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Shukrwar ka panchag, शुक्रवार का पंचांग, 27 मार्च 2026 का पंचांग,

आप सभी भक्तो को चैत्र नवरात्री के नवें दिन, महा नवमी, राम नवमी की हार्दिक शुभकामनाएं, जय माँ सिद्धिदात्रीजय श्री राम

गुरुवार का पंचांग शनिवार का पंचांग

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शुक्रवार का पंचांग, shukrwar ka panchang,

  • Panchang, पंचाग, Panchang 2026 हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang, पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-

    1:- तिथि (Tithi)
    2:- वार (Day)
    3:- नक्षत्र (Nakshatra)
    4:- योग (Yog)
    5:- करण (Karan)


    पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी नित्य पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।

    जानिए, Shukravar Ka Panchang, शुक्रवार का पंचांग, आज का पंचांग, aaj ka panchang,

    27 मार्च 2026 का पंचांग, 27 March  2026 ka Panchang,

  • महालक्ष्मी मन्त्र : ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥

  • ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥

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आज का पंचांग, aaj ka panchang,

दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।

शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय 
“श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।

शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।

  • * विक्रम संवत् – 2083 वर्ष
  • * शक संवत – 1948 वर्ष
    * कलि संवत – 5128 वर्ष
    * कलयुग – 5128 वर्ष
    * अयन – उत्तरायण,
    * ऋतु – बसंत ऋतु,
    * मास – चैत्र माह
    * पक्ष – शुक्ल पक्ष
    * चंद्र बल – वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर, कुम्भ,

शुक्रवार को शुक्र देव की होरा :-

प्रात: 6.17 AM से 7.19 AM तक

दोपहर 01.28 PM से 2.30 PM तक

रात्रि 20.33 PM से 21.31 PM तक

दाहिने हाथ के अंगूठे से नीचे के हिस्से ( शुक्र का स्थान ) और अंगूठे पर थोड़ा सा इत्र लगाकर, ( इत्र ना मिले तो उसके बिना भी कर सकते है) बाएं हाथ के अंगूठे से उस हिस्से को शुक्र की होरा में “ॐ शुक्राये नम:” या

ॐ द्रांम द्रींम द्रौंम स: शुक्राय नम:।’ मंत्र का अधिक से अधिक जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य )I

यह उपाय आप कोई भी काम करते हुए चुपचाप कर सकते है इसके लिए किसी भी विधि विधान की कोई आवश्यकता नहीं है I

सुख समृद्धि, ऐश्वर्य, बड़ा भवन, विदेश यात्रा, प्रेम, रोमांस, सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए शुक्रवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

शुक्रवार के दिन शुक्र की होरा में शुक्रदेव देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में शुक ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

शुक्र देव के मन्त्र :-

ॐ शुं शुक्राय नमः।। अथवा

” ॐ द्राम द्रीम द्रौम सः शुक्राय नमः “।।

अपनी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए नवरात्री में अवश्य करें ये उपाय  

  • तिथि, (Tithi) नवमी तिथि 10.06 AM तक तत्पश्चात दशमी, तिथि, (Tithi) :-,
  • तिथि के स्वामी – नवमी तिथि की स्वामिनी माँ दुर्गा जी और दशमी तिथि के स्वामी यमराज जी है I

नवरात्रि के नवें दिन मां सिद्धिदात्री का पूजन किया जाता है। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं।

माता सिद्धिदात्री का स्वरूप बहुत सौम्य और मनोहारी है, मां की चार भुजाएं हैं। मां के एक हाथ में चक्र, एक हाथ में गदा, एक हाथ में कमल का फूल और एक हाथ में शंख सुशोभित है। माता सिद्धिदात्री का वाहन सिंह है।

मां सिद्धिदात्री को खीर का भोग लगाया जाता है। अपनी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए नवरात्रि की नवमी के दिन माँ सिद्धिदात्री के इस मन्त्र का जाप करना चाहिए।

ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:।

आज कन्या पूजन के साथ ही नवरात्री के नौ दिनों के ब्रत का समापन हो जायेगा, अगर कोई व्यक्ति नवरात्री का ब्रत ना भी रख पाए तो भी हर हिन्दू को यथासंभव नवरात्री में अपने घर पर कन्या पूजन अवश्य ही करना चाहिए।

