रविवार का पंचांग, Raviwar Ka Panchag, 23 अगस्त का पंचांग 2026 का पंचांग,

रविवार का पंचांग, Raviwar Ka Panchag, 23 अगस्त का पंचांग 2026 का पंचांग,

आप सभी को श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी, पुत्रदा एकादशी की हार्दिक शुभकामनायें

रविवार का पंचांग, Raviwar Ka Panchag,

23 अगस्त 2026 का पंचांग, 23 August 2026 ka Panchang,

अवश्य पढ़ें :-  मनचाही नौक री चाहते हो, नौकरी मिलने में आती हो परेशानियाँ  तो अवश्य करें ये उपाय 

Panchang, पंचाग, आज का पंचांग, aaj ka panchang, Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)



पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे । जानिए रविवार का पंचांग, Ravivar Ka Panchang।

रविवार का पंचांग, Ravivar Ka Panchang,
23 अगस्त
2026 का पंचांग, 23 August 2026 ka Panchang,

मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद

जानिए नवरात्री में कन्या पूजन में माता के किन किन स्वरूपों की पूजा की जाती है

भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
।। आज का दिन अत्यंत मंगलमय हो ।।

👉🏽दिन (वार) रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।

इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।

घर पर कैसा भी हो वास्तु दोष अवश्य करें ये उपाय, जानिए वास्तु दोष निवारण के अचूक उपाय

रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है । अत: रविवार के दिन मंदिर में भैरव जी के दर्शन अवश्य करें ।

रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।

आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,

इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । नित्य पंचांग को पढ़ने से देवताओं का आशीर्वाद मिलता है, पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है ।

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* विक्रम संवत् – 2083, वर्ष
* शक संवत – 1948, वर्ष
* कलि संवत — 5128, वर्ष
* कलयुग – 5128, वर्ष
* अयन – दक्षिणयान,
* ऋतु – वर्षा ऋतु,
* मास – सावन माह,
* पक्ष – शुक्ल पक्ष
* चंद्र बल – मिथुन, कर्क, तुला, धनु, कुम्भ, मीन,

रविवार को सूर्य देव की होरा :-

प्रात: 5.54 AM से 6.59 AM तक

दोपहर 01.28 PM से 02.33 PM तक

रात्रि 20.43 PM से 9.38 PM तक

रविवार को सूर्य की होरा में अधिक से अधिक अनामिका उंगली / रिंग फिंगर पर थोड़ा सा घी लगाकर मसाज करते हुए सूर्य देव के मंत्रो का जाप करें ।

सुख समृद्धि, मान सम्मान, सरकारी कार्यो, नौकरी, साहसिक कार्यो, राजनीती, कोर्ट – कचहरी आदि कार्यो में सफलता के लिए रविवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

रविवार के दिन सूर्य देव की होरा में सूर्य देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में सूर्य ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

अवश्य जानिए देव दीपावली किस दिन मनाई जाएगी, देव दीपावली क्यों मनाते है 

सूर्य देव के मन्त्र :-

ॐ भास्कराय नमः।।

अथवा

ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।

सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। इसे विशेष रूप से संतान प्राप्ति, संतान की सुख-समृद्धि और संतान के उज्ज्वल भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

विशेष बात यह है कि पुत्रदा एकादशी वर्ष में दो बार आती है—पौष शुक्ल एकादशी और श्रावण शुक्ल एकादशी। दोनों का नाम पुत्रदा एकादशी है, और दोनों ही एकादशी में पुत्र प्राप्ति और पुत्र / संतान के कल्याण के लिए यह ब्रत रखा जाता है ।

एकादशी तिथि 23 अगस्त रविवार को लगभग तड़के सुबह 2:00 AM से शुरू होकर 24 अगस्त सोमवार को लगभग 4:18 AM तक रहेगी। इसलिए एकादशी का ब्रत रविवार 23 अगस्त को ही रखा जायेगा ।

🌿 पुत्रदा एकादशी का विशेष महत्त्व

‘पुत्रदा’ शब्द संस्कृत के पुत्र + दा से बना है—अर्थात संतान प्रदान करने वाली। परंपरागत रूप से इस व्रत का संबंध संतान प्राप्ति, संतान की मंगल-कामना और वंश की उन्नति से जोड़ा गया है। आज इसे केवल पुत्र प्राप्ति तक सीमित न मानकर संतान-सुख, संतान की दीर्घायु, अच्छे संस्कार और परिवार की समृद्धि के लिए भी किया जाता है।

📜 पद्म पुराण में क्या कहा गया है?

पद्म पुराण के उत्तरखंड के अध्याय 55 में श्रावण शुक्ल एकादशी को स्पष्ट रूप से ‘पुत्रदा’ कहा गया है। वहाँ ऋषि लोमश राजा को इस एकादशी का व्रत करने की सलाह देते हैं और बताते हैं कि यह वांछित फल देने वाली है। कथा में राजा महीजित निःसंतान होते हैं। ऋषि लोमश के मार्गदर्शन में राजा और प्रजा इस व्रत का पालन करते हैं और इसके पुण्य के प्रभाव से रानी को गर्भ प्राप्त होता है तथा एक पुत्र का जन्म होता है।

🌺 संतान के लिए विशेष रूप से क्यों मानी जाती है?

शास्त्रीय परंपरा में पुत्र को वंश की निरंतरता तथा माता-पिता के श्राद्ध आदि धार्मिक कर्तव्यों से जोड़ा गया था। इसी कारण ‘पुत्रदा’ नाम का विशेष अर्थ बना। हालांकि आज इसके आध्यात्मिक अर्थ को व्यापक रूप में संतान-सुख और संतान के कल्याण के रूप में समझना अधिक उपयुक्त है।

मान्यता है कि पुत्रदा एकादशी का ब्रत रखने से योग्य, आज्ञाकारी, धर्म का पालन करने वाली, चरित्रवान, और कुल का नाम रौशन करने वाली संतान की प्राप्ति होती है। संतान के जीवन से सभी कष्ट दूर रहते है उसे आरोग्य और दीर्घ आयु की प्राप्ति होती है ।

सनातन धर्म में एकादशी तिथि को भगवान श्री विष्णु की सर्वाधिक प्रिय तिथि माना गया है। इस दिव्य दिन भगवान श्रीहरि विष्णु एवं श्रीकृष्ण की उपासना, भक्ति और नाम-स्मरण करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।

शास्त्रों में कहा गया है कि जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक एकादशी व्रत का पालन करता है, वह भगवान श्री विष्णु को अत्यंत प्रिय हो जाता है तथा उस पर श्रीहरि की विशेष कृपा सदैव बनी रहती है।

✨ एकादशी के दिन अधिक से अधिक भगवान विष्णु के पवित्र मंत्रों का जाप करें —

🔸 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

या

🔸 ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

इन मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जप करने से मन, बुद्धि और आत्मा शुद्ध होती है तथा भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

🌿 एकादशी के दिन भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित कर पूजा अवश्य करें। ध्यान रहे कि तुलसी दल एकादशी के दिन नहीं तोड़ना चाहिए, बल्कि उसे एक दिन पूर्व दशमी तिथि में ही संग्रह कर लेना चाहिए।

🚿 शास्त्रों के अनुसार एकादशी के दिन जल में आँवले का चूर्ण या आँवले का रस मिलाकर स्नान करने से पापों का क्षय होता है और शरीर व मन दोनों पवित्र होते हैं।

🪔 रात्रि के समय भगवान विष्णु के समक्ष नौ बत्तियों वाला दीपक प्रज्ज्वलित करें तथा एक अखंड दीपक ऐसा जलाएँ जो पूरी रात प्रकाशित रहे। यह दीपक जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का प्रकाश फैलाता है।

🚫 एकादशी के दिन चावल तथा अन्न का सेवन वर्जित माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन चावल खाने से पाप और रोग बढ़ते हैं तथा दूसरे का अन्न ग्रहण करने से संचित पुण्यों का क्षय होता है।

🌺 एकादशी का व्रत केवल उपवास नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, भक्ति, संयम और भगवान श्रीहरि की कृपा प्राप्त करने का दिव्य साधन है।

🙏 “हरि स्मरण ही जीवन का सबसे बड़ा कल्याण है।”

इस दिन पूजा के बाद भगवान श्री कृष्ण जी से प्रार्थना करें कि

“हे श्रीहरि विष्णु, हमारे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें। हमारी संतान को उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, सद्बुद्धि, अच्छे संस्कार, सफलता और सुख प्रदान करें तथा हमारे जीवन की संतान संबंधी सभी बाधाओं को दूर करें।” 🙏

नाग पंचमी के दिन इस तरह से करें नाग देवता की पूजा, आज अवश्य पढ़िए नाग पंचमी की कथा,

अवश्य पढ़ें :अवश्य पढ़ें :- चेहरे से कील मुहाँसे हटाने हो तो तुरंत करें ये उपाय, कील मुहांसों को जड़ से हटाने के अचूक उपाय,

नक्षत्र :- मूल 17.44 PM तक तत्पश्चात पूर्वाषाढ़ा

नक्षत्र के स्वामी :-    मूल नक्षत्र के देवता निॠति (राक्षस) एवं स्वामी केतु जी है ।


मूल नक्षत्र का नक्षत्र मंडल में 19वां स्थान है। ‘मूल’ का अर्थ ‘जड़’ होता है।  ज्योतिष शास्त्र में गंडमूल नक्षत्र के अंतर्गत अश्विनी, रेवती, अश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा और मूल नक्षत्र को रखा गया है।

ज्योतिषियों का मानना है कि अगर बच्चे का जन्म गंडमूल नक्षण में हो तब उस की शांति अवश्य करा लेनी चाहिए अन्यथा इसका अशुभ परिणाम प्राप्त होता है।

