Guruwar Ka Panchag, गुरुवार का पंचांग, 19 मार्च 2026 का पंचांग,

Guruwar Ka Panchag, गुरुवार का पंचांग, 19 मार्च 2026 का पंचांग,

आप सभी भक्तो को चैत्र नवरात्री के पहला दिन, हिन्दू नवसंवतर की हार्दिक शुभकामनायें

गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 19 March 2026 Ka Panchang,

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आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
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बृहस्पतिवार का पंचांग, Brahaspativar ka panchang,

  • Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।

* शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
* वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
* नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
* योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
* करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।

इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
जानिए आज गुरुवार का पंचांग, Guruwar Ka Panchag,

मंगल श्री विष्णु मंत्र :-

मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥

आज का पंचांग, aaj ka panchang, गुरुवार का पंचाग, Guruvar Ka Panchag,

गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag,

19 मार्च 2026 का पंचांग, 19 March 2026 Ka Panchang,


  • गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 19 मार्च 2026 का पंचांग,
  • दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
  • गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए ।

    गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
  • गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
    इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।

    ऐसा होगा हिंदू नव संवत्सर, हिन्दू नव वर्ष के राजा और मंत्री होंगे यह देवता,
  • गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।
    इस उपाय को करने से कार्यो में अड़चने दूर होती है, भाग्य चमकने लगता है, बृहस्पति देव की कृपा मिलती है।

यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।
और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।

गुरुवार को विष्णु जी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, गुरुवार को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ परम फलदाई है

इस बार नवरात्री में माँ दुर्गा अपने इस वाहन पर सवार होकर आएगी और ऐसा रहेगा उसका फल, 

  • *विक्रम संवत् 2083,
  • * शक संवत – 1947,
    *कलि संवत 5127,
    * अयन – उत्तरायण,
    * ऋतु – बसंत ऋतु,
    * मास – चैत्र माह
    * पक्ष – शुक्ल पक्ष
    *चंद्र बल – वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर, मीन,

गुरुवार को बृहस्पति देव की होरा :-

प्रात: 6.26 AM से 7.27 AM तक

दोपहर 01.29 PM से 2.30 PM तक

रात्रि 20.30 PM से 9.30 PM तक

आज गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा के समय दाहिने हाथ की तर्जनी ऊंगली ( अंगूठे के बगल वाली उंगली ) के नीचे गुरु पर्वत और उस पूरी ऊंगली पर बृहस्पति देव के मंत्र का जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य ) I

गुरुवार को बृहस्पति की होरा में अधिक से अधिक बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करें । शिक्षा, मान – सम्मान, व्यापार, कारोबार, नए कार्यो के प्रारम्भ के लिए गुरुवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा में बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

