Guruwar Ka Panchag, गुरुवार का पंचांग, 6 अगस्त 2026 का पंचांग,
गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 6 August 2026 Ka Panchang,
मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है, अगर आप भी पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।
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आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
बृहस्पतिवार का पंचांग, Brahaspativar ka panchang,
- Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-
1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)
पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
* शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
* वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
* नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
* योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
* करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए । नित्य पंचाग पढ़ने से भाग्य चमकने लगता है ।
जानिए आज गुरुवार का पंचांग, Guruwar Ka Panchag,
आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है, आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,
इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है ।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
आज का पंचांग, aaj ka panchang, गुरुवार का पंचाग, Guruvar Ka Panchag,
गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag,
6 अगस्त 2026 का पंचांग, 6 August 2026 Ka Panchang,
- गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 6 अगस्त 2026 का पंचांग,
- दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
- गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए ।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है । - गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है । - गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।
इस उपाय को करने से कार्यो में अड़चने दूर होती है, भाग्य चमकने लगता है, बृहस्पति देव की कृपा मिलती है।
यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।
और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।
गुरुवार को विष्णु जी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, गुरुवार को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ परम फलदाई है।
जीवन में कोई भी मनोकामना हो हनुमान जी के जन्मोत्सव के दिन अवश्य ही करें ये उपाय,
- *विक्रम संवत् – 2083,
- * शक संवत – 1948,
*कलि संवत- 5128,
* अयन – दक्षियायणं,
* ऋतु – वर्षा ऋतु,
* मास – श्रावण माह
* पक्ष – कृष्ण पक्ष
*चंद्र बल – वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन,
गुरुवार को बृहस्पति देव की होरा :-
प्रात: 5.45 AM से 6.52 AM तक
दोपहर 01.34 PM से 2.41 PM तक
रात्रि 20.55 PM से 21.48 PM तक

आज गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा के समय दाहिने हाथ की तर्जनी ऊंगली ( अंगूठे के बगल वाली उंगली ) के नीचे गुरु पर्वत और उस पूरी ऊंगली पर बृहस्पति देव के मंत्र का जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य ) I
गुरुवार को बृहस्पति की होरा में अधिक से अधिक बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करें । शिक्षा, मान – सम्मान, व्यापार, कारोबार, नए कार्यो के प्रारम्भ के लिए गुरुवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।
गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा में बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।
बृहस्पति देव के मन्त्र
ॐ बृं बृहस्पतये नमः।। अथवा
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः।।
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- तिथि (Tithi) :- अष्टमी तिथि 18.52 PM तक तत्पश्चात नवमी,
- तिथि का स्वामी – अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी और नवमी तिथि की स्वामी माँ दुर्गा जी है I
- अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान शिव कहे गए है। अष्टमी तिथि को भगवान शिव की विधि पूर्वक पूजा भोलेनाथ जी प्रसन्न होते है भक्तो को समस्त सिद्धियां प्राप्त होती है।
- अष्टमी तिथि को…….
