बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang, 4 मार्च 2026 का पंचांग,

बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang, 4 मार्च 2026 का पंचांग,

आप सभी को रंगो के पर्व होली, धुलंडी की हार्दिक शुभकामनायें


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पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi) 2:- वार (Day) 3:- नक्षत्र (Nakshatra) 4:- योग (Yog) 5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए बुधवार का पंचांग, Budhvar Ka Panchang, आज का पंचांग, aaj ka panchang,

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बुधवार का पंचांग (Budhwar Ka Panchang)


4 मार्च 2026 का पंचांग, ( Panchang ), 4 March 2026 ka Panchang,

गणेश गायत्री मंत्र :
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।

।। आज का दिन मंगलमय हो ।।

* दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।

मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष अष्टमी के दिन भैरव नाथ प्रकट हुए थे, जानिए भगवान भैरव नाथ के व्रत व पूजा का विशेष विधान,


बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

इस उपाय से शरीर रहेगा निरोगी, शक्ति रहेगी भरपूर, बुढ़ापा पास भी नहीं आएगा, जानिए रोगनाशक दिव्य आहार,

* बुधवार को सभी ग्रहो के राजकुमार बुध देव की आराधना करने से ज्ञान मिलता है, वाकपटुता में प्रवीणता आती है, धन लाभ होता है ।

बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाने तथा रात को सोते समय फिटकरी से दाँत साफ करने से आर्थिक पक्ष मजबूत होता है ।

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*विक्रम संवत् 2082,
*शक संवत – 1947
*कलि संवत 5127
*अयन – उत्तरायण
*ऋतु – बसंत ऋतु
*मास – फाल्गुन माह
*पक्ष – शुक्ल पक्ष
*चंद्र बल – वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन ,

बुधवार को बुध की होरा :-

प्रात: 6.43 AM से 7.45 AM तक

दोपहर 01.18 PM से 2.19 PM तक

रात्रि 20.15 PM से 21.18 PM तक

बुधवार को बुध की होरा में हाथ की सबसे छोटी उंगली और बुध पर्वत को हल्के हल्के रगड़ते हुए अधिक से अधिक बुध देव के मन्त्र का जाप करें ।

ज्योतिष, पढ़ाई, लिखाई, सीखने, वाकपटुता, अपना प्रभाव डालने और व्यापार में सफलता के लिए बुध की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

बुधवार के दिन बुध की होरा में बुध देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

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बुध देव के मन्त्र

“ॐ बुं बुधाय नमः” अथवा

“ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।।”

कार्तिक पूर्णिमा के दिन इस तरह से करें स्नान, अक्षय पुण्य की होगी प्राप्ति,

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  • तिथि (Tithi) – प्रतिपदा 16.48 PM तक तत्पश्चात द्वितीया,
  • तिथि के स्वामी – प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव जी और द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्मा जी है ।

होलिका दहन के दूसरे दिन होली  / धुलेंडी का पर्व मनाया जाता है । आज लोग एक दूसरे को रंग, अबीर-गुलाल लगाते हैं, इसे धुलेंडी कहा जाता है, इस दिन हुलियारों की टोलियाँ ढोल बजा बजा घूम,घूम कर होली खेलती है । इस दिन लोग एक दूसरे के घर जा कर रंग लगाते है और गले मिलते है।

इस बार रंगो का यह पर्व मंगलवार 3 मार्च को चंद्र ग्रहण लगने के कारण होलिका दहन के बाद एक दिन छोड़कर आया है ।

धुलेंडी / होली क्यों मनाते है :  पौराणिक मान्यताओं के अनुसार,  भगवान श्री विष्णु जी ने त्रेतायुग के प्रारम्भ में धूलि वंदन किया था, इसलिए इस दिन को धुलेंडी कहा जाने लगा ।

प्रेम के देवता कामदेव जी का पुनर्जन्म  : एक बार भगवान शंकर जी ने कामदेव को भस्म कर दिया था लेकिन रति के विलाप और देवताओं के अनुरोध पर उन्होंने कामदेव को दुबारा जीवित कर दिया था जो की होली / धुलंडी का दिन था ।  इसलिए  धुलेंडी को कामदेव के पुनर्जन्म और उनकी पत्नी देवी रति को प्राप्त वरदान की खुशी में मनाया जाता है ।

असत्य पर सत्य की जीत : धुलेंडी जिस दिन रंग खेला जाता है, यह होलिका दहन के अगले दिन मनाई जाती है, जो असत्य पर सत्य की जीत का धोतक है ।

भक्त प्रह्लाद और होलिका की कथा : प्रह्लाद, जो राक्षस राज हिरण्यकश्यप का पुत्र और भगवान श्री विष्णु जी का परम भक्त था, उसको मरने के लिए होलिका उसे गॉड में लेकर अग्नि में बैठ गयी थी लेकिन प्रह्लादजी के प्राण बच गए परन्तु होलिका जल गई, इसलिए यह पर्व  धुलेंडी असत्य पर सत्य की जीत के रूप में मनाया जाता है और लोग हर्ष उल्लास से आपस में रंग खेलते है ।

होली के दिन लोग पुरानी से पुरानी कटुता को भूला कर गले मिलकर फिर से दोस्त बन जाते हैं। होली में आपस में वैर भाव मिटा कर खुद पहल करके दुश्मनो से भी रंग खेलकर सभी से साफ मन से गले मिलना चाहिए ।

मान्यता है कि  इस दिन पहल करके शत्रुता भुलाने से वर्ष भर आप के शत्रु आपसे पराजित होते रहेंगे ।होली पर रंग सभी व्यक्तियों को जरूर ही खेलना चाहिए, इससे घर परिवार में प्रेम, सौहार्द्य और सुख का वास होता है ।

होली के दिन जिस दिन रंग खेलते है उस दिन सुबह स्नान के बाद लाल गुलाल लेकर उसे सबसे पहले घर के मंदिर में देवी देवताओं की मूर्ति / चित्र पर लगाएं
फिर घर के बड़े बुजुर्गों को रंग लगाकर उनसे आशीर्वाद लेकर ही रंग खेलना शुरू करना चाहिए ।

शास्त्रों के अनुसार देवता भी होली खेलते है, जो कार्य देवताओं को भी प्रिय है उसे तो हमें अवश्य करना ही चाहिए ।

इस तरह से मनाएं जन्माष्टमी का पर्व जीवन में लग जायेगा सुखो का अम्बार 

नक्षत्र (Nakshatra) – पूर्वाफाल्गुनी 07.39 AM तक तत्पश्चात उत्तराफाल्गुनी

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी-   पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के देवता भग (धन व ऐश्वर्य के देवता) और स्वामी शुक्र देव जी है ।

आकाश मंडल में पूर्वा फाल्गुनी को 11वां नक्षत्र माना जाता है। इस नक्षत्र का प्रतीक बिस्तर के सामने के दो पैर हैं जो आराम, अच्छे भाग्य का भी प्रतीक है। 

यह नक्षत्र सुख, धन, कामुक प्रसन्नता, प्रेम और मनोरंजन को दर्शाता हैं। इस नक्षत्र काआराध्य वृक्ष : पलाश तथा स्वाभाव शुभ माना गया है। पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र सितारे का लिंग महिला है।

 इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक पर जीवनभर सूर्य और शुक्र का प्रभाव बना रहता है।

पूर्वा फाल्गुनी में जन्मा जातक सुन्दर, विलासी, स्त्रियों का प्रिय, साहसी, चतुर, वाकपटु, खुले दिल वाला और घूमने फिरने का शौक़ीन होता है, इन्हे स्त्री और धन-सं‍पत्ति का पूर्ण सुख मिलता है।

लेकिन यदि सूर्य और शुक्र शुभ नहीं है तो जातक बहुत कामुक, विलासी, धूर्त, घमंडी, जुए – सट्टे का लती और क्रोधी हो सकता है।

