रक्षा बंधन का शुभ मुहूर्त, raksha bandhan ka shubh muhurth, raksha bandhan 2026,

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रक्षा बंधन 2026, raksha bandhan 2026,

इस साल 2026 में श्रावण मास की पूर्णिमा शुक्रवार 28 अगस्‍त को है।

हिन्दू धर्म में रक्षाबंधन ( Raksha Bandhan ) का पर्व बहन-भाई के पवित्र प्रेम के लिए मनाया जाता है । शास्त्रों के अनुसार राखी, रक्षा बंधन के शुभ मुहूर्त ( raksha bandhan ka shubh muhurth, ) में ही बांधनी चाहिए ।

इस दिन बहने अपने भाइयों की कलाई में रक्षा सूत्र / राखी बांधकर उनके कल्याण, उन्नति की कामना करती है और भाई हर हाल में आजीवन अपनी बहन की रक्षा , उसके सुख-सौभाग्य के लिए वचन देते है ।

मान्यता है कि यह रक्षासूत्र भाइयों को इतनी शक्ति देता है कि वह हर परिस्तिथि का मुकाबला करके विजय प्राप्त कर सके।

रक्षा बंधन का शुभ मुहूर्त, raksha bandhan ka shubh muhurth,

इस साल 2026 को सावन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि गुरुवार 27 अगस्त को सुबह 09 बजकर 08 मिनट पर प्रारंभ हो रही है जो शुक्रवार 28 अगस्त को सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगी।

सावन पूर्णिमा तिथि का शुभारंभ: 27 अगस्त, गुरुवार, सुबह 9:08 AM से

सावन पूर्णिमा तिथि का समापन: 28 अगस्त, शुक्रवार, दोपहर 09:48 AM पर

इस साल 2026 को सावन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि गुरुवार  27 अगस्त को सुबह  09 बजकर 09  मिनट पर प्रारंभ हो रही है जो शुक्रवार 28 अगस्त को दोपहर 9 बजकर 49 मिनट तक रहेगी। इसलिए रक्षाबंधन का पर्व शुक्रवार 28 अगस्त को ही मनाया जायेगा इसमें कोई भी संशय नहीं है ।

इस बार बहुत से ज्योतिष, सोशल मिडिया के बहुत से तथा कथित विद्वान रक्षा बंधन पर भद्रा, चंद्र ग्रहण और पंचक का साया बताकर लोगो को डरा रहे है, इन बातो को हैडिंग में डालकर अपने पेज, साइट का ट्रैफिक बढ़ा रहे है जबकि यह कहीं से भी सत्य नहीं है ।  

गुरुवार 27 अगस्त को भद्रा पूर्णिमा तिथि के प्रारम्भ होने के साथ ही अर्थात प्रात: 09.09 AM से ही लग जाएगी जो उसी रात को 9.29 PM तक रहेगी अर्थात शुक्रवार को जिस दिन रक्षा बंधन मनाया जायेगा उस दिन भद्रा नहीं है ।

गुरुवार 27 अगस्त को ही पंचक दोपहर में 1.36 PM पर लग जाएगा, पंचक पूरे पांच दिन रहते है  जिसका समापन मंगलवार 1 सितंबर को प्रात:  3.24 PM पर  होगा । शास्त्रों में पंचक में कोई भी शुभ कार्य करने को मना किया जाता है लेकिन पंचक के दौरान पूजा पाठ और धार्मिक कार्य किये जाते है उनपर किसी भी प्रकार का प्रतिबन्ध नहीं रखा गया है, इसलिए रक्षाबंधन पर्व पर पंचक का किसी भी तरह का कोई भी प्रभाव नहीं होगा ।

शुक्रवार 28 अगस्त को इस साल का अंतिम चंद्रग्रहण भी लगने जा रहा है  जो सुबह 06.53 से दोपहर 12.32 PM तक रहेगा ।  लेकिन, चूँकि यह चंद्रग्रहण भारत में दिखाई ही नहीं देगा तो इसका सूतक भी नहीं  लगेगा अर्थात इस ग्रहण का भारत के पर्व पर किसी भी प्रकार से कोई प्रभाव नहीं है । इसलिए आप इस दिन बिलकुल निश्चिंत होकर अपने भाइयों को राखी  बांध सकती है, भाई राखी बंधवा सकते है  ।

इस वर्ष 28 अगस्त को राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त पूर्णिमा तिथि के रहते ही प्रातः 5.37 AM  से प्रारंभ होगा और यह सुबह 9.48 मिनट तक रहेगा, लेकिन फिर 10.24 AM तक भी राखी बाँधी जा सकती है उसके बाद राहु काल लग जायेगा।

फिर दोपहर 12.05 PM 1.25 PM तक शुभ मुहूर्त है उसके बाद सायं 4.30 PM से सांय 6.00 बजे तक भी शुभ महूर्त है लेकिन बहनें अपने भाइयों को दोपहर 12.05 से सांयकाल सूर्यास्त से पहले कभी भी राखी बांध सकती है ।  

इस दिन शुक्रवार को राहु काल सुबह 10.30 AM से 12.00 PM तक है इस समय बहनो को अपने भाइयों को राखी नहीं बांधनी चाहिए ।

इस प्रकार सिर्फ राहु काल को छोड़कर लगभग पूरे दिन बहनों के लिए अपने भाइयों को राखी बांधने का अवसर उपलब्ध रहेगा I

इस तरह से मनाएं रक्षा बंधन का पर्व, भाइयों को मिलेगा निरोगिता, दीर्घ आयु, सुख समृद्धि का वरदान 

शास्त्र मत है कि — “भद्रायाम द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा, श्रावणी नृपति हंति ग्रामम दहति फाल्गुनी। ” अर्थात भद्रा व्याप्त होने पर श्रावणी (रक्षाबंधन) तथा फाल्गुनी (होलिकादाह) आदि विशेष रूप से त्याग देना चाहिए।

तब ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर क्या किया जाए ? इसके लिए भी शास्त्र ही समाधान प्रस्तुत करते है की– “तत्सत्वे तु रात्रावपि कुर्यादिति निर्णयामृते” अर्थात यदि कभी ऐसी स्थिति भी उत्पन्न हो जाए तो ये दोनो कार्य (रक्षाबंधन वा होलिकादाह) रात्रिकाल में भद्रा की समाप्ति के बाद भी करना शास्त्र सम्मत है।
(देखे निर्णयसिंधु का द्वितीय परिच्छेद पृष्ठ संख्या 248)

क्योंकि निर्णयसिंधु ग्रंथ में ही लिखा है कि — “इदम प्रतिपद्युतायाम न कार्यम, नंदायाम दर्शने रक्षा बलिदानम दशाशु च, भद्रायाम गोकुलक्रीड़ा देशनाशाय जायते” (मदनरत्न, ब्रह्म वैवर्त पुराण)।

अर्थात नंदा तिथि (प्रतिपदा) युक्त पूर्णिमा अथवा प्रतिपदा तिथि में रक्षाबंधन आदि कार्यों को कभी नहीं करना चाहिए इससे सम्पूर्ण देश की हानि होती है।

शास्त्रों के अनुसार भद्रा के समय में भाइयों को रक्षा सूत्र बांधना उत्पातकारी बताया गया है, मान्यता है कि रावण ने भी एक बार भद्रा के समय में अपनी बहन से रक्षा सूत्र बंधवाया तो एक वर्ष के भीतर ही उसके कुल का सर्वनाश हो गया ।

ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि भद्रा शनिदेव की बहन है, जिसे ब्रम्हा जी ने श्राप दिया था कि अगर भद्रा में कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य किया जायेगा उसका परिणाम अशुभ ही होगा इसी कारण से भद्रा में राखी नहीं बांधने की सलाह दी जाती है।

