मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang, 25 अगस्त 2026 का पंचांग,

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मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang,

Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)




पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए मंगलवार का पंचांग (Mangalvar Ka Panchang)।

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

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25 अगस्त Ka Panchang, 25 August का पंचांग, 2026 ka panchang,

हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।

मित्रो हम पिछले 25 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद


।। आज का दिन मंगलमय हो ।।

  • दिन (वार) – मंगलवार Mangalwar के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।

    मंगलवार Mangalwar को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।

    मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।

    नवरात्री में घर, कारोबार में इस विधि से करें कलश की स्थापना, अवश्य जानिए कलश स्थापना की सही और बहुत ही आसान विधि,

    मंगलवार के व्रत से सुयोग्‍य संतान की प्राप्ति होती है, बल, साहस और सम्मान में भी वृद्धि होती है।

    मंगलवार को धरती पुत्र मंगलदेव की आराधना करने से जातक को मुक़दमे, राजद्वार में सफलता मिलती है, उत्तम भूमि, भवन का सुख मिलता है, मांगलिक दोष दूर होता है।


    जीवन में समस्त संकटो को दूर करने, सफलता का द्वार खोलने के लिए नवरात्री के मंगलवार को अवश्य ही करें ये उपाय

    आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,
  • इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । नित्य पंचांग को पढ़ने से देवताओं का आशीर्वाद मिलता है, पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है ।

*विक्रम संवत्- 2083,
*शक संवत – 1948

*कलि सम्वत – 5128
*अयन –
दक्षिणायण
*ऋतु –
वर्षा ऋतु
*मास –
सावन माह,
*पक्ष – शुक्ल पक्ष
*चंद्र बल – मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, मकर, मीन,

मंगलवार को मंगल की होरा :-

प्रात: 5.55 AM से 7.00 AM तक

दोपहर 01.28 PM से 2.32 PM तक

रात्रि 20.41 PM से 21.37 PM तक

मंगलवार को मंगल की होरा में हाथ की निम्न मंगल पर दो बूंद सरसो का तेल लगा कर उसे हल्के हल्के रगड़ते हुए अधिक से अधिक मंगल देव के मन्त्र का जाप करें ।

कृषि, भूमि, भवन, इंजीनियरिंग, खेलो, साहस, आत्मविश्वास

और भाई के लिए मंगल की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

मंगलवार के दिन मंगल की होरा में मंगल देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में मंगल मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

गुरु पूर्णिमा पर इस मन्त्र का अवश्य ही करें जाप, जानिए गुरु पूर्णिमा का उपाय,

मंगल देव के मन्त्र

ॐ अं अंगारकाय नम: अथवा

ॐ भौं भौमाय नम:”

जरूर पढ़े :-  जीवन में समस्त संकटो को दूर करने, सफलता का द्वार खोलने के लिए नवरात्री के मंगलवार को अवश्य ही करें ये उपाय,

तिथि :- द्वादशी 06.20 AM तक तत्पश्चात त्रियोदशी,

तिथि के स्वामी :- द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री विष्णु जी और त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी है ।

त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी  हैं। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते है । उन्हें सदैव युवा और आकर्षक रहने का वरदान है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार कामदेव, भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के पुत्र माने गए  हैं। उनका विवाह प्रेम और आकर्षण की देवी रति से हुआ है।

कामदेव के हाथ में धनुष है जिसका एक कोना स्थिरता और दूसरा कोना चंचलता का प्रतीक है। कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है। कामदेव जब कमान से अपना तीर छोड़ते हैं, तो उसमें कोई आवाज नहीं होती है।

कामदेव के बाण की यह विशेष बात है कि इनसे घायल होने के बाद भी व्यक्ति आनंद का सुखद अहसास महसूस करता है।

कामदेव का सम्बन्ध शुभ, प्रेम, सुख, सौंदर्य, यौवन, आनंद और कामेच्छा से है ।

कामदेव का वाहन हाथी को  माना गया है। शास्त्रों में कुछ जगह कामदेव का वाहन तोते को भी बताया गया है ।

त्रियोदशी के दिन मीठे वचन बोलने, प्रसन्न रहने से जातक रूपवान होता है, उसे अपने प्रेम में सफलता एवं इच्छित एवं योग्य जीवनसाथी प्राप्त होता है।

त्रियोदशी को कामदेव जी का स्मरण करने से वैवाहिक सुख भी पूर्णरूप से मिलता है।  +

अपने रूप और आकर्षण शक्ति को बढ़ाने के लिए  त्रियोदशी को कामदेव जी का मन्त्र ‘ॐ कामदेवाय विद्महे, रति प्रियायै धीमहि, तन्नो अनंग प्रचोदयात्’ की एक माला  जाप अवश्य करें ।

इस तिथि का खास नाम जयकारा भी है। समान्यता त्रयोदशी तिथि यात्रा एवं शुभ कार्यो के लिए श्रेष्ठ होती है।

त्रियोदशी को बैगन नहीं खाना चाहिए , त्रियोदशी को बैगन खाने से पुत्र को कष्ट मिलता है।

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आज सावन माह के शुक्ल पक्ष का प्रदोष ब्रत है, मंगलवार को होने के कारण इसे भौम प्रदोष ब्रत कहा जायेगा । सावन माह और प्रदोष तिथि दोनों ही भगवान शंकर जी को अत्यंत प्रिय है ।

प्रदोष तिथि को भगवान भोलेनाथ जी का ब्रत रखा जाता है। मान्यता है कि जो जातक प्रदोष का व्रत रख कर संध्या के समय शंकर जी की आराधना करते हैं उन्हें योग्य जीवन साथी मिलता है, दाम्पत्य जीवन में प्रेम और सहयोग बना रहता है ।

मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती का पूजन करने से जीवन में सुख – सौभाग्य की वर्षा होती है, साथ ही जातक के सभी संकट दूर हो जाते हैं । ।

प्रदोष व्रत में सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक पूजा करने का विशेष महत्त्व है । इस दिन सम्पूर्ण शिव परिवार का पूजन करने से भगवान शिव अपने भक्त पर बहुत प्रसन्न होते है ।

प्रदोष व्रत को महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखती हैं।प्रदोष ब्रत रखने वाले जातक के पूरे परिवार पर भगवान भोलनाथ और माँ पार्वती की सदैव असीम कृपा बनी रहती है ।

प्रदोष ब्रत के दिन शिव पंचाक्षर मन्त्र ॐ नम: शिवाय तथा

महामृत्युंजय मन्त्र :- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
का जाप करने से सहस्त्र गुना पुण्य की प्राप्ति होती है ।

प्रदोष को प्रदोष कहने के शास्त्रों में एक मिलती है। माना जाता है कि एक बार चंद्र देव को क्षय रोग हो गया, जिसके कारण उन्हें बहुत कष्ट हो रहा था।

अपने रोग के निवारण के लिए चंद्र देव जी भगवान शिव के पास गए, प्रभु ने चंद्र देव के क्षय रोग का निवारण त्रयो करके उन्हें त्रियोदशी के दिन ही पुन:जीवन प्रदान किया था तभी से इस दिन को प्रदोष कहा जाने लगा है ।

प्रदोष व्रत में फलाहार किया जाता है इस व्रत में अन्न, चावल, लाल मिर्च, सादा नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

  • नक्षत्र (Nakshatra) – उत्तराषाढ़ा 22.51 PM तक तत्पश्चात श्रवण,
  • नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी –     उत्तराषाढा नक्षत्र के देवता दस विश्‍वदेव जी एवं नक्षत्र के स्वामी सूर्य देव जी है ।

 उत्तराषाढा नक्षत्र 21 वें नंबर का नक्षत्र  है। उत्तराषाढ़ा’ का अर्थ होता है अजेय, विजय के पश्चात। यह एक हाथी के दांत जैसा प्रतीत होता है।

