रविवार का पंचांग, Raviwar Ka Panchag, 30 मार्च का पंचांग 2025 का पंचांग,
आप सभी को चैत्र नवरात्री, हिन्दू नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें
रविवार का पंचांग, Raviwar Ka Panchag,
30 मार्च 2025 का पंचांग, 30 March 2025 ka Panchang,
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Panchang, पंचाग, आज का पंचांग, aaj ka panchang, Panchang 2025, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-
1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)
पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे । जानिए रविवार का पंचांग, Ravivar Ka Panchang।
रविवार का पंचांग, Ravivar Ka Panchang,
30 मार्च 2024 का पंचांग, 30 March 2024 ka Panchang,
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भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
।। आज का दिन अत्यंत मंगलमय हो ।।
👉🏽दिन (वार) रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
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रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है । अत: रविवार के दिन मंदिर में भैरव जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
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*विक्रम संवत् 2081,
* शक संवत – 1945,
*कलि संवत 5124
* अयन – उत्तरायण,
* ऋतु – बसंत ऋतु,
* मास – चैत्र माह
* पक्ष – शुक्ल पक्ष
* चंद्र बल – वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर, मीन,
रविवार को सूर्य देव की होरा :-
प्रात: 6.14 AM से 7.16 AM तक
दोपहर 01.27 PM से 02.29 PM तक
रात्रि 20.33 PM से 9.31 PM तक
रविवार को सूर्य की होरा में अधिक से अधिक अनामिका उंगली / रिंग फिंगर पर थोड़ा सा घी लगाकर मसाज करते हुए सूर्य देव के मंत्रो का जाप करें ।
सुख समृद्धि, मान सम्मान, सरकारी कार्यो, नौकरी, साहसिक कार्यो, राजनीती, कोर्ट – कचहरी आदि कार्यो में सफलता के लिए रविवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।
रविवार के दिन सूर्य देव की होरा में सूर्य देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में सूर्य ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।
यह है नवरात्री में कलश स्थापना का सर्वोत्तम मुहूर्त, इस समय घर पर कलश की स्थापना तो माँ दुर्गा की मिलेगी असीम कृपा

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सूर्य देव के मन्त्र :-
ॐ भास्कराय नमः।।
अथवा
ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
- तिथि (Tithi) – प्रतिपदा 12.49 PM तक तत्पश्चात द्वितीया,
- तिथि के स्वामी :- प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव जी और द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्मा जी है ।
- आज से अति पुण्य दायक चैत्र नवरात्री प्रारम्भ हो रहे है । नवरात्री के इन 9 दिनों में प्रतिदिन माँ दुर्गा जी के अलग अलग शक्ति रूपों की आराधना की जाती है, मान्यता है कि इन 9 दिनों में माता दुर्गा जी के रूपों की आराधना से जीवन के सभी कष्ट दूर होते है, समस्त मनोकामनाएं निश्चित ही पूर्ण होती है ।
- नवरात्री के पहले दिन माँ शैलपुत्री की आराधना की जाती हैं। ये ही नवदुर्गाओं में माँ दुर्गा का पहला स्वरूप हैं । पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम ‘शैलपुत्री’ पड़ा।
- नवरात्र-पूजन में प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है। मां शैलपूत्री सौभाग्य का प्रतीक मानी गयी हैं।
