।

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

माँ ब्रह्मचारिणी अतिसौम्य, क्रोध रहित और तुरंत वरदान देने वाली देवी मानी गयी है।

नवरात्री के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग चढ़ाया जाता है। मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग लगाने से दीर्घ आयु का वरदान मिलता है।

मां ब्रह्मचारिणी पीला और सफ़ेद रंग बहुत प्रिय है इसलिए माता की पूजा में पीले अथवा सफ़ेद रंग के कपड़े पहनकर पूजा करनी चाहिए। साथ ही पीले, सफ़ेद रंग के फूल भी अर्पित करने चाहिए।

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नक्षत्र ( Nakshatra ) : रेवती 02.27 AM शनिवार 21 मार्च तक

नक्षत्र के स्वामी :–        रेवती नक्षत्र का स्वामी बुद्धि के कारक बुध देव जी एवं इस  नक्षत्र के देवता “पूषा” हैं जो सूर्य भगवान का ही एक रूप है ।  

रेवती नक्षत्र आकाश मंडल में अंतिम नक्षत्र है। यह मीन राशि में आता है।  रेवती का अर्थ है ‘समृद्ध’ और यह सुख – समृद्धि,  धन और ऐश्वर्य का प्रतीक माना जाता है।

रेवती नक्षत्र की गणना गंडमूल नक्षत्रों में की जाती है । इस नक्षत्र में जन्मे जातको को विष्णु भगवान की पूजा अवश्य करनी चाहिए ।  इन्हे नित्य विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से जीवन में श्रेष्ठ सफलता की प्राप्ति होती है । रेवती नक्षत्र का आराध्य वृक्ष महुआ और स्वभाव  मृदु माना गया है ।

रेवती नक्षत्र में जन्म लेने वाले स्त्री और पुरुष दोनों में विपरीत लिंग के व्यक्तियों के प्रति अधिक आकर्षण होता है।  इनके दोस्तों में विपरीत लिंग के व्यक्तियों की अच्छी संख्या होती है।

रेवती नक्षत्र में जन्मे जातक मध्यम कद और गौर वर्ण के व्यक्ति होते हैं। यह छल कपट से दूर रहते है ।

 यह कुशाग्र बुध्दि के, ईश्वर में आस्था रखने वाले, व्यवहार कुशल लेकिन बहुत ही जिद्दी होते है, इन्हे किसी की भी गलत बात सहन नहीं होती है। यह अपने जीवन में काफी सुदूर / विदेश यात्रायें करते है ।

रेवती नक्षत्र के लिए भाग्यशाली अंक 3 और 5,  भाग्यशाली रंग भूरा, और भाग्यशाली दिन  शनिवार और गुरुवार होता है ।

रेवती नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को इस नक्षत्र देवता के नाममंत्र:- “ॐ रेवत्यै नमः”l  मन्त्र की माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।

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योग(Yog) :- ब्रह्मा 22.15 PM तक तत्पश्चात इंद्र

योग के स्वामी, स्वभाव :-        ब्रह्म योग के स्वामी अश्विनी कुमार जी एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है  । 

प्रथम करण : – बालव 15.43 PM तक

करण के स्वामी, स्वभाव :-   बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।

द्वितीय करण :- कौलव 02.30 AM शनिवार 21 मार्च तक

करण के स्वामी, स्वभाव :-    कौलव करण के स्वामी मित्र और स्वभाव सौम्य है ।

  • दिशाशूल (Dishashool)- शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.50 AM से 5.38 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.30 PM से 15.18 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.30 PM से 18.54 PM तक
  • अमृत काल : 12.23 AM से 01.43 AM शनिवार 21 मार्च तक

    यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – शुक्रवार का गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)-दिन – 10:30 AM से 12:00 PM तक ।
  • सूर्योदय – प्रातः 06:25
  • सूर्यास्त – सायं : 18:32
  • विशेष – द्वितीया को बैगन, कटहल और नींबू का सेवन नहीं करना चाहिए ।
  • पर्व त्यौहार- नवरात्री का दूसरा दिन, जय माँ ब्रह्मचारिणी

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“हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय 9425203501
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ 7587346995)


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