शनिवार का पंचांग, Shaniwar Ka Panchang, 28 मार्च 2026 का पंचांग ,

शनिवार का पंचांग, Shaniwar Ka Panchang, 28 मार्च 2026 का पंचांग ,


Shaniwar Ka Panchang, शनिवार का पंचांग, 28 March 2026 ka Panchang,

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  • Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)


पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए शनिवार का पंचांग, (Shanivar Ka Panchang), आज का पंचांग, aaj ka panchang, saturday ka panchang।

  • शनिवार का पंचांग, (Shanivar Ka Panchang, )

    28 मार्च
     2026 का पंचांग, 28 March 2026 ka Panchang,
  • दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
  • शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।

*विक्रम संवत् – 2083,
* शक संवत – 1948,
* कलि संवत – 5128,

* कलयुग 5128वर्ष
* अयन – उत्तरायण,
* ऋतु – बसंत
 ऋतु,
* मास – 
चैत्र माह,
* पक्ष – 
शुक्ल पक्ष,
*चंद्र बल – 
मेष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, कुम्भ,

शनिवार को शनि महाराज की होरा :-

प्रात: 6.16 AM से 7.18 AM तक

दोपहर 01.29 PM से 2.31 PM तक

रात्रि 20.30 PM से 9.32 PM तक

शनिवार को शनि की होरा में अधिक से अधिक शनि देव के मंत्रो का जाप करें । श्रम, तेल, लोहा, नौकरो, जीवन में ऊंचाइयों, त्याग के लिए शनि की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

शनिवार के दिन शनि की होरा में शनि देव देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में शनि ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

ऐसे करें होलिका दहन, सभी कष्ट रहेंगे दूर, अवश्य जानिए होलिका दहन की विधि

शनि देव के मन्त्र :-

ॐ शं शनैश्चराय नमः।

अथवा

ऊँ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्‌। छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्‌।।

  • तिथि (Tithi) – दशमी 08.45 AM तक तत्पश्चात एकादशी
  • तिथि का स्वामी – दशमी तिथि के स्वामी यमराज जी और एकादशी तिथि के स्वामी भगवान विश्व देव जी है ।

दशमी तिथि के देवता यमराज जी हैं। यह दक्षिण दिशा के स्वामी है। इनका निवास स्थान यमलोक है। शास्त्रों के अनुसार यमराज जी मृत्यु के देवता कहे गए हैं।

गरुड़ पुराण के अनुसार यमराज के महल को कालित्री महल कहते हैं और उनके सिंहासन को विचार-भू कहते हैं।

पद्म पुराण में उल्लेख मिलता है कि यमलोक पृथ्वी से 86,000 योजन यानी करीब 12 लाख किलोमीटर दूर है।

गरुड़ पुराण में यमलोक में चार द्वार बताए गए हैं। पूर्वी द्वारा से प्रवेश सिर्फ धर्मात्मा और पुण्यात्माओं को मिलता है जबकि दक्षिण द्वार से पापियों का प्रवेश होता है जिसे यमलोक में यातनाएं भुगतनी पड़ती है।

साधु-संतों को उत्तर दरवाजे से और दान पुण्य करने वाले मनुष्यों को पश्चिम द्वार से प्रवेश मिलता है।

यमराज जी भगवान सूर्य और उनकी पत्नी संज्ञा के पुत्र है, यमुना अर्थात (यमी) इनकी जुड़वां बहन और मनु इनके भाई कहे गए है।

यमराज की पत्नी का नाम देवी धुमोरना तथा इनके पुत्र का नाम कतिला है।

यमराज जी का वाहन महिष / भैंसे को माना गया हैं। वे समस्त जीवों के शुभ अशुभ कर्मों का निर्णय करते हैं।

इस दिन इनकी पूजा करने, इनसे अपने पापो के लिए क्षमा माँगने से जीवन की समस्त बाधाएं दूर होती हैं, निश्चित ही सभी रोगों से छुटकारा मिलता है, नरक के दर्शन नहीं होते है अकाल मृत्यु के योग भी समाप्त हो जाते है।

मथुरा में स्थित यमराज और उनकी बहन यमुना जी का एक प्राचीन मंदिर है उस मंदिर को यमुना धर्मराज मंदिर कहते है। देश में भाई-बहन का ये एकमात्र मंदिर है।

मान्यता है कि, भाई बहन इस मंदिर में भैया दूज के दिन एक साथ स्नान करते हैं। इससे उन्हें मृत्यु के बाद बैकुंठ की प्राप्ति होती है।

इस तिथि को धर्मिणी भी कहा गया है। समान्यता यह तिथि धर्म और धन प्रदान करने वाली मानी गयी है ।

दशमी तिथि में नया वाहन खरीदना शुभ माना गया है। इस तिथि को सरकार से संबंधी कार्यों का आरम्भ किया जा सकता है।

यमराज जी का समस्त रोगों को बाधाओं को दूर करने वाले मन्त्र :- “ॐ क्रौं ह्रीँ आं वैवस्वताय धर्मराजाय भक्तानुग्रहकृते नम : “॥ की एक माला का जाप अथवा कम से कम 21 बार इस मन्त्र का जाप करें ।

दशमी को परवल नहीं खाना चाहिए।

राशिनुसार होली खेलकर अपने भाग्य को ऐसे करें मजबूत,

कैसा भी सिर दर्द हो उसे करें तुरंत छूमंतर, जानिए सिर दर्द के अचूक उपाय

नक्षत्र (Nakshatra) – पुष्य नक्षत्र 14.50 PM तक तत्पश्चात अश्लेषा

नक्षत्र के स्वामी :-        पुष्य नक्षत्र के देवता देव गुरु बृहस्पति और स्वामी शनि देव जी है,  इस दिन चंद्र देव कर्क राशि में गोचर करते हैं । 

पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रो का राजा भी कहते है, उसमें भी रवि पुष्य नक्षत्र एवं गुरु पुष्य नक्षत्र बहुत ही शुभ माने जाते है। इस अवसर पर किया गया शुभ कार्य अति लाभ दायक और चिरस्थाई होता है।

पुष्य नक्षत्र का नक्षत्र आराध्य वृक्ष: पीपलं तथा नक्षत्र का स्वाभाव शुभ माना जाता है।

शास्त्रों में लिखा है कि पुष्य नक्षत्र में शुरू किये गए सभी कार्य पुष्टिदायक, सर्वथा सिद्ध होते ही हैं, निश्चय ही फलीभूत होते हैं ।

पुष्य नक्षत्र माँ लक्ष्मी जी को अत्यंत प्रिय है  ।  पुष्य नक्षत्र के दिन माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए श्री सूक्त, श्री महा लक्ष्मी अष्टकम का पाठ करना अत्यंत पुण्य दायक माना जाता है।

पुष्य नक्षत्र में जन्मे जातक सुन्दर, शांत, महत्वाकांक्षी, साहसी, सुखी, भोगी, लोकप्रिय, बुद्धिमान, परोपकारी, कड़ी मेहनत करने वाले तथा पुत्र मित्रादि से युक्त होता है।

