Shukrwar ka panchag, शुक्रवार का पंचांग, 20 मार्च 2026 का पंचांग,


Shukrwar ka panchag, शुक्रवार का पंचांग, 20 मार्च 2026 का पंचांग,

आप सभी को नवरात्री के दूसरे दिन की हार्दिक शुभकामनायें , जय माँ ब्रह्मचारिणी

गुरुवार का पंचांग शनिवार का पंचांग

शुक्रवार का पंचांग, Shukrwar ka panchag, 20 मार्च 2026 का पंचांग का पंचांग,

शुक्रवार का पंचांग, shukrwar ka panchang,

  • Panchang, पंचाग, Panchang 2026 हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang, पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-

    1:- तिथि (Tithi)
    2:- वार (Day)
    3:- नक्षत्र (Nakshatra)
    4:- योग (Yog)
    5:- करण (Karan)


    पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी नित्य पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।

    जानिए, Shukravar Ka Panchang, शुक्रवार का पंचांग, आज का पंचांग, aaj ka panchang,

    20 मार्च 2026 का पंचांग, 20 March  2026 ka Panchang,

  • महालक्ष्मी मन्त्र : ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥

  • ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥

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आज का पंचांग, aaj ka panchang,

दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।

शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय 
“श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।

शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।

  • * विक्रम संवत् – 2083 वर्ष
  • * शक संवत – 1948 वर्ष
    * कलि संवत – 5128 वर्ष
    * कलयुग – 5128 वर्ष
    * अयन – उत्तरायण,
    * ऋतु – बसंत ऋतु,
    * मास – चैत्र माह
    * पक्ष – शुक्ल पक्ष
    * चंद्र बल – मेष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, कुम्भ,

शुक्रवार को शुक्र देव की होरा :-

प्रात: 6.33 AM से 7.33 AM तक

दोपहर 01.30 PM से 2.30 PM तक

रात्रि 20.24 PM से 21.26 PM तक

दाहिने हाथ के अंगूठे से नीचे के हिस्से ( शुक्र का स्थान ) और अंगूठे पर थोड़ा सा इत्र लगाकर, ( इत्र ना मिले तो उसके बिना भी कर सकते है) बाएं हाथ के अंगूठे से उस हिस्से को शुक्र की होरा में “ॐ शुक्राये नम:” या

ॐ द्रांम द्रींम द्रौंम स: शुक्राय नम:।’ मंत्र का अधिक से अधिक जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य )I

यह उपाय आप कोई भी काम करते हुए चुपचाप कर सकते है इसके लिए किसी भी विधि विधान की कोई आवश्यकता नहीं है I

सुख समृद्धि, ऐश्वर्य, बड़ा भवन, विदेश यात्रा, प्रेम, रोमांस, सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए शुक्रवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

शुक्रवार के दिन शुक्र की होरा में शुक्रदेव देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में शुक ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

शुक्र देव के मन्त्र :-

ॐ शुं शुक्राय नमः।। अथवा

” ॐ द्राम द्रीम द्रौम सः शुक्राय नमः “।।

अपनी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए नवरात्री में अवश्य करें ये उपाय  

  • तिथि, (Tithi) द्वितीया 02.30 AM शनिवार 21 मार्च तक, तिथि, (Tithi) :-,
  • तिथि के स्वामी – द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्मा जी है I

आज चैत्र नवरात्री का दूसरा दिन है । नवरात्र के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली।

अर्थात ब्रह्मचारिणी का अर्थ है तप, त्याग और वैराग्य का आचरण करने वाली। इन्होंने भगवान भोलेनाथ जी को अपने पति के रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी।

इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएँ हाथ में कमण्डल सुशोभित है।

मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से सभी परेशानियां भी खत्म होती हैं, समस्त रूके हुए कार्य पूरे हो जाते हैं।

माँ ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से भक्तो को सर्व सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है। इस दिन ऐसी कन्याओं का पूजन किया जाता है कि जिनका विवाह तय हो गया है लेकिन शादी ना हुई हो।

अपनी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए नवरात्रि के द्वितीय दिन माँ ब्रह्मचारिणी के इस मन्त्र का जाप करना चाहिए।

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

माँ ब्रह्मचारिणी अतिसौम्य, क्रोध रहित और तुरंत वरदान देने वाली देवी मानी गयी है।

नवरात्री के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग चढ़ाया जाता है। मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग लगाने से दीर्घ आयु का वरदान मिलता है।

मां ब्रह्मचारिणी पीला और सफ़ेद रंग बहुत प्रिय है इसलिए माता की पूजा में पीले अथवा सफ़ेद रंग के कपड़े पहनकर पूजा करनी चाहिए। साथ ही पीले, सफ़ेद रंग के फूल भी अर्पित करने चाहिए।

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नक्षत्र ( Nakshatra ) : रेवती 02.27 AM शनिवार 21 मार्च तक

नक्षत्र के स्वामी :–        रेवती नक्षत्र का स्वामी बुद्धि के कारक बुध देव जी एवं इस  नक्षत्र के देवता “पूषा” हैं जो सूर्य भगवान का ही एक रूप है ।  

रेवती नक्षत्र आकाश मंडल में अंतिम नक्षत्र है। यह मीन राशि में आता है।  रेवती का अर्थ है ‘समृद्ध’ और यह सुख – समृद्धि,  धन और ऐश्वर्य का प्रतीक माना जाता है।

रेवती नक्षत्र की गणना गंडमूल नक्षत्रों में की जाती है । इस नक्षत्र में जन्मे जातको को विष्णु भगवान की पूजा अवश्य करनी चाहिए ।  इन्हे नित्य विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से जीवन में श्रेष्ठ सफलता की प्राप्ति होती है । रेवती नक्षत्र का आराध्य वृक्ष महुआ और स्वभाव  मृदु माना गया है ।

रेवती नक्षत्र में जन्म लेने वाले स्त्री और पुरुष दोनों में विपरीत लिंग के व्यक्तियों के प्रति अधिक आकर्षण होता है।  इनके दोस्तों में विपरीत लिंग के व्यक्तियों की अच्छी संख्या होती है।

रेवती नक्षत्र में जन्मे जातक मध्यम कद और गौर वर्ण के व्यक्ति होते हैं। यह छल कपट से दूर रहते है ।

 यह कुशाग्र बुध्दि के, ईश्वर में आस्था रखने वाले, व्यवहार कुशल लेकिन बहुत ही जिद्दी होते है, इन्हे किसी की भी गलत बात सहन नहीं होती है। यह अपने जीवन में काफी सुदूर / विदेश यात्रायें करते है ।

रेवती नक्षत्र के लिए भाग्यशाली अंक 3 और 5,  भाग्यशाली रंग भूरा, और भाग्यशाली दिन  शनिवार और गुरुवार होता है ।

रेवती नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को इस नक्षत्र देवता के नाममंत्र:- “ॐ रेवत्यै नमः”l  मन्त्र की माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।

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योग(Yog) :- ब्रह्मा 22.15 PM तक तत्पश्चात इंद्र