इस नक्षत्र में जन्म लेने वाली स्रियाँ  धार्मिक, दयालु, आकर्षक, मिलनसार, आसानी से दूसरो को  प्रभावित करने वाली, वैसी प्रवर्ति की होती है। यह आसानी से  जीवन में सफलता प्राप्त कर लेती हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 9, भाग्यशाली रंग, चाकलेटी, हल्का भूरा, भाग्यशाली दिन शुक्रवार और रविवार माना जाता है ।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ भगाय नमः”। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।

संकटो से रक्षा के लिए इस नक्षत्र के जातको को नित्य भगवान शंकर की आराधना करनी चाहिए । पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे जातको को नित्य तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन माँ लक्ष्मी जी की आराधना से कभी भी धन की कमी नहीं होती है ।

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  • योग (Yog) – धृति 08.52 AM तक तत्पश्चात शूल
  • योग के स्वामी, स्वभाव :-   धृति योग के स्वामी जल एवं स्वभाव श्रेष्ठ है ।
  • प्रथम करण : – कौलव 16.48 PM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-   कौलव करण के स्वामी मित्र और स्वभाव सौम्य है ।
  • दिशाशूल (Dishashool)- बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।

    इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – बुधवार का गुलिक काल 10:30 AM से 12 PM बजे तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal) : – बुधवार का राहुकाल दिन 12:00 PM से 1:30 PM तक ।
  • सूर्योदय – प्रातः 6.43 AM
  • सूर्यास्त – सायं 18.23 PM
  • विशेष – प्रतिपदा के दिन कद्दू  /  पेठे का सेवन नहीं करना चाहिए, प्रतिपदा के दिन इनका सेवन करने से धन की हानि होती है । 
  • मुहूर्त :-
  • पर्व त्यौहार – होली का पर्व, धुलंडी

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हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

मित्रो हम इस साईट के माध्यम से वर्ष 2010 से निरंतर आप लोगो के साथ जुड़े है। आप भारत या विश्व के किसी भी स्थान पर रहते है, अपने धर्म अपनी संस्कृति को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए आचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय अध्यात्म ज्योतिष परामर्श केंद्र रायपुर छत्तीसगढ़ हर समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है www.memorymuseum.net के साथ अवश्य जुड़ें, हमारा सहयोग करें ।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
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होली holi हर्ष, उल्लास, जोश, रंगों, उमंगों और मौज मस्ती का पर्व है। पुराणों में होली के बारे में लिखा है कि हर मनुष्य को अपने पूरे हर्ष, उल्लास के साथ होली के पर्व को मनाना चाहिए, इससे जीवन में सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

मान्यता है कि सभी राशियों पर अलग अलग रंगो का प्रभाव होता है, और अगर आप अपने भाग्यशाली रंग से होली खेलें तो फिर आपका भाग्य आप पर अवश्य ही प्रसन्न रहेगा । यहाँ पर हम प्रत्येक राशि के अनुसार उनके भाग्यशाली रंग बता रहे है जिनसे उन राशि के जातकों को होली खेलनी चाहिए :–

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मेष राशि Mesh Rashi :-

मेष राशि का स्वामी मंगल है और यह अग्नि तत्व की राशि है, मेष राशि के “जातकों के लिए लाल और पीला रंग उत्तम है।

लाल रंग प्रेम और सच्चाई का तथा पीला रंग अपनेपन और सहनशीलता का प्रतीक है ।

इन दोनों रंगो के संयोग से इनके जीवन में प्रेम और सकारात्मक ऊर्जा का निरन्तर प्रवाह बना रहेगा।

तो देर ना करे आप अपने परिजनों, प्रियजनों और इष्ट मित्रो को होली पर इन रंगो से रंगने का अवसर हाथ से बिलकुल भी ना जाने दें ।

जीवन की सभी अस्थिरताओं को करना हो दूर तो अवश्य करें ये होली के अचूक उपाय

वृषभ राशि Vrashabh Rashi :-

वृष राशि का स्वामी शुक्र है और यह पृथ्वी तत्व की राशि है ।

वृष राशि के जातक सफ़ेद कपडे पहन कर बैंगनी और नारंगी रंगो से होली खेलें यह उनके लिए सुख और सौभाग्य लाएगा। इन रंगो से आपका मन भी प्रफुल्लित रहेगा।

यह लोग अपने प्रियजनों के शरीर पर बैंगनी रंग तथा चेहरे पर नारंगी रंग लगाएं। इस राशि के जातक होली खेलते समय गहरे रंगों वाले कपड़े नहीं पहनें।

लेकिन अगर इन्हे सफ़ेद कपड़े पसंद नहीं है और यह होली के समय रंगीन वस्त्र पहनना चाहते हैं तो यह नारंगी या बैंगनी रंग के वस्त्र पहने ।

वृष राशि के जातक यथासंभव काले अथवा हरे रंग से होली न खेलें।

 शुभ फलो के लिए केवल इसी समय करें  होलिका दहन या होलिका का पूजन, जानिए होलिका दहन का शुभ मुहूर्त

मिथुन राशि Mithun Rashi :-

मिथुन राशि का स्वामी बुध है और यह वायु तत्व की राशि है । बुध का हरे रंग का प्रतीक है अत: मिथुन राशि के जातक होली हरे रंग से खेले या रंग इनके लिए बहुत शुभ रंग रहेगा ।

इस रंग से होली खेलने से ना केवल इनका मान सम्मान बढ़ेगा वरन इनके सम्बन्धो में भी प्रगाढ़ता आएगी । इस राशि के जातक हरे रंगो के अतिरिक्त बैंगनी रंग से भी होली खेल सकते हैं।

इन दोनों रंगो के संयोग से इन्हे जीवन में बहुत आसानी से सुख, शांति, प्रेम और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होगी ।

इस राशि के लोग सबसे पहले अपने ईष्ट, प्रियजनों के माथे पर रंग लगाकर ही होली खेलने की शुरुआत करें ।

अवश्य जानिए :- इस उपाय से उम्र का होगा नहीं असर, जानिए जवान रहने का अचूक उपाय 

कर्क राशि Kark Rashi :-

कर्क राशि का स्वामी चन्द्र है और यह जल तत्व की राशि है । कर्क राशि वाले व्यक्ति बहुत ही कल्पनाशील होते हैं और समान्यता: रंगों का पर्व होली इनका पसंदीदा त्योहार होता है। यह होली के रंग और अच्छे-अच्छे पकवान दोनों के ही शौक़ीन होते हैं।

चूँकि चन्द्रमा सफ़ेद रंग का प्रतीक है इसीलिए सफेद रंग के वस्त्र पहनकर होली खेलना इनके लिए शुभ होगा। यह इनको हर्ष, शांति और दिल से सकून प्रदान करेगा ।

कर्क राशि के जातक नीले और हरा रंग से होली खेले । यह लोग पीले रंग से भी होली खेल सकते है। इससे इन्हे धन, यश और वैभव की प्राप्ति होगी।

लेकिन लाल और नारंगी रंग से परहेज करें। यह रंग आपको गुस्से में उत्तेजित कर सकते हैं।

सिंह राशि Singh Rashi :-

सिंह राशि Singh Rashi का स्वामी सूर्य है और यह अग्नि तत्व की राशि है । सिंह राशि के लोग बहुत ही जिंदादिल होते है और यह सभी जगह अपने लिए बड़ी ही आसानी से महत्वपूर्ण स्थान बना लेते है ।

यह लोग गोल्डन पीले, लाल और नारंगी रंग से होली खेले । इससे ना केवल यह खुद ऊर्जावान रहेंगे वरन इनके सम्पर्क में आने वाले लोग भी उत्साह से ओत प्रोत रहेंगे।

सिंह राशि के जातक सुबह भगवान सूर्य को प्रणाम करके ही होली खेलने की शुरुआत करें तो इनके जीवन में धन धान्य की कोई भी कमी नहीं रहेगी ।

इस राशि के जातक होली के लिए किसी के आने इन्तज़ार न करें वरन खुद घर से निकल कर लोगो को अपने रंगो से रंगना शुरू करें ।