लेकिन जैसे की हम पहले ही लिख चुके है वर्ष 2026 में भद्रा पूर्णिमा तिथि के साथ ही लग जाएगी और शुक्रवार 28 अगस्त को भद्रा नहीं है इसलिए निश्चिंत होकर राखी बंधवाई जा सकती है ।

रक्षा बंधन के दिन राखी बांधते समय बहने बोले यह मन्त्र, भाइयों की सदैव होगी हर संकटो से होगी रक्षा 

  • शास्त्रों के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने के लिए दो समय का सर्वथा त्याग करना चाहिए, पहला है भद्रा और दूसरा है राहुकाल ।
  • इन दोनों समय में कभी भी राखी नहीं बांधनी चाहिए. ये दोनों की अशुभ हैं. रक्षाबंधन के दिन राहुकाल सुबह में 10:30 AM से 12:02 PM तक है ।

रक्षाबंधन के दिन बहने अपने भाइयों की कलाई में राखी बांधने के बाद दही में चीनी डालकर भाइयों को अपने हाथो से दो बार अवश्य खिलाएं ।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चन्द्रमा और शुक्र दोनों को ही सुख का कारक माना गया है । दही, चन्द्रमा का जो मन के कारक और चीनी, शुक्र ग्रह का जो ऐश्वर्य कारक है उन का प्रतिनिधित्व करते है, और भगवान भोलेनाथ जी को भी दही और शक्कर अर्पित करने का विशेष महत्त्व है ।

इसलिए यदि बहने अपने भाइयों को राखी बांधने के बाद पहले दो बार दही और चीनी खिलाकर फिर कोई अन्य मीठा या कुछ और खिलाएं तो पूरे वर्ष भाइयों को सुख, प्रसन्नता, धन, कार्यो में सफलता और निश्चित ही ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी ।

अपने भाइयो के जीवन में एक वर्ष में अद्भुत सुखद परिवर्तन देखिएगा ।

### ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय*     ### *अध्यात्म ज्योतिष परामर्श केंद्र*  
.     ### *श्याम नगर, रायपुर, छत्तीसगढ़*  
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 हर समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है आपकी प्रत्येक इच्छा, महत्वकांक्षा, जीवन में बुलंदियों पर पहुंचना या किसी भी तरह की समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है *व्यापार बढ़ोतरी किया कराया शादी के लिए माता-पिता को मनाना जब कहीं ना ही हो काम तो हमसे में समाधान हर मुश्किल से मुश्किल समस्या का समाधान ज्योतिष मेरा काम नहीं मेरी साधना है जब कहीं ना हो काम तो हमसे ले समाधान https://devlinai.co.in/own_projects/acharya-main/
*ॐ नमः शिवाय | जय सनातन* 🚩

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Guruwar Ka Panchag, गुरुवार का पंचांग, 27 अगस्त 2026 का पंचांग,

Guruwar Ka Panchag, गुरुवार का पंचांग, 27 अगस्त 2026 का पंचांग,

गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 27 August 2026 Ka Panchang,

मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद

बृहस्पतिवार का पंचांग, Brahaspativar ka panchang,

  • Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।

* शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
* वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
* नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
* योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
* करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।

इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए । नित्य पंचाग पढ़ने से भाग्य चमकने लगता है ।

जानिए आज गुरुवार का पंचांग, Guruwar Ka Panchag,


आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है, आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,

इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है ।

मंगल श्री विष्णु मंत्र :-

मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥

आज का पंचांग, aaj ka panchang, गुरुवार का पंचाग, Guruvar Ka Panchag,

गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag,

27 अगस्त 2026 का पंचांग, 27 August 2026 Ka Panchang,


  • गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 27 अगस्त 2026 का पंचांग,
  • दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
  • गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए ।

    गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
  • गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
    इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
  • गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।
    इस उपाय को करने से कार्यो में अड़चने दूर होती है, भाग्य चमकने लगता है, बृहस्पति देव की कृपा मिलती है।

यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।
और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।

गुरुवार को विष्णु जी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, गुरुवार को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ परम फलदाई है

जीवन में कोई भी मनोकामना हो हनुमान जी के जन्मोत्सव के दिन अवश्य ही करें ये उपाय, 

  • *विक्रम संवत् – 2083,
  • * शक संवत – 1948,
    *कलि संवत- 5128,
    * अयन – दक्षियायणं,
    * ऋतु – वर्षा ऋतु,
    * मास – श्रावण माह
    * पक्ष – शुक्ल पक्ष
    *चंद्र बल – मेष, वृषभ, सिंह, कन्या, धनु, कुम्भ,

गुरुवार को बृहस्पति देव की होरा :-

प्रात: 5.56 AM से 7 .01 AM तक

दोपहर 01.27 PM से 2.31 PM तक

रात्रि 20.40 PM से 21.36 PM तक

आज गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा के समय दाहिने हाथ की तर्जनी ऊंगली ( अंगूठे के बगल वाली उंगली ) के नीचे गुरु पर्वत और उस पूरी ऊंगली पर बृहस्पति देव के मंत्र का जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य ) I

गुरुवार को बृहस्पति की होरा में अधिक से अधिक बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करें । शिक्षा, मान – सम्मान, व्यापार, कारोबार, नए कार्यो के प्रारम्भ के लिए गुरुवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा में बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

बृहस्पति देव के मन्त्र

ॐ बृं बृहस्पतये नमः।। अथवा

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः।।


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तिथि (Tithi) :- चतुर्दशी 09.08 AM तक तत्पश्चात पूर्णिमा,

तिथि का स्वामी – चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शंकर जी और पूर्णिमा तिथि के स्वामी चंद्र देव जी है I

चतुर्दशी तिथि को चौदस भी कहते हैं। चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं। अतः प्रत्येक मास की चतुर्दशी विशेषकर कृष्णपक्ष की चतुर्दशी के दिन शिव जी की पूजा, अर्चना एवं रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं, भक्तो के सभी संकट दूर होते है ।

प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी मासिक शिवरात्रि कहलाती है । चतुर्दशी तिथि / मासिक शिवरात्रि में रात्रि में शिव मंत्र या जागरण करना बहुत उत्तम रहता है ।

स्कन्द पुराण में भी चतुर्दशी पर उपवास, रात्रि-जागरण और शिवपूजन का विधान मिलता है—

“चतुर्दश्यां निराहारः स्थितो भूत्वा शुचिव्रतः ।
पूजयेत्परया भक्त्या रात्रौ जागरणे शिवम् ॥”

अर्थात् चतुर्दशी को शुद्ध व्रत का पालन करते हुए निराहार रहकर रात्रि में जागरण और भक्ति से शिव की पूजा करने का बहुत महत्व है।

चतुर्दशी तिथि में जन्मा जातक समान्यता धर्मात्मा, धनवान, यशस्वी, साहसी, परिश्रमी तथा बड़ो का आदर सत्कार करने वाला होता है। चतुर्दशी तिथि में जन्मे लोगों को क्रोध बहुत आता है। इस तिथि में जन्मे जातक साहसी और परिश्रमी होते हैं। इन लोगों को जीवन में बहुत संघर्ष करना पड़ता है तभी इन्हे सफलता हाथ लगती है।

चतुर्दशी तिथि में जन्मे जातकों को नित्य भगवान शंकर की पूजा अवश्य करनी चाहिए। चतुर्दशी तिथि को समस्त संकटो से मुक्ति के लिए महामृत्युंजय मंत्र – ‘ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात्” का जाप करना अत्यंत फलदाई रहता है ।

शास्त्रों में कई चतुर्दशी तिथियों का बहुत महत्त्व बताया गया है। ये है महा शिवरात्रि, नरसिंह चतुर्दशी, अनंत चतुर्दशी, नरक चतुर्दशी और बैकुंठ चतुर्दशी । वैसे तो चतुर्दशी तिथि भगवान भोलेनाथ जी से जोड़ा जाता है लेकिन चतुर्दशी तिथि को केवल भगवान शंकर जी की ही आराधना की जाती है यह कहना सही नहीं है क्योंकि………