गंडमूल नक्षत्र में जन्म लेने पर भी अगर लड़के का जन्म रात में और लड़की का जन्म दिन में हो, तब मूल नक्षत्र का प्रभाव समाप्त हो जाता है। लेकिन यदि बच्चे का जन्म अगर मंगलवार अथवा शनिवार के दिन हुआ है तो इसके अशुभ प्रभाव बढ़ जाते हैं।

मूल नक्षत्र में जन्मा जातक शांतिप्रिय, आकर्षक, साहसी, राजनीति में निपुण, धनवान, चतुर, वाकपटु, सौभाग्यशाली, ज्ञानवान और धार्मिक स्वभाव का होता है।

मूल नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक को रविवार को छोड़कर सदैव या समय समय पर पीपल के वृक्ष में प्रसाद और जल चढ़ाते रहना चाहिए । मूल नक्षत्र सितारे का लिंग तटस्थ है।

मूल नक्षत्र का आराध्य वृक्ष साल और नक्षत्र का स्वभाव तीक्ष्ण माना गया है ।

मूल नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 3 और 7, भाग्यशाली रंग, सुनहरा और क्रीम, भाग्यशाली दिन शनिवार, मंगलवार और बुधवार का माना जाता है ।

मूल नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ निॠतये नमः “। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।

काल सर्प दोष, जीवन में अस्थिरताएँ दूर करने के लिए नाग पंचमी के दिन अवश्य ही करें ये अचूक उपाय


घर के बैडरूम में अगर है यह दोष तो दाम्पत्य जीवन में आएगी परेशानियाँ, जानिए बैडरूम के वास्तु टिप्स

  • योग (Yog) – विष्कम्भ 06.14 AM तक तत्पश्चात प्रीति
  • योग के स्वामी :- विष्कम्भ योग के स्वामी यम एवं स्वभाव हानिकारक है । प्रीति  योग के स्वामी विष्णु एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है ।
  • प्रथम करण : – वणिज 15.10 PM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-   वणिज करण की स्वामी लक्ष्मी देवी और स्वभाव सौम्य है ।
  • द्वितीय करण : – विष्टि 04.18 AM सोमवार 24 अगस्त तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-  विष्टि करण के स्वामी यम और स्वभाव क्रूर है ।

  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.26 AM से 5.10 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.33 PM से 15.25 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.53 PM से 19.15 PM तक
  • अमृत काल :- 10.33 AM से 12.21 PM तक


    शिव वास – क्रीड़ा में 04.18 AM सोमवार 24 अगस्त तक


    जब भगवान शंकर जी क्रीड़ा में होते हैं, तो उस समय भी रुद्र अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान भोलेनाथ जी के कार्य अथवा क्रीड़ा के समय रूद्र अभिषेक करने से जीवन में तरह तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।  


    अग्नि वास : – आकाश में 04.18 AM सोमवार 24 अगस्त तक

    अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।
  • दिशाशूल (Dishashool)- रविवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से पान या घी खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – अपराह्न – 3:00 से 4:30 तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)-सायं – 4:30 से 6:00 तक ।
  • सूर्योदय – प्रातः 05:54
  • सूर्यास्त – सायं 18:53

    आँखों की रौशनी बढ़ाने, आँखों से चश्मा उतारने के लिए अवश्य करें ये उपाय

  • विशेष – रविवार को बिल्ब के वृक्ष / पौधे की पूजा अवश्य करनी चाहिए इससे समस्त पापो का नाश होता है, पुण्य बढ़ते है।

    रविवार के दिन भगवान सूर्य देव को आक का फूल अर्पण करना किसी भी यज्ञ के फल से कम नहीं है, इससे सूर्य देव की सदैव कृपा बनी रहती है ।

    रविवार को तुलसी जी को जल देना, तुलसी जी को तोड़ना वर्जित है ऐसा करने से पुण्य नष्ट होते है 1
  • एकादशी के दिन सेम फली, चावल का सेवन और दूसरो के अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए ।
  •  एकादशी के दिन चावल खाने से रोग बढ़ते है और दूसरे का अन्न खाने से पुण्य नष्ट होते है ।
  • एकादशी के दिन माँ तुलसी एकादशी का ब्रत रखती है इसलिए इस दिन तुलसी जी पर जल चढ़ाना, तुलसी जी को तोड़ना सख्त मना है ।

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत शुभ फलो वाला हो ।

मित्रो हम इस साईट के माध्यम से वर्ष 2010 से निरंतर आप लोगो के साथ जुड़े है। आप भारत या विश्व के किसी भी स्थान पर रहते है, अपने धर्म अपनी संस्कृति को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए https://lookmybiz.in/आचार्य-मुक्ति-नारायण-पाण्डेय-अध्यात्म--ज्योतिष-परामर्श-केंद्र के साथ अवश्य जुड़ें, हमारा सहयोग करें ।

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

23 अगस्त 2026 का पंचांग, 23 August 2026 ka panchang, aaj ka panchang, aaj ka rahu kaal, aaj ka shubh panchang, panchang, Ravivar Ka Panchang, ravivar ka rahu kaal, ravivar ka shubh panchang, sunday ka panchang, Sunday ka rahu kaal, आज का पंचांग, आज का राहुकाल, आज का शुभ पंचांग, पंचांग, रविवार का पंचांग, रविवार का राहु काल, रविवार का शुभ पंचांग, संडे का पंचांग, संडे का राहुकाल,

### *प्रस्तुतकर्ता*:  
### *आचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय*  
### *अध्यात्म ज्योतिष परामर्श केंद्र*  
### *श्याम नगर, रायपुर, छत्तीसगढ़*  
### _📞 _9425203501 | 7000121183 | 7587346995 | 0771-4070168__
 हर समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है आपकी प्रत्येक इच्छा, महत्वकांक्षा, जीवन में बुलंदियों पर पहुंचना या किसी भी तरह की समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है *व्यापार बढ़ोतरी किया कराया शादी के लिए माता-पिता को मनाना जब कहीं ना ही हो काम तो हमसे में समाधान हर मुश्किल से मुश्किल समस्या का समाधान ज्योतिष मेरा काम नहीं मेरी साधना है जब कहीं ना हो काम तो हमसे ले समाधान https://devlinai.co.in/own_projects/acharya-main/
*ॐ नमः शिवाय | जय सनातन* 🚩

दोस्तों यह साईट बिलकुल निशुल्क है। यदि आपको इस साईट से कुछ भी लाभ प्राप्त हुआ हो, आपको इस साईट के कंटेंट पसंद आते हो तो मदद स्वरुप आप इस साईट को प्रति दिन ना केवल खुद ज्यादा से ज्यादा विजिट करे वरन अपने सम्पर्कियों को भी इस साईट के बारे में अवश्य बताएं …..धन्यवाद ।

*कुंडली में सूर्य 12 घरों के फल जानिए आपकी कुंडली में सूर्य कौन से घर में बैठा है*

*कुंडली में सूर्य 12 घरों के फल जानिए आपकी कुंडली में सूर्य कौन से घर में बैठा है*   
                                                                                                                                                  ### 🙏*श्री गणेशाय नमः*🙏
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### _*आचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय*_  
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 *कुंडली में सूर्य 12 घरों के फल जानिए आपकी कुंडली में सूर्य कौन से घर में बैठा है* 
### _🙏 __ॐ घृणि सूर्याय नमः | ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः__ 🙏_

### _🔥 _आज की 4 लाइन - सूर्य ग्रह विशेष_ 🔥_

_📖 _सूर्य = आत्मा, पिता, राजा, सरकारी नौकरी, मान-सम्मान का कारक!__  
_✅ _सूर्य मजबूत = सरकारी नौकरी, नेता, पिता सुख, आँखें तेज, समाज में नाम__  
_💎 _सूर्य खराब = पिता से झगड़ा, आँखों में रोग, सरकारी दंड, बदनामी__  
_📲 _इसे सेव करें और "ॐ सूर्याय नमः" लिखकर शेयर करें__

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### _📖 _सूर्य 12 घरों में क्या फल देता है - संपूर्ण फल_ 📖_

_सूर्य देव_ = _आत्मा, पिता, राजा, सरकार, मान, हड्डी, आँख का कारक_  
_उच्च_: _मेष 10 अंश_ | _नीच_: _तुला 10 अंश_ | _स्वराशि_: _सिंह_ | _दिन_: _रविवार_

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#### _1. पहले घर / लग्न में सूर्य_
_फल_: _राजा जैसा तेज, गुस्सा बहुत, सिर बड़ा, आँखों में लालिमा, पिता से थोड़ा मतभेद।_  
_शुभ_: _सरकारी नौकरी, नेता, अफसर, समाज में नाम, हिम्मती, आत्मविश्वासी_  
_अशुभ_: _गंजापन जल्दी, आँख में रोग, घमंड, पत्नी से अनबन_  
_उपाय_: _रोज सूर्य को जल, पिता का सम्मान, रविवार को गुड़-गेहूं दान_

#### _2. दूसरे घर में सूर्य_
_फल_: _धन तो आएगा पर रुकेगा नहीं, वाणी में तेज, परिवार से थोड़ा अलगाव_  
_शुभ_: _बैंक, वाणी, वकील, सरकारी खजाने से लाभ, आँखें सुंदर_  
_अशुभ_: _कुटुंब से झगड़ा, आँख में कष्ट, झूठा आरोप_  
_उपाय_: _मुंह में मीठा बोलें, आँखों का ध्यान रखें, दान करें_

#### _3. तीसरे घर में सूर्य_
_फल_: _बहुत शुभ। भाईयों में बड़ा, पराक्रमी, शत्रु पर विजय_  
_शुभ_: _पुलिस, सेना, साहसी, छोटी यात्राओं से लाभ, भाईयों से सुख_  
_अशुभ_: _भाई से मतभेद हो सकता है_  
_उपाय_: _छोटे भाई-बहन का सम्मान, हनुमान पूजा_

