शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
* विक्रम संवत् – 2082 वर्ष
* शक संवत – 1947 वर्ष * कलि संवत – 5127 वर्ष * कलयुग – 5127 वर्ष * अयन – उत्तरायण, * ऋतु – बसंत ऋतु, * मास – चैत्र माह * पक्ष – कृष्ण पक्ष * चंद्र बल – वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर, कुम्भ,
शुक्रवार को शुक्र देव की होरा :-
प्रात: 6.41 AM से 7.43 AM तक
दोपहर 01.19 PM से 2.18 PM तक
रात्रि 20.08 PM से 21.03 PM तक
दाहिने हाथ के अंगूठे से नीचे के हिस्से ( शुक्र का स्थान ) और अंगूठे पर थोड़ा सा इत्र लगाकर, ( इत्र ना मिले तो उसके बिना भी कर सकते है) बाएं हाथ के अंगूठे से उस हिस्से को शुक्र की होरा में “ॐ शुक्राये नम:” या
‘ॐ द्रांम द्रींम द्रौंम स: शुक्राय नम:।’ मंत्र का अधिक से अधिक जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य )I
यह उपाय आप कोई भी काम करते हुए चुपचाप कर सकते है इसके लिए किसी भी विधि विधान की कोई आवश्यकता नहीं है I
सुख समृद्धि, ऐश्वर्य, बड़ा भवन, विदेश यात्रा, प्रेम, रोमांस, सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए शुक्रवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।
शुक्रवार के दिन शुक्र की होरा में शुक्रदेव देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में शुक ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।
तिथि के स्वामी – तृतीया तिथि की स्वामी माँ गौरी और कुबेर देव जी तथा चतुर्थी तिथि के स्वामी विघ्हर्ता गणेश जी है I
तृतीया: किसी भी पक्ष की तीसरी तारीख को तृतीया तिथि या तीज कहते है। तृतीया तिथि को जया तिथि भी कहा गया है।
अपने नाम के अनुसार ही यह तिथि सभी शुभ कार्यों में जय दिलाने अर्थात सफलता दिलाने वाली कही गई है। लेकिन बुधवार को तृतीया तिथि होने से मृत्युदा कहलाती है, इसलिए बुधवार की तृतीया को कोई भी नया कार्य शुरु करना शुभ नहीं माना जाता है।
तृतीया तिथि में माँ गौरी जी की पूजा अर्चना करने से जीवन में सुख सौभाग्य की वृद्धि होती है। तृतीया के दिन माँ गौरी का ध्यान करते हुए उन्हें दूध की मिठाई, फूल और चावल अर्पित करें एवं श्रद्धानुसार घी का दीपक जलाकर ’’ऊँ गौर्ये नमः’’ की एक माला का अवश्य ही जाप करें ।
कुबेर जी भी तृतीया तिथि के स्वामी माने गये हैं। शास्त्रों के अनुसार कुबेर जी देवताओं के कोषाध्यक्ष है अतः इस दिन इनकी भी पूजा करने से जातक को विपुल धन-धान्य, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
कुबेर देव Kuber dev धन सम्पदा की दिशा उत्तर के लोकपाल हैं। ये भूगर्भ के भी स्वामी कहे गए हैं।
जैसे देवताओं के गुरु बृहस्पति और राजा इन्द्र कहे गए है उसी प्रकार सम्पूर्ण ब्राह्मांडों के धनाधिपति कुबेर देव कहे गए है।
कुबेर देव के पिता विश्रवा तथा माता का नाम इडविडा हैं ।
कुबेर देव की पत्नी का नाम देवी श्रद्धा तथा दोनों पुत्रों के नाम ‘नल कुबेर’ व ‘नील ग्रीव’ है ।
कुबेर देव रावण के सौतेले भाई है और या भगवान शिव जी के प्रिय सेवक , परम मित्र भी माने जाती है। घर में कुबेर देवता की फोटो को उत्तर दिशा की ओर लगाना चाहिए और इस दिशा को बिलकुल साफ रखना चाहिए ।
शास्त्रों के अनुसार जो भी जातक किसी भी पक्ष की तृतीया को घी का दीपक जलाकर नियम से नीचे दिए गए कुबेर मंत्र का जप दक्षिण दिशा की ओर मुख करके करता है उसे कुबेर देव की कृपा अवश्य ही प्राप्त होती है, उसे अपने कार्यक्षेत्र , व्यापार में आशातीत सफलता मिलती है।
कुबेर मंत्र: “ऊँ श्रीं, ऊँ ह्रीं श्रीं, ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय: नम:”। यदि इस मंत्र का जप किसी शिव मंदिर में अथवा बिल्वपत्र वृक्ष की जड़ों के समीप बैठकर करा जाये तो या बहुत अधिक उत्तम होता है, उस जातक को भगवान भोलेनाथ और कुबेर जी दोनों की पूर्ण कृपा प्राप्त होती है ।