योग के स्वामी, स्वभाव :-        ब्रह्म योग के स्वामी अश्विनी कुमार जी एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है  । 

प्रथम करण : – बालव 15.43 PM तक

करण के स्वामी, स्वभाव :-   बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।

द्वितीय करण :- कौलव 02.30 AM शनिवार 21 मार्च तक

करण के स्वामी, स्वभाव :-    कौलव करण के स्वामी मित्र और स्वभाव सौम्य है ।

  • दिशाशूल (Dishashool)- शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.50 AM से 5.38 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.30 PM से 15.18 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.30 PM से 18.54 PM तक
  • अमृत काल : 12.23 AM से 01.43 AM शनिवार 21 मार्च तक

    यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – शुक्रवार का गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)-दिन – 10:30 AM से 12:00 PM तक ।
  • सूर्योदय – प्रातः 06:25
  • सूर्यास्त – सायं : 18:32
  • विशेष – द्वितीया को बैगन, कटहल और नींबू का सेवन नहीं करना चाहिए ।
  • पर्व त्यौहार- नवरात्री का दूसरा दिन, जय माँ ब्रह्मचारिणी

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“हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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20 मार्च 2026 का पंचांग, 20 March 2026 ka Panchang, aaj ka panchang, aaj ka rahu kaal, aaj ka shubh panchang, friday ka panchang, panchang, shukrawar ka panchang, Shukravar Ka Panchang, shukrawar ka rahu kaal, shukrwar ka shubh panchang, आज का पंचांग, आज का राहुकाल, आज का शुभ पंचांग, पंचांग, फ्राइडे का पंचांग, शुक्रवार का पंचांग, शुक्रवार का राहु काल, शुक्रवार का शुभ पंचांग,

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Guruwar Ka Panchag, गुरुवार का पंचांग, 19 मार्च 2026 का पंचांग,

Guruwar Ka Panchag, गुरुवार का पंचांग, 19 मार्च 2026 का पंचांग,

आप सभी भक्तो को चैत्र नवरात्री के पहला दिन, हिन्दू नवसंवतर की हार्दिक शुभकामनायें

गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 19 March 2026 Ka Panchang,

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बृहस्पतिवार का पंचांग, Brahaspativar ka panchang,

  • Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।

* शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
* वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
* नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
* योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
* करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।

इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
जानिए आज गुरुवार का पंचांग, Guruwar Ka Panchag,

मंगल श्री विष्णु मंत्र :-

मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥

आज का पंचांग, aaj ka panchang, गुरुवार का पंचाग, Guruvar Ka Panchag,

गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag,

19 मार्च 2026 का पंचांग, 19 March 2026 Ka Panchang,


  • गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 19 मार्च 2026 का पंचांग,
  • दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
  • गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए ।

    गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
  • गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
    इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।

    ऐसा होगा हिंदू नव संवत्सर, हिन्दू नव वर्ष के राजा और मंत्री होंगे यह देवता,
  • गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।
    इस उपाय को करने से कार्यो में अड़चने दूर होती है, भाग्य चमकने लगता है, बृहस्पति देव की कृपा मिलती है।

यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।
और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।

गुरुवार को विष्णु जी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, गुरुवार को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ परम फलदाई है

इस बार नवरात्री में माँ दुर्गा अपने इस वाहन पर सवार होकर आएगी और ऐसा रहेगा उसका फल, 

  • *विक्रम संवत् 2083,
  • * शक संवत – 1947,
    *कलि संवत 5127,
    * अयन – उत्तरायण,
    * ऋतु – बसंत ऋतु,
    * मास – चैत्र माह
    * पक्ष – शुक्ल पक्ष
    *चंद्र बल – वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर, मीन,

गुरुवार को बृहस्पति देव की होरा :-

प्रात: 6.26 AM से 7.27 AM तक

दोपहर 01.29 PM से 2.30 PM तक

रात्रि 20.30 PM से 9.30 PM तक

आज गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा के समय दाहिने हाथ की तर्जनी ऊंगली ( अंगूठे के बगल वाली उंगली ) के नीचे गुरु पर्वत और उस पूरी ऊंगली पर बृहस्पति देव के मंत्र का जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य ) I

गुरुवार को बृहस्पति की होरा में अधिक से अधिक बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करें । शिक्षा, मान – सम्मान, व्यापार, कारोबार, नए कार्यो के प्रारम्भ के लिए गुरुवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा में बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

बृहस्पति देव के मन्त्र

ॐ बृं बृहस्पतये नमः।। अथवा

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः।।


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  • तिथि (Tithi) :- अमावस्या 06.42 AM तक तत्पश्चात प्रतिपदा
  • तिथि का स्वामी – अमावस्या तिथि के स्वामी पितृ देव जी और प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव जी है।
  • आज से अति पुण्य दायक चैत्र नवरात्री प्रारम्भ हो रहे है । नवरात्री के इन 9 दिनों में प्रतिदिन माँ दुर्गा जी के अलग अलग शक्ति रूपों की आराधना की जाती है, मान्यता है कि इन 9 दिनों में माता दुर्गा जी के रूपों की आराधना से जीवन के सभी कष्ट दूर होते है, समस्त मनोकामनाएं निश्चित ही पूर्ण होती है ।
  • अमावस्या तिथि का प्रारम्भ बुधवार 18 मार्च को सुबह 8 बजकर 25 मिनट से हो रहा है जो गुरुवार 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 42 मिनट तक रहेगी । इसके बाद चैत्र प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ हो जाएगी ।
  • इस बार अमावस्या और प्रतिपदा दोनों तिथियों में सूर्योदय का मान नहीं मिल रहा है, इसलिए अमावस्या का स्नान व दान तथा नवरात्रि में घट स्थापना और माँ शैलपुत्री की पूजा गुरुवार 19 मार्च को ही की जाएगी ।
  • इस बार वर्ष 2026 में चैत्र प्रतिपदा तिथि का क्षय हो रहा है अमावस्या तिथि 19 मार्च गुरुवार को प्रातः 06:42 तक रहेगी, तत्पश्चात 19 मार्च गुरुवार को ही प्रातः 06:41 से चैत्र प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ हो जाएगी जो शुक्रवार 20 मार्च की सुबह सूर्योदय से पूर्व ही 05:25 पर समाप्त जाएगी ।
  • चूँकि गुरुवार 19 मार्च को ही सम्पूर्ण दिन भर चैत्र प्रतिपदा का मान रहेगा इसलिए नवरात्री का प्रारम्भ, नवरात्री में कलश स्थापना गुरुवार 19 मार्च को करना शास्त्र सम्मत होगा ।
  • नवरात्रि के प्रथम दिन भक्त गण अपने अपने घरो में कलश को स्थापित करके देवी दुर्गा का आह्वाहन करते हैं। कलश स्थापना में शुभ मुहूर्त, का बहुत ही महत्त्व है । यहाँ पर कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त दिए गए है जिसके अनुसार कलश की स्थापना करना अत्यंत मंगलकारी रहेगा ।
  • इस वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्री गुरुवार से शुरू हो रहे हैं, इसलिए माँ दुर्गा जी डोली / पालकी पर सवार होकर आएंगी जो शुभ नहीं है, अतिरिक्त सावधानी रखनी होगी, उत्पात, युद्ध, प्राकृतिक आपदाएं और महामारी की आशंका है,
  • लेकिन नवरात्री के अंत में माँ हाथी पर सवार होकर प्रस्थान करेंगी । शास्त्रों में देवी की हाथी की पालकी को बहुत शुभ माना गया है ।
  • नवरात्री के पहले दिन माँ शैलपुत्री की आराधना की जाती हैं। ये ही नवदुर्गाओं में माँ दुर्गा का पहला स्वरूप हैं । पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम ‘शैलपुत्री’ पड़ा।
  • नवरात्र-पूजन में प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है। मां शैलपूत्री सौभाग्‍य का प्रतीक मानी गयी हैं।
  • माँ शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में कमल-पुष्प सुशोभित है। देवी का वाहन बैल है। मां शैलपुत्री के मस्तक पर अर्ध चंद्र विराजित है। माता शैलपुत्री मूलाधार चक्र की देवी मानी जाती हैं।
  • अपने पूर्व जन्म में ये सती के रूप में प्रजापति दक्ष की कन्या के रूप में उत्पन्न हुई थीं, उस जन्म में सती माता का विवाह भगवान शंकर जी से हुआ था।
  • पूर्वजन्म की भाँति इस जन्म में भी ‘शैलपुत्री’ देवी का विवाह भी शंकरजी से ही हुआ। अर्थात इस जन्म में भी वे शिवजी की ही अर्द्धांगिनी बनीं।
  • ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मां शैलपुत्री चंद्रमा के दोष को दूर करती हैं। जिन लोगों का चंद्रमा कमजोर है, उन्हें माता के शैलपुत्री स्वरूप की आराधना करनी चाहिए।
  • आज माता के दिव्य मन्त्र – ॐ शं शैलपुत्री देव्यै: नम:। की एक माला का जप अवश्य ही करना चाहिए ।
  • पहला नवरात्र के दिन मां शैलपुत्री को गाय के घी भोग लगाने चाहिए, इससे आरोग्य की प्राप्ति होती है ।