#### _4. चौथे घर में सूर्य_
_फल_: _माता-पिता से थोड़ा कष्ट, पर मकान-वाहन का सुख जरूर_  
_शुभ_: _सरकारी मकान, जमीन, वाहन, राजनीति में सफलता_  
_अशुभ_: _माता को कष्ट, दिल में घबराहट, पैतृक संपत्ति में विवाद_  
_उपाय_: _शिवलिंग पर जल, माता का सम्मान, घर में सूर्य की रोशनी आने दें_

#### _5. पांचवें घर में सूर्य_
_फल_: _बहुत शुभ। बुद्धिमान, तेज दिमाग, पुत्र सुख, मंत्र सिद्धि_  
_शुभ_: _IAS, शिक्षक, मंत्री, संतान तेजस्वी, शेयर-सट्टा से लाभ_  
_अशुभ_: _पहली संतान में थोड़ी बाधा, पेट में गर्मी_  
_उपाय_: _बच्चों को पढ़ाएं, गायत्री मंत्र जप, संतान को सूर्य दिखाएं_

#### _6. छठे घर में सूर्य_
_फल_: _शत्रु हंता योग। शत्रु, रोग, कर्ज पर विजय_  
_शुभ_: _कोर्ट में जीत, नौकरी में प्रमोशन, रोग खत्म_  
_अशुभ_: _मामा से अनबन, पेट में रोग_  
_उपाय_: _रोज हनुमान चालीसा, गरीब को दवा दान_

#### _7. सातवें घर में सूर्य_
_फल_: _विवाह में देरी या पत्नी तेज स्वभाव की, पर पार्टनर सरकारी_  
_शुभ_: _पत्नी/पति अफसर, व्यापार में सरकार से लाभ_  
_अशुभ_: _दाम्पत्य में अहंकार, तलाक तक बात, आँख में कष्ट_  
_उपाय_: _पत्नी का सम्मान, सुबह-शाम सूर्य को जल, घमंड छोड़ें_

#### _8. आठवें घर में सूर्य_
_फल_: _अशुभ। उम्र तो लंबी पर संघर्ष बहुत, आँख-हड्डी रोग_  
_शुभ_: _गुप्त विद्या, बीमा, ससुराल से धन_  
_अशुभ_: _पिता को कष्ट, सरकारी दंड, बदनामी, आँख जाना_  
_उपाय_: _महामृत्युंजय जप, शिव को जल, पिता की सेवा, रविवार व्रत_

#### _9. नौवें घर में सूर्य_
_फल_: _भाग्य का राजा। पिता, गुरु, धर्म से लाभ, भाग्यशाली_  
_शुभ_: _विदेश यात्रा, सरकारी नौकरी, धर्म-कर्म, पिता से धन_  
_अशुभ_: _कभी-कभी पिता से मतभेद_  
_उपाय_: _पिता-गुरु का सम्मान, सूर्य को जल, धर्म दान_

#### _10. दसवें घर में सूर्य_
_फल_: _सबसे शुभ। दिशाबली सूर्य।_  
_शुभ_: _सरकारी नौकरी पक्की, नेता, मंत्री, कलेक्टर, पिता से नाम, समाज में शीर्ष पर_  
_अशुभ_: _काम में घमंड न करें_  
_उपाय_: _कर्म ईमानदारी से करें, सूर्य को जल, सरकारी नियम मानें_

#### _11. ग्यारहवें घर में सूर्य_
_फल_: _लाभ का राजा। धन, आमदनी बहुत_  
_शुभ_: _हर इच्छा पूरी, बड़े लोगों से दोस्ती, सरकारी ठेके से लाभ, पिता से लाभ_  
_अशुभ_: _बड़ी बहन/भाई से मतभेद_  
_उपाय_: _बड़ों का सम्मान, सूर्य यंत्र, गेहूं दान_

#### _12. बारहवें घर में सूर्य_
_फल_: _खर्च बहुत, विदेश में सफलता, आँख में रोग_  
_शुभ_: _विदेश में नौकरी, अस्पताल, जेल विभाग में नौकरी, मोक्ष_  
_अशुभ_: _पिता से दूर, पैसा फंसना, आँख, पैर में सूजन, जेल-कोर्ट का डर_  
_उपाय_: _विदेश यात्रा करें, आँखों का दान, शिव पूजा, सूर्य को जल_

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### _📖 _सूर्य को मजबूत करने के 11 महा उपाय_ 📖_

1.  _रोज सुबह 6 बजे से पहले उठकर तांबे के लोटे से सूर्य को जल + लाल फूल + चावल + कुमकुम_
2.  _मंत्र_: `ॐ घृणि सूर्याय नमः` 108 बार + आदित्य हृदय स्तोत्र
3.  _पिता का रोज चरण स्पर्श, कभी अपमान न करें_
4.  _रविवार व्रत - नमक रहित, सूर्यास्त के बाद एक बार भोजन_
5.  _गेहूं, गुड़, तांबा, लाल कपड़ा रविवार को दान_
6.  _माणिक्य रत्न - कुंडली दिखाकर अनामिका में तांबे में पहनें_
7.  _घर में सूर्य की रोशनी आने दें, पूर्व मुखी घर शुभ_
8.  _सरकारी नियम तोड़ना, रिश्वत लेना छोड़ें_
9.  _आँखों का दान, गरीब को दवा दान_
10. _हनुमान जी + शिव जी की पूजा - सूर्य के इष्ट_
11. _गायत्री मंत्र जप - सूर्य की शक्ति_

_नोट_: _सूर्य के साथ राहु = ग्रहण दोष, शनि = पिता-पुत्र में झगड़ा, शुक्र = आँख में रोग। तुरंत शांति कराएं।_

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शनिवार का पंचांग, Shaniwar Ka Panchang, 22 अगस्त 2026 का पंचांग ,

शनिवार का पंचांग, Shaniwar Ka Panchang, 22 अगस्त 2026 का पंचांग ,


Shaniwar Ka Panchang, शनिवार का पंचांग, 22 अगस्त 2026 ka Panchang,

मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
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  • Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)


पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए शनिवार का पंचांग, (Shanivar Ka Panchang), आज का पंचांग, aaj ka panchang, saturday ka panchang।

  • शनिवार का पंचांग, (Shanivar Ka Panchang, )

    22 अगस्त
    2026 का पंचांग, 22 August 2026 ka Panchang,
  • दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
  • शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।

*विक्रम संवत् – 2083,
* शक संवत – 1948,
* कलि संवत – 5128,

* कलयुग – 5128 वर्ष
* अयन – दक्षिणयान,
* ऋतु – वर्षा
ऋतु,
* मास –
सावन माह,
* पक्ष –
शुक्ल पक्ष,
*चंद्र बल –
मिथुन, कर्क, तुला, धनु, कुम्भ, मीन,

शनिवार को शनि महाराज की होरा :-

प्रात: 5.54 AM से 6.59 AM तक

दोपहर 01.29 PM से 2.34 PM तक

रात्रि 20.44 PM से 9.39 PM तक

शनिवार को शनि की होरा में अधिक से अधिक शनि देव के मंत्रो का जाप करें । श्रम, तेल, लोहा, नौकरो, जीवन में ऊंचाइयों, त्याग के लिए शनि की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

शनिवार के दिन शनि की होरा में शनि देव देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में शनि ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,भारत की लगभग 150 करोड़ की आबादी में 0.001 % अर्थात लगभग 15 हज़ार आदमी ही नित्य पंचांग पढ़ पाते है।
आप पर ईश्वर की असीम कृपा है जो आपको नित्य पंचांग पढ़ने का, अपने भाग्य को प्रबल करने का, पापो के प्रायश्चित करने का अवसर मिल रहा है,
दुनिया के सारे उपाय एक तरफ है, और नित्य पंचाग पढ़ने का पुण्य उससे भी कहीं अधिक है,
इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है ।


शनि देव के मन्त्र :-

ॐ शं शनैश्चराय नमः।

अथवा

ऊँ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्‌। छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्‌।।

  • तिथि (Tithi) – दशमी 02.00 AM रविवार 23 अगस्त तक
  • तिथि का स्वामी – दशमी तिथि के स्वामी यमराज जी है ।

दशमी तिथि के देवता यमराज जी हैं। यह दक्षिण दिशा के स्वामी है। इनका निवास स्थान यमलोक है।  शास्त्रों के अनुसार यमराज जी मृत्यु के देवता कहे गए हैं।
गरुड़ पुराण के अनुसार यमराज के महल को कालित्री महल कहते हैं और उनके सिंहासन को विचार-भू कहते हैं।

पद्म पुराण में उल्लेख मिलता है कि यमलोक पृथ्वी से 86,000 योजन यानी करीब 12 लाख किलोमीटर दूर है।

गरुड़ पुराण में यमलोक में चार द्वार बताए गए हैं। पूर्वी द्वारा से प्रवेश सिर्फ धर्मात्मा और पुण्यात्माओं को मिलता है जबकि दक्षिण द्वार से पापियों का प्रवेश होता है जिसे यमलोक में यातनाएं भुगतनी पड़ती है।

साधु-संतों को उत्तर दरवाजे से और दान पुण्य करने वाले मनुष्यों को पश्चिम द्वार से प्रवेश मिलता है।

यमराज जी भगवान सूर्य और उनकी पत्नी संज्ञा के पुत्र है, यमुना अर्थात (यमी)  इनकी जुड़वां बहन और मनु इनके भाई कहे गए है।

यमराज की पत्नी  का नाम देवी धुमोरना तथा इनके पुत्र का नाम कतिला है।

यमराज जी का वाहन महिष / भैंसे को माना गया हैं। वे समस्त जीवों के शुभ अशुभ कर्मों का निर्णय करते हैं।

इस दिन इनकी पूजा करने, इनसे अपने पापो के लिए क्षमा माँगने से जीवन की समस्त बाधाएं दूर होती हैं, निश्चित ही सभी रोगों से छुटकारा मिलता है,  नरक के दर्शन नहीं होते है अकाल मृत्यु के योग भी समाप्त हो जाते है।

