शनिवार का पंचांग, Shaniwar Ka Panchang, 29 अगस्त 2026 का पंचांग ,

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Shaniwar Ka Panchang, शनिवार का पंचांग, 29 अगस्त 2026 ka Panchang,

मित्रो हम पिछले 25 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद

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  • Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)


पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए शनिवार का पंचांग, (Shanivar Ka Panchang), आज का पंचांग, aaj ka panchang, saturday ka panchang।

  • शनिवार का पंचांग, (Shanivar Ka Panchang, )

    29 अगस्त
    2026 का पंचांग, 29 August 2026 ka Panchang,
  • दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
  • शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।

*विक्रम संवत् – 2083,
* शक संवत – 1948,
* कलि संवत – 5128,

* कलयुग – 5128 वर्ष
* अयन – दक्षिणयान,
* ऋतु – वर्षा
ऋतु,
* मास –
भाद्रपद माह,
* पक्ष –
कृष्ण पक्ष,
*चंद्र बल –
मेष, वृषभ, सिंह, कन्या, धनु, कुम्भ,

शनिवार को शनि महाराज की होरा :-

प्रात: 05.57 AM से 7.02 AM तक

दोपहर 01.26 PM से 2.30 PM तक

रात्रि 20.38 PM से 9.34 PM तक

शनिवार को शनि की होरा में अधिक से अधिक शनि देव के मंत्रो का जाप करें । श्रम, तेल, लोहा, नौकरो, जीवन में ऊंचाइयों, त्याग के लिए शनि की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

शनिवार के दिन शनि की होरा में शनि देव देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में शनि ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,भारत की लगभग 150 करोड़ की आबादी में 0.001 % अर्थात लगभग 15 हज़ार आदमी ही नित्य पंचांग पढ़ पाते है।
आप पर ईश्वर की असीम कृपा है जो आपको नित्य पंचांग पढ़ने का, अपने भाग्य को प्रबल करने का, पापो के प्रायश्चित करने का अवसर मिल रहा है,
दुनिया के सारे उपाय एक तरफ है, और नित्य पंचाग पढ़ने का पुण्य उससे भी कहीं अधिक है,
इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है ।


शनि देव के मन्त्र :-

ॐ शं शनैश्चराय नमः।

अथवा

ऊँ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्‌। छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्‌।।

  • तिथि (Tithi) – प्रतिपदा 09.56 AM तक तत्पश्चात द्वितीया तिथि
  • तिथि का स्वामी – प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव जी और द्वितीया तिथि के स्वामी ब्रह्मा जी है ।

आज प्रतिपदा तिथि  है । प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव हैं। प्रतिपदा को आनंद देने वाली कहा गया है।

रविवार एवं मंगलवार के दिन प्रतिपदा होने पर मृत्युदा होती है, लेकिन शुक्रवार को प्रतिपदा सिद्धिदा हो जाती है।

अग्नि देव इस पृथ्वी पर साक्षात् देवता हैं, देवताओं में सर्वप्रथम अग्निदेव की उत्पत्ति हुई थी । ऋग्वेद का प्रथम मंत्र एवं प्रथम शब्द अग्निदेव की आराधना से ही प्रारम्भ होता है।

ऋग्वेद का प्रथम मंत्र है:

अग्निमीळे पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम्।
होतारं रत्नधातमम्॥

अर्थात— मैं  उन अग्नि देव की स्तुति करता हूँ, जो यज्ञ के पुरोहित, देवताओं तक आहुति पहुँचाने वाले और समस्त श्रेष्ठ फल प्रदान करने वाले हैं।

हिन्दू धर्म ग्रंथो में  देवताओं में प्रथम स्थान अग्नि देव का ही दिया  गया  है। अग्नि देव सोने के भगवान के रूप में वर्णित है।

पुराणों में आठ दिशाओं के आठ रक्षक देवता हैं जिन्हें अष्ट-दिक‌्पाल कहते हैं। इनमें दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) दिशा के रक्षक अग्निदेव हैं। इसीलिए अग्निदेव की प्रतिमा मंदिर के दक्षिण-पूर्वी कोण में स्थापित होती है।

पौराणिक युग में अग्नि देव के ऊपर अग्नि पुराण नामक एक ग्रन्थ भी रचित हुआ। अग्निदेव सब देवताओं के मुख हैं और यज्ञ में इन्हीं के द्वारा देवताओं को समस्त यज्ञ-वस्तु प्राप्त होती है।  देवताओं के दूत — अग्नि को देवदूत या देवताओं तक संदेश पहुँचाने वाला माना जाता है।

अग्नि देव की सात जिह्वाएँ :  वैदिक परंपरा में अग्नि की सात जिह्वाओं का वर्णन मिलता है। एक प्रसिद्ध सूची है:

काली, कराली, मनोजवा, सुलोहिता, सुधूम्रवर्णा, स्फुलिंगिनी, विश्वनरि

इन नामों को अग्नि की अलग-अलग ज्वालाओं और शक्तियों के प्रतीक के रूप में समझा जाता है।

साक्षी — हिंदू विवाह संस्कार में अग्नि को अत्यंत पवित्र साक्षी माना जाता है। विवाह संस्कार में अग्नि को साक्षी मानकर सप्तपदी ली जाती है। वर-वधू अग्नि के चारों ओर फेरे लेते हैं और सप्तपदी के माध्यम से वैवाहिक जीवन के संकल्प लेते हैं।

गृहस्थ जीवन के रक्षक — वैदिक परंपरा में घर की अग्नि का विशेष महत्व था, यह गृहस्थ जीवन को चलाने वाले कहे गए है ।

अग्नि देव को सामान्यतः लाल या स्वर्णिम आभा वाले देवता के रूप में चित्रित किया जाता है। उनके:

दो या अधिक मुख, सात जिह्वाएँ, सात किरणें/ज्वालाएँ, हाथों में यज्ञ-संबंधी वस्तुएँ बताई जाती हैं।
उनका वाहन मेढ़ा (राम) माना जाता है।

वास्तुशास्त्र में दक्षिण-पूर्व दिशा को अग्नेय कोण कहा जाता है। इसे अग्नि तत्व से जोड़ा जाता है। परंपरागत रूप से रसोई और अग्नि से जुड़े कार्यों के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा को उपयुक्त माना गया है।

अग्निदेव में प्रेम पूर्वक ‘‘स्वाहा‘‘ कहकर दी हुई आहुतियों को अग्नि देव अपनी सातो जिह्वाओं से ग्रहण करते है, इससे  तीनो देव ब्रह्मा – विष्णु – महेश तथा समस्त देव स्वत: ही तृप्त हो जाते है ।

प्रतिपदा तिथि को इष्टि भी कहते है, मान्यता है कि माह में दो बार आने वाली इस तिथि पर भगवान को प्रशाद चढ़ाने, भोग लगाने से पूरे 15 दिन का भोग लगाने का फल मिलता है अर्थात इस दिन दैनिक पूजा में अथवा मंदिर में भगवान, अपने इष्ट को भोग अवश्य ही लगाएं

अग्नि देव की पत्नी का नाम स्वाहा हैं जो कि दक्ष प्रजापति तथा आकूति की पुत्री थीं। अग्निदेव की पत्नी स्वाहा के पावक, पवमान और शुचि नामक तीन पुत्र और पुत्र-पौत्रों की संख्या उनंचास है।

प्रतिपदा तिथि के दिन अग्नि देव के मन्त्र “ॐ अग्नये स्वाहा” का जाप अवश्य ही करें । शास्त्रों में अग्निदेव का बीजमन्त्र “रं” तथा मुख्य मन्त्र “रं वह्निचैतन्याय नम:” है।

शास्त्रों के अनुसार अग्नि देव की उपासना से धन, धान्य, यश, शक्ति, सुख – समृद्धि प्राप्त होती है, परिवारिक सुख मिलता है । 

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नक्षत्र (Nakshatra) – पूर्वभाद्रपद 03.42 AM रविवार 30 अगस्त तक

नक्षत्र के स्वामी :-         पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के देवता अजैकपाद तथा स्वामी देवगुरू बृहस्पति हैं ।

 नक्षत्रों की श्रेणी में पूर्वाभाद्रपद 25 वां नक्षत्र है। पूर्वाभाद्रपद का अर्थ है ‘पहले आने वाला भाग्यशाली पैरों वाला व्यक्ति’। 