महा शिवरात्रि :- फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भगवान शंकर जी की आराधना परम फलदाई है । इस महाशिवरात्रि के दिन ब्रत रखने और भोलेनाथ जी की आराधना से जन्म जन्मांतर के पाप भी काट जाते है ।

नरसिंह चतुर्दशी :– वैशाख शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी, नरसिंह चतुर्दशी, भगवान नरसिंह से जुड़ी है।

अनंत चतुर्दशी :– भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी, अनंत चतुर्दशी को भगवान श्री विष्णु के अनंत स्वरूप की उपासना की जाती है।

नरक चतुर्दशी :- कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी, नरक चतुर्दशी के दिन भगवान श्री कृष्ण जी ने नरकासुर नामक राक्षस का वध करके बंधक बनाई गई हजारों महिलाओं को मुक्त कराया था। इसलिए इस दिन भगवान श्री कृष्ण जी की पूजा की जाती है । नरक चतुर्दशी के दिन यमराज जी की पूजा का भी विधान है, नरक की यातना से बचने और पितरो के उद्दार के लिए इस दिन 14 दीपक भी जलाये जाते है ।

वैकुण्ठ चतुर्दशी :- कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी, वैकुण्ठ चतुर्दशी को भगवान शिव और श्री विष्णु दोनों की उपासना की विशिष्ट परंपरा है।

किसी भी पक्ष की चतुर्दशी में शुभ कार्य करना वर्जित हैं, इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय की शुरुआत, बड़ी खरीददारी, मांगलिक कार्य, यात्रा आदि से बचना चाहिए, क्योंकि इस तिथि को क्रूरा कहा जाता है, चतुर्दशी तिथि रिक्ता तिथियों की श्रेणी में आती है।

लेकिन परंपरागत मुहूर्त दृष्टि से चतुर्दशी का उपयोग विशेष रूप से उन कार्यों में किया जा सकता है जिनमें समापन, बाधा-निवारण या दृढ़ता की आवश्यकता हो।

जैसे— पुराने विवाद को समाप्त करना, अनावश्यक वस्तुओं / आदतों का त्याग, शत्रु या बाधा से संबंधित उपाय, नकारात्मकता दूर करने की साधना, शिव आराधना आदि

शास्त्रों में चतुर्दशी को हिंसा, अनैतिक कार्य, मांस-मदिरा का सेवन, तिल का तेल, लाल रंग का साग, काँसे के बर्तन में भोजन एवं शारीरिक संबंध बनाना मना किया गया है ।

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नक्षत्र (Nakshatra) – धनिष्ठा 02.15 AM शुक्रवार 28 अगस्त तक

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी –        धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी मंगल और देवता वसु हैं ।

27 नक्षत्रों में से धनिष्ठा नक्षत्र 23वां नक्षत्र है। ‘धनिष्ठा’ का अर्थ होता है ‘सबसे अधिक धनवान’। 

 वैदिक ज्योतिष में आठ वसुओं को इस नक्षत्र का अधिपति देवता माना गया है, वसु श्रेष्ठता, सुरक्षा, धन-धान्य आदि वस्तुओं के ही दूसरे नाम भी हैं।

धनिष्ठा नक्षत्र एक ड्रम के आकार का नक्षत्र माना जाता है, जिसे ‘सबसे अधिक सुना जाने वाला’ नक्षत्र कहते है।

धनिष्ठा नक्षत्र का गण – राक्षस तथा सितारा का लिंग महिला है। धनिष्ठा नक्षत्र का आराध्य वृक्ष: शमी, तथा स्वाभाव शुभ होता है ।

इस नक्षत्र में जन्में व्यक्ति अनेको गुणों से समृद्ध होकर जीवन में सुख-समृद्धि, उच्च पद, प्रतिष्ठा प्राप्त करते है। ये लोग स्वभाव से संवेदनशील, दानी एवं अध्यात्मिक होते हैं। इस नक्षत्र के जातक दूसरों को कड़वे वचन नहीं बोलते है। यह अपने सम्बन्धो, कार्यो के प्रति ईमानदार होते हैं।  

धनिष्ठा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 8 और 9, भाग्यशाली रंग चमकीला स्लेटी, ग्रे, भाग्यशाली दिन शुक्रवार और बुधवार होता है ।

धनिष्ठा नक्षत्र में जन्मे जातको को नित्य तथा अन्य सभी को आज  “ॐ धनिष्ठायै नमः “ मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करना चाहिए।

धनिष्ठा नक्षत्र के जातको को दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से सुख – समृद्धि एवं समस्त सुखो की प्राप्ति होती है। इस नक्षत्र के जातको के लिए भगवान शिव की पूजा भी शुभफलदायक मानी जाती है।

इस नक्षत्र के जातको को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से भी समस्त सांसारिक सुख मिलते है। 

पुष्य नक्षत्र के इस उपाय से हर कार्य में मिलेगी सफलता


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योग :- शोभन 07.56 तक तत्पश्चात अतिगण्ड

योग के स्वामी, स्वभाव :-    शोभन योग के स्वामी बृहस्पति देव एवं स्वभाव श्रेष्ठ है , ।

प्रथम करण :- वणिज 09.08 AM तक

करण के स्वामी, स्वभाव :-   वणिज करण की स्वामी लक्ष्मी देवी और स्वभाव सौम्य है ।

द्वितीय करण :- विष्टि 21.32 PM तक तत्पश्चात बव

करण के स्वामी, स्वभाव :-    विष्टि करण के स्वामी यम और स्वभाव क्रूर है ।

ब्रह्म मुहूर्त : 4.28 AM से 5.12 AM तक

विजय मुहूर्त : 14.31 PM से 15.23 PM तक

गोधूलि मुहूर्त : 18.48 PM से 19.11 PM तक

अमृत काल : 15.13 AM से 16.55 AM शुक्रवार 21 अगस्त तक


अग्नि वास : पृथ्वी 09.08 AM तक तत्पश्चात आकाश

अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।

अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।
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शिव वास : भोजन 09.08 AM तक तत्पश्चात शमशान

शिव वास  :   भोजन में   जब भगवान भोलेनाथ जी भोजन कर रहे हों या ध्यान में मग्न हों तो उस समय रुद्र अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। भगवान शंकर जी के रात्रि भोजन अथवा ध्यान करते समय रुद्रभिषेक करने से परेशानी का सामना करना पड़ता है।


शिव वास    श्मशान में –  जब भगवान शिव का श्मशान में वास होता हैं, तो रुद्र अभिषेक आदि  करना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ जी का  श्मशान में वास के दौरान अभिषेक करने से मृत्यु समान  परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

  • दिशाशूल (Dishashool)– बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – गुलिक 09:30 AM से 11 AM बजे तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)– दिन – 1:30 PM से 3:00 PM तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 05:56
  • सूर्यास्त – सायं 18.48

विशेष – चतुर्दशी,  श्राद्ध और व्रत के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना, सहवास करना निषिद्ध है ।

पूर्णिमा और व्रत के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना, सहवास करना, क्रोध करना, हिंसा करना मना है । ऐसा करने से दुर्भाग्य आता है, दुःख, कलह और दरिद्रता के योग बनते है ।

    • पर्व त्यौहार
    • मुहूर्त (Muhurt)

    अवश्य पढ़ें :- अगर गिरते हो बाल तो ना होएं परेशान तुरंत करें ये उपाय, जानिए बालो का गिरना कैसे रोकें,

    “हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

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    आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
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    बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang, 26 अगस्त 2026 का पंचांग,

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    पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi) 2:- वार (Day) 3:- नक्षत्र (Nakshatra) 4:- योग (Yog) 5:- करण (Karan)

    पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
    जानिए बुधवार का पंचांग, Budhvar Ka Panchang, आज का पंचांग, aaj ka panchang,


    बुधवार का पंचांग (Budhwar Ka Panchang)


    26 अगस्त 2026 का पंचांग, ( Panchang ), 26 August 2026 ka Panchang,

    गणेश गायत्री मंत्र :
    ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।

    ।। आज का दिन मंगलमय हो ।।

    * दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
    बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।

    जीवन में कोई भी मनोकामना हो हनुमान जी के जन्मोत्सव के दिन अवश्य ही करें ये उपाय,


    मित्रो हम पिछले 25 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है, अगर आप भी पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

    कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

    आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
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    बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

    इस उपाय से शरीर रहेगा निरोगी, शक्ति रहेगी भरपूर, बुढ़ापा पास भी नहीं आएगा, जानिए रोगनाशक दिव्य आहार,

    * बुधवार को सभी ग्रहो के राजकुमार बुध देव की आराधना करने से ज्ञान मिलता है, वाकपटुता में प्रवीणता आती है, धन लाभ होता है ।

    बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाने तथा रात को सोते समय फिटकरी से दाँत साफ करने से आर्थिक पक्ष मजबूत होता है ।

    जानिए बजरंग बलि के परिवार के बारे में, अवश्य जानिए हनुमान जी के माता पिता और उनके भाइयों के बारे में,

    *विक्रम संवत् – 2083,
    *शक संवत – 1948
    *कलि संवत – 5128
    *अयन – दक्षिणयायन
    *ऋतु – वर्षा ऋतु
    *मास – सावन माह
    *पक्ष – शुक्ल पक्ष
    *चंद्र बल – मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, मकर, मीन,

    बुधवार को बुध की होरा :-

    प्रात: 5.56 AM से 7.01 AM तक

    दोपहर 01.27 PM से 2.32 PM तक

    रात्रि 20.41 PM से 21.36 PM तक

    बुधवार को बुध की होरा में हाथ की सबसे छोटी उंगली और बुध पर्वत को हल्के हल्के रगड़ते हुए अधिक से अधिक बुध देव के मन्त्र का जाप करें ।

    ज्योतिष, पढ़ाई, लिखाई, सीखने, वाकपटुता, अपना प्रभाव डालने और व्यापार में सफलता के लिए बुध की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

    बुधवार के दिन बुध की होरा में बुध देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

    अवश्य पढ़ें :- पूरे वर्ष निरोगी काया के लिए सर्दियों में सेवन करें ये आहार,

    आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,भारत की लगभग 150 करोड़ की आबादी में 0.001 % अर्थात लगभग 15 हज़ार आदमी ही नित्य पंचांग पढ़ पाते है।

    आप पर ईश्वर की असीम कृपा है जो आपको नित्य पंचांग पढ़ने का, अपने भाग्य को प्रबल करने का, पापो के प्रायश्चित करने का अवसर मिल रहा है,

    दुनिया के सारे उपाय एक तरफ है, और नित्य पंचाग पढ़ने का पुण्य उससे भी कहीं अधिक है,

    इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है ।

    बुध देव के मन्त्र

    “ॐ बुं बुधाय नमः” अथवा

    “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।।”

    अवश्य जानिए कैसे और किससे हुआ हनुमान जी का विवाह, इनकी पुत्री है हनुमान जी की पत्नी,

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    • तिथि (Tithi) – त्रियोदशी 07.59 AM तक तत्पक्षात चतुर्दशी,
    • तिथि के स्वामी – त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी और चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी है । 

    त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी  हैं। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते है । उन्हें सदैव युवा और आकर्षक रहने का वरदान है।

    पौराणिक कथाओं के अनुसार कामदेव, भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के पुत्र माने गए  हैं। उनका विवाह प्रेम और आकर्षण की देवी रति से हुआ है।

    कामदेव के हाथ में धनुष है जिसका एक कोना स्थिरता और दूसरा कोना चंचलता का प्रतीक है। कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है। कामदेव जब कमान से अपना तीर छोड़ते हैं, तो उसमें कोई आवाज नहीं होती है।

    कामदेव के बाण की यह विशेष बात है कि इनसे घायल होने के बाद भी व्यक्ति आनंद का सुखद अहसास महसूस करता है।

    कामदेव का सम्बन्ध शुभ, प्रेम, सुख, सौंदर्य, यौवन, आनंद और कामेच्छा से है ।

    कामदेव का वाहन हाथी को  माना गया है। शास्त्रों में कुछ जगह कामदेव का वाहन तोते को भी बताया गया है ।

    त्रियोदशी के दिन मीठे वचन बोलने, प्रसन्न रहने से जातक रूपवान होता है, उसे अपने प्रेम में सफलता एवं इच्छित एवं योग्य जीवनसाथी प्राप्त होता है।

    त्रियोदशी को कामदेव जी का स्मरण करने से वैवाहिक सुख भी पूर्णरूप से मिलता है।  +

    अपने रूप और आकर्षण शक्ति को बढ़ाने के लिए  त्रियोदशी को कामदेव जी का मन्त्र ‘ॐ कामदेवाय विद्महे, रति प्रियायै धीमहि, तन्नो अनंग प्रचोदयात्’ की एक माला  जाप अवश्य करें ।

    इस तिथि का खास नाम जयकारा भी है। समान्यता त्रयोदशी तिथि यात्रा एवं शुभ कार्यो के लिए श्रेष्ठ होती है।

    त्रियोदशी को बैगन नहीं खाना चाहिए , त्रियोदशी को बैगन खाने से पुत्र को कष्ट मिलता है।

    जीवन में कैसी भी हो समस्या रक्षाबंधन के दिन अवश्य करें ये अचूक उपाय

    रक्षा बंधन के दिन राखी बांधते समय बहने बोले यह मन्त्र, भाइयों की सदैव होगी हर संकटो से होगी रक्षा 

    इस तरह से मनाएं जन्माष्टमी का पर्व जीवन में लग जायेगा सुखो का अम्बार 

    नक्षत्र (Nakshatra) – श्रवण 12. 48 AM गुरुवार 27 अगस्त तक

    नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी-       श्रवण नक्षत्र के देवता विष्णु और सरस्वती जी तथा स्वामी चंद्र देव जी है ।



    श्रवण नक्षत्र 22 वें नंबर का नक्षत्र  है। यह एक त्रिशूल के जैसा प्रतीत होता है। श्रवण नक्षत्र का आराध्य वृक्ष आक या  मंदार, और नक्षत्र का स्वभाव चर माना गया है । श्रावण नक्षत्र का लिंग पुरुष है।

    श्रवण नक्षत्र के जातक पर शनि और चंद्र का प्रभाव जीवनभर बना रहता है।  श्रवण नक्षत्र के जातक बुद्धिमान और अपने कार्यो में निपुण होते हैं । 

    श्रवण नक्षत्र में जन्म होने से जातक सुंदर, दानवान, आज्ञाकारी, सर्वगुण संपन्न, धनवान और अपने क्षेत्र में मान सम्मान प्राप्त करता है।

    लेकिन यदि शनि और चंद्र की स्थिति ठीक नहीं है तो ऐसा जातक क्रोधी, कंजूस, भय-शंकित रहने वाला, लापरवाह, आलसी होता है। 

    यदि शनि और चंद्र कुंडली में एक ही जगह है, तो जातक को जीवन में बहुत संघर्ष करना पड़ता है।

     इसलिए जातक को हनुमानजी की सदैव उपासना करना है। जातक को शराब, मांस आदि व्यसनों से दूर रहना चाहिए।

    श्रवण नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 2 और 8, भाग्यशाली रंग, आसमानी, हल्का नीला, भाग्यशाली दिन गुरुवार, बुधवार और सोमवार माना जाता है ।

    श्रवण नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ श्रवणाय नमः “। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।