मथुरा में स्थित यमराज और उनकी बहन यमुना जी का एक प्राचीन मंदिर है  उस मंदिर को यमुना धर्मराज मंदिर कहते है। देश में भाई-बहन का ये एकमात्र मंदिर है।

मान्यता है कि, भाई बहन इस मंदिर में भैया दूज के दिन एक साथ स्नान करते हैं। इससे उन्हें मृत्यु के बाद बैकुंठ की प्राप्ति होती है।

 इस तिथि को धर्मिणी भी कहा गया है। समान्यता यह तिथि धर्म और धन प्रदान करने वाली मानी गयी है ।

दशमी तिथि में नया वाहन खरीदना शुभ माना गया है। इस तिथि को सरकार से संबंधी कार्यों का आरम्भ किया जा सकता है।  

यमराज जी का समस्त रोगों को बाधाओं को दूर करने वाले मन्त्र :- “ॐ क्रौं ह्रीँ आं वैवस्वताय धर्मराजाय भक्तानुग्रहकृते नम : “॥ की एक माला का जाप अथवा कम से कम 21 बार इस मन्त्र का जाप करें ।

कल सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी अति पवित्र पुत्रदा एकादशी है । भगवान श्री विष्णु जी की पूजा तुलसी जी को अर्पित करे बिना अधूरी मानी जाती है और एकादशी के दिन तुलसी जी को तोड़ना वर्जित है इसलिए एकादशी के दिन की पूजा के लिए तुलसी जी को आज ही तोड़ कर रख लें । 

दशमी को परवल नहीं खाना चाहिए।    

राशिनुसार होली खेलकर अपने भाग्य को ऐसे करें मजबूत,

कैसा भी सिर दर्द हो उसे करें तुरंत छूमंतर, जानिए सिर दर्द के अचूक उपाय

नक्षत्र (Nakshatra) – ज्येष्ठा 14.49 PM तक तत्पश्चात मूल

नक्षत्र के स्वामी :-         ज्येष्ठा नक्षत्र के देवता इंद्र एवं ज्येष्ठा नक्षत्र के स्वामी बुध देव जी है ।

 ज्येष्ठा नक्षत्र, नक्षत्र मंडल में उपस्थित 27 नक्षत्रों में 18 वां है।  ‘ज्येष्ठा’ का मतलब होता है ‘बड़ा’। ज्येष्ठा नक्षत्र को गंड मूल नक्षत्र भी कहा जाता है।

देवराज इंद्र को समर्पित यह नक्षत्र तावीज़ या छतरी जैसा लगता है, ज्योतिषियों के अनुसार ज्येष्ठा नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक अपने आयु से पूर्व ही शारीरिक तथा मानसिक रूप से अधिक परिपक्व हो जाते हैं।

इस नक्षत्र का आराध्य वृक्ष : निर्गुडी/चीड़ तथा स्वाभाव तीक्ष्ण माना गया है। ‘ज्येष्ठा’ नक्षत्र सितारे का लिंग मादा है।  इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक पर मंगल और बुध दोनों ही ग्रहों का प्रभाव हमेशा रहता है।

इस नक्षत्र में जन्मे जातक बहुत ही ऊंचाइयों पर जाते हैं। यह साहसी, दयालु, परिश्रमी, नेतृत्व करने वाले और समस्याओं को सुलझाने में माहिर होते है।

लेकिन यदि बुध और मंगल खराब हैं तो यह झूठे, धोखेबाज़, क्रोधी, जिद्दी, अल्प मित्र वाले होते  है।

ज्येष्ठा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 8,  भाग्यशाली रंग सफ़ेद,  भाग्यशाली दिन  शनिवार और मंगलवार माना जाता है ।

ज्येष्ठा नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को ॐ इंद्राय नमःl। मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।

ज्येष्ठा नक्षत्र के दिन जातको को विष्णु सहस्त्रनाम का जाप, भगवान श्री विष्णु की उपासना करनी चाहिए, इससे बुध्दि और व्यापार के देवता बुद्ध ग्रह अनुकूल होते है ।

ज्येष्ठा नक्षत्र वाले दिन भगवान बुद्ध के मन्त्र ‘ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:’। का जाप करने से भी ज्येष्ठा नक्षत्र के शुभ फल प्राप्त होते है ।

अगर 50 की जगह 25, 60 की जगह 30 की उम्र चाहते है, जीवन में डाक्टर के पास ना जाना हो तो अवश्य करे ये उपाय   

  • योग (Yog) – विष्कम्भ पूर्ण रात्रि तक
  • योग के स्वामी, स्वभाव :-        विष्कम्भ योग के स्वामी यम एवं स्वभाव हानिकारक है ।
  • प्रथम करण : – तैतिल 12.48 PM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-       तैतिल करण के स्वामी विश्वकर्मा जी और स्वभाव सौम्य है ।
  • द्वितीय करण : – गर 02.00 AM रविवार 23 अगस्त तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-     गर करण के स्वामी भूमि तथा स्वभाव सौम्य है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.26 AM से 5.10 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.34 PM से 15.26 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.54 PM से 19.16 PM तक
  • अमृत काल : अमृत काल 20.18 PM से 21.53 PM तक

  • अग्नि वास : पाताल पर 02.00 AM रविवार 23 अगस्त तक

     जब पाताल में अग्नि वास है तो वह हवन से सम्बन्धित अनुष्ठानों के लिये शुभ नहीं मानी जाती है, यह अशुभ मानी गई है । अग्नि के पाताल  वास के दौरान किये जाने वाले हवन  सम्बन्धित अनुष्ठानों व्यक्ति को आर्थिक नुकसान करना पड़ता है उसका  धन नष्ट हो सकता है।

  • शिव वास : सभा में 02.00 AM रविवार 23 अगस्त तक

      शिव वास जब सभा में होता है अर्थात जब भगवान शंकर अपनी सभा में होते हैं, तो उस सामान्य रुद्र अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शिव के सभा में होने पर रूद्र अभिषेक करने से दुःख का सामना करना पड़ सकता है।
  • गुलिक काल : – शनिवार को गुलिक काल प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
  • दिशाशूल (Dishashool)- शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।

    यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
  • राहुकाल (Rahukaal)-सुबह – 9:00 से 10:30 तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 05:54 AM
  • सूर्यास्त – सायं 18:54 PM
  • विशेष – दशमी के दिन कलम्बी, परवल का सेवन नहीं करना चाहिए ।


अवश्य पढ़ें :-राशिनुसार इन वृक्षों की करें सेवा, चमकने लगेगा भाग्य,

  • पर्व त्यौहार-
  • मुहूर्त (Muhurt) –

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

मित्रो हम इस साईट के माध्यम से वर्ष 2010 से निरंतर आप लोगो के साथ जुड़े है। आप भारत या विश्व के किसी भी स्थान पर रहते है, अपने धर्म अपनी संस्कृति को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए https://lookmybiz.in/आचार्य-मुक्ति-नारायण-पाण्डेय-अध्यात्म--ज्योतिष-परामर्श-केंद्र के साथ अवश्य जुड़ें, हमारा सहयोग करें ।

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

22 अगस्त 2026 का पंचांग, 22 August 2026 ka panchang, aaj ka panchang, aaj ka rahu kaal, aaj ka shubh panchang, panchang, saturday ka panchang, shanivar ka panchang, Shaniwar Ka Panchag, shanivar ka rahu kaal, shanivar ka shubh panchang, आज का पंचांग, आज का राहुकाल, आज का शुभ पंचांग, पंचांग, शनिवार का पंचांग, शनिवार का राहु काल, शनिवार का शुभ पंचांग, सैटरडे का पंचांग,

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 हर समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है आपकी प्रत्येक इच्छा, महत्वकांक्षा, जीवन में बुलंदियों पर पहुंचना या किसी भी तरह की समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है *व्यापार बढ़ोतरी किया कराया शादी के लिए माता-पिता को मनाना जब कहीं ना ही हो काम तो हमसे में समाधान हर मुश्किल से मुश्किल समस्या का समाधान ज्योतिष मेरा काम नहीं मेरी साधना है जब कहीं ना हो काम तो हमसे ले समाधान https://devlinai.co.in/own_projects/acharya-main/
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शनि ग्रह के पूर्ण जानकारी शांति उपाय क्या करें क्या ना करें

शनि ग्रह के पूर्ण जानकारी शांति उपाय क्या करें क्या ना करें                                                                                                                                                  ###🙏*श्री गणेशाय नमः* 🙏                                  ####_*शनि ग्रह के उपाय जाने* 🙏
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### _🙏 __ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः | जय शनि देव__ 🙏_

### _🔥 _आज की 4 लाइन - शनि ग्रह विशेष_ 🔥_

_📖 _शनि = कर्मफल दाता, न्याय के देवता!__  
_✅ _शनि खराब = कर्ज, रोग, नौकरी में रुकावट, तलाक, साढ़ेसाती__  
_💎 _शनिवार + शनि होरा = उपाय का सबसे शुभ समय__  
_📲 _इसे सेव करें और "जय शनि देव" लिखकर शेयर करें__

---

### _📖 _शनि ग्रह - कर्म, न्याय, दुख, सेवा, अनुशासन का कारक_ 📖_

_शनि देव_ = _सूर्य पुत्र, छाया पुत्र, कर्मफल दाता, दंडाधिकारी_  
_रंग_: _काला, नीला_ | _रत्न_: _नीलम_ | _दिन_: _शनिवार_ | _देव_: _हनुमान जी, भैरव जी, शनि देव_  
_कारक_: _नौकरी, बीमारी, आयु, दुख, मकान, मशीनरी, लोहा, गरीब_

