Shukrwar ka panchag, शुक्रवार का पंचांग, 11 सितम्बर 2026 का पंचांग,

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गुरुवार का पंचांग शनिवार का पंचांग

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  • Panchang, पंचाग, Panchang 2026 हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang, पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-

    1:- तिथि (Tithi)
    2:- वार (Day)
    3:- नक्षत्र (Nakshatra)
    4:- योग (Yog)
    5:- करण (Karan)


    पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है, नित्य पंचांग पढ़ने से कुंडली के ग्रहो के शुभ फल मिलने लगते है, इसीलिए भगवान श्रीराम भी नित्य पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।

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    11 सितम्बर 2026 का पंचांग, 11 September  2026 ka Panchang,

  • महालक्ष्मी मन्त्र : ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥

  • ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥

    मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।
  • कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
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आज का पंचांग, aaj ka panchang,

दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।

शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय

“श्री सूक्त”,“महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नामो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।

शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में जीवन में समस्त सुख 🎁 , ऐश्वर्य 🎉 की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन 💝 सुखमय होता है बड़ा भवन 🏬, विदेश यात्रा ✈️ के योग बनते है।

* विक्रम संवत् – 2083 वर्ष
* शक संवत – 1948 वर्ष
* कलि संवत – 5128 वर्ष
* कलयुग – 5128 वर्ष
* अयन – दक्षिणायन,
* ऋतु – वर्षा ऋतु,
* मास – भाद्रपद माह
* पक्ष – कृष्ण पक्ष
* चंद्र बल – मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, कुम्भ, मीन,

इस तरह से मनाएं जन्माष्टमी का पर्व भगवान श्री कृष्ण की बरसेगी असीम कृपा 


आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,
इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं ।
पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है, देवता प्रसन्न होते है ।

शुक्रवार को शुक्र देव की होरा :-

प्रात: 06.04 AM से 7.06 AM तक

दोपहर 01.20 PM से 2.22 PM तक

रात्रि 20.27 PM से 21.24 PM तक

दाहिने हाथ के अंगूठे से नीचे के हिस्से ( शुक्र का स्थान ) और अंगूठे पर थोड़ा सा इत्र लगाकर, ( इत्र ना मिले तो उसके बिना भी कर सकते है) बाएं हाथ के अंगूठे से उस हिस्से को शुक्र की होरा में “ॐ शुक्राये नम:” या

ॐ द्रांम द्रींम द्रौंम स: शुक्राय नम:।’ मंत्र का अधिक से अधिक जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य )I

यह उपाय आप कोई भी काम करते हुए चुपचाप कर सकते है इसके लिए किसी भी विधि विधान की कोई आवश्यकता नहीं है I

सुख समृद्धि 💰, ऐश्वर्य 💎, बड़ा भवन 🏬, विदेश यात्रा ✈️, प्रेम, रोमांस 💞, सुखी दाम्पत्य जीवन 👩‍❤️‍👨 के लिए शुक्रवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

शुक्रवार के दिन शुक्र की होरा में शुक्रदेव देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में शुक ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो 🎉 की प्राप्ति होती है ।

शुक्र देव के मन्त्र :-

ॐ शुं शुक्राय नमः।। अथवा

” ॐ द्राम द्रीम द्रौम सः शुक्राय नमः “।।


🕉️ शुक्रवार को अवश्य लें 10 महाविद्याओं के नाम 🕉️

  • तिथि, (Tithi): अष्टमी तिथि 12.13 AM शनिवार 5 सितम्बर तक, तिथि, (Tithi) :-,
  • तिथि के स्वामी – अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी है I

आज भाद्रपद माह की अमावस्या है । भाद्रपद मास की अमावस्या हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण अमावस्याओं में मानी जाती है। इसे भादों अमावस्या, पिठौरी अमावस्या या कुशोत्पाटिनी अमावस्या आदि नामों से भी जाना जाता है।

कुश (दर्भ) को वैदिक कर्मकांड में अत्यंत पवित्र माना गया है। यज्ञ, तर्पण, श्राद्ध और अनेक धार्मिक अनुष्ठानों में कुश का प्रयोग होता है। शास्त्रों में इस दिन विधिपूर्वक कुश प्राप्त करने का विशेष महत्व बताया गया है।

इसलिए यह अमावस्या आने वाले पितृपक्ष और धार्मिक कर्मों की तैयारी से भी जुड़ी हुई है क्योंकि इसके बाद अगली अमावस्या अश्विन माह की अमावस्या है जो पितृ पक्ष में आती है और जिसे सर्व पितृ अमावस्या भी कहते है।

इस वर्ष भाद्रपद कृष्ण अमावस्या की तिथि गुरुवार 10 सितंबर 2026 को प्रात: 10:33 बजे शुरू होकर शुक्रवार 11 सितंबर 2026 को सुबह लगभग 8:56 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर भाद्रपद अमावस्या शुक्रवार को मानी जाएगी ।

हिंदू पंचांग में अमावस्या वह तिथि है जब चंद्रमा दिखाई नहीं देता। धार्मिक दृष्टि से इसे अंतर्मुखी साधना, पितरों के स्मरण और पुराने कर्मों के परिष्कार के लिए विशेष समय माना गया है।

धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु तथा विभिन्न पुराणिक परंपराओं में अमावस्या पर स्नान, तर्पण, श्राद्ध / पितृकर्म और दान का विशेष महत्व बताया गया है। भाद्रपद अमावस्या विशेष रूप से पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और धार्मिक संकल्प लेने के लिए शुभ मानी जाती है।

अमावस्या तिथि के स्वामी पितृ देव जी और पितरों का वास पीपल के पेड़ पर माना गया है। अमावस्या के दिन सुबह के समय लोहे के बर्तन में, दूध, पानी, काले तिल, शहद एवं जौ मिला कर समस्त सामग्री पीपल की जड़ में अर्पित करके पीपल की 7 परिक्रमा करें, तथा इस दौरान “ॐ सर्व पितृ देवताभ्यो नमः” मंत्र का जाप भी लगातार करते रहें । इस उपाय को करने से पितृ प्रसन्न होते है, उनका आशीर्वाद मिलता है ।

अमावस्या तिथि को पितरों के तर्पण, दान के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है । इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करके भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य देकर अपने पितरों की शांति के लिए उनका तर्पण करते हैं ।

अमावास्यां पितॄणां तु
श्राद्धं कुर्याद् विचक्षणः।

भावार्थ: बुद्धिमान व्यक्ति अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त श्राद्ध करे।

इस दिन प्रात: जल में काले तिल और थोड़ा कुश डालकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल अर्पित करें और मन में कहें:

“ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः।”

इसके बाद अपने ज्ञात-अज्ञात पितरों के लिए शांति और सद्गति की प्रार्थना करें।

महाभारत, आदिपर्व में अग्नि के माध्यम से देवताओं और पितरों को हवि पहुँचने की बात भी आती है:

अमावास्यां च पितरः पौर्णमास्यां च देवताः।
… भुञ्जते च हुतं हविः॥

अर्थात् अमावस्या पर पितरों के लिए और पूर्णिमा पर देवताओं के लिए आहुति का संबंध बताया गया है।

आज पितरों की कृपा प्राप्त करने के लिए घर पर ब्राह्मण को भोजन अवश्य ही कराएं एवं उसे यथा शक्ति दान – दक्षिणा प्रदान करें ।

अमावस्या के दिन घी, नमक, चावल, चीनी, आटा, सत्तू, काले तिल, अनाज, वस्त्र, आदि दक्षिणा के साथ योग्य ब्राह्मण को दान में अवश्य ही दें , ऐसा करने से पितरो का आशीर्वाद मिलता है ।

अमावस्या के दिन घर पर खीर अवश्य बनायें फिर उसमें थोड़ी सी खीर दोने पर निकाल कर पित्रों के निमित पीपल पर रख आएं ।

हर अमावस्या को गहरे गड्ढे या कुएं में एक चम्मच दूध डालें इससे कार्यों में बाधाओं का निवारण होता है ।

इसके अतिरिक्त अमावस्या को आजीवन जौ दूध में धोकर बहाएं, आपका भाग्य सदैव आपका साथ देगा ।

अमावस्या पर तुलसी के पत्ते या बिल्व पत्र बिलकुल भी नहीं तोडऩा चाहिए। अमावस्या पर देवी-देवताओं को तुलसी के पत्ते और शिवलिंग पर बिल्व पत्र चढ़ाने के लिए उन्हें एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।