लेकिन पुष्य नक्षत्र के लोग स्वार्थी, अत्यधिक बोलने वाले, जिद्दी, घमंडी,  कट्टरपंथी और अत्यधिक संवेदनशील भी होते हैं।

पुष्य नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 8 और 2, भाग्यशाली रंग लाल, नीला, भाग्यशाली दिन शनिवार, सोमवार और बुधवार होता है ।

पुष्य नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ बृहस्पतये नम: “। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।

  गुरु पुष्य नक्षत्र किसी भी तरह के वस्त्र, वाहन, सोना, चांदी, आभूषण, भूमि और भवन की खरीदारी के लिए उत्तम समय माना गया है ।  

दाम्पत्य जीवन में हो परेशानी या घेरे हो आर्थिक संकट होली के दिन अवश्य ही करें ये उपाय

अगर 50 की जगह 25, 60 की जगह 30 की उम्र चाहते है, जीवन में डाक्टर के पास ना जाना हो तो अवश्य करे ये उपाय   

  • योग (Yog) – सुकर्मा 20.06 PM तक तत्पश्चात धृति
  • योग के स्वामी, स्वभाव :-    सुकर्मा योग के स्वामी इंद्र जी और स्वभाव शुभ माना जाता है ।
  • प्रथम करण : – गर 08.45 AM तक,
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-     गर करण के स्वामी भूमि तथा स्वभाव सौम्य है ।
  • द्वितीय करण : – वणिज 20.13 PM तक तत्पश्चात विष्टि
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-    वणिज करण की स्वामी लक्ष्मी देवी और स्वभाव सौम्य है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.43 AM से 5.29 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.30 PM से 15.19 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.35 PM से 18.59 PM तक
  • अमृत काल : अमृत काल 08.35 AM से 10.09 AM तक
  • गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
  • दिशाशूल (Dishashool)- शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।

    यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
  • राहुकाल (Rahukaal)-सुबह – 9:00 से 10:30 तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 06:16 AM
  • सूर्यास्त – सायं 18:37 PM
  • विशेष – दशमी के दिन कलम्बी, परवल का सेवन नहीं करना चाहिए ।
  • एकादशी के दिन सेम फली, चावल का सेवन और दूसरो के अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए ।
  •  एकादशी के दिन चावल खाने से रोग बढ़ते है और दूसरे का अन्न खाने से पुण्य नष्ट होते है ।


अवश्य पढ़ें :-राशिनुसार इन वृक्षों की करें सेवा, चमकने लगेगा भाग्य,

  • पर्व त्यौहार- नवरात्री का तीसरा दिन, जय माँ चंद्रघंटा
  • मुहूर्त (Muhurt) –

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

मित्रो हम इस साईट के माध्यम से वर्ष 2010 से निरंतर आप लोगो के साथ जुड़े है। आप भारत या विश्व के किसी भी स्थान पर रहते है, अपने धर्म अपनी संस्कृति को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए आचार्य मुक्ति नारायण पांडेय अध्यात्म ज्योतिष परामर्श केंद्र रायपुर www.memorymuseum.net के साथ अवश्य जुड़ें, हमारा सहयोग करें ।

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28 मार्च 2026 का पंचांग, 28 March 2026 ka panchang, aaj ka panchang, aaj ka rahu kaal, aaj ka shubh panchang, panchang, saturday ka panchang, shanivar ka panchang, Shaniwar Ka Panchag, shanivar ka rahu kaal, shanivar ka shubh panchang, आज का पंचांग, आज का राहुकाल, आज का शुभ पंचांग, पंचांग, शनिवार का पंचांग, शनिवार का राहु काल, शनिवार का शुभ पंचांग, सैटरडे का पंचांग,

ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )
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पंचांग, Panchang,Shukrwar ka panchag, शुक्रवार का पंचांग, 27 मार्च 2026 का पंचांग,


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आप सभी भक्तो को चैत्र नवरात्री के नवें दिन, महा नवमी, राम नवमी की हार्दिक शुभकामनाएं, जय माँ सिद्धिदात्रीजय श्री राम

गुरुवार का पंचांग शनिवार का पंचांग

शुक्रवार का पंचांग, Shukrwar ka panchag, 27 मार्च 2026 का पंचांग का पंचांग,

शुक्रवार का पंचांग, shukrwar ka panchang,

  • Panchang, पंचाग, Panchang 2026 हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang, पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-

    1:- तिथि (Tithi)
    2:- वार (Day)
    3:- नक्षत्र (Nakshatra)
    4:- योग (Yog)
    5:- करण (Karan)


    पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी नित्य पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।

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    27 मार्च 2026 का पंचांग, 27 March  2026 ka Panchang,

  • महालक्ष्मी मन्त्र : ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥

  • ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥

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वैसे हम नित्य प्रात: अपने whats up स्टेटस पर भी पंचांग को लगा देते है उस लिंक को ओपन करके भी आप पंचांग पढ़ सकते है उसको अपने स्टेटस पर भी लगा सकते है, जिससे जन सामान्य का भला हो सके ।

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आज का पंचांग, aaj ka panchang,

दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।

शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय 
“श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।

शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।

  • * विक्रम संवत् – 2083 वर्ष
  • * शक संवत – 1948 वर्ष
    * कलि संवत – 5128 वर्ष
    * कलयुग – 5128 वर्ष
    * अयन – उत्तरायण,
    * ऋतु – बसंत ऋतु,
    * मास – चैत्र माह
    * पक्ष – शुक्ल पक्ष
    * चंद्र बल – वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर, कुम्भ,

शुक्रवार को शुक्र देव की होरा :-

प्रात: 6.17 AM से 7.19 AM तक

दोपहर 01.28 PM से 2.30 PM तक

रात्रि 20.33 PM से 21.31 PM तक

दाहिने हाथ के अंगूठे से नीचे के हिस्से ( शुक्र का स्थान ) और अंगूठे पर थोड़ा सा इत्र लगाकर, ( इत्र ना मिले तो उसके बिना भी कर सकते है) बाएं हाथ के अंगूठे से उस हिस्से को शुक्र की होरा में “ॐ शुक्राये नम:” या

ॐ द्रांम द्रींम द्रौंम स: शुक्राय नम:।’ मंत्र का अधिक से अधिक जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य )I

यह उपाय आप कोई भी काम करते हुए चुपचाप कर सकते है इसके लिए किसी भी विधि विधान की कोई आवश्यकता नहीं है I

सुख समृद्धि, ऐश्वर्य, बड़ा भवन, विदेश यात्रा, प्रेम, रोमांस, सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए शुक्रवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

शुक्रवार के दिन शुक्र की होरा में शुक्रदेव देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में शुक ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

शुक्र देव के मन्त्र :-

ॐ शुं शुक्राय नमः।। अथवा

” ॐ द्राम द्रीम द्रौम सः शुक्राय नमः “।।

अपनी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए नवरात्री में अवश्य करें ये उपाय  