पूर्व भाद्रपद नक्षत्र में जन्मे जातक वाकपटु होते है उन्हें भाषण कला में निपुणता होती है ।

पूर्व भाद्रपद नक्षत्र तारे का लिंग पुरुष है। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का आराध्य वृक्ष: आंबा, आम, तथा स्वाभाव उग्र होता है ।

इस नक्षत्र में जन्मे जातक आशावादी, ईमानदार, परोपकारी, मिलनसार, भरोसेमंद, धनवान और आत्मनिर्भर व्यक्ति होते हैं।

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक विपरीत परिस्थितियों से घबराते नहीं है, वरन अपने सकारत्मक रवैये के कारण यह हर परिस्तिथि को अपने अनुकूल करने की क्षमता रखते है । सामान्यता यह  छल कपट, बेईमानी और नकारात्मक विचारो से दूर रहते हैं। 

पूर्व भाद्रपद नक्षत्र के लिए भाग्यशाली अंक 3 और 8, भाग्यशाली रंग स्लेटी,  भाग्यशाली दिन शनिवार और बुधवार है ।

पूर्व भाद्रपद नक्षत्र में जन्मे जातको को नित्य तथा अन्य सभी को आज  नक्षत्र देवता नाममंत्र:- “ॐ अजैकपदे नमः” मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करना चाहिए।

पूर्वभाद्रपद नक्षत्र के जातको को भगवान शंकर की आराधना करनी चाहिए। उन्हें भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप करना चाहिए , इससे जीवन में सभी संकट दूर रहते है ।

इस नक्षत्र में जन्मे जातको को काले कपड़े एवं चमड़े से बनी वस्तुओं का प्रयोग करने से बचना चाहिए ।

अगर 50 की जगह 25, 60 की जगह 30 की उम्र चाहते है, जीवन में डाक्टर के पास ना जाना हो तो अवश्य करे ये उपाय   

  • योग (Yog) – सुकर्मा 06.36 AM तक तत्पश्चात धृति
  • योग के स्वामी, स्वभाव :-       सुकर्मा योग के स्वामी इंद्र जी और स्वभाव शुभ माना जाता है ।
  • प्रथम करण : – कौलव 09.56 AM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-       कौलव करण के स्वामी मित्र और स्वभाव सौम्य है ।
  • द्वितीय करण : – तैतिल 21.50 PM तक तत्पश्चात गर
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-     तैतिल करण के स्वामी विश्वकर्मा जी और स्वभाव सौम्य है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.26 AM से 5.10 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.30 PM से 15.21 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.46 PM से 19.09 PM तक
  • अमृत काल : अमृत काल 19.32 PM से 21.10 PM तक

  • अग्नि वास : पृथ्वी 09.56 AM तक तत्पश्चात आकाश

    अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।

    अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।

  • शिव वास : शिव वास माँ गौरी के साथ 09.56 AM तक तत्पश्चात सभा में

    जब भगवान शंकर  गौरी मइय्या के साथ होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शंकर जी के देवी गौरी के साथ रहने के समय किये गए  रूद्रअभिषेक से घर कारोबार में सुख-समृद्धि आती है, स्थाई लक्ष्मी का वास होता है ।


      शिव वास जब सभा में होता है अर्थात जब भगवान शंकर अपनी सभा में होते हैं, तो उस सामान्य रुद्र अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शिव के सभा में होने पर रूद्र अभिषेक करने से दुःख का सामना करना पड़ सकता है।
  • गुलिक काल : – शनिवार को गुलिक काल प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
  • दिशाशूल (Dishashool)- शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।

    यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
  • राहुकाल (Rahukaal)-सुबह – 9:00 से 10:30 तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 05:57 AM
  • सूर्यास्त – सायं 18:46 PM
  • विशेष – प्रतिपदा के दिन कद्दू  /  पेठे का सेवन नहीं करना चाहिए, प्रतिपदा के दिन इनका सेवन करने से धन की हानि होती है । 
  • द्वितीया को बैगन, कटहल और नींबू का सेवन नहीं करना चाहिए ।


अवश्य पढ़ें :-राशिनुसार इन वृक्षों की करें सेवा, चमकने लगेगा भाग्य,

  • पर्व त्यौहार-
  • मुहूर्त (Muhurt) –

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

मित्रो हम इस साईट के माध्यम से वर्ष 2010 से निरंतर आप लोगो के साथ जुड़े है। आप भारत या विश्व के किसी भी स्थान पर रहते है, अपने धर्म अपनी संस्कृति को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए https://lookmybiz.in/आचार्य-मुक्ति-नारायण-पाण्डेय-अध्यात्म--ज्योतिष-परामर्श-केंद्र www.memorymuseum.net के साथ अवश्य जुड़ें, हमारा सहयोग करें ।

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

29 अगस्त 2026 का पंचांग, 29 August 2026 ka panchang, aaj ka panchang, aaj ka rahu kaal, aaj ka shubh panchang, panchang, saturday ka panchang, shanivar ka panchang, Shaniwar Ka Panchag, shanivar ka rahu kaal, shanivar ka shubh panchang, आज का पंचांग, आज का राहुकाल, आज का शुभ पंचांग, पंचांग, शनिवार का पंचांग, शनिवार का राहु काल, शनिवार का शुभ पंचांग, सैटरडे का पंचांग,

### ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय*
## ( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ)
### *अध्यात्म ज्योतिष परामर्श केंद्र*  
### *श्याम नगर, रायपुर, छत्तीसगढ़*  
### _📞 _9425203501 | 7000121183 | 7587346995 | 0771-4070168__
 हर समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है आपकी प्रत्येक इच्छा, महत्वकांक्षा, जीवन में बुलंदियों पर पहुंचना या किसी भी तरह की समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है *व्यापार बढ़ोतरी किया कराया शादी के लिए माता-पिता को मनाना जब कहीं ना ही हो काम तो हमसे में समाधान हर मुश्किल से मुश्किल समस्या का समाधान ज्योतिष मेरा काम नहीं मेरी साधना है जब कहीं ना हो काम तो हमसे ले समाधान https://devlinai.co.in/own_projects/acharya-main/
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Shukrwar ka panchag, शुक्रवार का पंचांग, 28 अगस्त 2026 का पंचांग,

Shukrwar ka panchag, शुक्रवार का पंचांग, 28 अगस्त 2026 का पंचांग,

आप सभी को रक्षा बंधन के महा पर्व की हार्दिक शुभकामनायें

गुरुवार का पंचांग शनिवार का पंचांग

शुक्रवार का पंचांग, Shukrwar ka panchag, 28 अगस्त 2026 का पंचांग का पंचांग,

शुक्रवार का पंचांग, shukrwar ka panchang,

  • Panchang, पंचाग, Panchang 2026 हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang, पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-

    1:- तिथि (Tithi)
    2:- वार (Day)
    3:- नक्षत्र (Nakshatra)
    4:- योग (Yog)
    5:- करण (Karan)


    पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है, नित्य पंचांग पढ़ने से कुंडली के ग्रहो के शुभ फल मिलने लगते है, इसीलिए भगवान श्रीराम भी नित्य पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।

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    28 अगस्त 2026 का पंचांग, 28 August  2026 ka Panchang,

  • महालक्ष्मी मन्त्र : ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥

  • ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥

    मित्रो हम पिछले 25 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।
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आज का पंचांग, aaj ka panchang,

दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।

शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय

“श्री सूक्त”,“महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नामो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।

शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में जीवन में समस्त सुख 🎁 , ऐश्वर्य 🎉 की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन 💝 सुखमय होता है बड़ा भवन 🏬, विदेश यात्रा ✈️ के योग बनते है।

* विक्रम संवत् – 2083 वर्ष
* शक संवत – 1948 वर्ष
* कलि संवत – 5128 वर्ष
* कलयुग – 5128 वर्ष
* अयन – दक्षिणायन,
* ऋतु – वर्षा ऋतु,
* मास – सावन माह
* पक्ष – शुक्ल पक्ष
* चंद्र बल – वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुम्भ,,

कोई भद्रा, चंद्र ग्रहण, पंचक से ना डरें, रक्षाबंधन के दिन सिर्फ इस समय को छोड़कर अपने भाइयों को बांधे राखी, यह है सबसे शुभ मुहूर्त


आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,
इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं ।
पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है, देवता प्रसन्न होते है ।

शुक्रवार को शुक्र देव की होरा :-

प्रात: 05.57 AM से 7.01 AM तक

दोपहर 01.26 PM से 2.31 PM तक

रात्रि 20.39 PM से 21.35 PM तक

दाहिने हाथ के अंगूठे से नीचे के हिस्से ( शुक्र का स्थान ) और अंगूठे पर थोड़ा सा इत्र लगाकर, ( इत्र ना मिले तो उसके बिना भी कर सकते है) बाएं हाथ के अंगूठे से उस हिस्से को शुक्र की होरा में “ॐ शुक्राये नम:” या

ॐ द्रांम द्रींम द्रौंम स: शुक्राय नम:।’ मंत्र का अधिक से अधिक जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य )I

यह उपाय आप कोई भी काम करते हुए चुपचाप कर सकते है इसके लिए किसी भी विधि विधान की कोई आवश्यकता नहीं है I

सुख समृद्धि 💰, ऐश्वर्य 💎, बड़ा भवन 🏬, विदेश यात्रा ✈️, प्रेम, रोमांस 💞, सुखी दाम्पत्य जीवन 👩‍❤️‍👨 के लिए शुक्रवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

शुक्रवार के दिन शुक्र की होरा में शुक्रदेव देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में शुक ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो 🎉 की प्राप्ति होती है ।

शुक्र देव के मन्त्र :-

ॐ शुं शुक्राय नमः।। अथवा

” ॐ द्राम द्रीम द्रौम सः शुक्राय नमः “।।

राशिनुसार इस तरह से  बंधवाएं राखी, कुंडली के ग्रहो के मिलेंगे शुभ फल

🕉️ शुक्रवार को अवश्य लें 10 महाविद्याओं के नाम 🕉️

  • तिथि, (Tithi): पूर्णिमा 09.48 AM तक तत्पश्चात प्रतिपदा, तिथि, (Tithi) :-,
  • तिथि के स्वामी – पूर्णिमा तिथि के स्वामी चंद्र देव जी और प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव जी है I

श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन / राखी का पर्व ना केवल भारत में वरन विश्व के बहुत से हिस्सों में जहाँ भारतीय रहते है हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाया जाता है।

धार्मिक ग्रंथो में बहुत जगह उल्लेख आया है कि देवता भी इस पर्व को हर्ष उल्लास के साथ मनाते है। मान्यता है कि सावन माह की पूर्णिमा के दिन शुभ मुहूर्त में बाँधा गया रक्षासूत्र का प्रभाव बहुत शक्तिशाली होता है।

इस साल 2026 को सावन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि गुरुवार  27 अगस्त को सुबह  09 बजकर 09  मिनट पर प्रारंभ हो रही है जो शुक्रवार 28 अगस्त को दोपहर 9 बजकर 49 मिनट तक रहेगी। इसलिए रक्षाबंधन का पर्व शुक्रवार 28 अगस्त को ही मनाया जायेगा इसमें कोई भी संशय नहीं है ।

इस बार बहुत से ज्योतिष, सोशल मिडिया के बहुत से तथा कथित विद्वान रक्षा बंधन पर भद्रा, चंद्र ग्रहण और पंचक का साया बताकर लोगो को डरा रहे है, इन बातो को हैडिंग में डालकर अपने पेज, साइट का ट्रैफिक बढ़ा रहे है जबकि यह कहीं से भी सत्य नहीं है ।  

गुरुवार 27 अगस्त को भद्रा पूर्णिमा तिथि के प्रारम्भ होने के साथ ही अर्थात प्रात: 09.09 AM से ही लग जाएगी जो उसी रात को 9.29 PM तक रहेगी अर्थात शुक्रवार को जिस दिन रक्षा बंधन मनाया जायेगा उस दिन भद्रा नहीं है ।

गुरुवार 27 अगस्त को ही पंचक दोपहर में 1.36 PM पर लग जाएगा, पंचक पूरे पांच दिन रहते है  जिसका समापन मंगलवार 1 सितंबर को प्रात:  3.24 PM पर  होगा । शास्त्रों में पंचक में कोई भी शुभ कार्य करने को मना किया जाता है लेकिन पंचक के दौरान पूजा पाठ और धार्मिक कार्य किये जाते है उनपर किसी भी प्रकार का प्रतिबन्ध नहीं रखा गया है, इसलिए रक्षाबंधन पर्व पर पंचक का किसी भी तरह का कोई भी प्रभाव नहीं होगा ।

शुक्रवार 28 अगस्त को इस साल का अंतिम चंद्रग्रहण भी लगने जा रहा है  जो सुबह 06.53 से दोपहर 12.32 PM तक रहेगा ।  लेकिन, चूँकि यह चंद्रग्रहण भारत में दिखाई ही नहीं देगा तो इसका सूतक भी नहीं  लगेगा अर्थात इस ग्रहण का भारत के पर्व पर किसी भी प्रकार से कोई प्रभाव नहीं है । इसलिए आप इस दिन बिलकुल निश्चिंत होकर अपने भाइयों को राखी  बांध सकती है, भाई राखी बंधवा सकते है  ।

इस वर्ष 28 अगस्त को राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त पूर्णिमा तिथि के रहते ही प्रातः 5.37 AM  से प्रारंभ होगा और यह सुबह 9.48 मिनट तक रहेगा, लेकिन फिर 10.24 AM तक भी राखी बाँधी जा सकती है उसके बाद राहु काल लग जायेगा।

फिर दोपहर 12.05 PM 1.25 PM तक शुभ मुहूर्त है उसके बाद सायं 4.30 PM से सांय 6.00 बजे तक भी शुभ महूर्त है लेकिन बहनें अपने भाइयों को दोपहर 12.05 से सांयकाल सूर्यास्त से पहले कभी भी राखी बांध सकती है ।  

इस दिन शुक्रवार को राहु काल सुबह 10.30 AM से 12.00 PM तक है इस समय बहनो को अपने भाइयों को राखी नहीं बांधनी चाहिए ।

यह पर्व भाई – बहन के पवित्र स्नेह और विश्वास का प्रतीक है ।   इस दिन बहने अपने शुभ मुहूर्त में भाइयों के आरोग्य, सौभाग्य और दीर्घ आयु के लिए उनके दाहिने हाथ की कलाई में राखी / रक्षा सूत्र बांधती है और भाई अपनी बहनो को उपहार देकर उनकी रक्षा का वचन देते है ।

शास्त्रों के अनुसार सावन माह की पूर्णिमा के दिन जो जातक अपनी बहन / मुंहबोली बहन / पुरोहित से राखी बंधवाता है उसकी सभी संकटो से अवश्य ही रक्षा होती है ।

इस दिन भाइयों को अपनी बहनो के यहाँ उनके हाथ का बना भोजन अवश्य ही करना चाहिए, यदि भाई विवाहित हो तो उसे अपनी पत्नी के साथ अपनी बहन के यहाँ जाना चाहिए ।

 बहुत से स्थानो पर भोजन के पश्चात बहने भाइयों के सौभाग्य के लिए अपने हाथ से पान भी खिलाती है।

इस दिन चाहे बहन छोटी हो या बड़ी उसे अपने भाई के सर और पीठ पर हाथ फेर कर उसे आशीर्वाद अवश्य ही देना चाहिए ।

हर घर में बहनो को भाइयों को राखी बांधने से पहले सर्वप्रथम एक राखी को भगवान कृष्ण / विष्णु के चित्र पर अर्पित करनी चाहिए।

फिर बहनें शुभ मुहूर्त में अपने भाइयों को पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठाते हुए उनके माथे पर कुमकुम, रोली एवं अक्षत से तिलक करके भाई की दाहिनी कलाई पर रेशम से बनी राखी बांधती हैं और,

अपने हाथ से मिठाई खिलाकर भाई का मुंह मीठा कराती हैं साथ ही अपने भाई की निरोगिता, दीर्घ आयु, सुख समृद्धि एवं उन्नति की कामना करती है।

इस दिन हर मनुष्य को हनुमान जी को राखी अवश्य बांधनी चाहिए, इससे जीवन हर संकटों, बुरे समय से रक्षा होती है।