- माँ शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में कमल-पुष्प सुशोभित है। देवी का वाहन बैल है। मां शैलपुत्री के मस्तक पर अर्ध चंद्र विराजित है। माता शैलपुत्री मूलाधार चक्र की देवी मानी जाती हैं।
- अपने पूर्व जन्म में ये सती के रूप में प्रजापति दक्ष की कन्या के रूप में उत्पन्न हुई थीं, उस जन्म में सती माता का विवाह भगवान शंकर जी से हुआ था।
- पूर्वजन्म की भाँति इस जन्म में भी ‘शैलपुत्री’ देवी का विवाह भी शंकरजी से ही हुआ। अर्थात इस जन्म में भी वे शिवजी की ही अर्द्धांगिनी बनीं।
- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मां शैलपुत्री चंद्रमा के दोष को दूर करती हैं। जिन लोगों का चंद्रमा कमजोर है, उन्हें माता के शैलपुत्री स्वरूप की आराधना करनी चाहिए।
- आज माता के दिव्य मन्त्र – ॐ शं शैलपुत्री देव्यै: नम:। की एक माला का जप अवश्य ही करना चाहिए ।
- पहले नवरात्र के दिन मां शैलपुत्री को गाय के घी भोग लगाने चाहिए, इससे आरोग्य की प्राप्ति होती है ।
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आज हिंदू नव वर्ष 2082 प्रारम्भ हो रहा है ।चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा के दिन से हिन्दु नव वर्ष अर्थात हिन्दु नव संवत्सर की शुरुआत मानी जाती है । धार्मिक ग्रंथो में इस दिन को बहुत पुण्यदायक , शुभ एवं महत्वपूर्ण माना गया है ।
‘चैत्रे मासि जगद ब्रह्मा ससर्ज प्रथमे अहनि,
शुक्ल पक्षे समग्रेतु तदा सूर्योदये सति’
ब्रह्म पुराण में लिखे इस श्लोक के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पास के सूर्योदय पर सृष्टि के रचियता भगवान ब्रह्माजी ने इस सृष्टि की रचना की थी और इसी दिन से नव संवतसर, nav samvatsar, प्रारम्भ होता है ।
इस बार विक्रम संवत्सर 2082 का नाम काल युक्त होगा, रविवार से शुरू होने के कारण इसके राजा और मंत्री दोनों जी सूर्य देव जी होंगे।
आज चैत्र नवरात्र की प्रतिपदा, 30 मार्च रविवार के दिन विक्रम संवत 2082 का आरंभ हो जाएगा ।
महाराष्ट्र में हिन्दू नववर्ष या नव-सवंत्सर के आरंभ के दिन को गुड़ी पड़वा के रूप में पूर्ण हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाया जाता है ।
चैत्र प्रतिपदा को बहुत ही शुभ, स्वंय सिद्ध मुहूर्त माना जाता है । मान्यता है कि इस दिन शुभ किये गए शुभ कार्यो में निश्चित ही सफलता मिलती है ।
चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिपदा के दिन ही ब्रह्माण्ड के रचियता भगवान ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि का सृजन किया था।
शास्त्रो के अनुसार मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का राज्याभिषेक भी इसी शुभ दिन किया गया था ।
इसी दिन से माँ दुर्गा के श्रद्धा, भक्ति और शक्ति के नौ दिन के नवरात्रो की शुरुआत होती है।
शास्त्रों के अनुसार सतयुग का आरम्भ भी इसी तिथि से माना जाता है ।
मान्यता है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही भगवान श्री विष्णु जी का मत्स्य अवतार हुआ था ।
आज के दिन घर की छत पर ऊँचा लाल / केसरीया ध्वज अवश्य लगवाएं । यह ॐ , दुर्गा जी , हनुमान जी किसी का भी हो सकता है ।
शास्त्रो के अनुसार सूर्य जब भी मेष राशी में प्रवेश करें अर्थात चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन प्रात: काल नीम की ताजी कपोलें मिश्री / गुड़ के साथ चबा अथवा पीस कर खाने से वर्ष भर रोग दूर रहते है ।
इस दिन दुर्गा सप्तशती, हनुमानचलीसा, सुन्दर काण्ड आदि का पाठ अवश्य ही करें ।
आज हिन्दू नव वर्ष के प्रारम्भ होने पर एक दूसरे को बधाई, शुभकामना सन्देश अवश्य भेजें ।

- नक्षत्र (Nakshatra) – रेवती 16.35 PM तक तत्पश्चात अश्विनी,
- नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी- रेवती नक्षत्र का स्वामी बुद्धि के कारक बुध देव जी एवं इस नक्षत्र के देवता “पूषा” हैं जो सूर्य भगवान का ही एक रूप है।
रेवती नक्षत्र आकाश मंडल में अंतिम नक्षत्र है। यह मीन राशि में आता है। रेवती का अर्थ है ‘समृद्ध’ और यह सुख – समृद्धि, धन और ऐश्वर्य का प्रतीक माना जाता है।
रेवती नक्षत्र की गणना गंडमूल नक्षत्रों में की जाती है । इस नक्षत्र में जन्मे जातको को विष्णु भगवान की पूजा अवश्य करनी चाहिए । इन्हे नित्य विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से जीवन में श्रेष्ठ सफलता की प्राप्ति होती है । रेवती नक्षत्र का आराध्य वृक्ष महुआ और स्वभाव मृदु माना गया है ।
रेवती नक्षत्र में जन्म लेने वाले स्त्री और पुरुष दोनों में विपरीत लिंग के व्यक्तियों के प्रति अधिक आकर्षण होता है। इनके दोस्तों में विपरीत लिंग के व्यक्तियों की अच्छी संख्या होती है।
रेवती नक्षत्र में जन्मे जातक मध्यम कद और गौर वर्ण के व्यक्ति होते हैं। यह छल कपट से दूर रहते है ।
यह कुशाग्र बुध्दि के, ईश्वर में आस्था रखने वाले, व्यवहार कुशल लेकिन बहुत ही जिद्दी होते है, इन्हे किसी की भी गलत बात सहन नहीं होती है। यह अपने जीवन में काफी सुदूर / विदेश यात्रायें करते है ।
रेवती नक्षत्र के लिए भाग्यशाली अंक 3 और 5, भाग्यशाली रंग भूरा, और भाग्यशाली दिन शनिवार और गुरुवार होता है ।
रेवती नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को इस नक्षत्र देवता के नाममंत्र:- “ॐ रेवत्यै नमः”l मन्त्र की माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।
आज इस तरह से मनाये हिन्दू नव संवत्सर पूरे वर्ष मिलेंगे शुभ समाचार,
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- योग (Yog) – इंद्र 17.54 PM तक तत्पश्चात वैधृति
- योग के स्वामी :- इंद्र योग के स्वामी पितृ देव जी एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है ।
- प्रथम करण : – बव 12.49 PM तक
- करण के स्वामी, स्वभाव :- बव करण के स्वामी इंद्र देव और स्वभाव सौम्य है ।
- द्वितीय करण : – बालव 22.59 PM तक तत्पश्चात कौलव,
- करण के स्वामी, स्वभाव :- बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।
- ब्रह्म मुहूर्त : 4.41 AM से 5.27 AM तक
- विजय मुहूर्त : 14.30 PM से 15.19 PM तक
- गोधूलि मुहूर्त : 18.37 PM से 19.00 PM तक
- दिशाशूल (Dishashool)- रविवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से पान या घी खाकर जाएँ ।
- गुलिक काल : – अपराह्न – 3:00 से 4:30 तक ।
- राहुकाल (Rahukaal)-सायं – 4:30 से 6:00 तक ।
- सूर्योदय – प्रातः 06:13
- सूर्यास्त – सायं 18:38
आँखों की रौशनी बढ़ाने, आँखों से चश्मा उतारने के लिए अवश्य करें ये उपाय - विशेष – रविवार को बिल्ब के वृक्ष / पौधे की पूजा अवश्य करनी चाहिए इससे समस्त पापो का नाश होता है, पुण्य बढ़ते है।
रविवार के दिन भगवान सूर्य देव को आक का फूल अर्पण करना किसी भी यज्ञ के फल से कम नहीं है, इससे सूर्य देव की सदैव कृपा बनी रहती है ।
रविवार को अदरक और मसूर की दाल का सेवन बिलकुल भी नहीं करना चाहिए ।
प्रतिपदा के दिन कद्दू / पेठे का सेवन नहीं करना चाहिए, प्रतिपदा के दिन इनका सेवन करने से धन की हानि होती है ।
- पर्व त्यौहार- चैत्र नवरात्री, हिन्दू नव वर्ष प्रारम्भ
- मुहूर्त (Muhurt) –
“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
आप का आज का दिन अत्यंत शुभ फलो वाला हो ।
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आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।
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