यह लोग अपने प्रियजन के चेहरे पर लाल, पीला अथवा गोल्डन रंग लगाएं और किसी को भी रंग लगाने से मना नहीं करें। इनकी यही खूबी तो इनके परिचितों से इनकी नजदीकियां बढ़ाती है।

अवश्य पढ़ें :- कैसी भी बवासीर हो केवल एक दिन में ही मिलेगा आराम 

कन्या राशि Kanya Rashi :-

कन्या राशि Kanya Rashi का स्वामी बुध है और यह पृथ्वी तत्व की राशि है।

कन्या राशि के लोग हरे, भूरे अथवा नारंगी रंगो से होली खेले तो उनके लिए शुभ होगा । इन रंगो से होली खेलने से इनके जीवन के आर्थिक संकट दूर होते है ।

होली के अवसर पर यह अपने मन में किसी के लिए भी कटुता ना रखे इससे इनके सम्बन्ध घनिष्ठ होंगे इन्हे धन और यश की भी प्राप्ति होगी ।

कर्क राशि के जातक होली में किसी का भी दिल कदापि ना दुखाएं ।

कर्क राशि के लोग होली खेलते समय सामने वाले के सिर और माथे पर हरे, नारंगी रंग को लगाकर होली खेलना शुरू करें और गीले रंग में भूरे और बैंगनी रंग का प्रयोग करें। यह दोनों रंग भी कन्या राशि के लोगो के शुभ माने गए हैं।

तुला राशि Tula Rashi :-

तुला राशि Tula Rashi का स्वामी शुक्र है और यह वायु तत्व की राशि है।

यह सफेद और हलके गुलाबी रंग के वस्त्र पहनकर होली खेलें तो यह इनके लिए उत्तम रहेगा ।

तुला राशि के जातको को नीले, केसरिया अथवा गुलाबी रंगो से होली खेलना शुभ रहेगा ।

इससे यह ना केवल दूसरों के ह्रदय में अपना अलग स्थान ही बना पाएंगे वरन इनको धन की भी कोई कमी नहीं रहेगी ।

यह अपने प्रियजनों को बहुत प्रेम और साफ मन से खूब जी भरकर रंग लगाएं ।

वृश्चिक राशि Vrishchik Rashi :-

वृश्चिक राशि Vrishchik Rashi का स्वामी मंगल है और यह जल तत्व की राशि है।

इसी लिए इनके लिए लाल,मैरून और पीला रंग उत्तम है। इस राशि के जातको को होली विशेष रूप से पसंद होती है ।

लाल और मैरून रंग के प्रयोग से इनके जीवन के सभी आर्थिक संकट दूर रहते है ।

होली के अवसर पर यह अपने उच्चाधिकारियों से भी आसानी से नजदीकियां बढ़ा सकते हैं। विपरीत लिंग वाले जातक भी इनकी ओर आसानी से आकर्षित होंगे ।

यह अपने प्रियजनों के चेहरे पर लाल और पीला गुलाल लगाकर शरीर के अन्य अंगो पर लाल और मैरून रंग लगाएं। इन्हे नजदीकियाँ बढ़ाने के लिए होली के पर्व का अवश्य ही लाभ उठाना चहिये।

धनु राशि Dhanu Rashi :-

धनु राशि Dhanu Rashi का स्वामी गुरु है और यह अग्नि तत्व की राशि है। इसी कारण इस राशि के जातको के लिए लाल रंग एवं पीला रंग सर्वोत्तम है।

होली में यह दोनों रंग ऊर्जा और प्रसन्नता को बढ़ाएंगे । पीला रंग देवताओं का भी प्रिय रंग है। इस रंग के प्रभाव से जातक को गुरु ग्रह से संबंधित कोई भी परेशानियां नहीं होती है ।

आप लोग अपने किसी भी प्रियजन के साथ होली ना खेलकर उन्हें निराश बिलकुल भी ना करें ।

धनु राशि के जातक होली के अवसर पर अपने प्रियजन से प्यार का इजहार भी कर सकते हैं। यह लोग अपने संबधो में मजबूती लाने के लिए अपने प्रियजनों के गालों पर पीला, लाल रंग लगाएं।

ध्यान रहे कि आप लोग किसी भी प्रकार के घातक रासायनिक रंगो का कतई प्रयोग ना करें ।

एकादशी के इन उपायों से पाप होंगे दूर, सुख – समृद्धि  की कोई कमी नहीं रहेगी 

मकर राशि Makar Rashi :-

मकर राशि Makar Rashi का स्वामी शनि है और यह पृथ्वी तत्व की राशि है।

मकर राशि के जातको को होली खेलना कोई विशेष नहीं भाता है लेकिन होली खेलना इनके लिए बहुत ही शुभ रहता है अत: इन्हे भी होली अवश्य ही खेलनी चाहिए ।

होली पर नीले अथवा काले रंग से होली खेलने से आपको अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में आसानी रहेगी, क्योंकि इन रंगो के प्रभाव से आप परिश्रमी और लक्ष्य के प्रति समर्पित होंगे ।

आपकी राशि के लिए लाल, भूरा और बैंगनी रंग भी उत्तम है।

चूँकि आप गहरे रंगो का प्रयोग कर रहे है इसलिए यह ध्यान अवश्य ही दीजिये कि यह रंग हानिकारक बिलकुल भी ना हो ।

कुम्भ राशि Kumbh Rashi :-

कुम्भ राशि Kumbh Rashi का स्वामी भी शनि देव है और यह वायु तत्व की राशि है।

शनि के शुभ प्रभाव को बनाए रखने के लिए काला, बैगनी अथवा लाल रंग का प्रयोग करना आपके लिए अच्छा होगा। इसके अलावा आप गुलाबी रंग भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

काला रंग परिश्रम, बैंगनी ऐश्वर्य, लाल प्रेम और गुलाबी सुख का प्रतीक माना जाता है ।

इन रंगों के शुभ प्रभाव से आप हर परिस्थितियों को अपने पक्ष में करने में आप सफल होंगे। आप में सभी को अपना बनाने की नैसर्गिक क्षमता है इसलिए आपको होली पूरे उत्साह से खेलकर इस अवसर का लाभ अवश्य ही उठाना चाहिए ।

इस राशि के जातको को काले कुत्तों की सेवा भी अवश्य ही करनी चाहिए ।

मीन राशि Meen Rashi :-

मीन राशि Meen Rashi का स्वामी गुरु है और यह जल तत्व की राशि है। पीला रंग गुरु का रंग होने के कारण इस रंग से होली खेलना आपके लिए शुभ होगा।

आप भगवान शिव के शिवलिंग पर पीला रंग चढ़ाकर होली खेलने की शुरुआत करें । साथ ही हरा और गुलाबी रंग भी आपके लिए शुभ रहेगा ।

इन रंगो से होली खेलने से आपको धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी ।

आपकी सौम्यता की वजह से आपके परिचित भी आपसे होली खेलने को लालायित रहते है ।

आप होली में किसी को भी निराश ना करें वरन बड़ चढ़ कर इस खुशियों के पर्व को अवश्य ही मनाएं ।

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पं मुक्ति नारायण पाण्डेय
( कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ हर समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है 
संपर्क सूत्र 9425203501 +7587346995+07714070168*)
Updated On : 2025-01-15 03:15:55 PM

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मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang, 3 मार्च 2026 का पंचांग,

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आप सभी को फाल्गुन माह की पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनायें


मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang,

Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)




पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए मंगलवार का पंचांग (Mangalvar Ka Panchang)।

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

आज का पंचांग, Aaj ka Panchangमंगलवार का पंचांग, Mangalvar Ka Panchang,

3 मार्च Ka Panchang 3 March का पंचांग, 2026 ka panchang,

हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।

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आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
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।। आज का दिन मंगलमय हो ।।