विभिन्न युगो, कालखंडो में भी इस पर्व के मनाये जाने के बारे में पता चलता है ।

शास्त्रों के अनुसार सबसे पहले माता लक्ष्मी ने इस पर्व को मनाया था । उन्होंने राजा बलि को अपना भाई बनाकर उनके हाथ में रक्षा सूत्र बांधकर पाताल लोक से श्री विष्णु जी को वापस ले आयी थी  

महाभारत में ही रक्षाबन्धन से सम्बन्धित कृष्ण और द्रौपदी की एक कथा के अनुसार जब भगवान श्री कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया तब उनकी तर्जनी में चोट आ गई और खून बहने लगा ।

यह देखकर द्रौपदी ने उसी समय बिना समय गँवाये अपनी साड़ी को फाड़कर श्रीकृष्ण जी की उँगली पर पट्टी बाँध दी। वह श्रावण मास की पूर्णिमा का ही दिन था। द्रोपदी के इसी स्नेह को देखकर वासुदेव ने द्रोपदी को उसकी रक्षा का वचन दिया।

रक्षा बंधन के दिन राखी बांधते समय बहने बोले यह मन्त्र, भाइयों की सदैव होगी हर संकटो से होगी रक्षा 

ऐसे करें होलिका दहन, जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का होगा संचार, सभी कष्ट रहेंगे दूर, अवश्य जानिए होलिका दहन की विधि,

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नक्षत्र ( Nakshatra ) : शतभिषा नक्षत्र 03.13 AM शनिवार 29 अगस्त तक

नक्षत्र के स्वामी :–            शतभिषा नक्षत्र के देवता वरुण देव जी और शतभिषा के स्वामी राहु जी है ।

 शतभिषा नक्षत्र का स्थान आकाश मंडल के नक्षत्रो में 24 वां है।। ‘शतभिषा’ का अर्थ है ‘सौ चिकित्सक’ अथवा ‘सौ चिकित्सा’। यह एक चक्र, एक बैल गाड़ी जो चिकित्सा का प्रतीक है जैसा प्रतीत होता है। ऐसे जातक पर राहु और शनि का प्रभाव रहता है।

 शताभिषा नक्षत्र सितारे का लिंग तटस्थ है। शताभिषा नक्षत्र का आराध्य वृक्ष: कदंब, तथा स्वाभाव चर होता है ।

यदि कुंडली में राहु और शनि का प्रभाव अच्छा है तो जातक दार्शनिक, वैज्ञानिक, अच्छे आचरण वाला, आत्मविश्वास से भरा हुआ, महत्वाकांक्षी, साहसी, सदाचारी, दाता, धार्मिक लेकिन कठोर स्वाभाव वाला होता है।

लेकिन राहु के खराब होने पर जातक तंत्र मन्त्र पर बहुत विश्वास रखने वाला, वहमी, शक्की, पराई स्त्री पर आसक्त रहने वाला, कलह प्रिय, घर से दूर रहने की चाह रखने वाला, घर वालो को दुःख देने वाला होता है । 

अत: शतभिषा नक्षत्र के जातको को राहु को अपने अनुकूल करने का उपाय अवश्य जी करना चाहिए ।

शतभिषा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 4 और 8, भाग्यशाली रंग हरा और नीला, भाग्यशाली दिन शुक्रवार, शनिवार और सोमवार होता है ।

शतभिषा नक्षत्र में जन्मे जातको को नित्य तथा अन्य सभी को आज  नक्षत्र देवता नाममंत्र:- “ॐ वरुणाय नमः “ या नक्षत्र नाम मंत्र :- “ॐ शतभिषजे नमः” मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करना चाहिए।

शतभिषा नक्षत्र के जातको को  भगवान शंकर जी की उपासना करने से आशातीत सफलता मिलती है ।

जीवन में कैसी भी हो समस्या रक्षाबंधन के दिन अवश्य करें ये अचूक उपाय

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योग(Yog) :- अतिगण्ड 07.28 AM तक तत्पश्चात सुकर्मा

योग के स्वामी, स्वभाव :-    अतिगण्ड योग के स्वामी चंद्र देव जी लेकिन स्वभाव हानिकारक  है ।

प्रथम करण : – बव 09.48 AM तक

करण के स्वामी, स्वभाव :-     बव करण के स्वामी इंद्र देव और स्वभाव सौम्य है ।

द्वितीय करण :- बालव 21.56 तक तत्पश्चात कौलव

करण के स्वामी, स्वभाव :-   बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।

  • दिशाशूल (Dishashool)- शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है ।

  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.28 AM से 5.12 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.31 PM से 15.22 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.47 PM से 19.10 PM तक
  • अमृत काल : 19.44 PM से 21.23 PM तक
  • अग्नि वास : पाताल 09.48 AM तक तत्पश्चात पृथ्वी


     जब पाताल में अग्नि वास है तो वह हवन से सम्बन्धित अनुष्ठानों के लिये शुभ नहीं मानी जाती है, यह अशुभ मानी गई है । अग्नि के पाताल  वास के दौरान किये जाने वाले हवन  सम्बन्धित अनुष्ठानों व्यक्ति को आर्थिक नुकसान करना पड़ता है उसका  धन नष्ट हो सकता है।


    अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।


  • शिव वास : शमशान में 09.48 AM तक तत्पश्चात माँ गौरी के साथी


    शिव वास    श्मशान में –  जब भगवान शिव का श्मशान में वास होता हैं, तो रुद्र अभिषेक आदि  करना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ जी का  श्मशान में वास के दौरान अभिषेक करने से मृत्यु समान  परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

    जब भगवान शंकर  गौरी मइय्या के साथ होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शंकर जी के देवी गौरी के साथ रहने के समय किये गए  रूद्रअभिषेक से घर कारोबार में सुख-समृद्धि आती है, स्थाई लक्ष्मी का वास होता है ।



    दिशा शूल : शास्त्रों के अनुसार शुक्रवार को पश्चिम दिशा में दिशा शूल होता है, यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।

  • गुलिक काल : – शुक्रवार का गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)– दिन – 10:30 AM से 12:00 PM तक ।
  • सूर्योदय – प्रातः 05:57
  • सूर्यास्त – सायं : 18:47
  • विशेष – पूर्णिमा और व्रत के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना, सहवास करना, क्रोध करना, हिंसा करना मना है । ऐसा करने से दुर्भाग्य आता है, दुःख, कलह और दरिद्रता के योग बनते है ।
  • प्रतिपदा के दिन कद्दू / पेठे का सेवन नहीं करना चाहिए, प्रतिपदा के दिन इनका सेवन करने से धन की हानि होती है ।
  • पर्व त्यौहार– रक्षाबंधन

जरुर पढ़ें :- पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रो का राजा कहते है जानिए क्यों महत्वपूर्ण है पुष्य नक्षत्र,

“हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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28 अगस्त 2026 का पंचांग, 28 August 2026 ka Panchang, aaj ka panchang, aaj ka rahu kaal, aaj ka shubh panchang, friday ka panchang, panchang, shukrawar ka panchang, Shukravar Ka Panchang, shukrawar ka rahu kaal, shukrwar ka shubh panchang, आज का पंचांग, आज का राहुकाल, आज का शुभ पंचांग, पंचांग, फ्राइडे का पंचांग, शुक्रवार का पंचांग, शुक्रवार का राहु काल, शुक्रवार का शुभ पंचांग,

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रक्षा बंधन का शुभ मुहूर्त, raksha bandhan ka shubh muhurth, raksha bandhan 2026,

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इस साल 2026 में श्रावण मास की पूर्णिमा शुक्रवार 28 अगस्‍त को है।

हिन्दू धर्म में रक्षाबंधन ( Raksha Bandhan ) का पर्व बहन-भाई के पवित्र प्रेम के लिए मनाया जाता है । शास्त्रों के अनुसार राखी, रक्षा बंधन के शुभ मुहूर्त ( raksha bandhan ka shubh muhurth, ) में ही बांधनी चाहिए ।

इस दिन बहने अपने भाइयों की कलाई में रक्षा सूत्र / राखी बांधकर उनके कल्याण, उन्नति की कामना करती है और भाई हर हाल में आजीवन अपनी बहन की रक्षा , उसके सुख-सौभाग्य के लिए वचन देते है ।

