Guruwar Ka Panchag, गुरुवार का पंचांग, 5 नवम्बर 2026 का पंचांग,

Guruwar Ka Panchag, गुरुवार का पंचांग, 5 नवम्बर 2026 का पंचांग,

आप सभी को रम्भा एकादशी / रमा एकादशी की हार्दिक शुभकामनायें

गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 5 November 2026 Ka Panchang,

मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 7587346995±9044862881 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद

बृहस्पतिवार का पंचांग, Brahaspativar ka panchang,

  • Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।

* शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
* वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
* नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
* योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
* करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।

इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए । नित्य पंचाग पढ़ने से भाग्य चमकने लगता है ।

जानिए आज गुरुवार का पंचांग, Guruwar Ka Panchag,


आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है, आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,

इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है ।

मंगल श्री विष्णु मंत्र :-

मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥

आज का पंचांग, aaj ka panchang, गुरुवार का पंचाग, Guruvar Ka Panchag,

गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag,

5 नवम्बर 2026 का पंचांग, 5 November 2026 Ka Panchang,


  • गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 5 नवम्बर 2026 का पंचांग,
  • दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
  • गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए ।

    गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
  • गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
    इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
  • गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।
    इस उपाय को करने से कार्यो में अड़चने दूर होती है, भाग्य चमकने लगता है, बृहस्पति देव की कृपा मिलती है।

यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।
और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।

गुरुवार को विष्णु जी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, गुरुवार को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ परम फलदाई है।

जीवन में कैसी भी हो समस्या जन्माष्टमी के दिन अवश्य करें ये अचूक उपाय, 

  • *विक्रम संवत् – 2083,
  • * शक संवत – 1948,
    *कलि संवत- 5128,
    * अयन – दक्षियायणं,
    * ऋतु – शरद ऋतु,
    * मास – कार्तिक माह
    * पक्ष – कृष्ण पक्ष
    *चंद्र बल – वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन,

गुरुवार को बृहस्पति देव की होरा :-

प्रात: 06.31 AM से 7.26 AM तक

दोपहर 01.00 PM से 1.56 PM तक

रात्रि 19.47 PM से 20.52 PM तक

आज धनतेरस पर जानिए कुबेर जी के परिवार के बारे में, जीवन में सुख-समृद्दि, ऐश्वर्य की नहीं होगी कोई कमी  

आज गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा के समय दाहिने हाथ की तर्जनी ऊंगली ( अंगूठे के बगल वाली उंगली ) के नीचे गुरु पर्वत और उस पूरी ऊंगली पर बृहस्पति देव के मंत्र का जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य ) I

गुरुवार को बृहस्पति की होरा में अधिक से अधिक बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करें । शिक्षा, मान – सम्मान, व्यापार, कारोबार, नए कार्यो के प्रारम्भ के लिए गुरुवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा में बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

बृहस्पति देव के मन्त्र

ॐ बृं बृहस्पतये नमः।। अथवा

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः।।


अवश्य पढ़ें :- जानिए कैसा हो खिड़कियों का वास्तु , जिससे जिससे वहाँ के निवासियों को मिले श्रेष्ठ लाभ


तिथि (Tithi) :- एकादशी 10.35 AM तक तत्पश्चात द्वादशी,

तिथि का स्वामी – एकादशी तिथि के स्वामी विश्वदेव जी और द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री विष्णु जी है I

दीपावली से चार दिन पहले कार्तिक कृष्ण एकादशी तिथि को रम्भा एकादशी या रमा एकादशी पड़ती है। रमा एकादशी के दिन भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा करना अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है।

चतुर्मास की अंतिम एकादशी होने के कारण रमा एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार एकादशी तिथि भगवान श्री विष्णु जी को अति प्रिय है । रमा एकादशी के दिन तुलसी की पूजा एवं भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है।

मान्यता है कि रमा / रम्भा एकादशी का ब्रत रखने, इस दिन भगवान विष्णु जी की पूजा करने से जातक को धरती के समस्त सुख प्राप्त होते है, एवं अंत में विष्णु लोक में जाता है। यह एकादशी अपार धन, सुख-समृद्धि एवं यश प्रदान करने वाली मानी गयी है ।

रमा एकादशी का विस्तृत माहात्म्य हमारे धर्म शास्त्र पद्म पुराण के उत्तर खंड के अध्याय 60 में मिलता है। इसमें धर्मराज युधिष्ठिर जी भगवान श्रीकृष्ण जी से कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी के माहात्म्य के बारे में पूछते हैं।

तब भगवान श्रीकृष्ण जी इस एकादशी के बारे में बताते हुए कहते है कि :

कार्त्तिके कृष्णपक्षे तु रमा नाम सुशोभना।
एकादशी समाख्याता महापापहरा परा॥

अर्थात कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष में रमा नाम की अत्यंत सुंदर, पुण्य प्रदान करने वाली एकादशी आती है। यह एकादशी समस्त पापों का नाश करने वाली मानी गई है।

पद्म पुराण में रमा एकादशी को चिंतामणि रत्न तथा कामधेनु गाय के समान महान फलदायी बताया गया है।

एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी के मन्त्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” अथवा ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।। का अधिक से अधिक जाप करना चाहिए ।

एकादशी के दिन विष्णु जी की तुलसी जी अर्पित करके पूजा करनी चाहिए, लेकिन तुलसी जी को एकादशी के दिन नहीं वरन एक दिन पूर्व दशमी तिथि को ही तोड़ना चाहिए ।

रमा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पीले फूल, पीले फल, पीले मिष्ठान, आँवले आदि से पूजा करने से जीवन के संकट दूर हो जाते है ।

एकादशी के दिन प्रात: जल में आँवले / आँवले का रस या आँवले का चूर्ण डालकर नहाने से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है।

एकादशी के दिन रात्रि में भगवान विष्णु के सामने नौ बत्तियों का दीपक जलाएं और एक दीपक ऐसा जलाएं जो रात भर जलता रहे।

एकादशी के दिन चावल और दूसरे का अन्न खाना मना है । एकादशी के दिन चावल खाने से रोग और पाप बढ़ते है, एकादशी के दिन दूसरे का अन्न खाने से समस्त पुण्यों का नाश हो जाता है ।

यह है धनतेरस के दिन पूजा का, खरीददारी का शुभ मुहूर्त, सांय काल दीपक जलाते समय यमराज जी को प्रसन्न करने का मन्त्र

नक्षत्र (Nakshatra) – उत्तरफाल्गुनी 03.55 AM शुक्रवार 6 नवम्बर तक

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी –      उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के देवता आर्यमन और स्वामी सूर्य, बुध देव जी है ।

 आकाश मंडल में उत्तरा फाल्गुनी को 12 वां नक्षत्र माना जाता है। ‘उत्तरा फाल्गुनी’ का अर्थ है ‘बाद का लाल नक्षत्र’। यह एक बिस्तर या बिस्तर के पिछले दो पाए को दर्शाता है जो आराम और विलासिता के जीवन का प्रतीक है।  

यह नक्षत्र रोमांस, कामुक, ऐश्वर्य, रोमांच और अनैतिक आचरण को प्रदर्शित करता है। इस नक्षत्र काआराध्य वृक्ष : पाकड़ तथा स्वाभाव शुभ माना गया है।

उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र सितारे का लिंग महिला है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक पर जीवन भर सूर्य और बुध का प्रभाव बना रहता है।

इस नक्ष‍त्र में जन्मे व्यक्ति दानी, दयालु, साहसी, विद्वान, चतुर, उग्र स्वभाव, सही निर्णय लेने वाले होते है।  इन्हे पूर्ण संतान, भूमि का सुख मिलता है।

लेकिन यदि सूर्य और बुध की स्थिति जन्म कुंडली में खराब है तो जातक का रुझान गलत कार्यों में रहने लगता है, उसका झुकाव विपरीत लिंगी की तरफ बहुत आसानी से हो जाता है।

उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में पैदा हुई स्त्री, सरल, शांत लेकिन खुशमिज़ाज़ होती हैं। यह आसानी से सबको प्रभावित कर लेती है ।इनका पारिवारिक दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।

उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 12, भाग्यशाली रंग, चमकदार नीला, भाग्यशाली दिन  बुधवार, शुक्रवार, और रविवार  माना जाता है ।

उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ अर्यमणे नम: “। मन्त्र माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।

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कैसा भी सिर दर्द हो उसे करें तुरंत छूमंतर, जानिए सिर दर्द के अचूक उपाय

योग :- वैधृति 05.09 AM शुक्रवार 6 नवम्बर तक

योग के स्वामी, स्वभाव :-   वैधृति योग के स्वामी दिति और स्वभाव हानिकारक है ।

प्रथम करण :- बालव 10.35 AM तक

करण के स्वामी, स्वभाव :-   बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।

द्वितीय करण :- कौलव 22.30 PM तक तत्पश्चात तैतिल

करण के स्वामी, स्वभाव :-   कौलव करण के स्वामी मित्र और स्वभाव सौम्य है ।

ब्रह्म मुहूर्त : 4.52 AM से 5.44 AM तक

विजय मुहूर्त : 13.54 PM से 14.38 PM तक

गोधूलि मुहूर्त : 17.33 PM से 17.59 PM तक

अमृत काल : 20.36 PM से 22.13 AM तक


अग्नि वास : पृथ्वी में 10.35 AM तक तत्पश्चात पाताल में

अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।

अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।


शिव वास : कैलाश में 10.35 AM तक तत्पश्चात नंदी पर


शिव वास :-  जब भगवान भोलेनाथ जी कैलाश पर होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार  भगवान शंकर जी के  कैलाश पर्वत पर रहने के दौरान रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सुखो की प्राप्ति होती है।

शिव वास :-  जब भगवान भोलेनाथ नन्दी जी पर विराजमान होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना सदैव बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों केअनुसार भगवान शंकर जी के नन्दी पर विराजमान के समय रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सफलता, शुभ समाचारो की प्राप्ति  होती है।

  • दिशाशूल (Dishashool)– बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – गुलिक 09:30 AM से 11 AM बजे तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)– दिन – 1:30 PM से 3:00 PM तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 06:36
  • सूर्यास्त – सायं 17.33

विशेष – एकादशी के दिन सेम फली, चावल का सेवन और दूसरो के अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए ।

 एकादशी के दिन चावल खाने से रोग बढ़ते है और दूसरे का अन्न खाने से पुण्य नष्ट होते है ।