  • तिथि, (Tithi) नवमी तिथि 10.06 AM तक तत्पश्चात दशमी, तिथि, (Tithi) :-,
  • तिथि के स्वामी – नवमी तिथि की स्वामिनी माँ दुर्गा जी और दशमी तिथि के स्वामी यमराज जी है I

नवरात्रि के नवें दिन मां सिद्धिदात्री का पूजन किया जाता है। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं।

माता सिद्धिदात्री का स्वरूप बहुत सौम्य और मनोहारी है, मां की चार भुजाएं हैं। मां के एक हाथ में चक्र, एक हाथ में गदा, एक हाथ में कमल का फूल और एक हाथ में शंख सुशोभित है। माता सिद्धिदात्री का वाहन सिंह है।

मां सिद्धिदात्री को खीर का भोग लगाया जाता है। अपनी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए नवरात्रि की नवमी के दिन माँ सिद्धिदात्री के इस मन्त्र का जाप करना चाहिए।

ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:।

आज कन्या पूजन के साथ ही नवरात्री के नौ दिनों के ब्रत का समापन हो जायेगा, अगर कोई व्यक्ति नवरात्री का ब्रत ना भी रख पाए तो भी हर हिन्दू को यथासंभव नवरात्री में अपने घर पर कन्या पूजन अवश्य ही करना चाहिए।

धर्म शास्त्रों में नवरात्री में कन्या पूजन का बहुत ही महत्त्व बताया गया है । कन्या पूजन, से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है, पूर्ण श्रद्धा, हर्ष – उल्लास से नन्ही नन्ही कंजको को अपने घर में भोजन कराने, उन्हें अपनी श्रद्धा – सामर्थ्य अनुसार उपहार देकर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने से समस्त पापो का नाश होता है, कुंडली के अशुभ ग्रहो से भी शुभ फल मिलने लगते है ।

शास्त्रों के अनुसार घर पर कन्या पूजन से समस्त वास्तु, ग्रह जनित दोष समाप्त हो जाते है घर में सुख – शांति और मनवांछित लाभ की प्राप्ति होगी है।

ऐसे करें होलिका दहन, जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का होगा संचार, सभी कष्ट रहेंगे दूर, अवश्य जानिए होलिका दहन की विधि,

परिवार में सुख शांति चाहते है तो अवश्य ही करें ये उपाय,

जरूर पढ़े :- एकादशी के इन उपायों से पाप होंगे दूर, सुख – समृद्धि की कोई कमी नहीं रहेगी,

आज नवरात्री के नवें दिन, महा नवमी के दिन बहुत से भक्त गण नन्ही नन्ही कन्याओं जिन्हे कंजके भी कहते है उनकी पूजा करते है, उनके भक्ति भाव से अपने घर में बुलाकर उन्हें भोजन कराकर उन्हें  उपहार देकर, उनसे आशीर्वाद लेते है ।

मान्यता है कि जो भी भक्त गण नवरात्रि में माँ दुर्गा की पूजा करते है, नवरात्री का ब्रत रखते है उन्हें नवरात्री की अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं का पूजन अवश्य ही करना चाहिए । नवरात्री में कन्या पूजन के बिना ब्रत पूर्ण नहीं माना जाता है ।

 शास्त्रों के अनुसार माँ दुर्गा होम, जप और दान से इतनी प्रसन्न नहीं होतीं जितनी कन्या पूजन से प्रसन्न होती हैं। कन्या पूजन से सभी तरह के वास्तु दोष,विघ्न, भय और शत्रुओं का नाश होता है।

देवी पुराण में लिखा है कि, इन्द्र ने एक बार ब्रह्मा जी से देवी दुर्गा को प्रसन्न करने की विधि पूछी तो ब्रह्मा जी ने माँ दुर्गा को प्रसन्न करने की सर्वोत्तम विधि कन्या पूजन को ही बताया,  कन्या पूजन से सभी तरह के वास्तु दोष,विघ्न, भय और शत्रुओं का नाश होता है।

नवरात्री की अष्टमी तथा नवमी के दिन कन्या पूजन में  9 कन्याओं का पूजन करना चाहिए, साथ ही एक छोटे बालक को भी साथ में पूज कर उसे भी भोजन करवाना चाहिए  ।

 नवरात्रि में कन्या पूजन में ध्यान रखे कि कन्याओ की उम्र दो वर्ष से कम और दस वर्ष से ज्यादा भी न हो ।

पूजी जाने वाली कन्याओं को देवी के शक्ति स्वरूप का प्रतीक मानकर उनको श्रद्धा से जीमाना चाहिए ।

नवरात्र में नौ कन्याओं को माता के नौ रूपों क्रमश: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी एवं सिद्धिदात्री का रूप मानकर उनकी पूजा का विधान है।

शास्त्रों के अनुसार नवरात्र में की गयी पूजा-पाठ,  आराधना और कन्या पूजा कभी निष्फल नहीं होती भक्तो को उसका फल अवश्य ही मिलता है।

कन्या पूजन में सभी कन्याओं और एक बालक के पहले चरण धोकर, साफ कर के उन्हें साफ आसान पर बिठायें फिर उन सभी के मस्तक पर रोली का तिलक करके उनके हाथ में कलावा बांधें  । फिर जो भी श्रद्धा पूर्वक बना हो उन्हें इन  कन्याओं के आगे परोसे ।

इसके बाद कन्या पूजन के दिन जिस प्रशाद से मां दुर्गा को भोग लगाया हो उस प्रशाद को भोग के बाद सबसे पहले कन्याओं को ही खिलाना चाहिए।

कन्याओं के भोजन करने के उपरांत उन्हें अपनी सामर्थनुसार उपहार और दक्षिणा देकर उन सब के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लें, मन ही मन मे माँ का ध्यान करके हुए अपनी गलतियों, पापो  के लिए क्षमा मांगते हुए अपनी मनोकामना भी कहे,   और उन कंजको को अगले नवरात्री में फिर से अपने घर में आने का निमंत्रण दें ।

ऐसा करने से माँ की कृपा से सभी विघ्नो, रोगो, सभी दोषो का नाश होता है, निश्चय ही सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है ।

आज राम नवमी है । चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी को रामनवमी का त्यौहार मनाया जाता है। आज भगवान श्री राम का जन्मदिवस अर्थात राम नवमी है ।

हिन्दु धर्म शास्त्रो के अनुसार त्रेतायुग में धर्म की पुन: स्थापना तथा रावण के अत्याचारो को समाप्त करने के लिये श्री विष्णु भगवान ने मृत्यु लोक में श्री राम चन्द्र के रुप में चैत्र माह शुक्ल की नवमी के दिन राजा दशरथ के घर में अवतार लिया था। इसीलिए इस दिन पूरे दिन शुभ समय, पवित्र मुहूर्त होता है।

रामनवमी के पर्व के साथ ही माँ दुर्गा के पवित्र नवरात्रों का भी समापन हो जाता है, अत: इस शुभ तिथि को पूरे भारत में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है।

