nav samvatsar, नव संवत्सर 2082,

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शास्त्रों के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में जिस दिन सूर्योदय के समय प्रतिपदा हो, उस दिन से नव संवत्सर, nav samvatsar, आरंभ होता है।

चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा के दिन से हिन्दु नव वर्ष अर्थात हिन्दु नव संवत्सर Hindi nav samvatsar की शुरुआत मानी जाती है । धार्मिक ग्रंथो में इस दिन को बहुत पुण्यदायक , शुभ एवं महत्वपूर्ण माना गया है ।

‘चैत्रे मासि जगद ब्रह्मा ससर्ज प्रथमे अहनि,
शुक्ल पक्षे समग्रेतु तदा सूर्योदये सति’

 ब्रह्म पुराण में लिखे इस श्लोक के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पास के सूर्योदय पर सृष्टि के रचियता भगवान ब्रह्माजी ने इस सृष्टि की रचना की थी और इसी दिन से नव संवतसर, nav samvatsar, प्रारम्भ होता है ।

चैत्र नवरात्र की प्रतिपदा, 30 मार्च रविवार के दिन विक्रम संवत 2082 का आरंभ हो जाएगा ।

नवरात्री में घर, कारोबार में इस विधि से करें कलश की स्थापना, अवश्य जानिए कलश स्थापना की सही और बहुत ही आसान विधि

nav samvatsar 2081, नव संवत्सर 2081,

इस बार विक्रम संवत्सर 2082 का नाम काल युक्त होगा, रविवार से शुरू होने के कारण इसके राजा और मंत्री दोनों जी सूर्य देव जी होंगे।

शास्त्रों के अनुसार नवसंवत्सर का आरंभ जिस वार से होता है, उस वार का अधिपति ग्रह ही उस संवत्सर का राजा कहलाता है।

चूँकि इस बार रविवार के दिन हिन्दू नववर्ष का प्रारम्भ हो रहा है, इसलिए इस संवत्सर के राजा सूर्य देव जी होंगे ।

आज ही के दिन से नवरात्री का भी प्रारम्भ हो जायेगा इस वर्ष माँ दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी और भैसे पर सवार होकर जाएगी |

नवरात्री के दिन बहुत ही सिद्ध और शक्ति संपन्न होते है, नवरात्री के इस उपाय से मिलेगी सभी कार्यों में श्रेष्ठ सफलता, जानिए नवरात्री के अचूक उपाय 

शास्त्रो में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को एक स्वयं सिद्ध अमृत तिथि माना गया है । यह दिन इतना शुभ माना गया है कि शास्त्रो में उल्लेखित है कि यदि  इस दिन किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत की जाए या कोई संकल्प लिया जाए तो उसमें अवश्य ही सफलता मिलती है।

हिन्दू पंचांग के अनुसार साल 2025 में चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 29 मार्च को सांय 4.29 PM मिनट से प्रारम्भ होगी जो अगले दिन रविवार 30 मार्च को दोपहर 12.51 PM तक रहेगी

प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ – 29 मार्च, 2025 को 16:29 PM बजे से

प्रतिपदा तिथि समाप्त – 30 मार्च 2025 को दोपहर 12:51 PM बजे तक

महाराष्ट्र में हिन्दू नववर्ष या नव-सवंत्सर के आरंभ के दिन को गुड़ी पड़वा के रूप में पूर्ण हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाया जाता है।

अवश्य पढ़ें :- इन उपायों से थायरॉइड रहेगा बिलकुल कण्ट्रोल में, यह है थायरॉइड के अचूक उपचार 

नव संवतसर का बहुत ही धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व भी है।

चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिपदा के दिन ही लगभग एक अरब 97 करोड़ 39 लाख 49 हजार 123  साल पहले भगवान ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि का सृजन किया था।

 शास्त्रो के अनुसार मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का राज्याभिषेक भी इसी शुभ दिन किया गया था ।