ऐसे करें नवरात्री में कलश की स्थापना माँ दुर्गा की बरसेगी असीम कृपा

जानिए अपने दिल की कैसे करे देखभाल, दिल की बीमारी के आसान किन्तु बहुत ही अचूक उपाय

चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा के दिन से हिन्दु नव वर्ष अर्थात हिन्दु नव संवत्सर की शुरुआत मानी जाती है । धार्मिक ग्रंथो में इस दिन को बहुत पुण्यदायक , शुभ एवं महत्वपूर्ण माना गया है ।

‘चैत्रे मासि जगद ब्रह्मा ससर्ज प्रथमे अहनि,
शुक्ल पक्षे समग्रेतु तदा सूर्योदये सति’

 ब्रह्म पुराण में लिखे इस श्लोक के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पास के सूर्योदय पर सृष्टि के रचियता भगवान ब्रह्माजी ने इस सृष्टि की रचना की थी और इसी दिन से नव संवतसर, nav samvatsar, प्रारम्भ होता है ।

इस वर्ष गुरुवार 19 मार्च से विक्रम संवत 2083 का आरम्भ होगा। इस नव संवत्सर का नाम ‘रौद्र’ है।

हिंदू पंचांग में कुल 60 संवत्सर होते हैं, जिनमें से प्रत्येक का एक विशिष्ट नाम होता है। ‘रौद्र’ संवत्सर लगभग 60 वर्षों के बाद दोबारा आता है।

ज्योतिष गणना के अनुसार, संवत 2083 के राजा ‘गुरु’ (बृहस्पति) और मंत्री ‘मंगल’ होंगे।

महत्व: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। इसी दिन से चैत्र (वासंतिक) नवरात्र भी शुरू होते हैं।

महाराष्ट्र में हिन्दू नववर्ष या नव-सवंत्सर के आरंभ के दिन को गुड़ी पड़वा के रूप में पूर्ण हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाया जाता है।

शास्त्रों के अनुसार सतयुग का आरम्भ भी इसी तिथि से माना जाता है ।

मान्यता है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही भगवान श्री विष्णु जी का मत्स्य अवतार हुआ था ।

इस दिन घर की छत पर ऊँचा लाल /  केसरीया ध्वज अवश्य लगवाएं । यह ॐ , दुर्गा जी , हनुमान जी किसी का भी हो सकता है ।

इस दिन घर के बाहर दोनों तरफ घी में सिंदूर मिलाकर ॐ , स्वस्तिक का चिन्ह बनायें अथवा इनके अच्छे से स्टिकर लाकर लगाएं ।

यह है नवरात्री में कलश स्थापना का सर्वोत्तम मुहूर्त, इस समय घर पर कलश की स्थापना तो माँ दुर्गा की मिलेगी असीम कृपा,

नक्षत्र (Nakshatra) – उत्तर भाद्रपद 04.52 AM शुक्रवार 20 मार्च तक

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी –   उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के देवता अहिर्बुंधन्य देव, स्वामी शनि देव जी एवं वहीं राशि स्वामी गुरु है ।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र 27 नक्षत्रों में 26 वां नक्षत्र है। उत्तर भाद्रपद नक्षत्र वैवाहिक आनंद, सुख समृद्धि और शक्ति का प्रतीक है। उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र  प्रकाश की किरण, संसार को खुशियों का आशीर्वाद देता है।
शनि और गुरु में शत्रुता है। और उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के जातको पर जीवन भर शनि और गुरु दोनों का ही प्रभाव रहता है ।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र का आराध्य वृक्ष : नीम तथा इस नक्षत्र का स्वाभाव शुभ माना गया है। उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र सितारे का लिंग पुरुष है।

इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक पर जीवन भर शुक्र एवं राहु ग्रह का प्रभाव बना रहता है।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति धार्मिक, कुशल वक्ता,  यशस्वी, परोपकारी और धनवान होते है।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्तियों को सन्तान पक्ष से सुख की प्राप्ति होती है। इनका पारिवारिक जीवन भी समान्यता सुखमय ही रहता है।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति को हनुमान जी की आराधना करनी फलदाई कही गयी है , इनको पीपल की सदैव  /  विशेषकर शनिवार के दिन  तो अवश्य ही सेवा करनी चाहिए ।

उत्तर भाद्रपद नक्षत्र के लिए भाग्यशाली अंक क्या हैं 6 और 8, भाग्यशाली रंग बैगनी तथा भाग्यशाली दिन  गुरुवार, मंगलवार और शुक्रवार होता है ।

उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को इस नक्षत्र देवता के नाममंत्र:- ॐ अहिर्बुंधन्याय नमःl  मन्त्र की माला का जाप अवश्य करना चाहिए । ऐसा करने से कार्यो में मनवांछित लाभ की प्राप्ति होती है ।