तृतीया को परवल का सेवन नहीं करना चाहिए, तृतीया को परवल का सेवन करने से शत्रुओं में वृद्धि होती है ।
आज संकट चतुर्थी या संकष्टी चतुर्थी है । प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकट चतुर्थी कहते है।
इस दिन भगवान गणेश की पूजा अर्चना, संकट चतुर्थी का व्रत सभी प्रकार के संकटो से रक्षा होती है।
अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी तो पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है।
संकष्टी चतुर्थी व्रत का दिन, उस दिन के चन्द्रोदय के आधार पर निर्धारित किया जाता है। जिस चतुर्थी तिथि के दिन चन्द्र उदय होता है, संकष्टी चतुर्थी का व्रत भी उसी दिन रखा जाता है।
संकष्टी चतुर्थी के दिन शाम को चंद्रोदय के बाद गणेश जी और चंद्र देव जी की पूजा की जाती है । यदि उस दिन बादल के कारण चन्द्रमा नहीं दिखाई देता है तो, पंचांग के अनुसार चंद्रोदय के समय में पूजा कर लेना चाहिए ।
आज गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके, लड्डुओं या गुड़ का भोग लगाकर “ॐ गण गणपतये नम:” मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करें ।
चतुर्थी को गणेश जी की आराधना से किसी भी कार्य में विघ्न नहीं आते है ।
चतुर्थी को गणेश जी के परिवार के सदस्यों के नामो का स्मरण, उच्चारण करने से भाग्य चमकता है, शुभ समय आता है
चतुर्थी तिथि को रिक्ता तिथि कहते है इस दिन शुभ कार्यो का प्रारम्भ शुभ नहीं समझा जाता है ।
किसी भी पक्ष की चतुर्थी तिथि में मूली और बैंगन का सेवन करना मना है। चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है, और चतुर्थी को बैगन खाने से रोग बढ़ते है ।
नक्षत्र ( Nakshatra ) : हस्त 09.29 AM तक तत्पश्चात चित्रा
नक्षत्र के स्वामी :– हस्त नक्षत्र के स्वामी चंद्र देव जी एवं राशि के स्वामी बुध देव जी है ।
आकाश मंडल में हस्त नक्षत्र को 13 वां नक्षत्र माना जाता है। यह आकाश में हाथ के पंजे के आकार में फैला सा नज़र आता है जो शक्ति, एकता, ताकत तथा भाग्य का प्रतीक है, इसमें सकारात्मक ऊर्जा मानी जाती है ।
यह नक्षत्र विजय, बुद्दिमता और जीवन जीने की ललक को प्रदर्शित करता है। इस नक्षत्र का आराध्य वृक्ष : चमेली रीठा तथा स्वाभाव शुभ माना गया है।
हस्त नक्षत्र सितारे का लिंग पुरुष है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक पर जीवन भर चंद्र और बुध का प्रभाव बना रहता है।
इस नक्षत्र में जन्मा जातक शांत, दयालु, आकर्षक और वफादार होते हैं। यह एक अवसर तलाशने वाले, बुद्धिमान, मिलनसार, शांत और विनम्र स्वभाव के होते हैं ।
यदि चन्द्र और बुध की जन्म कुंडली में स्थिति खराब हो तो जातक दब्बू, डरपोक, शीघ्र क्रोध करने वाला,अनैतिक कार्यो में लिप्त रहने वाला शराब का लती भी हो सकता है ।
इन नक्षत्र के लोगो का 30 से 42 वर्ष की आयु के बीच का समय सबसे भाग्यशाली होता है।
हस्त नक्षत्र में पैदा हुई स्त्री, आकर्षक, मिलनसार बड़ो का सम्मान करने वाली होती हैं। किसी के भी अधीन रहना इनको पसंद नहीं होता है, समान्यता इनका पारिवारिक दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
हस्त नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 2 और 5, भाग्यशाली रंग, गहरा हरा, भाग्यशाली दिन सोमवार, शुक्रवार और बुधवार माना जाता है ।
हस्त नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ सावित्रे नम: “। मन्त्र माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।
“हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “। आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।