मान्यता है कि इसी दिन गोस्वामी तुलसीदास जी ने हिन्दुओं के प्रमुख ग्रन्थ श्री रामचरित मानस की रचना का आरंभ भी किया था।

रामनवमी के दिन ब्रम्ह मुहूर्त में उठकर स्नान करके भगवान श्री राम की तस्वीर को गंगाजल या किसी पवित्र नदी के जल से पोंछे । इस दिन भगवान राम को केसर मिली हुई खीर और मेवे का भोग लगाएं।

इससे मर्यादा पुरुषोत्तम, अयोध्या नरेश भगवान श्री राम का आशीर्वाद मिलता है जीवन में किसी भी वस्तु का आभाव नहीं रहता है घर में हर्ष और प्रेम का स्थाई वातावरण बनता है ।

राम नवमी Ramnavmi के अवसर पर पूरे देश के मंदिरो में विशेष पूजा अर्चना की जाती है लेकिन उत्तर प्रदेश के अयोध्या नगरी में भक्तों का विशेष उत्साह देखने को मिलता है। इस दिन अयोध्या नगरी में देश विदेश से लाखो लोग आकर पवित्र सरयू नदी पर स्नान कर भगवान श्री राम की अराधना करते हुए उनका जन्म उत्सव मानते है ।

रामनवमी के दिन किसी भी राम मंदिर में जाकर घी का दीपक जलाएं और प्रसाद चढ़ाकर उसे वहीँ पर ज्यादा से ज्यादा लोगों में बांटें। रामनवमी के दिन गरीबो -असहायो को अपने सामर्थ्य अनुसार दान-पुण्य करने से समस्त संसारिक सुखो की प्राप्ति होती है।

श्रीराम नवमी के दिन रामरक्षास्त्रोत, राम मंत्र, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, सुंदर कांड आदि के पाठ से ना सिर्फ अक्षय पुण्य मिलता है बल्कि धन संपदा के निरंतर बढ़ने के योग बन जाते हैं। रामनवमी के दिन पंडितजी को भोजन कराएं अथवा मंदिर में बिना पकी भोजन साम्रग्री का दान दें ।

इस दिन किसी भी राम मंदिर में जाकर भगवान को पीले फूलो अथवा गुलाब की माला पहनाये इससे परिवारिक जीवन सुखमय होता है, जीवन में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है ।

रामनवमी के दिन “श्री राम, जय राम, जय जय राम”॥ मन्त्र का अधिक से अधिक जाप करना चाहिए ।

रामनवमी के दिन इन उपायों से मिलेगा भगवान श्री राम का आशीर्वाद,  जानिए राम नवमी कैसे मनाएं की जीवन हो सुखमय ,

नक्षत्र ( Nakshatra ) : पुनर्वसु 15.24 PM तक तत्पश्चात पुष्य

नक्षत्र के स्वामी :–        पुनर्वसु नक्षत्र के देवता अदिति (पृथ्वी देवी), बृहस्पति, एवं नक्षत्र के स्वामी गुरु बृहस्पति जी है ।  

 पुनर्वसु अर्थ पुन: शुभ या पुन: बसना होता है। पुनर्वसु नक्षत्र आकाश मंडल में  7वां नक्षत्र है ।

ज्योतिषशास्त्र में पुनर्वसु नक्षत्र को सबसे बड़ा और बहुत ही शुभ माना जाता है । यह मर्यादा पुरषोतम भगवान श्री राम जी का जन्म नक्षत्र है। मान्यता है कि पुनर्वसु जातक के यहा केवल पुत्र ही होता है।

माना जाता है कि जिसका जन्म इस नक्षत्र में होता है, वे दूसरों की सेवा करने, भलाई करने के लिए सदैव तैयार रहते हैं  । पुनर्वसु प्रत्येक कार्य के शुभारम्भ के लिए, नयी शुरुआत के लिए श्रेष्ठ होता है। 

पुनर्वसु नक्षत्र का आराध्य वृक्ष: बांस / बांबू और नक्षत्र का स्वभाव चर माना गया है ।

इस नक्षत्र  में जन्मे जातक व्यव्हार कुशल, शांत, परोपकारी, धार्मिक,सुखी, दानी, न्यायप्रिय, लोकप्रिय, पुत्रवान होते हैं।

लेकिन यदि गुरु, बुध और चन्द्रमा शुभ ना जो तो ऐसा जातक कामुक, दब्बू,, बुद्धिहीन, कंजूस और थोड़े में ही संतुष्ट रहने वाला होता है।

इस नक्षत्र की स्त्रियां शांत लेकिन अकस्मात उग्र होने वाली, विलासी जीवन जीने वाली, कामुक, सौन्दर्यप्रेमी और आशावादी मानी जाती  है ।

पुनर्वसु नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 3, भाग्यशाली रंग, सुनहरा, भाग्यशाली दिन गुरुवार का माना जाता है ।

पुनर्वसु नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ आदित्याय नम:”। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।

अपनी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए नवरात्री के शुक्रवार और अष्टमी में अवश्य ही करें ये उपाय  

अवश्य पढ़ें :- बी पी हाई रहता हो तो ना हो परेशान, इन उपायों से बी पी की समस्या निश्चित रूप से होगी दूर

योग(Yog) :- अति गण्ड 22.10 PM तक तत्पश्चात सुकर्मा

योग के स्वामी, स्वभाव :-       अतिगण्ड योग के स्वामी चंद्र देव जी लेकिन स्वभाव हानिकारक  है   । 

प्रथम करण : – कौलव 10.06 AM तक

करण के स्वामी, स्वभाव :-   कौलव करण के स्वामी मित्र और स्वभाव सौम्य है ।

द्वितीय करण :- तैतिल 21.23 PM तक तत्पश्चात गर

करण के स्वामी, स्वभाव :-    तैतिल करण के स्वामी विश्वकर्मा जी और स्वभाव सौम्य है ।

  • दिशाशूल (Dishashool)- शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.44 AM से 5.30 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.30 PM से 15.19 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.35 PM से 18.58 PM तक
  • अमृत काल : 13.05 PM से 14.38 PM तक

    यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – शुक्रवार का गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)-दिन – 10:30 AM से 12:00 PM तक ।
  • सूर्योदय – प्रातः 06:17
  • सूर्यास्त – सायं : 18:36
  • विशेष – शास्त्रों के अनुसार किसी भी पक्ष की नवमी तिथि में लौकी और कद्दू का सेवन नहीं करना चाहिए ।

    दशमी के दिन कलम्बी, परवल का सेवन नहीं करना चाहिए ।
  • पर्व त्यौहार- नवरात्री का नवां दिन, महा नवमी, जय माँ ब्रह्मचारिणी, राम नवमी

जरुर पढ़ें :- पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रो का राजा कहते है जानिए क्यों महत्वपूर्ण है पुष्य नक्षत्र,

“हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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27 मार्च 2026 का पंचांग, 27 March 2026 ka Panchang, aaj ka panchang, aaj ka rahu kaal, aaj ka shubh panchang, friday ka panchang, panchang, shukrawar ka panchang, Shukravar Ka Panchang, shukrawar ka rahu kaal, shukrwar ka shubh panchang, आज का पंचांग, आज का राहुकाल, आज का शुभ पंचांग, पंचांग, फ्राइडे का पंचांग, शुक्रवार का पंचांग, शुक्रवार का राहु काल, शुक्रवार का शुभ पंचांग,

ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )
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नवरात्रि (Navratri) में कन्या पूजन, kanya pujan का बहुत  विशेष महत्व माना जाता है। लोग चाहे नवरात्री का ब्रत रखे अथवा नहीं लेकिन लगभग सभी हिन्दू घरो में नवरात्री में कन्या पूजन, kanya pujan अवश्य होता है,  बिना इसके नवरात्रि पूजा या व्रत पूर्ण नहीं माना जाता है।

नवरात्रि में अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं का पूजन कर उन्हें लोग अपने घरो में जिमाते है, भोजन कराते है।

शास्त्रों के अनुसार 2 वर्ष से लेकर 9 वर्ष तक की कन्याओं को देवी दुर्गा का ही रूप माना गया है। इसीलिए नवरात्रि में 2 वर्ष  से लेकर 9 वर्ष तक की कन्याओं तके पूजन का विधान हैं। शास्त्रों के अनुसार ………

दो वर्ष की कन्याओं की पूजा से भोग और मोक्ष की ,

तीन वर्ष की कन्याओं की पूजा से धर्म की,

चार वर्ष की कन्याओं की पूजा से उच्च राज्यपद की ,

पांच वर्ष की कन्याओं की पूजा से ज्ञान की,

छ: वर्ष की कन्याओं की पूजा से समस्त सिद्दियों की,

सात वर्ष की कन्याओं की पूजा से सम्मान की,

आठ वर्ष की कन्याओं की पूजा से धन – ऐश्वर्य की  और

नौ वर्ष की कन्याओं की पूजा से समस्त संसारिक सुखो की प्राप्ति होती है।

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वर्ष 2026 के चैत्र नवरात्र में 26 मार्च गुरुवार को अष्टमी तिथि एवं 27 मार्च शुक्रवार को नवमी तिथि का ब्रत और हवन किया जाएगा I
इसलिए जो लोग अष्टमी तिथि को कन्या खिलाते है वह 26 मार्च गुरुवार को और जो लोग नवमी तिथि को कन्या खिलाते है उनके लिए 27 मार्च शुक्रवार को कन्या पूजन करना, उन्हें भोजन करवा कर उन्हें उपहार देना उचित रहेगा ।

नवरात्री में ऐसे करें कन्या पूजन, navratri me aisen karen kanya pujan,

शास्त्रों के अनुसार हर्ष एवं पूर्ण श्रद्धा से कन्या पूजन, kanya pujan करने से सुख-शांति और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। उत्तर भारत में भक्‍त मां दुर्गा को प्रसन्न करने उनकी कृपा पाने के लिए नवरात्री के नौ दिनों तक व्रत रखते हैं ।

नवरात्री ब्रत में अष्‍टमी तथा नवमी के दिन नौ कन्‍याओं का पूजन करने का विधान है, जो लोग पूरे नौ दिनों तक व्रत नहीं रख पाते हैं, वे भी नवरात्र का पहला तथा कन्या पूजन से पहले का नवरात्र सप्तमी या अष्‍टमी / दुर्गाष्‍टमी का व्रत रखते हैं और कुंवारी कन्याओं अर्थात कंजको की पूजा करते हैं।

कन्याओं के  पूजन के साथ एक लांगूर भी होना चाहिए। माना जाता है कि लांगूर यानी छोटे लड़के के बिना पूजा पूरी नहीं मानी जाती।

कन्‍याओं को माँ दुर्गा का रूप माना जाता है, उनके घर आने पर उनके साथ माता रानी के जयकारे लगाकर उनका स्वागत करें उन्हें हर तरह से प्रसन्न रखे।

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कन्या पूजन करते समय सबसे पहले सभी कन्याओं के एक एक करके उनके पैर धोएं फिर उन्हें एक साफ आसन पर बैठायें।

उसके पश्चात उनके हाथों में कलावा बांधकर  उनके माथे पर रोली, कुमकुम और अक्षत् का टीक लगाएं।  उन्ही कन्याओं में से किसी से घर के सभी सदस्यों के हाथ में कलावा बंधवाएं एवं माथे पर टीका भी लगवाएं ।

दुर्गा मां को हलवा, पूरी, खीर, चने एवं फल का भोग लगाया जाता है। यही प्रसाद कन्याओं को भी भोजन के रूप में  खिलाया जाता है। कन्याओं को प्रसन्नता पूर्वक भोजन कराते समय उन्हें एक बार बीच में सभी वस्तुएं दोहरा दें अर्थात दोबारा भी दे ।

मन में यह भाव रखे की आज देवी माँ आपके घर में आपके निमंत्रण पर भोजन करने, आपको आशीर्वाद देने आयी है ।

घर में कन्या पूजन करने से सभी तरह के वास्तु और ग्रह जनित दोष भी स्वत: समाप्त हो जाते है ।

कन्याओं को भोजन कराने के बाद उन्हें अपने सामर्थ्यनुसार भेंट, उपहार और दक्षिणा भी दी जाती है। कन्याओं को लाल चुन्री और चूड़ियां भी चढ़ाएं।

इस तरह विधि विधान पूर्वक कन्याओं का पूजन करने के बाद उनके चरण छूकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें, और अगले नवरात्री में फिर से उन्हें अपने घर पर आने का निवेदन करते हुए पूरे सम्मान के साथ उन्हें विदा करें । 

मान्यता है इस प्रकार प्रसन्नता से विधि पूर्वक कन्याओं का पूजन करने से माता अति प्रसन्न होती है अपने भक्तो के सभी संकटो को दूर करते हुए उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती है ।

गुरुवार 26 मार्च को महाष्टमी के दिन राहुकाल दोपहर 1.30 बजे से 3.00 बजे तक और शुक्रवार 27 मार्च को महानवमी के दिन राहु काल सुबह 10.30 बजे से दोपहर 12 बजे से तक है ।

शास्त्रों में राहु काल में कोई भी शुभ कार्य करना मना किया गया है, अत: कन्या पूजन के शुभ फलो के लिए राहु काल के समय भूल कर भी कन्या पूजन, कन्या भोज नहीं कराना चाहिए ।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )

Ram Navami, राम नवमी, Ram Navami 2026,

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Ram Navami, राम नवमी 2026,

भगवान श्री राम का जन्मोत्सव राम नवमी Ram Navami का पर्व पूरे भारत में अत्यंत हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व अत्यंत प्राचीन काल से ही पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है ।

वर्ष 2026 में राम नवमी Ram navmi का पर्व शुक्रवार 27 मार्च को मनाया जायेगा ।

 मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम का सम्पूर्ण भारतीय जनमानस पर बहुत प्रभाव है । भगवान श्री राम भगवान विष्णु के अवतार कहे गए है उन्हें विष्णु जी vishnu ji का सातवाँ अवतार माना जाता है।