कैसा भी सिर दर्द हो उसे करें तुरंत छूमंतर, जानिए सिर दर्द के अचूक पा

योग :- शुक्ल 01.17 AM शुक्रवार 20 मार्च तक

योग के स्वामी, स्वभाव :-  शुक्ल  योग की स्वामी देवी पार्वती जी एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है ।

प्रथम करण :- नाग 06.52 AM तक

करण के स्वामी, स्वभाव :-  नाग करण के स्वामी नागदेव और स्वभाव क्रूर है ।

द्वितीय करण :- किस्तुघ्न 17.55 PM तक तत्पश्चात बव

करण के स्वामी, स्वभाव :-       किस्तुघ्न करण के स्वामी मरुत और स्वभाव क्रूर है ।

ब्रह्म मुहूर्त : 4.57 AM से 5.46 AM तक

विजय मुहूर्त : 14.30 PM से 15.17 PM तक

गोधूलि मुहूर्त : 18.25 PM से 18.49 PM तक

अमृत काल : 17.36 PM से 19.23 PM तक

  • दिशाशूल (Dishashool)– बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – गुलिक 09:30 AM से 11 AM बजे तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)– दिन – 1:30 PM से 3:00 PM तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 06:26
  • सूर्यास्त – सायं 18.32
  • विशेष – अमावस्या के दिन तुलसी के पत्ते, बिल्व पत्र या किसी भी तरफ के फूल पत्तो को बिलकुल भी नहीं तोडऩा चाहिए।
  • अमावस्या,  श्राद्ध और व्रत के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना,  सहवास करना निषिद्ध है। 
  • प्रतिपदा के दिन कद्दू  /  पेठे का सेवन नहीं करना चाहिए, प्रतिपदा के दिन इनका सेवन करने से धन की हानि होती है । 
  • पर्व त्यौहार– चैत्र नवरात्री का पहला दिन जय माँ शैलपुत्रीहिन्दू नवसंवतर
  • मुहूर्त (Muhurt) 

अवश्य पढ़ें :- अगर गिरते हो बाल तो ना होएं परेशान तुरंत करें ये उपाय, जानिए बालो का गिरना कैसे रोकें,

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )
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कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, kalash sthapna ka shubh muhurat 2026


कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, kalash sthapna ka shubh muhurat 2026

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 2026, kalash sthapna ka shubh muhurat,

नवरात्रि हिन्दुओं का एक प्रमुख पर्व है यह प्रत्येक वर्ष दो बार एक बार चैत्र माह में और दूसरे बार अश्विन माह में आते है।

इसके अतिरिक्त माघ माह और आषाढ़ माह में भी नवरात्री आते है जिन्हे गुप्त नवरात्रि कहा जाता है।

इस वर्ष हिन्दू नव संवतर और चैत्र नवरात्रि की तिथि को लेकर बहुत असमंजसय की स्थिति बनी है, नवरात्री में कलश स्थापना गुरुवार 19 मार्च को किया जायेगा या शुक्रवार 20 मार्च को इसके लिए जमानस में बहुत संशय की स्तिथि है ।

पंचांग अनुसार चैत्र मास की अमावस्या तिथि बुधवार 18 मार्च को प्रातः 07:30 से प्रारंभ होकर 19 मार्च गुरुवार को प्रातः 06:40 तक रहेगी, तत्पश्चात 19 मार्च गुरुवार को ही प्रातः 06:41 से चैत्र प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ हो जाएगी जो शुक्रवार 20 मार्च की सुबह सूर्योदय से पूर्व ही 05:25 पर समाप्त जाएगी,

अर्थात इस बार प्रतिपदा तिथि का क्षय हो रहा है चूँकि गुरुवार 19 मार्च को ही सम्पूर्ण दिन भर चैत्र प्रतिपदा का मान रहेगा इसलिए नवरात्री का प्रारम्भ, नवरात्री में कलश स्थापना गुरुवार 19 मार्च को करना शास्त्र सम्मत होगा ।

नवरात्रि के प्रथम दिन भक्त गण अपने अपने घरो में कलश को स्थापित करके देवी दुर्गा का आह्वाहन करते हैं। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, kalash sthapna ka shubh muhurat, का बहुत ही महत्त्व है ।

मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना, shubh muhurat men kalash ssthapna करने से जीवन के सभी संकट दूर होते है, भक्तो पर माँ की असीम कृपा बनी रहती है ।

हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नौ दिनों तक शरद नवरात्री में माँ दुर्गा की आराधना की जाती है।

ब्रह्मा जी ने देवी दुर्गा को प्रसन्न करने की सर्वोत्तम विधि कन्या पूजन को ही है बताया, इस तरह से करें कन्या पूजन भाग्य हीरे की तरह लगेगा चमकने

चैत्र नवरात्री 2026

नवरात्रि प्रारंभ – गुरुवार 19 मार्च 2026 से ,

नवरात्री समाप्त – शुक्रवार 27 मार्च तक ,


नवरात्रि के नौ दिनों में प्रत्येक दिन देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि नवरात्रि पर देवी दुर्गा नौ दिनों तक पृथ्वी पर वास करती हैं, और अपने भक्तों से प्रसन्न होकर उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।

नवरात्री के यह 9 दिन जिसे दुर्गा पूजा (Durga Puja) के नाम से भी जाना जाता है अति सिद्ध, शक्तिशाली, पुण्यदायक माने जाते है ।

अवश्य पढ़ें :-  अमावस्या पर ऐसे करें अपने पितरो को प्रसन्न, जीवन से सभी अस्थिरताएँ होंगी दूर,  

शास्त्रों के अनुसार भगवान श्री राम ने भी लंका पति रावण से युद्ध में विजय प्राप्ति के लिए लंका पर चढ़ाई करने से पहले इन्ही दिनों में देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए माँ की आराधना की थी।

नवरात्रि के पहले दिन माता के भक्त अपने अपने घरो, अपने कारोबार में कलश की स्थापना करते है। शास्त्रों के अनुसार कलश को सदैव शुभ मुहूर्त में ही स्थापित करना चाहिए । प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के साथ ही नौ दिनों तक चलने वाला नवरात्रि का पर्व आरंभ हो जाता है।

जानिए इस वर्ष कलश की स्थापना किस मुहूर्त में करनी चाहिए ।

नवरात्री में घर, कारोबार में इस विधि से करें कलश की स्थापना, अवश्य जानिए कलश स्थापना की सही और बहुत ही आसान विधि

नवरात्री में कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, Navratri me kalash sthapna ka shubh muhurat,

प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ – गुरुवार 19 मार्च को प्रातः 06:41 AM से

प्रतिपदा तिथि समाप्त – शुक्रवार 20 मार्च को सुबह सूर्योदय से पूर्व 05:25 तक

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त का समय .