उत्तराषाढ़ नक्षत्र तारे का लिंग स्त्री है। उत्तराषाढा नक्षत्र का आराध्य वृक्ष कटहल और नक्षत्र का स्वभाव स्थिर माना गया है ।

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में जन्मे जातक पर सूर्य, शनि और गुरु का प्रभाव बना रहता है।

उत्तराषाढा नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति एक सफल एवं स्वतंत्र व्यक्ति होते हैं। इन्हे ईश्वर में आस्था होती है, इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति प्रसन्न चित्त और मित्रो में लोकप्रिय होते है ।

विवाह के उपरान्त इनको जीवन में और अधिक सफलता प्राप्त होती है, इन्हे उत्तम पुत्र सुख मिलता है। यह घूमने फिरने के बहुत शौक़ीन होते है ।

उत्तराषाढा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 1, 3 और 8, भाग्यशाली रंग, तांबे का रंग, हल्का भूरा,  भाग्यशाली दिन गुरुवार और शुक्रवार का माना जाता है ।

उत्तराषाढा नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ उत्तराषाढाभ्यां नमः”। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए । 

उत्तराषाढा नक्षत्र में  जन्मे जातको को नित्य गणेश संकट स्रोत्र का पाठ करना चाहिए इससे कार्यो में आने वाली बाधाओं का निवारण होता है । 

  • योग :- आयुष्मान 07.41 AM तक तत्पश्चात सौभाग्य
  • योग केस्वामी:-     आयुष्मान योग के स्वामी चंद्र देव एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है ।
  • प्रथम करण : – बालव 06.20 AM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :- बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।
  • द्वितीय करण : – कौलव 19.13 PM तक तत्पश्चात तैतिल
  • करण के स्वामी, स्वभाव :- कौलव करण के स्वामी मित्र और स्वभाव सौम्य है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 04.27 AM से 5.11 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.32 PM से 15.24 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.51 PM से 19.13 PM तक
  • अमृत काल : 15.49 PM से 17.34 PM तक

  • शिव वास :- कैलाश पर 06.20 AM तक तत्पश्चात नंदी पर

  • शिव वास :-  जब भगवान भोलेनाथ जी कैलाश पर होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार  भगवान शंकर जी के  कैलाश पर्वत पर रहने के दौरान रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सुखो की प्राप्ति होती है।

  • शिव वास :-  जब भगवान भोलेनाथ नन्दी जी पर विराजमान होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना सदैव बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों केअनुसार भगवान शंकर जी के नन्दी पर विराजमान के समय रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सफलता, शुभ समाचारो की प्राप्ति  होती है।


  • अग्नि वास : पृथ्वी पर 06.20 AM तक तत्पश्चात आकाश पर

    अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।

    अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।
  • दिशाशूल (Dishashool)- मंगलवार को उत्तर दिशा का दिकशूल होता है।

    यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से गुड़ खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – दोपहर 12:00 से 01:30 तक है ।
  • राहुकाल (Rahukaal) दिन – 3:00 से 4:30 तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 05:55
  • सूर्यास्त – सायं 18:51
  • विशेष – द्वादशी के दिन तुलसी तोड़ना,  मसूर का सेवन करना  वर्जित है।
  • द्वादशी के दिन यात्रा नहीं करनी चाहिए, इस दिन यात्रा करने से धन हानि एवं असफलता की सम्भावना रहती है।
  •  त्रियोदशी को बैगन नहीं खाना चाहिए , त्रियोदशी को बैगन खाने से पुत्र को कष्ट मिलता है ।
  • पर्व – त्यौहार- प्रदोष ब्रत

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang, 24 अगस्त 2026 का पंचाग,

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आप सभी शिव भक्तो को सावन के सोमवार की हार्दिक शुभकामनायें, हर हर महादेव

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मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

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आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद


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1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए, सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang।

सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang,

24 अगस्त 2026 का पंचांग, 24 August 2026 ka Panchang,

महा मृत्युंजय मंत्रॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।

  • दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।

    सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।

सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।

जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।

सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।

घर पर कैसा भी हो वास्तु दोष अवश्य करें ये उपाय, जानिए वास्तु दोष निवारण के अचूक उपाय

*विक्रम संवत् – 2083,
* शक संवत – 1948,
*कलि संवत – 5128
*कलयुग – 5128 वर्ष
* अयन – दक्षिणायण,
* ऋतु – वर्षा ऋतु,
* मास – सावन माह,
* पक्ष – शुक्ल पक्ष
*चंद्र बल – वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर, कुम्भ,

सोमवार को चन्द्रमा की होरा :-

प्रात: 5.55 AM से 7.00 AM तक

दोपहर 01.28 PM से 2.33 PM तक

रात्रि 20.42 PM से 21.38 PM तक

सोमवार को चन्द्रमा की होरा में अधिक से अधिक चन्द्र देव के मन्त्र का जाप करें। यात्रा, प्रेम, प्रसन्नता, कला सम्बन्धी कार्यो के लिए चन्द्रमा की होरा अति उत्तम मानी जाती है।


आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,भारत की लगभग 150 करोड़ की आबादी में 0.001 % अर्थात लगभग 15 हज़ार आदमी ही नित्य पंचांग पढ़ पाते है।

आप पर ईश्वर की असीम कृपा है जो आपको नित्य पंचांग पढ़ने का, अपने भाग्य को प्रबल करने का, पापो के प्रायश्चित करने का अवसर मिल रहा है,

दुनिया के सारे उपाय एक तरफ है, और नित्य पंचाग पढ़ने का पुण्य उससे भी कहीं अधिक है, नित्य पंचांग पढ़ने से देवताओं का आशीर्वाद मिलता है, कार्य सिद्ध होने लगते है,

इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है ।

सोमवार के दिन चन्द्रमा की होरा में चंद्रदेव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में चंद्र देव मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

चन्द्रमा के मन्त्र

ॐ सों सोमाय नम:।

ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम: ।

  • तिथि (Tithi) – द्वादशी तिथि पूर्ण रात्रि तक,
  • तिथि का स्वामी – द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री विष्णु जी है ।
     
  • हिंदू पंचाग की बाहरवीं तिथि द्वादशी (Dwadashi) कहलाती है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि, श्री विष्णु जी है ।
  • इस तिथि का नाम यशोबला भी है, क्योंकि इस दिन भगवान श्री विष्णु जी / भगवान श्रीकृष्ण जी का आंवले, इलाइची, पीले फूलो से पूजन करने से यश,  बल और साहस की प्राप्ति होती है।  
  • द्वादशी को श्री विष्णु जी की पूजा , अर्चना करने से मनुष्य को समस्त भौतिक सुखो और ऐश्वर्यों की प्राप्ति होती है, उसे समाज में सर्वत्र आदर मिलता है, उसकी समस्त मनोकामनाएं निश्चय ही पूर्ण होती है।
  • द्वादशी तिथि के दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना अत्यन्त श्रेयकर होता है।  द्वादशी के दिन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करें ।
  • भगवान विष्णु के भक्त बुध ग्रह का जन्म भी द्वादशी तिथि के दिन माना जाता है। इस दिन विष्णु भगवान के पूजन से बुध ग्रह भी मजबूत होता है ।
  • यदि द्वादशी तिथि सोमवार और शुक्रवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। द्वादशी यदि रविवार के दिन पड़ती है तो क्रकच योग बनाती है, यह अशुभ माना जाता है, इसमें भी शुभ कार्य करना मना किया गया हैं।
  • लेकिन द्वादशी तिथि जब बुधवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है,  ऐसे समय में किये गए कार्य कार्य सिद्ध होते है।
  • द्वादशी तिथि में विष्टि करण होने के कारण इस तिथि को भद्रा तिथि भी कहते है।
  • द्वादशी तिथि के दिन विवाह, तथा अन्य शुभ कार्य किये जाते है लेकिन इस तिथि में नए घर का निर्माण, ग्रह प्रवेश करना मना किया जाता है ।
  • द्वादशी के दिन तुलसी तोड़ना निषिद्ध है।  द्वादशी के दिन यात्रा नहीं करनी चाहिए, इस दिन यात्रा करने से धन हानि एवं असफलता की सम्भावना रहती है।  द्वादशी के दिन मसूर का सेवन वर्जित है। 
  • द्वादशी की दिशा नैऋत्य मानी गई है इस दिन इस दिशा की ओर किए गए कार्य शुभ फल देने वाले माने जाते हैं।