नक्षत्र ( Nakshatra ) : पूर्वा फाल्गुनी 13.18 PM तक तत्पश्चात उत्तरा फाल्गुनी

नक्षत्र के स्वामी :–            पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के देवता भग (धन व ऐश्वर्य के देवता) और स्वामी शुक्र देव जी है ।

आकाश मंडल में पूर्वा फाल्गुनी को 11वां नक्षत्र माना जाता है। इस नक्षत्र का प्रतीक बिस्तर के सामने के दो पैर हैं जो आराम, अच्छे भाग्य का भी प्रतीक है। 

यह नक्षत्र सुख, धन, कामुक प्रसन्नता, प्रेम और मनोरंजन को दर्शाता हैं। इस नक्षत्र काआराध्य वृक्ष : पलाश तथा स्वाभाव शुभ माना गया है। पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र सितारे का लिंग महिला है।

 इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक पर जीवनभर सूर्य और शुक्र का प्रभाव बना रहता है।

पूर्वा फाल्गुनी में जन्मा जातक सुन्दर, विलासी, स्त्रियों का प्रिय, साहसी, चतुर, वाकपटु, खुले दिल वाला और घूमने फिरने का शौक़ीन होता है, इन्हे स्त्री और धन-सं‍पत्ति का पूर्ण सुख मिलता है।

लेकिन यदि सूर्य और शुक्र शुभ नहीं है तो जातक बहुत कामुक, विलासी, धूर्त, घमंडी, जुए – सट्टे का लती और क्रोधी हो सकता है।

इस नक्षत्र में जन्म लेने वाली स्रियाँ  धार्मिक, दयालु, आकर्षक, मिलनसार, आसानी से दूसरो को  प्रभावित करने वाली, वैसी प्रवर्ति की होती है। यह आसानी से  जीवन में सफलता प्राप्त कर लेती हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 9, भाग्यशाली रंग, चाकलेटी, हल्का भूरा, भाग्यशाली दिन शुक्रवार और रविवार माना जाता है ।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ भगाय नमः”। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।

संकटो से रक्षा के लिए इस नक्षत्र के जातको को नित्य भगवान शंकर की आराधना करनी चाहिए । पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे जातको को नित्य तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन माँ लक्ष्मी जी की आराधना से कभी भी धन की कमी नहीं होती है ।

योग(Yog) :- साध्य 17.02 PM तक तत्पश्चात शुभ

योग के स्वामी, स्वभाव :-    साध्य योग की स्वामी देवी सावित्री जी और स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है ।

प्रथम करण : – नाग 08.56 AM तक

करण के स्वामी, स्वभाव :-     नाग करण के स्वामी नागदेव और स्वभाव क्रूर है ।

द्वितीय करण :- किस्तुघ्न 20.17 PM तक तत्पश्चात बव

करण के स्वामी, स्वभाव :-   किस्तुघ्न करण के स्वामी मरुत और स्वभाव क्रूर है ।

  • दिशाशूल (Dishashool)- शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है ।

  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.32 AM से 5.18 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.22 PM से 15.12 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.31 PM से 18.54 PM तक
  • अमृत काल : 07.05 AM से 20.37 AM तक
  • अग्नि वास : आकाश में 08.56 AM तक तत्पश्चात पृथ्वी पर


    अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।

    अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।

  • शिव वास : मां गौरी के साथ 08.56 AM तक तत्पश्चात शमशान में


    जब भगवान शंकर  गौरी मइय्या के साथ होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शंकर जी के देवी गौरी के साथ रहने के समय किये गए  रूद्रअभिषेक से घर कारोबार में सुख-समृद्धि आती है, स्थाई लक्ष्मी का वास होता है ।

    शिव वास    श्मशान में –  जब भगवान शिव का श्मशान में वास होता हैं, तो रुद्र अभिषेक आदि  करना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ जी का  श्मशान में वास के दौरान अभिषेक करने से मृत्यु समान  परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।


    दिशा शूल : शास्त्रों के अनुसार शुक्रवार को पश्चिम दिशा में दिशा शूल होता है, यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।

  • गुलिक काल : – शुक्रवार का गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)– दिन – 10:30 AM से 12:00 PM तक ।
  • सूर्योदय – प्रातः 06:04
  • सूर्यास्त – सायं : 18:31
  • विशेष – अमावस्या के दिन तुलसी के पत्ते, बिल्व पत्र या किसी भी तरफ के फूल पत्तो को बिलकुल भी नहीं तोडऩा चाहिए।
  • अमावस्या,  श्राद्ध और व्रत के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना, सहवास करना निषिद्ध है ।
  • पर्व त्यौहार– भाद्रपद माह की अमावस्या तिथि
  • मुहूर्त (Muhurt) –

“हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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Guruwar Ka Panchag, गुरुवार का पंचांग, 10 सितम्बर 2026 का पंचांग,

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बृहस्पतिवार का पंचांग, Brahaspativar ka panchang,

  • Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।

* शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
* वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
* नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
* योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
* करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।

इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए । नित्य पंचाग पढ़ने से भाग्य चमकने लगता है ।

जानिए आज गुरुवार का पंचांग, Guruwar Ka Panchag,


आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है, आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,

इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है ।

मंगल श्री विष्णु मंत्र :-

मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥

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गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag,

10 सितम्बर 2026 का पंचांग, 10 September 2026 Ka Panchang,


  • गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 10 सितम्बर 2026 का पंचांग,
  • दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
  • गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए ।

    गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
  • गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
    इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
  • गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।
    इस उपाय को करने से कार्यो में अड़चने दूर होती है, भाग्य चमकने लगता है, बृहस्पति देव की कृपा मिलती है।

यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।
और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।

गुरुवार को विष्णु जी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, गुरुवार को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ परम फलदाई है

जीवन में कैसी भी हो समस्या जन्माष्टमी के दिन अवश्य करें ये अचूक उपाय, 

  • *विक्रम संवत् – 2083,
  • * शक संवत – 1948,
    *कलि संवत- 5128,
    * अयन – दक्षियायणं,
    * ऋतु – वर्षा ऋतु,
    * मास – भाद्रपद माह
    * पक्ष – कृष्ण पक्ष
    *चंद्र बल – मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, कुम्भ, मीन,

गुरुवार को बृहस्पति देव की होरा :-

प्रात: 06.03 AM से 7.06 AM तक

दोपहर 01.20 PM से 2.23 PM तक

रात्रि 20.28 PM से 21.25 PM तक

इस तरह से मनाएं जन्माष्टमी का पर्व भगवान श्री कृष्ण जी की बरसेगी असीम कृपा 

आज गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा के समय दाहिने हाथ की तर्जनी ऊंगली ( अंगूठे के बगल वाली उंगली ) के नीचे गुरु पर्वत और उस पूरी ऊंगली पर बृहस्पति देव के मंत्र का जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य ) I

गुरुवार को बृहस्पति की होरा में अधिक से अधिक बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करें । शिक्षा, मान – सम्मान, व्यापार, कारोबार, नए कार्यो के प्रारम्भ के लिए गुरुवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा में बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

बृहस्पति देव के मन्त्र

ॐ बृं बृहस्पतये नमः।। अथवा

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः।।


अवश्य पढ़ें :- जानिए कैसा हो खिड़कियों का वास्तु , जिससे जिससे वहाँ के निवासियों को मिले श्रेष्ठ लाभ


तिथि (Tithi) :- चतुर्दशी 10.33 AM तक तत्पश्चात अमावस्या,

तिथि का स्वामी – चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी और अमावस्या तिथि के स्वामी पितृ देव जी है I

चतुर्दशी तिथि को चौदस भी कहते हैं। चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं। अतः प्रत्येक मास की चतुर्दशी विशेषकर कृष्णपक्ष की चतुर्दशी के दिन शिव जी की पूजा, अर्चना एवं रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं, भक्तो के सभी संकट दूर होते है ।

प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी मासिक शिवरात्रि कहलाती है । चतुर्दशी तिथि / मासिक शिवरात्रि में रात्रि में शिव मंत्र या जागरण करना बहुत उत्तम रहता है ।