---

#### _1. शनि खराब/पीड़ित होने के लक्षण_
- _धन_: पैसा फंसना, कर्ज, नौकरी जाना, प्रमोशन रुकना
- _सुख_: आलस्य, थकान, अकेलापन, डिप्रेशन, तलाक
- _शरीर_: घुटने, पैर, हड्डी, नसों में दर्द, लकवा, कैंसर, लंबी बीमारी
- _जीवन_: घर में अशांति, कोर्ट-कचहरी, जेल, अपमान, मशीन खराब
- _कुंडली_: 1, 2, 4, 7, 8, 12 में शनि या मंगल-राहु के साथ = शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या

#### _2. शनि उच्च-नीच में फल_
*उच्च शनि - तुला राशि 20 अंश*  
_फल_: न्यायाधीश, नेता, करोड़पति, दीर्घायु

*नीच शनि - मेष राशि 20 अंश*  
_फल_: गरीबी, अपमान, नौकरी में बाधा, लंबी बीमारी

*साढ़ेसाती - 7.5 साल*: चंद्र से 12, 1, 2 भाव में शनि  
*ढैय्या - 2.5 साल*: चंद्र से 4, 8 भाव में शनि

---

#### _3. शनि देव को प्रसन्न करने के 31 अचूक उपाय_
_शनिवार_ = सबसे शुभ दिन। _काला-नीला रंग_ धारण न करें, बल्कि दान करें।

1.  _शनि मंत्र_: `ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः` 108 बार / `ॐ शं शनैश्चराय नमः`
2.  _हनुमान पूजा_: _हर शनिवार हनुमान चालीसा + सुंदरकांड_. शनि हनुमान जी से डरते हैं
3.  _पीपल पूजा_: शनिवार सुबह पीपल में जल + शाम को सरसों तेल का दीया। 7 परिक्रमा
4.  _तेल दान_: शनिवार को सरसों तेल, काला तिल, काला कंबल, लोहे की वस्तु दान
5.  _शनि मंदिर_: शनि मंदिर में तेल चढ़ाएं, शनि चालीसा पाठ
6.  _व्रत_: _शनिवार व्रत_. सूर्यास्त के बाद एक बार भोजन, नमक रहित
7.  _रत्न_: _नीलम/जमुनिया/कटैला_ - _कुंडली दिखाकर मध्यमा में लोहे/पंचधातु में पहनें_
8.  _गरीब सेवा_: गरीब, मजदूर, मोची, सफाईकर्मी को भोजन, पैसा, जूता-चप्पल दान
9.  _कौआ-कुत्ता सेवा_: काले कौए को रोटी, काले कुत्ते को रोटी खिलाएं
10. _शिव पूजा_: शिवलिंग पर जल + काला तिल + शमी पत्र चढ़ाएं
11. _शनि यंत्र_: घर में स्थापित करके पूजा करें
12. _भैरव पूजा_: काल भैरव मंदिर में तेल, उड़द दाल चढ़ाएं
13. _सफाई_: घर-ऑफिस की सफाई, अनुशासन
14. _सत्य_: झूठ, चोरी, बेईमानी छोड़ें। शनि न्याय पसंद करते हैं
15. _मजदूर का पैसा_: मजदूर को पूरा पैसा समय पर दें
16. _लोहे का छल्ला_: घोड़े की नाल या नाव की कील का छल्ला मध्यमा में
17. _उड़द दान_: शनिवार को उड़द दाल, काली उड़द, काले चने दान
18. _जूता दान_: शनिवार को गरीब को जूता-चप्पल दान = साढ़ेसाती शांत
19. _शनि स्तोत्र_: दशरथ कृत शनि स्तोत्र पाठ
20. _नीम_: शनिवार को नीम का दातून न करें
21. _पश्चिम मुख_: शनिवार को पश्चिम दिशा में दीया जलाएं
22. _मंत्र_: `नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥`
23. _काली गाय की सेवा_: शनिवार को
24. _शराब-मांस त्याग_: शनि खराब हो तो तुरंत छोड़ें
25. _कर्ज_: शनिवार को कर्ज न लें, न दें
26. _यज्ञ_: शनि शांति यज्ञ, महामृत्युंजय यज्ञ
27. _काली वस्तु_: काला कपड़ा, कंबल गरीब को दान
28. _शनि की दृष्टि_: शनि की मूर्ति के सामने न खड़े हों, तिरछा खड़े हों
29. _अनाथ सेवा_: अनाथ आश्रम में दान
30. _सूर्य को जल_: रोज सुबह सूर्य को जल दें, पिता का सम्मान करें
31. _हनुमान जी को चोला_: शनिवार को सिंदूर + चमेली तेल

#### _4. विशेष समस्या के उपाय_
- _साढ़ेसाती / ढैय्या_: 7 शनिवार पीपल में दीया + हनुमान चालीसा + गरीब को जूता दान
- _नौकरी में रुकावट_: 51 शनिवार तेल दान + शनि मंत्र 108 बार + बेरोजगार को भोजन
- _कोर्ट-कचहरी / जेल_: काल भैरव पूजा + काले कुत्ते को रोटी + शिव पर काला तिल
- _कर्ज मुक्ति_: शनिवार को कर्ज का कुछ हिस्सा चुकाएं + पीपल पूजा
- _बीमारी / घुटने दर्द_: लोहे का छल्ला + महामृत्युंजय जप + गरीब को कंबल
- _व्यापार में घाटा_: शनिवार को मशीनरी की सफाई + तेल लगाना + मजदूर को मिठाई
- _शत्रु बाधा_: हनुमान जी को 7 बार सुंदरकांड + शनि मंदिर में नारियल

#### _5. शनिवार को क्या करें - क्या ना करें_
_✅ करें_: _पीपल पूजा, हनुमान पूजा, शिव पूजा, तेल दान, गरीब सेवा, सफाई, अनुशासन, सत्य, दान, शनि चालीसा, काला तिल दान, जूता दान_  
_❌ ना करें_: _झूठ, चोरी, शराब-मांस, किसी गरीब का अपमान, लोहे की नई वस्तु खरीदना, कर्ज लेना, बाल-नाखून काटना, काले कपड़े पहनकर शनि मंदिर जाना (दान के लिए ठीक), पिता से झगड़ा_

---

### _📖 _शनिवार व्रत कथा संक्षेप_ 📖_

_एक सेठ को शनि की साढ़ेसाती लगी। वो गरीब हो गया। उसने हनुमान जी की शरण ली।_  
_हनुमान जी ने कहा - पीपल में जल दे, गरीब को जूता दान कर।_  
_सेठ ने 7 शनिवार ऐसा किया, शनि प्रसन्न हो गए और उसे पहले से ज्यादा धन मिला।_  
_सीख_: _कर्म सुधार + गरीब सेवा + हनुमान भक्ति से शनि प्रसन्न होते हैं_

---

_"ॐ शं शनैश्चराय नमः | जय बजरंगबली | हर हर महादेव"_

_नोट_: नीलम रत्न पहनने से पहले कुंडली अवश्य दिखाएं। गलत नीलम जीवन बर्बाद कर देता है। 3 दिन ट्रायल करके ही पहनें।

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 हर समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है आपकी प्रत्येक इच्छा, महत्वकांक्षा, जीवन में बुलंदियों पर पहुंचना या किसी भी तरह की समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है *व्यापार बढ़ोतरी किया कराया शादी के लिए माता-पिता को मनाना जब कहीं ना ही हो काम तो हमसे में समाधान हर मुश्किल से मुश्किल समस्या का समाधान ज्योतिष मेरा काम नहीं मेरी साधना है जब कहीं ना हो काम तो हमसे ले समाधान https://devlinai.co.in/own_projects/acharya-main/
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Shukrwar ka panchag, शुक्रवार का पंचांग, 21 अगस्त 2026 का पंचांग,

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गुरुवार का पंचांग शनिवार का पंचांग

शुक्रवार का पंचांग, Shukrwar ka panchag, 21 अगस्त 2026 का पंचांग का पंचांग,

शुक्रवार का पंचांग, shukrwar ka panchang,

  • Panchang, पंचाग, Panchang 2026 हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang, पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-

    1:- तिथि (Tithi)
    2:- वार (Day)
    3:- नक्षत्र (Nakshatra)
    4:- योग (Yog)
    5:- करण (Karan)


    पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है, नित्य पंचांग पढ़ने से कुंडली के ग्रहो के शुभ फल मिलने लगते है, इसीलिए भगवान श्रीराम भी नित्य पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।

    जानिए, Shukravar Ka Panchang, शुक्रवार का पंचांग, आज का पंचांग, aaj ka panchang,

    21 अगस्त 2026 का पंचांग, 21 August  2026 ka Panchang,

  • महालक्ष्मी मन्त्र : ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥

  • ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥

    मित्रो हम पिछले 25 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।
  • कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
💰🔝💰🔝💰🔝💰🔝💰🔝💰🔝💰🔝💰


आज का पंचांग, aaj ka panchang,

दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।

शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय

“श्री सूक्त”,“महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नामो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।

शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में जीवन में समस्त सुख 🎁 , ऐश्वर्य 🎉 की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन 💝 सुखमय होता है बड़ा भवन 🏬, विदेश यात्रा ✈️ के योग बनते है।

* विक्रम संवत् – 2083 वर्ष
* शक संवत – 1948 वर्ष
* कलि संवत – 5128 वर्ष
* कलयुग – 5128 वर्ष
* अयन – दक्षिणायन,
* ऋतु – वर्षा ऋतु,
* मास – सावन माह
* पक्ष – शुक्ल पक्ष
* चंद्र बल – वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुम्भ,,


आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,
इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं ।
पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है, देवता प्रसन्न होते है ।

शुक्रवार को शुक्र देव की होरा :-

प्रात: 5.53 AM से 6.58 AM तक

दोपहर 01.29 PM से 2.34 PM तक

रात्रि 20.45 PM से 21.40 PM तक

दाहिने हाथ के अंगूठे से नीचे के हिस्से ( शुक्र का स्थान ) और अंगूठे पर थोड़ा सा इत्र लगाकर, ( इत्र ना मिले तो उसके बिना भी कर सकते है) बाएं हाथ के अंगूठे से उस हिस्से को शुक्र की होरा में “ॐ शुक्राये नम:” या