मान्यता है कि यह रक्षासूत्र भाइयों को इतनी शक्ति देता है कि वह हर परिस्तिथि का मुकाबला करके विजय प्राप्त कर सके।

रक्षा बंधन का शुभ मुहूर्त, raksha bandhan ka shubh muhurth,

इस साल 2026 को सावन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि गुरुवार 27 अगस्त को सुबह 09 बजकर 08 मिनट पर प्रारंभ हो रही है जो शुक्रवार 28 अगस्त को सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगी।

सावन पूर्णिमा तिथि का शुभारंभ: 27 अगस्त, गुरुवार, सुबह 9:08 AM से

सावन पूर्णिमा तिथि का समापन: 28 अगस्त, शुक्रवार, दोपहर 09:48 AM पर

इस साल 2026 को सावन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि गुरुवार  27 अगस्त को सुबह  09 बजकर 09  मिनट पर प्रारंभ हो रही है जो शुक्रवार 28 अगस्त को दोपहर 9 बजकर 49 मिनट तक रहेगी। इसलिए रक्षाबंधन का पर्व शुक्रवार 28 अगस्त को ही मनाया जायेगा इसमें कोई भी संशय नहीं है ।

इस बार बहुत से ज्योतिष, सोशल मिडिया के बहुत से तथा कथित विद्वान रक्षा बंधन पर भद्रा, चंद्र ग्रहण और पंचक का साया बताकर लोगो को डरा रहे है, इन बातो को हैडिंग में डालकर अपने पेज, साइट का ट्रैफिक बढ़ा रहे है जबकि यह कहीं से भी सत्य नहीं है ।  

गुरुवार 27 अगस्त को भद्रा पूर्णिमा तिथि के प्रारम्भ होने के साथ ही अर्थात प्रात: 09.09 AM से ही लग जाएगी जो उसी रात को 9.29 PM तक रहेगी अर्थात शुक्रवार को जिस दिन रक्षा बंधन मनाया जायेगा उस दिन भद्रा नहीं है ।

गुरुवार 27 अगस्त को ही पंचक दोपहर में 1.36 PM पर लग जाएगा, पंचक पूरे पांच दिन रहते है  जिसका समापन मंगलवार 1 सितंबर को प्रात:  3.24 PM पर  होगा । शास्त्रों में पंचक में कोई भी शुभ कार्य करने को मना किया जाता है लेकिन पंचक के दौरान पूजा पाठ और धार्मिक कार्य किये जाते है उनपर किसी भी प्रकार का प्रतिबन्ध नहीं रखा गया है, इसलिए रक्षाबंधन पर्व पर पंचक का किसी भी तरह का कोई भी प्रभाव नहीं होगा ।

शुक्रवार 28 अगस्त को इस साल का अंतिम चंद्रग्रहण भी लगने जा रहा है  जो सुबह 06.53 से दोपहर 12.32 PM तक रहेगा ।  लेकिन, चूँकि यह चंद्रग्रहण भारत में दिखाई ही नहीं देगा तो इसका सूतक भी नहीं  लगेगा अर्थात इस ग्रहण का भारत के पर्व पर किसी भी प्रकार से कोई प्रभाव नहीं है । इसलिए आप इस दिन बिलकुल निश्चिंत होकर अपने भाइयों को राखी  बांध सकती है, भाई राखी बंधवा सकते है  ।

इस वर्ष 28 अगस्त को राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त पूर्णिमा तिथि के रहते ही प्रातः 5.37 AM  से प्रारंभ होगा और यह सुबह 9.48 मिनट तक रहेगा, लेकिन फिर 10.24 AM तक भी राखी बाँधी जा सकती है उसके बाद राहु काल लग जायेगा।

फिर दोपहर 12.05 PM 1.25 PM तक शुभ मुहूर्त है उसके बाद सायं 4.30 PM से सांय 6.00 बजे तक भी शुभ महूर्त है लेकिन बहनें अपने भाइयों को दोपहर 12.05 से सांयकाल सूर्यास्त से पहले कभी भी राखी बांध सकती है ।  

इस दिन शुक्रवार को राहु काल सुबह 10.30 AM से 12.00 PM तक है इस समय बहनो को अपने भाइयों को राखी नहीं बांधनी चाहिए ।

इस प्रकार सिर्फ राहु काल को छोड़कर लगभग पूरे दिन बहनों के लिए अपने भाइयों को राखी बांधने का अवसर उपलब्ध रहेगा I

इस तरह से मनाएं रक्षा बंधन का पर्व, भाइयों को मिलेगा निरोगिता, दीर्घ आयु, सुख समृद्धि का वरदान 

शास्त्र मत है कि — “भद्रायाम द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा, श्रावणी नृपति हंति ग्रामम दहति फाल्गुनी। ” अर्थात भद्रा व्याप्त होने पर श्रावणी (रक्षाबंधन) तथा फाल्गुनी (होलिकादाह) आदि विशेष रूप से त्याग देना चाहिए।

तब ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर क्या किया जाए ? इसके लिए भी शास्त्र ही समाधान प्रस्तुत करते है की– “तत्सत्वे तु रात्रावपि कुर्यादिति निर्णयामृते” अर्थात यदि कभी ऐसी स्थिति भी उत्पन्न हो जाए तो ये दोनो कार्य (रक्षाबंधन वा होलिकादाह) रात्रिकाल में भद्रा की समाप्ति के बाद भी करना शास्त्र सम्मत है।
(देखे निर्णयसिंधु का द्वितीय परिच्छेद पृष्ठ संख्या 248)

क्योंकि निर्णयसिंधु ग्रंथ में ही लिखा है कि — “इदम प्रतिपद्युतायाम न कार्यम, नंदायाम दर्शने रक्षा बलिदानम दशाशु च, भद्रायाम गोकुलक्रीड़ा देशनाशाय जायते” (मदनरत्न, ब्रह्म वैवर्त पुराण)।

अर्थात नंदा तिथि (प्रतिपदा) युक्त पूर्णिमा अथवा प्रतिपदा तिथि में रक्षाबंधन आदि कार्यों को कभी नहीं करना चाहिए इससे सम्पूर्ण देश की हानि होती है।

शास्त्रों के अनुसार भद्रा के समय में भाइयों को रक्षा सूत्र बांधना उत्पातकारी बताया गया है, मान्यता है कि रावण ने भी एक बार भद्रा के समय में अपनी बहन से रक्षा सूत्र बंधवाया तो एक वर्ष के भीतर ही उसके कुल का सर्वनाश हो गया ।

ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि भद्रा शनिदेव की बहन है, जिसे ब्रम्हा जी ने श्राप दिया था कि अगर भद्रा में कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य किया जायेगा उसका परिणाम अशुभ ही होगा इसी कारण से भद्रा में राखी नहीं बांधने की सलाह दी जाती है।

लेकिन जैसे की हम पहले ही लिख चुके है वर्ष 2026 में भद्रा पूर्णिमा तिथि के साथ ही लग जाएगी और शुक्रवार 28 अगस्त को भद्रा नहीं है इसलिए निश्चिंत होकर राखी बंधवाई जा सकती है ।

रक्षा बंधन के दिन राखी बांधते समय बहने बोले यह मन्त्र, भाइयों की सदैव होगी हर संकटो से होगी रक्षा 

  • शास्त्रों के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने के लिए दो समय का सर्वथा त्याग करना चाहिए, पहला है भद्रा और दूसरा है राहुकाल ।
  • इन दोनों समय में कभी भी राखी नहीं बांधनी चाहिए. ये दोनों की अशुभ हैं. रक्षाबंधन के दिन राहुकाल सुबह में 10:30 AM से 12:02 PM तक है ।

रक्षाबंधन के दिन बहने अपने भाइयों की कलाई में राखी बांधने के बाद दही में चीनी डालकर भाइयों को अपने हाथो से दो बार अवश्य खिलाएं ।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चन्द्रमा और शुक्र दोनों को ही सुख का कारक माना गया है । दही, चन्द्रमा का जो मन के कारक और चीनी, शुक्र ग्रह का जो ऐश्वर्य कारक है उन का प्रतिनिधित्व करते है, और भगवान भोलेनाथ जी को भी दही और शक्कर अर्पित करने का विशेष महत्त्व है ।