स्कन्द पुराण में भी चतुर्दशी पर उपवास, रात्रि-जागरण और शिवपूजन का विधान मिलता है—

“चतुर्दश्यां निराहारः स्थितो भूत्वा शुचिव्रतः ।
पूजयेत्परया भक्त्या रात्रौ जागरणे शिवम् ॥”

अर्थात् चतुर्दशी को शुद्ध व्रत का पालन करते हुए निराहार रहकर रात्रि में जागरण और भक्ति से शिव की पूजा करने का बहुत महत्व है।

चतुर्दशी तिथि में जन्मा जातक समान्यता धर्मात्मा, धनवान, यशस्वी, साहसी, परिश्रमी तथा बड़ो का आदर सत्कार करने वाला होता है। चतुर्दशी तिथि में जन्मे लोगों को क्रोध बहुत आता है। इस तिथि में जन्मे जातक साहसी और परिश्रमी होते हैं। इन लोगों को जीवन में बहुत संघर्ष करना पड़ता है तभी इन्हे सफलता हाथ लगती है।

चतुर्दशी तिथि में जन्मे जातकों को नित्य भगवान शंकर की पूजा अवश्य करनी चाहिए। चतुर्दशी तिथि को समस्त संकटो से मुक्ति के लिए महामृत्युंजय मंत्र – ‘ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात्” का जाप करना अत्यंत फलदाई रहता है ।

शास्त्रों में कई चतुर्दशी तिथियों का बहुत महत्त्व बताया गया है। ये है महा शिवरात्रि, नरसिंह चतुर्दशी, अनंत चतुर्दशी, नरक चतुर्दशी और बैकुंठ चतुर्दशी । वैसे तो चतुर्दशी तिथि भगवान भोलेनाथ जी से जोड़ा जाता है लेकिन चतुर्दशी तिथि को केवल भगवान शंकर जी की ही आराधना की जाती है यह कहना सही नहीं है क्योंकि………

महा शिवरात्रि :- फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भगवान शंकर जी की आराधना परम फलदाई है । इस महाशिवरात्रि के दिन ब्रत रखने और भोलेनाथ जी की आराधना से जन्म जन्मांतर के पाप भी काट जाते है ।

नरसिंह चतुर्दशी :– वैशाख शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी, नरसिंह चतुर्दशी, भगवान नरसिंह से जुड़ी है।

अनंत चतुर्दशी : भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी, अनंत चतुर्दशी को भगवान श्री विष्णु के अनंत स्वरूप की उपासना की जाती है।

नरक चतुर्दशी :- कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी, नरक चतुर्दशी के दिन भगवान श्री कृष्ण जी ने नरकासुर नामक राक्षस का वध करके बंधक बनाई गई हजारों महिलाओं को मुक्त कराया था। इसलिए इस दिन भगवान श्री कृष्ण जी की पूजा की जाती है । नरक चतुर्दशी के दिन यमराज जी की पूजा का भी विधान है, नरक की यातना से बचने और पितरो के उद्दार के लिए इस दिन 14 दीपक भी जलाये जाते है ।

वैकुण्ठ चतुर्दशी :- कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी, वैकुण्ठ चतुर्दशी को भगवान शिव और श्री विष्णु दोनों की उपासना की विशिष्ट परंपरा है।

किसी भी पक्ष की चतुर्दशी में शुभ कार्य करना वर्जित हैं, इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय की शुरुआत, बड़ी खरीददारी, मांगलिक कार्य, यात्रा आदि से बचना चाहिए, क्योंकि इस तिथि को क्रूरा कहा जाता है, चतुर्दशी तिथि रिक्ता तिथियों की श्रेणी में आती है।

लेकिन परंपरागत मुहूर्त दृष्टि से चतुर्दशी का उपयोग विशेष रूप से उन कार्यों में किया जा सकता है जिनमें समापन, बाधा-निवारण या दृढ़ता की आवश्यकता हो।

जैसे— पुराने विवाद को समाप्त करना, अनावश्यक वस्तुओं / आदतों का त्याग, शत्रु या बाधा से संबंधित उपाय, नकारात्मकता दूर करने की साधना, शिव आराधना आदि

शास्त्रों में चतुर्दशी को हिंसा, अनैतिक कार्य, मांस-मदिरा का सेवन, तिल का तेल, लाल रंग का साग, काँसे के बर्तन में भोजन एवं शारीरिक संबंध बनाना मना किया गया है ।

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नक्षत्र (Nakshatra) – मघा 14.04 PM तक तत्पश्चात पूर्वा फाल्गुनी

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी –        मघा नक्षत्र के देवता पितर देव और नक्षत्र स्वामी केतु जी है ।

 मघा का अर्थ होता है महान। मघा नक्षत्र का आकाश में 10वां स्थान है। मघा नक्षत्र के चारों चरण सिंह राशि में हीआते हैं।  

मघा नक्षत्र को सिंहासन द्वारा दर्शाया गया है जो शक्ति, उच्च प्रतिष्ठा, गुणों का प्रतीक है। मघा नक्षत्र के जातको पर जीवन भर केतु और सूर्य का प्रभाव रहता है।  

मघा नक्षत्र का आराध्य वृक्ष: बरगद एवं नक्षत्र का स्वभाव उग्र, क्रूर माना गया है।

मघा नक्षत्र में जन्मे जातक बुद्धिमान, स्पष्टवादी, दयालु, भरोसेमंद, साहसी, धीरे बोलने वाले, बड़ो का सम्मान करने वाले और अपनी स्त्री के वश में रहने वाले होते है। इन्हे भूमि, भवन और माता का पूर्ण सुख मिलता है।

लेकिन यदि चन्द्रमा, केतु और सूर्य खराब स्थिति में हैं तो जातक क्रोधी, शक्की, भावुक, बहुत अधिक चिंता करने वाला होता है।

इस नक्षत्र में जन्म लेने वाली स्रियाँ मददगार, परोपकारी, विलासी जीवन पर खर्च करने वाली लेकिन विवादों में शामिल होने वाली जल्द ही आवेश में आ जाने वाली होती है ।

मघा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 7 और 10, भाग्यशाली रंग, क्रीम, लाल , भाग्यशाली दिन शनिवार और मंगलवार का माना जाता है ।

मघा नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ पितृभ्यो नमः”। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।

मघा नक्षत्र के जातको को हर अमावस्या को पितरो के निमित ब्राह्मण भोजन और दान पुण्य करना चाहिए इससे पितरो के आशीर्वाद से जीवन से अस्थिरताएँ दूर होती है ।

इस नक्षत्र के जातको को भगवान शिव और माँ काली की आराधना भी श्रेष्ठ फलदाई कही गयी है ।

मघा नक्षत्र का पेड़ बरगद है, अतः मघा नक्षत्र में बरगद के पेड़ की पूजा करनी चाहिए। इस नक्षत्र के जातको को बरगद के पेड़ के एक पत्ते पर हल्दी से स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर उसे अपने घर के मंदिर में रखकर अगले दिन उस पत्ते को बहते पानी में प्रवाहित करना चाहिए ।


कैसा भी सिर दर्द हो उसे करें तुरंत छूमंतर, जानिए सिर दर्द के अचूक पा

योग :- सिद्ध 19.17 PM तक तत्पश्चात साध्य

योग के स्वामी, स्वभाव :-    सिद्ध योग के स्वामी भगवान कार्तिकेय जी और स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है ।

प्रथम करण :- शकुनि 10.33 AM तक

करण के स्वामी, स्वभाव :-   शकुनि करण की स्वामी माँ काली और स्वभाव क्रूर है ।

द्वितीय करण :- चतुष्पाद 21.41 PM तत्पश्चात नाग

करण के स्वामी, स्वभाव :-   चतुष्पाद करण के स्वामी रूद्र और स्वभाव क्रूर है ।

ब्रह्म मुहूर्त : 4.31 AM से 5.17 AM तक

विजय मुहूर्त : 14.23 PM से 15.13 PM तक

गोधूलि मुहूर्त : 18.32 PM से 18.55 PM तक

अमृत काल : 11.47 AM से 13.18 PM तक

राशिनुसार इस तरह से  बंधवाएं राखी, कुंडली के ग्रहो के मिलेंगे शुभ फल


अग्नि वास : पृथ्वी पर

अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।
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शिव वास : शमशान में 10.33 AM तक तत्पश्चात माँ गौरी के साथ


