बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang, 12 अगस्त 2026 का पंचांग,
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पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi) 2:- वार (Day) 3:- नक्षत्र (Nakshatra) 4:- योग (Yog) 5:- करण (Karan)
पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए बुधवार का पंचांग, Budhvar Ka Panchang, आज का पंचांग, aaj ka panchang,
बुधवार का पंचांग (Budhwar Ka Panchang)
12 अगस्त 2026 का पंचांग, ( Panchang ), 12 August 2026 ka Panchang,
गणेश गायत्री मंत्र :
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
।। आज का दिन मंगलमय हो ।।
* दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
जीवन में कोई भी मनोकामना हो हनुमान जी के जन्मोत्सव के दिन अवश्य ही करें ये उपाय,
मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है, अगर आप भी पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 94252 03501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।
कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।
आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
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बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
इस उपाय से शरीर रहेगा निरोगी, शक्ति रहेगी भरपूर, बुढ़ापा पास भी नहीं आएगा, जानिए रोगनाशक दिव्य आहार,
* बुधवार को सभी ग्रहो के राजकुमार बुध देव की आराधना करने से ज्ञान मिलता है, वाकपटुता में प्रवीणता आती है, धन लाभ होता है ।
बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाने तथा रात को सोते समय फिटकरी से दाँत साफ करने से आर्थिक पक्ष मजबूत होता है ।
जानिए बजरंग बलि के परिवार के बारे में, अवश्य जानिए हनुमान जी के माता पिता और उनके भाइयों के बारे में,

*विक्रम संवत् – 2083,
*शक संवत – 1948
*कलि संवत – 5128
*अयन – दक्षिणयायन
*ऋतु – वर्षा ऋतु
*मास – सावन माह
*पक्ष – कृष्ण पक्ष
*चंद्र बल – वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर, कुम्भ ,
बुधवार को बुध की होरा :-
प्रात: 5.49 AM से 6.55 AM तक
दोपहर 01.32 PM से 2.38 PM तक
रात्रि 20.51 PM से 21.45 PM तक
बुधवार को बुध की होरा में हाथ की सबसे छोटी उंगली और बुध पर्वत को हल्के हल्के रगड़ते हुए अधिक से अधिक बुध देव के मन्त्र का जाप करें ।
ज्योतिष, पढ़ाई, लिखाई, सीखने, वाकपटुता, अपना प्रभाव डालने और व्यापार में सफलता के लिए बुध की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।
बुधवार के दिन बुध की होरा में बुध देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।
अवश्य पढ़ें :- पूरे वर्ष निरोगी काया के लिए सर्दियों में सेवन करें ये आहार,
आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,भारत की लगभग 150 करोड़ की आबादी में 0.001 % अर्थात लगभग 15 हज़ार आदमी ही नित्य पंचांग पढ़ पाते है।
आप पर ईश्वर की असीम कृपा है जो आपको नित्य पंचांग पढ़ने का, अपने भाग्य को प्रबल करने का, पापो के प्रायश्चित करने का अवसर मिल रहा है,
दुनिया के सारे उपाय एक तरफ है, और नित्य पंचाग पढ़ने का पुण्य उससे भी कहीं अधिक है,
इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है ।

बुध देव के मन्त्र
“ॐ बुं बुधाय नमः” अथवा
“ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।।”
