आप सभी को होली के महा पर्व, होलिका दहन की हार्दिक शुभकामनायें
सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang, 2 मार्च 2026 का पंचांग, 2 March 2026 ka Panchang,
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Panchang, पंचाग, आज का पंचांग, aaj ka panchang, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-
1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)
पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए, सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang।
सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang,
2 2 मार्च 2026 का पंचांग, 2 March 2026 ka Panchang,
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
- दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
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*विक्रम संवत् – 2082,
* शक संवत – 1947,
*कलि संवत – 5127
*कलयुग – 5127 वर्ष
* अयन – उत्तरायण,
* ऋतु – बसंत ऋतु,
* मास – फाल्गुन माह,
* पक्ष – शुक्ल पक्ष
*चंद्र बल – मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, कुम्भ, मीन,
सोमवार को चन्द्रमा की होरा :-
प्रात: 6.45 AM से 7.42 AM तक
दोपहर 01.145 PM से 2.15 PM तक
रात्रि 8.04 PM से 9.14 PM तक
सोमवार को चन्द्रमा की होरा में अधिक से अधिक चन्द्र देव के मन्त्र का जाप करें। यात्रा, प्रेम, प्रसन्नता, कला सम्बन्धी कार्यो के लिए चन्द्रमा की होरा अति उत्तम मानी जाती है।

सोमवार के दिन चन्द्रमा की होरा में चंद्रदेव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में चंद्र देव मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।
चन्द्रमा के मन्त्र
ॐ सों सोमाय नम:।
ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम: ।

- तिथि (Tithi) – चतुर्दशी 17.55 PM तक तत्पश्चात पूर्णिमा ,
- तिथि का स्वामी – चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी और पूर्णिमा तिथि के स्वामी चंद्र देव जी है ।
- आज होलिका दहन का पर्व है । होलिका दहन फाल्गुन माह की पूर्णिमा को रात्रि काल में भद्रा रहित समय में किया जाता है और इसके अगले दिन प्रतिपदा के दिन रंग और गुलाल से होली खेली जाती है ।
- होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई की विजय के रूप में देखा जाता है, मान्यता है कि इसके साथ ही हमारे जीवन से नकारात्मकता भी दूर हो जाती है ।
- राक्षस राज हिरण्यकश्यप की बहन के दहन और विष्णु भक्त प्रहलाद जी की अग्नि से बच जाने की ख़ुशी में होलिका दहन का पर्व मनाया जाता है और अगले दिन लोग एक दूसरे को रंग और गुलाल लगते है ।
- एक और कथा के अनुसार एक बार भगवान शंकर जी ने कामदेव जी को क्रोध में आकर अपना तीसरा नेत्र खोलकर भस्म कर दिया था, लेकिन उसकी पत्नी रति के विलाप और देवताओं के बार बार आग्रह करने पर उन्होंने कामदेव को जीवनदान दे दिया था, इस लिए भी होलिका का पर्व मनाया जाता है ।
- फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि सोमवार 02 मार्च को शाम 17 बजकर 55 मिनट से शुरू होगी जो मंगलवार 3 मार्च शुक्रवार को शाम 16 बजकर 46 मिनट तक रहेगी ।
- इस वर्ष 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा पर सोमवार 2 मार्च को भद्रा तिथि सांय 17:46 पर पूर्णिमा तिथि लगते ही लग जाएगी जो अगले सूर्योदय से पूर्व 05:19 तक रहेगी।