    राशिनुसार इस तरह से  बंधवाएं राखी, कुंडली के ग्रहो के मिलेंगे शुभ फल

    जरूर पढ़े :- दुश्मनो से छुटकारा पाना हो अथवा कारोबार में चाहिए आशातीत सफलता हनुमान जयंती के दिन अवश्य ही करें ये उपाय,

    अवश्य पढ़ें :- चाहिए परिवार में सुख-समृद्धि, प्रेम और आरोग्य तो ऐसा होना चाहिए किचन का वास्तु, जानिए किचन के वास्तु टिप्स 

    • योग (Yog) – सौभाग्य 07.59 AM तक तत्पश्चात शोभन
    • योग के स्वामी, स्वभाव :-    सौभाग्य योग के स्वामी ब्रह्मा जी एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है   ।
    • प्रथम करण : – तैतिल 07.59 AM तक
    • करण के स्वामी, स्वभाव :- तैतिल करण के स्वामी विश्वकर्मा जी और स्वभाव सौम्य है ।
    • द्वितीय करण : – गर 20.37 PM तक तत्पश्चात वणिज
    • करण के स्वामी, स्वभाव :-   गर करण के स्वामी भूमि तथा स्वभाव सौम्य है ।

    • ब्रह्म मुहूर्त : 4.27 AM से 5.12 AM तक
    • विजय मुहूर्त : 14.32 PM से 15.23 PM तक
    • गोधूलि मुहूर्त : 18.49 PM से 19.12 PM तक
    • अमृत काल : 13.233 PM से 15.17 PM तक

    • अग्निवास : पाताल में 07.59 AM तक तत्पश्चात पृथ्वी पर


       जब पाताल में अग्नि वास है तो वह हवन से सम्बन्धित अनुष्ठानों के लिये शुभ नहीं मानी जाती है, यह अशुभ मानी गई है । अग्नि के पाताल  वास के दौरान किये जाने वाले हवन  सम्बन्धित अनुष्ठानों व्यक्ति को आर्थिक नुकसान करना पड़ता है उसका  धन नष्ट हो सकता है।


      अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।

    • शिव वास : नंदी पर 07.59 AM तक तत्पश्चात भोजन पर


      शिव वास :-  जब भगवान भोलेनाथ नन्दी जी पर विराजमान होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना सदैव बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों केअनुसार भगवान शंकर जी के नन्दी पर विराजमान के समय रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सफलता, शुभ समाचारो की प्राप्ति  होती है।


      शिव वास  :   भोजन में   जब भगवान भोलेनाथ जी भोजन कर रहे हों या ध्यान में मग्न हों तो उस समय रुद्र अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। भगवान शंकर जी के रात्रि भोजन अथवा ध्यान करते समय रुद्रभिषेक करने से परेशानी का सामना करना पड़ता है।


      इन उपायों से धन संपत्ति खींची चली आएगी, किसी चीज़ का नहीं रहेगा अभाव
    • दिशाशूल (Dishashool)- बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।

      इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
    • गुलिक काल : – बुधवार का गुलिक काल 10:30 AM से 12 PM बजे तक ।
    • राहुकाल (Rahukaal) : – बुधवार का राहुकाल दिन 12:00 PM से 1:30 PM तक ।
    • सूर्योदय – प्रातः 5.56 AM
    • सूर्यास्त – सायं 18.49 PM
    • विशेष – त्रियोदशी को बैगन नहीं खाना चाहिए , त्रियोदशी को बैगन खाने से पुत्र को कष्ट मिलता है । 

      चतुर्दशी,  श्राद्ध और व्रत के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना, सहवास करना निषिद्ध है। 
    • मुहूर्त :-
    • पर्व त्यौहार

    सबसे ज्यादा पढ़ी गयी :- ऐसा होगा घर के पूजा घर का वास्तु तो पूरी होंगी सभी मनोकमनाएं, जानिए पूजा घर के वास्तु टिप्स,

    हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

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    अवश्य जानिए :- नैत्रत्यमुखी भवन के वास्तु के अचूक उपाय, 

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    मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang, 25 अगस्त 2026 का पंचांग,

    मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang, 25 अगस्त 2026 का पंचांग,


    मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang,

    Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


    1:- तिथि (Tithi)
    2:- वार (Day)
    3:- नक्षत्र (Nakshatra)
    4:- योग (Yog)
    5:- करण (Karan)




    पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
    जानिए मंगलवार का पंचांग (Mangalvar Ka Panchang)।

    शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
    वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
    नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
    योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
    *करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
    इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

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    हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।

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    आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद


    ।। आज का दिन मंगलमय हो ।।

    • दिन (वार) – मंगलवार Mangalwar के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।

      मंगलवार Mangalwar को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।

      मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।

      नवरात्री में घर, कारोबार में इस विधि से करें कलश की स्थापना, अवश्य जानिए कलश स्थापना की सही और बहुत ही आसान विधि,

      मंगलवार के व्रत से सुयोग्‍य संतान की प्राप्ति होती है, बल, साहस और सम्मान में भी वृद्धि होती है।

      मंगलवार को धरती पुत्र मंगलदेव की आराधना करने से जातक को मुक़दमे, राजद्वार में सफलता मिलती है, उत्तम भूमि, भवन का सुख मिलता है, मांगलिक दोष दूर होता है।


      जीवन में समस्त संकटो को दूर करने, सफलता का द्वार खोलने के लिए नवरात्री के मंगलवार को अवश्य ही करें ये उपाय

      आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,
    • इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । नित्य पंचांग को पढ़ने से देवताओं का आशीर्वाद मिलता है, पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है ।

    *विक्रम संवत्- 2083,
    *शक संवत – 1948

    *कलि सम्वत – 5128
    *अयन –
    दक्षिणायण
    *ऋतु –
    वर्षा ऋतु
    *मास –
    सावन माह,
    *पक्ष – शुक्ल पक्ष
    *चंद्र बल – मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, मकर, मीन,

    मंगलवार को मंगल की होरा :-

    प्रात: 5.55 AM से 7.00 AM तक

    दोपहर 01.28 PM से 2.32 PM तक

    रात्रि 20.41 PM से 21.37 PM तक

    मंगलवार को मंगल की होरा में हाथ की निम्न मंगल पर दो बूंद सरसो का तेल लगा कर उसे हल्के हल्के रगड़ते हुए अधिक से अधिक मंगल देव के मन्त्र का जाप करें ।

    कृषि, भूमि, भवन, इंजीनियरिंग, खेलो, साहस, आत्मविश्वास

    और भाई के लिए मंगल की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

    मंगलवार के दिन मंगल की होरा में मंगल देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में मंगल मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

    गुरु पूर्णिमा पर इस मन्त्र का अवश्य ही करें जाप, जानिए गुरु पूर्णिमा का उपाय,

    मंगल देव के मन्त्र

    ॐ अं अंगारकाय नम: अथवा

    ॐ भौं भौमाय नम:”

    जरूर पढ़े :-  जीवन में समस्त संकटो को दूर करने, सफलता का द्वार खोलने के लिए नवरात्री के मंगलवार को अवश्य ही करें ये उपाय,

    तिथि :- द्वादशी 06.20 AM तक तत्पश्चात त्रियोदशी,

    तिथि के स्वामी :- द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री विष्णु जी और त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी है ।

    त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी  हैं। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते है । उन्हें सदैव युवा और आकर्षक रहने का वरदान है।

    पौराणिक कथाओं के अनुसार कामदेव, भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के पुत्र माने गए  हैं। उनका विवाह प्रेम और आकर्षण की देवी रति से हुआ है।

    कामदेव के हाथ में धनुष है जिसका एक कोना स्थिरता और दूसरा कोना चंचलता का प्रतीक है। कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है। कामदेव जब कमान से अपना तीर छोड़ते हैं, तो उसमें कोई आवाज नहीं होती है।

