आप सभी को रम्भा एकादशी / रमा एकादशी की हार्दिक शुभकामनायें
गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 5 November 2026 Ka Panchang,
मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है, अगर आप भी पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 7587346995±9044862881 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।
कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।
आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
बृहस्पतिवार का पंचांग, Brahaspativar ka panchang,
- Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-
1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)
पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
* शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
* वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
* नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
* योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
* करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए । नित्य पंचाग पढ़ने से भाग्य चमकने लगता है ।
जानिए आज गुरुवार का पंचांग, Guruwar Ka Panchag,
आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है, आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,
इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है ।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
आज का पंचांग, aaj ka panchang, गुरुवार का पंचाग, Guruvar Ka Panchag,
गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag,
5 नवम्बर 2026 का पंचांग, 5 November 2026 Ka Panchang,
- गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 5 नवम्बर 2026 का पंचांग,
- दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
- गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए ।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है । - गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है । - गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।
इस उपाय को करने से कार्यो में अड़चने दूर होती है, भाग्य चमकने लगता है, बृहस्पति देव की कृपा मिलती है।
यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।
और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।
गुरुवार को विष्णु जी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, गुरुवार को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ परम फलदाई है।
जीवन में कैसी भी हो समस्या जन्माष्टमी के दिन अवश्य करें ये अचूक उपाय,
- *विक्रम संवत् – 2083,
- * शक संवत – 1948,
*कलि संवत- 5128,
* अयन – दक्षियायणं,
* ऋतु – शरद ऋतु,
* मास – कार्तिक माह
* पक्ष – कृष्ण पक्ष
*चंद्र बल – वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन,
गुरुवार को बृहस्पति देव की होरा :-
प्रात: 06.31 AM से 7.26 AM तक
दोपहर 01.00 PM से 1.56 PM तक
रात्रि 19.47 PM से 20.52 PM तक
आज धनतेरस पर जानिए कुबेर जी के परिवार के बारे में, जीवन में सुख-समृद्दि, ऐश्वर्य की नहीं होगी कोई कमी

आज गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा के समय दाहिने हाथ की तर्जनी ऊंगली ( अंगूठे के बगल वाली उंगली ) के नीचे गुरु पर्वत और उस पूरी ऊंगली पर बृहस्पति देव के मंत्र का जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य ) I
गुरुवार को बृहस्पति की होरा में अधिक से अधिक बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करें । शिक्षा, मान – सम्मान, व्यापार, कारोबार, नए कार्यो के प्रारम्भ के लिए गुरुवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।
गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा में बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।
बृहस्पति देव के मन्त्र
ॐ बृं बृहस्पतये नमः।। अथवा
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः।।
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तिथि (Tithi) :- एकादशी 10.35 AM तक तत्पश्चात द्वादशी,
तिथि का स्वामी – एकादशी तिथि के स्वामी विश्वदेव जी और द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री विष्णु जी है I
दीपावली से चार दिन पहले कार्तिक कृष्ण एकादशी तिथि को रम्भा एकादशी या रमा एकादशी पड़ती है। रमा एकादशी के दिन भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा करना अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है।
चतुर्मास की अंतिम एकादशी होने के कारण रमा एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार एकादशी तिथि भगवान श्री विष्णु जी को अति प्रिय है । रमा एकादशी के दिन तुलसी की पूजा एवं भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है।
मान्यता है कि रमा / रम्भा एकादशी का ब्रत रखने, इस दिन भगवान विष्णु जी की पूजा करने से जातक को धरती के समस्त सुख प्राप्त होते है, एवं अंत में विष्णु लोक में जाता है। यह एकादशी अपार धन, सुख-समृद्धि एवं यश प्रदान करने वाली मानी गयी है ।
रमा एकादशी का विस्तृत माहात्म्य हमारे धर्म शास्त्र पद्म पुराण के उत्तर खंड के अध्याय 60 में मिलता है। इसमें धर्मराज युधिष्ठिर जी भगवान श्रीकृष्ण जी से कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी के माहात्म्य के बारे में पूछते हैं।
तब भगवान श्रीकृष्ण जी इस एकादशी के बारे में बताते हुए कहते है कि :
कार्त्तिके कृष्णपक्षे तु रमा नाम सुशोभना।
एकादशी समाख्याता महापापहरा परा॥
अर्थात कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष में रमा नाम की अत्यंत सुंदर, पुण्य प्रदान करने वाली एकादशी आती है। यह एकादशी समस्त पापों का नाश करने वाली मानी गई है।