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आज सावन माह का चौथा और अंतिम सोमवार है । सावन माह गुरुवार 30 जुलाई से प्रारम्भ हो चूका है, भगवान भोलनाथ को सावन का सोमवार अत्यंत प्रिय है । मान्यता है की सावन माह में शिवलिंग पर मात्र जल चढ़ाने से भगवान शंकर जी अत्यंत प्रसन्न हो जाते है ।

ऐसी मान्यता है कि सावन के सोमवार का ब्रत रखने, इस दिन शिवलिंग का विधि पूर्वक अभिषेक करने से जीवन से सभी संकटो का नाश होता है, इस वर्ष सावन में 4 सोमवार पड़ रहे है ।

समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने समस्त सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था, और वह नीलकंठ महादेव कहलाएं । देवताओं ने उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए जल अर्पित किया। तभी से सावन में जलाभिषेक की परंपरा प्रचलित हुई।

सावन में भगवान शंकर और माँ पारवती की पूजा करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है, परिवार में प्रेम और सौहर्द का वातावरण बनता है ।

मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या सफल होने पर शिव-पार्वती का दिव्य मिलन हुआ। इसलिए अविवाहित कन्याएँ तथा युवक भी उत्तम जीवनसाथी की कामना से सावन के सोमवार का व्रत रखते हैं।

सावन के सोमवार का ब्रत रहने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन मधुर बनता है, स्वास्थ्य एवं मानसिक शांति मिलती है, संतान सुख एवं परिवार में मंगल बना रहता है, शिव कृपा से जीवन की समस्त बाधाएँ दूर होती हैं।

सावन के सोमवार के दिन शिवलिंग का पंचामृत, दूध, दही, घी, शहद, गन्ने का रस से अभिषेक करके, बेल पत्र, शमी पत्र, भांग, धतूरा, आक का पुष्प, काले तिल, अक्षत चढ़ाकर पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है ।

सावन के सोमवार के दिन ॐ नम: शिवाये,

श्री शिवाये नमस्तुभ्यं अथवा

महामृत्युंजय मन्त्र :-

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

का अधिक से अधिक जाप अवश्य ही करें ।

भगवान शिव की पूजा में रुद्राभिषेक का अत्यंत महत्व है। वैसे अन्य सभी माह में रुद्राभिषेक के लिए मुहूर्त देखना पड़ता है लेकिन सावन मास में प्रत्येक दिन ‘रुद्राभिषेक’ किया जाना बहुत शुभ माना जाता है।

‘शिवपुराण’ में लिखा भी है कि भगवान भोलेनाथ स्वयं ही जल हैं, इसलिए इसमें कोई भी संशय नहीं है की जल द्वारा शिवजी का अभिषेक उनकी कृपा प्राप्त करने के सर्वोत्तम मार्ग है।

कहते है कि भगवान शिव सावन के महीने में पृथ्वी पर अवतरित होकर अपनी ससुराल गए थे और वहां पर उनका स्वागत भव्य रूप से अभिषेक द्वारा किया गया था, इसलिए भी यह माह शिवजी को विशेष रूप से प्रिय है।

तभी से माना जाता है कि भगवान शिव प्रत्येक वर्ष सावन माह में अपनी ससुराल आते हैं और सभी मनुष्यो के लिए भगवान शिव की कृपा पाने का यह स्वर्णिम अवसर होता है।

सावन सोमवार के दिन क्या करें ?

प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग का गंगाजल, जल, दूध, दही, शहद, घी एवं शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करें।

बेलपत्र (तीन पत्तियों वाला), शमी पत्र, धतूरा, आक के फूल, भांग, सफ़ेद पुष्प, सफेद चंदन एवं फल अर्पित करें।

ॐ नमः शिवाय मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें।

इस दिन शिव चालीसा, शिव तांडव स्तोत्र, महामृत्युंजय मंत्र तथा रुद्राभिषेक का पाठ करें।

गरीबों एवं जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र एवं दक्षिणा का दान करें।

सावन के सोमवार के दिन यथाशक्ति व्रत रखें और इस दिन सात्विक भोजन करें।

इस दिन शिवलिंग पर हल्दी, केतकी का फूल तथा तुलसी दल अर्पित न करें।

“सावन का प्रत्येक सोमवार आपके जीवन में भगवान भोलेनाथ की असीम कृपा, उत्तम स्वास्थ्य, सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति लेकर आए।

हर हर महादेव! ॐ नमः शिवाय!”

नक्षत्र (Nakshatra) – पूर्वाषाढ़ा 20.28 PM तक तत्पश्चात उत्तराषाढ़ा

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी-         पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के देवता (अष्ट वसुओं में से एक जल के देवता) और स्वामी शुक्र देव है ।

  पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र 20वें नंबर का नक्षत्र  है। ‘पूर्वाषाढ़ा’ का अर्थ है ‘विजय से पूर्व’। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के देवता (अष्ट वसुओं में से एक जल के देवता) और स्वामी शुक्र देव है ।

शुक्र का प्रभाव पड़ने से जातक आकर्षक, प्रेम करने वाला, तथा जिंदादिल इंसान होता है। 

यह हाथी दांत या हाथ का पंखा जैसा नज़र आता है जो कि शक्ति और विजय को दर्शाता है।

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का लिंग पुरुष है।  पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का आराध्य वृक्ष वेत और नक्षत्र का स्वभाव उग्र माना गया है ।

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक निडर, आक्रामक, भगवान से डरने वाले, विनम्र, ईमानदार, पाखंड से कोसों दूर,संकल्प शक्ति वान होते हैं।

लेकिन यदि कुंडली में गुरु और शुक्र अशुभ हो तो ऐसे जातक बेहद जिद्दी, अस्थिर, झगड़ालू, निर्णय नहीं लेने वाले होते है इन्हे आर्थिक कठनाई लगी रहती है ।

पूर्वाषाढ़ा  नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 3 और 6, भाग्यशाली रंग, काला, गहरा भूरा,  भाग्यशाली दिन रविवार, शनिवार, शुक्रवार और गुरुवारका माना जाता है ।

पूर्वाषाढ़ा  नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ पूर्वाषाढाभ्यां नमः”। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।

 जीवन में निरंतर शुभ समय के लिए पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के जातको को माँ लक्ष्मी, माँ ललिता और देवी त्रिपुर सुंदरी की पूजा उपासना करनी चाहिए. ।

लक्ष्मी सहस्त्रनाम, ललिता सहस्त्रनाम, कनकधारा स्त्रोत, महालक्ष्मी अष्टक का पाठ करना जातक के लिए कल्याणकारी होता है. ।

 इसके अतिरिक्त पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के जातको को नित्य भगवान शंकर जी की आराधना भी बहुत शुभ फलदाई होती है ।

  अगर पश्चिम मुख का है आपका घर तो ऐसा रहना चाहिए आपके घर का वास्तु, जानिए पश्चिम दिशा के अचूक वास्तु टिप्स 


  • योग – प्रीति 7.04 AM तक तत्पश्चात आयुष्मान
  • योग केस्वामी:-    प्रीति  योग के स्वामी विष्णु एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है ।
  • प्रथम करण : – बव 17.22 PM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-    बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।