*विक्रम संवत् 2082,
*शक संवत – 194
7
*कलि सम्वत 5127
*अयन – 
उत्तरायण
*ऋतु – बसंत
 ऋतु
*मास –
 फाल्गुन माह,
*पक्ष – शुक्ल पक्ष
*चंद्र बल – मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, कुम्भ, मीन,

मंगलवार को मंगल की होरा :-

प्रात: 6.44 AM से 7.39 AM तक

दोपहर 01.15 PM से 8.18 PM तक

रात्रि 20.09 PM से 21.011 PM तक

मंगलवार को मंगल की होरा में हाथ की निम्न मंगल पर दो बूंद सरसो का तेल लगा कर उसे हल्के हल्के रगड़ते हुए अधिक से अधिक मंगल देव के मन्त्र का जाप करें ।

कृषि, भूमि, भवन, इंजीनियरिंग, खेलो, साहस, आत्मविश्वास

और भाई के लिए मंगल की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

मंगलवार के दिन मंगल की होरा में मंगल देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में मंगल मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

मंगल देव के मन्त्र

ॐ अं अंगारकाय नम: अथवा

ॐ भौं भौमाय नम:”

जरूर पढ़े :-  जीवन में समस्त संकटो को दूर करने, सफलता का द्वार खोलने के लिए नवरात्री के मंगलवार को अवश्य ही करें ये उपाय,

तिथि :- पूर्णिमा 17.07 PM तक तत्पश्चात प्रतिपदा,

तिथि के स्वामी :- पूर्णिमा तिथि के स्वामी चंद्र देव जी और प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव जी है ।

आज फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि है। फाल्गुन मा​ह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि सोमवार 02 मार्च को शाम 17 बजकर 55 मिनट से शुरू हुई जो आज मंगलवार 3 मार्च को शाम 16 बजकर 46 मिनट तक है ।

फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका दहन का पर्व होता है, होलिका का दहन भद्रा रहित समय में किया जाता है । शास्त्रों के अनुसार अगर होलिका दहन के समय में भद्रा आ रही हो तो  होलिका दहन का मुहूर्त हमेशा भद्रा मुख का त्याग करके निर्धारित होता है क्योंकि भद्रा मुख में होलिका दहन बिलकुल वर्जित है, हाँ भद्रा की पुछ में होलिका दहन किया जा सकता है ।

इस वर्ष 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा पर सोमवार 2 मार्च को भद्रा तिथि सांय 17:46 पर पूर्णिमा तिथि लगते ही लग गई थी जो आज मंगलवार को सूर्योदय से पूर्व 05:19 तक रही थी ।

2 मार्च सोमवार को मध्य रात्रि में 12.30 AM से 02.10 AM के मध्य भद्रा का पुछ मिल रहा था जिसमे होलिका का दहन किया गया है, होलिका दहन के अगले दिन रंग खेला जाता है जिसे धुलंडी भी कहते है लेकिन आज चंद्र ग्रहण है जो भारत में भी नज़र आएगा । भारत में नज़र आने के कारण इसका सूतक भी मान्य है ग्रहण से 9 घंटे पहले ही लग जाता है ।

यह चंद्र ग्रहण भारतीय समय के अनुसार दोपहर 3 बजकर 21 मिनट को लगेगा और शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा ।

चंद्र ग्रहण लगने से 9 घंटे पहले सूतक लग जाता है और उसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है, सूतक चूँकि आज सुबह 6.21 AM से ही लग जायेगा जो ग्रहण की समाप्ति पर 6.47 PM तक रहेगा इसलिए इस वर्ष होली पर रंग होलिका दहन के बाद एक दिन छोड़कर अर्थात 3 मार्च मंगलवार की जगह 4 मार्च बुधवार को को खेला जायेगा ।

आज चंद्र ग्रहण के कारण प्रात: 06.21 से लगने वाले सूतक की वजह से मंदिरो के कपाट सुबह से ही बंद रहेंगे, जो चंद्र ग्रहण की समाप्ति पर सांय 6.47 के बाद ही खुलेंगे ।

पूर्णिमा के दिन प्रात: काल सूर्योदय से पूर्व पवित्र नदियों में स्नान अथवा घर पर ही जल में गंगा जल डाल कर स्नान करने से समस्त पापो का नाश होता है ।

पूर्णिमा तिथि को चन्द्रमा सम्पूर्ण होता है। पूर्णिमा तिथि माँ लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है, इस दिन सुख समृद्धि के लिए चंद्र ग्रहण के बाद माँ लक्ष्मी की विधि पूर्वक उपासना अवश्य करें।

पूर्णिमा तिथि के दिन माँ लक्ष्मी की आराधना करने, श्री सूक्त का पाठ एवं कनकधारा स्रोत्र का पाठ करने से उस घर में सदैव माँ लक्ष्मी जी का वास होता है ।

पूर्णिमा तिथि को संध्या के समय में सत्यनारायण भगवान की पूजा तथा कथा की जाती है एवं चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। आप सांय काल चंद्र ग्रहण के बाद सत्य नाराणय की कथा कहें या सुने इससे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होगी ।

पूर्णिमा तिथि के स्वामी चन्द्र देव जी है, पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति को चन्द्र देव की पूजा नियमित रुप से अवश्य ही करनी चाहिए।

पूर्णिमा तिथि के दिन चन्द्र देव जी के मन्त्र

ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:। अथवा

ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम:।

का जाप करने से कुंडली में चन्द्रमा के शुभ फल मिलने लगते है ।

इस दिन सफ़ेद वस्त्र पहने और चन्द्रमा की चांदनी में अवश्य बैठें ।

पूर्णिमा के दिन लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा आदि का सेवन नहीं ना करें, इस दिन परिवार में सुख-शांति बनायें रखे इस दिन क्रोध और हिंसा से दूर रहना चाहिए ।

पूर्णिमा के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना, सहवास करना निषिद्ध है।

पूर्णिमा के दिन ब्रह्यचर्य का पालन करना चाहिए । पूर्णिमा के दिन गरीब या जरुरतमंद को दान करने से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।

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आज मंगलवार 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लग रहा है। इस साल भारत में सिर्फ यही ग्रहण दिखाई देगा। इस ग्रहण के दौरान चंद्रमा लाल रंग का नजर आएगा इसे ब्लड मून भी कहते है।

जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में आता है तब इस तरह का दृश्य नज़र आता है । इस समय सूर्य की रोशनी चंद्रमा तक पृथ्वी के वायुमंडल से मुड़कर पहुंचती है, जिससे चंद्रमा लाल या तांबे के रंग का नजर आने लगता है।

यह चंद्र ग्रहण भारतीय समय के अनुसार दोपहर 3 बजकर 21 मिनट को लगेगा और शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा अर्थात इस चंद्र ग्रहण की कुल अवधि लगभग 3 घंटे 26 मिनट की होगी । यह चंद्र ग्रहण भारत के अतिरिक्त , एशिया, ऑस्ट्रेलिया एवं अफ्रीका में दिखाई देगा ।

भारत में इस चंद्र ग्रहण का प्रारंभ शाम 6 बजकर 26 मिनट से होगा और इस ग्रहण का समापन शाम 6 बजकर 46 मिनट पर होगा। अर्थात भारत में चंद्र ग्रहण की अवधि लगभग 20 मिनट्स की होगी ।

चंद्र ग्रहण लगने से 9 घंटे पहले सूतक लग जाता है और उसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है, सूतक चूँकि आज सुबह 6.21 AM से ही लग जायेगा जो ग्रहण की समाप्ति पर 6.47 PM तक रहेगा इसलिए इस वर्ष होली पर रंग होलिका दहन के बाद एक दिन छोड़कर अर्थात 3 मार्च मंगलवार की जगह 4 मार्च बुधवार को को खेला जायेगा ।

ग्रहण के दौरान मंत्र का जप करना अत्यंत शुभ माना गया है । मान्यता है कि ग्रहण में जप और दान करने से उसका करोड़ गुना फल मिलता है ।