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6 मार्च 2026 का पंचांग, 6 March 2026 ka Panchang, aaj ka panchang, aaj ka rahu kaal, aaj ka shubh panchang, friday ka panchang, panchang, shukrawar ka panchang, Shukravar Ka Panchang, shukrawar ka rahu kaal, shukrwar ka shubh panchang, आज का पंचांग, आज का राहुकाल, आज का शुभ पंचांग, पंचांग, फ्राइडे का पंचांग, शुक्रवार का पंचांग, शुक्रवार का राहु काल, शुक्रवार का शुभ पंचांग,
ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय ( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )9425203501+7587346995
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Guruwar Ka Panchag, गुरुवार का पंचांग, 5 मार्च 2026 का पंचांग,
गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 5 March 2026 Ka Panchang,
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बृहस्पतिवार का पंचांग, Brahaspativar ka panchang,
Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-
पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
* शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है । * वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है। * नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है। * योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है । * करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए । जानिए आज गुरुवार का पंचांग, Guruwar Ka Panchag,
गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 5 मार्च 2026 का पंचांग,
दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए ।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं । इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें। इस उपाय को करने से कार्यो में अड़चने दूर होती है, भाग्य चमकने लगता है, बृहस्पति देव की कृपा मिलती है।
यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है। और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।
गुरुवार को विष्णु जी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, गुरुवार को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ परम फलदाई है।
* शक संवत – 1947, *कलि संवत 5127, * अयन – उत्तरायण, * ऋतु – बसंत ऋतु, * मास – फाल्गुन माह * पक्ष – शुक्ल पक्ष *चंद्र बल – मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु, मीन,
गुरुवार को बृहस्पति देव की होरा :-
प्रात: 6.42 AM से 7.45 AM तक
दोपहर 01.17 PM से 2.19 PM तक
रात्रि 20.11 PM से 8.15 PM तक
आज गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा के समय दाहिने हाथ की तर्जनी ऊंगली ( अंगूठे के बगल वाली उंगली ) के नीचे गुरु पर्वत और उस पूरी ऊंगली पर बृहस्पति देव के मंत्र का जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य ) I
गुरुवार को बृहस्पति की होरा में अधिक से अधिक बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करें । शिक्षा, मान – सम्मान, व्यापार, कारोबार, नए कार्यो के प्रारम्भ के लिए गुरुवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।
गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा में बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।
तिथि (Tithi) :- द्वितीया17.03 PM तक तत्पश्चात तृतीया,
तिथि का स्वामी – द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्मा जी और तृतीया तिथि की स्वामी माँ गौरी और कुबेर देव जी है।
द्वितीया तिथि के स्वामी सृष्टि के रचियता भगवान ‘ब्रह्मा’ जी हैं। इसका विशेष नाम ‘सुमंगला’ है। यह भद्रा संज्ञक तिथि है।
सोमवार और शुक्रवार को द्वितीया तिथि मृत्युदा होती है। लेकिन बुधवार के दिन दोनों पक्षों की द्वितीया में विशेष सामर्थ होता है और यह सिद्धिदा हो जाती है, अर्थात इसमें किये गये सभी कार्य शुभ और सफल होते हैं।