शरद नवरात्री में घटस्थापना के लिए शुभ समय

नवरात्रि में कलश स्थापना का सोमवार को प्रात: 06.09 मिनट से लेकर प्रात: 07.29 मिनट तक घट स्थापना का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा ।

19 मार्च गुरुवार को सामान्यता पूरे दिन कलश की स्थापना की जा सकती है, लेकिन हम यहाँ पर शुभ लग्न, शुभ चौघड़ियों के कुछ मुहूर्त दे रहे जिसके अनुसार कलश की स्थापना करना अत्यंत शुभ रहेगा ।

नवरात्रि में कलश स्थापना का सोमवार को प्रात: 06.09 मिनट से लेकर प्रात: 07.29 मिनट तक घट स्थापना का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा ।

प्रातः 9 से 10:50 स्थिर वृष लग्न में।

मध्याह्न 11:40 से 12:20 अभिजीत मुहूर्त में।

दोपहर 12:01 से 01:30 लाभ की चौघड़िया में ।

इसके अतिरिक्त 03:22 से 05 बजे तक स्थिर सिंह लग्न में भी कलश की स्थापना कर सकते है इसके उपरांत कलश स्थापना करना उचित नहीं है।

कुल मिलाकर गुरुवार को राह काल का समय 👹 दोपहर 01.30 से 3.02 ❌ को छोड़कर कभी भी कलश की स्थापना 🌟 कर सकते है I

नवरात्रि के पर्व में माँ दुर्गा की सवारी का विशेष महत्व है। नवरात्रि के प्रथम दिन माँ की सवारी से ज्ञात होता है कि अगली नवरात्री तक का समय कैसा रहेगा ।

शास्त्रों के अनुसार, हर नवरात्रि में मां दुर्गा अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर आती हैं और विदाई के समय में भी माता का वाहन अलग होता है।

इस वर्ष 2026 में चैत्रनवरात्री गुरुवार से शुरू हो रहे हैं, इसलिए माँ दुर्गा जी डोली / पालकी पर सवार होकर आएंगी जो शुभ नहीं है, अतिरिक्त सावधानी रखनी होगी, उत्पात, युद्ध, प्राकृतिक आपदाएं और महामारी की आशंका है,
लेकिन नवरात्री के अंत में माँ हाथी पर सवार होकर प्रस्थान करेंगी । शास्त्रों में देवी की हाथी की पालकी को बहुत शुभ माना गया है ।

माता की हाथी की सवारी सुख समृद्धि, हर्ष उल्लास का प्रतीक है I

नवरात्रि के प्रत्येक दिन का एक रंग माना गया है। मान्यता है कि नवरात्री में दिन के अनुसार इन रंगों का उपयोग करने, उस रंग के कपडे पहनने से सुख सौभाग्य प्राप्त होता है।

प्रतिपदा- पीला रंग,
द्वितीया- हरा रंग,
तृतीया- भूरा रंग,
 ग्रे रंग,
चतुर्थी- नारंगी रंग,
पंचमी- सफेद रंग,
षष्टी- लाल रंग,
सप्तमी- नीला रंग,
अष्टमी- गुलाबी रंग,
नवमी- बैंगनी रंग,

नवरात्री में करनी है कलश की स्थापना, रखने है ब्रत, करना है माता को प्रसन्न तो ऐसे करें नवरात्री की तैयारी,

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Goddess Durga


ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
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बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang, 18 मार्च 2026 का पंचांग,

बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang, 18 मार्च 2026 का पंचांग,


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पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi) 2:- वार (Day) 3:- नक्षत्र (Nakshatra) 4:- योग (Yog) 5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए बुधवार का पंचांग, Budhvar Ka Panchang, आज का पंचांग, aaj ka panchang,

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अब अगर आप 16 सालो से निरंतर बनते, भेजते पंचांग को पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 94252 03501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

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हम अपने व्हाट्स अप नंबर के स्टेटस पर नित्य सुबह पंचांग को लगा देते है आप वहां से भी पढ़ सकते है और पंचांग को अपना व्हाट्स अप स्टेटस पर लगा सकते है जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग पंचांग का लाभ उठा सकें।

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आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
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बुधवार का पंचांग (Budhwar Ka Panchang)


18 मार्च 2026 का पंचांग, ( Panchang ), 18 March 2026 ka Panchang,

गणेश गायत्री मंत्र :
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।

।। आज का दिन मंगलमय हो ।।

* दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।

इस बार नवरात्री में माँ दुर्गा अपने इस वाहन पर सवार होकर आएगी और ऐसा रहेगा उसका फल,


बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

इस उपाय से शरीर रहेगा निरोगी, शक्ति रहेगी भरपूर, बुढ़ापा पास भी नहीं आएगा, जानिए रोगनाशक दिव्य आहार,

* बुधवार को सभी ग्रहो के राजकुमार बुध देव की आराधना करने से ज्ञान मिलता है, वाकपटुता में प्रवीणता आती है, धन लाभ होता है ।

बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाने तथा रात को सोते समय फिटकरी से दाँत साफ करने से आर्थिक पक्ष मजबूत होता है ।

अवश्य पढ़ें :- ऐसा होगा हिंदू नव संवत्सर, हिन्दू नव वर्ष के राजा और मंत्री होंगे यह देवता,

*विक्रम संवत् 2082,
*शक संवत – 1947
*कलि संवत 5127
*अयन – उत्तरायण
*ऋतु – बसंत ऋतु
*मास – चैत्र माह
*पक्ष – कृष्ण पक्ष
*चंद्र बल – मेष, वृषभ, सिंह, कन्या, धनु, कुम्भ,

बुधवार को बुध की होरा :-

प्रात: 6.28 AM से 7.28 AM तक

दोपहर 01.30 PM से 2.30 PM तक

रात्रि 20.30 PM से 21.30 PM तक

बुधवार को बुध की होरा में हाथ की सबसे छोटी उंगली और बुध पर्वत को हल्के हल्के रगड़ते हुए अधिक से अधिक बुध देव के मन्त्र का जाप करें ।

ज्योतिष, पढ़ाई, लिखाई, सीखने, वाकपटुता, अपना प्रभाव डालने और व्यापार में सफलता के लिए बुध की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

बुधवार के दिन बुध की होरा में बुध देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

अवश्य पढ़ें :- पूरे वर्ष निरोगी काया के लिए सर्दियों में सेवन करें ये आहार,

बुध देव के मन्त्र

“ॐ बुं बुधाय नमः” अथवा

“ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।।”

आज इस तरह से मनाये हिन्दू नव संवत्सर पूरे वर्ष मिलेंगे शुभ समाचार,

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  • तिथि (Tithi) – चतुर्दर्शी 08.25 AM तक तत्पश्चात अमावस्या,
  • तिथि के स्वामी – अमावस्या चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी और अमावस्या तिथि के स्वामी पितृ देव जी है ।

ज हिन्दू वर्ष 2082 संवत की अंतिम अमावस्या, चैत्र माह की अमावस्या / भूतड़ी अमावस्या है । कल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नया हिन्दू वर्ष, चैत्र नवरात्री का प्रारम्भ हो जायेगा । अमावस्या तिथि के स्वामी पितृ देव को माना गया है।