- नारद पुराण के अनुसार होलिका दहन, holika dahan फाल्गुन पूर्णिमा की रात्रि को भद्रारहित प्रदोष काल में करना चाहिए, होलिका का दहन विधिवत रुप से होलिका का पूजन करने के बाद ही करना श्रेष्ठ है।
- मान्यता है कि भद्रा के समय में होलिका दहन, holika dahan करने से उस क्षेत्र में अशुभ घटनाएं हो सकती है इसके अलावा चतुर्दशी तिथि, प्रतिपदा एवं सूर्यास्त से पहले कभी भी होलिका दहन नहीं करना चाहिए।
- मूहर्त चिंतामणि ग्रंथ के अनुसार भद्रा काल में रक्षा बंधन और होलिका दहन दोनों को ही वर्जित बताया गया है ।
- शास्त्रों के अनुसार अगर होलिका दहन के समय में भद्रा आ रही हो तो होलिका दहन का मुहूर्त हमेशा भद्रा मुख का त्याग करके निर्धारित होता है क्योंकि भद्रा मुख में होलिका दहन बिलकुल वर्जित है, हाँ भद्रा की पुछ में होलिका दहन किया जा सकता है ।
- 2 मार्च सोमवार को मध्य रात्रि में 12.30 AM से 02.10 AM के मध्य भद्रा का पुछ मिल रहा है और सूर्योदय 3 मार्च को प्रात: 6.45 AM पर हो रहा है लेकिन इसी दिन 3 मार्च मंगलवार को दोपहर में लगने वाले चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले 06.21 AM पर लग रहा है अर्थात
- 3 मार्च की सुबह भद्रा की समाप्ति के बाद 05.20 AM से 06.20 AM के मध्य भी होलिका दहन किया जा सकता है ।
- होलिका दहन का मुहूर्त :- 2 – 3 मार्च मध्य रात्रि में 12.20 AM से 02.10 AM तक
- 3 मार्च सुबह भद्रा की समाप्ति के बाद 05.20 AM से 06.20 AM के मध्य
- होलिका दहन चौराहो पर किसी खुली जगह पर किया जाता है। इस दिन लोग लकड़ियों का एक ढेर तैयार करते हैं, जिसे होलिका की चिता के रूप में माना जाता है।
फिर शुभ मुहूर्त पर होलिका की पूजा करके, पूरे हर्ष और उल्लास के साथ होलिका का दहन किया जाता है । इसके पश्चात लोग जलती हुई होलिका की परिक्रमा करते हुए अपने जीवन में सुख समृद्धि, और आरोग्य के लिए प्रार्थना करते है। - होलिका के पूजन में ध्यान रखे कि आपका मुँह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए । होलिका दहन में घर के सभी सदस्यों को अवश्य ही शामिल होना चाहिए । होलिका दहन में चना, मटर, गेंहूँ बालियाँ या अलसी आदि डालते हुए अग्नि की तीन / सात परिक्रमा करें। इससे घर में शुभता आती है।
- होलिका दहन की अग्नि में होलिका की परिक्रमा करते हुए अपने सर से सात बार काले तिल उतार कर होलिका को अर्पित करें । ऐसा करने से शनि, राहु, केतु आदि ग्रहों के दोषो से से छुटकारा मिलता है, चिंताएं दूर होती है, आत्मविश्वास बढ़ता है ।
- इस वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा पर 3 मार्च मंगलवार को चंद्रग्रहण भी लग रहा है । यह चंद्र ग्रहण भारतीय समय के अनुसार दोपहर 3 बजकर 21 मिनट को लगेगा और शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा । पंचांग के अनुसार यह ग्रहण भारत में भी नज़र आएगा ।
- चंद्र ग्रहण लगने से 9 घंटे पहले सूतक लग जाता है और उसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है, सूतक चूँकि सुबह 6.21 AM से ही लग जायेगा जो ग्रहण की समाप्ति पर 6.47 PM तक रहेगा इसलिए इस वर्ष होली पर रंग होलिका दहन के बाद एक दिन छोड़कर अर्थात 4 मार्च को खेला जायेगा, होलिका दहन के अगले दिन नहीं ।
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नक्षत्र (Nakshatra) – अश्लेषा 07.51 AM तक तत्पश्चात मघा
नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी- अश्लेषा नक्षत्र के देवता सर्प देव एवं नक्षत्र के स्वामी बुध देव जी है ।
