Guruwar Ka Panchag, गुरुवार का पंचांग, 26 मार्च 2026 का पंचांग,

Guruwar Ka Panchag, गुरुवार का पंचांग, 26 मार्च 2026 का पंचांग,

आप सभी को नवरात्री के आठवें दिन की, दुर्गा अष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें, जय माँ महा गौरी

गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 26 March 2026 Ka Panchang,

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आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
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बृहस्पतिवार का पंचांग, Brahaspativar ka panchang,

  • Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।

* शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
* वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
* नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
* योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
* करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।

इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
जानिए आज गुरुवार का पंचांग, Guruwar Ka Panchag,

मंगल श्री विष्णु मंत्र :-

मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥

आज का पंचांग, aaj ka panchang, गुरुवार का पंचाग, Guruvar Ka Panchag,

गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag,

26 मार्च 2026 का पंचांग, 26 March 2026 Ka Panchang,


  • गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 26 मार्च 2026 का पंचांग,
  • दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
  • गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए ।

    गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
  • गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
    इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।

    ऐसा होगा हिंदू नव संवत्सर, हिन्दू नव वर्ष के राजा और मंत्री होंगे यह देवता,
  • गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।
    इस उपाय को करने से कार्यो में अड़चने दूर होती है, भाग्य चमकने लगता है, बृहस्पति देव की कृपा मिलती है।

यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।
और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।

गुरुवार को विष्णु जी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, गुरुवार को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ परम फलदाई है

इस बार नवरात्री में माँ दुर्गा अपने इस वाहन पर सवार होकर आएगी और ऐसा रहेगा उसका फल, 

  • *विक्रम संवत् 2083,
  • * शक संवत – 1948,
    *कलि संवत 5128,
    * अयन – उत्तरायण,
    * ऋतु – बसंत ऋतु,
    * मास – चैत्र माह
    * पक्ष – शुक्ल पक्ष
    *चंद्र बल – मेष, मिथुन, सिंह, कन्या, धनु, मकर,

गुरुवार को बृहस्पति देव की होरा :-

प्रात: 6.18 AM से 7.20 AM तक

दोपहर 01.28 PM से 2.30 PM तक

रात्रि 20.33 PM से 9.31 PM तक

आज गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा के समय दाहिने हाथ की तर्जनी ऊंगली ( अंगूठे के बगल वाली उंगली ) के नीचे गुरु पर्वत और उस पूरी ऊंगली पर बृहस्पति देव के मंत्र का जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य ) I

गुरुवार को बृहस्पति की होरा में अधिक से अधिक बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करें । शिक्षा, मान – सम्मान, व्यापार, कारोबार, नए कार्यो के प्रारम्भ के लिए गुरुवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा में बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

बृहस्पति देव के मन्त्र

ॐ बृं बृहस्पतये नमः।। अथवा

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः।।


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  • तिथि (Tithi) :- अष्टमी 11.48 AM तक तत्पश्चात नवमी
  • तिथि का स्वामी – अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी और नवमी तिथि की स्वामी माँ गौरी और कुबेर देव जी है ।
  • आज नवरात्री का आठवें दिन, दुर्गा अष्टमी का दिन है। नवरात्री के आठवें दिन माँ महागौरी की पूजा की जाती है। महागौरी को भगवान गणेश की माता के रूप में भी जाना जाता है ।
  • इनकी उपासना से भक्तों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। कोई भी संकट, दुःख उसके पास भी नहीं आता है । मां गौरी ममता की मूर्ति कही जाती हैं जो अपने भक्तों को अपने पुत्र समान प्रेम करती हैं।
  • मां महागौरी का ये रूप बेहद सरस, सुलभ और मोहक है।
  • इनका वर्ण पूर्णतः गौर है, इनके सभी वस्त्र एवं आभूषण आदि भी श्वेत हैं। इनकी आयु आठ वर्ष की मानी गई है और इनकी मुद्रा अत्यंत शांत है।
  • महागौरी का वाहन वृषभ अर्थात बैल है। इन की चार भुजाएँ हैं, इनके ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है। ऊपरवाले बाएँ हाथ में डमरू और नीचे के बाएँ हाथ में वर-मुद्रा हैं।
  • अष्टमी के दिन महिलाएं अपने सुहाग के लिए देवी मां को चुनरी भेंट करती हैं। अष्टमी तिथि को माँ गौरी को दूध से बने नैवेद्य एवं नारियल का भोग लगाएं।
  • माँ गौरी की आराधना से सभी पाप नष्ट हो जाते है एवं धन, यश और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है । ये धन, वैभव और सुख-शांति की अधिष्ठात्री देवी हैं।
  • नवरात्री की अष्टमी के दिन मां गौरी की कृपा के लिए यहाँ दिए गए मन्त्र की एक माला का जाप करना चाहिए ।
  • ॐ महा गौरी देव्यै नम:”