शिव वास    श्मशान में –  जब भगवान शिव का श्मशान में वास होता हैं, तो रुद्र अभिषेक आदि  करना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ जी का  श्मशान में वास के दौरान अभिषेक करने से मृत्यु समान  परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

जब भगवान शंकर  गौरी मइय्या के साथ होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शंकर जी के देवी गौरी के साथ रहने के समय किये गए  रूद्रअभिषेक से घर कारोबार में सुख-समृद्धि आती है, स्थाई लक्ष्मी का वास होता है ।

  • दिशाशूल (Dishashool)– बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – गुलिक 09:30 AM से 11 AM बजे तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)– दिन – 1:30 PM से 3:00 PM तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 06:03
  • सूर्यास्त – सायं 18.32

विशेषशास्त्रों में चतुर्दशी को हिंसा, अनैतिक कार्य, मांस-मदिरा का सेवन, तिल का तेल, लाल रंग का साग, काँसे के बर्तन में भोजन एवं शारीरिक संबंध बनाना मना किया गया है ।

  • पर्व त्यौहार
  • मुहूर्त (Muhurt)

अवश्य पढ़ें :- अगर गिरते हो बाल तो ना होएं परेशान तुरंत करें ये उपाय, जानिए बालो का गिरना कैसे रोकें,

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

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बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang, 9 सितम्बर 2026 का पंचांग,

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पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi) 2:- वार (Day) 3:- नक्षत्र (Nakshatra) 4:- योग (Yog) 5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए बुधवार का पंचांग, Budhvar Ka Panchang, आज का पंचांग, aaj ka panchang,


बुधवार का पंचांग (Budhwar Ka Panchang)


9 सितम्बर 2026 का पंचांग, ( Panchang ), 9 September 2026 ka Panchang,

गणेश गायत्री मंत्र :
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।

।। आज का दिन मंगलमय हो ।।

* दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।

जीवन में कोई भी मनोकामना हो हनुमान जी के जन्मोत्सव के दिन अवश्य ही करें ये उपाय,


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आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
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बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

इस उपाय से शरीर रहेगा निरोगी, शक्ति रहेगी भरपूर, बुढ़ापा पास भी नहीं आएगा, जानिए रोगनाशक दिव्य आहार,

* बुधवार को सभी ग्रहो के राजकुमार बुध देव की आराधना करने से ज्ञान मिलता है, वाकपटुता में प्रवीणता आती है, धन लाभ होता है ।

बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाने तथा रात को सोते समय फिटकरी से दाँत साफ करने से आर्थिक पक्ष मजबूत होता है ।

जानिए बजरंग बलि के परिवार के बारे में, अवश्य जानिए हनुमान जी के माता पिता और उनके भाइयों के बारे में,

*विक्रम संवत् – 2083,
*शक संवत – 1948
*कलि संवत – 5128
*अयन – दक्षिणयायन
*ऋतु – वर्षा ऋतु
*मास – भाद्रपद माह
*पक्ष – कृष्ण पक्ष
*चंद्र बल – मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, कुम्भ, मीन,

बुधवार को बुध की होरा :-

प्रात: 06.03 AM से 7.05 AM तक

दोपहर 01.21 PM से 2.23 PM तक

रात्रि 20.29 PM से 21.26 PM तक

बुधवार को बुध की होरा में हाथ की सबसे छोटी उंगली और बुध पर्वत को हल्के हल्के रगड़ते हुए अधिक से अधिक बुध देव के मन्त्र का जाप करें ।

ज्योतिष, पढ़ाई, लिखाई, सीखने, वाकपटुता, अपना प्रभाव डालने और व्यापार में सफलता के लिए बुध की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

बुधवार के दिन बुध की होरा में बुध देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

अवश्य पढ़ें :- पूरे वर्ष निरोगी काया के लिए सर्दियों में सेवन करें ये आहार,

आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,भारत की लगभग 150 करोड़ की आबादी में 0.001 % अर्थात लगभग 15 हज़ार आदमी ही नित्य पंचांग पढ़ पाते है।

आप पर ईश्वर की असीम कृपा है जो आपको नित्य पंचांग पढ़ने का, अपने भाग्य को प्रबल करने का, पापो के प्रायश्चित करने का अवसर मिल रहा है,

दुनिया के सारे उपाय एक तरफ है, और नित्य पंचाग पढ़ने का पुण्य उससे भी कहीं अधिक है,

इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है ।

बुध देव के मन्त्र

“ॐ बुं बुधाय नमः” अथवा

“ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।।”

अवश्य जानिए कैसे और किससे हुआ हनुमान जी का विवाह, इनकी पुत्री है हनुमान जी की पत्नी,

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  • तिथि (Tithi) – त्रियोदशी 12.30 PM तक तत्पश्चात चतुर्दशी तिथि,
  • तिथि के स्वामी – त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी और चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी है । 

त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी  हैं। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते है । उन्हें सदैव युवा और आकर्षक रहने का वरदान है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार कामदेव, भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के पुत्र माने गए  हैं। उनका विवाह प्रेम और आकर्षण की देवी रति से हुआ है।

कामदेव के हाथ में धनुष है जिसका एक कोना स्थिरता और दूसरा कोना चंचलता का प्रतीक है। कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है। कामदेव जब कमान से अपना तीर छोड़ते हैं, तो उसमें कोई आवाज नहीं होती है।

कामदेव के बाण की यह विशेष बात है कि इनसे घायल होने के बाद भी व्यक्ति आनंद का सुखद अहसास महसूस करता है।

कामदेव का सम्बन्ध शुभ, प्रेम, सुख, सौंदर्य, यौवन, आनंद और कामेच्छा से है ।

कामदेव का वाहन हाथी को  माना गया है। शास्त्रों में कुछ जगह कामदेव का वाहन तोते को भी बताया गया है ।

त्रियोदशी के दिन मीठे वचन बोलने, प्रसन्न रहने से जातक रूपवान होता है, उसे अपने प्रेम में सफलता एवं इच्छित एवं योग्य जीवनसाथी प्राप्त होता है।

त्रियोदशी को कामदेव जी का स्मरण करने से वैवाहिक सुख भी पूर्णरूप से मिलता है।  +

अपने रूप और आकर्षण शक्ति को बढ़ाने के लिए  त्रियोदशी को कामदेव जी का मन्त्र ‘ॐ कामदेवाय विद्महे, रति प्रियायै धीमहि, तन्नो अनंग प्रचोदयात्’ की एक माला  जाप अवश्य करें ।

इस तिथि का खास नाम जयकारा भी है। समान्यता त्रयोदशी तिथि यात्रा एवं शुभ कार्यो के लिए श्रेष्ठ होती है।

त्रियोदशी को बैगन नहीं खाना चाहिए , त्रियोदशी को बैगन खाने से पुत्र को कष्ट मिलता है।

जीवन में कैसी भी हो समस्या रक्षाबंधन के दिन अवश्य करें ये अचूक उपाय

इस तरह से मनाएं जन्माष्टमी का पर्व जीवन में लग जायेगा सुखो का अम्बार 

आज भाद्रपद माह की शिवरात्रि है । प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है । मासिक शिवरात्रि तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं ।

अतः प्रत्येक मास की मासिक चतुर्दशी के दिन शिव जी की पूजा, अर्चना एवं रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं, भक्तो के सभी संकट दूर होते है ।

चतुर्दशी तिथि / मासिक शिवरात्रि में रात्रि में शिव मंत्र या जागरण करना बहुत उत्तम रहता है ।

किसी भी पक्ष की चतुर्दशी में शुभ कार्य करना वर्जित हैं क्योंकि इसे क्रूरा कहा जाता है, चतुर्दशी तिथि रिक्ता तिथियों की श्रेणी में आती है।

चतुर्दशी तिथि में जन्मा जातक समान्यता धर्मात्मा, धनवान, यशस्वी, साहसी, परिश्रमी तथा बड़ो का आदर सत्कार करने वाला होता है।

चतुर्दशी तिथि में जन्मे लोगों को क्रोध बहुत आता है। इस तिथि में जन्मे जातक साहसी और परिश्रमी होते हैं। इन लोगों को जीवन में बहुत संघर्ष करना पड़ता है तभी इन्हे सफलता हाथ लगती है।