एकादशी के दिन माँ तुलसी एकादशी का ब्रत रखती है इसलिए इस दिन तुलसी जी पर जल चढ़ाना, तुलसी जी को तोड़ना सख्त मना है ।

द्वादशी के दिन तुलसी तोड़ना,  मसूर का सेवन करना  वर्जित है।

द्वादशी के दिन यात्रा नहीं करनी चाहिए, इस दिन यात्रा करने से धन हानि एवं असफलता की सम्भावना रहती है।  
 

  • पर्व त्यौहार– रम्भा एकादशी / रमा एकादशी
  • मुहूर्त (Muhurt) –

अवश्य पढ़ें :- अगर गिरते हो बाल तो ना होएं परेशान तुरंत करें ये उपाय, जानिए बालो का गिरना कैसे रोकें,

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

मित्रो हम इस साईट के माध्यम से वर्ष 2010 से निरंतर आप लोगो के साथ जुड़े है। आप भारत या विश्व के किसी भी स्थान पर रहते है, अपने धर्म अपनी संस्कृति को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए www.memorymuseum.net के साथ अवश्य जुड़ें, हमारा सहयोग करें ।

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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 *अध्यात्म ज्योतिष परामर्श केंद्र, रायपुर, छत्तीसगढ़* 🕉️*ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय जी* _हस्तरेखा, कुंडली एवं वैदिक ज्योतिष विशेषज्ञ_*"ज्योतिष मेरा काम नहीं, मेरी साधना है"*  जब हर दरवाज़े बंद नज़र आएं, तब ज्योतिष से रास्ता मिलता है।  हर कठिन से कठिन समस्या का समाधान शास्त्र सम्मत उपायों द्वारा।*सेवाएं:*  - कुंडली विश्लेषण व मार्गदर्शन  - हस्तरेखा परीक्षण  - विवाह, व्यापार, संतान, नौकरी, वास्तु दोष निवारण  - ग्रह शांति व अनुष्ठान परामर्श  *संपर्क सूत्र:* 📞 0771 4070168 

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### _📖 _ शुक्र ग्रह के संपूर्ण उपाय शुक्र ग्रह - धन, भोग, सुख, वैवाहिक जीवन, कला का कारक_ 📖_


### _🙏 __ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः | ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः__ 🙏_

### _🪷 *_आचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय जी द्वारा प्रस्तुत_* 🪷_  
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### _🔥 _आज की 4 लाइन - शुक्र ग्रह विशेष_ 🔥_

_📖 _शुक्र = धन, सुख, वैभव, प्रेम, कला, दाम्पत्य सुख के कारक!__  
_✅ _शुक्र खराब = कर्ज, बीमारी, तलाक, सुंदरता में कमी, आलस्य__  
_💎 _शुक्रवार + शुक्र होरा = उपाय का सबसे शुभ समय__  
_📲 _इसे सेव करें और "ॐ श्रीं श्रियै नमः" लिखकर शेयर करें__

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### _📖 _शुक्र ग्रह - धन, भोग, सुख, वैवाहिक जीवन, कला का कारक_ 📖_

_शुक्र देव_ = _दानव गुरु, असुरों के आचार्य, माँ लक्ष्मी के अंश_  
_रंग_: _सफेद_ | _रत्न_: _हीरा/ओपल_ | _दिन_: _शुक्रवार_ | _देव_: _माँ लक्ष्मी + इंद्राणी_  
_कारक_: _पत्नी, प्रेम, वाहन, घर, आभूषण, सुंदरता, संगीत, फैशन_

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#### _1. शुक्र खराब/पीड़ित होने के लक्षण_
- _धन_: पैसा आता है टिकता नहीं, कर्ज, बैंक बैलेंस शून्य
- _सुख_: गृहस्थ जीवन में कलह, तलाक, प्रेम में धोखा
- _शरीर_: त्वचा रोग, शुगर, किडनी, आंख, गुप्त रोग, मोटापा
- _सुंदरता_: चेहरे की चमक जाना, आलस्य, नशे की लत
- _जीवन_: घर गंदा रहना, पत्नी से अनबन, कला में असफलता
- _कुंडली_: 6, 8, 12 भाव में या सूर्य-चंद्र के साथ = शुक्र दोष

#### _2. शुक्र उच्च-नीच में फल_
*उच्च शुक्र - मीन राशि 27 अंश*  
_फल_: करोड़पति, कलाकार, सुंदर, सुखी दाम्पत्य

*नीच शुक्र - कन्या राशि 27 अंश*  
_फल_: धन हानि, चरित्र दोष, बीमारी, बदनामी

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#### _3. शुक्र देव को प्रसन्न करने के 21 अचूक उपाय_
_शुक्रवार_ = सबसे शुभ दिन। _सफेद रंग_ धारण करें।

1.  _लक्ष्मी पूजा_: _माँ लक्ष्मी_ को सफेद मिठाई, खीर, इत्र, सफेद फूल चढ़ाएं
    _मंत्र_: `ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः | ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः`
2.  _शुक्र मंत्र_: `ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः` 108 बार
3.  _व्रत_: _शुक्रवार व्रत_। नमक-खट्टा-तेल रहित भोजन
4.  _दान_: _चावल, चीनी, सफेद वस्त्र, चांदी, इत्र, दही_ शुक्रवार को दान
5.  _रत्न_: _हीरा/ओपल/जरकन_ - _कुंडली दिखाकर मध्यमा में चांदी में पहनें_
6.  _गाय सेवा_: शुक्रवार को गाय को आटा + गुड़ + हरा चारा खिलाएं
7.  _सफाई_: घर की साफ-सफाई, सुगंध, इत्र का प्रयोग
8.  _पत्नी सम्मान_: पत्नी/महिलाओं का सम्मान। उन्हें उपहार दें
9.  _शुक्र यंत्र_: घर में स्थापित करके पूजा करें
10. _लक्ष्मी चालीसा_: शुक्रवार को 1 बार पाठ
11. _स्नान_: पानी में सफेद फूल + इत्र डालकर स्नान
12. _संगीत-कला_: भजन, संगीत, नृत्य से शुक्र प्रसन्न
13. _सफेद गाय की सेवा_: शुक्रवार को संभव हो तो
14. _माँ दुर्गा पूजा_: "दुर्गा सप्तशती" का पाठ
15. _आभूषण_: शुक्रवार को नया आभूषण पहनना शुभ
16. _जल_: चांदी के बर्तन में पानी पीना
17. _उपवास_: विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए व्रत
18. _कन्या पूजन_: शुक्रवार को 9 कन्याओं को भोजन + उपहार
19. _इत्र दान_: गरीबों को इत्र-सुगंध दान
20. _तुलसी नहीं_: शुक्रवार को तुलसी में जल नहीं चढ़ाते
21. _यज्ञ_: विवाह-सुख के लिए _शुक्र शांति यज्ञ_

#### _4. विशेष समस्या के उपाय_
- _विवाह में रुकावट_: 21 शुक्रवार व्रत + लक्ष्मी पूजा + सफेद वस्त्र दान
- _दाम्पत्य कलह_: पति-पत्नी दोनों सफेद कपड़े पहनें, एक साथ खीर खाएं
- _धन न टिकना_: तिजोरी में शुक्र यंत्र + गोमती चक्र + चांदी का सिक्का
- _प्रेम में सफलता_: शुक्रवार को प्रिय को सफेद फूल दें
- _सुंदरता के लिए_: शुक्रवार को चेहरे पर दही + हल्दी का उबटन
- _कर्ज मुक्ति_: शुक्रवार को कर्ज का कुछ हिस्सा + चावल दान
- _नौकरी में प्रमोशन_: ऑफिस में सुगंध + साफ-सफाई

#### _5. शुक्रवार को क्या करें - क्या ना करें_
_✅ करें_: _सफेद कपड़े, सुगंध, साफ-सफाई, लक्ष्मी पूजा, मिठाई, श्रृंगार, कला, दान, पत्नी को खुश रखना_  
_❌ ना करें_: _काले-नीले कपड़े न पहनें, खट्टा-तेल न खाएं, झूठ न बोलें, क्रोध न करें, किसी महिला का अपमान न करें, बाल-नाखून न काटें, लोहे की वस्तु न खरीदें_

---

### _📖 _शुक्रवार व्रत कथा संक्षेप_ 📖_

_एक सेठानी हर शुक्रवार माँ लक्ष्मी का व्रत रखती। घर की सफाई, पूजा करती।_  
_माँ लक्ष्मी प्रसन्न होकर उसे धन-वैभव देतीं।_  
_पड़ोसन ने ईर्ष्या में व्रत तोड़ा, वो गरीब हो गई।_  
_सीख_: _श्रद्धा + सफाई + दान से शुक्र मजबूत होता है_

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_"ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः | ॐ श्रीं श्रियै नमः"_

_नोट_: हीरा रत्न पहनने से पहले कुंडली में शुक्र की स्थिति अवश्य दिखाएं। 6-8-12 में हीरा नुकसान करता है।

---https://lookmybiz.in/आचार्य-मुक्ति-नारायण-पाण्डेय-अध्यात्म--ज्योतिष-परामर्श-केंद्र

### _प्रस्तुतकर्ता_:  
### _आचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय_  
### _अध्यात्म ज्योतिष परामर्श केंद्र_  
### _श्याम नगर, रायपुर, छत्तीसगढ़_  
### _📞 _9425203501_

__जय माँ लक्ष्मी | जय शुक्र देव__ 🙏 _इसे शेयर करें, किसी का घर स्वर्ग बन जाएगा_

आजकल बड़े-बड़े यज्ञों और अनुष्ठानों में एक बहुत बड़ी विडंबना देखने को मिलती है। लाखों रुपये खर्च करके महायज्ञ का आयोजन होता है, लेकिन जब 'संकल्प' की बारी आती है, तो मात्र देश-काल और गोत्र बोलकर इतिश्री कर दी जाती है।

आजकल बड़े-बड़े यज्ञों और अनुष्ठानों में एक बहुत बड़ी विडंबना देखने को मिलती है। लाखों रुपये खर्च करके महायज्ञ का आयोजन होता है, लेकिन जब 'संकल्प' की बारी आती है, तो मात्र देश-काल और गोत्र बोलकर इतिश्री कर दी जाती है।

अरे गुरु! संकल्प केवल आपका नाम और पता नहीं है। यह ब्रह्मांड की उत्पत्ति से लेकर, 14 लोकों के निर्माण, ग्रहों की सूक्ष्म दशाओं और विश्व-कल्याण तक की एक 'कॉस्मिक उद्घोषणा'  है।
मेरे उच्च कोटि के विद्वान आचार्य जन और प्रबुद्ध पाठक अक्सर मुझसे एक ऐसे 'विशुद्ध संकल्प' की मांग करते थे, जिसमें कुछ भी अछूता न रहे। जिसमें सृष्टि का दर्शन भी हो और यजमान की सूक्ष्मतम कामनाएं भी।