ग्रहण काल में भोजन पकाना, भोजन करना, सोना, देव प्रतिमा का स्पर्श करना, शुभ कार्य करना, तेल-मालिश करना, बाल-नाखून काटना, शारीरिक संबंध बनाना आदि कार्य वर्जित कहे गए हैं ।

चंद्र ग्रहण के समय अधिक से अधिक मंत्रो का मानसिक रूप से जाप करना चाहिए । चंद्र ग्रहण के समय ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम:। अथवा

ॐ सोम सोमाय नम : का अधिक से अधिक जाप करना परम फलदाई है ।

  • नक्षत्र (Nakshatra) – मघा 07.21 AM तक तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुनी
  • नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी –  मघा नक्षत्र के देवता पितर देव और नक्षत्र स्वामी केतु जी है ।

मघा का अर्थ होता है महान। मघा नक्षत्र का आकाश में 10वां स्थान है। मघा नक्षत्र के चारों चरण सिंह राशि में हीआते हैं।  

मघा नक्षत्र को सिंहासन द्वारा दर्शाया गया है जो शक्ति, उच्च प्रतिष्ठा, गुणों का प्रतीक है। मघा नक्षत्र के जातको पर जीवन भर केतु और सूर्य का प्रभाव रहता है।  

मघा नक्षत्र का आराध्य वृक्ष: बरगद एवं नक्षत्र का स्वभाव उग्र, क्रूर माना गया है।

मघा नक्षत्र में जन्मे जातक बुद्धिमान, स्पष्टवादी, दयालु, भरोसेमंद, साहसी, धीरे बोलने वाले, बड़ो का सम्मान करने वाले और अपनी स्त्री के वश में रहने वाले होते है। इन्हे भूमि, भवन और माता का पूर्ण सुख मिलता है।

लेकिन यदि चन्द्रमा, केतु और सूर्य खराब स्थिति में हैं तो जातक क्रोधी, शक्की, भावुक, बहुत अधिक चिंता करने वाला होता है।

इस नक्षत्र में जन्म लेने वाली स्रियाँ मददगार, परोपकारी, विलासी जीवन पर खर्च करने वाली लेकिन विवादों में शामिल होने वाली जल्द ही आवेश में आ जाने वाली होती है ।

मघा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 7 और 10, भाग्यशाली रंग, क्रीम, लाल , भाग्यशाली दिन शनिवार और मंगलवार का माना जाता है ।

मघा नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ पितृभ्यो नमः”। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।

मघा नक्षत्र के जातको को हर अमावस्या को पितरो के निमित ब्राह्मण भोजन और दान पुण्य करना चाहिए इससे पितरो के आशीर्वाद से जीवन से अस्थिरताएँ दूर होती है ।

इस नक्षत्र के जातको को भगवान शिव और माँ काली की आराधना भी श्रेष्ठ फलदाई कही गयी है ।

मघा नक्षत्र का पेड़ बरगद है, अतः मघा नक्षत्र में बरगद के पेड़ की पूजा करनी चाहिए। इस नक्षत्र के जातको को बरगद के पेड़ के एक पत्ते पर हल्दी से स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर उसे अपने घर के मंदिर में रखकर अगले दिन उस पत्ते को बहते पानी में प्रवाहित करना चाहिए ।

  • योग :- सुकर्मा 10.25 AM तक तत्पश्चात धृति
  • योग के स्वामी :-  सुकर्मा योग के स्वामी इंद्र जी और स्वभाव शुभ माना जाता है ।
  • प्रथम करण : – बव 17.07 PM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-   बव करण के स्वामी इंद्र देव और स्वभाव सौम्य है ।
  • द्वितीय करण : – बालव 04.34 AM बुधवार 4 मार्च तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-      बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 05.05 AM से 5.55 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.29 PM से 15.16 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.20 PM से 18.44 PM तक
  • अमृत काल : 01.13 AM से 02.49 AM बुधवार 04 मार्च तक
  • दिशाशूल (Dishashool)- मंगलवार को उत्तर दिशा का दिकशूल होता है।

    यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से गुड़ खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – दोपहर 12:00 से 01:30 तक है ।
  • राहुकाल (Rahukaal) दिन – 3:00 से 4:30 तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 06:44
  • सूर्यास्त – सायं 18:22
  • विशेष – पूर्णिमा और व्रत के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना, सहवास करना, क्रोध करना, हिंसा करना मना है ।
  • ऐसा करने से दुर्भाग्य आता है, दुःख, कलह और दरिद्रता के योग बनते है । 
  • पर्व – त्यौहार- फाल्गुन माह की पूर्णिमाचंद्र ग्रहण

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )
9425203501.    7587346995


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होलिका दहन कैसे करें, Holika dahan kaise karen, होलिका दहन 2026,

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होली हिंदुओं का अत्यंत प्रमुख पर्व है । होली का पर्व Holi Ka Parv दो दिन मनाया जाता है। पहले दिन होलिका दहन Holika Dahan होता है इस दिन होलिका को जलाया जाता  है और दूसरे दिन सभी लोग हर्ष उल्लास से रंग खेलते है ।

शास्त्रो में होलिका दहन Holika Dahan की विधि बतायी गयी है, मान्यता है कि होलिका दहन Holika Dahan विधिपूर्वक करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है, घर कारोबार में सुख-समृद्धि का वास होता है।

वर्ष 2026 में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त Holika Dahan Ka Shubh Muhurt  मंगलवार 3 मार्च को है ।

बुधवार 4 मार्च 2026 को रंगवाली होली जिसे धुलेंडी, धुलंडी और धूलि आदि भी कहते है पूरे हर्ष और उल्लास के साथ खेली जाएगी ।

शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन विधि पूर्वक करने से समस्त संकटो से रक्षा होती है, यहाँ पर हम यह बता रहे है कि holika dahan kaise karen, होलिका दहन कैसे करें ।
जानिए, होलिका दहन की विधि, holika dahan ki vidhi, होलिका दहन कैसे करें, holika dahan kaise karen, होलिका दहन, holika dahan,

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राशिनुसार खेलें होली सुख – सौभाग्य खींचे चले आएंगे, जानिए आपको किस रंग से होली खेलना बहुत ही शुभ रहेगा

होलिका दहन Holika Dahan करने से पहले होली की पूजा की जाती है। होलिका दहन मुहुर्त Holika Dahan Muhurt समय में जल, फूल, गुलाल, कलावा तथा गुड आदि से होलिका का पूजन Holika Ka Pujan करते है ।  

होलिका के पूजन के लिए  गोबर से बनाई गई खिलौनों की चार मालाएं अलग से घर लाकर रख दी जाती है। इसमें से एक माला पितरों के नाम की, दूसरी माला हनुमान जी के नाम की, तीसरी माला शीतला माता के नाम की तथा चौथी माला अपने घर- परिवार के नाम की होती है ।

सर्वप्रथम कच्चे सूत को होलिका के चारों ओर सात परिक्रमा करते हुए लपेटा जाता है।  फिर लोटे का शुद्ध जल व अन्य पूजन की सभी वस्तुओं रोली, चावल, गंध, पुष्प, कच्चा सूत, गुड, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल नई फसल के धान्यों जैसे- पके चने की बालियां व गेंहूं की बालियों को एक-एक करके होलिका को समर्पित किया जाता है,पुष्प से पंचोपचार विधि से होलिका का पूजन Holika Ka Poojan किया जाता है एवं पूजन के बाद जल से अर्ध्य दिया जाता है ।

सूर्यास्त के बाद शुभ मुहूर्त में होलिका में अग्नि प्रज्जवलित कर दी जाती है, अंत में सभी पुरुष रोली का टीका लगाते है, महिलाएं गीत गाती है.और लोग एक दूसरे को अबीर गुलाल रंग का तिलक करते है बडों का आशिर्वाद लेते है ।

होलिका दहन में प्रत्येक जातक को घी में डूबी हुई कपूर की 5 या 7 या 11 टिकिया भी अवश्य डालनी चाहिए इससे जीवन से किसी भी तरह की नकारत्मक ऊर्जा दूर होती है।