पद्म पुराण में रमा एकादशी को चिंतामणि रत्न तथा कामधेनु गाय के समान महान फलदायी बताया गया है।
एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी के मन्त्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” अथवा ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।। का अधिक से अधिक जाप करना चाहिए ।
एकादशी के दिन विष्णु जी की तुलसी जी अर्पित करके पूजा करनी चाहिए, लेकिन तुलसी जी को एकादशी के दिन नहीं वरन एक दिन पूर्व दशमी तिथि को ही तोड़ना चाहिए ।
रमा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पीले फूल, पीले फल, पीले मिष्ठान, आँवले आदि से पूजा करने से जीवन के संकट दूर हो जाते है ।
एकादशी के दिन प्रात: जल में आँवले / आँवले का रस या आँवले का चूर्ण डालकर नहाने से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है।
एकादशी के दिन रात्रि में भगवान विष्णु के सामने नौ बत्तियों का दीपक जलाएं और एक दीपक ऐसा जलाएं जो रात भर जलता रहे।
एकादशी के दिन चावल और दूसरे का अन्न खाना मना है । एकादशी के दिन चावल खाने से रोग और पाप बढ़ते है, एकादशी के दिन दूसरे का अन्न खाने से समस्त पुण्यों का नाश हो जाता है ।
यह है धनतेरस के दिन पूजा का, खरीददारी का शुभ मुहूर्त, सांय काल दीपक जलाते समय यमराज जी को प्रसन्न करने का मन्त्र

नक्षत्र (Nakshatra) – उत्तरफाल्गुनी 03.55 AM शुक्रवार 6 नवम्बर तक
नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी – उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के देवता आर्यमन और स्वामी सूर्य, बुध देव जी है ।
आकाश मंडल में उत्तरा फाल्गुनी को 12 वां नक्षत्र माना जाता है। ‘उत्तरा फाल्गुनी’ का अर्थ है ‘बाद का लाल नक्षत्र’। यह एक बिस्तर या बिस्तर के पिछले दो पाए को दर्शाता है जो आराम और विलासिता के जीवन का प्रतीक है।
यह नक्षत्र रोमांस, कामुक, ऐश्वर्य, रोमांच और अनैतिक आचरण को प्रदर्शित करता है। इस नक्षत्र काआराध्य वृक्ष : पाकड़ तथा स्वाभाव शुभ माना गया है।
उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र सितारे का लिंग महिला है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक पर जीवन भर सूर्य और बुध का प्रभाव बना रहता है।
इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति दानी, दयालु, साहसी, विद्वान, चतुर, उग्र स्वभाव, सही निर्णय लेने वाले होते है। इन्हे पूर्ण संतान, भूमि का सुख मिलता है।
लेकिन यदि सूर्य और बुध की स्थिति जन्म कुंडली में खराब है तो जातक का रुझान गलत कार्यों में रहने लगता है, उसका झुकाव विपरीत लिंगी की तरफ बहुत आसानी से हो जाता है।
उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में पैदा हुई स्त्री, सरल, शांत लेकिन खुशमिज़ाज़ होती हैं। यह आसानी से सबको प्रभावित कर लेती है ।इनका पारिवारिक दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 12, भाग्यशाली रंग, चमकदार नीला, भाग्यशाली दिन बुधवार, शुक्रवार, और रविवार माना जाता है ।
उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ अर्यमणे नम: “। मन्त्र माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।
धनतेरस पर यह करें खरीददारी, पूरे साल धन की नहीं होगी कोई कमी, जानिए धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ है
कैसा भी सिर दर्द हो उसे करें तुरंत छूमंतर, जानिए सिर दर्द के अचूक उपाय
योग :- वैधृति 05.09 AM शुक्रवार 6 नवम्बर तक
योग के स्वामी, स्वभाव :- वैधृति योग के स्वामी दिति और स्वभाव हानिकारक है ।
प्रथम करण :- बालव 10.35 AM तक
करण के स्वामी, स्वभाव :- बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।
द्वितीय करण :- कौलव 22.30 PM तक तत्पश्चात तैतिल
करण के स्वामी, स्वभाव :- कौलव करण के स्वामी मित्र और स्वभाव सौम्य है ।
ब्रह्म मुहूर्त : 4.52 AM से 5.44 AM तक
विजय मुहूर्त : 13.54 PM से 14.38 PM तक
गोधूलि मुहूर्त : 17.33 PM से 17.59 PM तक
अमृत काल : 20.36 PM से 22.13 AM तक
अग्नि वास : पृथ्वी में 10.35 AM तक तत्पश्चात पाताल में
अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।
अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।
शिव वास : कैलाश में 10.35 AM तक तत्पश्चात नंदी पर
शिव वास :- जब भगवान भोलेनाथ जी कैलाश पर होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान शंकर जी के कैलाश पर्वत पर रहने के दौरान रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सुखो की प्राप्ति होती है।
शिव वास :- जब भगवान भोलेनाथ नन्दी जी पर विराजमान होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना सदैव बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों केअनुसार भगवान शंकर जी के नन्दी पर विराजमान के समय रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सफलता, शुभ समाचारो की प्राप्ति होती है।
- दिशाशूल (Dishashool)– बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
- गुलिक काल : – गुलिक 09:30 AM से 11 AM बजे तक ।
- राहुकाल (Rahukaal)– दिन – 1:30 PM से 3:00 PM तक।
- सूर्योदय – प्रातः 06:36
- सूर्यास्त – सायं 17.33
विशेष – एकादशी के दिन सेम फली, चावल का सेवन और दूसरो के अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए ।
एकादशी के दिन चावल खाने से रोग बढ़ते है और दूसरे का अन्न खाने से पुण्य नष्ट होते है ।
एकादशी के दिन माँ तुलसी एकादशी का ब्रत रखती है इसलिए इस दिन तुलसी जी पर जल चढ़ाना, तुलसी जी को तोड़ना सख्त मना है ।
द्वादशी के दिन तुलसी तोड़ना, मसूर का सेवन करना वर्जित है।
द्वादशी के दिन यात्रा नहीं करनी चाहिए, इस दिन यात्रा करने से धन हानि एवं असफलता की सम्भावना रहती है।
- पर्व त्यौहार– रम्भा एकादशी / रमा एकादशी
- मुहूर्त (Muhurt) –
“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।
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