यह अमावस्या पितरो की कृपा प्राप्त करने, उन्हें प्रसन्न करने के लिए विशेष मानी गई है ।

पंचांग के अनुसार बुधवार 18 मार्च को चैत्र माह की अमावस्या तिथि सुबह 8 बजकर 25 मिनट पर प्रारम्भ होगी जो गुरुवार 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। ऐसे में चैत्र माह की अमावस्या बुधवार 18 मार्च को मनाई जाएगी।

पीपल के पेड़ पर पितरों का वास माना गया है। अमावस्या के दिन सुबह के समय लोहे के बर्तन में, दूध, पानी, काले तिल, शहद एवं जौ मिला कर समस्त सामग्री पीपल की जड़ में अर्पित करके पीपल की 7 परिक्रमा करें, तथा इस दौरान “ॐ सर्व पितृ देवताभ्यो नमः” मंत्र का जाप भी लगातार करते रहें ।

इस उपाय को करने से पितृ प्रसन्न होते है, उनका आशीर्वाद मिलता है ।

अमावस्या तिथि को पितरों के तर्पण, दान के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है । इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करके भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य देकर अपने पितरों की शांति के लिए उनका तर्पण करते हैं ।

आज पितरों की कृपा प्राप्त करने के लिए घर पर ब्राह्मण को भोजन कराएं एवं उसे यथा शक्ति दान – दक्षिणा प्रदान करें ।

अमावस्या के दिन घी, नमक, चावल, चीनी, आटा, सत्तू, काले तिल, अनाज, वस्त्र, आदि दक्षिणा के साथ योग्य ब्राह्मण को दान में अवश्य ही दें , ऐसा करने से पितरो का आशीर्वाद मिलता है ।

अमावस्या के दिन घर पर खीर अवश्य बनायें फिर उसमें थोड़ी सी खीर दोने पर निकाल कर पित्रों के निमित पीपल पर रख आएं ।

हर अमावस्या को गहरे गड्ढे या कुएं में एक चम्मच दूध डालें इससे कार्यों में बाधाओं का निवारण होता है ।

इसके अतिरिक्त अमावस्या को आजीवन जौ दूध में धोकर बहाएं, आपका भाग्य सदैव आपका साथ देगा ।

अमावस्या पर तुलसी के पत्ते या बिल्व पत्र बिलकुल भी नहीं तोडऩा चाहिए। अमावस्या पर देवी-देवताओं को तुलसी के पत्ते और शिवलिंग पर बिल्व पत्र चढ़ाने के लिए उन्हें एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।

ऐसे करें नवरात्री में कलश की स्थापना माँ दुर्गा की बरसेगी असीम कृपा

इस तरह से मनाएं जन्माष्टमी का पर्व जीवन में लग जायेगा सुखो का अम्बार 

नक्षत्र (Nakshatra) – पूर्व भाद्रपद 05.21 AM गुरुवार 19 मार्च तक

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी-   पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के देवता अजैकपाद तथा स्वामी देवगुरू बृहस्पति हैं ।

नक्षत्रों की श्रेणी में पूर्वाभाद्रपद 25 वां नक्षत्र है। पूर्वाभाद्रपद का अर्थ है ‘पहले आने वाला भाग्यशाली पैरों वाला व्यक्ति’। 

पूर्व भाद्रपद नक्षत्र में जन्मे जातक वाकपटु होते है उन्हें भाषण कला में निपुणता होती है ।

पूर्व भाद्रपद नक्षत्र तारे का लिंग पुरुष है। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का आराध्य वृक्ष: आंबा, आम, तथा स्वाभाव उग्र होता है ।

इस नक्षत्र में जन्मे जातक आशावादी, ईमानदार, परोपकारी, मिलनसार, भरोसेमंद, धनवान और आत्मनिर्भर व्यक्ति होते हैं।

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक विपरीत परिस्थितियों से घबराते नहीं है, वरन अपने सकारत्मक रवैये के कारण यह हर परिस्तिथि को अपने अनुकूल करने की क्षमता रखते है । सामान्यता यह  छल कपट, बेईमानी और नकारात्मक विचारो से दूर रहते हैं। 

पूर्व भाद्रपद नक्षत्र के लिए भाग्यशाली अंक 3 और 8, भाग्यशाली रंग स्लेटी,  भाग्यशाली दिन शनिवार और बुधवार है ।

पूर्व भाद्रपद नक्षत्र में जन्मे जातको को नित्य तथा अन्य सभी को आज  नक्षत्र देवता नाममंत्र:- “ॐ अजैकपदे नमः” मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करना चाहिए।

पूर्वभाद्रपद नक्षत्र के जातको को भगवान शंकर की आराधना करनी चाहिए। उन्हें भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप करना चाहिए , इससे जीवन में सभी संकट दूर रहते है ।

इस नक्षत्र में जन्मे जातको को काले कपड़े एवं चमड़े से बनी वस्तुओं का प्रयोग करने से बचना चाहिए ।

जरूर पढ़े :-  यह है नवरात्री में कलश स्थापना का सर्वोत्तम मुहूर्त, इस समय घर पर कलश की स्थापना तो माँ दुर्गा की मिलेगी असीम कृपा,

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  • योग (Yog) – शुभ 04.21 AM गुरुवार 19 मार्च तक
  • योग के स्वामी, स्वभाव :-   शुभ योग की स्वामी माँ लक्ष्मी जी और स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है । । 
  • प्रथम करण : – शकुनि 08.25 AM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-   शकुनि करण की स्वामी माँ काली और स्वभाव क्रूर है ।
  • दिशाशूल (Dishashool)- बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।

    इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – बुधवार का गुलिक काल 10:30 AM से 12 PM बजे तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal) : – बुधवार का राहुकाल दिन 12:00 PM से 1:30 PM तक ।
  • सूर्योदय – प्रातः 6.28 AM
  • सूर्यास्त – सायं 18.31 PM
  • विशेष – अमावस्या के दिन तुलसी के पत्ते, बिल्व पत्र या किसी भी तरफ के फूल पत्तो को बिलकुल भी नहीं तोडऩा चाहिए।
  • अमावस्या,  श्राद्ध और व्रत के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना,  सहवास करना निषिद्ध है। 
  • मुहूर्त :-
  • पर्व त्यौहार – चैत्र माह की अमावस्या

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हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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18 मार्च 2026 का पंचांग, 18 March 2026 ka panchang, aaj ka panchang, aaj ka rahu kaal, aaj ka shubh panchang, Budhwar Ka Panchang, budhwar ka rahu kaal, budhwar ka shubh panchang, kal ka panchang, panchang, Wednesday ka panchang, आज का पंचांग, आज का राहुकाल, आज का शुभ पंचांग, कल का पंचांग, पंचांग, बुधवार का पंचांग, बुधवार का राहु काल, बुधवार का शुभ पंचांग, वेडनेस डे का पंचांग,

ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय 
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )
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हे माँ आदि शक्ति आप अपने भक्तो पर सदैव अपनी कृपा दृष्टि बनाये रखते हुए उनकी समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करे ।