    अथवा
  • या देवी सर्वभू‍तेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

  • जिनके घरो में अष्टमी पूजी जाती है जो सात नवरात्री का ब्रत रखते है उनके यहाँ अष्टमी की पूजा के बाद नन्ही कुंवारी कन्याओं को भोजन कराना शुभ फल देने वाला माना जाता है।
  • अष्टमी के दिन नन्ही कन्याओं जिन्हे कंजक कहा जाता है की पूजा करना, उन्हें प्रेम पूर्वक भोजन करवाकर उन्हें उपहार देने से माँ दुर्गा की असीम कृपा मिलती है ।

अपनी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए नवरात्री के शुक्रवार और अष्टमी में अवश्य ही करें ये उपाय  

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नक्षत्र (Nakshatra) – आद्रा 16.19 PM तक तत्पश्चात पुनर्वसु

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी –   आर्द्रा नक्षत्र के देवता रुद्र (शिव) और नक्षत्र के स्वामी राहु जी है ।

आर्द्रा नक्षत्र आकाश मंडल में छठवां नक्षत्र है। यह मिथुन राशि में आता है और राहु का नक्षत्र है। आर्द्रा नक्षत्र कई तारों का समूह न होकर केवल एक तारा है। इसका आकार हीरे अथवा वज्र अथवा आँसू की तरह है।

आद्रा नक्षत्र का आराध्य वृक्ष कृष्णागरू,काला तेंदू और नक्षत्र स्वभाव तीक्ष्ण माना गया है ।

आर्द्रा नक्षत्र आकाश मंडल में छठवां नक्षत्र है। यह मिथुन राशि में आता है और राहु का नक्षत्र है। आर्द्रा नक्षत्र कई तारों का समूह न होकर केवल एक तारा है। इसका आकार हीरे अथवा वज्र अथवा आँसू की तरह है।

आर्द्रा नक्षत्र का आराध्य वृक्ष कृष्णागरू,काला तेंदू और नक्षत्र स्वभाव तीक्ष्ण माना गया है ।

आर्द्रा नक्षत्र में जन्मे जातको पर राहु का प्रभाव रहता है अत: इन्हे राहु का उपाय अवश्य करना चाहिए । इन्हे अनैतिक कार्यो से सदैव दूर रहना चाहिए अन्यथा इन्हे अपमान अपयश का सामना करना पड़ सकता है ।

आर्द्रा नक्षत्र के पुरुष हंसमुख, जिम्मेदार, आकर्षक व्यक्तित्व वाले, नए नए खोजो वाले लेकिन चालाक और अपना काम निकलने वाले होते है। लेकिन यदि बुध और रा‍हु खराब हो तो जातक घमंडी, बुरे विचारों वाले, पराई स्त्री में आसक्त रहने वाले, दुखी स्वाभाव वाले भी होते हैं।

आर्द्रा नक्षत्र में पैदा हुई महिला बुद्विमान, व्यवहार कुशल और शांतिप्रिय होती हैं। यह खूब खर्चा करने वाली, लेकिन हमेशा मीन मेख निकालने वाली भी होती है।

समान्यता इनके माता-पिता में बहुत ही अनबन रहती है, अर्थात इन्हे घर में कलह देखना पड़ता है।

आर्द्रा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 2, 4, 7 और 9, भाग्यशाली रंग, लाल और बैंगनी,  भाग्यशाली दिन मंगलवार तथा गुरुवार का माना जाता है ।

आद्रा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातको को तथा सभी मनुष्यों को जिस दिन आर्द्रा नक्षत्र हो उस दिन ॐ रुद्राय नम: मन्त्र की एक माला का जप करना चाहिए, इससे आर्द्रा नक्षत्र के शुभ फल मिलते है ।  

आर्द्रा नक्षत्र के जातक के लिए भगवान शिव की आराधना करना शुभदायक होता है।  भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप करना चाहिए. सोमवार का व्रत एवं जाप इत्यादि करना उत्तम फल प्रदान करने वाला होता है। 



कैसा भी सिर दर्द हो उसे करें तुरंत छूमंतर, जानिए सिर दर्द के अचूक पा

आज नवरात्री के आठवें दिन, दुर्गा अष्टमी के दिन बहुत से भक्त गण नन्ही नन्ही कन्याओं जिन्हे कंजके भी कहते है उनकी पूजा करते है, उनके भक्ति भाव से अपने घर में बुलाकर उन्हें भोजन कराकर उन्हें उपहार देकर, उनसे आशीर्वाद लेते है ।

मान्यता है कि जो भी भक्त गण नवरात्रि में माँ दुर्गा की पूजा करते है, नवरात्री का ब्रत रखते है उन्हें नवरात्री की अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं का पूजन अवश्य ही करना चाहिए । नवरात्री में कन्या पूजन के बिना ब्रत पूर्ण नहीं माना जाता है ।

शास्त्रों के अनुसार माँ दुर्गा होम, जप और दान से इतनी प्रसन्न नहीं होतीं जितनी कन्या पूजन से प्रसन्न होती हैं। कन्या पूजन से सभी तरह के वास्तु दोष,विघ्न, भय और शत्रुओं का नाश होता है।

