कन्या पूजन की विधि, kanya pujan ki vidhi, कन्या पूजन 2026,

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कन्या पूजन की विधि, kanya pujan ki vidhi, kanya pujan 2026,

नवरात्रि (Navratri) में कन्या पूजन, kanya pujan का बहुत  विशेष महत्व माना जाता है। लोग चाहे नवरात्री का ब्रत रखे अथवा नहीं लेकिन लगभग सभी हिन्दू घरो में नवरात्री में कन्या पूजन, kanya pujan अवश्य होता है,  बिना इसके नवरात्रि पूजा या व्रत पूर्ण नहीं माना जाता है।

नवरात्रि में अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं का पूजन कर उन्हें लोग अपने घरो में जिमाते है, भोजन कराते है।

शास्त्रों के अनुसार 2 वर्ष से लेकर 9 वर्ष तक की कन्याओं को देवी दुर्गा का ही रूप माना गया है। इसीलिए नवरात्रि में 2 वर्ष  से लेकर 9 वर्ष तक की कन्याओं तके पूजन का विधान हैं। शास्त्रों के अनुसार ………

दो वर्ष की कन्याओं की पूजा से भोग और मोक्ष की ,

तीन वर्ष की कन्याओं की पूजा से धर्म की,

चार वर्ष की कन्याओं की पूजा से उच्च राज्यपद की ,

पांच वर्ष की कन्याओं की पूजा से ज्ञान की,

छ: वर्ष की कन्याओं की पूजा से समस्त सिद्दियों की,

सात वर्ष की कन्याओं की पूजा से सम्मान की,

आठ वर्ष की कन्याओं की पूजा से धन – ऐश्वर्य की  और

नौ वर्ष की कन्याओं की पूजा से समस्त संसारिक सुखो की प्राप्ति होती है।

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वर्ष 2026 के चैत्र नवरात्र में 26 मार्च गुरुवार को अष्टमी तिथि एवं 27 मार्च शुक्रवार को नवमी तिथि का ब्रत और हवन किया जाएगा I
इसलिए जो लोग अष्टमी तिथि को कन्या खिलाते है वह 26 मार्च गुरुवार को और जो लोग नवमी तिथि को कन्या खिलाते है उनके लिए 27 मार्च शुक्रवार को कन्या पूजन करना, उन्हें भोजन करवा कर उन्हें उपहार देना उचित रहेगा ।

नवरात्री में ऐसे करें कन्या पूजन, navratri me aisen karen kanya pujan,

शास्त्रों के अनुसार हर्ष एवं पूर्ण श्रद्धा से कन्या पूजन, kanya pujan करने से सुख-शांति और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। उत्तर भारत में भक्‍त मां दुर्गा को प्रसन्न करने उनकी कृपा पाने के लिए नवरात्री के नौ दिनों तक व्रत रखते हैं ।

नवरात्री ब्रत में अष्‍टमी तथा नवमी के दिन नौ कन्‍याओं का पूजन करने का विधान है, जो लोग पूरे नौ दिनों तक व्रत नहीं रख पाते हैं, वे भी नवरात्र का पहला तथा कन्या पूजन से पहले का नवरात्र सप्तमी या अष्‍टमी / दुर्गाष्‍टमी का व्रत रखते हैं और कुंवारी कन्याओं अर्थात कंजको की पूजा करते हैं।

कन्याओं के  पूजन के साथ एक लांगूर भी होना चाहिए। माना जाता है कि लांगूर यानी छोटे लड़के के बिना पूजा पूरी नहीं मानी जाती।

कन्‍याओं को माँ दुर्गा का रूप माना जाता है, उनके घर आने पर उनके साथ माता रानी के जयकारे लगाकर उनका स्वागत करें उन्हें हर तरह से प्रसन्न रखे।

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कन्या पूजन करते समय सबसे पहले सभी कन्याओं के एक एक करके उनके पैर धोएं फिर उन्हें एक साफ आसन पर बैठायें।

उसके पश्चात उनके हाथों में कलावा बांधकर  उनके माथे पर रोली, कुमकुम और अक्षत् का टीक लगाएं।  उन्ही कन्याओं में से किसी से घर के सभी सदस्यों के हाथ में कलावा बंधवाएं एवं माथे पर टीका भी लगवाएं ।

दुर्गा मां को हलवा, पूरी, खीर, चने एवं फल का भोग लगाया जाता है। यही प्रसाद कन्याओं को भी भोजन के रूप में  खिलाया जाता है। कन्याओं को प्रसन्नता पूर्वक भोजन कराते समय उन्हें एक बार बीच में सभी वस्तुएं दोहरा दें अर्थात दोबारा भी दे ।

मन में यह भाव रखे की आज देवी माँ आपके घर में आपके निमंत्रण पर भोजन करने, आपको आशीर्वाद देने आयी है ।

घर में कन्या पूजन करने से सभी तरह के वास्तु और ग्रह जनित दोष भी स्वत: समाप्त हो जाते है ।

कन्याओं को भोजन कराने के बाद उन्हें अपने सामर्थ्यनुसार भेंट, उपहार और दक्षिणा भी दी जाती है। कन्याओं को लाल चुन्री और चूड़ियां भी चढ़ाएं।

इस तरह विधि विधान पूर्वक कन्याओं का पूजन करने के बाद उनके चरण छूकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें, और अगले नवरात्री में फिर से उन्हें अपने घर पर आने का निवेदन करते हुए पूरे सम्मान के साथ उन्हें विदा करें । 

मान्यता है इस प्रकार प्रसन्नता से विधि पूर्वक कन्याओं का पूजन करने से माता अति प्रसन्न होती है अपने भक्तो के सभी संकटो को दूर करते हुए उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती है ।

गुरुवार 26 मार्च को महाष्टमी के दिन राहुकाल दोपहर 1.30 बजे से 3.00 बजे तक और शुक्रवार 27 मार्च को महानवमी के दिन राहु काल सुबह 10.30 बजे से दोपहर 12 बजे से तक है ।

शास्त्रों में राहु काल में कोई भी शुभ कार्य करना मना किया गया है, अत: कन्या पूजन के शुभ फलो के लिए राहु काल के समय भूल कर भी कन्या पूजन, कन्या भोज नहीं कराना चाहिए ।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )

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