होलिका के पूजन में ध्यान रखे कि आपका मुँह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।

होलिका की पूजा करते हुए  …

‘ॐ नृसिंहाय नम:’ से भगवान नृसिंह की,
‘ॐ होलिकायै नम:’ से होलिका की  और  
‘ॐ  प्रह्लादाय नम:’ से भक्त प्रह्लाद की  पूजा करनी चाहिए।

वर्ष 2026 में अशुभ भद्रा के कारण, शुभ फलो के लिए केवल इसी समय करें होलिका दहन या होलिका का पूजन, जानिए होलिका दहन का शुभ मुहूर्त

होलिका की पूजा करते समय भगवान विष्णु जी के नरसिंह अवतार का स्मरण करते हुए उनसे अपनी भूलों की लिए क्षमा माँगनी चाहिए, उनसे अपने घर परिवार के कल्याण, अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आशीर्वाद माँगे ।

होलिका दहन Holika Dahan में घर के सभी सदस्यों को अवश्य ही शामिल होना चाहिए । होलिका दहन Holika Dahan में चना, मटर, गेंहूँ बालियाँ या अलसी आदि डालते हुए अग्नि की तीन / सात परिक्रमा करें। इससे घर में शुभता आती है।

ऐसा माना जाता है कि होलिका दहन में शामिल होने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, समस्त कष्टों का निवारण होता है।

होलिका दहन की अग्नि में होलिका की परिक्रमा करते हुए अपने सर से सात बार काले तिल उतार कर अर्पित करें । ऐसा करने से शनि, राहु, केतु आदि ग्रहों के दोषो से से छुटकारा मिलता है, चिंताएं दूर होती है, आत्मविश्वास बढ़ता है ।

 होलिका दहन Holika Dahan के बाद उसकी थोड़ी भस्म जरूर लाएं, उसका टीका किसी महत्वपूर्ण कार्य में जाते हुए पुरुष अपने मस्तक पर और स्त्री अपने गर्दन में लगाएं, कार्यों में सफलता मिलेगी और धन संपत्ति में भी वृद्धि होगी ।

ऐसी भी  मान्यता है कि रात में या अगले दिन सुबह होली की अग्नि और राख को घर में लाने से परिवार के सभी सदस्यों की नज़र / टोन टोटको / अशुभ शक्तियों से रक्षा होती है।

होली के दिन चाँदी की डिबिया खरीद कर उस नई चांदी की डिबिया में होली की भस्म लेकर उसे घर के मंदिर अथवा तिजोरी में रखने से पूरे वर्ष आरोग्य और सुख – सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

कार्यो में चाहते है श्रेष्ठ सफलता और सुख – समृद्धि तो होली के दिन अवश्य ही करें ये उपाय 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार होलिकादहन में भाग लेने, जलती होलिका का सात बार परिक्रमा करते हुए पूजा करने, उसके दर्शन से शनि-राहु-केतु तथा कुंडली के ग्रहो के दोषों से छुटकारा मिलता है।

होलिका दहन में  एरंड और गूलर की लकड़ी का इस्तेमाल करना चाहिए, लेकिन होली में आम की लकड़ी को जलाना अशुभ माना जाता है ।

ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )
9425203501. 7587346995

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होली के अचूक उपाय, holi ke achuk upay, Holi 2026,

ज्योतिष शास्त्र में शिवरात्रि, होली, दीपावली, जन्माष्टमी आदि का बहुत महत्व है । होली का पर्व Holi Ka Parv साल में एक बार ही आता है मान्यता है कि इस दिन किये गए उपाय शीघ्र ही फल देते है ।

यहाँ पर हम आपको होली के अचूक उपाय, holi ke achuk upay, / टोटके बता रहे है जिनको करके आप अपने जीवन की सभी परेशानियों को दूर करते हुए जीवन को धन, हर्ष और ऐश्वर्य से भर सकते है।
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होलिका दहन Holika Dahan में घर के सभी सदस्यों को अवश्य ही शामिल होना चाहिए । होलिका दहन Holika Dahan में चना, मटर, गेंहूँ बालियाँ या अलसी आदि डालते हुए अग्नि की तीन / सात परिक्रमा करें। इससे घर में शुभता आती है।
प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह होलिका में थोड़ा थोड़ा कपूर भी अवश्य ही डालें जिससे वातावरण से वायरस कम हो सके, मान्यता है कि होली में कपूर जलाने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है, नज़र दोष भी दूर होता है ।

होलिका दहन Holika Dahan के दिन घर के मुखिया को होलिका में घी में भिगोई हुई दो लौंग, एक बताशा और एक पान का पत्ता भी अवश्य चढ़ाना चाहिए। तत्पश्चात होली की 3 परिक्रमा करते हुए होली में सूखे नारियल की आहुति देनी चाहिए।. इससे ना केवल सभी कष्ट दूर होते हैं वरन घर में सुख-सम्रद्धि भी बढ़ती है ।

राशिनुसार होली खेलकर अपने भाग्य को ऐसे करें मजबूत 

जिस दिन होली जलनी हो उस दिन सुबह एक साबूत पान पर साबूत सुपारी एवं हल्दी की गांठ रखकर किसी भी मंदिर में शिवलिंग पर चढ़ाएं और भगवान शिव से योग्य जीवनसाथी के लिए प्रार्थना करें फिर प्रणाम करके वापस आ जाएँ पीछे मुड़कर ना देखें यह प्रयोग लगातार 7 दिन तक करें इससे अतिशीघ्र विवाह होने की सम्भावना बड़ जाती है ।

होलिका दहन Holika Dahan के बाद उसकी थोड़ी भस्म जरूर लाएं, उसका टीका किसी महत्वपूर्ण कार्य में जाते हुए पुरुष अपने मस्तक पर और स्त्री अपने गर्दन में लगाएं, कार्यों में सफलता मिलेगी और धन संपत्ति में भी वृद्धि होगी।

होली के दिन सबसे पहले घर के मंदिर में देवी देवताओं को रंग का टीका लगाएं, फिर बड़ों को पैरों पर रंग लगाकर उनसे आशीर्वाद लें इसके पश्चात घर के मुख्य द्वार पर गुलाल छिड़कके वास्तु देवता को प्रणाम करें, अब अंत में अपने बराबर वालों से या छोटे बड़ो से जिनसे रंग खेलना हो उन्हें उनकी मर्जी से रंग लगाएं।

आपको रंगों से चाहे जितनी एलर्जी हो, या आप रंग ना खेलते हो, लेकिन होली के दिन अपना माथा सूना नहीं रखें। रंग खुशियों के, बुराई पर अच्छाई के प्रतीक माने जाते है अत: होली के दिन रंग लगाने और लगवाने से देवता प्रसन्न होते है, ग्रहो के दुष्प्रभाव दूर होते है, वास्तु देवता का भी आशीर्वाद मिलता है।

होलिका दहन के बाद इसकी राख को घर के चारो तरफ और दरवाजे पर छिड़कने से घर में किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं हो पाता है।

अवश्य पढ़ें :- चाहिए परिवार में सुख-समृद्धि, प्रेम और आरोग्य तो ऐसा होना चाहिए किचन का वास्तु, जानिए किचन के वास्तु टिप्स 

होलिका दहन के बाद अगली सुबह यानि की होली के रंग खेलने के दिन उसकी राख से माथे पर टीका जरूर लगाना चाहिए इससे देवता प्रसन्न होते हैं, जीवन की समस्त प्रकार की अड़चने दूर होती है ।

कहते है कि होली के दिन Holi Ke Din रात्रि के 12 बजे के बाद पीपल के नीचे शुद्ध घी का दीपक जलाना चाहिए एवं हाथ में सफेद तिल लेकर पीपल की सात परिक्रमा करके धीरे-धीरे इन तिलों को छोडते जाएं। इसके बाद बिना पीपल को छुए प्रणाम करके पीछे देखे बिना ही वापस घर आ जाएं । ऐसा करने से शीघ्र ही मनोकामनाएँ पूर्ण होती है ।