जानिए, रामनवमी क्यों मनाई जाती है, Ramnavmi kyon manai jati hai, रामनवमी, Ramnavmi, रामनवमी का महत्व, Ramnavmi ka Mahatva, रामनवमी 2026, Ramnavmi 2026,

नवरात्री में माँ दुर्गा की स्वरूप कन्याओं की इस तरह से पूजा, अवश्य जानिए नवरात्री में कन्या पूजन की सही विधि 

Ram Navami, राम नवमी,

प्राचीन काल में लंका पर रावण का राज था जो परम विद्वान् होने के साथ बहुत अत्याचारी भी था। उसके अत्याचार से ना केवल मनुष्य, ऋषि वरन देवतागण भी अत्यंत त्रस्त थे । रावण ने ब्रह्मा जी से अमर होने का वरदान ले रखा था इसीलिए कोई उसका बाल भी बांका नहीं कर पाता था ।  उसके अत्याचार से परेशान होकर सभी देवता भगवान विष्णु के पास जाकर कल्याण के लिए प्रार्थना करने लगे।

तब भगवान श्री विष्णु जी ने सम्पूर्ण सृष्टि के कल्याण , धर्म की पुन: स्थापना , रावण के वध के लिए प्रतापी राजा दशरथ के यहाँ जन्म लेने का निश्चय किया ।

शास्त्रो के अनुसार त्रेतायुग में चैत्र माह Chaitr Maah की नवमी तिथि को पुनर्वसु नक्षत्र तथा कर्क लग्न में भगवान श्री विष्णु जी ने राजा दशरथ की पत्नी कौशल्या को गर्भ से राम के रूप में जन्म लिया।
तभी से उस शुभ तिथि को रामनवमी Ramnavmi के रूप में मनाया जाने लगा ।

मान्यता है कि राम नवमी ram navami के दिन ही गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस की रचना शुरू की थी।

रामनवमी Ramnavmi का दिन नवरात्री navratri का नवां और अंतिम दिन होता है, इस दिन भक्त गण माँ सिद्धि दात्री की आराधना करते है और इस के साथ ही नवरात्र navratr की समाप्ति भी हो जाती है इसलिए नवां नवरात्र navratr और रामनवमी Ramnavmi दोनों पर्व एक साथ एक दिन होने पर इस दिन का महत्व और भी ज्यादा बड़ जाता है ।

राम नवमी Ramnavmi के अवसर पर पूरे देश के मंदिरो में विशेष पूजा अर्चना की जाती है लेकिन उत्तर प्रदेश के अयोध्या नगरी में भक्तों का विशेष उत्साह देखने को मिलता है। इस दिन अयोध्या नगरी में देश विदेश से लाखो लोग आकर पवित्र सरयू नदी पर स्नान कर भगवान श्री राम की अराधना करते हुए उनका जन्म उत्सव मानते है ।

नवरात्री के इस उपाय से मिलेगी सभी कार्यों में श्रेष्ठ सफलता, जानिए नवरात्री के अचूक उपाय 

रामनवमी Ramnavmi का पर्व पापों का नाश करने और शुभ फल प्रदान करने वाला है । इस दिन बहुत से भक्तगण ब्रत रखते है ।

इस दिन रामायण का पाठ करने से अक्षय पूण्य मिलता है अगर रामायण का पाठ संभव ना हो तो सुन्दर कांड अवश्य ही पढे ।

रामनवमी Ramnavmi के दिन रामरक्षा स्त्रोत का पाठ करने से जीवन के साथी कष्ट, संकट दूर होते  हैं।

इस दिन घरो, मंदिरो में  भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है।

 इस दिन भगवान राम के दर्शन और उनकी मूर्ति को फूल-माला से सजाने से जीवन में सुख – समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है ।

 रामनवमी Ramnavmi के दिन भगवान राम का जन्म होने के कारण बहुत से भक्त गण भगवान राम की मूर्ति को पालने में भी  झुलाते हैं।

 भगवान श्री राम shri ram सम्पूर्ण सृष्टि के राजा माने गए है अतः इस दिन उनकी विधि पूर्वक आराधना करने से जीवन के सभी मनोरथ निश्चय ही पूर्ण होते है ।

 रामनवमी Ramnavmi के दिन प्रात: स्नान आदि के पश्चात भगवान राम की मूर्ति / तस्वीर को शंख से स्नान कराकर उन्हें पीले चन्दन से तिलक करें ।

फिर उन्हें लौंग, इलाइची, शहद, सुपारी, नारियल, पान, फल, मीठा आदि अर्पित करें, उन्हें  पीला जनेऊ फिर पीले फूलो की माला पहनाये ।

 इस दिन भगवान राम को तुलसी अवश्य ही चढ़ाएं । तत्पश्चात राम रक्षा स्रोत्र का पाठ करे अंत में आरती करके प्रशाद वितरित करें ।

इस दिन किसी भी राम मंदिर ram mandir में जाकर भगवान को पीले फूलो अथवा गुलाब की माला पहनाये इससे परिवारिक जीवन सुखमय होता है, जीवन में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है ।

जानिए नवरात्री में कन्या पूजन में माता के किन किन स्वरूपों की पूजा की जाती है, कैसे मिलेगी माँ की पूर्ण कृपा  

  राम नवमी के दिन भगवान श्री राम को शहद अर्पित करने से प्रेम में सफलता मिलती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है।

कहते है जो भक्त गण राम नवमी Ramnavmi के दिन भगवान श्री राम की विधि पूर्वक आराधना करते है उनको इस संसार के समस्त भौतिक सुखो की प्राप्ति होती है, उनके पुरखो को मोक्ष मिलता है, उनके परिवार में लोग संस्कारी होते है और अंत में जातक को स्वर्ग में स्थान प्राप्त होता है । 

मित्रो हम इस साईट के माध्यम से वर्ष 2010 से निरंतर आप लोगो के साथ जुड़े है। आप भारत या विश्व के किसी भी स्थान पर रहते है, अपने धर्म अपनी संस्कृति को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए www.memorymuseum.net के साथ अवश्य जुड़ें, हमारा सहयोग करें ।

अगर नित्य पंचाग पढ़ने से आपको लाभ मिल रहा है, आपका आत्मविश्वास बढ़ रहा है, आपका समय आपके अनुकूल हो रहा है तो आप हमें अपनी इच्छा – सामर्थ्य के अनुसार कोई भी सहयोग राशि 9425203501 पर Google Pay कर सकते है ।

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Guruwar Ka Panchag, गुरुवार का पंचांग, 26 मार्च 2026 का पंचांग,

Guruwar Ka Panchag, गुरुवार का पंचांग, 26 मार्च 2026 का पंचांग,

आप सभी को नवरात्री के आठवें दिन की, दुर्गा अष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें, जय माँ महा गौरी

गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 26 March 2026 Ka Panchang,