 आज मैं आपके समक्ष वही अद्भुत, गूढ़ और परिपूर्ण संकल्प प्रस्तुत कर रहा हूँ।  
यह कोई साधारण संकल्प नहीं है।

 जब कोई विद्वान आचार्य यज्ञ मंडप में इसे नाद स्वर में पढ़ेगा, तो सुनने वालों के रोंगटे खड़े हो जाएंगे और उन्हें लगेगा— "हाँ, इसे कहते हैं संकल्प!"
 जहाँ-जहाँ संस्कृत अत्यंत क्लिष्ट है, वहाँ मैंने कोष्ठक  में उसका सरल अर्थ लिख दिया है, ताकि भाव पूरी तरह स्पष्ट हो।
इसे ध्यान से पढ़ें, कंठस्थ करें और अपने पास सहेज कर रख लें:

॥ बृहद अनुष्ठान एवं यज्ञ हेतु सम्पूर्ण विशुद्ध सङ्कल्पः ॥

🛑परब्रह्म और ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति का दार्शनिक स्मरण👇

ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः स्वस्ति श्री मन्मुकुन्द सच्चिदानन्द-रूपस्य परब्रह्मणो निर्वाच्य मायया यथाशक्ति विजृम्भिता विद्यायोगात् कालकर्मस्वभावाविर्भूत महत्तोदिताहंकार त्रयोदभूतस्य वियदादि पञ्च केन्द्रिय देवता निर्मिताण्डकटाहे चतुर्दश लोकात्मके लीलयातन्तमध्यवर्ति भगवतः श्रीनारायणस्य  
(अर्थात: सच्चिदानंद परब्रह्म की अनिर्वचनीय माया, महत तत्त्व, अहंकार, पंचतन्मात्राओं और पंचमहाभूतों से निर्मित इस ब्रह्माण्ड रूपी अण्डकटाह (कड़ाहे) और चौदह लोकों के मध्य लीला करने वाले भगवान श्रीनारायण...)  

 🛑सृष्टि, देश और काल का विशुद्ध वर्णन

नाभिकमलोद्भूतस्य सकललोकस्य पितामहस्य ब्रह्मणः सृष्टि कुर्वतस्तदुद्धारणाय प्रजापति प्रार्थितस्य महापुरुषस्य श्री श्वेतवाराहावतारेण ध्रियमाणायामस्यां धरित्र्यां भूर्लोकसंज्ञितायां सप्तद्वीप मण्डितायां क्षीरोदादि समुद्रतद्वीज वलयीकृत लक्षयोजनविस्तीर्णेजम्बुद्वीपे स्वर्गादि सरिद्भिः पाविते निखिल जनपावन कर्तृभिः शौनकादि महामुनि निवास भूते नैमिष्यारण्यादि मोक्षसाधनभूते श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य अद्य श्रीब्रह्मणोह्नि द्वितीयपरार्द्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवश्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथम चरणे भूर्लोके भरतखण्डे भारतवर्षे आर्यावर्तान्तर्गते ब्रह्मावर्त्तैकदेशे पुण्यप्रदेशे

👉(यहाँ यदि काशी में हों तो यह पढ़ें: काश्यां-अविमुक्त वाराणसी क्षेत्रे महाश्मशाने गौरीमुखे त्रिकण्टक विराजिते भागीरथ्याः उत्तरवाहिन्याः गङ्गायाः वामे दिग्भागे)  
(अब अपना वर्तमान स्थान और काल बोलें)

(अमुक) प्रान्ते (अमुक) मण्डलान्तर्गत (अमुक) पुण्यपवित्र ग्रामे (अमुक अयने) (अमुक) ऋतौ (अमुक) संवत्सरे (अमुक) मासे (अमुक) पक्षे (अमुक) तिथौ (अमुक) वासरे (अमुक) राशिस्थिते श्रीसूर्ये (अमुक) राशिस्थिते श्रीचन्द्रे (अमुक) राशिस्थिते श्रीदेवगुरौ शेषेषु ग्रहेषु यथा यथा राशिस्थान स्थितेषु सत्सु एवं ग्रहगुणगण विशेषण-विशिष्टायां शुभपुण्यकाले...  

🛑 यजमान का परिचय एवं कामनाओं का महासागर

... (अमुक) गोत्रः (अमुक) शर्मा, वर्मा, गुप्तोऽहं वा सपत्नीकोऽहं (अत्रागत्यानां सर्वेषां जनानां प्रतिनिधि भूतोऽहं अस्मिन् (अमुक) यज्ञे श्रुतिस्मृतिपुराणोक्त शास्त्रोक्त पुण्यफल प्राप्त्यर्थं मम सकुटुम्बस्य सपरिवारस्य तथा च अन्येषां जनानां विशेषतः एतत् प्रान्तीयानां सर्वेषां स्त्री पुंसां च नित्य कल्याण प्राप्त्यर्थं...  
...कायिक वाचिक मानसिक सांसर्गिक चतुर्विध पापक्षय पूर्वकं आध्यात्मिक, आधिदैविक, आधिभौतिक, त्रिविध तापोपशान्तिसकल दुःख शेष निवृत्ति पूर्वकं व्याधादि जरा मृत्यु रोगभय शोकाद्युपसर्ग निवृत्ति-पुरस्सरं...
(अर्थात: काया, वाणी, मन और संसर्ग से हुए चारों प्रकार के पापों का क्षय हो, तथा दैहिक, दैविक और भौतिक तीनों तापों एवं बुढ़ापा, रोग, मृत्युभय आदि शांत हों।)  

मम जन्म कुण्डल्यां प्रश्नकुण्डल्यां लग्न कुण्डल्यां गोचरे च तन्महादशायां अन्तर्दशायां प्रत्यन्तर्दशायां प्रतिप्रत्यन्तर्दशायां सूक्ष्मान्तर्दशायां केचिद्विरुद्ध चतुर्थाष्टम द्वादश स्थान स्थित क्रूर ग्रहास्तैः संसूचितं संसूचयिष्यमाणं पुत्रपौत्रादिसन्तते-रविच्छिन्नाभिवृद्ध्यर्थं...
(अर्थात: जन्मकुंडली, गोचर, या किसी भी सूक्ष्म दशा में यदि ४, ८ या १२वें भाव में क्रूर ग्रह बैठे हों, तो उनका दोष शांत हो।)  

...आदित्यादिनवग्रहानुकुलता सिद्ध्यर्थं इन्द्रादिदशदिक्पालप्रसन्नता सिद्ध्यर्थं धर्मार्थकाममोक्ष चतुर्विध पुरुषार्थ सिद्ध्यर्थं अप्राप्तलक्ष्मीप्राप्त्यर्थं प्राप्तलक्ष्म्याश्चिरकालसंरक्षणार्थं सकलमनेप्सितकामना सिद्ध्यर्थं लोके वा राजद्वारे, सभायां, न्यायालये, उद्योगे, कृषिकार्ये, व्यापारे, समाजेऽपि तद्वारे वा सर्वत्र यशोविजय कीर्तिलाभादि प्राप्त्यर्थं शत्रुप्रराजय सद्धिष्ट सकल्पोक्त कामना सिद्ध्यर्थं च...
(अर्थात: राजदरबार (सरकार), न्यायालय , व्यापार और कृषि हर जगह विजय हो और शत्रुओं का पराभव हो।)  

...इह जन्मनि जन्मान्तरे वा सकलदुरितोपशमनार्थं गृहे विपुल धन-धान्य ऐश्वर्यादि-अभिवृद्धिपूर्बकं गृहे सर्वेषां जनानां शरीरे उत्पन्न एवं उत्पत्स्यमाण समस्त रोग व्याधि कष्ट पीडा निवारणपूर्बकं शरीरे दीर्घायुष्यनैरोग्य कीर्तिलाभक्षेमस्थैर्य सद्धर्म सद्बुद्धि सद्विद्या सद्विवेक सदाचारादि प्राप्त्यर्थं सनातन धर्मेस्मिन् अतिशयश्रद्धाभक्तिसंवृद्ध्यर्थं, धार्मिकग्रन्थानां पुराणानां सर्वासामं विद्यानां संवृद्ध्यर्थं विशेषतः स्वधर्मे सनातनधर्मे प्रीतिविवर्द्धनार्थम-
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्।।  

🛑 प्राकृतिक आपदा निवारण एवं अनुष्ठान का अंतिम संकल्प

इति सदुद्देश्यसिद्धिद्वारा विश्वस्मिन् जगति सर्वविधशान्त्यर्थं धर्मग्लान्यधर्मधर्माभ्युत्थान निवृत्तिपूर्वकं धर्मसंस्थापनार्थं च पुण्यकालेऽस्मिन् सकलदुरितोपशमनार्थं दुर्भिक्ष, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, विप्लव भूकम्प पशुरोग कृषिकार्ये च उत्पन्न समस्त बाधा निवारणार्थं निर्विघ्नतापूर्वक प्रचुर अन्न उत्पादनार्थं राजभय चौरभय सर्पभय शत्रुभय अग्निभय रोगभय यानपातानादिभय दुस्संगजन्याकस्मिकभय तथा नानागतभयनिवारणार्थं...
(अर्थात: अकाल, अतिवृष्टि, भूकंप, पशुओं के रोग, दुर्घटना, सर्प भय, अग्नि भय आदि सभी ज्ञात-अज्ञात भयों का निवारण हो।)  

...नवग्रह-जन्यपीडा शान्त्यर्थं उपस्थितानां समेषां जनानां कल्याणार्थं तथा डाकिनी-शाकिनी-भूत-प्रेत-पिशाच-वेतालादिभय निवारणार्थं विशेषतः जगन्नियन्ता अनन्तकोटि ब्रह्माण्डनायकस्य भगवतः सूर्यमण्डलावर्ति जगद्वीज पुरुषोत्तम वैकुण्ठाधिपतेः श्रीसीतारामयोः वा साम्बसदाशिवस्य वा लक्ष्मीनारायणयोः वा जगदम्बिकयोः अनुग्रह प्राप्त्यर्थं सग्रहमखं (शिवशक्ति या अपने हिसाब से यज्ञादि का नाम)
 यागकर्म एभिर्द्विजकुलावंतसैः शम-दमादि-निखिल-गुणगण-भरितैः विद्वद्भिः सह अद्यरभ्य पूर्णाहुति पर्यन्तं करिष्ये।  
तदङ्गत्वेन स्वस्तिपुण्याहवाचनं मातृकापूजनं, वसोर्धारा-पूजनमायुष्य मन्त्रजपं साङ्कल्पिकेन विधिना नान्दीश्राद्धमाचार्यादि वरणञ्च करिष्ये।
तथा च मण्डपप्रवेशपूर्वकं वास्तुपूजनं, मण्डपपूजनं, चतुःषष्टियोगिनीपूजनं क्षेत्रपालनवग्रहपूजनं असंख्यात् सर्वतोभद्रपूजनं च करिष्ये।
तत्रादौ निर्विघ्नतासंसिद्ध्यर्थं गणैशाम्बिकयोः पूजन महं करिष्ये।  