    कामदेव के बाण की यह विशेष बात है कि इनसे घायल होने के बाद भी व्यक्ति आनंद का सुखद अहसास महसूस करता है।

    कामदेव का सम्बन्ध शुभ, प्रेम, सुख, सौंदर्य, यौवन, आनंद और कामेच्छा से है ।

    कामदेव का वाहन हाथी को  माना गया है। शास्त्रों में कुछ जगह कामदेव का वाहन तोते को भी बताया गया है ।

    त्रियोदशी के दिन मीठे वचन बोलने, प्रसन्न रहने से जातक रूपवान होता है, उसे अपने प्रेम में सफलता एवं इच्छित एवं योग्य जीवनसाथी प्राप्त होता है।

    त्रियोदशी को कामदेव जी का स्मरण करने से वैवाहिक सुख भी पूर्णरूप से मिलता है।  +

    अपने रूप और आकर्षण शक्ति को बढ़ाने के लिए  त्रियोदशी को कामदेव जी का मन्त्र ‘ॐ कामदेवाय विद्महे, रति प्रियायै धीमहि, तन्नो अनंग प्रचोदयात्’ की एक माला  जाप अवश्य करें ।

    इस तिथि का खास नाम जयकारा भी है। समान्यता त्रयोदशी तिथि यात्रा एवं शुभ कार्यो के लिए श्रेष्ठ होती है।

    त्रियोदशी को बैगन नहीं खाना चाहिए , त्रियोदशी को बैगन खाने से पुत्र को कष्ट मिलता है।

    अवश्य पढ़ें :- चाहिए परिवार में सुख-समृद्धि, प्रेम और आरोग्य तो ऐसा होना चाहिए किचन का वास्तु, जानिए किचन के वास्तु टिप्स,

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    आज सावन माह के शुक्ल पक्ष का प्रदोष ब्रत है, मंगलवार को होने के कारण इसे भौम प्रदोष ब्रत कहा जायेगा । सावन माह और प्रदोष तिथि दोनों ही भगवान शंकर जी को अत्यंत प्रिय है ।

    प्रदोष तिथि को भगवान भोलेनाथ जी का ब्रत रखा जाता है। मान्यता है कि जो जातक प्रदोष का व्रत रख कर संध्या के समय शंकर जी की आराधना करते हैं उन्हें योग्य जीवन साथी मिलता है, दाम्पत्य जीवन में प्रेम और सहयोग बना रहता है ।

    मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती का पूजन करने से जीवन में सुख – सौभाग्य की वर्षा होती है, साथ ही जातक के सभी संकट दूर हो जाते हैं । ।

    प्रदोष व्रत में सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक पूजा करने का विशेष महत्त्व है । इस दिन सम्पूर्ण शिव परिवार का पूजन करने से भगवान शिव अपने भक्त पर बहुत प्रसन्न होते है ।

    प्रदोष व्रत को महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखती हैं।प्रदोष ब्रत रखने वाले जातक के पूरे परिवार पर भगवान भोलनाथ और माँ पार्वती की सदैव असीम कृपा बनी रहती है ।

    प्रदोष ब्रत के दिन शिव पंचाक्षर मन्त्र ॐ नम: शिवाय तथा

    महामृत्युंजय मन्त्र :- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
    का जाप करने से सहस्त्र गुना पुण्य की प्राप्ति होती है ।

    प्रदोष को प्रदोष कहने के शास्त्रों में एक मिलती है। माना जाता है कि एक बार चंद्र देव को क्षय रोग हो गया, जिसके कारण उन्हें बहुत कष्ट हो रहा था।

    अपने रोग के निवारण के लिए चंद्र देव जी भगवान शिव के पास गए, प्रभु ने चंद्र देव के क्षय रोग का निवारण त्रयो करके उन्हें त्रियोदशी के दिन ही पुन:जीवन प्रदान किया था तभी से इस दिन को प्रदोष कहा जाने लगा है ।

    प्रदोष व्रत में फलाहार किया जाता है इस व्रत में अन्न, चावल, लाल मिर्च, सादा नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

    • नक्षत्र (Nakshatra) – उत्तराषाढ़ा 22.51 PM तक तत्पश्चात श्रवण,
    • नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी –     उत्तराषाढा नक्षत्र के देवता दस विश्‍वदेव जी एवं नक्षत्र के स्वामी सूर्य देव जी है ।

     उत्तराषाढा नक्षत्र 21 वें नंबर का नक्षत्र  है। उत्तराषाढ़ा’ का अर्थ होता है अजेय, विजय के पश्चात। यह एक हाथी के दांत जैसा प्रतीत होता है।

    उत्तराषाढ़ नक्षत्र तारे का लिंग स्त्री है। उत्तराषाढा नक्षत्र का आराध्य वृक्ष कटहल और नक्षत्र का स्वभाव स्थिर माना गया है ।

    उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में जन्मे जातक पर सूर्य, शनि और गुरु का प्रभाव बना रहता है।

    उत्तराषाढा नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति एक सफल एवं स्वतंत्र व्यक्ति होते हैं। इन्हे ईश्वर में आस्था होती है, इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति प्रसन्न चित्त और मित्रो में लोकप्रिय होते है ।

    विवाह के उपरान्त इनको जीवन में और अधिक सफलता प्राप्त होती है, इन्हे उत्तम पुत्र सुख मिलता है। यह घूमने फिरने के बहुत शौक़ीन होते है ।

    उत्तराषाढा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 1, 3 और 8, भाग्यशाली रंग, तांबे का रंग, हल्का भूरा,  भाग्यशाली दिन गुरुवार और शुक्रवार का माना जाता है ।

    उत्तराषाढा नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ उत्तराषाढाभ्यां नमः”। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए । 

    उत्तराषाढा नक्षत्र में  जन्मे जातको को नित्य गणेश संकट स्रोत्र का पाठ करना चाहिए इससे कार्यो में आने वाली बाधाओं का निवारण होता है । 

    • योग :- आयुष्मान 07.41 AM तक तत्पश्चात सौभाग्य
    • योग केस्वामी:-     आयुष्मान योग के स्वामी चंद्र देव एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है ।
    • प्रथम करण : – बालव 06.20 AM तक
    • करण के स्वामी, स्वभाव :- बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।
    • द्वितीय करण : – कौलव 19.13 PM तक तत्पश्चात तैतिल
    • करण के स्वामी, स्वभाव :- कौलव करण के स्वामी मित्र और स्वभाव सौम्य है ।
    • ब्रह्म मुहूर्त : 04.27 AM से 5.11 AM तक
    • विजय मुहूर्त : 14.32 PM से 15.24 PM तक
    • गोधूलि मुहूर्त : 18.51 PM से 19.13 PM तक
    • अमृत काल : 15.49 PM से 17.34 PM तक

    • शिव वास :- कैलाश पर 06.20 AM तक तत्पश्चात नंदी पर

    • शिव वास :-  जब भगवान भोलेनाथ जी कैलाश पर होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार  भगवान शंकर जी के  कैलाश पर्वत पर रहने के दौरान रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सुखो की प्राप्ति होती है।

    • शिव वास :-  जब भगवान भोलेनाथ नन्दी जी पर विराजमान होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना सदैव बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों केअनुसार भगवान शंकर जी के नन्दी पर विराजमान के समय रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सफलता, शुभ समाचारो की प्राप्ति  होती है।


    • अग्नि वास : पृथ्वी पर 06.20 AM तक तत्पश्चात आकाश पर

      अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।

      अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।
    • दिशाशूल (Dishashool)- मंगलवार को उत्तर दिशा का दिकशूल होता है।

      यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से गुड़ खाकर जाएँ ।
    • गुलिक काल : – दोपहर 12:00 से 01:30 तक है ।
    • राहुकाल (Rahukaal) दिन – 3:00 से 4:30 तक।
    • सूर्योदय – प्रातः 05:55
    • सूर्यास्त – सायं 18:51
    • विशेष – द्वादशी के दिन तुलसी तोड़ना,  मसूर का सेवन करना  वर्जित है।
    • द्वादशी के दिन यात्रा नहीं करनी चाहिए, इस दिन यात्रा करने से धन हानि एवं असफलता की सम्भावना रहती है।
    •  त्रियोदशी को बैगन नहीं खाना चाहिए , त्रियोदशी को बैगन खाने से पुत्र को कष्ट मिलता है ।
    • पर्व – त्यौहार- प्रदोष ब्रत

    “हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

    आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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    सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang, 24 अगस्त 2026 का पंचाग,

    सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang, 24 अगस्त 2026 का पंचाग,

    आप सभी शिव भक्तो को सावन के सोमवार की हार्दिक शुभकामनायें, हर हर महादेव

    सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang, 24 अगस्त 2026 का पंचांग, 24 August 2026 ka Panchang,

    मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

    कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

    आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद


    Panchang, पंचाग, आज का पंचांग, aaj ka panchang, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


    1:- तिथि (Tithi)
    2:- वार (Day)
    3:- नक्षत्र (Nakshatra)
    4:- योग (Yog)
    5:- करण (Karan)

    पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
    जानिए, सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang।

    सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang,

    24 अगस्त 2026 का पंचांग, 24 August 2026 ka Panchang,

    महा मृत्युंजय मंत्रॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।

    • दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।

      सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।

    सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।

    जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।

    सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।

    घर पर कैसा भी हो वास्तु दोष अवश्य करें ये उपाय, जानिए वास्तु दोष निवारण के अचूक उपाय

    *विक्रम संवत् – 2083,
    * शक संवत – 1948,
    *कलि संवत – 5128
    *कलयुग – 5128 वर्ष
    * अयन – दक्षिणायण,
    * ऋतु – वर्षा ऋतु,
    * मास – सावन माह,
    * पक्ष – शुक्ल पक्ष
    *चंद्र बल – वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर, कुम्भ,

    सोमवार को चन्द्रमा की होरा :-

    प्रात: 5.55 AM से 7.00 AM तक

    दोपहर 01.28 PM से 2.33 PM तक

    रात्रि 20.42 PM से 21.38 PM तक

    सोमवार को चन्द्रमा की होरा में अधिक से अधिक चन्द्र देव के मन्त्र का जाप करें। यात्रा, प्रेम, प्रसन्नता, कला सम्बन्धी कार्यो के लिए चन्द्रमा की होरा अति उत्तम मानी जाती है।


    आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,भारत की लगभग 150 करोड़ की आबादी में 0.001 % अर्थात लगभग 15 हज़ार आदमी ही नित्य पंचांग पढ़ पाते है।

    आप पर ईश्वर की असीम कृपा है जो आपको नित्य पंचांग पढ़ने का, अपने भाग्य को प्रबल करने का, पापो के प्रायश्चित करने का अवसर मिल रहा है,

    दुनिया के सारे उपाय एक तरफ है, और नित्य पंचाग पढ़ने का पुण्य उससे भी कहीं अधिक है, नित्य पंचांग पढ़ने से देवताओं का आशीर्वाद मिलता है, कार्य सिद्ध होने लगते है,

    इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है ।

    सोमवार के दिन चन्द्रमा की होरा में चंद्रदेव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में चंद्र देव मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

    चन्द्रमा के मन्त्र

    ॐ सों सोमाय नम:।

    ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम: ।

    • तिथि (Tithi) – द्वादशी तिथि पूर्ण रात्रि तक,
    • तिथि का स्वामी – द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री विष्णु जी है ।
       
    • हिंदू पंचाग की बाहरवीं तिथि द्वादशी (Dwadashi) कहलाती है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि, श्री विष्णु जी है ।
    • इस तिथि का नाम यशोबला भी है, क्योंकि इस दिन भगवान श्री विष्णु जी / भगवान श्रीकृष्ण जी का आंवले, इलाइची, पीले फूलो से पूजन करने से यश,  बल और साहस की प्राप्ति होती है।  
    • द्वादशी को श्री विष्णु जी की पूजा , अर्चना करने से मनुष्य को समस्त भौतिक सुखो और ऐश्वर्यों की प्राप्ति होती है, उसे समाज में सर्वत्र आदर मिलता है, उसकी समस्त मनोकामनाएं निश्चय ही पूर्ण होती है।
    • द्वादशी तिथि के दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना अत्यन्त श्रेयकर होता है।  द्वादशी के दिन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करें ।
    • भगवान विष्णु के भक्त बुध ग्रह का जन्म भी द्वादशी तिथि के दिन माना जाता है। इस दिन विष्णु भगवान के पूजन से बुध ग्रह भी मजबूत होता है ।
    • यदि द्वादशी तिथि सोमवार और शुक्रवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। द्वादशी यदि रविवार के दिन पड़ती है तो क्रकच योग बनाती है, यह अशुभ माना जाता है, इसमें भी शुभ कार्य करना मना किया गया हैं।
    • लेकिन द्वादशी तिथि जब बुधवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है,  ऐसे समय में किये गए कार्य कार्य सिद्ध होते है।
    • द्वादशी तिथि में विष्टि करण होने के कारण इस तिथि को भद्रा तिथि भी कहते है।
    • द्वादशी तिथि के दिन विवाह, तथा अन्य शुभ कार्य किये जाते है लेकिन इस तिथि में नए घर का निर्माण, ग्रह प्रवेश करना मना किया जाता है ।
    • द्वादशी के दिन तुलसी तोड़ना निषिद्ध है।  द्वादशी के दिन यात्रा नहीं करनी चाहिए, इस दिन यात्रा करने से धन हानि एवं असफलता की सम्भावना रहती है।  द्वादशी के दिन मसूर का सेवन वर्जित है। 
    • द्वादशी की दिशा नैऋत्य मानी गई है इस दिन इस दिशा की ओर किए गए कार्य शुभ फल देने वाले माने जाते हैं।



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    आज सावन माह का चौथा और अंतिम सोमवार है । सावन माह गुरुवार 30 जुलाई से प्रारम्भ हो चूका है, भगवान भोलनाथ को सावन का सोमवार अत्यंत प्रिय है । मान्यता है की सावन माह में शिवलिंग पर मात्र जल चढ़ाने से भगवान शंकर जी अत्यंत प्रसन्न हो जाते है ।

    ऐसी मान्यता है कि सावन के सोमवार का ब्रत रखने, इस दिन शिवलिंग का विधि पूर्वक अभिषेक करने से जीवन से सभी संकटो का नाश होता है, इस वर्ष सावन में 4 सोमवार पड़ रहे है ।

    समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने समस्त सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था, और वह नीलकंठ महादेव कहलाएं । देवताओं ने उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए जल अर्पित किया। तभी से सावन में जलाभिषेक की परंपरा प्रचलित हुई।

    सावन में भगवान शंकर और माँ पारवती की पूजा करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है, परिवार में प्रेम और सौहर्द का वातावरण बनता है ।

    मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या सफल होने पर शिव-पार्वती का दिव्य मिलन हुआ। इसलिए अविवाहित कन्याएँ तथा युवक भी उत्तम जीवनसाथी की कामना से सावन के सोमवार का व्रत रखते हैं।

    सावन के सोमवार का ब्रत रहने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन मधुर बनता है, स्वास्थ्य एवं मानसिक शांति मिलती है, संतान सुख एवं परिवार में मंगल बना रहता है, शिव कृपा से जीवन की समस्त बाधाएँ दूर होती हैं।

    सावन के सोमवार के दिन शिवलिंग का पंचामृत, दूध, दही, घी, शहद, गन्ने का रस से अभिषेक करके, बेल पत्र, शमी पत्र, भांग, धतूरा, आक का पुष्प, काले तिल, अक्षत चढ़ाकर पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है ।