    अवश्य पढ़ें :- कुंडली में केतु अशुभ हो तो आत्मबल की होती है कमी, भय लगना, बुरे सपने आना, डिप्रेशन का होता है शिकार, केतु के शुभ फलो के लिए करे ये उपाय
  • द्वितीय करण : – बालव पूर्ण रात्रि तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-    बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.27 AM से 5.11 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.33 PM से 15.24 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.52 PM से 19.14 PM तक
  • अमृत काल :- 15.07 PM से 16.54 PM तक
  • शिव वास :- कैलाश पर


    शिव वास :-  जब भगवान भोलेनाथ जी कैलाश पर होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार  भगवान शंकर जी के  कैलाश पर्वत पर रहने के दौरान रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सुखो की प्राप्ति होती है।

  • अग्निवास : पृथ्वी पर 17.00 PM तक तत्पश्चात आकाश पर

    अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।
  • विशेष – द्वादशी के दिन तुलसी तोड़ना,  मसूर का सेवन करना  वर्जित है।
  • द्वादशी के दिन यात्रा नहीं करनी चाहिए, इस दिन यात्रा करने से धन हानि एवं असफलता की सम्भावना रहती है।  
  • पर्व त्यौहार- सावन का चौथा सोमवार,
  • मुहूर्त (Muhurt) –

“हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

अपने धर्म, अपनी संस्कृति अपने नैतिक मूल्यों के प्रचार, प्रसार के लिए तन – मन – धन से अपना बहुमूल्य सहयोग करें । आप हमें अपनी इच्छा – सामर्थ्य के अनुसार सहयोग राशि 9425203501पर Google Pay कर सकते है ।
आप पर ईश्वर की असीम अनुकम्पा की वर्षा होती रहे ।

24 अगस्त 2026 का पंचांग, 24 August 2026 ka Panchang, aaj ka panchang, aaj ka rahu kaal, aaj ka shubh panchang, monday ka panchang, monday ka rahu kaal, panchang, somvar ka panchang, somvar ka rahu kaal, somvar ka shubh panchang,

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### *प्रस्तुतकर्ता*:  
### *आचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय*  
### *अध्यात्म ज्योतिष परामर्श केंद्र*  
### *श्याम नगर, रायपुर, छत्तीसगढ़*  
### _📞 _9425203501 | 7000121183 | 7587346995 | 0771-4070168__
 हर समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है आपकी प्रत्येक इच्छा, महत्वकांक्षा, जीवन में बुलंदियों पर पहुंचना या किसी भी तरह की समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है *व्यापार बढ़ोतरी किया कराया शादी के लिए माता-पिता को मनाना जब कहीं ना ही हो काम तो हमसे में समाधान हर मुश्किल से मुश्किल समस्या का समाधान ज्योतिष मेरा काम नहीं मेरी साधना है जब कहीं ना हो काम तो हमसे ले समाधान https://devlinai.co.in/own_projects/acharya-main/
*ॐ नमः शिवाय | जय सनातन* 🚩


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रविवार का पंचांग, Raviwar Ka Panchag, 23 अगस्त का पंचांग 2026 का पंचांग,

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आप सभी को श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी, पुत्रदा एकादशी की हार्दिक शुभकामनायें

रविवार का पंचांग, Raviwar Ka Panchag,

23 अगस्त 2026 का पंचांग, 23 August 2026 ka Panchang,

अवश्य पढ़ें :-  मनचाही नौक री चाहते हो, नौकरी मिलने में आती हो परेशानियाँ  तो अवश्य करें ये उपाय 

Panchang, पंचाग, आज का पंचांग, aaj ka panchang, Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)



पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे । जानिए रविवार का पंचांग, Ravivar Ka Panchang।

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23 अगस्त
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मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद

जानिए नवरात्री में कन्या पूजन में माता के किन किन स्वरूपों की पूजा की जाती है

भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
।। आज का दिन अत्यंत मंगलमय हो ।।

👉🏽दिन (वार) रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।

इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।

घर पर कैसा भी हो वास्तु दोष अवश्य करें ये उपाय, जानिए वास्तु दोष निवारण के अचूक उपाय

रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है । अत: रविवार के दिन मंदिर में भैरव जी के दर्शन अवश्य करें ।

रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।

आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,

इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । नित्य पंचांग को पढ़ने से देवताओं का आशीर्वाद मिलता है, पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है ।

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* विक्रम संवत् – 2083, वर्ष
* शक संवत – 1948, वर्ष
* कलि संवत — 5128, वर्ष
* कलयुग – 5128, वर्ष
* अयन – दक्षिणयान,
* ऋतु – वर्षा ऋतु,
* मास – सावन माह,
* पक्ष – शुक्ल पक्ष
* चंद्र बल – मिथुन, कर्क, तुला, धनु, कुम्भ, मीन,

रविवार को सूर्य देव की होरा :-

प्रात: 5.54 AM से 6.59 AM तक

दोपहर 01.28 PM से 02.33 PM तक

रात्रि 20.43 PM से 9.38 PM तक

रविवार को सूर्य की होरा में अधिक से अधिक अनामिका उंगली / रिंग फिंगर पर थोड़ा सा घी लगाकर मसाज करते हुए सूर्य देव के मंत्रो का जाप करें ।

सुख समृद्धि, मान सम्मान, सरकारी कार्यो, नौकरी, साहसिक कार्यो, राजनीती, कोर्ट – कचहरी आदि कार्यो में सफलता के लिए रविवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

रविवार के दिन सूर्य देव की होरा में सूर्य देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में सूर्य ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

अवश्य जानिए देव दीपावली किस दिन मनाई जाएगी, देव दीपावली क्यों मनाते है 

सूर्य देव के मन्त्र :-

ॐ भास्कराय नमः।।

अथवा

ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।

सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। इसे विशेष रूप से संतान प्राप्ति, संतान की सुख-समृद्धि और संतान के उज्ज्वल भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

विशेष बात यह है कि पुत्रदा एकादशी वर्ष में दो बार आती है—पौष शुक्ल एकादशी और श्रावण शुक्ल एकादशी। दोनों का नाम पुत्रदा एकादशी है, और दोनों ही एकादशी में पुत्र प्राप्ति और पुत्र / संतान के कल्याण के लिए यह ब्रत रखा जाता है ।

एकादशी तिथि 23 अगस्त रविवार को लगभग तड़के सुबह 2:00 AM से शुरू होकर 24 अगस्त सोमवार को लगभग 4:18 AM तक रहेगी। इसलिए एकादशी का ब्रत रविवार 23 अगस्त को ही रखा जायेगा ।

🌿 पुत्रदा एकादशी का विशेष महत्त्व

‘पुत्रदा’ शब्द संस्कृत के पुत्र + दा से बना है—अर्थात संतान प्रदान करने वाली। परंपरागत रूप से इस व्रत का संबंध संतान प्राप्ति, संतान की मंगल-कामना और वंश की उन्नति से जोड़ा गया है। आज इसे केवल पुत्र प्राप्ति तक सीमित न मानकर संतान-सुख, संतान की दीर्घायु, अच्छे संस्कार और परिवार की समृद्धि के लिए भी किया जाता है।

📜 पद्म पुराण में क्या कहा गया है?

पद्म पुराण के उत्तरखंड के अध्याय 55 में श्रावण शुक्ल एकादशी को स्पष्ट रूप से ‘पुत्रदा’ कहा गया है। वहाँ ऋषि लोमश राजा को इस एकादशी का व्रत करने की सलाह देते हैं और बताते हैं कि यह वांछित फल देने वाली है। कथा में राजा महीजित निःसंतान होते हैं। ऋषि लोमश के मार्गदर्शन में राजा और प्रजा इस व्रत का पालन करते हैं और इसके पुण्य के प्रभाव से रानी को गर्भ प्राप्त होता है तथा एक पुत्र का जन्म होता है।

🌺 संतान के लिए विशेष रूप से क्यों मानी जाती है?