(इतना बोलकर हाथ का जल, अक्षत और द्रव्य सामने पात्र में छोड़ दें।)

🌱सभी आचार्य जनों और सनातनियों से मेरा आग्रह:
गुरु, जब आप किसी महायज्ञ या अनुष्ठान में बैठें, तो संकल्प में किसी भी प्रकार की जल्दबाजी या कांट-छांट न करें।

 इस विशुद्ध संकल्प में संपूर्ण ब्रह्मांड, ग्रह दशा, तंत्र-बाधा निवारण और विश्व कल्याण का ऐसा अद्भुत निचोड़ है, जिसे सुनकर देवता भी गदगद हो जाएं।

👉आप सभी विद्वान इस संकल्प को कैसा मानते हैं? क्या आज के समय में ऐसे विशुद्ध संकल्प का वाचन यज्ञ मंडपों में अनिवार्य नहीं होना चाहिए? अपनी मूल्यवान राय टिप्पणी (कमेंट) बॉक्स में अवश्य दें और इस अमूल्य लेख को हर कर्मकांडी और सनातनी तक पहुँचाएं।

🛑नोट - लेखनी में गलती होने की संभावना कम है फिर भी अगर  कुछ कमी हो तो क्षमा करें!

    ~लेखक
— आपका अपना,
✍️ आचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
 अध्यात्म ज्योतिष परामर्श केंद्र श्याम नगर रायपुर   
(सूचना: कृपया अपनी टिप्पणी में शब्दों की मर्यादा बनाकर रखें, क्योंकि आपके शब्दों से आपके संस्कार झलकते हैं। यह लेख केवल समाज में आध्यात्मिक जागरूकता और शुद्ध वैदिक कर्मकांड के रक्षण हेतु लिखा गया है।)

विशेष सूचना व मार्गदर्शन हेतु:
(धर्म, शास्त्र, विशुद्ध कुंडली विश्लेषण, शुद्ध वैदिक कर्मकांड या किसी भी प्रकार के शंका समाधान के लिए आप मुझे नीचे दिए गए संपर्क सूत्र पर संदेश भेज सकते हैं। कृपया सीधे दूरभाष करने से बचें, केवल अपना संदेश लिखकर भेजें।)
📱 संपर्क सूत्र 07714070168
9425203501+7587346995
7000121183

बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang, 30 सितम्बर 2026 का पंचांग,

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पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi) 2:- वार (Day) 3:- नक्षत्र (Nakshatra) 4:- योग (Yog) 5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए बुधवार का पंचांग, Budhvar Ka Panchang, आज का पंचांग, aaj ka panchang,


बुधवार का पंचांग (Budhwar Ka Panchang)


30 सितम्बर 2026 का पंचांग, ( Panchang ), 30 September 2026 ka Panchang,

गणेश गायत्री मंत्र :
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।

।। आज का दिन मंगलमय हो ।।

* दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।

जीवन में कोई भी मनोकामना हो हनुमान जी के जन्मोत्सव के दिन अवश्य ही करें ये उपाय,


मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है, अगर आप भी पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

इस उपाय से शरीर रहेगा निरोगी, शक्ति रहेगी भरपूर, बुढ़ापा पास भी नहीं आएगा, जानिए रोगनाशक दिव्य आहार,

* बुधवार को सभी ग्रहो के राजकुमार बुध देव की आराधना करने से ज्ञान मिलता है, वाकपटुता में प्रवीणता आती है, धन लाभ होता है ।

बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाने तथा रात को सोते समय फिटकरी से दाँत साफ करने से आर्थिक पक्ष मजबूत होता है ।

जानिए बजरंग बलि के परिवार के बारे में, अवश्य जानिए हनुमान जी के माता पिता और उनके भाइयों के बारे में,

*विक्रम संवत् – 2083,
*शक संवत – 1948
*कलि संवत – 5128
*अयन – दक्षिणयायन
*ऋतु – वर्षा ऋतु
*मास – अश्विन माह
*पक्ष – कृष्ण पक्ष
*चंद्र बल – वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन,

बुधवार को बुध की होरा :-

प्रात: 06.13 AM से 7.13 AM तक

दोपहर 01.10 PM से 2.10 PM तक

रात्रि 20.09 PM से 21.10 PM तक

बुधवार को बुध की होरा में हाथ की सबसे छोटी उंगली और बुध पर्वत को हल्के हल्के रगड़ते हुए अधिक से अधिक बुध देव के मन्त्र का जाप करें ।

ज्योतिष, पढ़ाई, लिखाई, सीखने, वाकपटुता, अपना प्रभाव डालने और व्यापार में सफलता के लिए बुध की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

बुधवार के दिन बुध की होरा में बुध देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

अवश्य पढ़ें :- पूरे वर्ष निरोगी काया के लिए सर्दियों में सेवन करें ये आहार,

आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,भारत की लगभग 150 करोड़ की आबादी में 0.001 % अर्थात लगभग 15 हज़ार आदमी ही नित्य पंचांग पढ़ पाते है।

आप पर ईश्वर की असीम कृपा है जो आपको नित्य पंचांग पढ़ने का, अपने भाग्य को प्रबल करने का, पापो के प्रायश्चित करने का अवसर मिल रहा है,

दुनिया के सारे उपाय एक तरफ है, और नित्य पंचाग पढ़ने का पुण्य उससे भी कहीं अधिक है,

इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है ।

बुध देव के मन्त्र

“ॐ बुं बुधाय नमः” अथवा

“ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।।”

अवश्य जानिए कैसे और किससे हुआ हनुमान जी का विवाह, इनकी पुत्री है हनुमान जी की पत्नी

  • तिथि (Tithi) – चतुर्थी 14.55 PM तक तत्पश्चात पंचमी तिथि,
  • तिथि के स्वामी – चतुर्थी तिथि के स्वामी विघ्हर्ता गणेश जी और पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता जी है । 

आज चतुर्थी तिथि है । चतुर्थी तिथि के स्वामी देवताओं में प्रथम पूज्य, भगवान शिव और माता पार्वती के सबसे छोटे पुत्र भगवान गणेश जी माने गए हैं ।

हिन्दू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नविनाशक, बुद्धि के अधिपति और शुभारंभ के देवता के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। गणेश जी की उपासना के लिए चतुर्थी तिथि विशेष मानी जाती है। 
मान्यता है कि किसी भी कार्य के प्रारम्भ में विघ्हर्ता की पूजा आराधना करने से सभी ग्रह दोष शांत होते है ।

नारद महापुराण के अध्याय 113 में चतुर्थी के व्रत और पूजा का वर्णन दिया गया है। जिस प्रकार पक्ष की तृतीया तिथि देवी से संबंधित मानी गई है, उसी प्रकार पक्ष की चतुर्थी भगवान गणपति गणेश जी को समर्पित है।

शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी और मंगलवार को पड़ने वाली चतुर्थी को अंगारक चतुर्थी कहते है, लेकिन भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का अलग ही महत्त्व है, इस दिन गणपति जी का अवतरण दिवस माना जाता है ।

चतुर्थी को गणपित जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके, लड्डुओं या गुड़ का भोग लगाकर “ॐ गण गणपतये नम:” मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करें ।

गणेश जी को मोदक / लड्डू, लाल रंग के फूल, दुर्वा (दूब), शमी-पत्र, और केला अति प्रिय है, बुधवार और चतुर्थी को गजानन को यह वस्तुएं अर्पित करने से जीवन में शुभ समय आता है ।

चतुर्थी को गणेश जी की आराधना से किसी भी कार्य में विघ्न नहीं आते है, कार्यो में श्रेष्ठ सफलता मिलती है ।

चतुर्थी को गणेश जी के परिवार के सदस्यों के नामो का स्मरण, उच्चारण करने से भाग्य चमकता है, शुभ समय आता है 

यदि चतुर्थी तिथि यदि गुरुवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है, इस समय में शुभ कार्य करना वर्जित है।

लेकिन यदि चतुर्थी तिथि शनिवार को होती है तो वह सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय में किया गया कार्य सिद्ध होता है।

चतुर्थी तिथि को रिक्ता तिथि कहते है इस दिन शुभ कार्यो का प्रारम्भ शुभ नहीं समझा जाता है ।

किसी भी पक्ष की चतुर्थी तिथि में मूली और बैंगन का सेवन करना मना है। चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है, और चतुर्थी को बैगन खाने से रोग बढ़ते है  ।

जानिए कौन है भगवान विश्वकर्मा जी , अवश्य जाने इनके माता पिता, इनके पूरे परिवार के बारे में 

इस तरह से मनाएं जन्माष्टमी का पर्व जीवन में लग जायेगा सुखो का अम्बार 

नक्षत्र (Nakshatra) – भरणी नक्षत्र 07.36 AM तक तत्पश्चात कृतिका नक्षत्र

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी-      भरणी नक्षत्र के देवता यमराज जी और नक्षत्र के स्वामी शुक्र जी है ।

 भरणी नक्षत्र 27 नक्षत्रों में से दूसरा नक्षत्र है और त्रिकोण का प्रतीक है। यह नक्षत्र प्रकृति के स्त्री वाले पहलू को इंगित करता है।

भरणी नक्षत्र बलिदान, ईर्ष्या, सहनशीलता और शुद्धि का प्रतीक भी माना जाता है। यह संयम का एक सितारा माना जाता है और गर्भ का प्रतिनिधित्व करता है। भरणी नक्षत्र सितारा का लिंग मादा है। 

भरणी नक्षत्र का आराध्य वृक्ष आँवला और नक्षत्र स्वभाव क्रूर माना गया है ।

भरणी नक्षत्र में पैदा होने वाले एक बड़े दिल वाले व्यक्ति माने जाते हैं, यह लोगो की बातो का बुरा नहीं मानते है। आपकी ताकत आपकी मुस्कुराहट है आप हमेशा शांत और प्रसन्न रहते हैं। आप ईमानदार है और सकारात्मक रहते है। इनका पारिवारिक जीवन सुखमय रहता है ।