धर्म शास्त्रों में नवरात्री में कन्या पूजन का बहुत ही महत्त्व बताया गया है । कन्या पूजन, से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है, पूर्ण श्रद्धा, हर्ष – उल्लास से नन्ही नन्ही कंजको को अपने घर में भोजन कराने, उन्हें अपनी श्रद्धा – सामर्थ्य अनुसार उपहार देकर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने से समस्त पापो का नाश होता है, कुंडली के अशुभ ग्रहो से भी शुभ फल मिलने लगते है ।

शास्त्रों के अनुसार घर पर कन्या पूजन से समस्त वास्तु, ग्रह जनित दोष समाप्त हो जाते है घर में सुख – शांति और मनवांछित लाभ की प्राप्ति होगी है।

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परिवार में सुख शांति चाहते है तो अवश्य ही करें ये उपाय,

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आज नवरात्री के नवें दिन, महा नवमी के दिन बहुत से भक्त गण नन्ही नन्ही कन्याओं जिन्हे कंजके भी कहते है उनकी पूजा करते है, उनके भक्ति भाव से अपने घर में बुलाकर उन्हें भोजन कराकर उन्हें  उपहार देकर, उनसे आशीर्वाद लेते है ।

मान्यता है कि जो भी भक्त गण नवरात्रि में माँ दुर्गा की पूजा करते है, नवरात्री का ब्रत रखते है उन्हें नवरात्री की अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं का पूजन अवश्य ही करना चाहिए । नवरात्री में कन्या पूजन के बिना ब्रत पूर्ण नहीं माना जाता है ।

 शास्त्रों के अनुसार माँ दुर्गा होम, जप और दान से इतनी प्रसन्न नहीं होतीं जितनी कन्या पूजन से प्रसन्न होती हैं। कन्या पूजन से सभी तरह के वास्तु दोष,विघ्न, भय और शत्रुओं का नाश होता है।

देवी पुराण में लिखा है कि, इन्द्र ने एक बार ब्रह्मा जी से देवी दुर्गा को प्रसन्न करने की विधि पूछी तो ब्रह्मा जी ने माँ दुर्गा को प्रसन्न करने की सर्वोत्तम विधि कन्या पूजन को ही बताया,  कन्या पूजन से सभी तरह के वास्तु दोष,विघ्न, भय और शत्रुओं का नाश होता है।

नवरात्री की अष्टमी तथा नवमी के दिन कन्या पूजन में  9 कन्याओं का पूजन करना चाहिए, साथ ही एक छोटे बालक को भी साथ में पूज कर उसे भी भोजन करवाना चाहिए  ।

 नवरात्रि में कन्या पूजन में ध्यान रखे कि कन्याओ की उम्र दो वर्ष से कम और दस वर्ष से ज्यादा भी न हो ।

पूजी जाने वाली कन्याओं को देवी के शक्ति स्वरूप का प्रतीक मानकर उनको श्रद्धा से जीमाना चाहिए ।

नवरात्र में नौ कन्याओं को माता के नौ रूपों क्रमश: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी एवं सिद्धिदात्री का रूप मानकर उनकी पूजा का विधान है।

शास्त्रों के अनुसार नवरात्र में की गयी पूजा-पाठ,  आराधना और कन्या पूजा कभी निष्फल नहीं होती भक्तो को उसका फल अवश्य ही मिलता है।

कन्या पूजन में सभी कन्याओं और एक बालक के पहले चरण धोकर, साफ कर के उन्हें साफ आसान पर बिठायें फिर उन सभी के मस्तक पर रोली का तिलक करके उनके हाथ में कलावा बांधें  । फिर जो भी श्रद्धा पूर्वक बना हो उन्हें इन  कन्याओं के आगे परोसे ।

इसके बाद कन्या पूजन के दिन जिस प्रशाद से मां दुर्गा को भोग लगाया हो उस प्रशाद को भोग के बाद सबसे पहले कन्याओं को ही खिलाना चाहिए।