शास्त्रीय परंपरा में पुत्र को वंश की निरंतरता तथा माता-पिता के श्राद्ध आदि धार्मिक कर्तव्यों से जोड़ा गया था। इसी कारण ‘पुत्रदा’ नाम का विशेष अर्थ बना। हालांकि आज इसके आध्यात्मिक अर्थ को व्यापक रूप में संतान-सुख और संतान के कल्याण के रूप में समझना अधिक उपयुक्त है।

मान्यता है कि पुत्रदा एकादशी का ब्रत रखने से योग्य, आज्ञाकारी, धर्म का पालन करने वाली, चरित्रवान, और कुल का नाम रौशन करने वाली संतान की प्राप्ति होती है। संतान के जीवन से सभी कष्ट दूर रहते है उसे आरोग्य और दीर्घ आयु की प्राप्ति होती है ।

सनातन धर्म में एकादशी तिथि को भगवान श्री विष्णु की सर्वाधिक प्रिय तिथि माना गया है। इस दिव्य दिन भगवान श्रीहरि विष्णु एवं श्रीकृष्ण की उपासना, भक्ति और नाम-स्मरण करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।

शास्त्रों में कहा गया है कि जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक एकादशी व्रत का पालन करता है, वह भगवान श्री विष्णु को अत्यंत प्रिय हो जाता है तथा उस पर श्रीहरि की विशेष कृपा सदैव बनी रहती है।

✨ एकादशी के दिन अधिक से अधिक भगवान विष्णु के पवित्र मंत्रों का जाप करें —

🔸 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

या

🔸 ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

इन मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जप करने से मन, बुद्धि और आत्मा शुद्ध होती है तथा भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

🌿 एकादशी के दिन भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित कर पूजा अवश्य करें। ध्यान रहे कि तुलसी दल एकादशी के दिन नहीं तोड़ना चाहिए, बल्कि उसे एक दिन पूर्व दशमी तिथि में ही संग्रह कर लेना चाहिए।

🚿 शास्त्रों के अनुसार एकादशी के दिन जल में आँवले का चूर्ण या आँवले का रस मिलाकर स्नान करने से पापों का क्षय होता है और शरीर व मन दोनों पवित्र होते हैं।

🪔 रात्रि के समय भगवान विष्णु के समक्ष नौ बत्तियों वाला दीपक प्रज्ज्वलित करें तथा एक अखंड दीपक ऐसा जलाएँ जो पूरी रात प्रकाशित रहे। यह दीपक जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का प्रकाश फैलाता है।

🚫 एकादशी के दिन चावल तथा अन्न का सेवन वर्जित माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन चावल खाने से पाप और रोग बढ़ते हैं तथा दूसरे का अन्न ग्रहण करने से संचित पुण्यों का क्षय होता है।

🌺 एकादशी का व्रत केवल उपवास नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, भक्ति, संयम और भगवान श्रीहरि की कृपा प्राप्त करने का दिव्य साधन है।

🙏 “हरि स्मरण ही जीवन का सबसे बड़ा कल्याण है।”

इस दिन पूजा के बाद भगवान श्री कृष्ण जी से प्रार्थना करें कि

“हे श्रीहरि विष्णु, हमारे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें। हमारी संतान को उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, सद्बुद्धि, अच्छे संस्कार, सफलता और सुख प्रदान करें तथा हमारे जीवन की संतान संबंधी सभी बाधाओं को दूर करें।” 🙏

नाग पंचमी के दिन इस तरह से करें नाग देवता की पूजा, आज अवश्य पढ़िए नाग पंचमी की कथा,

अवश्य पढ़ें :अवश्य पढ़ें :- चेहरे से कील मुहाँसे हटाने हो तो तुरंत करें ये उपाय, कील मुहांसों को जड़ से हटाने के अचूक उपाय,

नक्षत्र :- मूल 17.44 PM तक तत्पश्चात पूर्वाषाढ़ा

नक्षत्र के स्वामी :-    मूल नक्षत्र के देवता निॠति (राक्षस) एवं स्वामी केतु जी है ।


मूल नक्षत्र का नक्षत्र मंडल में 19वां स्थान है। ‘मूल’ का अर्थ ‘जड़’ होता है।  ज्योतिष शास्त्र में गंडमूल नक्षत्र के अंतर्गत अश्विनी, रेवती, अश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा और मूल नक्षत्र को रखा गया है।

ज्योतिषियों का मानना है कि अगर बच्चे का जन्म गंडमूल नक्षण में हो तब उस की शांति अवश्य करा लेनी चाहिए अन्यथा इसका अशुभ परिणाम प्राप्त होता है।

गंडमूल नक्षत्र में जन्म लेने पर भी अगर लड़के का जन्म रात में और लड़की का जन्म दिन में हो, तब मूल नक्षत्र का प्रभाव समाप्त हो जाता है। लेकिन यदि बच्चे का जन्म अगर मंगलवार अथवा शनिवार के दिन हुआ है तो इसके अशुभ प्रभाव बढ़ जाते हैं।

मूल नक्षत्र में जन्मा जातक शांतिप्रिय, आकर्षक, साहसी, राजनीति में निपुण, धनवान, चतुर, वाकपटु, सौभाग्यशाली, ज्ञानवान और धार्मिक स्वभाव का होता है।

मूल नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक को रविवार को छोड़कर सदैव या समय समय पर पीपल के वृक्ष में प्रसाद और जल चढ़ाते रहना चाहिए । मूल नक्षत्र सितारे का लिंग तटस्थ है।

मूल नक्षत्र का आराध्य वृक्ष साल और नक्षत्र का स्वभाव तीक्ष्ण माना गया है ।

मूल नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 3 और 7, भाग्यशाली रंग, सुनहरा और क्रीम, भाग्यशाली दिन शनिवार, मंगलवार और बुधवार का माना जाता है ।

मूल नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ निॠतये नमः “। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।

काल सर्प दोष, जीवन में अस्थिरताएँ दूर करने के लिए नाग पंचमी के दिन अवश्य ही करें ये अचूक उपाय


घर के बैडरूम में अगर है यह दोष तो दाम्पत्य जीवन में आएगी परेशानियाँ, जानिए बैडरूम के वास्तु टिप्स

  • योग (Yog) – विष्कम्भ 06.14 AM तक तत्पश्चात प्रीति
  • योग के स्वामी :- विष्कम्भ योग के स्वामी यम एवं स्वभाव हानिकारक है । प्रीति  योग के स्वामी विष्णु एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है ।
  • प्रथम करण : – वणिज 15.10 PM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-   वणिज करण की स्वामी लक्ष्मी देवी और स्वभाव सौम्य है ।
  • द्वितीय करण : – विष्टि 04.18 AM सोमवार 24 अगस्त तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-  विष्टि करण के स्वामी यम और स्वभाव क्रूर है ।

  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.26 AM से 5.10 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.33 PM से 15.25 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.53 PM से 19.15 PM तक
  • अमृत काल :- 10.33 AM से 12.21 PM तक


    शिव वास – क्रीड़ा में 04.18 AM सोमवार 24 अगस्त तक


    जब भगवान शंकर जी क्रीड़ा में होते हैं, तो उस समय भी रुद्र अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान भोलेनाथ जी के कार्य अथवा क्रीड़ा के समय रूद्र अभिषेक करने से जीवन में तरह तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।  


    अग्नि वास : – आकाश में 04.18 AM सोमवार 24 अगस्त तक

    अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।
  • दिशाशूल (Dishashool)- रविवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से पान या घी खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – अपराह्न – 3:00 से 4:30 तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)-सायं – 4:30 से 6:00 तक ।
  • सूर्योदय – प्रातः 05:54
  • सूर्यास्त – सायं 18:53

    आँखों की रौशनी बढ़ाने, आँखों से चश्मा उतारने के लिए अवश्य करें ये उपाय

  • विशेष – रविवार को बिल्ब के वृक्ष / पौधे की पूजा अवश्य करनी चाहिए इससे समस्त पापो का नाश होता है, पुण्य बढ़ते है।