इसलिए यदि बहने अपने भाइयों को राखी बांधने के बाद पहले दो बार दही और चीनी खिलाकर फिर कोई अन्य मीठा या कुछ और खिलाएं तो पूरे वर्ष भाइयों को सुख, प्रसन्नता, धन, कार्यो में सफलता और निश्चित ही ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी ।

अपने भाइयो के जीवन में एक वर्ष में अद्भुत सुखद परिवर्तन देखिएगा ।

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Guruwar Ka Panchag, गुरुवार का पंचांग, 27 अगस्त 2026 का पंचांग,

Guruwar Ka Panchag, गुरुवार का पंचांग, 27 अगस्त 2026 का पंचांग,

गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 27 August 2026 Ka Panchang,

मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद

बृहस्पतिवार का पंचांग, Brahaspativar ka panchang,

  • Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।

* शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
* वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
* नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
* योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
* करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।

इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए । नित्य पंचाग पढ़ने से भाग्य चमकने लगता है ।

जानिए आज गुरुवार का पंचांग, Guruwar Ka Panchag,


आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है, आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,

इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है ।

मंगल श्री विष्णु मंत्र :-

मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥

आज का पंचांग, aaj ka panchang, गुरुवार का पंचाग, Guruvar Ka Panchag,

गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag,

27 अगस्त 2026 का पंचांग, 27 August 2026 Ka Panchang,


  • गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 27 अगस्त 2026 का पंचांग,
  • दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
  • गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए ।

    गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
  • गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
    इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
  • गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।
    इस उपाय को करने से कार्यो में अड़चने दूर होती है, भाग्य चमकने लगता है, बृहस्पति देव की कृपा मिलती है।

यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।
और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।

गुरुवार को विष्णु जी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, गुरुवार को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ परम फलदाई है

जीवन में कोई भी मनोकामना हो हनुमान जी के जन्मोत्सव के दिन अवश्य ही करें ये उपाय, 

  • *विक्रम संवत् – 2083,
  • * शक संवत – 1948,
    *कलि संवत- 5128,
    * अयन – दक्षियायणं,
    * ऋतु – वर्षा ऋतु,
    * मास – श्रावण माह
    * पक्ष – शुक्ल पक्ष
    *चंद्र बल – मेष, वृषभ, सिंह, कन्या, धनु, कुम्भ,

गुरुवार को बृहस्पति देव की होरा :-

प्रात: 5.56 AM से 7 .01 AM तक

दोपहर 01.27 PM से 2.31 PM तक

रात्रि 20.40 PM से 21.36 PM तक

आज गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा के समय दाहिने हाथ की तर्जनी ऊंगली ( अंगूठे के बगल वाली उंगली ) के नीचे गुरु पर्वत और उस पूरी ऊंगली पर बृहस्पति देव के मंत्र का जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य ) I

गुरुवार को बृहस्पति की होरा में अधिक से अधिक बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करें । शिक्षा, मान – सम्मान, व्यापार, कारोबार, नए कार्यो के प्रारम्भ के लिए गुरुवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा में बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

बृहस्पति देव के मन्त्र

ॐ बृं बृहस्पतये नमः।। अथवा

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः।।


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तिथि (Tithi) :- चतुर्दशी 09.08 AM तक तत्पश्चात पूर्णिमा,

तिथि का स्वामी – चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शंकर जी और पूर्णिमा तिथि के स्वामी चंद्र देव जी है I

चतुर्दशी तिथि को चौदस भी कहते हैं। चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं। अतः प्रत्येक मास की चतुर्दशी विशेषकर कृष्णपक्ष की चतुर्दशी के दिन शिव जी की पूजा, अर्चना एवं रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं, भक्तो के सभी संकट दूर होते है ।

प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी मासिक शिवरात्रि कहलाती है । चतुर्दशी तिथि / मासिक शिवरात्रि में रात्रि में शिव मंत्र या जागरण करना बहुत उत्तम रहता है ।

स्कन्द पुराण में भी चतुर्दशी पर उपवास, रात्रि-जागरण और शिवपूजन का विधान मिलता है—

“चतुर्दश्यां निराहारः स्थितो भूत्वा शुचिव्रतः ।
पूजयेत्परया भक्त्या रात्रौ जागरणे शिवम् ॥”

अर्थात् चतुर्दशी को शुद्ध व्रत का पालन करते हुए निराहार रहकर रात्रि में जागरण और भक्ति से शिव की पूजा करने का बहुत महत्व है।

चतुर्दशी तिथि में जन्मा जातक समान्यता धर्मात्मा, धनवान, यशस्वी, साहसी, परिश्रमी तथा बड़ो का आदर सत्कार करने वाला होता है। चतुर्दशी तिथि में जन्मे लोगों को क्रोध बहुत आता है। इस तिथि में जन्मे जातक साहसी और परिश्रमी होते हैं। इन लोगों को जीवन में बहुत संघर्ष करना पड़ता है तभी इन्हे सफलता हाथ लगती है।

चतुर्दशी तिथि में जन्मे जातकों को नित्य भगवान शंकर की पूजा अवश्य करनी चाहिए। चतुर्दशी तिथि को समस्त संकटो से मुक्ति के लिए महामृत्युंजय मंत्र – ‘ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात्” का जाप करना अत्यंत फलदाई रहता है ।

शास्त्रों में कई चतुर्दशी तिथियों का बहुत महत्त्व बताया गया है। ये है महा शिवरात्रि, नरसिंह चतुर्दशी, अनंत चतुर्दशी, नरक चतुर्दशी और बैकुंठ चतुर्दशी । वैसे तो चतुर्दशी तिथि भगवान भोलेनाथ जी से जोड़ा जाता है लेकिन चतुर्दशी तिथि को केवल भगवान शंकर जी की ही आराधना की जाती है यह कहना सही नहीं है क्योंकि………

महा शिवरात्रि :- फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भगवान शंकर जी की आराधना परम फलदाई है । इस महाशिवरात्रि के दिन ब्रत रखने और भोलेनाथ जी की आराधना से जन्म जन्मांतर के पाप भी काट जाते है ।

नरसिंह चतुर्दशी :– वैशाख शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी, नरसिंह चतुर्दशी, भगवान नरसिंह से जुड़ी है।

अनंत चतुर्दशी :– भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी, अनंत चतुर्दशी को भगवान श्री विष्णु के अनंत स्वरूप की उपासना की जाती है।

नरक चतुर्दशी :- कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी, नरक चतुर्दशी के दिन भगवान श्री कृष्ण जी ने नरकासुर नामक राक्षस का वध करके बंधक बनाई गई हजारों महिलाओं को मुक्त कराया था। इसलिए इस दिन भगवान श्री कृष्ण जी की पूजा की जाती है । नरक चतुर्दशी के दिन यमराज जी की पूजा का भी विधान है, नरक की यातना से बचने और पितरो के उद्दार के लिए इस दिन 14 दीपक भी जलाये जाते है ।

वैकुण्ठ चतुर्दशी :- कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी, वैकुण्ठ चतुर्दशी को भगवान शिव और श्री विष्णु दोनों की उपासना की विशिष्ट परंपरा है।

किसी भी पक्ष की चतुर्दशी में शुभ कार्य करना वर्जित हैं, इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय की शुरुआत, बड़ी खरीददारी, मांगलिक कार्य, यात्रा आदि से बचना चाहिए, क्योंकि इस तिथि को क्रूरा कहा जाता है, चतुर्दशी तिथि रिक्ता तिथियों की श्रेणी में आती है।

लेकिन परंपरागत मुहूर्त दृष्टि से चतुर्दशी का उपयोग विशेष रूप से उन कार्यों में किया जा सकता है जिनमें समापन, बाधा-निवारण या दृढ़ता की आवश्यकता हो।

जैसे— पुराने विवाद को समाप्त करना, अनावश्यक वस्तुओं / आदतों का त्याग, शत्रु या बाधा से संबंधित उपाय, नकारात्मकता दूर करने की साधना, शिव आराधना आदि

शास्त्रों में चतुर्दशी को हिंसा, अनैतिक कार्य, मांस-मदिरा का सेवन, तिल का तेल, लाल रंग का साग, काँसे के बर्तन में भोजन एवं शारीरिक संबंध बनाना मना किया गया है ।