ॐ द्रांम द्रींम द्रौंम स: शुक्राय नम:।’ मंत्र का अधिक से अधिक जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य )I

यह उपाय आप कोई भी काम करते हुए चुपचाप कर सकते है इसके लिए किसी भी विधि विधान की कोई आवश्यकता नहीं है I

सुख समृद्धि 💰, ऐश्वर्य 💎, बड़ा भवन 🏬, विदेश यात्रा ✈️, प्रेम, रोमांस 💞, सुखी दाम्पत्य जीवन 👩‍❤️‍👨 के लिए शुक्रवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

शुक्रवार के दिन शुक्र की होरा में शुक्रदेव देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में शुक ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो 🎉 की प्राप्ति होती है ।

शुक्र देव के मन्त्र :-

ॐ शुं शुक्राय नमः।। अथवा

” ॐ द्राम द्रीम द्रौम सः शुक्राय नमः “।।



🕉️ शुक्रवार को अवश्य लें 10 महाविद्याओं के नाम 🕉️

  • तिथि, (Tithi): नवमी तिथि 23.36 PM तक तत्पश्चात दशमी तिथि, तिथि, (Tithi) :-,
  • तिथि के स्वामी – नवमी तिथि की स्वामी माँ दुर्गा जी और दशमी तिथि के स्वामी यमराज जी है I

नवमी तिथि की स्वामी देवी दुर्गा जी हैं ऎसे में जातक को दुर्गा जी की उपासना अवश्य करनी चाहिए।  

जीवन में यदि कोई संकट है अथवा किसी प्रकार की अड़चनें आने से काम नही हो पा रहा है तो जातक को चाहिए की दुर्गा सप्तशती के पाठ को करे और मां दुर्गा जी को लाल पुष्प अर्पित करके अपने जीवन में आने वाले संकटों को  दूर करने की प्रार्थना करे।

ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

नवमी तिथि में माँ  दुर्गा के 9  स्वरूपों स्मरण, उनके नमो के उच्चारण से जीवन में शुभ समय आता है   ।

जय माँ शैलपुत्री     2. जय माँ ब्रह्मचारिणी   3. जय माँ चंद्रघंटा   4. जय माँ कुष्मांडा    5. जय माँ स्कंदमाता    6. जय माँ कात्यायनी    7. जय माँ कालरात्रि   8. जय माँ महागौरी    9. जय माँ सिद्धिदात्री ।

 शुक्ल पक्ष की नवमी में भगवान शिव का पूजन करना वर्जित है लेकिन कृष्ण पक्ष की नवमी में शिव का पूजन करना उत्तम माना गया है।  

नवमी तिथि में माँ सिद्धिदात्री की उपासना परम फलदाई मानी जाती है  ।

हिंदू पंचाग की नौवीं  / नवमी  तिथि  रिक्ता तिथि कहलाती है। इस तिथि का नाम उग्रा भी है क्योंकि इस तिथि में शुभ कार्य करना वर्जित होता है।

लेकिन जब नवमी तिथि शनिवार के दिन आती है, तो सिद्धिदा योग बनता है, अर्थात इस तिथि में किए गए सभी कार्यो में कार्य सिद्धि की प्राप्ति होती है

किसी भी प्रकार के युद्ध में विजय पाने के लिए ये तिथि अनुकूल मानी गई है।

शास्त्रों के अनुसार किसी भी पक्ष की नवमी तिथि में लौकी और कद्दू नहीं खाना चाहिए।

ऐसे करें होलिका दहन, जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का होगा संचार, सभी कष्ट रहेंगे दूर, अवश्य जानिए होलिका दहन की विधि,

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नक्षत्र ( Nakshatra ) : अनुराधा 11.53 AM तक तत्पश्चात ज्येष्ठा

नक्षत्र के स्वामी :–            अनुराधा नक्षत्र के देवता मित्र, भैरव जी तथा स्वामी शनि देव जी है ।

 अनुराधा नक्षत्र, नक्षत्र मंडल में उपस्थित 27 नक्षत्रों में 17 वां है। आकाश मंडल में अनुराधा 4 तारों का समूह मंडल है।  

यह एक कमल का फूल जैसा लगता है जो हर परिस्तिथि में खिलने की क्षमता का प्रतीक है। यह सुरक्षा और शक्ति का भी प्रतीक है।

इस नक्षत्र का आराध्य वृक्ष : मौलश्री तथा स्वाभाव शुभ माना गया है। अनुराधा नक्षत्र सितारे का लिंग पुरुष है।  इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक पर शनि और मंगल दोनों ही ग्रहों का प्रभाव हमेशा रहता है।

इस नक्षत्र में जन्मे जातक आकर्षक, बुद्धिमान, बहादुर, परिश्रमी, नेतृत्व करने वाले, भरोसेमंद, ऊर्जावान तथा धार्मिक होते है।

लेकिन शनि – मंगल के शुभ ना होने पर जातक के जीवन में बहुत अस्थिरता रहती है, वह स्वार्थी, कठोर, क्रूर स्वभाव, असंतुष्ट, और बहुत चिंता करने वाला हो सकता है ।

अनुराधा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 8,  भाग्यशाली रंग लाल, सुनहरा और भूरा,  भाग्यशाली दिन  शनिवार, सोमवार और गुरुवार माना जाता है ।

अनुराधा नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को ॐ अनुराधाभ्यो नमः। मन्त्र माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।

जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करें, सूर्य देव के नामों का स्मरण करें ।

इस नक्षत्र के जातको को भगवान शिव और विष्णु  जी की पूजा करने से भी शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

अवश्य पढ़ें :- बी पी हाई रहता हो तो ना हो परेशान, इन उपायों से बी पी की समस्या निश्चित रूप से होगी दूर

योग(Yog) :- वैधृति 05.18 AM शनिवार 22 अगस्त तक

योग के स्वामी, स्वभाव :-     वैधृति योग के स्वामी दिति और स्वभाव हानिकारक है ।

प्रथम करण : – बालव 10.25 AM तक

करण के स्वामी, स्वभाव :-     बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।

द्वितीय करण :- कौलव 23.36 PM तक तत्पश्चात तैतिल

करण के स्वामी, स्वभाव :-   कौलव करण के स्वामी मित्र और स्वभाव सौम्य है ।

  • दिशाशूल (Dishashool)- शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है ।

  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.26 AM से 5.10 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.34 PM से 15.26 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.55 PM से 19.17 PM तक
  • अमृत काल : 04.56 PM से 06.44 AM शनिवार 22 अगस्त तक
  • अग्नि वास : पृथ्वी पर 23.26 PM तक तत्पश्चात आकाश


    अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।


    अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।

  • शिव वास : माँ गौरी जी के साथ 23.36 PM तक तत्पश्चात सभा में

  • जब भगवान शंकर  गौरी मइय्या के साथ होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शंकर जी के देवी गौरी के साथ रहने के समय किये गए  रूद्रअभिषेक से घर कारोबार में सुख-समृद्धि आती है, स्थाई लक्ष्मी का वास होता है ।

  •   शिव वास जब सभा में होता है अर्थात जब भगवान शंकर अपनी सभा में होते हैं, तो उस सामान्य रुद्र अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शिव के सभा में होने पर रूद्र अभिषेक करने से दुःख का सामना करना पड़ सकता है।



    दिशा शूल : शास्त्रों के अनुसार शुक्रवार को पश्चिम दिशा में दिशा शूल होता है, यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।

  • गुलिक काल : – शुक्रवार का गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)– दिन – 10:30 AM से 12:00 PM तक ।
  • सूर्योदय – प्रातः 05:53
  • सूर्यास्त – सायं : 18:55
  • विशेष – शास्त्रों के अनुसार किसी भी पक्ष की नवमी तिथि में लौकी और कद्दू का सेवन नहीं करना चाहिए ।
  • पर्व त्यौहार–

जरुर पढ़ें :- पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रो का राजा कहते है जानिए क्यों महत्वपूर्ण है पुष्य नक्षत्र,

“हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

मित्रो हम इस साईट के माध्यम से वर्ष 2010 से निरंतर आप लोगो के साथ जुड़े है। आप भारत या विश्व के किसी भी स्थान पर रहते है, अपने धर्म अपनी संस्कृति को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए https://lookmybiz.in/आचार्य-मुक्ति-नारायण-पाण्डेय-अध्यात्म--ज्योतिष-परामर्श-केंद्र के साथ अवश्य जुड़ें, हमारा सहयोग करें ।

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

21 अगस्त 2026 का पंचांग, 21 August 2026 ka Panchang, aaj ka panchang, aaj ka rahu kaal, aaj ka shubh panchang, friday ka panchang, panchang, shukrawar ka panchang, Shukravar Ka Panchang, shukrawar ka rahu kaal, shukrwar ka shubh panchang, आज का पंचांग, आज का राहुकाल, आज का शुभ पंचांग, पंचांग, फ्राइडे का पंचांग, शुक्रवार का पंचांग, शुक्रवार का राहु काल, शुक्रवार का शुभ पंचांग,

### प्रस्तुतकर्ता:  
### आचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय  
### *अध्यात्म ज्योतिष परामर्श केंद्र*  
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### _📖 _ शुक्र ग्रह के संपूर्ण उपाय शुक्र ग्रह - धन, भोग, सुख, वैवाहिक जीवन, कला का कारक_ 📖_


### _🙏 __ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः | ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः__ 🙏_

### _🪷 *_आचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय जी द्वारा प्रस्तुत_* 🪷_  
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### _🔥 _आज की 4 लाइन - शुक्र ग्रह विशेष_ 🔥_