- श्री शिवाये नमस्तुभ्यंम, एवं
- ॐ नम: शिवाये मन्त्र का अधिक से अधिक जाप अवश्य करें ।
- 🌺 अष्टमी तिथि का धार्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व
- अष्टमी तिथि हिन्दू पंचांग की अत्यंत महत्वपूर्ण एवं शक्तिशाली तिथियों में से एक मानी जाती है। यह तिथि विशेष रूप से भगवान शिव, माँ दुर्गा और माँ महागौरी की उपासना के लिए श्रेष्ठ मानी गई है। शास्त्रों में अष्टमी को “जया तिथि” कहा गया है, जो विजय, साहस और सफलता का प्रतीक है।
- 🌼 अष्टमी तिथि का विशेष नाम
- अष्टमी तिथि का विशेष नाम “कलावती” है।
- ✨ अष्टमी तिथि का महत्व
- अष्टमी जया तिथियों की श्रेणी में आती है। मान्यता है कि इस तिथि में आरम्भ किए गए कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
- यदि किसी पक्ष की अष्टमी तिथि मंगलवार को पड़े, तो सिद्धिद्दा योग बनता है, जिसे अत्यंत शुभ माना गया है।
- चैत्र मास के शुक्ल एवं कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कुछ मुहूर्त ग्रंथों में शून्य तिथि कहा गया है, इसलिए उस दिन विशेष शुभ कार्यों के लिए योग्य मुहूर्त देखकर ही कार्य करना चाहिए।
- 🕉️ भगवान शिव की पूजा
- अष्टमी तिथि पर भगवान शिव की पूजा विशेष फलदायी मानी गई है।
- शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र एवं धतूरा अर्पित करें।
- भगवान शिव को नारियल का भोग अर्पित करें अथवा शिवजी के प्रसाद में नारियल का उपयोग करें।
- ध्यान रखें: इस दिन स्वयं नारियल का सेवन नहीं करना चाहिए, ऐसी धार्मिक मान्यता है।
- 🌺 माँ दुर्गा की आराधना
- अष्टमी तिथि माँ दुर्गा की उपासना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।
- विशेषकर अष्टमी तिथि में जन्मे जातकों को भगवान शिव एवं माँ दुर्गा की नियमित पूजा करनी चाहिए। इससे—
- निर्भयता प्राप्त होती है। जीवन के संकट दूर होते हैं। आत्मबल एवं सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। शत्रु एवं नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।
- 🙏 अष्टमी का विशेष मंत्र
- ॥ ॐ दुं दुर्गायै नमः ॥
- इस मंत्र की कम से कम एक माला जप करने से माँ दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- 📚 अष्टमी में क्या करना शुभ है ?
- अष्टमी तिथि में निम्न कार्य अत्यंत शुभ माने गए हैं—
- नई विद्याओं का अध्ययन प्रारम्भ करना। संगीत, नृत्य, चित्रकला एवं अन्य ललित कलाओं का अभ्यास। आध्यात्मिक साधना एवं मंत्र-जप। पूजा-पाठ एवं हवन। साहस एवं पराक्रम से जुड़े कार्य।
- 🎉 अष्टमी पर मनाए जाने वाले प्रमुख पर्व
- वर्ष भर विभिन्न महीनों में अनेक महत्वपूर्ण अष्टमियाँ आती हैं, जैसे—
- 🌸 राधाष्टमी
- 👶 अहोई अष्टमी
- 🌼 गौरी अष्टमी
- ❄️ शीतला अष्टमी
- 🌺 दुर्गाष्टमी (महाअष्टमी) – नवरात्रि की सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक।
- ⚠️ अष्टमी तिथि में ध्यान रखने योग्य बातें
- भगवान शिव को नारियल अर्पित करें, लेकिन स्वयं नारियल का सेवन न करें (धार्मिक मान्यता)।
- क्रोध, विवाद और अपशब्दों से बचें । माता-पिता, गुरु एवं देवताओं का सम्मान करें । यथाशक्ति दान-पुण्य एवं सेवा करें।
- 🌸 अष्टमी तिथि का संदेश
- अष्टमी तिथि शक्ति, साहस, विजय और आध्यात्मिक उन्नति की तिथि है। इस दिन भगवान शिव और माँ दुर्गा की आराधना करने से भय, संकट एवं नकारात्मकता दूर होती है तथा जीवन में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- ॥ ॐ नमः शिवाय ॥ 🔱
- ॥ ॐ दुं दुर्गायै नमः ॥ 🌺
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नक्षत्र (Nakshatra) – भरणी 20.13 PM तक तत्पश्चात कृतिका
नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी – भरणी नक्षत्र के देवता यमराज जी और नक्षत्र के स्वामी शुक्र जी है ।
भरणी नक्षत्र 27 नक्षत्रों में से दूसरा नक्षत्र है और त्रिकोण का प्रतीक है। यह नक्षत्र प्रकृति के स्त्री वाले पहलू को इंगित करता है।