कन्याओं के भोजन करने के उपरांत उन्हें अपनी सामर्थनुसार उपहार और दक्षिणा देकर उन सब के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लें, मन ही मन मे माँ का ध्यान करके हुए अपनी गलतियों, पापो  के लिए क्षमा मांगते हुए अपनी मनोकामना भी कहे,   और उन कंजको को अगले नवरात्री में फिर से अपने घर में आने का निमंत्रण दें ।

ऐसा करने से माँ की कृपा से सभी विघ्नो, रोगो, सभी दोषो का नाश होता है, निश्चय ही सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है ।

आज राम नवमी है । चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी को रामनवमी का त्यौहार मनाया जाता है। आज भगवान श्री राम का जन्मदिवस अर्थात राम नवमी है ।

हिन्दु धर्म शास्त्रो के अनुसार त्रेतायुग में धर्म की पुन: स्थापना तथा रावण के अत्याचारो को समाप्त करने के लिये श्री विष्णु भगवान ने मृत्यु लोक में श्री राम चन्द्र के रुप में चैत्र माह शुक्ल की नवमी के दिन राजा दशरथ के घर में अवतार लिया था। इसीलिए इस दिन पूरे दिन शुभ समय, पवित्र मुहूर्त होता है।

रामनवमी के पर्व के साथ ही माँ दुर्गा के पवित्र नवरात्रों का भी समापन हो जाता है, अत: इस शुभ तिथि को पूरे भारत में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है।

मान्यता है कि इसी दिन गोस्वामी तुलसीदास जी ने हिन्दुओं के प्रमुख ग्रन्थ श्री रामचरित मानस की रचना का आरंभ भी किया था।

रामनवमी के दिन ब्रम्ह मुहूर्त में उठकर स्नान करके भगवान श्री राम की तस्वीर को गंगाजल या किसी पवित्र नदी के जल से पोंछे । इस दिन भगवान राम को केसर मिली हुई खीर और मेवे का भोग लगाएं।

इससे मर्यादा पुरुषोत्तम, अयोध्या नरेश भगवान श्री राम का आशीर्वाद मिलता है जीवन में किसी भी वस्तु का आभाव नहीं रहता है घर में हर्ष और प्रेम का स्थाई वातावरण बनता है ।

राम नवमी Ramnavmi के अवसर पर पूरे देश के मंदिरो में विशेष पूजा अर्चना की जाती है लेकिन उत्तर प्रदेश के अयोध्या नगरी में भक्तों का विशेष उत्साह देखने को मिलता है। इस दिन अयोध्या नगरी में देश विदेश से लाखो लोग आकर पवित्र सरयू नदी पर स्नान कर भगवान श्री राम की अराधना करते हुए उनका जन्म उत्सव मानते है ।

रामनवमी के दिन किसी भी राम मंदिर में जाकर घी का दीपक जलाएं और प्रसाद चढ़ाकर उसे वहीँ पर ज्यादा से ज्यादा लोगों में बांटें। रामनवमी के दिन गरीबो -असहायो को अपने सामर्थ्य अनुसार दान-पुण्य करने से समस्त संसारिक सुखो की प्राप्ति होती है।

श्रीराम नवमी के दिन रामरक्षास्त्रोत, राम मंत्र, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, सुंदर कांड आदि के पाठ से ना सिर्फ अक्षय पुण्य मिलता है बल्कि धन संपदा के निरंतर बढ़ने के योग बन जाते हैं। रामनवमी के दिन पंडितजी को भोजन कराएं अथवा मंदिर में बिना पकी भोजन साम्रग्री का दान दें ।

इस दिन किसी भी राम मंदिर में जाकर भगवान को पीले फूलो अथवा गुलाब की माला पहनाये इससे परिवारिक जीवन सुखमय होता है, जीवन में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है ।

रामनवमी के दिन “श्री राम, जय राम, जय जय राम”॥ मन्त्र का अधिक से अधिक जाप करना चाहिए ।

रामनवमी के दिन इन उपायों से मिलेगा भगवान श्री राम का आशीर्वाद,  जानिए राम नवमी कैसे मनाएं की जीवन हो सुखमय ,