    रविवार के दिन भगवान सूर्य देव को आक का फूल अर्पण करना किसी भी यज्ञ के फल से कम नहीं है, इससे सूर्य देव की सदैव कृपा बनी रहती है ।

    रविवार को तुलसी जी को जल देना, तुलसी जी को तोड़ना वर्जित है ऐसा करने से पुण्य नष्ट होते है 1
  • एकादशी के दिन सेम फली, चावल का सेवन और दूसरो के अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए ।
  •  एकादशी के दिन चावल खाने से रोग बढ़ते है और दूसरे का अन्न खाने से पुण्य नष्ट होते है ।
  • एकादशी के दिन माँ तुलसी एकादशी का ब्रत रखती है इसलिए इस दिन तुलसी जी पर जल चढ़ाना, तुलसी जी को तोड़ना सख्त मना है ।

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत शुभ फलो वाला हो ।

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

23 अगस्त 2026 का पंचांग, 23 August 2026 ka panchang, aaj ka panchang, aaj ka rahu kaal, aaj ka shubh panchang, panchang, Ravivar Ka Panchang, ravivar ka rahu kaal, ravivar ka shubh panchang, sunday ka panchang, Sunday ka rahu kaal, आज का पंचांग, आज का राहुकाल, आज का शुभ पंचांग, पंचांग, रविवार का पंचांग, रविवार का राहु काल, रविवार का शुभ पंचांग, संडे का पंचांग, संडे का राहुकाल,

### *प्रस्तुतकर्ता*:  
### *आचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय*  
### *अध्यात्म ज्योतिष परामर्श केंद्र*  
### *श्याम नगर, रायपुर, छत्तीसगढ़*  
### _📞 _9425203501 | 7000121183 | 7587346995 | 0771-4070168__
 हर समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है आपकी प्रत्येक इच्छा, महत्वकांक्षा, जीवन में बुलंदियों पर पहुंचना या किसी भी तरह की समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है *व्यापार बढ़ोतरी किया कराया शादी के लिए माता-पिता को मनाना जब कहीं ना ही हो काम तो हमसे में समाधान हर मुश्किल से मुश्किल समस्या का समाधान ज्योतिष मेरा काम नहीं मेरी साधना है जब कहीं ना हो काम तो हमसे ले समाधान https://devlinai.co.in/own_projects/acharya-main/
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*कुंडली में सूर्य 12 घरों के फल जानिए आपकी कुंडली में सूर्य कौन से घर में बैठा है*

*कुंडली में सूर्य 12 घरों के फल जानिए आपकी कुंडली में सूर्य कौन से घर में बैठा है*   
                                                                                                                                                  ### 🙏*श्री गणेशाय नमः*🙏
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 *कुंडली में सूर्य 12 घरों के फल जानिए आपकी कुंडली में सूर्य कौन से घर में बैठा है* 
### _🙏 __ॐ घृणि सूर्याय नमः | ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः__ 🙏_

### _🔥 _आज की 4 लाइन - सूर्य ग्रह विशेष_ 🔥_

_📖 _सूर्य = आत्मा, पिता, राजा, सरकारी नौकरी, मान-सम्मान का कारक!__  
_✅ _सूर्य मजबूत = सरकारी नौकरी, नेता, पिता सुख, आँखें तेज, समाज में नाम__  
_💎 _सूर्य खराब = पिता से झगड़ा, आँखों में रोग, सरकारी दंड, बदनामी__  
_📲 _इसे सेव करें और "ॐ सूर्याय नमः" लिखकर शेयर करें__

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### _📖 _सूर्य 12 घरों में क्या फल देता है - संपूर्ण फल_ 📖_

_सूर्य देव_ = _आत्मा, पिता, राजा, सरकार, मान, हड्डी, आँख का कारक_  
_उच्च_: _मेष 10 अंश_ | _नीच_: _तुला 10 अंश_ | _स्वराशि_: _सिंह_ | _दिन_: _रविवार_

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#### _1. पहले घर / लग्न में सूर्य_
_फल_: _राजा जैसा तेज, गुस्सा बहुत, सिर बड़ा, आँखों में लालिमा, पिता से थोड़ा मतभेद।_  
_शुभ_: _सरकारी नौकरी, नेता, अफसर, समाज में नाम, हिम्मती, आत्मविश्वासी_  
_अशुभ_: _गंजापन जल्दी, आँख में रोग, घमंड, पत्नी से अनबन_  
_उपाय_: _रोज सूर्य को जल, पिता का सम्मान, रविवार को गुड़-गेहूं दान_

#### _2. दूसरे घर में सूर्य_
_फल_: _धन तो आएगा पर रुकेगा नहीं, वाणी में तेज, परिवार से थोड़ा अलगाव_  
_शुभ_: _बैंक, वाणी, वकील, सरकारी खजाने से लाभ, आँखें सुंदर_  
_अशुभ_: _कुटुंब से झगड़ा, आँख में कष्ट, झूठा आरोप_  
_उपाय_: _मुंह में मीठा बोलें, आँखों का ध्यान रखें, दान करें_

#### _3. तीसरे घर में सूर्य_
_फल_: _बहुत शुभ। भाईयों में बड़ा, पराक्रमी, शत्रु पर विजय_  
_शुभ_: _पुलिस, सेना, साहसी, छोटी यात्राओं से लाभ, भाईयों से सुख_  
_अशुभ_: _भाई से मतभेद हो सकता है_  
_उपाय_: _छोटे भाई-बहन का सम्मान, हनुमान पूजा_

#### _4. चौथे घर में सूर्य_
_फल_: _माता-पिता से थोड़ा कष्ट, पर मकान-वाहन का सुख जरूर_  
_शुभ_: _सरकारी मकान, जमीन, वाहन, राजनीति में सफलता_  
_अशुभ_: _माता को कष्ट, दिल में घबराहट, पैतृक संपत्ति में विवाद_  
_उपाय_: _शिवलिंग पर जल, माता का सम्मान, घर में सूर्य की रोशनी आने दें_

#### _5. पांचवें घर में सूर्य_
_फल_: _बहुत शुभ। बुद्धिमान, तेज दिमाग, पुत्र सुख, मंत्र सिद्धि_  
_शुभ_: _IAS, शिक्षक, मंत्री, संतान तेजस्वी, शेयर-सट्टा से लाभ_  
_अशुभ_: _पहली संतान में थोड़ी बाधा, पेट में गर्मी_  
_उपाय_: _बच्चों को पढ़ाएं, गायत्री मंत्र जप, संतान को सूर्य दिखाएं_

#### _6. छठे घर में सूर्य_
_फल_: _शत्रु हंता योग। शत्रु, रोग, कर्ज पर विजय_  
_शुभ_: _कोर्ट में जीत, नौकरी में प्रमोशन, रोग खत्म_  
_अशुभ_: _मामा से अनबन, पेट में रोग_  
_उपाय_: _रोज हनुमान चालीसा, गरीब को दवा दान_

#### _7. सातवें घर में सूर्य_
_फल_: _विवाह में देरी या पत्नी तेज स्वभाव की, पर पार्टनर सरकारी_  
_शुभ_: _पत्नी/पति अफसर, व्यापार में सरकार से लाभ_  
_अशुभ_: _दाम्पत्य में अहंकार, तलाक तक बात, आँख में कष्ट_  
_उपाय_: _पत्नी का सम्मान, सुबह-शाम सूर्य को जल, घमंड छोड़ें_

#### _8. आठवें घर में सूर्य_
_फल_: _अशुभ। उम्र तो लंबी पर संघर्ष बहुत, आँख-हड्डी रोग_  
_शुभ_: _गुप्त विद्या, बीमा, ससुराल से धन_  
_अशुभ_: _पिता को कष्ट, सरकारी दंड, बदनामी, आँख जाना_  
_उपाय_: _महामृत्युंजय जप, शिव को जल, पिता की सेवा, रविवार व्रत_