अश्लेषा नक्षत्र का स्थान आकाश मंडल के नक्षत्रो में 9 वां है। यह कर्क राशि के अंतर्गत आता है। अश्लेशा नक्षत्र के देवता सर्प देव एवं नक्षत्र के स्वामी बुध देव जी है।
अश्लेषा नक्षत्र को गण्ड मूल नक्षत्र कहते है। अश्लेषा नक्षत्र में चंद्रमा की ऊर्जा और सर्प देवता की ताकत है। यह एक कुंडलित सर्प जैसा दिखता है जो कुंडलिनी ऊर्जा का प्रतीक है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वालों पर जीवनभर बुध व चन्द्र का प्रभाव पड़ता है।
अश्लेषा नक्षत्र सितारा का लिंग महिला है। अश्लेषा नक्षत्र का आराध्य वृक्ष: नागकेसर, तथा स्वाभाव तीक्ष्ण, शोक वाला होता है ।
अश्लेषा नक्षत्र में जन्मे जातक हंसमुख, वाकपटु, साहित्य तथा संगीत प्रेमी, नेतृत्वशील, यशवान और सफल व्यापारी होते है इन्हे पूर्ण पारिवारिक सुख प्राप्त होता है।
लेकिन कुंडली में बुध और चन्द्र खराब स्थिति में होने पर जातक चालाक, क्रोधी- क्रूर स्वभाव, बेकार के कामो में धन को गंवाने वाला, कामुक विचारो वाला,आलसी, स्वार्थी, निराशवादी, कभी-कभार चोरी करने वाला भी होता है ।
अश्लेशा नक्षत्र गंड नक्षत्र है अतः व्यक्ति की आयु कम होती है, इसलिए अश्लेशा नक्षत्र का पूर्ण विधि विधान से शांति करवाना आवश्यक होता है. ।
अश्लेषा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 5 और 9, भाग्यशाली रंग काला – लाल, भाग्यशाली दिन बुधवार होता है । इन्हे नागकेसर के पौधे की सेवा करनी चाहिए तथा घर पर नाग केसर को रखना चाहिए ।
अश्लेषा नक्षत्र में जन्मे जातको को नित्य तथा अन्य सभी को आज “ॐ सर्पेभ्यो नमःl “ मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करना चाहिए।
- योग – अतिगण्ड 12.21 PM तक तत्पश्चात सुकर्मा
- योग के स्वामी :- अतिगण्ड योग के स्वामी चंद्र देव जी लेकिन स्वभाव हानिकारक है ।
- प्रथम करण : – वणिज 17.55 PM तक
- करण के स्वामी, स्वभाव :- वणिज करण की स्वामी लक्ष्मी देवी और स्वभाव सौम्य है ।
अवश्य पढ़ें :- कुंडली में केतु अशुभ हो तो आत्मबल की होती है कमी, भय लगना, बुरे सपने आना, डिप्रेशन का होता है शिकार, केतु के शुभ फलो के लिए करे ये उपाय - द्वितीय करण : – विष्टि 05 .28 AM मंगलवार 3 मार्च तक
- करण के स्वामी, स्वभाव :- विष्टि करण के स्वामी यम और स्वभाव क्रूर है ।
- ब्रह्म मुहूर्त : 5.06 AM से 5.56 AM तक
- विजय मुहूर्त : 14.29 PM से 15.16 PM तक
- गोधूलि मुहूर्त : 18.19 PM से 16.44 PM तक
- अमृत काल : 05.09 AM से 06.44 AM मंगलवार 3 मार्च तक
- दिशाशूल (Dishashool)- सोमवार को पूर्व दिशा का दिशा शूल होता है ।
- यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दर्पण देखकर, दूध पीकर जाएँ ।
- गुलिक काल : – दोपहर 1:30 से 3 बजे तक ।
- राहुकाल (Rahukaal)– सुबह -7:30 से 9:00 तक।
अपनी आकृषण शक्ति, चुम्बकीय शक्ति बढ़ाना चाहते है तो अवश्य ही करें ये उपाय - * सूर्योदय – प्रातः 06:45
- * सूर्यास्त – सायं 18:21
- विशेष – चतुर्दशी, श्राद्ध और व्रत के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना, सहवास करना निषिद्ध है।
- पर्व त्यौहार- होलिका दहन
- मुहूर्त (Muhurt) –
“हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।
अपने धर्म, अपनी संस्कृति अपने नैतिक मूल्यों के प्रचार, प्रसार के लिए तन – मन – धन से अपना बहुमूल्य सहयोग करें । आप हमें अपनी इच्छा – सामर्थ्य के अनुसार सहयोग राशि 9425203501 पर Google Pay कर सकते है ।
आप पर ईश्वर की असीम अनुकम्पा की वर्षा होती रहे ।
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