नवरात्री में कलश स्थापना Navratri me kalash sthapna का बहुत महत्व है। नवरात्रि Navratri की प्रतिपदा के दिन सभी भक्त श्रद्धानुसार अपने घर / कारोबार में घट अर्थात कलश स्थापना, Kalash sthapna करते हैं।

शास्त्रो के अनुसार शुभ मुहूर्त Shubh Muhurat एवं विधि विधान से नवरात्र में कलश स्थापना करने, Navratri me kalash sthapna से माँ अति प्रसन्न होती है।

कई बार ऐसा देखा जाता है कि भक्त पूरी श्रद्धा से माँ की आराधना करते है लेकिन उन्हें कलश स्थापना Kalash sthapna की सही विधि नहीं मालूम होती है, यहाँ पर हम आपको कलश स्थापना Kalash sthapna की आसान विधि बता रहे है,

नवरात्र में कलश स्थापना कैसे करें, navratri me kalash sthapna kaise karen,

* नवरात्र के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त Shubh Muhurat में घर के मंदिर में अथवा घर के ईशान कोण या पूर्व दिशा में लकड़ी की चौकी पर लाल अथवा पीले वस्त्र बिछाकर उसके ऊपर माँ दुगा की मूर्ती या तसवीर को स्थापित करना चाहिए।

* प्रतिपदा के दिन सुबह शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना, Shubh Muhurat me Kalash Sthapna के लिए सबसे पहले जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र लें, इस पात्र को स्थापित करने से पहले इसके नीचे सप्तधान्य बिखेर दें I

फिर इस पात्र में मिट्टी की एक परत बिछाकर फिर एक जौ की परत बिछाएं।
इसके ऊपर फिर मिट्टी की और उसके बाद एक परत जौ की बिछाएं ततपश्चात उसको जल से अच्छी तरह से गीला करके उसके पश्चात उसपर सोने, तांबे अथवा मिट्टी के कलश की विधिपूर्वक स्थापित करें।

* (इस बात का विशेष ध्यान दे कि जो कलश आप स्थापित कर रहे है वह मिट्टी, पीतल , तांबा, चाँदी या सोने का होना चाहिए। लेकिन लोहे या स्टील के कलश का प्रयोग बिलकुल भी प्रयोग नहीं करे ।)

कलश को गंगा जल से भरकर उसमें पंचरत्न, रोली, मीठा, चाँदी का सिक्का डालकर उसपर आम के पत्ते लगाकर कलश को ढक्कन से ढक दें।

* फिर उस ढक्कन में अक्षत भरकर उसपर जटा वाला नारियल किसी लाल चुनरी में कलावा से लपेटकर उस पर रख दें । कलश के कंठ पर मोली अवश्य ही बाँध दें।

इस बात का विशेष ध्यान दे की कलश kalash पर रखे नारियल का मुँह किस ओर हो…….

कलश के ऊपर जो नारियल रखा जाता है उसे भगवान गणेश का प्रतीक भी माना जाता है,

नारियल का मुँह उस तरफ होता है, जिस ओर से वह पेड़ की टहनी से जुड़ा होता है। शास्त्रनुसार नारियल का मुख नीचे की तरफ रखने से शत्रु में बढ़ते है।
नारियल का मुख ऊपर की तरफ रहने से रोग प्रबल होते हैं, नारियल का मुख पूर्व की तरफ रखने से धन की हानि होती है।
लेकिन नारियल का मुख साधक की तरफ रहने से शुभ फलो की प्राप्ति होती है,
इसलिए नारियल का मुँह सदैव भक्त की तरफ ही होना चाहिए।

* इसके पश्चात् सभी देवी देवताओं का कलश में आवाहन करें। “हे माँ दुर्गा और सभी पूज्य देवी देवता आप सभी नवरात्र Navratri के इन नौ दिनों के लिए हमारे यहाँ पर पधारें।” इसके पश्चात् दीपक , धूप, अगरबत्ती जलाकर माँ की तस्वीर एवं कलश का पूजन करें। फिर माँ को फूल, माला, लौंग इलायची, नैवेद्य,पंचमेवा, इत्र, शहद, फल मिठाई आदि भी अवश्य ही अर्पित करें ।

* नवरात्र Navratri के दौरान यदि हो सके तो कलश Kalash के सामने अखंड दीप भी जलाएं।
यदि घी का दीपक लगाएं तो ध्‍यान रखें कि उसे माता की मूर्ति के दायीं ओर रखें और यदि तेल का दीपक जला रहे हैं, तो उसे मूर्ति के बायीं ओर रखें।

दीपक की स्थापना करते समय ध्यान रहे की दीपक के नीचे “चावल” अथवा “सप्तधान्य” रखकर उसके ऊपर दीपक को स्थापित करें ।

दीपक के नीचे “चावल” रखने से माँ लक्ष्मी की पूर्ण कृपा प्राप्त होती है तथा दीपक के नीचे “सप्तधान्य” रखने से समस्त प्रकार के कष्टों से छुटकारा मिलता है। 

नवरात्री Navratri में माँ के आगे जो दीपक जलाएं उसमें रुई की जगह यदि सूती लाल कलावे का प्रयोग किया जाय तो माँ की शीघ्र ही कृपा प्राप्त होती है इसलिए दीपक deepak की बत्ती में सूती लाल कलावे का प्रयोग करें ।

* नवरात्रे Navratre की अष्टमी या नवमी के दिन दस साल से कम उम्र की नौ कन्याओं और एक लडके को भोजन करा कर उन्हें दक्षिणा उपहार देकर उन कंजकों से उगे हुए जौ के बीच स्थापित कलश को अपने स्थान से हिलवा देना चाहिए, उसके बाद कुछ जौं को जड सहित उखाडकर घर की तिजौरी या धन स्थान पर रखना चाहिए इससे घर में स्थाई सुख समृ्द्धि का वास होता है ।

* नवरात्री के अंतिम दिन कलश के पानी को पूरे घर में छिडक देना चाहिए, इससे घर से अशुभ शक्तियां समाप्त होती है।
नारियल को तोड़कर माता दुर्गा के प्रसाद स्वरुप घर के सदस्यों के बीच में बाँट देना चाहिए।

* मिट्टी का बर्तन जिसमें जौ उगाई गयी थी उसे बची हुई जौ की घास के साथ संध्या से पहले किसी नदी में विसर्जित कर देना चहिये।

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<< जानिए नवरात्री में घट स्थापना का शुभ मुहूर्त

पं आचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )

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Published By : Memory Museum
Updated On : 2025-09-20 11:19:00 PM

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    नवरात्री की तैयारी, navratri ki taiyari, navratri 2025,

    सभी हिन्दु धर्म ग्रंथो में नवरात्री की बहुत महिमा बताई गई है । नवरात्री के नौ दिनों में भक्त गण सच्चे मन से माँ आदि शक्ति के विभिन्न रूपो की आराधना करते हुए माँ से अपने घर परिवार में आरोग्य, सुख-समृद्धि और समस्त सुखो के लिए प्रार्थना करते है।

    मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा से माँ की आराधना करते है माँ उनकी समस्त अभिलाषाएं अवश्य ही पूर्ण करती है । जो लोग इन दिनों ब्रत रखते है उन्हें पहले से ही नवरात्री की तैयारी, navratri ki taiyari, एवं ब्रत के कई नियमो का पालन करना होता है । 

    यह है नवरात्री में कलश स्थापना का सर्वोत्तम मुहूर्त, इस समय घर पर कलश की स्थापना तो माँ दुर्गा की मिलेगी असीम कृपा

    नवरात्री की कैसे करें तैयारी, navratri ki kaise karen taiyari,

    नवरात्री अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन शुरू होते है सामान्यता देखा जाता है कि नवरात्र के प्रथम दिन कलश स्थापना, जौ बोने के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त थोड़े समय के लिए ही मिल पाता है जिसमें हम जल्दी जल्दी करते हुए हड़बड़ा जाते है और कई बातो को भूल जाते है । 

    अतः  जो लोग घर में जौ बोते है उन्हें जौ बोने के लिए बर्तन एवं मिटटी की व्यवस्था एक दिन पहले ही कर लेनी चाहिए । 

    नवरात्र में पूजा सामग्री में कलश, जौ के लिए बर्तन , कलश के लिए आम के पत्ते, पंचरत्न, रोली, मीठा, चाँदी का सिक्का , जौ , तिल, , कमल गट्टा, शहद, गंगा जल, इत्र, सिंदूर, रोली, हल्दी की गाँठ, जायफल, सुपारी, पीला जनेऊ, लाल कलावा / मोली, कौड़ियाँ, पंचमेवा, मिश्री, मेवे, फल, मखाने, घी, कलश के ऊपर रखने वाला नारियल, पीले अक्षत, लकड़ी की चौकी, बिछाने के लिए लाल / पीला कपड़ा, लाल चुनरी , माँ के लिए वस्त्र, अर्पित करने के लिए सुहाग का सामान /चूड़ियाँ आदि जो भी खरीदना हो उसकी लिस्ट बना कर पहले ही खरीद कर रख लें ।  

    जिससे ऐन वक्त पर कुछ खोजना ना पड़े । पूजा के लिए पान के पत्ते और फूल / माला   भी एक रात पहले ही खरीद कर रख लेना चाहिए । 

    नवरात्री में घर के मंदिर में कलश स्थापना, जौ बोने से पहले मंदिर को अच्छी तरह से साफ करके उसे सजा लेना चाहिए । मंदिर की मूर्तियों / तस्वीरों को अच्छी तरह से साफ कर लेना चाहिए और उन्हें वस्त्र आदि पहना देना चाहिए । 

    नवरात्री में घर, कारोबार में इस विधि से करें कलश की स्थापना, अवश्य जानिए कलश स्थापना की सही और बहुत ही आसान विधि

    अधिकतर यह देखा जाता है कि भक्त गण यह कार्य नवरात्र के प्रथम दिन ही करते है जिसमें अच्छा समय लग जाता है और स्थापना का शुभ मुहूर्त नहीं मिल पाता है अतः मंदिर की साफ-सफाई, सजावट का कार्य एक दो दिन पूर्व में ही हर हालात में कर लेना चाहिए जिससे उस दिन जल्दबाजी और भूल-चूक ना हो । 

    जिन घरो में अखंड ज्योति जलाई जाती है वहाँ पर दीपक को पाहे ही अच्छी तरह से साफ कर लेना चाहिए, घी और दीपक को ढकने के लिए शीशे का इंतजाम भी पहले ही कर लेना चाहिए । 

    मान्यता है कि अखण्ड ज्योति में रुई की जगह लाल बत्ती का प्रयोग करना शुभ रहता है, ध्यान रहे लाल बत्ती सूती हो तभी वह लंबे समय तक जल पायेगी । दीपक के लिए सूती लाल बत्ती भी पहले से ही ले लेनी चाहिए ।  

    जो लोग नवरात्र में घर में कलश स्थापना करते  है, नवरात्री का ब्रत रखते है, उन्हें नवरात्री से पहले ही अपने घर की अच्छी तरह से साफ कर लेना चाहिए , विशेषकर  घर के मंदिर, रसोई और फ्रिज़ को बिलकुल साफ – सुथरा रखना चाहिए । वहाँ किसी भी प्रकार का प्याज़, लहसुन आदि ना रखे । 

    नवरात्र के ब्रत में भक्त गण फलाहार, फल आदि का सेवन करते है । आजकल बाजार में भी बनी बनाई ब्रत की नमकीन मिलती है , लेकिन उससे अच्छा है कि मखाने , मूंगफली, साबुत दाना आदि लेकर पहले से ही घर पर हल्के घी / तेल की  सेंधा नमक या बिना नमक की ब्रत की नमकीन बना लें । जिससे ब्रत में भूख लगने पर बिलकुल साफ और हल्का आहार प्राप्त हो सके । 

    नवरात्र में प्रतिदिन की पूजा में माँ को कुछ ना कुछ प्रशाद अवश्य ही चढ़ाना चाहिए । यह प्रशाद पंचमेवा, मिश्री, लौंग, इलाइची, मेवे, फल आदि हो सकते है , इन्हें भी पहले से ही खरीद कर रख लेना चाहिए । 

    नवरात्री में माँ दुर्गा की स्वरूप कन्याओं की इस तरह से पूजा, अवश्य जानिए नवरात्री में कन्या पूजन की सही विधि

    नवरात्री में माँ दुर्गा को नौ दिन अलग अलग भोग लगाने का विधान है , यदि आप भी माँ को प्रत्येक दिन शास्त्रो के अनुसार भोग लगाना चाहते है तो प्रतिदिन के भोग की व्यवस्था भी पूर्व में ही समय रहते कर लेनी चाहिए ।  

    नवरात्रि में मंदिरो में भजन कीर्तन होते रहते है, बहुत से लोग अपने घर पर भी माँ की भेंटो , भजन कीर्तन का आयोजन करते है, इससे वातावरण शुध्द होता है । नवरात्र में किसी भी दिन समय निकाल कर इन कीर्तन में अवश्य ही जाएँ अथवा अपने घर पर ही किसी म्युज़िक सिस्टम में ही सही नवरात्र में माता के गीत अवश्य ही चलाएं, भक्ति रस का आनंद लें । 

    नवरात्री के दिन बहुत ही सिद्ध और शक्ति संपन्न होते है, नवरात्री के इस उपाय से मिलेगी सभी कार्यों में श्रेष्ठ सफलता, जानिए नवरात्री के अचूक उपाय

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    Aacharya Mukti Narayan Pandey Adhyatma Jyotish paramarsh Kendra Raipur

    Shukrwar ka panchag, शुक्रवार का पंचांग, 20 मार्च 2026 का पंचांग,

    Shukrwar ka panchag, शुक्रवार का पंचांग, 20 मार्च 2026 का पंचांग, आप सभी को नवरात्री के दूसरे दिन की हार्दिक शुभकामनायें , जय माँ ब्रह्मचारि...