इसी दिन से माँ दुर्गा के श्रद्धा, भक्ति और शक्ति के नौ दिन के नवरात्रो की शुरुआत होती है।

# शास्त्रों के अनुसार सतयुग का आरम्भ भी इसी तिथि से माना जाता है ।

# मान्यता है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही भगवान श्री विष्णु जी का मत्स्य अवतार हुआ था ।

# चैत्र शुक्लपक्ष की प्रतिपदा अर्थात नव संवत्सर के दिन ही सम्राट विक्रमादित्य ने 2081 साल पहले अपना राज्य स्थापित कर विक्रम संवत की शुरुआत की थी।

 # नव संवत्सर के दिन ही विक्रमादित्य की भांति शालिवाहन ने भी हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में अपना श्रेष्ठ राज्य स्थापित किया था। इसी दिन से शालिवाहन संवत्सर का प्रारंभ भी माना जाता है ।  

#  सिंध प्रांत के प्रसिद्घ समाज सुधारक और सिंधीयो के पराम् पूजनीय वरुणावतार संत झूलेलाल इसी दिन अवतरित हुए थे ।

# इस शुभ दिन सिख धर्म के द्वितीय गुरु श्री अंगददेव का जन्म दिवस भी माना जाता है।

 # शुभ हिन्दु नव संवत्सर के दिन ही समाज को नयी राह दिखाने के लिए प्रसिद्द समाज सुधारक और विचारक स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की थी।

 # 5127 वर्ष पूर्व युगाब्द संवत्सर के प्रथम दिन ही युधिष्ठिर का राज्याभिषेक भी हुआ था।

मान्यता है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन नीम के नए कोमल पत्तों को काली मिर्च, के साथ खाने से वर्ष भर अरोग्यता रहती है।

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मित्रो हम इस साईट के माध्यम से वर्ष 2010 से निरंतर आप लोगो के साथ जुड़े है। आप भारत या विश्व के किसी भी स्थान पर रहते है, अपने धर्म अपनी संस्कृति को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए www.memorymuseum.net के साथ अवश्य जुड़ें, हमारा सहयोग करें ।

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।


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manas pardal
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manas pardal
March 25, 2025
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nav samvatsar 2082, नव संवत्सर 2082,
शास्त्रों के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में जिस दिन सूर्योदय के समय प्रतिपदा हो, उस दिन से नव संवत्सर, nav samvatsar, आरंभ होता है।

चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा के दिन से हिन्दु नव वर्ष अर्थात हिन्दु नव संवत्सर Hindi nav samvatsar की शुरुआत मानी जाती है । धार्मिक ग्रंथो में इस दिन को बहुत पुण्यदायक , शुभ एवं महत्वपूर्ण माना गया है ।

‘चैत्रे मासि जगद ब्रह्मा ससर्ज प्रथमे अहनि,
शुक्ल पक्षे समग्रेतु तदा सूर्योदये सति’

 ब्रह्म पुराण में लिखे इस श्लोक के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पास के सूर्योदय पर सृष्टि के रचियता भगवान ब्रह्माजी ने इस सृष्टि की रचना की थी और इसी दिन से नव संवतसर, nav samvatsar, प्रारम्भ होता है ।

चैत्र नवरात्र की प्रतिपदा, 30 मार्च रविवार के दिन विक्रम संवत 2082 का आरंभ हो जाएगा ।

नवरात्री में घर, कारोबार में इस विधि से करें कलश की स्थापना, अवश्य जानिए कलश स्थापना की सही और बहुत ही आसान विधि
nav samvatsar 2081, नव संवत्सर 2081,
इस बार विक्रम संवत्सर 2082 का नाम काल युक्त होगा, रविवार से शुरू होने के कारण इसके राजा और मंत्री दोनों जी सूर्य देव जी होंगे।

शास्त्रों के अनुसार नवसंवत्सर का आरंभ जिस वार से होता है, उस वार का अधिपति ग्रह ही उस संवत्सर का राजा कहलाता है।