भरणी नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 9, 3 और 12, भाग्यशाली रंग पीला, लाल, और हरा एवं भाग्यशाली दिन मंगलवार तथा गुरुवार माना जाता है । 

भरणी नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातको को तथा सभी मनुष्यों को जिस दिन भारणी नक्षत्र हो उस दिन नक्षत्र देवता नाममंत्र:- “ॐ यमाय् नमः” l  मन्त्र की एक माला का जप करना चाहिए, इससे भारणी नक्षत्र के शुभ फल मिलते है ।  

भरणी नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातको को भगवान शंकर जी की आराधना परम फलदाई है, इन्हे इस नक्षत्र के दिन महा मृत्युंजय मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।

अवश्य पढ़ें :- चाहिए परिवार में सुख-समृद्धि, प्रेम और आरोग्य तो ऐसा होना चाहिए किचन का वास्तु, जानिए किचन के वास्तु टिप्स 

  • योग (Yog) – वज्र 12.20 AM गुरुवार 1 अक्टूबर तक
  • योग के स्वामी, स्वभाव :-    वज्र योग के स्वामी वरुण जी और स्वभाव हानिकारक माना जाता है ।
  • प्रथम करण : – बालव 14.55 PM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :- बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।
  • द्वितीय करण : – कौलव 01.45 AM गुरुवार 1 अक्टूबर तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-    कौलव करण के स्वामी मित्र और स्वभाव सौम्य है ।

  • ब्रह्म मुहूर्त : 04.37 AM से 5.25 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.10 PM से 14.58 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.08 PM से 18.33 PM तक
  • अमृत काल : 03.48 PM से 05.17 AM गुरुवार 1 अक्टूबर तक

  • अग्निवास : पृथ्वी 14.55 PM तक तत्पश्चात आकाश

    अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।

    अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।


  • शिव वास : कैलाश में 14.55 PM तक तत्पश्चात नंदी पर


    शिव वास कैलाश पर:-  जब भगवान भोलेनाथ जी कैलाश पर होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार  भगवान शंकर जी के  कैलाश पर्वत पर रहने के दौरान रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सुखो की प्राप्ति होती है।

    शिव वास नन्दी जी पर :–  जब भगवान भोलेनाथ नन्दी जी पर विराजमान होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना सदैव बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों केअनुसार भगवान शंकर जी के नन्दी पर विराजमान के समय रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सफलता, शुभ समाचारो की प्राप्ति  होती है।



    इन उपायों से धन संपत्ति खींची चली आएगी, किसी चीज़ का नहीं रहेगा अभाव
  • दिशाशूल (Dishashool)- बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।

    इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – बुधवार का गुलिक काल 10:30 AM से 12 PM बजे तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal) : – बुधवार का राहुकाल दिन 12:00 PM से 1:30 PM तक ।
  • सूर्योदय – प्रातः 6.13 AM
  • सूर्यास्त – सायं 18.08 PM
  • विशेष – चतुर्थी को मूली का सेवन नहीं करना चाहिए, चतुर्थी को मूली का सेवन करने से धन का नाश होता है   ।
  • पंचमी तिथि को बेल का सेवन नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि पंचमी को बेल का सेवन करने से अपयश मिलता है।
  • पंचमी तिथि को कर्ज भी नहीं देना चाहिए, पंचमी को कर्ज देने से धन डूब जाता है तथा धन के आगमन में भी रुकावटें आने लगती है ।
  • मुहूर्त :-
  • पर्व त्यौहार–

सबसे ज्यादा पढ़ी गयी :- ऐसा होगा घर के पूजा घर का वास्तु तो पूरी होंगी सभी मनोकमनाएं, जानिए पूजा घर के वास्तु टिप्स,

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

मित्रो हम इस साईट के माध्यम से वर्ष 2010 से निरंतर आप लोगो के साथ जुड़े है। आप भारत या विश्व के किसी भी स्थान पर रहते है, अपने धर्म अपनी संस्कृति को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए www.memorymuseum.net के साथ अवश्य जुड़ें, हमारा सहयोग करें ।

अगर नित्य पंचाग पढ़ने से आपको लाभ मिल रहा है, आपका आत्मविश्वास बढ़ रहा है, आपका समय आपके अनुकूल हो रहा है तो आप हमें अपनी इच्छा – सामर्थ्य के अनुसार कोई भी सहयोग राशि 9425203501 पर Google Pay कर सकते है ।
आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।

अवश्य जानिए :- नैत्रत्यमुखी भवन के वास्तु के अचूक उपाय, 

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### ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय*
## ( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ)
### *अध्यात्म ज्योतिष परामर्श केंद्र*  
### *श्याम नगर, रायपुर, छत्तीसगढ़*  
### _📞 _9425203501 | 7000121183 | 7587346995 | 0771-4070168__
 हर समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है आपकी प्रत्येक इच्छा, महत्वकांक्षा, जीवन में बुलंदियों पर पहुंचना या किसी भी तरह की समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है *व्यापार बढ़ोतरी किया कराया शादी के लिए माता-पिता को मनाना जब कहीं ना ही हो काम तो हमसे में समाधान हर मुश्किल से मुश्किल समस्या का समाधान ज्योतिष मेरा काम नहीं मेरी साधना है जब कहीं ना हो काम तो हमसे ले समाधान https://devlinai.co.in/own_projects/acharya-main/
*ॐ नमः शिवाय | जय सनातन* 


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बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang, 30 सितम्बर 2026 का पंचांग,

बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang, 30 सितम्बर 2026 का पंचांग, Pandit Ji By Pandit Ji September 28, 2026 3 49460 FacebookXPinterestWhatsApp मंगलवार का पंचांगगुरुवार का पंचांग बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang, 30 सितम्बर 2026 का पंचांग, Panchang, पंचाग, आज का पंचांग, aaj ka pancahng, Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang, पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi) 2:- वार (Day) 3:- नक्षत्र (Nakshatra) 4:- योग (Yog) 5:- करण (Karan) पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे । जानिए बुधवार का पंचांग, Budhvar Ka Panchang, आज का पंचांग, aaj ka panchang, बुधवार का पंचांग (Budhwar Ka Panchang) 30 सितम्बर 2026 का पंचांग, ( Panchang ), 30 September 2026 ka Panchang, गणेश गायत्री मंत्र : ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।। ।। आज का दिन मंगलमय हो ।। * दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है। बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है। जीवन में कोई भी मनोकामना हो हनुमान जी के जन्मोत्सव के दिन अवश्य ही करें ये उपाय, मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है, अगर आप भी पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9044862881 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले । कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है । आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद 💰🔝💰🔝💰🔝💰🔝💰🔝💰🔝💰🔝💰 बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस उपाय से शरीर रहेगा निरोगी, शक्ति रहेगी भरपूर, बुढ़ापा पास भी नहीं आएगा, जानिए रोगनाशक दिव्य आहार, * बुधवार को सभी ग्रहो के राजकुमार बुध देव की आराधना करने से ज्ञान मिलता है, वाकपटुता में प्रवीणता आती है, धन लाभ होता है । बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाने तथा रात को सोते समय फिटकरी से दाँत साफ करने से आर्थिक पक्ष मजबूत होता है । जानिए बजरंग बलि के परिवार के बारे में, अवश्य जानिए हनुमान जी के माता पिता और उनके भाइयों के बारे में, *विक्रम संवत् – 2083, *शक संवत – 1948 *कलि संवत – 5128 *अयन – दक्षिणयायन *ऋतु – वर्षा ऋतु *मास – अश्विन माह *पक्ष – कृष्ण पक्ष *चंद्र बल – वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन, बुधवार को बुध की होरा :- प्रात: 06.13 AM से 7.13 AM तक दोपहर 01.10 PM से 2.10 PM तक रात्रि 20.09 PM से 21.10 PM तक बुधवार को बुध की होरा में हाथ की सबसे छोटी उंगली और बुध पर्वत को हल्के हल्के रगड़ते हुए अधिक से अधिक बुध देव के मन्त्र का जाप करें । ज्योतिष, पढ़ाई, लिखाई, सीखने, वाकपटुता, अपना प्रभाव डालने और व्यापार में सफलता के लिए बुध की होरा अति उत्तम मानी जाती है । बुधवार के दिन बुध की होरा में बुध देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है । अवश्य पढ़ें :- पूरे वर्ष निरोगी काया के लिए सर्दियों में सेवन करें ये आहार, आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,भारत की लगभग 150 करोड़ की आबादी में 0.001 % अर्थात लगभग 15 हज़ार आदमी ही नित्य पंचांग पढ़ पाते है। आप पर ईश्वर की असीम कृपा है जो आपको नित्य पंचांग पढ़ने का, अपने भाग्य को प्रबल करने का, पापो के प्रायश्चित करने का अवसर मिल रहा है, दुनिया के सारे उपाय एक तरफ है, और नित्य पंचाग पढ़ने का पुण्य उससे भी कहीं अधिक है, इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है । बुध देव के मन्त्र “ॐ बुं बुधाय नमः” अथवा “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।।” अवश्य जानिए कैसे और किससे हुआ हनुमान जी का विवाह, इनकी पुत्री है हनुमान जी की पत्नी, 🕉️💎🕉️💎🕉️💎🕉️💎🕉️💎🕉️ तिथि (Tithi) – चतुर्थी 14.55 PM तक तत्पश्चात पंचमी तिथि, तिथि के स्वामी – चतुर्थी तिथि के स्वामी विघ्हर्ता गणेश जी और पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता जी है । आज चतुर्थी तिथि है । चतुर्थी तिथि के स्वामी देवताओं में प्रथम पूज्य, भगवान शिव और माता पार्वती के सबसे छोटे पुत्र भगवान गणेश जी माने गए हैं । हिन्दू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नविनाशक, बुद्धि के अधिपति और शुभारंभ के देवता के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। गणेश जी की उपासना के लिए चतुर्थी तिथि विशेष मानी जाती है। मान्यता है कि किसी भी कार्य के प्रारम्भ में विघ्हर्ता की पूजा आराधना करने से सभी ग्रह दोष शांत होते है । नारद महापुराण के अध्याय 113 में चतुर्थी के व्रत और पूजा का वर्णन दिया गया है। जिस प्रकार पक्ष की तृतीया तिथि देवी से संबंधित मानी गई है, उसी प्रकार पक्ष की चतुर्थी भगवान गणपति गणेश जी को समर्पित है। शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी और मंगलवार को पड़ने वाली चतुर्थी को अंगारक चतुर्थी कहते है, लेकिन भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का अलग ही महत्त्व है, इस दिन गणपति जी का अवतरण दिवस माना जाता है । चतुर्थी को गणपित जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके, लड्डुओं या गुड़ का भोग लगाकर “ॐ गण गणपतये नम:” मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करें । गणेश जी को मोदक / लड्डू, लाल रंग के फूल, दुर्वा (दूब), शमी-पत्र, और केला अति प्रिय है, बुधवार और चतुर्थी को गजानन को यह वस्तुएं अर्पित करने से जीवन में शुभ समय आता है । चतुर्थी को गणेश जी की आराधना से किसी भी कार्य में विघ्न नहीं आते है, कार्यो में श्रेष्ठ सफलता मिलती है । चतुर्थी को गणेश जी के परिवार के सदस्यों के नामो का स्मरण, उच्चारण करने से भाग्य चमकता है, शुभ समय आता है यदि चतुर्थी तिथि यदि गुरुवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है, इस समय में शुभ कार्य करना वर्जित है। लेकिन यदि चतुर्थी तिथि शनिवार को होती है तो वह सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय में किया गया कार्य सिद्ध होता है। चतुर्थी तिथि को रिक्ता तिथि कहते है इस दिन शुभ कार्यो का प्रारम्भ शुभ नहीं समझा जाता है । किसी भी पक्ष की चतुर्थी तिथि में मूली और बैंगन का सेवन करना मना है। चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है, और चतुर्थी को बैगन खाने से रोग बढ़ते है । जानिए कौन है भगवान विश्वकर्मा जी , अवश्य जाने इनके माता पिता, इनके पूरे परिवार के बारे में इस तरह से मनाएं जन्माष्टमी का पर्व जीवन में लग जायेगा सुखो का अम्बार नक्षत्र (Nakshatra) – भरणी नक्षत्र 07.36 AM तक तत्पश्चात कृतिका नक्षत्र नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी- भरणी नक्षत्र के देवता यमराज जी और नक्षत्र के स्वामी शुक्र जी है । भरणी नक्षत्र 27 नक्षत्रों में से दूसरा नक्षत्र है और त्रिकोण का प्रतीक है। यह नक्षत्र प्रकृति के स्त्री वाले पहलू को इंगित करता है। भरणी नक्षत्र बलिदान, ईर्ष्या, सहनशीलता और शुद्धि का प्रतीक भी माना जाता है। यह संयम का एक सितारा माना जाता है और गर्भ का प्रतिनिधित्व करता है। भरणी नक्षत्र सितारा का लिंग मादा है। भरणी नक्षत्र का आराध्य वृक्ष आँवला और नक्षत्र स्वभाव क्रूर माना गया है । भरणी नक्षत्र में पैदा होने वाले एक बड़े दिल वाले व्यक्ति माने जाते हैं, यह लोगो की बातो का बुरा नहीं मानते है। आपकी ताकत आपकी मुस्कुराहट है आप हमेशा शांत और प्रसन्न रहते हैं। आप ईमानदार है और सकारात्मक रहते है। इनका पारिवारिक जीवन सुखमय रहता है । भरणी नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 9, 3 और 12, भाग्यशाली रंग पीला, लाल, और हरा एवं भाग्यशाली दिन मंगलवार तथा गुरुवार माना जाता है । भरणी नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातको को तथा सभी मनुष्यों को जिस दिन भारणी नक्षत्र हो उस दिन नक्षत्र देवता नाममंत्र:- “ॐ यमाय् नमः” l मन्त्र की एक माला का जप करना चाहिए, इससे भारणी नक्षत्र के शुभ फल मिलते है । भरणी नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातको को भगवान शंकर जी की आराधना परम फलदाई है, इन्हे इस नक्षत्र के दिन महा मृत्युंजय मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करना चाहिए । जरूर पढ़े :- दुश्मनो से छुटकारा पाना हो अथवा कारोबार में चाहिए आशातीत सफलता हनुमान जयंती के दिन अवश्य ही करें ये उपाय, अवश्य पढ़ें :- चाहिए परिवार में सुख-समृद्धि, प्रेम और आरोग्य तो ऐसा होना चाहिए किचन का वास्तु, जानिए किचन के वास्तु टिप्स योग (Yog) – वज्र 12.20 AM गुरुवार 1 अक्टूबर तक योग के स्वामी, स्वभाव :- वज्र योग के स्वामी वरुण जी और स्वभाव हानिकारक माना जाता है । प्रथम करण : – बालव 14.55 PM तक करण के स्वामी, स्वभाव :- बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है । द्वितीय करण : – कौलव 01.45 AM गुरुवार 1 अक्टूबर तक करण के स्वामी, स्वभाव :- कौलव करण के स्वामी मित्र और स्वभाव सौम्य है । ब्रह्म मुहूर्त : 04.37 AM से 5.25 AM तक विजय मुहूर्त : 14.10 PM से 14.58 PM तक गोधूलि मुहूर्त : 18.08 PM से 18.33 PM तक अमृत काल : 03.48 PM से 05.17 AM गुरुवार 1 अक्टूबर तक अग्निवास : पृथ्वी 14.55 PM तक तत्पश्चात आकाश अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है । अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है । शिव वास : कैलाश में 14.55 PM तक तत्पश्चात नंदी पर शिव वास कैलाश पर:- जब भगवान भोलेनाथ जी कैलाश पर होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान शंकर जी के कैलाश पर्वत पर रहने के दौरान रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सुखो की प्राप्ति होती है। शिव वास नन्दी जी पर :– जब भगवान भोलेनाथ नन्दी जी पर विराजमान होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना सदैव बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों केअनुसार भगवान शंकर जी के नन्दी पर विराजमान के समय रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सफलता, शुभ समाचारो की प्राप्ति होती है। इन उपायों से धन संपत्ति खींची चली आएगी, किसी चीज़ का नहीं रहेगा अभाव दिशाशूल (Dishashool)- बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है । इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ । गुलिक काल : – बुधवार का गुलिक काल 10:30 AM से 12 PM बजे तक । राहुकाल (Rahukaal) : – बुधवार का राहुकाल दिन 12:00 PM से 1:30 PM तक । सूर्योदय – प्रातः 6.13 AM सूर्यास्त – सायं 18.08 PM विशेष – चतुर्थी को मूली का सेवन नहीं करना चाहिए, चतुर्थी को मूली का सेवन करने से धन का नाश होता है । पंचमी तिथि को बेल का सेवन नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि पंचमी को बेल का सेवन करने से अपयश मिलता है। पंचमी तिथि को कर्ज भी नहीं देना चाहिए, पंचमी को कर्ज देने से धन डूब जाता है तथा धन के आगमन में भी रुकावटें आने लगती है । मुहूर्त :- पर्व त्यौहार– सबसे ज्यादा पढ़ी गयी :- ऐसा होगा घर के पूजा घर का वास्तु तो पूरी होंगी सभी मनोकमनाएं, जानिए पूजा घर के वास्तु टिप्स, “हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “। आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो । मित्रो हम इस साईट के माध्यम से वर्ष 2010 से निरंतर आप लोगो के साथ जुड़े है। आप भारत या विश्व के किसी भी स्थान पर रहते है, अपने धर्म अपनी संस्कृति को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए www.memorymuseum.net के साथ अवश्य जुड़ें, हमारा सहयोग करें । अगर नित्य पंचाग पढ़ने से आपको लाभ मिल रहा है, आपका आत्मविश्वास बढ़ रहा है, आपका समय आपके अनुकूल हो रहा है तो आप हमें अपनी इच्छा – सामर्थ्य के अनुसार कोई भी सहयोग राशि 6306516037 पर Google Pay कर सकते है । आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे । अवश्य जानिए :- नैत्रत्यमुखी भवन के वास्तु के अचूक उपाय, 30 सितम्बर 2026 का पंचांग, 30 September 2026 ka panchang, aaj ka panchang, aaj ka rahu kaal, aaj ka shubh panchang, Budhwar Ka Panchang, budhwar ka rahu kaal, budhwar ka shubh panchang, kal ka panchang, panchang, Wednesday ka panchang, आज का पंचांग, आज का राहुकाल, आज का शुभ 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बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang, 16 सितम्बर 2026 का पंचांग,

 बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang, 16 सितम्बर 2026 का पंचांग



बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang, 16 सितम्बर 2026 का पंचांग,

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पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi) 2:- वार (Day) 3:- नक्षत्र (Nakshatra) 4:- योग (Yog) 5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
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बुधवार का पंचांग (Budhwar Ka Panchang)


16 सितम्बर 2026 का पंचांग, ( Panchang ), 16 September 2026 ka Panchang,

गणेश गायत्री मंत्र :
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।

।। आज का दिन मंगलमय हो ।।

* दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।

जीवन में कोई भी मनोकामना हो हनुमान जी के जन्मोत्सव के दिन अवश्य ही करें ये उपाय,


मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है, अगर आप भी पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

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आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद

बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

इस उपाय से शरीर रहेगा निरोगी, शक्ति रहेगी भरपूर, बुढ़ापा पास भी नहीं आएगा, जानिए रोगनाशक दिव्य आहार,

* बुधवार को सभी ग्रहो के राजकुमार बुध देव की आराधना करने से ज्ञान मिलता है, वाकपटुता में प्रवीणता आती है, धन लाभ होता है ।

बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाने तथा रात को सोते समय फिटकरी से दाँत साफ करने से आर्थिक पक्ष मजबूत होता है ।

जानिए बजरंग बलि के परिवार के बारे में, अवश्य जानिए हनुमान जी के माता पिता और उनके भाइयों के बारे में,

*विक्रम संवत् – 2083,
*शक संवत – 1948
*कलि संवत – 5128
*अयन – दक्षिणयायन
*ऋतु – वर्षा ऋतु
*मास – भाद्रपद माह
*पक्ष – शुक्ल पक्ष
*चंद्र बल – वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुम्भ,

बुधवार को बुध की होरा :-

प्रात: 06.06 AM से 7.08 AM तक

दोपहर 01.17 PM से 2.19 PM तक

रात्रि 20.22 PM से 21.21 PM तक

बुधवार को बुध की होरा में हाथ की सबसे छोटी उंगली और बुध पर्वत को हल्के हल्के रगड़ते हुए अधिक से अधिक बुध देव के मन्त्र का जाप करें ।