बृहस्पति देव के मन्त्र

ॐ बृं बृहस्पतये नमः।। अथवा

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः।।


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  • तिथि (Tithi) :- अमावस्या 06.42 AM तक तत्पश्चात प्रतिपदा
  • तिथि का स्वामी – अमावस्या तिथि के स्वामी पितृ देव जी और प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव जी है।
  • आज से अति पुण्य दायक चैत्र नवरात्री प्रारम्भ हो रहे है । नवरात्री के इन 9 दिनों में प्रतिदिन माँ दुर्गा जी के अलग अलग शक्ति रूपों की आराधना की जाती है, मान्यता है कि इन 9 दिनों में माता दुर्गा जी के रूपों की आराधना से जीवन के सभी कष्ट दूर होते है, समस्त मनोकामनाएं निश्चित ही पूर्ण होती है ।
  • अमावस्या तिथि का प्रारम्भ बुधवार 18 मार्च को सुबह 8 बजकर 25 मिनट से हो रहा है जो गुरुवार 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 42 मिनट तक रहेगी । इसके बाद चैत्र प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ हो जाएगी ।
  • इस बार अमावस्या और प्रतिपदा दोनों तिथियों में सूर्योदय का मान नहीं मिल रहा है, इसलिए अमावस्या का स्नान व दान तथा नवरात्रि में घट स्थापना और माँ शैलपुत्री की पूजा गुरुवार 19 मार्च को ही की जाएगी ।
  • इस बार वर्ष 2026 में चैत्र प्रतिपदा तिथि का क्षय हो रहा है अमावस्या तिथि 19 मार्च गुरुवार को प्रातः 06:42 तक रहेगी, तत्पश्चात 19 मार्च गुरुवार को ही प्रातः 06:41 से चैत्र प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ हो जाएगी जो शुक्रवार 20 मार्च की सुबह सूर्योदय से पूर्व ही 05:25 पर समाप्त जाएगी ।
  • चूँकि गुरुवार 19 मार्च को ही सम्पूर्ण दिन भर चैत्र प्रतिपदा का मान रहेगा इसलिए नवरात्री का प्रारम्भ, नवरात्री में कलश स्थापना गुरुवार 19 मार्च को करना शास्त्र सम्मत होगा ।
  • नवरात्रि के प्रथम दिन भक्त गण अपने अपने घरो में कलश को स्थापित करके देवी दुर्गा का आह्वाहन करते हैं। कलश स्थापना में शुभ मुहूर्त, का बहुत ही महत्त्व है । यहाँ पर कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त दिए गए है जिसके अनुसार कलश की स्थापना करना अत्यंत मंगलकारी रहेगा ।
  • इस वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्री गुरुवार से शुरू हो रहे हैं, इसलिए माँ दुर्गा जी डोली / पालकी पर सवार होकर आएंगी जो शुभ नहीं है, अतिरिक्त सावधानी रखनी होगी, उत्पात, युद्ध, प्राकृतिक आपदाएं और महामारी की आशंका है,
  • लेकिन नवरात्री के अंत में माँ हाथी पर सवार होकर प्रस्थान करेंगी । शास्त्रों में देवी की हाथी की पालकी को बहुत शुभ माना गया है ।
  • नवरात्री के पहले दिन माँ शैलपुत्री की आराधना की जाती हैं। ये ही नवदुर्गाओं में माँ दुर्गा का पहला स्वरूप हैं । पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम ‘शैलपुत्री’ पड़ा।
  • नवरात्र-पूजन में प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है। मां शैलपूत्री सौभाग्‍य का प्रतीक मानी गयी हैं।
  • माँ शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में कमल-पुष्प सुशोभित है। देवी का वाहन बैल है। मां शैलपुत्री के मस्तक पर अर्ध चंद्र विराजित है। माता शैलपुत्री मूलाधार चक्र की देवी मानी जाती हैं।
  • अपने पूर्व जन्म में ये सती के रूप में प्रजापति दक्ष की कन्या के रूप में उत्पन्न हुई थीं, उस जन्म में सती माता का विवाह भगवान शंकर जी से हुआ था।
  • पूर्वजन्म की भाँति इस जन्म में भी ‘शैलपुत्री’ देवी का विवाह भी शंकरजी से ही हुआ। अर्थात इस जन्म में भी वे शिवजी की ही अर्द्धांगिनी बनीं।
  • ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मां शैलपुत्री चंद्रमा के दोष को दूर करती हैं। जिन लोगों का चंद्रमा कमजोर है, उन्हें माता के शैलपुत्री स्वरूप की आराधना करनी चाहिए।
  • आज माता के दिव्य मन्त्र – ॐ शं शैलपुत्री देव्यै: नम:। की एक माला का जप अवश्य ही करना चाहिए ।
  • पहला नवरात्र के दिन मां शैलपुत्री को गाय के घी भोग लगाने चाहिए, इससे आरोग्य की प्राप्ति होती है ।

ऐसे करें नवरात्री में कलश की स्थापना माँ दुर्गा की बरसेगी असीम कृपा

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चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा के दिन से हिन्दु नव वर्ष अर्थात हिन्दु नव संवत्सर की शुरुआत मानी जाती है । धार्मिक ग्रंथो में इस दिन को बहुत पुण्यदायक , शुभ एवं महत्वपूर्ण माना गया है ।

‘चैत्रे मासि जगद ब्रह्मा ससर्ज प्रथमे अहनि,
शुक्ल पक्षे समग्रेतु तदा सूर्योदये सति’

 ब्रह्म पुराण में लिखे इस श्लोक के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पास के सूर्योदय पर सृष्टि के रचियता भगवान ब्रह्माजी ने इस सृष्टि की रचना की थी और इसी दिन से नव संवतसर, nav samvatsar, प्रारम्भ होता है ।

इस वर्ष गुरुवार 19 मार्च से विक्रम संवत 2083 का आरम्भ होगा। इस नव संवत्सर का नाम ‘रौद्र’ है।

हिंदू पंचांग में कुल 60 संवत्सर होते हैं, जिनमें से प्रत्येक का एक विशिष्ट नाम होता है। ‘रौद्र’ संवत्सर लगभग 60 वर्षों के बाद दोबारा आता है।

ज्योतिष गणना के अनुसार, संवत 2083 के राजा ‘गुरु’ (बृहस्पति) और मंत्री ‘मंगल’ होंगे।

महत्व: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। इसी दिन से चैत्र (वासंतिक) नवरात्र भी शुरू होते हैं।

महाराष्ट्र में हिन्दू नववर्ष या नव-सवंत्सर के आरंभ के दिन को गुड़ी पड़वा के रूप में पूर्ण हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाया जाता है।

शास्त्रों के अनुसार सतयुग का आरम्भ भी इसी तिथि से माना जाता है ।

मान्यता है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही भगवान श्री विष्णु जी का मत्स्य अवतार हुआ था ।

इस दिन घर की छत पर ऊँचा लाल /  केसरीया ध्वज अवश्य लगवाएं । यह ॐ , दुर्गा जी , हनुमान जी किसी का भी हो सकता है ।