देवी पुराण में लिखा है कि, इन्द्र ने एक बार ब्रह्मा जी से देवी दुर्गा को प्रसन्न करने की विधि पूछी तो ब्रह्मा जी ने माँ दुर्गा को प्रसन्न करने की सर्वोत्तम विधि कन्या पूजन को ही बताया, कन्या पूजन से सभी तरह के वास्तु दोष,विघ्न, भय और शत्रुओं का नाश होता है।

नवरात्री की अष्टमी तथा नवमी के दिन कन्या पूजन में 9 कन्याओं का पूजन करना चाहिए, साथ ही एक छोटे बालक को भी साथ में पूज कर उसे भी भोजन करवाना चाहिए ।

नवरात्रि में कन्या पूजन में ध्यान रखे कि कन्याओ की उम्र दो वर्ष से कम और दस वर्ष से ज्यादा भी न हो ।

पूजी जाने वाली कन्याओं को देवी के शक्ति स्वरूप का प्रतीक मानकर उनको श्रद्धा से जीमाना चाहिए ।

नवरात्र में नौ कन्याओं को माता के नौ रूपों क्रमश: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी एवं सिद्धिदात्री का रूप मानकर उनकी पूजा का विधान है।

शास्त्रों के अनुसार नवरात्र में की गयी पूजा-पाठ, आराधना और कन्या पूजा कभी निष्फल नहीं होती भक्तो को उसका फल अवश्य ही मिलता है।

कन्या पूजन में सभी कन्याओं और एक बालक के पहले चरण धोकर, साफ कर के उन्हें साफ आसान पर बिठायें फिर उन सभी के मस्तक पर रोली का तिलक करके उनके हाथ में कलावा बांधें । फिर जो भी श्रद्धा पूर्वक बना हो उन्हें इन कन्याओं के आगे परोसे ।

इसके बाद कन्या पूजन के दिन जिस प्रशाद से मां दुर्गा को भोग लगाया हो उस प्रशाद को भोग के बाद सबसे पहले कन्याओं को ही खिलाना चाहिए।

कन्याओं के भोजन करने के उपरांत उन्हें अपनी सामर्थनुसार उपहार और दक्षिणा देकर उन सब के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लें, मन ही मन मे माँ का ध्यान करके हुए अपनी गलतियों, पापो के लिए क्षमा मांगते हुए अपनी मनोकामना भी कहे, और उन कंजको को अगले नवरात्री में फिर से अपने घर में आने का निमंत्रण दें ।

ऐसा करने से माँ की कृपा से सभी विघ्नो, रोगो, सभी दोषो का नाश होता है, निश्चय ही सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है ।

रामनवमी के दिन इन उपायों से मिलेगा भगवान श्री राम का आशीर्वाद,  घर में हर्ष और प्रेम की होगी वर्षा। जानिए राम नवमी के अचूक उपाय

योग :- शोभन 12.32 AM शुक्रवार 27 मार्च तक

योग के स्वामी, स्वभाव :-  शोभन योग के स्वामी बृहस्पति देव एवं स्वभाव श्रेष्ठ है ।

प्रथम करण :- बव 11.48 AM तक

करण के स्वामी, स्वभाव :-  बव करण के स्वामी इंद्र देव और स्वभाव सौम्य है ।

द्वितीय करण :- बालव 22.55 PM तक तत्पश्चात कौलव

करण के स्वामी, स्वभाव :-       बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।

ब्रह्म मुहूर्त : 4.45 AM से 5.31 AM तक

विजय मुहूर्त : 14.30 PM से 15.19 PM तक

गोधूलि मुहूर्त : 18.34 PM से 18.58 PM तक

अमृत काल : 06.50 PM से 08.21 PM तक

  • दिशाशूल (Dishashool)– बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – गुलिक 09:30 AM से 11 AM बजे तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)– दिन – 1:30 PM से 3:00 PM तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 06:18
  • सूर्यास्त – सायं 18.36
  • विशेष – अष्टमी को नारियल का सेवन नहीं करना चाहिए, अष्टमी को नारियल का सेवन करने से बुध्दि का नाश होता है  ।
  • शास्त्रों के अनुसार किसी भी पक्ष की नवमी तिथि में लौकी और कद्दू का सेवन नहीं करना चाहिए । 
  • पर्व त्यौहार– नवरात्री का आठवाँ दिन, दुर्गा अष्टमी, जय माँ महा गौरी
  • मुहूर्त (Muhurt) 

अवश्य पढ़ें :- अगर गिरते हो बाल तो ना होएं परेशान तुरंत करें ये उपाय, जानिए बालो का गिरना कैसे रोकें,

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )
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Shukrwar ka panchag, शुक्रवार का पंचांग, 27 मार्च 2026 का पंचांग, आप सभी भक्तो को चैत्र नवरात्री के नवें दिन, महा नवमी, राम नवमी की हार्दिक ...