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नक्षत्र (Nakshatra) – धनिष्ठा 02.15 AM शुक्रवार 28 अगस्त तक

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी –        धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी मंगल और देवता वसु हैं ।

27 नक्षत्रों में से धनिष्ठा नक्षत्र 23वां नक्षत्र है। ‘धनिष्ठा’ का अर्थ होता है ‘सबसे अधिक धनवान’। 

 वैदिक ज्योतिष में आठ वसुओं को इस नक्षत्र का अधिपति देवता माना गया है, वसु श्रेष्ठता, सुरक्षा, धन-धान्य आदि वस्तुओं के ही दूसरे नाम भी हैं।

धनिष्ठा नक्षत्र एक ड्रम के आकार का नक्षत्र माना जाता है, जिसे ‘सबसे अधिक सुना जाने वाला’ नक्षत्र कहते है।

धनिष्ठा नक्षत्र का गण – राक्षस तथा सितारा का लिंग महिला है। धनिष्ठा नक्षत्र का आराध्य वृक्ष: शमी, तथा स्वाभाव शुभ होता है ।

इस नक्षत्र में जन्में व्यक्ति अनेको गुणों से समृद्ध होकर जीवन में सुख-समृद्धि, उच्च पद, प्रतिष्ठा प्राप्त करते है। ये लोग स्वभाव से संवेदनशील, दानी एवं अध्यात्मिक होते हैं। इस नक्षत्र के जातक दूसरों को कड़वे वचन नहीं बोलते है। यह अपने सम्बन्धो, कार्यो के प्रति ईमानदार होते हैं।  

धनिष्ठा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 8 और 9, भाग्यशाली रंग चमकीला स्लेटी, ग्रे, भाग्यशाली दिन शुक्रवार और बुधवार होता है ।

धनिष्ठा नक्षत्र में जन्मे जातको को नित्य तथा अन्य सभी को आज  “ॐ धनिष्ठायै नमः “ मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करना चाहिए।

धनिष्ठा नक्षत्र के जातको को दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से सुख – समृद्धि एवं समस्त सुखो की प्राप्ति होती है। इस नक्षत्र के जातको के लिए भगवान शिव की पूजा भी शुभफलदायक मानी जाती है।

इस नक्षत्र के जातको को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से भी समस्त सांसारिक सुख मिलते है। 

पुष्य नक्षत्र के इस उपाय से हर कार्य में मिलेगी सफलता


कैसा भी सिर दर्द हो उसे करें तुरंत छूमंतर, जानिए सिर दर्द के अचूक पा

योग :- शोभन 07.56 तक तत्पश्चात अतिगण्ड

योग के स्वामी, स्वभाव :-    शोभन योग के स्वामी बृहस्पति देव एवं स्वभाव श्रेष्ठ है , ।

प्रथम करण :- वणिज 09.08 AM तक

करण के स्वामी, स्वभाव :-   वणिज करण की स्वामी लक्ष्मी देवी और स्वभाव सौम्य है ।

द्वितीय करण :- विष्टि 21.32 PM तक तत्पश्चात बव

करण के स्वामी, स्वभाव :-    विष्टि करण के स्वामी यम और स्वभाव क्रूर है ।

ब्रह्म मुहूर्त : 4.28 AM से 5.12 AM तक

विजय मुहूर्त : 14.31 PM से 15.23 PM तक

गोधूलि मुहूर्त : 18.48 PM से 19.11 PM तक

अमृत काल : 15.13 AM से 16.55 AM शुक्रवार 21 अगस्त तक


अग्नि वास : पृथ्वी 09.08 AM तक तत्पश्चात आकाश

अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।

अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।
.

शिव वास : भोजन 09.08 AM तक तत्पश्चात शमशान

शिव वास  :   भोजन में   जब भगवान भोलेनाथ जी भोजन कर रहे हों या ध्यान में मग्न हों तो उस समय रुद्र अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। भगवान शंकर जी के रात्रि भोजन अथवा ध्यान करते समय रुद्रभिषेक करने से परेशानी का सामना करना पड़ता है।


शिव वास    श्मशान में –  जब भगवान शिव का श्मशान में वास होता हैं, तो रुद्र अभिषेक आदि  करना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ जी का  श्मशान में वास के दौरान अभिषेक करने से मृत्यु समान  परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

  • दिशाशूल (Dishashool)– बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – गुलिक 09:30 AM से 11 AM बजे तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)– दिन – 1:30 PM से 3:00 PM तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 05:56
  • सूर्यास्त – सायं 18.48

विशेष – चतुर्दशी,  श्राद्ध और व्रत के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना, सहवास करना निषिद्ध है ।

पूर्णिमा और व्रत के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना, सहवास करना, क्रोध करना, हिंसा करना मना है । ऐसा करने से दुर्भाग्य आता है, दुःख, कलह और दरिद्रता के योग बनते है ।

    • पर्व त्यौहार
    • मुहूर्त (Muhurt)

    अवश्य पढ़ें :- अगर गिरते हो बाल तो ना होएं परेशान तुरंत करें ये उपाय, जानिए बालो का गिरना कैसे रोकें,

    “हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

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    आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
    आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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    बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang, 26 अगस्त 2026 का पंचांग,

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    पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi) 2:- वार (Day) 3:- नक्षत्र (Nakshatra) 4:- योग (Yog) 5:- करण (Karan)

    पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
    जानिए बुधवार का पंचांग, Budhvar Ka Panchang, आज का पंचांग, aaj ka panchang,


    बुधवार का पंचांग (Budhwar Ka Panchang)


    26 अगस्त 2026 का पंचांग, ( Panchang ), 26 August 2026 ka Panchang,

    गणेश गायत्री मंत्र :
    ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।

    ।। आज का दिन मंगलमय हो ।।

    * दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
    बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।

    जीवन में कोई भी मनोकामना हो हनुमान जी के जन्मोत्सव के दिन अवश्य ही करें ये उपाय,


    मित्रो हम पिछले 25 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है, अगर आप भी पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

    कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

    आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
    💰🔝💰🔝💰🔝💰🔝💰🔝💰🔝💰🔝💰

    बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

    इस उपाय से शरीर रहेगा निरोगी, शक्ति रहेगी भरपूर, बुढ़ापा पास भी नहीं आएगा, जानिए रोगनाशक दिव्य आहार,

    * बुधवार को सभी ग्रहो के राजकुमार बुध देव की आराधना करने से ज्ञान मिलता है, वाकपटुता में प्रवीणता आती है, धन लाभ होता है ।

    बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाने तथा रात को सोते समय फिटकरी से दाँत साफ करने से आर्थिक पक्ष मजबूत होता है ।

    जानिए बजरंग बलि के परिवार के बारे में, अवश्य जानिए हनुमान जी के माता पिता और उनके भाइयों के बारे में,

    *विक्रम संवत् – 2083,
    *शक संवत – 1948
    *कलि संवत – 5128
    *अयन – दक्षिणयायन
    *ऋतु – वर्षा ऋतु
    *मास – सावन माह
    *पक्ष – शुक्ल पक्ष
    *चंद्र बल – मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, मकर, मीन,

    बुधवार को बुध की होरा :-

    प्रात: 5.56 AM से 7.01 AM तक

    दोपहर 01.27 PM से 2.32 PM तक

    रात्रि 20.41 PM से 21.36 PM तक

    बुधवार को बुध की होरा में हाथ की सबसे छोटी उंगली और बुध पर्वत को हल्के हल्के रगड़ते हुए अधिक से अधिक बुध देव के मन्त्र का जाप करें ।

    ज्योतिष, पढ़ाई, लिखाई, सीखने, वाकपटुता, अपना प्रभाव डालने और व्यापार में सफलता के लिए बुध की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

    बुधवार के दिन बुध की होरा में बुध देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

    अवश्य पढ़ें :- पूरे वर्ष निरोगी काया के लिए सर्दियों में सेवन करें ये आहार,

    आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,भारत की लगभग 150 करोड़ की आबादी में 0.001 % अर्थात लगभग 15 हज़ार आदमी ही नित्य पंचांग पढ़ पाते है।

    आप पर ईश्वर की असीम कृपा है जो आपको नित्य पंचांग पढ़ने का, अपने भाग्य को प्रबल करने का, पापो के प्रायश्चित करने का अवसर मिल रहा है,