चतुर्दशी तिथि में जन्मे जातकों को नित्य भगवान शंकर की पूजा अवश्य करनी चाहिए।

चतुर्दशी तिथि को समस्त संकटो से मुक्ति के लिए महामृत्युंजय मंत्र – ‘ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात्” का जाप करना अत्यंत फलदाई रहता है ।

शास्त्रों में चतुर्दशी को हिंसा, अनैतिक कार्य, मांस-मदिरा का सेवन, तिल का तेल, लाल रंग का साग, काँसे के बर्तन में भोजन एवं शारीरिक संबंध बनाना मना किया गया है ।

शास्त्रों में 3 चतुर्दशी तिथियों का बहुत महत्त्व बताया गया है । ये है अनंत चतुर्दशी, नरक चतुर्दशी और बैकुंठ चतुर्दशी ।

नक्षत्र (Nakshatra) – अश्लेषा 15.14 PM तक तत्पश्चात मघा

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी-      अश्लेषा नक्षत्र के देवता सर्प देव एवं नक्षत्र के स्वामी बुध देव जी है ।



अश्लेषा नक्षत्र का स्थान आकाश मंडल के नक्षत्रो में  9 वां है। यह कर्क राशि के अंतर्गत आता है। अश्लेशा नक्षत्र के देवता सर्प देव एवं नक्षत्र के स्वामी बुध देव जी है।

अश्लेषा नक्षत्र को गण्ड मूल नक्षत्र कहते है। अश्लेषा नक्षत्र में चंद्रमा की ऊर्जा और सर्प देवता की ताकत है। यह एक कुंडलित सर्प जैसा दिखता है जो कुंडलिनी ऊर्जा का प्रतीक है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वालों पर जीवनभर बुध व चन्द्र का प्रभाव पड़ता है। 

अश्लेषा नक्षत्र सितारा का लिंग महिला है। अश्लेषा नक्षत्र का आराध्य वृक्ष: नागकेसर, तथा स्वाभाव तीक्ष्ण, शोक वाला होता है ।

अश्लेषा नक्षत्र में जन्मे जातक हंसमुख, वाकपटु, साहित्य तथा संगीत प्रेमी, नेतृत्वशील, यशवान और सफल व्यापारी होते है इन्हे पूर्ण पारिवारिक सुख प्राप्त होता है।

लेकिन कुंडली में बुध और चन्द्र खराब स्थिति में होने पर जातक चालाक, क्रोधी- क्रूर स्वभाव, बेकार के कामो में धन को गंवाने वाला, कामुक विचारो वाला,आलसी, स्वार्थी, निराशवादी,  कभी-कभार चोरी करने वाला भी होता है । 

अश्लेशा नक्षत्र गंड नक्षत्र है अतः व्यक्ति की आयु कम होती है, इसलिए अश्लेशा नक्षत्र का पूर्ण विधि विधान से शांति करवाना आवश्यक होता है. ।

अश्लेषा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 5 और 9, भाग्यशाली रंग काला – लाल, भाग्यशाली दिन बुधवार होता है । इन्हे नागकेसर के पौधे की सेवा करनी चाहिए तथा घर पर नाग केसर को रखना चाहिए ।

अश्लेषा नक्षत्र में जन्मे जातको को नित्य तथा अन्य सभी को आज  “ॐ सर्पेभ्यो नमःl ” मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करना चाहिए।

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  • योग (Yog) – शिव 21.52 PM तक तत्पश्चात सिद्ध
  • योग के स्वामी, स्वभाव :-    शिव योग के स्वामी मित्र देव एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है   ।
  • प्रथम करण : – वणिज 12.30 PM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :- वणिज करण की स्वामी लक्ष्मी देवी और स्वभाव सौम्य है ।
  • द्वितीय करण : – विष्टि 23.29 PM तक तत्पश्चात शकुनि
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-    विष्टि करण के स्वामी यम और स्वभाव क्रूर है ।

  • ब्रह्म मुहूर्त : 04.31 AM से 5.17 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.23 PM से 15.13 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.34 PM से 18.57 PM तक
  • अमृत काल : 13.43 PM से 15.14 PM तक

  • अग्निवास : आकाश में 12.30 PM तक तत्पश्चात पाताल में


    अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।

     जब पाताल में अग्नि वास है तो वह हवन से सम्बन्धित अनुष्ठानों के लिये शुभ नहीं मानी जाती है, यह अशुभ मानी गई है । अग्नि के पाताल  वास के दौरान किये जाने वाले हवन  सम्बन्धित अनुष्ठानों व्यक्ति को आर्थिक नुकसान करना पड़ता है उसका  धन नष्ट हो सकता है।

  • शिव वास : भोजन में 12.30 PM तक तत्पश्चात शमशान में


    शिव वास  :   भोजन में   जब भगवान भोलेनाथ जी भोजन कर रहे हों या ध्यान में मग्न हों तो उस समय रुद्र अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। भगवान शंकर जी के रात्रि भोजन अथवा ध्यान करते समय रुद्रभिषेक करने से परेशानी का सामना करना पड़ता है।

    शिव वास    श्मशान में –  जब भगवान शिव का श्मशान में वास होता हैं, तो रुद्र अभिषेक आदि  करना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ जी का  श्मशान में वास के दौरान अभिषेक करने से मृत्यु समान  परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।


    इन उपायों से धन संपत्ति खींची चली आएगी, किसी चीज़ का नहीं रहेगा अभाव
  • दिशाशूल (Dishashool)- बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।

    इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – बुधवार का गुलिक काल 10:30 AM से 12 PM बजे तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal) : – बुधवार का राहुकाल दिन 12:00 PM से 1:30 PM तक ।
  • सूर्योदय – प्रातः 6.03 AM
  • सूर्यास्त – सायं 18.34 PM
  • विशेष – त्रियोदशी को बैगन नहीं खाना चाहिए , त्रियोदशी को बैगन खाने से पुत्र को कष्ट मिलता है ।
  • चतुर्दशी, श्राद्ध और व्रत के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना, सहवास करना निषिद्ध है।
  • मुहूर्त :-
  • पर्व त्यौहारमासिक शिवरात्रि

सबसे ज्यादा पढ़ी गयी :- ऐसा होगा घर के पूजा घर का वास्तु तो पूरी होंगी सभी मनोकमनाएं, जानिए पूजा घर के वास्तु टिप्स,

हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

मित्रो हम इस साईट के माध्यम से वर्ष 2010 से निरंतर आप लोगो के साथ जुड़े है। आप भारत या विश्व के किसी भी स्थान पर रहते है, अपने धर्म अपनी संस्कृति को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए https://lookmybiz.in/आचार्य-मुक्ति-नारायण-पाण्डेय-अध्यात्म--ज्योतिष-परामर्श-केंद्र

आचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय अध्यात्म ज्योतिष परामर्श केंद्र || Our Digital Visiting Card

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।

अवश्य जानिए :- नैत्रत्यमुखी भवन के वास्तु के अचूक उपाय, 

9 सितम्बर 2026 का पंचांग, 9 September 2026 ka panchang, aaj ka panchang, aaj ka rahu kaal, aaj ka shubh panchang, Budhwar Ka Panchang, budhwar ka rahu kaal, budhwar ka shubh panchang, kal ka panchang, panchang, Wednesday ka panchang, आज का पंचांग, आज का राहुकाल, आज का शुभ पंचांग, कल का पंचांग, पंचांग, बुधवार का पंचांग, बुधवार का राहु काल, बुधवार का शुभ पंचांग, वेडनेस डे का पंचांग,

### ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय*
## ( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ)
### *अध्यात्म ज्योतिष परामर्श केंद्र*  
### *श्याम नगर, रायपुर, छत्तीसगढ़*  
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 हर समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है आपकी प्रत्येक इच्छा, महत्वकांक्षा, जीवन में बुलंदियों पर पहुंचना या किसी भी तरह की समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है *व्यापार बढ़ोतरी किया कराया शादी के लिए माता-पिता को मनाना जब कहीं ना ही हो काम तो हमसे में समाधान हर मुश्किल से मुश्किल समस्या का समाधान ज्योतिष मेरा काम नहीं मेरी साधना है जब कहीं ना हो काम तो हमसे ले समाधान https://devlinai.co.in/own_projects/acharya-main/
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मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang, 8 सितम्बर 2026 का पंचांग,

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Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)




पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए मंगलवार का पंचांग (Mangalvar Ka Panchang)।