दोस्तों, हमारा what’s up नंबर what’s up ने रिस्ट्रीक्ड कर रखा है जिससे हम ब्राडकॉस्ट पर लोगो को मैसेज नहीं भेज पा रहे है। सिंगल सिंगल मैसेज भेजने से एकाउंट ब्लॉक हो जा रहा है ।

अब अगर आप 16 सालो से निरंतर बनते, भेजते पंचांग को पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

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अर्थात यदि आपके पास हमारे किसी भी दिन के पंचांग का लिंक है तो आप सप्ताह के किसी भी दिन का पंचांग अवश्य पढ़ सकते है ।

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आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
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बृहस्पतिवार का पंचांग, Brahaspativar ka panchang,

  • Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।

* शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
* वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
* नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
* योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
* करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।

इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
जानिए आज गुरुवार का पंचांग, Guruwar Ka Panchag,

मंगल श्री विष्णु मंत्र :-

मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥

आज का पंचांग, aaj ka panchang, गुरुवार का पंचाग, Guruvar Ka Panchag,

गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag,

26 मार्च 2026 का पंचांग, 26 March 2026 Ka Panchang,


  • गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 26 मार्च 2026 का पंचांग,
  • दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
  • गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए ।

    गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
  • गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
    इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।

    ऐसा होगा हिंदू नव संवत्सर, हिन्दू नव वर्ष के राजा और मंत्री होंगे यह देवता,
  • गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।
    इस उपाय को करने से कार्यो में अड़चने दूर होती है, भाग्य चमकने लगता है, बृहस्पति देव की कृपा मिलती है।

यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।
और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।

गुरुवार को विष्णु जी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, गुरुवार को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ परम फलदाई है

इस बार नवरात्री में माँ दुर्गा अपने इस वाहन पर सवार होकर आएगी और ऐसा रहेगा उसका फल, 

  • *विक्रम संवत् 2083,
  • * शक संवत – 1948,
    *कलि संवत 5128,
    * अयन – उत्तरायण,
    * ऋतु – बसंत ऋतु,
    * मास – चैत्र माह
    * पक्ष – शुक्ल पक्ष
    *चंद्र बल – मेष, मिथुन, सिंह, कन्या, धनु, मकर,

गुरुवार को बृहस्पति देव की होरा :-

प्रात: 6.18 AM से 7.20 AM तक

दोपहर 01.28 PM से 2.30 PM तक

रात्रि 20.33 PM से 9.31 PM तक

आज गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा के समय दाहिने हाथ की तर्जनी ऊंगली ( अंगूठे के बगल वाली उंगली ) के नीचे गुरु पर्वत और उस पूरी ऊंगली पर बृहस्पति देव के मंत्र का जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य ) I

गुरुवार को बृहस्पति की होरा में अधिक से अधिक बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करें । शिक्षा, मान – सम्मान, व्यापार, कारोबार, नए कार्यो के प्रारम्भ के लिए गुरुवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा में बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

बृहस्पति देव के मन्त्र

ॐ बृं बृहस्पतये नमः।। अथवा

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः।।


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  • तिथि (Tithi) :- अष्टमी 11.48 AM तक तत्पश्चात नवमी
  • तिथि का स्वामी – अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी और नवमी तिथि की स्वामी माँ गौरी और कुबेर देव जी है ।
  • आज नवरात्री का आठवें दिन, दुर्गा अष्टमी का दिन है। नवरात्री के आठवें दिन माँ महागौरी की पूजा की जाती है। महागौरी को भगवान गणेश की माता के रूप में भी जाना जाता है ।
  • इनकी उपासना से भक्तों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। कोई भी संकट, दुःख उसके पास भी नहीं आता है । मां गौरी ममता की मूर्ति कही जाती हैं जो अपने भक्तों को अपने पुत्र समान प्रेम करती हैं।
  • मां महागौरी का ये रूप बेहद सरस, सुलभ और मोहक है।
  • इनका वर्ण पूर्णतः गौर है, इनके सभी वस्त्र एवं आभूषण आदि भी श्वेत हैं। इनकी आयु आठ वर्ष की मानी गई है और इनकी मुद्रा अत्यंत शांत है।
  • महागौरी का वाहन वृषभ अर्थात बैल है। इन की चार भुजाएँ हैं, इनके ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है। ऊपरवाले बाएँ हाथ में डमरू और नीचे के बाएँ हाथ में वर-मुद्रा हैं।
  • अष्टमी के दिन महिलाएं अपने सुहाग के लिए देवी मां को चुनरी भेंट करती हैं। अष्टमी तिथि को माँ गौरी को दूध से बने नैवेद्य एवं नारियल का भोग लगाएं।
  • माँ गौरी की आराधना से सभी पाप नष्ट हो जाते है एवं धन, यश और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है । ये धन, वैभव और सुख-शांति की अधिष्ठात्री देवी हैं।
  • नवरात्री की अष्टमी के दिन मां गौरी की कृपा के लिए यहाँ दिए गए मन्त्र की एक माला का जाप करना चाहिए ।
  • ॐ महा गौरी देव्यै नम:”

    अथवा
  • या देवी सर्वभू‍तेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

  • जिनके घरो में अष्टमी पूजी जाती है जो सात नवरात्री का ब्रत रखते है उनके यहाँ अष्टमी की पूजा के बाद नन्ही कुंवारी कन्याओं को भोजन कराना शुभ फल देने वाला माना जाता है।
  • अष्टमी के दिन नन्ही कन्याओं जिन्हे कंजक कहा जाता है की पूजा करना, उन्हें प्रेम पूर्वक भोजन करवाकर उन्हें उपहार देने से माँ दुर्गा की असीम कृपा मिलती है ।

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नक्षत्र (Nakshatra) – आद्रा 16.19 PM तक तत्पश्चात पुनर्वसु

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी –   आर्द्रा नक्षत्र के देवता रुद्र (शिव) और नक्षत्र के स्वामी राहु जी है ।

आर्द्रा नक्षत्र आकाश मंडल में छठवां नक्षत्र है। यह मिथुन राशि में आता है और राहु का नक्षत्र है। आर्द्रा नक्षत्र कई तारों का समूह न होकर केवल एक तारा है। इसका आकार हीरे अथवा वज्र अथवा आँसू की तरह है।

आद्रा नक्षत्र का आराध्य वृक्ष कृष्णागरू,काला तेंदू और नक्षत्र स्वभाव तीक्ष्ण माना गया है ।

आर्द्रा नक्षत्र आकाश मंडल में छठवां नक्षत्र है। यह मिथुन राशि में आता है और राहु का नक्षत्र है। आर्द्रा नक्षत्र कई तारों का समूह न होकर केवल एक तारा है। इसका आकार हीरे अथवा वज्र अथवा आँसू की तरह है।

आर्द्रा नक्षत्र का आराध्य वृक्ष कृष्णागरू,काला तेंदू और नक्षत्र स्वभाव तीक्ष्ण माना गया है ।

आर्द्रा नक्षत्र में जन्मे जातको पर राहु का प्रभाव रहता है अत: इन्हे राहु का उपाय अवश्य करना चाहिए । इन्हे अनैतिक कार्यो से सदैव दूर रहना चाहिए अन्यथा इन्हे अपमान अपयश का सामना करना पड़ सकता है ।