    दुनिया के सारे उपाय एक तरफ है, और नित्य पंचाग पढ़ने का पुण्य उससे भी कहीं अधिक है,

    इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है ।

    बुध देव के मन्त्र

    “ॐ बुं बुधाय नमः” अथवा

    “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।।”

    अवश्य जानिए कैसे और किससे हुआ हनुमान जी का विवाह, इनकी पुत्री है हनुमान जी की पत्नी,

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    • तिथि (Tithi) – त्रियोदशी 07.59 AM तक तत्पक्षात चतुर्दशी,
    • तिथि के स्वामी – त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी और चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी है । 

    त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी  हैं। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते है । उन्हें सदैव युवा और आकर्षक रहने का वरदान है।

    पौराणिक कथाओं के अनुसार कामदेव, भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के पुत्र माने गए  हैं। उनका विवाह प्रेम और आकर्षण की देवी रति से हुआ है।

    कामदेव के हाथ में धनुष है जिसका एक कोना स्थिरता और दूसरा कोना चंचलता का प्रतीक है। कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है। कामदेव जब कमान से अपना तीर छोड़ते हैं, तो उसमें कोई आवाज नहीं होती है।

    कामदेव के बाण की यह विशेष बात है कि इनसे घायल होने के बाद भी व्यक्ति आनंद का सुखद अहसास महसूस करता है।

    कामदेव का सम्बन्ध शुभ, प्रेम, सुख, सौंदर्य, यौवन, आनंद और कामेच्छा से है ।

    कामदेव का वाहन हाथी को  माना गया है। शास्त्रों में कुछ जगह कामदेव का वाहन तोते को भी बताया गया है ।

    त्रियोदशी के दिन मीठे वचन बोलने, प्रसन्न रहने से जातक रूपवान होता है, उसे अपने प्रेम में सफलता एवं इच्छित एवं योग्य जीवनसाथी प्राप्त होता है।

    त्रियोदशी को कामदेव जी का स्मरण करने से वैवाहिक सुख भी पूर्णरूप से मिलता है।  +

    अपने रूप और आकर्षण शक्ति को बढ़ाने के लिए  त्रियोदशी को कामदेव जी का मन्त्र ‘ॐ कामदेवाय विद्महे, रति प्रियायै धीमहि, तन्नो अनंग प्रचोदयात्’ की एक माला  जाप अवश्य करें ।

    इस तिथि का खास नाम जयकारा भी है। समान्यता त्रयोदशी तिथि यात्रा एवं शुभ कार्यो के लिए श्रेष्ठ होती है।

    त्रियोदशी को बैगन नहीं खाना चाहिए , त्रियोदशी को बैगन खाने से पुत्र को कष्ट मिलता है।

    जीवन में कैसी भी हो समस्या रक्षाबंधन के दिन अवश्य करें ये अचूक उपाय

    रक्षा बंधन के दिन राखी बांधते समय बहने बोले यह मन्त्र, भाइयों की सदैव होगी हर संकटो से होगी रक्षा 

    इस तरह से मनाएं जन्माष्टमी का पर्व जीवन में लग जायेगा सुखो का अम्बार 

    नक्षत्र (Nakshatra) – श्रवण 12. 48 AM गुरुवार 27 अगस्त तक

    नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी-       श्रवण नक्षत्र के देवता विष्णु और सरस्वती जी तथा स्वामी चंद्र देव जी है ।



    श्रवण नक्षत्र 22 वें नंबर का नक्षत्र  है। यह एक त्रिशूल के जैसा प्रतीत होता है। श्रवण नक्षत्र का आराध्य वृक्ष आक या  मंदार, और नक्षत्र का स्वभाव चर माना गया है । श्रावण नक्षत्र का लिंग पुरुष है।

    श्रवण नक्षत्र के जातक पर शनि और चंद्र का प्रभाव जीवनभर बना रहता है।  श्रवण नक्षत्र के जातक बुद्धिमान और अपने कार्यो में निपुण होते हैं । 

    श्रवण नक्षत्र में जन्म होने से जातक सुंदर, दानवान, आज्ञाकारी, सर्वगुण संपन्न, धनवान और अपने क्षेत्र में मान सम्मान प्राप्त करता है।

    लेकिन यदि शनि और चंद्र की स्थिति ठीक नहीं है तो ऐसा जातक क्रोधी, कंजूस, भय-शंकित रहने वाला, लापरवाह, आलसी होता है। 

    यदि शनि और चंद्र कुंडली में एक ही जगह है, तो जातक को जीवन में बहुत संघर्ष करना पड़ता है।

     इसलिए जातक को हनुमानजी की सदैव उपासना करना है। जातक को शराब, मांस आदि व्यसनों से दूर रहना चाहिए।

    श्रवण नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 2 और 8, भाग्यशाली रंग, आसमानी, हल्का नीला, भाग्यशाली दिन गुरुवार, बुधवार और सोमवार माना जाता है ।

    श्रवण नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ श्रवणाय नमः “। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।

    राशिनुसार इस तरह से  बंधवाएं राखी, कुंडली के ग्रहो के मिलेंगे शुभ फल

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    • योग (Yog) – सौभाग्य 07.59 AM तक तत्पश्चात शोभन
    • योग के स्वामी, स्वभाव :-    सौभाग्य योग के स्वामी ब्रह्मा जी एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है   ।
    • प्रथम करण : – तैतिल 07.59 AM तक
    • करण के स्वामी, स्वभाव :- तैतिल करण के स्वामी विश्वकर्मा जी और स्वभाव सौम्य है ।
    • द्वितीय करण : – गर 20.37 PM तक तत्पश्चात वणिज
    • करण के स्वामी, स्वभाव :-   गर करण के स्वामी भूमि तथा स्वभाव सौम्य है ।

    • ब्रह्म मुहूर्त : 4.27 AM से 5.12 AM तक
    • विजय मुहूर्त : 14.32 PM से 15.23 PM तक
    • गोधूलि मुहूर्त : 18.49 PM से 19.12 PM तक
    • अमृत काल : 13.233 PM से 15.17 PM तक

    • अग्निवास : पाताल में 07.59 AM तक तत्पश्चात पृथ्वी पर


       जब पाताल में अग्नि वास है तो वह हवन से सम्बन्धित अनुष्ठानों के लिये शुभ नहीं मानी जाती है, यह अशुभ मानी गई है । अग्नि के पाताल  वास के दौरान किये जाने वाले हवन  सम्बन्धित अनुष्ठानों व्यक्ति को आर्थिक नुकसान करना पड़ता है उसका  धन नष्ट हो सकता है।


      अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।

    • शिव वास : नंदी पर 07.59 AM तक तत्पश्चात भोजन पर


      शिव वास :-  जब भगवान भोलेनाथ नन्दी जी पर विराजमान होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना सदैव बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों केअनुसार भगवान शंकर जी के नन्दी पर विराजमान के समय रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सफलता, शुभ समाचारो की प्राप्ति  होती है।


      शिव वास  :   भोजन में   जब भगवान भोलेनाथ जी भोजन कर रहे हों या ध्यान में मग्न हों तो उस समय रुद्र अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। भगवान शंकर जी के रात्रि भोजन अथवा ध्यान करते समय रुद्रभिषेक करने से परेशानी का सामना करना पड़ता है।


      इन उपायों से धन संपत्ति खींची चली आएगी, किसी चीज़ का नहीं रहेगा अभाव
    • दिशाशूल (Dishashool)- बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।

      इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
    • गुलिक काल : – बुधवार का गुलिक काल 10:30 AM से 12 PM बजे तक ।
    • राहुकाल (Rahukaal) : – बुधवार का राहुकाल दिन 12:00 PM से 1:30 PM तक ।
    • सूर्योदय – प्रातः 5.56 AM
    • सूर्यास्त – सायं 18.49 PM
    • विशेष – त्रियोदशी को बैगन नहीं खाना चाहिए , त्रियोदशी को बैगन खाने से पुत्र को कष्ट मिलता है । 

      चतुर्दशी,  श्राद्ध और व्रत के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना, सहवास करना निषिद्ध है। 
    • मुहूर्त :-
    • पर्व त्यौहार

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    हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

    आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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