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

आज का पंचांग, Aaj ka Panchang, मंगलवार का पंचांग, Mangalvar Ka Panchang,

8 सितम्बर Ka Panchang, 8 September का पंचांग, 2026 ka panchang,

हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।

मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद


।। आज का दिन मंगलमय हो ।।

  • दिन (वार) – मंगलवार Mangalwar के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।

    मंगलवार Mangalwar को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।

    मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।

    नवरात्री में घर, कारोबार में इस विधि से करें कलश की स्थापना, अवश्य जानिए कलश स्थापना की सही और बहुत ही आसान विधि,

    मंगलवार के व्रत से सुयोग्‍य संतान की प्राप्ति होती है, बल, साहस और सम्मान में भी वृद्धि होती है।

    मंगलवार को धरती पुत्र मंगलदेव की आराधना करने से जातक को मुक़दमे, राजद्वार में सफलता मिलती है, उत्तम भूमि, भवन का सुख मिलता है, मांगलिक दोष दूर होता है।


    जीवन में समस्त संकटो को दूर करने, सफलता का द्वार खोलने के लिए नवरात्री के मंगलवार को अवश्य ही करें ये उपाय

    आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,
  • इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । नित्य पंचांग को पढ़ने से देवताओं का आशीर्वाद मिलता है, पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है ।

*विक्रम संवत्- 2083,
*शक संवत – 1948

*कलि सम्वत – 5128
*अयन –
दक्षिणायण
*ऋतु –
वर्षा ऋतु
*मास –
भाद्रपद माह,
*पक्ष – कृष्ण पक्ष
*चंद्र बल – वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर, कुम्भ,

मंगलवार को मंगल की होरा :-

प्रात: 06.02 AM से 7.05 AM तक

दोपहर 01.21 PM से 2.24 PM तक

रात्रि 20.29 PM से 21.27 PM तक

मंगलवार को मंगल की होरा में हाथ की निम्न मंगल पर दो बूंद सरसो का तेल लगा कर उसे हल्के हल्के रगड़ते हुए अधिक से अधिक मंगल देव के मन्त्र का जाप करें ।

कृषि, भूमि, भवन, इंजीनियरिंग, खेलो, साहस, आत्मविश्वास

और भाई के लिए मंगल की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

मंगलवार के दिन मंगल की होरा में मंगल देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में मंगल मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

गुरु पूर्णिमा पर इस मन्त्र का अवश्य ही करें जाप, जानिए गुरु पूर्णिमा का उपाय,

मंगल देव के मन्त्र

ॐ अं अंगारकाय नम: अथवा

ॐ भौं भौमाय नम:”

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तिथि :- द्वादशी 14.42 PM तक तत्पश्चात त्रियोदशी तिथि ,

तिथि के स्वामी :- द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री विष्णु जी और त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी है ।

हिंदू पंचाग की बाहरवीं तिथि द्वादशी (Dwadashi) कहलाती है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि, श्री विष्णु जी है ।

इस तिथि का नाम यशोबला भी है, क्योंकि इस दिन भगवान श्री विष्णु जी / भगवान श्रीकृष्ण जी का आंवले, इलाइची, पीले फूलो से पूजन करने से यश,  बल और साहस की प्राप्ति होती है।  

द्वादशी को श्री विष्णु जी की पूजा , अर्चना करने से मनुष्य को समस्त भौतिक सुखो और ऐश्वर्यों की प्राप्ति होती है, उसे समाज में सर्वत्र आदर मिलता है, उसकी समस्त मनोकामनाएं निश्चय ही पूर्ण होती है।

द्वादशी तिथि के दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना अत्यन्त श्रेयकर होता है।  द्वादशी के दिन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करें ।

भगवान विष्णु के भक्त बुध ग्रह का जन्म भी द्वादशी तिथि के दिन माना जाता है। इस दिन विष्णु भगवान के पूजन से बुध ग्रह भी मजबूत होता है ।

यदि द्वादशी तिथि सोमवार और शुक्रवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। द्वादशी यदि रविवार के दिन पड़ती है तो क्रकच योग बनाती है, यह अशुभ माना जाता है, इसमें भी शुभ कार्य करना मना किया गया हैं।

लेकिन द्वादशी तिथि जब बुधवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है,  ऐसे समय में किये गए कार्य कार्य सिद्ध होते है।

द्वादशी तिथि में विष्टि करण होने के कारण इस तिथि को भद्रा तिथि भी कहते है।

द्वादशी तिथि के दिन विवाह, तथा अन्य शुभ कार्य किये जाते है लेकिन इस तिथि में नए घर का निर्माण, ग्रह प्रवेश करना मना किया जाता है ।

द्वादशी के दिन तुलसी तोड़ना निषिद्ध है।  द्वादशी के दिन यात्रा नहीं करनी चाहिए, इस दिन यात्रा करने से धन हानि एवं असफलता की सम्भावना रहती है।  द्वादशी के दिन मसूर का सेवन वर्जित है। 

द्वादशी की दिशा नैऋत्य मानी गई है इस दिन इस दिशा की ओर किए गए कार्य शुभ फल देने वाले माने जाते हैं।

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  • नक्षत्र (Nakshatra) – पुष्य नक्षत्र 16.39 PM तक तत्पश्चात अश्लेषा,
  • नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी – पुष्य नक्षत्र के देवता देव गुरु बृहस्पति और स्वामी शनि देव जी है  । 

 पुष्य नक्षत्र के देवता देव गुरु बृहस्पति और स्वामी शनि देव जी है,  इस दिन चंद्र देव कर्क राशि में गोचर करते हैं । 

  पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रो का राजा भी कहते है, उसमें भी रवि पुष्य नक्षत्र एवं गुरु पुष्य नक्षत्र बहुत ही शुभ माने जाते है। इस अवसर पर किया गया शुभ कार्य अति लाभ दायक और चिरस्थाई होता है।

पुष्य नक्षत्र का नक्षत्र आराध्य वृक्ष: पीपलं तथा नक्षत्र का स्वाभाव शुभ माना जाता है।

शास्त्रों में लिखा है कि पुष्य नक्षत्र में शुरू किये गए सभी कार्य पुष्टिदायक, सर्वथा सिद्ध होते ही हैं, निश्चय ही फलीभूत होते हैं ।

पुष्य नक्षत्र माँ लक्ष्मी जी को अत्यंत प्रिय है  ।  पुष्य नक्षत्र के दिन माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए श्री सूक्त, श्री महा लक्ष्मी अष्टकम का पाठ करना अत्यंत पुण्य दायक माना जाता है।

पुष्य नक्षत्र में जन्मे जातक सुन्दर, शांत, महत्वाकांक्षी, साहसी, सुखी, भोगी, लोकप्रिय, बुद्धिमान, परोपकारी, कड़ी मेहनत करने वाले तथा पुत्र मित्रादि से युक्त होता है।

लेकिन पुष्य नक्षत्र के लोग स्वार्थी, अत्यधिक बोलने वाले, जिद्दी, घमंडी,  कट्टरपंथी और अत्यधिक संवेदनशील भी होते हैं।

पुष्य नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 8 और 2, भाग्यशाली रंग लाल, नीला, भाग्यशाली दिन शनिवार, सोमवार और बुधवार होता है ।

पुष्य नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ बृहस्पतये नम: “। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।

  गुरु पुष्य नक्षत्र किसी भी तरह के वस्त्र, वाहन, सोना, चांदी, आभूषण, भूमि और भवन की खरीदारी के लिए उत्तम समय माना गया है ।  


आज भाद्रपद माह का प्रदोष ब्रत है, मंगलवार को होने के कारण इसे भौम प्रदोष ब्रत कहा जायेगा ।

प्रदोष तिथि को भगवान भोलेनाथ जी का ब्रत रखा जाता है। मान्यता है कि जो जातक प्रदोष का व्रत रख कर संध्या के समय शंकर जी की आराधना करते हैं उन्हें योग्य जीवन साथी मिलता है, दाम्पत्य जीवन में प्रेम और सहयोग बना रहता है ।

मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती का पूजन करने से जीवन में सुख – सौभाग्य की वर्षा होती है, साथ ही जातक के सभी संकट दूर हो जाते हैं । ।

प्रदोष व्रत में सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक पूजा करने का विशेष महत्त्व है । इस दिन सम्पूर्ण शिव परिवार का पूजन करने से भगवान शिव अपने भक्त पर बहुत प्रसन्न होते है ।