ज्योतिष, पढ़ाई, लिखाई, सीखने, वाकपटुता, अपना प्रभाव डालने और व्यापार में सफलता के लिए बुध की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

बुधवार के दिन बुध की होरा में बुध देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

अवश्य पढ़ें :- पूरे वर्ष निरोगी काया के लिए सर्दियों में सेवन करें ये आहार,

आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,भारत की लगभग 150 करोड़ की आबादी में 0.001 % अर्थात लगभग 15 हज़ार आदमी ही नित्य पंचांग पढ़ पाते है।

आप पर ईश्वर की असीम कृपा है जो आपको नित्य पंचांग पढ़ने का, अपने भाग्य को प्रबल करने का, पापो के प्रायश्चित करने का अवसर मिल रहा है,

दुनिया के सारे उपाय एक तरफ है, और नित्य पंचाग पढ़ने का पुण्य उससे भी कहीं अधिक है,

इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है ।

बुध देव के मन्त्र

“ॐ बुं बुधाय नमः” अथवा

“ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।।”

अवश्य जानिए कैसे और किससे हुआ हनुमान जी का विवाह, इनकी पुत्री है हनुमान जी की पत्नी,

  • तिथि (Tithi) – पंचमी 08.59 AM तक तत्पश्चात षष्टी,
  • तिथि के स्वामी – पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता जी और षष्टी तिथि के स्वामी भगवान कार्तिकेय जी है । 

पञ्चमी तिथि के स्वामी नाग देवता और षष्टी तिथि के स्वामी भगवान शंकर के पुत्र भगवान कार्तिकेय जी है।

पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता है। पंचमी तिथि को नाग देवता की पूजा करने से काल सर्प दोष दूर होता है, नाग के काटने का भय नहीं रहता है ।

पंचमी तिथि के समय भगवान शिव का पूजन शुभ माना गया है, मान्यता है कि भगवान शिव कैलाश में निवास करते हैं। पंचमी तिथि को शिवलिंग का जिस पर नाग बना हो दूध या पंचामृत से अभिषेक करने से नाग देवता प्रसन्न होते है।

पंचमी जब शनिवार के दिन होती है, तो वह मृत्युदा योग बनाती है। यह अशुभ योग माना गया है।

जब पंचमी तिथि गुरुवार के दिन होती है तो बहुत ही शुभ सिद्धिदा योग बनता है। शास्त्रों के अनुसार सिद्धिदा योग में किए गए कार्य श्रेष्ठ फल प्रदान करते है।

प्रत्येक पंचमी के दिन नागो के अति पवित्र और पुण्यदायक नामो 1. अनंत (शेषनाग ), 2. वासुकि, 3. तक्षक, 4. कर्कोटक, 5. पद्म, 6. महापद्म, 7. शंख, 8. कुलिक, 9. धृतराष्ट्र और 10. कालिया का उच्चारण करने से काल सर्प दोष दूर होता है, कोई भी भय निकट नहीं रहता है, बल और साहस की प्राप्ति होती है ।

पंचमी को नागो के पौराणिक नाम “अनंत, वासुकि, तक्षक, कर्कोटल, पिंगल” का कम से कम 11 बार उच्चारण अवश्य ही करें।

हिन्दू पंचांग के अनुसार पंचमी  तिथि को  बसंत पंचमी,  रंग पंचमी, विवाह पंचमी, नाग पंचमी, ऋषि पंचमी, लाभ पंचमी  /  सौभाग्य पंचमी आदि कई शुभ पर्व आते है ।

पंचमी तिथि पूर्णा तिथियों की श्रेणी में आती है, इस तिथि में समस्त शुभ कार्य सिद्ध होते हैं, किन्तु पंचमी तिथि को कर्ज नहीं देना चाहिए।  

पंचमी को बेल खाना निषेध है, मान्यता है कि पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है।  

जानिए कौन है भगवान विश्वकर्मा जी , अवश्य जाने इनके माता पिता, इनके पूरे परिवार के बारे में 

इस तरह से मनाएं जन्माष्टमी का पर्व जीवन में लग जायेगा सुखो का अम्बार 

नक्षत्र (Nakshatra) – विशाखा 17.22 PM तक तत्पश्चात अनुराधा

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी-      विशाखा नक्षत्र के देवता इंद्राग्नी ( इंद्र और अग्नि ) और स्वामी बृहस्पति देव जी है ।

 विशाखा नक्षत्र, नक्षत्र मंडल में उपस्थित 27 नक्षत्रों में 16वां है।

विशाखा नक्षत्र देवी राधा के साथ सम्बंधित है जो उनकी प्रसन्नता को दर्शाता है, भगवान श्री कृष्ण के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता है।

विशाखा नक्षत्र वास्तव में पत्तियों से सजाया गया एक तोरण द्वार का प्रतीक है, जिसका मुख्य रूप से विवाह समारोहों में आवश्यकता है।

इस नक्षत्र का आराध्य वृक्ष : कटाई, नागकेशर तथा स्वाभाव अशुभ माना गया है। विशाखा नक्षत्र सितारे का लिंग महिला है।

इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक पर जीवन भर बृहस्पति देव जी का प्रभाव बना रहता है।

विशाखा नक्षत्र वालो को कभी धन की कमी नहीं सताती, या धन की परेशानी हो भी तो अधिक समय तक नहीं रहती।  विशाखा नक्षत्र वाले लोग बहुत भाग्यवान होते हैं।

विशाखा नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्तियों में अपने परिवार के प्रति विशेष लगाव रहता है। इन्हे एकल परिवार की बजाय संयुक्त परिवार में रहना ज्यादा पसंद होता है ।

विशाखा नक्षत्र वाले जातको के लिए भाग्यशाली संख्या 3 और 9,  भाग्यशाली रंग, सुनहरा,  भाग्यशाली दिन  मंगलवार, शुक्रवार और गुरुवार माना जाता है ।

विशाखा नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ इंद्राग्नीभ्यां नमः” अथवा “ॐ विशाखाभ्यां नमः”। मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।

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  • योग (Yog) – वैधृति 12.23 PM तक तत्पश्चात विष्कम्भ
  • योग के स्वामी, स्वभाव :-    वैधृति योग के स्वामी दिति और स्वभाव हानिकारक है   ।
  • प्रथम करण : – बालव 08.59 AM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :- बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।
  • द्वितीय करण : – कौलव 21.49 PM तक तत्पश्चात तैतिल
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-    कौलव करण के स्वामी मित्र और स्वभाव सौम्य है ।

  • ब्रह्म मुहूर्त : 04.33 AM से 5.20 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.19 PM से 15.08 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.25 PM से 18.49 PM तक
  • अमृत काल : 07.50 AM से 09.34 AM तक

  • अग्निवास : पाताल में 08.59 AM तक तत्पश्चात पृथ्वी पर


     जब पाताल में अग्नि वास है तो वह हवन से सम्बन्धित अनुष्ठानों के लिये शुभ नहीं मानी जाती है, यह अशुभ मानी गई है । अग्नि के पाताल  वास के दौरान किये जाने वाले हवन  सम्बन्धित अनुष्ठानों व्यक्ति को आर्थिक नुकसान करना पड़ता है उसका  धन नष्ट हो सकता है।

    अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।


  • शिव वास : कैलाश में 8.29 AM तक तत्पश्चात नंदी पर


    शिव वास कैलाश पर:-  जब भगवान भोलेनाथ जी कैलाश पर होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार  भगवान शंकर जी के  कैलाश पर्वत पर रहने के दौरान रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सुखो की प्राप्ति होती है।

    शिव वास नन्दी जी पर :–  जब भगवान भोलेनाथ नन्दी जी पर विराजमान होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना सदैव बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों केअनुसार भगवान शंकर जी के नन्दी पर विराजमान के समय रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सफलता, शुभ समाचारो की प्राप्ति  होती है।



    इन उपायों से धन संपत्ति खींची चली आएगी, किसी चीज़ का नहीं रहेगा अभाव
  • दिशाशूल (Dishashool)- बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।

    इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – बुधवार का गुलिक काल 10:30 AM से 12 PM बजे तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal) : – बुधवार का राहुकाल दिन 12:00 PM से 1:30 PM तक ।
  • सूर्योदय – प्रातः 6.06 AM
  • सूर्यास्त – सायं 18.25 PM
  • विशेष – पंचमी तिथि को बेल का सेवन नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि पंचमी को बेल का सेवन करने से अपयश मिलता है।
  • पंचमी तिथि को कर्ज भी नहीं देना चाहिए, पंचमी को कर्ज देने से धन डूब जाता है तथा धन के आगमन में भी रुकावटें आने लगती है ।
  • षष्ठी के दिन नीम की पत्ती खाना, दातुन करना या किसी भी तरह से  नीम का सेवन नहीं करना चाहिए । इस दिन नीम का सेवन करने से नीच योनि की प्राप्ति होती है।
  • मुहूर्त :-
  • पर्व त्यौहार–

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“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।

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16 सितम्बर 2026 का पंचांग, 16 September 2026 ka panchang, aaj ka panchang, aaj ka rahu kaal, aaj ka shubh panchang, Budhwar Ka Panchang, budhwar ka rahu kaal, budhwar ka shubh panchang, kal ka panchang, panchang, Wednesday ka panchang, आज का पंचांग, आज का राहुकाल, आज का शुभ पंचांग, कल का पंचांग, पंचांग, बुधवार का पंचांग, बुधवार का राहु काल, बुधवार का शुभ पंचांग, वेडनेस डे का पंचांग,

### ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय*
## ( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ)
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 हर समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है आपकी प्रत्येक इच्छा, महत्वकांक्षा, जीवन में बुलंदियों पर पहुंचना या किसी भी तरह की समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है *व्यापार बढ़ोतरी किया कराया शादी के लिए माता-पिता को मनाना जब कहीं ना ही हो काम तो हमसे में समाधान हर मुश्किल से मुश्किल समस्या का समाधान ज्योतिष मेरा काम नहीं मेरी साधना है जब कहीं ना हो काम तो हमसे ले समाधान https://devlinai.co.in/own_projects/acharya-main/
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मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang, 15 सितम्बर 2026 का पंचांग,

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Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)




पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए मंगलवार का पंचांग (Mangalvar Ka Panchang)।

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

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हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।

मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद


।। आज का दिन मंगलमय हो ।।

  • दिन (वार) – मंगलवार Mangalwar के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।

    मंगलवार Mangalwar को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।

    मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।

    नवरात्री में घर, कारोबार में इस विधि से करें कलश की स्थापना, अवश्य जानिए कलश स्थापना की सही और बहुत ही आसान विधि,