गुरु पूर्णिमा पर इन ऋषियों के नामो का स्मरण करने से समस्त पापो का होगा नाश,
अवश्य जानिए कैसे और किससे हुआ हनुमान जी का विवाह, इनकी पुत्री है हनुमान जी की पत्नी,
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- तिथि (Tithi) – अमावस्या 23.06 PM तक तत्पश्चात प्रतिपदा,
- तिथि के स्वामी – अमावस्या तिथि के स्वामी पितृ देव जी है ।
आज भगवान भोलेनाथ जी को अति प्रिय सावन माह की अमावस्या हरियाली अमावस्या है । अमावस्या तिथि के स्वामी पितृ देव को माना गया है।
हरियाली अमावस्या पर भगवान शंकर जी मंदिर में जाकर उनकी पूजा, अभिषेक एवं भगवान शंकर जी के मंत्रो का अधिक से अधिक जाप अवश्य ही करें ।
पीपल के पेड़ पर पितरों का वास माना गया है। अमावस्या के दिन सुबह के समय लोहे के बर्तन में, दूध, पानी, काले तिल, शहद एवं जौ मिला कर समस्त सामग्री पीपल की जड़ में अर्पित करके पीपल की 7 परिक्रमा करें, तथा इस दौरान “ॐ सर्व पितृ देवताभ्यो नमः” मंत्र का जाप भी लगातार करते रहें ।
इस उपाय को करने से पितृ प्रसन्न होते है, उनका आशीर्वाद मिलता है ।
अमावस्या तिथि को पितरों के तर्पण, दान के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है । इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करके भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य देकर अपने पितरों की शांति के लिए उनका तर्पण करते हैं ।
आज पितरों की कृपा प्राप्त करने के लिए घर पर ब्राह्मण को भोजन कराएं एवं उसे यथा शक्ति दान – दक्षिणा प्रदान करें ।
अमावस्या के दिन घी, नमक, चावल, चीनी, आटा, सत्तू, काले तिल, अनाज, वस्त्र, आदि दक्षिणा के साथ योग्य ब्राह्मण को दान में अवश्य ही दें , ऐसा करने से पितरो का आशीर्वाद मिलता है ।
अमावस्या के दिन घर पर खीर अवश्य बनायें फिर उसमें थोड़ी सी खीर दोने पर निकाल कर पित्रों के निमित पीपल पर रख आएं ।
हर अमावस्या को गहरे गड्ढे या कुएं में एक चम्मच दूध डालें इससे कार्यों में बाधाओं का निवारण होता है ।
इसके अतिरिक्त अमावस्या को आजीवन जौ दूध में धोकर बहाएं, आपका भाग्य सदैव आपका साथ देगा ।
अमावस्या पर तुलसी के पत्ते या बिल्व पत्र बिलकुल भी नहीं तोडऩा चाहिए। अमावस्या पर देवी-देवताओं को तुलसी के पत्ते और शिवलिंग पर बिल्व पत्र चढ़ाने के लिए उन्हें एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।
आज सावन माह की अमावस्या, हरियाली अमावस्या की रात्रि में किसी भी शिवमंदिर में एक ऐसा बड़ा घी का दीपक जरूर जलाएं जो पूरी रात भर जलता रहे ।
सूर्य ग्रहण के दिन भूल कर भी ना करें ये काम वरना बनते कार्यो में रुकावटों, धन हानि का करना पड़ सकता है सामना,

गुरु पूर्णिमा अपने गुरु की कृपा दृष्टि प्राप्त करने, अपने सभी संकटो को दूर करने का दिन है। जानिए गुरु पूर्णिमा के अचूक उपाय
इस तरह से मनाएं जन्माष्टमी का पर्व जीवन में लग जायेगा सुखो का अम्बार
12 अगस्त बुधवार 2026 को सावन माह की अमावस्या, हरियाली अमावस्या के दिन वर्ष 2026 का अंतिम सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है । यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि में और अश्लेषा नक्षत्र में लगेगा । सूर्य ग्रहण पर चंद्र और गुरु की युति से गज केसरी योग का भी निर्माण हो रहा है ।
यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) होगा और खगोलीय दृष्टि से काफी विशेष है। लेकिन भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा ।
. ग्रहण कब लगेगा?