प्रदोष व्रत को महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखती हैं।प्रदोष ब्रत रखने वाले जातक के पूरे परिवार पर भगवान भोलनाथ और माँ पार्वती की सदैव असीम कृपा बनी रहती है ।

प्रदोष ब्रत के दिन शिव पंचाक्षर मन्त्र ॐ नम: शिवाय तथा

महामृत्युंजय मन्त्र :- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
का जाप करने से सहस्त्र गुना पुण्य की प्राप्ति होती है ।

प्रदोष को प्रदोष कहने के शास्त्रों में एक मिलती है। माना जाता है कि एक बार चंद्र देव को क्षय रोग हो गया, जिसके कारण उन्हें बहुत कष्ट हो रहा था।

अपने रोग के निवारण के लिए चंद्र देव जी भगवान शिव के पास गए, प्रभु ने चंद्र देव के क्षय रोग का निवारण त्रयो करके उन्हें त्रियोदशी के दिन ही पुन:जीवन प्रदान किया था तभी से इस दिन को प्रदोष कहा जाने लगा है ।

प्रदोष व्रत में फलाहार किया जाता है इस व्रत में अन्न, चावल, लाल मिर्च, सादा नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए।


  • योग :- परिधि 12.40 AM बुधवार 9 सितम्बर तक
  • योग केस्वामी:-      परिध योग की स्वामी विश्वकर्मा जी एवं स्वभाव हानिकारक माना जाता है ।
  • प्रथम करण : – तैतिल 14.42 PM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :- तैतिल करण के स्वामी विश्वकर्मा जी और स्वभाव सौम्य है ।
  • द्वितीय करण : – गर 01.35 बुधवार 9 सितम्बर तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :- गर करण के स्वामी भूमि तथा स्वभाव सौम्य है । ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 04.31 AM से 5.17 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.24 PM से 15.14 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.35 PM से 18.58 PM तक
  • अमृत काल : 10.40 AM से 12.10 PM तक

  • शिव वास :- नंदी पर 14.42 PM तक तत्पश्चात भोजन में

  • शिव वास :-  जब भगवान भोलेनाथ नन्दी जी पर विराजमान होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना सदैव बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों केअनुसार भगवान शंकर जी के नन्दी पर विराजमान के समय रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सफलता, शुभ समाचारो की प्राप्ति  होती है।
  • शिव वास  :   भोजन में   जब भगवान भोलेनाथ जी भोजन कर रहे हों या ध्यान में मग्न हों तो उस समय रुद्र अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। भगवान शंकर जी के रात्रि भोजन अथवा ध्यान करते समय रुद्रभिषेक करने से परेशानी का सामना करना पड़ता है।

  • अग्नि वास : पृथ्वी पर

    अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।
  • दिशाशूल (Dishashool)- मंगलवार को उत्तर दिशा का दिकशूल होता है।

    यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से गुड़ खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – दोपहर 12:00 से 01:30 तक है ।
  • राहुकाल (Rahukaal) दिन – 3:00 से 4:30 तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 06:02
  • सूर्यास्त – सायं 18:35
  • विशेष – द्वादशी के दिन तुलसी तोड़ना,  मसूर का सेवन करना  वर्जित है।
  • द्वादशी के दिन यात्रा नहीं करनी चाहिए, इस दिन यात्रा करने से धन हानि एवं असफलता की सम्भावना रहती है ।
  •  त्रियोदशी को बैगन नहीं खाना चाहिए , त्रियोदशी को बैगन खाने से पुत्र को कष्ट मिलता है ।
  • पर्व – त्यौहार- प्रदोष व्रत

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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### ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय*
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धन्यवाद ।

सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang, 7 सितम्बर 2026 का पंचांग,

सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang, 7 सितम्बर 2026 का पंचांग,

आप सभी को अजा एकादशी ब्रत की हार्दिक शुभकामनायें

सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang, 7 सितम्बर 2026 का पंचांग, 7 September 2026 ka Panchang,

मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

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आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद


Panchang, पंचाग, आज का पंचांग, aaj ka panchang, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए, सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang।

सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang,

7 सितम्बर 2026 का पंचांग, 7 September 2026 ka Panchang,

महा मृत्युंजय मंत्रॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।

  • दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।

    सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।

सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।

जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।

सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।

घर पर कैसा भी हो वास्तु दोष अवश्य करें ये उपाय, जानिए वास्तु दोष निवारण के अचूक उपाय

*विक्रम संवत् – 2083,
* शक संवत – 1948,
*कलि संवत – 5128
*कलयुग – 5128 वर्ष
* अयन – दक्षिणायण,
* ऋतु – वर्षा ऋतु,
* मास – भाद्रपद माह,
* पक्ष – कृष्ण पक्ष
*चंद्र बल – वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर, कुम्भ,

सोमवार को चन्द्रमा की होरा :-

प्रात: 6.02 AM से 7.05 AM तक

दोपहर 01.22 PM से 2.25 PM तक

रात्रि 20.30 PM से 21.28 PM तक

सोमवार को चन्द्रमा की होरा में अधिक से अधिक चन्द्र देव के मन्त्र का जाप करें। यात्रा, प्रेम, प्रसन्नता, कला सम्बन्धी कार्यो के लिए चन्द्रमा की होरा अति उत्तम मानी जाती है।


आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,भारत की लगभग 150 करोड़ की आबादी में 0.001 % अर्थात लगभग 15 हज़ार आदमी ही नित्य पंचांग पढ़ पाते है।

आप पर ईश्वर की असीम कृपा है जो आपको नित्य पंचांग पढ़ने का, अपने भाग्य को प्रबल करने का, पापो के प्रायश्चित करने का अवसर मिल रहा है,

दुनिया के सारे उपाय एक तरफ है, और नित्य पंचाग पढ़ने का पुण्य उससे भी कहीं अधिक है, नित्य पंचांग पढ़ने से देवताओं का आशीर्वाद मिलता है, कार्य सिद्ध होने लगते है,

इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है ।

सोमवार के दिन चन्द्रमा की होरा में चंद्रदेव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में चंद्र देव मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

चन्द्रमा के मन्त्र

ॐ सों सोमाय नम:।

ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम: ।

  • तिथि (Tithi) – एकादशी तिथि 17.03 PM तक तत्पश्चात द्वादशी तिथि,
  • तिथि का स्वामी – एकादशी तिथि के स्वामी भगवान विश्वदेव जी और द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री विष्णु जी है ।
     