नक्षत्र ( Nakshatra ) : पुनर्वसु 15.24 PM तक तत्पश्चात पुष्य

नक्षत्र के स्वामी :–        पुनर्वसु नक्षत्र के देवता अदिति (पृथ्वी देवी), बृहस्पति, एवं नक्षत्र के स्वामी गुरु बृहस्पति जी है ।  

 पुनर्वसु अर्थ पुन: शुभ या पुन: बसना होता है। पुनर्वसु नक्षत्र आकाश मंडल में  7वां नक्षत्र है ।

ज्योतिषशास्त्र में पुनर्वसु नक्षत्र को सबसे बड़ा और बहुत ही शुभ माना जाता है । यह मर्यादा पुरषोतम भगवान श्री राम जी का जन्म नक्षत्र है। मान्यता है कि पुनर्वसु जातक के यहा केवल पुत्र ही होता है।

माना जाता है कि जिसका जन्म इस नक्षत्र में होता है, वे दूसरों की सेवा करने, भलाई करने के लिए सदैव तैयार रहते हैं  । पुनर्वसु प्रत्येक कार्य के शुभारम्भ के लिए, नयी शुरुआत के लिए श्रेष्ठ होता है। 

पुनर्वसु नक्षत्र का आराध्य वृक्ष: बांस / बांबू और नक्षत्र का स्वभाव चर माना गया है ।

इस नक्षत्र  में जन्मे जातक व्यव्हार कुशल, शांत, परोपकारी, धार्मिक,सुखी, दानी, न्यायप्रिय, लोकप्रिय, पुत्रवान होते हैं।

लेकिन यदि गुरु, बुध और चन्द्रमा शुभ ना जो तो ऐसा जातक कामुक, दब्बू,, बुद्धिहीन, कंजूस और थोड़े में ही संतुष्ट रहने वाला होता है।

इस नक्षत्र की स्त्रियां शांत लेकिन अकस्मात उग्र होने वाली, विलासी जीवन जीने वाली, कामुक, सौन्दर्यप्रेमी और आशावादी मानी जाती  है ।

पुनर्वसु नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 3, भाग्यशाली रंग, सुनहरा, भाग्यशाली दिन गुरुवार का माना जाता है ।

पुनर्वसु नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ आदित्याय नम:”। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।

अपनी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए नवरात्री के शुक्रवार और अष्टमी में अवश्य ही करें ये उपाय  

अवश्य पढ़ें :- बी पी हाई रहता हो तो ना हो परेशान, इन उपायों से बी पी की समस्या निश्चित रूप से होगी दूर

योग(Yog) :- अति गण्ड 22.10 PM तक तत्पश्चात सुकर्मा

योग के स्वामी, स्वभाव :-       अतिगण्ड योग के स्वामी चंद्र देव जी लेकिन स्वभाव हानिकारक  है   । 

प्रथम करण : – कौलव 10.06 AM तक

करण के स्वामी, स्वभाव :-   कौलव करण के स्वामी मित्र और स्वभाव सौम्य है ।

द्वितीय करण :- तैतिल 21.23 PM तक तत्पश्चात गर

करण के स्वामी, स्वभाव :-    तैतिल करण के स्वामी विश्वकर्मा जी और स्वभाव सौम्य है ।

  • दिशाशूल (Dishashool)- शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.44 AM से 5.30 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.30 PM से 15.19 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.35 PM से 18.58 PM तक
  • अमृत काल : 13.05 PM से 14.38 PM तक

    यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – शुक्रवार का गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)-दिन – 10:30 AM से 12:00 PM तक ।
  • सूर्योदय – प्रातः 06:17
  • सूर्यास्त – सायं : 18:36
  • विशेष – शास्त्रों के अनुसार किसी भी पक्ष की नवमी तिथि में लौकी और कद्दू का सेवन नहीं करना चाहिए ।

    दशमी के दिन कलम्बी, परवल का सेवन नहीं करना चाहिए ।
  • पर्व त्यौहार- नवरात्री का नवां दिन, महा नवमी, जय माँ ब्रह्मचारिणी, राम नवमी

जरुर पढ़ें :- पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रो का राजा कहते है जानिए क्यों महत्वपूर्ण है पुष्य नक्षत्र,

“हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )
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