तिथि: बुधवार, 12 अगस्त 2026
ग्रहण का प्रकार: पूर्ण सूर्य ग्रहण
वैज्ञानिक घटना: चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य के प्रकाश को कुछ समय के लिए पूरी तरह ढक देगा।
28 अगस्त 2026 को आंशिक चंद्र ग्रहण भी होगा, इसलिए अगस्त 2026 खगोलीय घटनाओं के लिहाज से विशेष महीना है।
यह ग्रहण की पूर्णता की पट्टी उत्तरी साइबेरिया से शुरू होकर आर्कटिक क्षेत्र, आइसलैंड और स्पेन तक जाएगी। ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन तथा रूस के कुछ हिस्सों में पूर्ण सूर्य ग्रहण देखा जा सकेगा।
भारत में 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा। भारत इस ग्रहण की न तो पूर्णता वाली पट्टी में है और न ही उस व्यापक क्षेत्र में जहाँ आंशिक ग्रहण दिखाई देगा। भारत में उस समय सूर्य क्षितिज के नीचे होगा।
पूर्ण सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में दिखाई देगा:
उत्तरी रूस/साइबेरिया, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, पुर्तगाल के कुछ हिस्से, उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र, इसके अतिरिक्त यूरोप और उत्तरी अमेरिका तथा अफ्रीका के कुछ हिस्सों में आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई देगा।
इस ग्रहण की शुरुआत रात 09 बजकर 04 मिनट पर होगी, जबकि समाप्ति देर रात 01 बजकर 28 मिनट पर होगी।
यह ग्रहण भारत के समय के अनुसार लगभग रात 11:17 बजे होगा। यानी भारत में यह घटना रात के समय होगी और इसीलिए सूर्य ग्रहण दिखाई ही नहीं देगा।
हिंदू परंपरा में सामान्यतः सूर्य ग्रहण से लगभग 12 घंटे पहले सूतक माना जाता है। लेकिन धार्मिक परंपराओं में सूतक की मान्यता अक्सर दृश्य ग्रहण से जुड़ी मानी जाती है।
12 अगस्त 2026 का ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारत में इसके लिए सामान्य रूप से सूतक मान्य नहीं माना जा रहा है। यही कारण है कि भारत में मंदिर बंद करने, पूजा रोकने या भोजन संबंधी कठोर ग्रहण-नियम लागू करने की आवश्यकता नहीं मानी जा रही है।
हरियाली अमावस्या पर सूर्य ग्रहण लगने के कारण इस दिन कोई भी बड़ी खरीद, निवेश या शुभ कार्य का प्रारम्भ टालना ही श्रेयकर होगा ।
सूर्य ग्रहण के दिन / समय में अधिक से अधिक
ॐ नम: शिवाये और
ॐ घृणि सूर्याय नम:
का जाप करना चाहिए ।
आज हरियाली अमावस्या को लगने वाले सूर्य ग्रहण के दिन इन उपायों को करने से सभी बंद दरवाजे खुल जायेंगे, जानिए सूर्य ग्रहण के अचूक उपाय

नक्षत्र (Nakshatra) – पुष्य नक्षत्र 07.59 AM तक तत्पश्चात अश्लेषा
नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी- पुष्य नक्षत्र के देवता देव गुरु बृहस्पति और स्वामी शनि देव जी है, इस दिन चंद्र देव कर्क राशि में गोचर करते हैं ।
पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रो का राजा भी कहते है, उसमें भी रवि पुष्य नक्षत्र एवं गुरु पुष्य नक्षत्र बहुत ही शुभ माने जाते है। इस अवसर पर किया गया शुभ कार्य अति लाभ दायक और चिरस्थाई होता है।
पुष्य नक्षत्र का नक्षत्र आराध्य वृक्ष: पीपलं तथा नक्षत्र का स्वाभाव शुभ माना जाता है।
शास्त्रों में लिखा है कि पुष्य नक्षत्र में शुरू किये गए सभी कार्य पुष्टिदायक, सर्वथा सिद्ध होते ही हैं, निश्चय ही फलीभूत होते हैं ।
पुष्य नक्षत्र माँ लक्ष्मी जी को अत्यंत प्रिय है । पुष्य नक्षत्र के दिन माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए श्री सूक्त, श्री महा लक्ष्मी अष्टकम का पाठ करना अत्यंत पुण्य दायक माना जाता है।
पुष्य नक्षत्र में जन्मे जातक सुन्दर, शांत, महत्वाकांक्षी, साहसी, सुखी, भोगी, लोकप्रिय, बुद्धिमान, परोपकारी, कड़ी मेहनत करने वाले तथा पुत्र मित्रादि से युक्त होता है।