होली के दिन जिस दिन रंग खेलते है उस दिन सुबह स्नान के बाद लाल गुलाल लेकर उसे सबसे पहले घर के मंदिर में देवी देवताओं की मूर्ति / चित्र पर लगाएं फिर उस गुलाल के खुले पैकेट में एक चांदी का एक सिक्का रखकर उसे नए लाल कपडे में कलावा से बांधकर अपनी तिजोरी में रखें, धन लाभ होगा और धन रुकने भी लगेगा ।

अगर आर्थिक संकट रहता है तो धन लाभ के लिए होली की रात में सिद्ध लक्ष्मी मन्त्र “ॐ श्रीं हृीं श्रीं महालक्ष्मये नम:” का 108 बार जप करते हुए होलिका Holika में शक्कर की आहुति देते जाएं, धन में बरकत होने लगेगी।

अगर जीवन में आर्थिक संकट लगा रहता है तो होलिका दहन के समय धन प्राप्ति की कामना करते हुए जलती हुई अग्नि में सफेद रंग की मिठाई चढ़ा दें ।

होली पर रंग सभी व्यक्तियों को जरूर ही खेलना चाहिए, इससे घर परिवार में प्रेम, सौहार्द्य और सुख का वास होता है । होली पर सबसे पहले ईश्वर को और फिर घर के बड़े बुजुर्गों को रंग लगाकर उनसे आशीर्वाद लेकर ही रंग खेलना शुरू करना चाहिए ।

होलिका दहन की अग्नि में होलिका की परिक्रमा करते हुए अपने सर से सात बार काले तिल उतार कर अर्पित करें । ऐसा करने से शनि, राहु, केतु आदि ग्रहों के दोषो से से छुटकारा मिलता है, चिंताएं दूर होती है, आत्मविश्वास बढ़ता है ।

अगर चाहते है कि भाग्य निरंतर साथ दें तो राशिनुसार यह लकी चार्म अवश्य ही रखे अपने साथ

होली में आपस में वैर भाव मिटा कर खुद पहल करके दुश्मनो से भी रंग खेलकर सभी से साफ मन से गले मिलना चाहिए । मान्यता है कि इस दिन पहल करके शत्रुता भुलाने से वर्ष भर आप के शत्रु आपसे पराजित होते रहेंगे ।

होली पर अपने घर में आने वाले सभी मेहमानो को कुछ ना कुछ अवश्य ही खिला कर वापस भेजें, इससे भाग्य प्रबल होता है एवं घर में स्थाई लक्ष्मी का वास होता है ।

होली से एक दिन पहले किसी ऐसे पेड़ के नीचे जाए जिस पर चमगादड़ लटकते हो फिर उस पेड़ की एक डाल को अपने घर में आने का निमंत्रण दे आएं। होलिका दहन वाले दिन सूर्योदय से पूर्व उस डाल को तोड़कर अपने घर में ले आए। रात को उस डाल का पूजन कर उसे अपनी तिजोरी अथवा अगले दिन से अपनी गद्दी के नीचे रखें। आपका कारोबार खूब चलने लगेगा।।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ ) संपर्क सूत्र :
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जानिए किन उपायों को करके होली पर करें अपनी सभी मनोकामनाएँ पूरी 

सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang, 2 मार्च 2026 का पंचांग,


आप सभी को होली के महा पर्व, होलिका दहन की हार्दिक शुभकामनायें

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आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
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Panchang, पंचाग, आज का पंचांग, aaj ka panchang, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए, सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang।

सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang,

2 2 मार्च 2026 का पंचांग, 2 March 2026 ka Panchang,

महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।

  • दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।

    सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।

सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।

जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।

सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।

घर पर कैसा भी हो वास्तु दोष अवश्य करें ये उपाय, जानिए वास्तु दोष निवारण के अचूक उपाय

*विक्रम संवत् – 2082,
* शक संवत – 1947,
*कलि संवत – 5127
*कलयुग – 5127 वर्ष
* अयन – उत्तरायण,
* ऋतु – बसंत ऋतु,
* मास – फाल्गुन माह,
* पक्ष – शुक्ल पक्ष
*चंद्र बल – मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, कुम्भ, मीन,

सोमवार को चन्द्रमा की होरा :-

प्रात: 6.45 AM से 7.42 AM तक

दोपहर 01.145 PM से 2.15 PM तक

रात्रि 8.04 PM से 9.14 PM तक

सोमवार को चन्द्रमा की होरा में अधिक से अधिक चन्द्र देव के मन्त्र का जाप करें। यात्रा, प्रेम, प्रसन्नता, कला सम्बन्धी कार्यो के लिए चन्द्रमा की होरा अति उत्तम मानी जाती है।

सोमवार के दिन चन्द्रमा की होरा में चंद्रदेव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में चंद्र देव मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

चन्द्रमा के मन्त्र

ॐ सों सोमाय नम:।

ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम: ।

  • तिथि (Tithi) – चतुर्दशी 17.55 PM तक तत्पश्चात पूर्णिमा ,
  • तिथि का स्वामी – चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी और पूर्णिमा तिथि के स्वामी चंद्र देव जी है ।
     
  • आज होलिका दहन का पर्व है । होलिका दहन फाल्गुन माह की पूर्णिमा को रात्रि काल में भद्रा रहित समय में किया जाता है और इसके अगले दिन प्रतिपदा के दिन रंग और गुलाल से होली खेली जाती है ।
  • होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई की विजय के रूप में देखा जाता है, मान्यता है कि इसके साथ ही हमारे जीवन से नकारात्मकता भी दूर हो जाती है ।
  • राक्षस राज हिरण्यकश्यप की बहन के दहन और विष्णु भक्त प्रहलाद जी की अग्नि से बच जाने की ख़ुशी में होलिका दहन का पर्व मनाया जाता है और अगले दिन लोग एक दूसरे को रंग और गुलाल लगते है ।
  • एक और कथा के अनुसार एक बार भगवान शंकर जी ने कामदेव जी को क्रोध में आकर अपना तीसरा नेत्र खोलकर भस्म कर दिया था, लेकिन उसकी पत्नी रति के विलाप और देवताओं के बार बार आग्रह करने पर उन्होंने कामदेव को जीवनदान दे दिया था, इस लिए भी होलिका का पर्व मनाया जाता है ।
  • फाल्गुन मा​ह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि सोमवार 02 मार्च को शाम 17 बजकर 55 मिनट से शुरू होगी जो मंगलवार 3 मार्च शुक्रवार को शाम 16 बजकर 46 मिनट तक रहेगी ।
  • इस वर्ष 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा पर सोमवार 2 मार्च को भद्रा तिथि सांय 17:46 पर पूर्णिमा तिथि लगते ही लग जाएगी जो अगले सूर्योदय से पूर्व 05:19 तक रहेगी।
  • नारद पुराण के अनुसार होलिका दहन, holika dahan फाल्गुन पूर्णिमा की रात्रि को भद्रारहित प्रदोष काल में करना चाहिए,  होलिका का दहन विधिवत रुप से होलिका का पूजन करने के बाद ही करना श्रेष्ठ है।  
  • मान्यता है कि भद्रा के समय में होलिका दहन, holika dahan करने से उस क्षेत्र में अशुभ घटनाएं हो सकती है  इसके अलावा चतुर्दशी तिथि, प्रतिपदा एवं सूर्यास्त से पहले कभी भी होलिका दहन नहीं करना चाहिए।  
  • मूहर्त चिंतामणि ग्रंथ के अनुसार भद्रा काल में रक्षा बंधन और होलिका दहन दोनों को ही वर्जित बताया गया है ।
  • शास्त्रों के अनुसार अगर होलिका दहन के समय में भद्रा आ रही हो तो  होलिका दहन का मुहूर्त हमेशा भद्रा मुख का त्याग करके निर्धारित होता है क्योंकि भद्रा मुख में होलिका दहन बिलकुल वर्जित है, हाँ भद्रा की पुछ में होलिका दहन किया जा सकता है ।
  • 2 मार्च सोमवार को मध्य रात्रि में 12.30 AM से 02.10 AM के मध्य भद्रा का पुछ मिल रहा है और सूर्योदय 3 मार्च को प्रात: 6.45 AM पर हो रहा है लेकिन इसी दिन 3 मार्च मंगलवार को दोपहर में लगने वाले चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले 06.21 AM पर लग रहा है अर्थात
  • 3 मार्च की सुबह भद्रा की समाप्ति के बाद 05.20 AM से 06.20 AM के मध्य भी होलिका दहन किया जा सकता है ।
  • होलिका दहन का मुहूर्त :- 2 – 3 मार्च मध्य रात्रि में 12.20 AM से 02.10 AM तक
  • 3 मार्च सुबह भद्रा की समाप्ति के बाद 05.20 AM से 06.20 AM के मध्य
  • होलिका दहन चौराहो पर किसी खुली जगह पर किया जाता है। इस दिन लोग लकड़ियों का एक ढेर तैयार करते हैं, जिसे होलिका की चिता के रूप में माना जाता है।