इस दिन घर के बाहर दोनों तरफ घी में सिंदूर मिलाकर ॐ , स्वस्तिक का चिन्ह बनायें अथवा इनके अच्छे से स्टिकर लाकर लगाएं ।

यह है नवरात्री में कलश स्थापना का सर्वोत्तम मुहूर्त, इस समय घर पर कलश की स्थापना तो माँ दुर्गा की मिलेगी असीम कृपा,

नक्षत्र (Nakshatra) – उत्तर भाद्रपद 04.52 AM शुक्रवार 20 मार्च तक

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी –   उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के देवता अहिर्बुंधन्य देव, स्वामी शनि देव जी एवं वहीं राशि स्वामी गुरु है ।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र 27 नक्षत्रों में 26 वां नक्षत्र है। उत्तर भाद्रपद नक्षत्र वैवाहिक आनंद, सुख समृद्धि और शक्ति का प्रतीक है। उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र  प्रकाश की किरण, संसार को खुशियों का आशीर्वाद देता है।
शनि और गुरु में शत्रुता है। और उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के जातको पर जीवन भर शनि और गुरु दोनों का ही प्रभाव रहता है ।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र का आराध्य वृक्ष : नीम तथा इस नक्षत्र का स्वाभाव शुभ माना गया है। उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र सितारे का लिंग पुरुष है।

इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक पर जीवन भर शुक्र एवं राहु ग्रह का प्रभाव बना रहता है।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति धार्मिक, कुशल वक्ता,  यशस्वी, परोपकारी और धनवान होते है।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्तियों को सन्तान पक्ष से सुख की प्राप्ति होती है। इनका पारिवारिक जीवन भी समान्यता सुखमय ही रहता है।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति को हनुमान जी की आराधना करनी फलदाई कही गयी है , इनको पीपल की सदैव  /  विशेषकर शनिवार के दिन  तो अवश्य ही सेवा करनी चाहिए ।

उत्तर भाद्रपद नक्षत्र के लिए भाग्यशाली अंक क्या हैं 6 और 8, भाग्यशाली रंग बैगनी तथा भाग्यशाली दिन  गुरुवार, मंगलवार और शुक्रवार होता है ।

उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को इस नक्षत्र देवता के नाममंत्र:- ॐ अहिर्बुंधन्याय नमःl  मन्त्र की माला का जाप अवश्य करना चाहिए । ऐसा करने से कार्यो में मनवांछित लाभ की प्राप्ति होती है ।



कैसा भी सिर दर्द हो उसे करें तुरंत छूमंतर, जानिए सिर दर्द के अचूक पा

योग :- शुक्ल 01.17 AM शुक्रवार 20 मार्च तक

योग के स्वामी, स्वभाव :-  शुक्ल  योग की स्वामी देवी पार्वती जी एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है ।

प्रथम करण :- नाग 06.52 AM तक

करण के स्वामी, स्वभाव :-  नाग करण के स्वामी नागदेव और स्वभाव क्रूर है ।

द्वितीय करण :- किस्तुघ्न 17.55 PM तक तत्पश्चात बव

करण के स्वामी, स्वभाव :-       किस्तुघ्न करण के स्वामी मरुत और स्वभाव क्रूर है ।

ब्रह्म मुहूर्त : 4.57 AM से 5.46 AM तक

विजय मुहूर्त : 14.30 PM से 15.17 PM तक

गोधूलि मुहूर्त : 18.25 PM से 18.49 PM तक

अमृत काल : 17.36 PM से 19.23 PM तक

  • दिशाशूल (Dishashool)– बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – गुलिक 09:30 AM से 11 AM बजे तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)– दिन – 1:30 PM से 3:00 PM तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 06:26
  • सूर्यास्त – सायं 18.32
  • विशेष – अमावस्या के दिन तुलसी के पत्ते, बिल्व पत्र या किसी भी तरफ के फूल पत्तो को बिलकुल भी नहीं तोडऩा चाहिए।
  • अमावस्या,  श्राद्ध और व्रत के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना,  सहवास करना निषिद्ध है। 
  • प्रतिपदा के दिन कद्दू  /  पेठे का सेवन नहीं करना चाहिए, प्रतिपदा के दिन इनका सेवन करने से धन की हानि होती है । 
  • पर्व त्यौहार– चैत्र नवरात्री का पहला दिन जय माँ शैलपुत्रीहिन्दू नवसंवतर
  • मुहूर्त (Muhurt) 

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“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )
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Shukrwar ka panchag, शुक्रवार का पंचांग, 20 मार्च 2026 का पंचांग,

Shukrwar ka panchag, शुक्रवार का पंचांग, 20 मार्च 2026 का पंचांग, आप सभी को नवरात्री के दूसरे दिन की हार्दिक शुभकामनायें , जय माँ ब्रह्मचारि...