    मंगलवार के व्रत से सुयोग्‍य संतान की प्राप्ति होती है, बल, साहस और सम्मान में भी वृद्धि होती है।

    मंगलवार को धरती पुत्र मंगलदेव की आराधना करने से जातक को मुक़दमे, राजद्वार में सफलता मिलती है, उत्तम भूमि, भवन का सुख मिलता है, मांगलिक दोष दूर होता है।


    जीवन में समस्त संकटो को दूर करने, सफलता का द्वार खोलने के लिए नवरात्री के मंगलवार को अवश्य ही करें ये उपाय

    आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,
  • इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । नित्य पंचांग को पढ़ने से देवताओं का आशीर्वाद मिलता है, पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है ।

*विक्रम संवत्- 2083,
*शक संवत – 1948

*कलि सम्वत – 5128
*अयन –
दक्षिणायण
*ऋतु –
वर्षा ऋतु
*मास –
भाद्रपद माह,
*पक्ष – शुक्ल पक्ष
*चंद्र बल – मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, मकर,

मंगलवार को मंगल की होरा :-

प्रात: 06.06 AM से 7.08 AM तक

दोपहर 01.18 PM से 2.20 PM तक

रात्रि 20.23 PM से 21.21 PM तक

मंगलवार को मंगल की होरा में हाथ की निम्न मंगल पर दो बूंद सरसो का तेल लगा कर उसे हल्के हल्के रगड़ते हुए अधिक से अधिक मंगल देव के मन्त्र का जाप करें ।

कृषि, भूमि, भवन, इंजीनियरिंग, खेलो, साहस, आत्मविश्वास

और भाई के लिए मंगल की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

मंगलवार के दिन मंगल की होरा में मंगल देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में मंगल मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

गुरु पूर्णिमा पर इस मन्त्र का अवश्य ही करें जाप, जानिए गुरु पूर्णिमा का उपाय,

मंगल देव के मन्त्र

ॐ अं अंगारकाय नम: अथवा

ॐ भौं भौमाय नम:”

जरूर पढ़े :-  जीवन में समस्त संकटो को दूर करने, सफलता का द्वार खोलने के लिए नवरात्री के मंगलवार को अवश्य ही करें ये उपाय,

तिथि :- चतुर्थी 07.44 AM तक तत्पश्चात पंचमी ,

तिथि के स्वामी :- चतुर्थी तिथि के स्वामी विघ्हर्ता गणेश जी और पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता जी है ।

आज चतुर्थी तिथि है । चतुर्थी तिथि के स्वामी देवताओं में प्रथम पूज्य, भगवान शिव और माता पार्वती के सबसे छोटे पुत्र भगवान गणेश जी माने गए हैं ।

हिन्दू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नविनाशक, बुद्धि के अधिपति और शुभारंभ के देवता के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। गणेश जी की उपासना के लिए चतुर्थी तिथि विशेष मानी जाती है। मान्यता है कि किसी भी कार्य के प्रारम्भ में विघ्हर्ता की पूजा आराधना करने से सभी ग्रह दोष शांत होते है ।

नारद महापुराण के अध्याय 113 में चतुर्थी के व्रत और पूजा का वर्णन दिया गया है। कि जिस प्रकार पक्ष की तृतीया तिथि देवी से संबंधित मानी गई है, उसी प्रकार पक्ष की चतुर्थी भगवान गणपति गणेश जी को समर्पित है।

शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी और मंगलवार को पड़ने वाली चतुर्थी को अंगारक चतुर्थी कहते है, लेकिन भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का अलग ही महत्त्व है, इस दिन गणपति जी का अवतरण दिवस माना जाता है ।

चतुर्थी को गणपित जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके, लड्डुओं या गुड़ का भोग लगाकर “ॐ गण गणपतये नम:” मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करें ।

गणेश जी को मोदक / लड्डू, लाल रंग के फूल, दुर्वा (दूब), शमी-पत्र, और केला अति प्रिय है, बुधवार और चतुर्थी को गजानन को यह वस्तुएं अर्पित करने से जीवन में शुभ समय आता है ।

चतुर्थी को गणेश जी की आराधना से किसी भी कार्य में विघ्न नहीं आते है, कार्यो में श्रेष्ठ सफलता मिलती है ।

चतुर्थी को गणेश जी के परिवार के सदस्यों के नामो का स्मरण, उच्चारण करने से भाग्य चमकता है, शुभ समय आता है 

यदि चतुर्थी तिथि यदि गुरुवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है, इस समय में शुभ कार्य करना वर्जित है।

लेकिन यदि चतुर्थी तिथि शनिवार को होती है तो वह सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय में किया गया कार्य सिद्ध होता है।

किसी भी पक्ष की चतुर्थी तिथि में मूली और बैंगन का सेवन करना मना है। चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है, और चतुर्थी को बैगन खाने से रोग बढ़ते है  ।

अवश्य पढ़ें :- चाहिए परिवार में सुख-समृद्धि, प्रेम और आरोग्य तो ऐसा होना चाहिए किचन का वास्तु, जानिए किचन के वास्तु टिप्स,

अवश्य जानें कैसे हुआ गणेश जी का अवतरण, कैसे गणेश जी का सर हाथी के सर में बदल गया, कैसे गणपति जी कहलाएं भगवान गजानन

  • नक्षत्र (Nakshatra) – स्वाति 15.21 PM तक तत्पश्चात विशाखा,
  • नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी – स्वाति नक्षत्र के देवता वायु और सरस्वती जी और स्वामी राहु जी है । 

 स्वाति नक्षत्र, नक्षत्र मंडल में उपस्थित 27 नक्षत्रों में 15वां है। स्वाति नक्षत्र राहु का दूसरा नक्षत्र है। स्वाति नक्षत्र के देवता पवन देव हैं।  स्वाति नक्षत्र का संबंध विद्या की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती से भी है।

स्वाति नक्षत्र ‘शुद्धता’,  ‘स्वतंत्रता’ को दर्शाता है ।  यह अत्यंत शुद्ध और पवित्र बारिश की पहली बूंद का भी प्रतीक है ।

स्वाति नक्षत्र के पानी का महत्व ज्यादा होता है। इसकी एक बूंद से पपैया पक्षी अपनी प्यास बुझा लेता है। केले के पत्ते पर जल की बूंद गिरने से कपूर बनता है। इसी जल की बूंद समुद्र में गिरने से मोती बनता है।

इस नक्षत्र का आराध्य वृक्ष : अर्जुन तथा स्वाभाव शुभ माना गया है। स्वाति नक्षत्र सितारे का लिंग महिला है।

इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक पर जीवन भर शुक्र एवं राहु ग्रह का प्रभाव बना रहता है।

इस नक्षत्र में जन्मा जातक धार्मिक, लोकप्रिय, बुद्धिमान, चतुर, परिश्रमी, अनुशासित, आध्यात्मिक होता हैं, सामन्यता इन्हे भूमि, भवन और पूर्ण सुख मिलता है।

लेकिन यदि शुक्र ख़राब हो तो जातक क्रोधी, घमंडी, अति कामुक, मदिरा प्रेमी होता है उसको धन और स्त्री का सुख भी नहीं मिलता है ।

स्वाति नक्षत्र में पैदा हुई स्त्री सुन्दर, मिलनसार, धार्मिक, दयालु,  दूसरो को जल्द प्रभावित करने वाली होती हैं। इनका पारिवारिक दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।

स्वाति नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 4 और 6,  भाग्यशाली रंग, गहरा भूरा, काला,  भाग्यशाली दिन  शनिवार, सोमवार और मंगलवार माना जाता है ।

स्वाति नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को वायु देव के  “ॐ वायवे नमः”। मन्त्र माला का जाप अवश्य करना चाहिए, इससे जीवन में श्रेष्ठ सफलता मिलती है  ।


  • योग :- इंद्र 12.20 PM तक तत्पश्चात वैधृति
  • योग केस्वामी:-      इंद्र योग के स्वामी पितृ देव जी एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है ।
  • प्रथम करण : – विष्टि 07.44 AM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :- विष्टि करण के स्वामी यम और स्वभाव क्रूर है ।
  • द्वितीय करण : – बव 20.17 PM तक तत्पश्चात बालव
  • करण के स्वामी, स्वभाव :- बव करण के स्वामी इंद्र देव और स्वभाव सौम्य ह ।।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 04.33 AM से 5.19 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.20 PM से 15.09 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.26 PM से 18.50 PM तक
  • अमृत काल : 10.40 AM से 12.10 PM तक

  • शिव वास :- क्रीड़ा में 07.44 AM तक तत्पश्चात कैलाश पर

  • जब भगवान शंकर जी क्रीड़ा में होते हैं, तो उस समय भी रुद्र अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान भोलेनाथ जी के कार्य अथवा क्रीड़ा के समय रूद्र अभिषेक करने से जीवन में तरह तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।  

  • शिव वास :-  जब भगवान भोलेनाथ जी कैलाश पर होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार  भगवान शंकर जी के  कैलाश पर्वत पर रहने के दौरान रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सुखो की प्राप्ति होती है।

  • अग्नि वास : पृथ्वी पर 07.44 AM तक तत्पश्चात आकाश पर

    अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।

    अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।
  • दिशाशूल (Dishashool)- मंगलवार को उत्तर दिशा का दिकशूल होता है।

    यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से गुड़ खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – दोपहर 12:00 से 01:30 तक है ।
  • राहुकाल (Rahukaal) दिन – 3:00 से 4:30 तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 06:06
  • सूर्यास्त – सायं 18:26
  • विशेष – चतुर्थी को मूली का सेवन नहीं करना चाहिए, चतुर्थी को मूली का सेवन करने से धन का नाश होता है   ।
  • पंचमी तिथि को बेल का सेवन नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि पंचमी को बेल का सेवन करने से अपयश मिलता है।
  • पंचमी तिथि को कर्ज भी नहीं देना चाहिए, पंचमी को कर्ज देने से धन डूब जाता है तथा धन के आगमन में भी रुकावटें आने लगती है ।
  • पर्व – त्यौहार-

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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Aacharya Mukti Narayan Pandey Adhyatma Jyotish paramarsh Kendra Raipur

Guruwar Ka Panchag, गुरुवार का पंचांग, 5 नवम्बर 2026 का पंचांग,

Guruwar Ka Panchag, गुरुवार का पंचांग, 5 नवम्बर 2026 का पंचांग, आप सभी को रम्भा एकादशी / रमा एकादशी की हार्दिक शुभकामनायें गुरुवार का पंचाग,...