#### _9. नौवें घर में सूर्य_
_फल_: _भाग्य का राजा। पिता, गुरु, धर्म से लाभ, भाग्यशाली_  
_शुभ_: _विदेश यात्रा, सरकारी नौकरी, धर्म-कर्म, पिता से धन_  
_अशुभ_: _कभी-कभी पिता से मतभेद_  
_उपाय_: _पिता-गुरु का सम्मान, सूर्य को जल, धर्म दान_

#### _10. दसवें घर में सूर्य_
_फल_: _सबसे शुभ। दिशाबली सूर्य।_  
_शुभ_: _सरकारी नौकरी पक्की, नेता, मंत्री, कलेक्टर, पिता से नाम, समाज में शीर्ष पर_  
_अशुभ_: _काम में घमंड न करें_  
_उपाय_: _कर्म ईमानदारी से करें, सूर्य को जल, सरकारी नियम मानें_

#### _11. ग्यारहवें घर में सूर्य_
_फल_: _लाभ का राजा। धन, आमदनी बहुत_  
_शुभ_: _हर इच्छा पूरी, बड़े लोगों से दोस्ती, सरकारी ठेके से लाभ, पिता से लाभ_  
_अशुभ_: _बड़ी बहन/भाई से मतभेद_  
_उपाय_: _बड़ों का सम्मान, सूर्य यंत्र, गेहूं दान_

#### _12. बारहवें घर में सूर्य_
_फल_: _खर्च बहुत, विदेश में सफलता, आँख में रोग_  
_शुभ_: _विदेश में नौकरी, अस्पताल, जेल विभाग में नौकरी, मोक्ष_  
_अशुभ_: _पिता से दूर, पैसा फंसना, आँख, पैर में सूजन, जेल-कोर्ट का डर_  
_उपाय_: _विदेश यात्रा करें, आँखों का दान, शिव पूजा, सूर्य को जल_

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### _📖 _सूर्य को मजबूत करने के 11 महा उपाय_ 📖_

1.  _रोज सुबह 6 बजे से पहले उठकर तांबे के लोटे से सूर्य को जल + लाल फूल + चावल + कुमकुम_
2.  _मंत्र_: `ॐ घृणि सूर्याय नमः` 108 बार + आदित्य हृदय स्तोत्र
3.  _पिता का रोज चरण स्पर्श, कभी अपमान न करें_
4.  _रविवार व्रत - नमक रहित, सूर्यास्त के बाद एक बार भोजन_
5.  _गेहूं, गुड़, तांबा, लाल कपड़ा रविवार को दान_
6.  _माणिक्य रत्न - कुंडली दिखाकर अनामिका में तांबे में पहनें_
7.  _घर में सूर्य की रोशनी आने दें, पूर्व मुखी घर शुभ_
8.  _सरकारी नियम तोड़ना, रिश्वत लेना छोड़ें_
9.  _आँखों का दान, गरीब को दवा दान_
10. _हनुमान जी + शिव जी की पूजा - सूर्य के इष्ट_
11. _गायत्री मंत्र जप - सूर्य की शक्ति_

_नोट_: _सूर्य के साथ राहु = ग्रहण दोष, शनि = पिता-पुत्र में झगड़ा, शुक्र = आँख में रोग। तुरंत शांति कराएं।_

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शनिवार का पंचांग, Shaniwar Ka Panchang, 22 अगस्त 2026 का पंचांग ,

शनिवार का पंचांग, Shaniwar Ka Panchang, 22 अगस्त 2026 का पंचांग ,


Shaniwar Ka Panchang, शनिवार का पंचांग, 22 अगस्त 2026 ka Panchang,

मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

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आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
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  • Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)


पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए शनिवार का पंचांग, (Shanivar Ka Panchang), आज का पंचांग, aaj ka panchang, saturday ka panchang।

  • शनिवार का पंचांग, (Shanivar Ka Panchang, )

    22 अगस्त
    2026 का पंचांग, 22 August 2026 ka Panchang,
  • दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
  • शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।

*विक्रम संवत् – 2083,
* शक संवत – 1948,
* कलि संवत – 5128,

* कलयुग – 5128 वर्ष
* अयन – दक्षिणयान,
* ऋतु – वर्षा
ऋतु,
* मास –
सावन माह,
* पक्ष –
शुक्ल पक्ष,
*चंद्र बल –
मिथुन, कर्क, तुला, धनु, कुम्भ, मीन,

शनिवार को शनि महाराज की होरा :-

प्रात: 5.54 AM से 6.59 AM तक

दोपहर 01.29 PM से 2.34 PM तक

रात्रि 20.44 PM से 9.39 PM तक

शनिवार को शनि की होरा में अधिक से अधिक शनि देव के मंत्रो का जाप करें । श्रम, तेल, लोहा, नौकरो, जीवन में ऊंचाइयों, त्याग के लिए शनि की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

शनिवार के दिन शनि की होरा में शनि देव देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में शनि ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,भारत की लगभग 150 करोड़ की आबादी में 0.001 % अर्थात लगभग 15 हज़ार आदमी ही नित्य पंचांग पढ़ पाते है।
आप पर ईश्वर की असीम कृपा है जो आपको नित्य पंचांग पढ़ने का, अपने भाग्य को प्रबल करने का, पापो के प्रायश्चित करने का अवसर मिल रहा है,
दुनिया के सारे उपाय एक तरफ है, और नित्य पंचाग पढ़ने का पुण्य उससे भी कहीं अधिक है,
इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है ।


शनि देव के मन्त्र :-

ॐ शं शनैश्चराय नमः।

अथवा

ऊँ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्‌। छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्‌।।

  • तिथि (Tithi) – दशमी 02.00 AM रविवार 23 अगस्त तक
  • तिथि का स्वामी – दशमी तिथि के स्वामी यमराज जी है ।

दशमी तिथि के देवता यमराज जी हैं। यह दक्षिण दिशा के स्वामी है। इनका निवास स्थान यमलोक है।  शास्त्रों के अनुसार यमराज जी मृत्यु के देवता कहे गए हैं।
गरुड़ पुराण के अनुसार यमराज के महल को कालित्री महल कहते हैं और उनके सिंहासन को विचार-भू कहते हैं।

पद्म पुराण में उल्लेख मिलता है कि यमलोक पृथ्वी से 86,000 योजन यानी करीब 12 लाख किलोमीटर दूर है।

गरुड़ पुराण में यमलोक में चार द्वार बताए गए हैं। पूर्वी द्वारा से प्रवेश सिर्फ धर्मात्मा और पुण्यात्माओं को मिलता है जबकि दक्षिण द्वार से पापियों का प्रवेश होता है जिसे यमलोक में यातनाएं भुगतनी पड़ती है।

साधु-संतों को उत्तर दरवाजे से और दान पुण्य करने वाले मनुष्यों को पश्चिम द्वार से प्रवेश मिलता है।

यमराज जी भगवान सूर्य और उनकी पत्नी संज्ञा के पुत्र है, यमुना अर्थात (यमी)  इनकी जुड़वां बहन और मनु इनके भाई कहे गए है।

यमराज की पत्नी  का नाम देवी धुमोरना तथा इनके पुत्र का नाम कतिला है।

यमराज जी का वाहन महिष / भैंसे को माना गया हैं। वे समस्त जीवों के शुभ अशुभ कर्मों का निर्णय करते हैं।

इस दिन इनकी पूजा करने, इनसे अपने पापो के लिए क्षमा माँगने से जीवन की समस्त बाधाएं दूर होती हैं, निश्चित ही सभी रोगों से छुटकारा मिलता है,  नरक के दर्शन नहीं होते है अकाल मृत्यु के योग भी समाप्त हो जाते है।

मथुरा में स्थित यमराज और उनकी बहन यमुना जी का एक प्राचीन मंदिर है  उस मंदिर को यमुना धर्मराज मंदिर कहते है। देश में भाई-बहन का ये एकमात्र मंदिर है।