_📖 _शुक्र = धन, सुख, वैभव, प्रेम, कला, दाम्पत्य सुख के कारक!__  
_✅ _शुक्र खराब = कर्ज, बीमारी, तलाक, सुंदरता में कमी, आलस्य__  
_💎 _शुक्रवार + शुक्र होरा = उपाय का सबसे शुभ समय__  
_📲 _इसे सेव करें और "ॐ श्रीं श्रियै नमः" लिखकर शेयर करें__

---

### _📖 _शुक्र ग्रह - धन, भोग, सुख, वैवाहिक जीवन, कला का कारक_ 📖_

_शुक्र देव_ = _दानव गुरु, असुरों के आचार्य, माँ लक्ष्मी के अंश_  
_रंग_: _सफेद_ | _रत्न_: _हीरा/ओपल_ | _दिन_: _शुक्रवार_ | _देव_: _माँ लक्ष्मी + इंद्राणी_  
_कारक_: _पत्नी, प्रेम, वाहन, घर, आभूषण, सुंदरता, संगीत, फैशन_

---

#### _1. शुक्र खराब/पीड़ित होने के लक्षण_
- _धन_: पैसा आता है टिकता नहीं, कर्ज, बैंक बैलेंस शून्य
- _सुख_: गृहस्थ जीवन में कलह, तलाक, प्रेम में धोखा
- _शरीर_: त्वचा रोग, शुगर, किडनी, आंख, गुप्त रोग, मोटापा
- _सुंदरता_: चेहरे की चमक जाना, आलस्य, नशे की लत
- _जीवन_: घर गंदा रहना, पत्नी से अनबन, कला में असफलता
- _कुंडली_: 6, 8, 12 भाव में या सूर्य-चंद्र के साथ = शुक्र दोष

#### _2. शुक्र उच्च-नीच में फल_
*उच्च शुक्र - मीन राशि 27 अंश*  
_फल_: करोड़पति, कलाकार, सुंदर, सुखी दाम्पत्य

*नीच शुक्र - कन्या राशि 27 अंश*  
_फल_: धन हानि, चरित्र दोष, बीमारी, बदनामी

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#### _3. शुक्र देव को प्रसन्न करने के 21 अचूक उपाय_
_शुक्रवार_ = सबसे शुभ दिन। _सफेद रंग_ धारण करें।

1.  _लक्ष्मी पूजा_: _माँ लक्ष्मी_ को सफेद मिठाई, खीर, इत्र, सफेद फूल चढ़ाएं
    _मंत्र_: `ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः | ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः`
2.  _शुक्र मंत्र_: `ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः` 108 बार
3.  _व्रत_: _शुक्रवार व्रत_। नमक-खट्टा-तेल रहित भोजन
4.  _दान_: _चावल, चीनी, सफेद वस्त्र, चांदी, इत्र, दही_ शुक्रवार को दान
5.  _रत्न_: _हीरा/ओपल/जरकन_ - _कुंडली दिखाकर मध्यमा में चांदी में पहनें_
6.  _गाय सेवा_: शुक्रवार को गाय को आटा + गुड़ + हरा चारा खिलाएं
7.  _सफाई_: घर की साफ-सफाई, सुगंध, इत्र का प्रयोग
8.  _पत्नी सम्मान_: पत्नी/महिलाओं का सम्मान। उन्हें उपहार दें
9.  _शुक्र यंत्र_: घर में स्थापित करके पूजा करें
10. _लक्ष्मी चालीसा_: शुक्रवार को 1 बार पाठ
11. _स्नान_: पानी में सफेद फूल + इत्र डालकर स्नान
12. _संगीत-कला_: भजन, संगीत, नृत्य से शुक्र प्रसन्न
13. _सफेद गाय की सेवा_: शुक्रवार को संभव हो तो
14. _माँ दुर्गा पूजा_: "दुर्गा सप्तशती" का पाठ
15. _आभूषण_: शुक्रवार को नया आभूषण पहनना शुभ
16. _जल_: चांदी के बर्तन में पानी पीना
17. _उपवास_: विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए व्रत
18. _कन्या पूजन_: शुक्रवार को 9 कन्याओं को भोजन + उपहार
19. _इत्र दान_: गरीबों को इत्र-सुगंध दान
20. _तुलसी नहीं_: शुक्रवार को तुलसी में जल नहीं चढ़ाते
21. _यज्ञ_: विवाह-सुख के लिए _शुक्र शांति यज्ञ_

#### _4. विशेष समस्या के उपाय_
- _विवाह में रुकावट_: 21 शुक्रवार व्रत + लक्ष्मी पूजा + सफेद वस्त्र दान
- _दाम्पत्य कलह_: पति-पत्नी दोनों सफेद कपड़े पहनें, एक साथ खीर खाएं
- _धन न टिकना_: तिजोरी में शुक्र यंत्र + गोमती चक्र + चांदी का सिक्का
- _प्रेम में सफलता_: शुक्रवार को प्रिय को सफेद फूल दें
- _सुंदरता के लिए_: शुक्रवार को चेहरे पर दही + हल्दी का उबटन
- _कर्ज मुक्ति_: शुक्रवार को कर्ज का कुछ हिस्सा + चावल दान
- _नौकरी में प्रमोशन_: ऑफिस में सुगंध + साफ-सफाई

#### _5. शुक्रवार को क्या करें - क्या ना करें_
_✅ करें_: _सफेद कपड़े, सुगंध, साफ-सफाई, लक्ष्मी पूजा, मिठाई, श्रृंगार, कला, दान, पत्नी को खुश रखना_  
_❌ ना करें_: _काले-नीले कपड़े न पहनें, खट्टा-तेल न खाएं, झूठ न बोलें, क्रोध न करें, किसी महिला का अपमान न करें, बाल-नाखून न काटें, लोहे की वस्तु न खरीदें_

---

### _📖 _शुक्रवार व्रत कथा संक्षेप_ 📖_

_एक सेठानी हर शुक्रवार माँ लक्ष्मी का व्रत रखती। घर की सफाई, पूजा करती।_  
_माँ लक्ष्मी प्रसन्न होकर उसे धन-वैभव देतीं।_  
_पड़ोसन ने ईर्ष्या में व्रत तोड़ा, वो गरीब हो गई।_  
_सीख_: _श्रद्धा + सफाई + दान से शुक्र मजबूत होता है_

---

_"ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः | ॐ श्रीं श्रियै नमः"_

_नोट_: हीरा रत्न पहनने से पहले कुंडली में शुक्र की स्थिति अवश्य दिखाएं। 6-8-12 में हीरा नुकसान करता है।

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### _प्रस्तुतकर्ता_:  
### _आचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय_  
### _अध्यात्म ज्योतिष परामर्श केंद्र_  
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Guruwar Ka Panchag, गुरुवार का पंचांग, 20 अगस्त 2026 का पंचांग,

Guruwar Ka Panchag, गुरुवार का पंचांग, 20 अगस्त 2026 का पंचांग,

गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 20 August 2026 Ka Panchang,

मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

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बृहस्पतिवार का पंचांग, Brahaspativar ka panchang,

  • Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।

* शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
* वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
* नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
* योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
* करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।

इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए । नित्य पंचाग पढ़ने से भाग्य चमकने लगता है ।

जानिए आज गुरुवार का पंचांग, Guruwar Ka Panchag,


आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है, आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,

इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है ।

मंगल श्री विष्णु मंत्र :-

मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥

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गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag,

20 अगस्त 2026 का पंचांग, 20 August 2026 Ka Panchang,


  • गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 20 अगस्त 2026 का पंचांग,
  • दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
  • गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए ।

    गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
  • गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
    इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
  • गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।
    इस उपाय को करने से कार्यो में अड़चने दूर होती है, भाग्य चमकने लगता है, बृहस्पति देव की कृपा मिलती है।

यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।
और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।

गुरुवार को विष्णु जी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, गुरुवार को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ परम फलदाई है

जीवन में कोई भी मनोकामना हो हनुमान जी के जन्मोत्सव के दिन अवश्य ही करें ये उपाय, 

  • *विक्रम संवत् – 2083,
  • * शक संवत – 1948,
    *कलि संवत- 5128,
    * अयन – दक्षियायणं,
    * ऋतु – वर्षा ऋतु,
    * मास – श्रावण माह
    * पक्ष – शुक्ल पक्ष
    *चंद्र बल – वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुम्भ,

गुरुवार को बृहस्पति देव की होरा :-

प्रात: 5.53 AM से 6.58 AM तक

दोपहर 01.30 PM से 2.35 PM तक

रात्रि 20.45 PM से 21.40 PM तक

आज गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा के समय दाहिने हाथ की तर्जनी ऊंगली ( अंगूठे के बगल वाली उंगली ) के नीचे गुरु पर्वत और उस पूरी ऊंगली पर बृहस्पति देव के मंत्र का जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य ) I

गुरुवार को बृहस्पति की होरा में अधिक से अधिक बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करें । शिक्षा, मान – सम्मान, व्यापार, कारोबार, नए कार्यो के प्रारम्भ के लिए गुरुवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा में बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