आर्द्रा नक्षत्र के पुरुष हंसमुख, जिम्मेदार, आकर्षक व्यक्तित्व वाले, नए नए खोजो वाले लेकिन चालाक और अपना काम निकलने वाले होते है। लेकिन यदि बुध और रा‍हु खराब हो तो जातक घमंडी, बुरे विचारों वाले, पराई स्त्री में आसक्त रहने वाले, दुखी स्वाभाव वाले भी होते हैं।

आर्द्रा नक्षत्र में पैदा हुई महिला बुद्विमान, व्यवहार कुशल और शांतिप्रिय होती हैं। यह खूब खर्चा करने वाली, लेकिन हमेशा मीन मेख निकालने वाली भी होती है।

समान्यता इनके माता-पिता में बहुत ही अनबन रहती है, अर्थात इन्हे घर में कलह देखना पड़ता है।

आर्द्रा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 2, 4, 7 और 9, भाग्यशाली रंग, लाल और बैंगनी,  भाग्यशाली दिन मंगलवार तथा गुरुवार का माना जाता है ।

आद्रा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातको को तथा सभी मनुष्यों को जिस दिन आर्द्रा नक्षत्र हो उस दिन ॐ रुद्राय नम: मन्त्र की एक माला का जप करना चाहिए, इससे आर्द्रा नक्षत्र के शुभ फल मिलते है ।  

आर्द्रा नक्षत्र के जातक के लिए भगवान शिव की आराधना करना शुभदायक होता है।  भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप करना चाहिए. सोमवार का व्रत एवं जाप इत्यादि करना उत्तम फल प्रदान करने वाला होता है। 



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आज नवरात्री के आठवें दिन, दुर्गा अष्टमी के दिन बहुत से भक्त गण नन्ही नन्ही कन्याओं जिन्हे कंजके भी कहते है उनकी पूजा करते है, उनके भक्ति भाव से अपने घर में बुलाकर उन्हें भोजन कराकर उन्हें उपहार देकर, उनसे आशीर्वाद लेते है ।

मान्यता है कि जो भी भक्त गण नवरात्रि में माँ दुर्गा की पूजा करते है, नवरात्री का ब्रत रखते है उन्हें नवरात्री की अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं का पूजन अवश्य ही करना चाहिए । नवरात्री में कन्या पूजन के बिना ब्रत पूर्ण नहीं माना जाता है ।

शास्त्रों के अनुसार माँ दुर्गा होम, जप और दान से इतनी प्रसन्न नहीं होतीं जितनी कन्या पूजन से प्रसन्न होती हैं। कन्या पूजन से सभी तरह के वास्तु दोष,विघ्न, भय और शत्रुओं का नाश होता है।

देवी पुराण में लिखा है कि, इन्द्र ने एक बार ब्रह्मा जी से देवी दुर्गा को प्रसन्न करने की विधि पूछी तो ब्रह्मा जी ने माँ दुर्गा को प्रसन्न करने की सर्वोत्तम विधि कन्या पूजन को ही बताया, कन्या पूजन से सभी तरह के वास्तु दोष,विघ्न, भय और शत्रुओं का नाश होता है।

नवरात्री की अष्टमी तथा नवमी के दिन कन्या पूजन में 9 कन्याओं का पूजन करना चाहिए, साथ ही एक छोटे बालक को भी साथ में पूज कर उसे भी भोजन करवाना चाहिए ।

नवरात्रि में कन्या पूजन में ध्यान रखे कि कन्याओ की उम्र दो वर्ष से कम और दस वर्ष से ज्यादा भी न हो ।

पूजी जाने वाली कन्याओं को देवी के शक्ति स्वरूप का प्रतीक मानकर उनको श्रद्धा से जीमाना चाहिए ।

नवरात्र में नौ कन्याओं को माता के नौ रूपों क्रमश: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी एवं सिद्धिदात्री का रूप मानकर उनकी पूजा का विधान है।

शास्त्रों के अनुसार नवरात्र में की गयी पूजा-पाठ, आराधना और कन्या पूजा कभी निष्फल नहीं होती भक्तो को उसका फल अवश्य ही मिलता है।

कन्या पूजन में सभी कन्याओं और एक बालक के पहले चरण धोकर, साफ कर के उन्हें साफ आसान पर बिठायें फिर उन सभी के मस्तक पर रोली का तिलक करके उनके हाथ में कलावा बांधें । फिर जो भी श्रद्धा पूर्वक बना हो उन्हें इन कन्याओं के आगे परोसे ।

इसके बाद कन्या पूजन के दिन जिस प्रशाद से मां दुर्गा को भोग लगाया हो उस प्रशाद को भोग के बाद सबसे पहले कन्याओं को ही खिलाना चाहिए।

कन्याओं के भोजन करने के उपरांत उन्हें अपनी सामर्थनुसार उपहार और दक्षिणा देकर उन सब के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लें, मन ही मन मे माँ का ध्यान करके हुए अपनी गलतियों, पापो के लिए क्षमा मांगते हुए अपनी मनोकामना भी कहे, और उन कंजको को अगले नवरात्री में फिर से अपने घर में आने का निमंत्रण दें ।

ऐसा करने से माँ की कृपा से सभी विघ्नो, रोगो, सभी दोषो का नाश होता है, निश्चय ही सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है ।

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योग :- शोभन 12.32 AM शुक्रवार 27 मार्च तक

योग के स्वामी, स्वभाव :-  शोभन योग के स्वामी बृहस्पति देव एवं स्वभाव श्रेष्ठ है ।

प्रथम करण :- बव 11.48 AM तक

करण के स्वामी, स्वभाव :-  बव करण के स्वामी इंद्र देव और स्वभाव सौम्य है ।

द्वितीय करण :- बालव 22.55 PM तक तत्पश्चात कौलव

करण के स्वामी, स्वभाव :-       बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।

ब्रह्म मुहूर्त : 4.45 AM से 5.31 AM तक

विजय मुहूर्त : 14.30 PM से 15.19 PM तक

गोधूलि मुहूर्त : 18.34 PM से 18.58 PM तक

अमृत काल : 06.50 PM से 08.21 PM तक

  • दिशाशूल (Dishashool)– बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – गुलिक 09:30 AM से 11 AM बजे तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)– दिन – 1:30 PM से 3:00 PM तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 06:18
  • सूर्यास्त – सायं 18.36
  • विशेष – अष्टमी को नारियल का सेवन नहीं करना चाहिए, अष्टमी को नारियल का सेवन करने से बुध्दि का नाश होता है  ।
  • शास्त्रों के अनुसार किसी भी पक्ष की नवमी तिथि में लौकी और कद्दू का सेवन नहीं करना चाहिए । 
  • पर्व त्यौहार– नवरात्री का आठवाँ दिन, दुर्गा अष्टमी, जय माँ महा गौरी
  • मुहूर्त (Muhurt) 

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“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

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