मान्यता है कि, भाई बहन इस मंदिर में भैया दूज के दिन एक साथ स्नान करते हैं। इससे उन्हें मृत्यु के बाद बैकुंठ की प्राप्ति होती है।

 इस तिथि को धर्मिणी भी कहा गया है। समान्यता यह तिथि धर्म और धन प्रदान करने वाली मानी गयी है ।

दशमी तिथि में नया वाहन खरीदना शुभ माना गया है। इस तिथि को सरकार से संबंधी कार्यों का आरम्भ किया जा सकता है।  

यमराज जी का समस्त रोगों को बाधाओं को दूर करने वाले मन्त्र :- “ॐ क्रौं ह्रीँ आं वैवस्वताय धर्मराजाय भक्तानुग्रहकृते नम : “॥ की एक माला का जाप अथवा कम से कम 21 बार इस मन्त्र का जाप करें ।

कल सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी अति पवित्र पुत्रदा एकादशी है । भगवान श्री विष्णु जी की पूजा तुलसी जी को अर्पित करे बिना अधूरी मानी जाती है और एकादशी के दिन तुलसी जी को तोड़ना वर्जित है इसलिए एकादशी के दिन की पूजा के लिए तुलसी जी को आज ही तोड़ कर रख लें । 

दशमी को परवल नहीं खाना चाहिए।    

राशिनुसार होली खेलकर अपने भाग्य को ऐसे करें मजबूत,

कैसा भी सिर दर्द हो उसे करें तुरंत छूमंतर, जानिए सिर दर्द के अचूक उपाय

नक्षत्र (Nakshatra) – ज्येष्ठा 14.49 PM तक तत्पश्चात मूल

नक्षत्र के स्वामी :-         ज्येष्ठा नक्षत्र के देवता इंद्र एवं ज्येष्ठा नक्षत्र के स्वामी बुध देव जी है ।

 ज्येष्ठा नक्षत्र, नक्षत्र मंडल में उपस्थित 27 नक्षत्रों में 18 वां है।  ‘ज्येष्ठा’ का मतलब होता है ‘बड़ा’। ज्येष्ठा नक्षत्र को गंड मूल नक्षत्र भी कहा जाता है।

देवराज इंद्र को समर्पित यह नक्षत्र तावीज़ या छतरी जैसा लगता है, ज्योतिषियों के अनुसार ज्येष्ठा नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक अपने आयु से पूर्व ही शारीरिक तथा मानसिक रूप से अधिक परिपक्व हो जाते हैं।

इस नक्षत्र का आराध्य वृक्ष : निर्गुडी/चीड़ तथा स्वाभाव तीक्ष्ण माना गया है। ‘ज्येष्ठा’ नक्षत्र सितारे का लिंग मादा है।  इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक पर मंगल और बुध दोनों ही ग्रहों का प्रभाव हमेशा रहता है।

इस नक्षत्र में जन्मे जातक बहुत ही ऊंचाइयों पर जाते हैं। यह साहसी, दयालु, परिश्रमी, नेतृत्व करने वाले और समस्याओं को सुलझाने में माहिर होते है।

लेकिन यदि बुध और मंगल खराब हैं तो यह झूठे, धोखेबाज़, क्रोधी, जिद्दी, अल्प मित्र वाले होते  है।

ज्येष्ठा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 8,  भाग्यशाली रंग सफ़ेद,  भाग्यशाली दिन  शनिवार और मंगलवार माना जाता है ।

ज्येष्ठा नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को ॐ इंद्राय नमःl। मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।

ज्येष्ठा नक्षत्र के दिन जातको को विष्णु सहस्त्रनाम का जाप, भगवान श्री विष्णु की उपासना करनी चाहिए, इससे बुध्दि और व्यापार के देवता बुद्ध ग्रह अनुकूल होते है ।

ज्येष्ठा नक्षत्र वाले दिन भगवान बुद्ध के मन्त्र ‘ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:’। का जाप करने से भी ज्येष्ठा नक्षत्र के शुभ फल प्राप्त होते है ।

अगर 50 की जगह 25, 60 की जगह 30 की उम्र चाहते है, जीवन में डाक्टर के पास ना जाना हो तो अवश्य करे ये उपाय   

  • योग (Yog) – विष्कम्भ पूर्ण रात्रि तक
  • योग के स्वामी, स्वभाव :-        विष्कम्भ योग के स्वामी यम एवं स्वभाव हानिकारक है ।
  • प्रथम करण : – तैतिल 12.48 PM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-       तैतिल करण के स्वामी विश्वकर्मा जी और स्वभाव सौम्य है ।
  • द्वितीय करण : – गर 02.00 AM रविवार 23 अगस्त तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-     गर करण के स्वामी भूमि तथा स्वभाव सौम्य है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.26 AM से 5.10 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.34 PM से 15.26 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.54 PM से 19.16 PM तक
  • अमृत काल : अमृत काल 20.18 PM से 21.53 PM तक

  • अग्नि वास : पाताल पर 02.00 AM रविवार 23 अगस्त तक

     जब पाताल में अग्नि वास है तो वह हवन से सम्बन्धित अनुष्ठानों के लिये शुभ नहीं मानी जाती है, यह अशुभ मानी गई है । अग्नि के पाताल  वास के दौरान किये जाने वाले हवन  सम्बन्धित अनुष्ठानों व्यक्ति को आर्थिक नुकसान करना पड़ता है उसका  धन नष्ट हो सकता है।

  • शिव वास : सभा में 02.00 AM रविवार 23 अगस्त तक

      शिव वास जब सभा में होता है अर्थात जब भगवान शंकर अपनी सभा में होते हैं, तो उस सामान्य रुद्र अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शिव के सभा में होने पर रूद्र अभिषेक करने से दुःख का सामना करना पड़ सकता है।
  • गुलिक काल : – शनिवार को गुलिक काल प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
  • दिशाशूल (Dishashool)- शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।

    यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
  • राहुकाल (Rahukaal)-सुबह – 9:00 से 10:30 तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 05:54 AM
  • सूर्यास्त – सायं 18:54 PM
  • विशेष – दशमी के दिन कलम्बी, परवल का सेवन नहीं करना चाहिए ।


अवश्य पढ़ें :-राशिनुसार इन वृक्षों की करें सेवा, चमकने लगेगा भाग्य,

  • पर्व त्यौहार-
  • मुहूर्त (Muhurt) –

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

22 अगस्त 2026 का पंचांग, 22 August 2026 ka panchang, aaj ka panchang, aaj ka rahu kaal, aaj ka shubh panchang, panchang, saturday ka panchang, shanivar ka panchang, Shaniwar Ka Panchag, shanivar ka rahu kaal, shanivar ka shubh panchang, आज का पंचांग, आज का राहुकाल, आज का शुभ पंचांग, पंचांग, शनिवार का पंचांग, शनिवार का राहु काल, शनिवार का शुभ पंचांग, सैटरडे का पंचांग,

### *प्रस्तुतकर्ता*:  
### *आचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय*  
### *अध्यात्म ज्योतिष परामर्श केंद्र*  
### *श्याम नगर, रायपुर, छत्तीसगढ़*  
### _📞 _9425203501 | 7000121183 | 7587346995 | 0771-4070168__
 हर समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है आपकी प्रत्येक इच्छा, महत्वकांक्षा, जीवन में बुलंदियों पर पहुंचना या किसी भी तरह की समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है *व्यापार बढ़ोतरी किया कराया शादी के लिए माता-पिता को मनाना जब कहीं ना ही हो काम तो हमसे में समाधान हर मुश्किल से मुश्किल समस्या का समाधान ज्योतिष मेरा काम नहीं मेरी साधना है जब कहीं ना हो काम तो हमसे ले समाधान https://devlinai.co.in/own_projects/acharya-main/
*ॐ नमः शिवाय | जय सनातन* 🚩

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Aacharya Mukti Narayan Pandey Adhyatma Jyotish paramarsh Kendra Raipur

मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang, 25 अगस्त 2026 का पंचांग,

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