बृहस्पति देव के मन्त्र

ॐ बृं बृहस्पतये नमः।। अथवा

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः।।


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  • तिथि (Tithi) :- अष्टमी 21.18 PM तक तत्पश्चात नवमी,
  • तिथि का स्वामी – अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान शंकर जी और नवमी तिथि की स्वामी माँ दुर्गा देवी है I
  • अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान शिव कहे गए है। अष्टमी तिथि को भगवान शिव की विधि पूर्वक पूजा भोलेनाथ जी प्रसन्न होते है भक्तो को समस्त सिद्धियां प्राप्त होती है।
  • अष्टमी तिथि को…….
  • श्री शिवाये नमस्तुभ्यंम, एवं
  • ॐ नम: शिवाये मन्त्र का अधिक से अधिक जाप अवश्य करें ।
  • 🌺 अष्टमी तिथि का धार्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व
  • अष्टमी तिथि हिन्दू पंचांग की अत्यंत महत्वपूर्ण एवं शक्तिशाली तिथियों में से एक मानी जाती है। यह तिथि विशेष रूप से भगवान शिव, माँ दुर्गा और माँ महागौरी की उपासना के लिए श्रेष्ठ मानी गई है। शास्त्रों में अष्टमी को “जया तिथि” कहा गया है, जो विजय, साहस और सफलता का प्रतीक है।
  • 🌼 अष्टमी तिथि का विशेष नाम
  • अष्टमी तिथि का विशेष नाम “कलावती” है।
  • ✨ अष्टमी तिथि का महत्व
  • अष्टमी जया तिथियों की श्रेणी में आती है। मान्यता है कि इस तिथि में आरम्भ किए गए कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
  • यदि किसी पक्ष की अष्टमी तिथि मंगलवार को पड़े, तो सिद्धिद्दा योग बनता है, जिसे अत्यंत शुभ माना गया है।
  • चैत्र मास के शुक्ल एवं कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कुछ मुहूर्त ग्रंथों में शून्य तिथि कहा गया है, इसलिए उस दिन विशेष शुभ कार्यों के लिए योग्य मुहूर्त देखकर ही कार्य करना चाहिए।
  • 🕉️ भगवान शिव की पूजा
  • अष्टमी तिथि पर भगवान शिव की पूजा विशेष फलदायी मानी गई है।
  • शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र एवं धतूरा अर्पित करें।
  • भगवान शिव को नारियल का भोग अर्पित करें अथवा शिवजी के प्रसाद में नारियल का उपयोग करें।
  • ध्यान रखें: इस दिन स्वयं नारियल का सेवन नहीं करना चाहिए, ऐसी धार्मिक मान्यता है।
  • 🌺 माँ दुर्गा की आराधना
  • अष्टमी तिथि माँ दुर्गा की उपासना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।
  • विशेषकर अष्टमी तिथि में जन्मे जातकों को भगवान शिव एवं माँ दुर्गा की नियमित पूजा करनी चाहिए। इससे—
  • निर्भयता प्राप्त होती है।
  • जीवन के संकट दूर होते हैं।
  • आत्मबल एवं सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
  • शत्रु एवं नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।
  • 🙏 अष्टमी का विशेष मंत्र
  • ॥ ॐ दुं दुर्गायै नमः ॥
  • इस मंत्र की कम से कम एक माला जप करने से माँ दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
  • 📚 अष्टमी में क्या करना शुभ है ?
  • अष्टमी तिथि में निम्न कार्य अत्यंत शुभ माने गए हैं—
  • नई विद्याओं का अध्ययन प्रारम्भ करना।
  • संगीत, नृत्य, चित्रकला एवं अन्य ललित कलाओं का अभ्यास।
  • आध्यात्मिक साधना एवं मंत्र-जप।
  • पूजा-पाठ एवं हवन।
  • साहस एवं पराक्रम से जुड़े कार्य।
  • 🎉 अष्टमी पर मनाए जाने वाले प्रमुख पर्व
  • वर्ष भर विभिन्न महीनों में अनेक महत्वपूर्ण अष्टमियाँ आती हैं, जैसे—
  • 🌸 राधाष्टमी
  • 👶 अहोई अष्टमी
  • 🌼 गौरी अष्टमी
  • ❄️ शीतला अष्टमी
  • 🌺 दुर्गाष्टमी (महाअष्टमी) – नवरात्रि की सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक।
  • ⚠️ अष्टमी तिथि में ध्यान रखने योग्य बातें
  • भगवान शिव को नारियल अर्पित करें, लेकिन स्वयं नारियल का सेवन न करें (धार्मिक मान्यता)।
  • क्रोध, विवाद और अपशब्दों से बचें।
  • माता-पिता, गुरु एवं देवताओं का सम्मान करें।
  • यथाशक्ति दान-पुण्य एवं सेवा करें।
  • 🌸 अष्टमी तिथि का संदेश
  • अष्टमी तिथि शक्ति, साहस, विजय और आध्यात्मिक उन्नति की तिथि है। इस दिन भगवान शिव और माँ दुर्गा की आराधना करने से भय, संकट एवं नकारात्मकता दूर होती है तथा जीवन में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • ॥ ॐ नमः शिवाय ॥ 🔱
  • ॥ ॐ दुं दुर्गायै नमः ॥ 🌺
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नक्षत्र (Nakshatra) – विशाखा 09.09 AM तक तत्पश्चात अनुराधा

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी –      विशाखा नक्षत्र के देवता इंद्राग्नी ( इंद्र और अग्नि ) और स्वामी बृहस्पति देव जी है ।

विशाखा नक्षत्र, नक्षत्र मंडल में उपस्थित 27 नक्षत्रों में 16वां है।

विशाखा नक्षत्र देवी राधा के साथ सम्बंधित है जो उनकी प्रसन्नता को दर्शाता है, भगवान श्री कृष्ण के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता है।

विशाखा नक्षत्र वास्तव में पत्तियों से सजाया गया एक तोरण द्वार का प्रतीक है, जिसका मुख्य रूप से विवाह समारोहों में आवश्यकता है।

इस नक्षत्र का आराध्य वृक्ष : कटाई, नागकेशर तथा स्वाभाव अशुभ माना गया है। विशाखा नक्षत्र सितारे का लिंग महिला है।

इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक पर जीवन भर बृहस्पति देव जी का प्रभाव बना रहता है।

विशाखा नक्षत्र वालो को कभी धन की कमी नहीं सताती, या धन की परेशानी हो भी तो अधिक समय तक नहीं रहती।  विशाखा नक्षत्र वाले लोग बहुत भाग्यवान होते हैं।

विशाखा नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्तियों में अपने परिवार के प्रति विशेष लगाव रहता है। इन्हे एकल परिवार की बजाय संयुक्त परिवार में रहना ज्यादा पसंद होता है ।

विशाखा नक्षत्र वाले जातको के लिए भाग्यशाली संख्या 3 और 9,  भाग्यशाली रंग, सुनहरा,  भाग्यशाली दिन  मंगलवार, शुक्रवार और गुरुवार माना जाता है ।

विशाखा नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ इंद्राग्नीभ्यां नमः” अथवा “ॐ विशाखाभ्यां नमः”। मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।

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योग :- इंद्र 04.25 AM शुक्रवार 21 अगस्त तक

योग के स्वामी, स्वभाव :-    इंद्र 04.25 AM शुक्रवार 21 अगस्त तक ।

प्रथम करण :- विष्टि 08.15 AM तक

करण के स्वामी, स्वभाव :-   विष्टि करण के स्वामी यम और स्वभाव क्रूर है ।

द्वितीय करण :- बव 21.18 PM तक तत्पश्चात बालव

करण के स्वामी, स्वभाव :-    बव करण के स्वामी इंद्र देव और स्वभाव सौम्य है ।

ब्रह्म मुहूर्त : 4.25 AM से 5.09 AM तक

विजय मुहूर्त : 14.35 PM से 15.27 PM तक

गोधूलि मुहूर्त : 18.56 PM से 19.18 PM तक

अमृत काल : 12.17 AM से 02.04 AM शुक्रवार 21 अगस्त तक


अग्नि वास : पाताल में 21.18 PMतक तत्पश्चात पृथ्वी पर

 जब पाताल में अग्नि वास है तो वह हवन से सम्बन्धित अनुष्ठानों के लिये शुभ नहीं मानी जाती है, यह अशुभ मानी गई है । अग्नि के पाताल  वास के दौरान किये जाने वाले हवन  सम्बन्धित अनुष्ठानों व्यक्ति को आर्थिक नुकसान करना पड़ता है उसका  धन नष्ट हो सकता है।


अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।


शिव वास : शमशान में 21.18 PM तक तत्पश्चात माँ गौरी के साथ

शिव वास    श्मशान में –  जब भगवान शिव का श्मशान में वास होता हैं, तो रुद्र अभिषेक आदि  करना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ जी का  श्मशान में वास के दौरान अभिषेक करने से मृत्यु समान  परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

जब भगवान शंकर  गौरी मइय्या के साथ होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शंकर जी के देवी गौरी के साथ रहने के समय किये गए  रूद्रअभिषेक से घर कारोबार में सुख-समृद्धि आती है, स्थाई लक्ष्मी का वास होता है ।

  • दिशाशूल (Dishashool)– बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – गुलिक 09:30 AM से 11 AM बजे तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)– दिन – 1:30 PM से 3:00 PM तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 05:53
  • सूर्यास्त – सायं 18.56
  1. विशेष – अष्टमी को नारियल का सेवन नहीं करना चाहिए, अष्टमी को नारियल का सेवन करने से बुध्दि का नाश होता है  ।
  • पर्व त्यौहार
  • मुहूर्त (Muhurt)

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“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

मित्रो हम इस साईट के माध्यम से वर्ष 2010 से निरंतर आप लोगो के साथ जुड़े है। आप भारत या विश्व के किसी भी स्थान पर रहते है, अपने धर्म अपनी संस्कृति को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए https://lookmybiz.in/आचार्य-मुक्ति-नारायण-पाण्डेय-अध्यात्म--ज्योतिष-परामर्श-केंद्र www.memorymuseum.net के साथ अवश्य जुड़ें, हमारा सहयोग करें ।

अगर नित्य पंचाग पढ़ने से आपको लाभ मिल रहा है, आपका आत्मविश्वास बढ़ रहा है, आपका समय आपके अनुकूल हो रहा है तो आप हमें अपनी इच्छा – सामर्थ्य के अनुसार कोई भी सहयोग राशि 9425203501 पर Google Pay कर सकते है ।

आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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### *प्रस्तुतकर्ता*:  आचार्य मुक्ति नारायण पांडेय
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