    फिर शुभ मुहूर्त पर होलिका की पूजा करके, पूरे हर्ष और उल्लास के साथ होलिका का दहन किया जाता है । इसके पश्चात लोग जलती हुई होलिका की परिक्रमा करते हुए अपने जीवन में सुख समृद्धि, और आरोग्य के लिए प्रार्थना करते है।
  • होलिका के पूजन में ध्यान रखे कि आपका मुँह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए । होलिका दहन में घर के सभी सदस्यों को अवश्य ही शामिल होना चाहिए । होलिका दहन में चना, मटर, गेंहूँ बालियाँ या अलसी आदि डालते हुए अग्नि की तीन / सात परिक्रमा करें। इससे घर में शुभता आती है।
  • होलिका दहन की अग्नि में होलिका की परिक्रमा करते हुए अपने सर से सात बार काले तिल उतार कर होलिका को अर्पित करें । ऐसा करने से शनि, राहु, केतु आदि ग्रहों के दोषो से से छुटकारा मिलता है, चिंताएं दूर होती है, आत्मविश्वास बढ़ता है ।
  • इस वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा पर 3 मार्च मंगलवार को चंद्रग्रहण भी लग रहा है । यह चंद्र ग्रहण भारतीय समय के अनुसार दोपहर 3 बजकर 21 मिनट को लगेगा और शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा । पंचांग के अनुसार यह ग्रहण भारत में भी नज़र आएगा ।
  • चंद्र ग्रहण लगने से 9 घंटे पहले सूतक लग जाता है और उसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है, सूतक चूँकि सुबह 6.21 AM से ही लग जायेगा जो ग्रहण की समाप्ति पर 6.47 PM तक रहेगा इसलिए इस वर्ष होली पर रंग होलिका दहन के बाद एक दिन छोड़कर अर्थात 4 मार्च को खेला जायेगा, होलिका दहन के अगले दिन नहीं ।

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नक्षत्र (Nakshatra) – अश्लेषा 07.51 AM तक तत्पश्चात मघा

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी-    अश्लेषा नक्षत्र के देवता सर्प देव एवं नक्षत्र के स्वामी बुध देव जी है ।  

अश्लेषा नक्षत्र का स्थान आकाश मंडल के नक्षत्रो में  9 वां है। यह कर्क राशि के अंतर्गत आता है। अश्लेशा नक्षत्र के देवता सर्प देव एवं नक्षत्र के स्वामी बुध देव जी है।

अश्लेषा नक्षत्र को गण्ड मूल नक्षत्र कहते है। अश्लेषा नक्षत्र में चंद्रमा की ऊर्जा और सर्प देवता की ताकत है। यह एक कुंडलित सर्प जैसा दिखता है जो कुंडलिनी ऊर्जा का प्रतीक है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वालों पर जीवनभर बुध व चन्द्र का प्रभाव पड़ता है। 

अश्लेषा नक्षत्र सितारा का लिंग महिला है। अश्लेषा नक्षत्र का आराध्य वृक्ष: नागकेसर, तथा स्वाभाव तीक्ष्ण, शोक वाला होता है ।

अश्लेषा नक्षत्र में जन्मे जातक हंसमुख, वाकपटु, साहित्य तथा संगीत प्रेमी, नेतृत्वशील, यशवान और सफल व्यापारी होते है इन्हे पूर्ण पारिवारिक सुख प्राप्त होता है।

लेकिन कुंडली में बुध और चन्द्र खराब स्थिति में होने पर जातक चालाक, क्रोधी- क्रूर स्वभाव, बेकार के कामो में धन को गंवाने वाला, कामुक विचारो वाला,आलसी, स्वार्थी, निराशवादी,  कभी-कभार चोरी करने वाला भी होता है । 

अश्लेशा नक्षत्र गंड नक्षत्र है अतः व्यक्ति की आयु कम होती है, इसलिए अश्लेशा नक्षत्र का पूर्ण विधि विधान से शांति करवाना आवश्यक होता है. ।

अश्लेषा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 5 और 9, भाग्यशाली रंग काला – लाल, भाग्यशाली दिन बुधवार होता है । इन्हे नागकेसर के पौधे की सेवा करनी चाहिए तथा घर पर नाग केसर को रखना चाहिए ।

अश्लेषा नक्षत्र में जन्मे जातको को नित्य तथा अन्य सभी को आज  “ॐ सर्पेभ्यो नमःl “ मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करना चाहिए।

  अगर पश्चिम मुख का है आपका घर तो ऐसा रहना चाहिए आपके घर का वास्तु, जानिए पश्चिम दिशा के अचूक वास्तु टिप्स 


  • योग – अतिगण्ड 12.21 PM तक तत्पश्चात सुकर्मा

  • योग के स्वामी :-  अतिगण्ड योग के स्वामी चंद्र देव जी लेकिन स्वभाव हानिकारक  है ।
  • प्रथम करण : – वणिज 17.55 PM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-       वणिज करण की स्वामी लक्ष्मी देवी और स्वभाव सौम्य है ।

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  • द्वितीय करण : – विष्टि 05 .28 AM मंगलवार 3 मार्च तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-  विष्टि करण के स्वामी यम और स्वभाव क्रूर है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 5.06 AM से 5.56 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.29 PM से 15.16 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.19 PM से 16.44 PM तक
  • अमृत काल : 05.09 AM से 06.44 AM मंगलवार 3 मार्च तक
  • विशेष – चतुर्दशी,  श्राद्ध और व्रत के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना, सहवास करना निषिद्ध है। 
  • पर्व त्यौहार- होलिका दहन
  • मुहूर्त (Muhurt) –

“हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

अपने धर्म, अपनी संस्कृति अपने नैतिक मूल्यों के प्रचार, प्रसार के लिए तन – मन – धन से अपना बहुमूल्य सहयोग करें । आप हमें अपनी इच्छा – सामर्थ्य के अनुसार सहयोग राशि 9425203501 पर Google Pay कर सकते है ।
आप पर ईश्वर की असीम अनुकम्पा की वर्षा होती रहे ।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )
9425203501. 7587346995


दोस्तों यह साईट बिलकुल निशुल्क है। यदि आपको इस साईट से कुछ भी लाभ प्राप्त हुआ हो, आपको इस साईट के कंटेंट पसंद आते हो तो मदद स्वरुप आप इस साईट को प्रति दिन ना केवल खुद ज्यादा से ज्यादा विजिट करे वरन अपने सम्पर्कियों को भी इस साईट के बारे में अवश्य बताएं …..धन्यवाद ।

Aacharya Mukti Narayan Pandey Adhyatma Jyotish paramarsh Kendra Raipur

बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang, 4 मार्च 2026 का पंचांग,

बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang, 4 मार्च 2026 का पंचांग, आप सभी को रंगो के पर्व होली, धुलंडी की हार्दिक शुभकामनायें मंगलवार का पंचांग ...