    सावन के सोमवार के दिन ॐ नम: शिवाये,

    श्री शिवाये नमस्तुभ्यं अथवा

    महामृत्युंजय मन्त्र :-

    ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

    का अधिक से अधिक जाप अवश्य ही करें ।

    भगवान शिव की पूजा में रुद्राभिषेक का अत्यंत महत्व है। वैसे अन्य सभी माह में रुद्राभिषेक के लिए मुहूर्त देखना पड़ता है लेकिन सावन मास में प्रत्येक दिन ‘रुद्राभिषेक’ किया जाना बहुत शुभ माना जाता है।

    ‘शिवपुराण’ में लिखा भी है कि भगवान भोलेनाथ स्वयं ही जल हैं, इसलिए इसमें कोई भी संशय नहीं है की जल द्वारा शिवजी का अभिषेक उनकी कृपा प्राप्त करने के सर्वोत्तम मार्ग है।

    कहते है कि भगवान शिव सावन के महीने में पृथ्वी पर अवतरित होकर अपनी ससुराल गए थे और वहां पर उनका स्वागत भव्य रूप से अभिषेक द्वारा किया गया था, इसलिए भी यह माह शिवजी को विशेष रूप से प्रिय है।

    तभी से माना जाता है कि भगवान शिव प्रत्येक वर्ष सावन माह में अपनी ससुराल आते हैं और सभी मनुष्यो के लिए भगवान शिव की कृपा पाने का यह स्वर्णिम अवसर होता है।

    सावन सोमवार के दिन क्या करें ?

    प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

    शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग का गंगाजल, जल, दूध, दही, शहद, घी एवं शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करें।

    बेलपत्र (तीन पत्तियों वाला), शमी पत्र, धतूरा, आक के फूल, भांग, सफ़ेद पुष्प, सफेद चंदन एवं फल अर्पित करें।

    ॐ नमः शिवाय मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें।

    इस दिन शिव चालीसा, शिव तांडव स्तोत्र, महामृत्युंजय मंत्र तथा रुद्राभिषेक का पाठ करें।

    गरीबों एवं जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र एवं दक्षिणा का दान करें।

    सावन के सोमवार के दिन यथाशक्ति व्रत रखें और इस दिन सात्विक भोजन करें।

    इस दिन शिवलिंग पर हल्दी, केतकी का फूल तथा तुलसी दल अर्पित न करें।

    “सावन का प्रत्येक सोमवार आपके जीवन में भगवान भोलेनाथ की असीम कृपा, उत्तम स्वास्थ्य, सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति लेकर आए।

    हर हर महादेव! ॐ नमः शिवाय!”

    नक्षत्र (Nakshatra) – पूर्वाषाढ़ा 20.28 PM तक तत्पश्चात उत्तराषाढ़ा

    नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी-         पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के देवता (अष्ट वसुओं में से एक जल के देवता) और स्वामी शुक्र देव है ।

      पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र 20वें नंबर का नक्षत्र  है। ‘पूर्वाषाढ़ा’ का अर्थ है ‘विजय से पूर्व’। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के देवता (अष्ट वसुओं में से एक जल के देवता) और स्वामी शुक्र देव है ।

    शुक्र का प्रभाव पड़ने से जातक आकर्षक, प्रेम करने वाला, तथा जिंदादिल इंसान होता है। 

    यह हाथी दांत या हाथ का पंखा जैसा नज़र आता है जो कि शक्ति और विजय को दर्शाता है।

    पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का लिंग पुरुष है।  पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का आराध्य वृक्ष वेत और नक्षत्र का स्वभाव उग्र माना गया है ।

    पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक निडर, आक्रामक, भगवान से डरने वाले, विनम्र, ईमानदार, पाखंड से कोसों दूर,संकल्प शक्ति वान होते हैं।

    लेकिन यदि कुंडली में गुरु और शुक्र अशुभ हो तो ऐसे जातक बेहद जिद्दी, अस्थिर, झगड़ालू, निर्णय नहीं लेने वाले होते है इन्हे आर्थिक कठनाई लगी रहती है ।

    पूर्वाषाढ़ा  नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 3 और 6, भाग्यशाली रंग, काला, गहरा भूरा,  भाग्यशाली दिन रविवार, शनिवार, शुक्रवार और गुरुवारका माना जाता है ।

    पूर्वाषाढ़ा  नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ पूर्वाषाढाभ्यां नमः”। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।

     जीवन में निरंतर शुभ समय के लिए पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के जातको को माँ लक्ष्मी, माँ ललिता और देवी त्रिपुर सुंदरी की पूजा उपासना करनी चाहिए. ।

    लक्ष्मी सहस्त्रनाम, ललिता सहस्त्रनाम, कनकधारा स्त्रोत, महालक्ष्मी अष्टक का पाठ करना जातक के लिए कल्याणकारी होता है. ।

     इसके अतिरिक्त पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के जातको को नित्य भगवान शंकर जी की आराधना भी बहुत शुभ फलदाई होती है ।

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    • योग – प्रीति 7.04 AM तक तत्पश्चात आयुष्मान
    • योग केस्वामी:-    प्रीति  योग के स्वामी विष्णु एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है ।
    • प्रथम करण : – बव 17.22 PM तक
    • करण के स्वामी, स्वभाव :-    बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।

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    • द्वितीय करण : – बालव पूर्ण रात्रि तक
    • करण के स्वामी, स्वभाव :-    बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।
    • ब्रह्म मुहूर्त : 4.27 AM से 5.11 AM तक
    • विजय मुहूर्त : 14.33 PM से 15.24 PM तक
    • गोधूलि मुहूर्त : 18.52 PM से 19.14 PM तक
    • अमृत काल :- 15.07 PM से 16.54 PM तक
    • शिव वास :- कैलाश पर


      शिव वास :-  जब भगवान भोलेनाथ जी कैलाश पर होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार  भगवान शंकर जी के  कैलाश पर्वत पर रहने के दौरान रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सुखो की प्राप्ति होती है।

    • अग्निवास : पृथ्वी पर 17.00 PM तक तत्पश्चात आकाश पर

      अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।
    • विशेष – द्वादशी के दिन तुलसी तोड़ना,  मसूर का सेवन करना  वर्जित है।
    • द्वादशी के दिन यात्रा नहीं करनी चाहिए, इस दिन यात्रा करने से धन हानि एवं असफलता की सम्भावना रहती है।  
    • पर्व त्यौहार- सावन का चौथा सोमवार,
    • मुहूर्त (Muhurt) –

    “हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

    आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

    अपने धर्म, अपनी संस्कृति अपने नैतिक मूल्यों के प्रचार, प्रसार के लिए तन – मन – धन से अपना बहुमूल्य सहयोग करें । आप हमें अपनी इच्छा – सामर्थ्य के अनुसार सहयोग राशि 9425203501पर Google Pay कर सकते है ।
    आप पर ईश्वर की असीम अनुकम्पा की वर्षा होती रहे ।

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    ### *प्रस्तुतकर्ता*:  
    ### *आचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय*  
    ### *अध्यात्म ज्योतिष परामर्श केंद्र*  
    ### *श्याम नगर, रायपुर, छत्तीसगढ़*  
    ### _📞 _9425203501 | 7000121183 | 7587346995 | 0771-4070168__
     हर समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है आपकी प्रत्येक इच्छा, महत्वकांक्षा, जीवन में बुलंदियों पर पहुंचना या किसी भी तरह की समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है *व्यापार बढ़ोतरी किया कराया शादी के लिए माता-पिता को मनाना जब कहीं ना ही हो काम तो हमसे में समाधान हर मुश्किल से मुश्किल समस्या का समाधान ज्योतिष मेरा काम नहीं मेरी साधना है जब कहीं ना हो काम तो हमसे ले समाधान https://devlinai.co.in/own_projects/acharya-main/
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