भरणी नक्षत्र बलिदान, ईर्ष्या, सहनशीलता और शुद्धि का प्रतीक भी माना जाता है। यह संयम का एक सितारा माना जाता है और गर्भ का प्रतिनिधित्व करता है। भरणी नक्षत्र सितारा का लिंग मादा है।
भरणी नक्षत्र का आराध्य वृक्ष आँवला और नक्षत्र स्वभाव क्रूर माना गया है ।
भरणी नक्षत्र में पैदा होने वाले एक बड़े दिल वाले व्यक्ति माने जाते हैं, यह लोगो की बातो का बुरा नहीं मानते है। आपकी ताकत आपकी मुस्कुराहट है आप हमेशा शांत और प्रसन्न रहते हैं। आप ईमानदार है और सकारात्मक रहते है। इनका पारिवारिक जीवन सुखमय रहता है ।
भरणी नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 9, 3 और 12, भाग्यशाली रंग पीला, लाल, और हरा एवं भाग्यशाली दिन मंगलवार तथा गुरुवार माना जाता है ।
भरणी नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातको को तथा सभी मनुष्यों को जिस दिन भारणी नक्षत्र हो उस दिन नक्षत्र देवता नाममंत्र:- “ॐ यमाय् नमः” l मन्त्र की एक माला का जप करना चाहिए, इससे भारणी नक्षत्र के शुभ फल मिलते है ।
भरणी नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातको को भगवान शंकर जी की आराधना परम फलदाई है, इन्हे इस नक्षत्र के दिन महा मृत्युंजय मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।
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कैसा भी सिर दर्द हो उसे करें तुरंत छूमंतर, जानिए सिर दर्द के अचूक उपाय
योग :- आयुष्मान 12.05 AM शुक्रवार 31 जुलाई तक
योग के स्वामी, स्वभाव :- आयुष्मान योग के स्वामी चंद्र देव एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है ।
प्रथम करण :- बालव 07.50 AM तक
करण के स्वामी, स्वभाव :- बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।
द्वितीय करण :- कौलव 18.52 PM तक तत्पश्चात तैतिल
करण के स्वामी, स्वभाव :- कौलव करण के स्वामी मित्र और स्वभाव सौम्य है ।
ब्रह्म मुहूर्त : 4.20 AM से 5.03 AM तक
विजय मुहूर्त : 14.43 PM से 15.37 PM तक
गोधूलि मुहूर्त : 19.14 PM से 19.34 PM तक
अमृत काल : 06.24 AM से 08.09 AM तक
अग्नि वास : आकाश 18.52 PM तक तत्पश्चात पाताल में
अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।
जब पाताल में अग्नि वास है तो वह हवन से सम्बन्धित अनुष्ठानों के लिये शुभ नहीं मानी जाती है, यह अशुभ मानी गई है । अग्नि के पाताल वास के दौरान किये जाने वाले हवन सम्बन्धित अनुष्ठानों व्यक्ति को आर्थिक नुकसान करना पड़ता है उसका धन नष्ट हो सकता है।
शिव वास : माँ गौरी के साथ 18.52 AM तक तत्पश्चात सभा में
जब भगवान शंकर गौरी मइय्या के साथ होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शंकर जी के देवी गौरी के साथ रहने के समय किये गए रूद्रअभिषेक से घर कारोबार में सुख-समृद्धि आती है, स्थाई लक्ष्मी का वास होता है ।
शिव वास जब सभा में होता है अर्थात जब भगवान शंकर अपनी सभा में होते हैं, तो उस सामान्य रुद्र अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शिव के सभा में होने पर रूद्र अभिषेक करने से दुःख का सामना करना पड़ सकता है।
- दिशाशूल (Dishashool)– बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
- गुलिक काल : – गुलिक 09:30 AM से 11 AM बजे तक ।
- राहुकाल (Rahukaal)– दिन – 1:30 PM से 3:00 PM तक।
- सूर्योदय – प्रातः 05:45
- सूर्यास्त – सायं 19.08
- विशेष – अष्टमी को नारियल का सेवन नहीं करना चाहिए, अष्टमी को नारियल का सेवन करने से बुध्दि का नाश होता है ।
- पर्व त्यौहार–
- मुहूर्त (Muhurt) –
“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।
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( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )
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🕉️ *अध्यात्म ज्योतिष परामर्श केंद्र, रायपुर, छत्तीसगढ़* 🕉️
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