चूँकि इस बार रविवार के दिन हिन्दू नववर्ष का प्रारम्भ हो रहा है, इसलिए इस संवत्सर के राजा सूर्य देव जी होंगे ।

आज ही के दिन से नवरात्री का भी प्रारम्भ हो जायेगा इस वर्ष माँ दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी और भैसे पर सवार होकर जाएगी |

नवरात्री के दिन बहुत ही सिद्ध और शक्ति संपन्न होते है, नवरात्री के इस उपाय से मिलेगी सभी कार्यों में श्रेष्ठ सफलता, जानिए नवरात्री के अचूक उपाय 

शास्त्रो में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को एक स्वयं सिद्ध अमृत तिथि माना गया है । यह दिन इतना शुभ माना गया है कि शास्त्रो में उल्लेखित है कि यदि इस दिन किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत की जाए या कोई संकल्प लिया जाए तो उसमें अवश्य ही सफलता मिलती है।

हिन्दू पंचांग के अनुसार साल 2025 में चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 29 मार्च को सांय 4.29 PM मिनट से प्रारम्भ होगी जो अगले दिन रविवार 30 मार्च को दोपहर 12.51 PM तक रहेगी

प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ – 29 मार्च, 2025 को 16:29 PM बजे से

प्रतिपदा तिथि समाप्त – 30 मार्च 2025 को दोपहर 12:51 PM बजे तक

महाराष्ट्र में हिन्दू नववर्ष या नव-सवंत्सर के आरंभ के दिन को गुड़ी पड़वा के रूप में पूर्ण हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाया जाता है।

अवश्य पढ़ें :- इन उपायों से थायरॉइड रहेगा बिलकुल कण्ट्रोल में, यह है थायरॉइड के अचूक उपचार 
नव संवतसर का बहुत ही धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व भी है।

चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिपदा के दिन ही लगभग एक अरब 97 करोड़ 39 लाख 49 हजार 123 साल पहले भगवान ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि का सृजन किया था।

 शास्त्रो के अनुसार मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का राज्याभिषेक भी इसी शुभ दिन किया गया था ।

इसी दिन से माँ दुर्गा के श्रद्धा, भक्ति और शक्ति के नौ दिन के नवरात्रो की शुरुआत होती है।


# शास्त्रों के अनुसार सतयुग का आरम्भ भी इसी तिथि से माना जाता है ।

# मान्यता है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही भगवान श्री विष्णु जी का मत्स्य अवतार हुआ था ।

# चैत्र शुक्लपक्ष की प्रतिपदा अर्थात नव संवत्सर के दिन ही सम्राट विक्रमादित्य ने 2081 साल पहले अपना राज्य स्थापित कर विक्रम संवत की शुरुआत की थी।

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# सिंध प्रांत के प्रसिद्घ समाज सुधारक और सिंधीयो के पराम् पूजनीय वरुणावतार संत झूलेलाल इसी दिन अवतरित हुए थे ।

# इस शुभ दिन सिख धर्म के द्वितीय गुरु श्री अंगददेव का जन्म दिवस भी माना जाता है।

 # शुभ हिन्दु नव संवत्सर के दिन ही समाज को नयी राह दिखाने के लिए प्रसिद्द समाज सुधारक और विचारक स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की थी।

 # 5127 वर्ष पूर्व युगाब्द संवत्सर के प्रथम दिन ही युधिष्ठिर का राज्याभिषेक भी हुआ था।


मान्यता है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन नीम के नए कोमल पत्तों को काली मिर्च, के साथ खाने से वर्ष भर अरोग्यता रहती है।
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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय 94252 03501
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ 07714070168)
कुंडली, कर्मकाण्ड एवं वास्तु विशेषज्ञ

पंडित ज्ञानेंद्र त्रिपाठी जी

कुंडली, कर्मकाण्ड एवं वास्तु विशेषज्ञ

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