लेकिन पुष्य नक्षत्र के लोग स्वार्थी, अत्यधिक बोलने वाले, जिद्दी, घमंडी, कट्टरपंथी और अत्यधिक संवेदनशील भी होते हैं।
पुष्य नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 8 और 2, भाग्यशाली रंग लाल, नीला, भाग्यशाली दिन शनिवार, सोमवार और बुधवार होता है ।
पुष्य नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ बृहस्पतये नम: “। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।
गुरु पुष्य नक्षत्र किसी भी तरह के वस्त्र, वाहन, सोना, चांदी, आभूषण, भूमि और भवन की खरीदारी के लिए उत्तम समय माना गया है ।
आज हरियाली अमावस्या पर सूर्य ग्रहण भी लगेगा, रात्रि में लगने के कारण यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा । लेकिन हरियाली अमावस्या पर सूर्य ग्रहण लगने के कारण इस दिन कोई भी बड़ी खरीद, निवेश या शुभ कार्य का प्रारम्भ टालना ही श्रेयकर होगा ।
जरूर पढ़े :- दुश्मनो से छुटकारा पाना हो अथवा कारोबार में चाहिए आशातीत सफलता हनुमान जयंती के दिन अवश्य ही करें ये उपाय,
- योग (Yog) – व्यतिपात 15.26 PM तक तत्पश्चात वरीयान
- योग के स्वामी, स्वभाव :- व्यतिपात योग के स्वामी रूद्र देव जी एवं स्वभाव अशुभ माना जाता है ।
- प्रथम करण : – चतुष्पाद 12.27 PM तक
- करण के स्वामी, स्वभाव :- चतुष्पाद करण के स्वामी रूद्र और स्वभाव क्रूर है ।
- द्वितीय करण : – नाग 23.06 PM तक तत्पश्चात किस्तुघ्न
- करण के स्वामी, स्वभाव :- नाग करण के स्वामी नागदेव और स्वभाव क्रूर है ।
- ब्रह्म मुहूर्त : 4.23 AM से 5.06 AM तक
- विजय मुहूर्त : 14.38 PM से 15.31 PM तक
- गोधूलि मुहूर्त : 19.03 PM से 19.25 PM तक
- अमृत काल : 04.38 AM से 06.06 AM गुरुवार 13 अगस्त तक
- अग्निवास : पृथ्वी पर
अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है । - शिव वास : गौरी माँ के साथ 23.06 PM तक तत्पश्चात शमशान में
शिव वास : श्मशान में जब भगवान शिव का श्मशान में वास होता हैं, तो रुद्र अभिषेक आदि करना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ जी का श्मशान में वास के दौरान अभिषेक करने से मृत्यु समान परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। - जब भगवान शंकर गौरी मइय्या के साथ होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शंकर जी के देवी गौरी के साथ रहने के समय किये गए रूद्रअभिषेक से घर कारोबार में सुख-समृद्धि आती है, स्थाई लक्ष्मी का वास होता है ।
इन उपायों से धन संपत्ति खींची चली आएगी, किसी चीज़ का नहीं रहेगा अभाव
- दिशाशूल (Dishashool)- बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।
इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ । - गुलिक काल : – बुधवार का गुलिक काल 10:30 AM से 12 PM बजे तक ।
- राहुकाल (Rahukaal) : – बुधवार का राहुकाल दिन 12:00 PM से 1:30 PM तक ।
- सूर्योदय – प्रातः 5.49 AM
- सूर्यास्त – सायं 19.03 PM
- विशेष – अमावस्या, पूर्णिमा, संक्रांति, चतुर्दशी, श्राद्ध और व्रत के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना, सहवास करना निषिद्ध है।
- अमावस्या के दिन तुलसी के पत्ते, बिल्व पत्र या किसी भी तरफ के फूल पत्तो को बिलकुल भी नहीं तोडऩा चाहिए।।
- मुहूर्त :- सावन माह की अमावस्या, हरियाली अमावस्या, सूर्य ग्रहण
- पर्व त्यौहार –
सबसे ज्यादा पढ़ी गयी :- ऐसा होगा घर के पूजा घर का वास्तु तो पूरी होंगी सभी मनोकमनाएं, जानिए पूजा घर के वास्तु टिप्स,
“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।
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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
अवश्य जानिए :- नैत्रत्यमुखी भवन के वास्तु के अचूक उपाय,
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