  • आज भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी अति शुभ अजा एकादशी है । इस एकादशी का पौराणिक संबंध राजा हरिश्चंद्र, सत्य, धर्म और भगवान श्रीहरि की उपासना से है। अजा एकादशी का माहात्म्य विशेष रूप से पद्म पुराण में मिलता है। इसके अतिरिक्त इसकी कथा-परंपरा ब्रह्मवैवर्त पुराण में भी वर्णित मानी जाती है।
  • पंचांग के अनुसार अजा एकादशी तिथि रविवार 6 सितंबर को शाम 7:29 बजे आरंभ होकर रोमवार 7 सितंबर शाम 5:03 बजे समाप्त होगी, उदया तिथि के अनुसार अजा एकादशी का ब्रत सोमवार 7 सितम्बर को मनाया जायेगा ।
  • पद्म पुराण, उत्तरखण्ड, अध्याय 56 में युधिष्ठिर भगवान श्रीकृष्ण से भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम और उसका माहात्म्य पूछते हैं।
  • तब भगवान श्रीकृष्ण उनको बताते हैं कि इस एकादशी का नाम अजा है और यह समस्त पापों का नाश करने वाली कही गई है। अजा शब्द का सामान्य संस्कृत अर्थ है—अजन्मा, अर्थात् जो जन्म से परे है। इस एकादशी के दिन भगवान श्री विष्णु जी की पूजा करके इस व्रत का पालन करने वाले के पाप नष्ट होते हैं तथा इस व्रत का माहात्म्य पढ़ने / सुनने से भी पुण्य प्राप्त होता है।
  • अजा एकादशी की सबसे प्रसिद्ध कथा राजा हरिश्चंद्र से जुड़ी है।
  • राजा हरिश्चंद्र जी सत्य के लिए प्रसिद्ध थे। पौराणिक कथा के अनुसार उनके साथ परिस्थितियाँ ऐसी बनीं कि उन्हें अपना राज्य, धन और अंततः अपने परिवार से भी अलग होना पड़ा। वे अत्यंत कठिन अवस्था में पहुँच गए, लेकिन तब भी उन्होंने सत्य का मार्ग नहीं छोड़ा। पद्म पुराण की कथा के अनुसार वे श्मशान में भी सेवा करते हुए अपने सत्य-व्रत से विचलित नहीं जुए ।
  • इसी कठिन परिस्थिति में महर्षि गौतम ने उन्हें भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।
  • राजा हरिश्चंद्र ने श्रद्धा से व्रत किया और रात्रि-जागरण किया। कथा के अनुसार इसके प्रभाव से उनके दुःखों का अंत हुआ, उनका परिवार और राज्य उन्हें पुनः प्राप्त हुआ ।
  • अजा एकादशी हमें सिखाती है कि परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, हमें ईश्वर पर पूरा विश्वास रखते हुए सत्य और धर्म का कभी भी त्याग नहीं करना चाहिए।
  • सनातन धर्म में एकादशी तिथि को भगवान श्री विष्णु की सर्वाधिक प्रिय तिथि माना गया है। इस दिव्य दिन भगवान श्रीहरि विष्णु एवं श्रीकृष्ण की उपासना, भक्ति और नाम-स्मरण करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • शास्त्रों में कहा गया है कि जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक एकादशी व्रत का पालन करता है, वह भगवान श्री विष्णु को अत्यंत प्रिय हो जाता है तथा उस पर श्रीहरि की विशेष कृपा सदैव बनी रहती है।
  • एकादशी के दिन अधिक से अधिक भगवान विष्णु के पवित्र मंत्रों का जाप करें —
  • 🔸 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
  • या
  • 🔸 ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
  • इन मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जप करने से मन, बुद्धि और आत्मा शुद्ध होती है तथा भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
  • 🌿 एकादशी के दिन भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित कर पूजा अवश्य करें। ध्यान रहे कि तुलसी दल एकादशी के दिन नहीं तोड़ना चाहिए, बल्कि उसे एक दिन पूर्व दशमी तिथि में ही संग्रह कर लेना चाहिए।
  • शास्त्रों के अनुसार एकादशी के दिन जल में आँवले का चूर्ण या आँवले का रस मिलाकर स्नान करने से पापों का क्षय होता है और शरीर व मन दोनों पवित्र होते हैं।
  • रात्रि के समय भगवान विष्णु के समक्ष नौ बत्तियों वाला दीपक प्रज्ज्वलित करें तथा एक अखंड दीपक ऐसा जलाएँ जो पूरी रात प्रकाशित रहे। यह दीपक जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का प्रकाश फैलाता है।
  • 🚫 एकादशी के दिन चावल तथा अन्न का सेवन वर्जित माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन चावल खाने से पाप और रोग बढ़ते हैं तथा दूसरे का अन्न ग्रहण करने से संचित पुण्यों का क्षय होता है।
  • एकादशी का व्रत केवल उपवास नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, भक्ति, संयम और भगवान श्रीहरि की कृपा प्राप्त करने का दिव्य साधन है।
  • श्रीहरि विष्णु की कृपा आप सभी पर सदैव बनी रहे।
  • 🕉️ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥ 🕉️

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नक्षत्र (Nakshatra) – पुनर्वसु 18.14 PM तक तत्पश्चात पुष्य नक्षत्र

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी-   पुनर्वसु नक्षत्र के देवता अदिति (पृथ्वी देवी), बृहस्पति, एवं नक्षत्र के स्वामी गुरु बृहस्पति जी है।

  पुनर्वसु अर्थ पुन: शुभ या पुन: बसना होता है। पुनर्वसु नक्षत्र आकाश मंडल में  7वां नक्षत्र है ।
ज्योतिषशास्त्र में पुनर्वसु नक्षत्र को सबसे बड़ा और बहुत ही शुभ माना जाता है । यह मर्यादा पुरषोतम भगवान श्री राम जी का जन्म नक्षत्र है। मान्यता है कि पुनर्वसु जातक के यहा केवल पुत्र ही होता है।

माना जाता है कि जिसका जन्म इस नक्षत्र में होता है, वे दूसरों की सेवा करने, भलाई करने के लिए सदैव तैयार रहते हैं  । पुनर्वसु प्रत्येक कार्य के शुभारम्भ के लिए, नयी शुरुआत के लिए श्रेष्ठ होता है। 

पुनर्वसु नक्षत्र का आराध्य वृक्ष: बांस / बांबू और नक्षत्र का स्वभाव चर माना गया है ।

इस नक्षत्र  में जन्मे जातक व्यव्हार कुशल, शांत, परोपकारी, धार्मिक,सुखी, दानी, न्यायप्रिय, लोकप्रिय, पुत्रवान होते हैं।

लेकिन यदि गुरु, बुध और चन्द्रमा शुभ ना जो तो ऐसा जातक कामुक, दब्बू,, बुद्धिहीन, कंजूस और थोड़े में ही संतुष्ट रहने वाला होता है।

इस नक्षत्र की स्त्रियां शांत लेकिन अकस्मात उग्र होने वाली, विलासी जीवन जीने वाली, कामुक, सौन्दर्यप्रेमी और आशावादी मानी जाती  है ।

पुनर्वसु नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 3, भाग्यशाली रंग, सुनहरा, भाग्यशाली दिन गुरुवार का माना जाता है ।

पुनर्वसु नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ आदित्याय नम:”। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।

  अगर पश्चिम मुख का है आपका घर तो ऐसा रहना चाहिए आपके घर का वास्तु, जानिए पश्चिम दिशा के अचूक वास्तु टिप्स 


  • योग – व्यतिपात 06.41 AM तक तत्पश्चात वरीयान
  • योग केस्वामी:-    व्यतिपात योग के स्वामी रूद्र देव जी एवं स्वभाव अशुभ माना जाता है ।
  • प्रथम करण : – बव 06.16 AM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-     बव करण के स्वामी इंद्र देव और स्वभाव सौम्य है ।

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  • द्वितीय करण : – बालव 17.03 PM तक तत्पश्चात कौलव
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-    बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.31 AM से 5.16 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.25 PM से 15.15 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.36 PM से 18.59 PM तक
  • अमृत काल :- 15.59 PM से 17.29 PM तक
  • शिव वास :- कैलाश पर 17.29 PM तक तत्पश्चात नंदी पर

  • शिव वास :-  जब भगवान भोलेनाथ जी कैलाश पर होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार  भगवान शंकर जी के  कैलाश पर्वत पर रहने के दौरान रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सुखो की प्राप्ति होती है।
  • शिव वास :-  जब भगवान भोलेनाथ नन्दी जी पर विराजमान होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना सदैव बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों केअनुसार भगवान शंकर जी के नन्दी पर विराजमान के समय रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सफलता, शुभ समाचारो की प्राप्ति  होती है।


  • अग्निवास : आकाश में 17.03 AM तक तत्पश्चात पाताल पर

    अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।

    जब पाताल में अग्नि वास है तो वह हवन से सम्बन्धित अनुष्ठानों के लिये शुभ नहीं मानी जाती है, यह अशुभ मानी गई है । अग्नि के पाताल  वास के दौरान किये जाने वाले हवन  सम्बन्धित अनुष्ठानों व्यक्ति को आर्थिक नुकसान करना पड़ता है उसका  धन नष्ट हो सकता है।
  • विशेष – एकादशी के दिन सेम फली, चावल का सेवन और दूसरो के अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए ।
  •  एकादशी के दिन चावल खाने से रोग बढ़ते है और दूसरे का अन्न खाने से पुण्य नष्ट होते है ।
  • एकादशी के दिन माँ तुलसी एकादशी का ब्रत रखती है इसलिए इस दिन तुलसी जी पर जल चढ़ाना, तुलसी जी को तोड़ना सख्त मना है ।
  • पर्व त्यौहार- अजा एकादशी
  • मुहूर्त (Muhurt) –

“हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “। https://lookmybiz.in/आचार्य-मुक्ति-नारायण-पाण्डेय-अध्यात्म--ज्योतिष-परामर्श-केंद्र

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आप पर ईश्वर की असीम अनुकम्पा की वर्षा होती रहे ।

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