द्वितीया तिथि को चारो वेदो के रचियता ब्रह्मा जी का स्मरण करने से कार्य सिद्ध होते है।
व्यासलिखित पुराणों के अनुसार ब्रह्मा जी के चार मुख हैं, जो चार दिशाओं में देखते हैं। शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मा को स्वयंभू (स्वयं जन्म लेने वाला) और चार वेदों का निर्माता माना गया है।
ब्रह्मा जी की उत्पत्ति विष्णु की नाभि से निकले कमल से मानी गयी है। मान्यता है कि ब्रह्मा जी के एक मुँह से हर वेद निकला था।
देवी सावित्री ब्रह्मा जी की पत्नी, माँ सरस्वती ब्रह्मा जी की पुत्री, सनकादि ऋषि,नारद मुनि और दक्ष प्रजापति इनके पुत्र और इनका वाहन हंस है।
ब्रह्मा जी ने अपने चारो हाथों में क्रमश: वरमुद्रा, अक्षरसूत्र, वेद तथा कमण्डलु धारण किया है।
द्वितीया तिथि को ब्रह्मचारी ब्राह्मण की पूजा करना एवं उन्हें भोजन, अन्न, वस्त्र आदि का दान देना बहुत शुभ माना गया है।
भारत के राजस्थान के पुष्कर में ब्रह्मा जी का विश्व प्रसिद्द मंदिर है, ब्रह्मा जी की पूजा भारत में केवल यहीं पुष्कर तीर्थ के ब्रह्मा मंदिर में ही की जाती है । यहाँ पर ब्रह्मा जी के दर्शन पूजा से समस्त कार्य सिद्ध होने लगते है ।
ऐसा माना जाता है कि पुष्कर तीर्थ को स्वयं सृष्टि के हिंदू देवता ब्रह्मा द्वारा निर्मित किया गया था । इस तीर्थ में हर साल लाखो हिन्दू ब्रह्मा जी के दर्शन, उनकी पूजा करने के लिए आते है ।
शुक्ल पक्ष की द्वितीया में भगवान शंकर जी माँ पार्वती के संग होते हैं इसलिए भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं।
लेकिन कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि में भगवान शंकर की पूजा करना उत्तम नहीं माना जाता है।
नक्षत्र (Nakshatra) – उत्तराफाल्गुनी 08.17 AM तक तत्पश्चात हस्त
नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी – उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के देवता आर्यमन और स्वामी सूर्य, बुध देव जी है ।
आकाश मंडल में उत्तरा फाल्गुनी को 12 वां नक्षत्र माना जाता है। ‘उत्तरा फाल्गुनी’ का अर्थ है ‘बाद का लाल नक्षत्र’। यह एक बिस्तर या बिस्तर के पिछले दो पाए को दर्शाता है जो आराम और विलासिता के जीवन का प्रतीक है।
यह नक्षत्र रोमांस, कामुक, ऐश्वर्य, रोमांच और अनैतिक आचरण को प्रदर्शित करता है। इस नक्षत्र काआराध्य वृक्ष : पाकड़ तथा स्वाभाव शुभ माना गया है।
उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र सितारे का लिंग महिला है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक पर जीवन भर सूर्य और बुध का प्रभाव बना रहता है।
इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति दानी, दयालु, साहसी, विद्वान, चतुर, उग्र स्वभाव, सही निर्णय लेने वाले होते है। इन्हे पूर्ण संतान, भूमि का सुख मिलता है।
लेकिन यदि सूर्य और बुध की स्थिति जन्म कुंडली में खराब है तो जातक का रुझान गलत कार्यों में रहने लगता है, उसका झुकाव विपरीत लिंगी की तरफ बहुत आसानी से हो जाता है।
उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में पैदा हुई स्त्री, सरल, शांत लेकिन खुशमिज़ाज़ होती हैं। यह आसानी से सबको प्रभावित कर लेती है ।इनका पारिवारिक दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 12, भाग्यशाली रंग, चमकदार नीला, भाग्यशाली दिन बुधवार, शुक्रवार, और रविवार माना जाता है ।
उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ अर्यमणे नम: “। मन्त्र माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।
योग के स्वामी, स्वभाव :- शूल योग के स्वामी सर्प एवं स्वभाव हानिकारक है ।
प्रथम करण :- गर 17.03 PM तक
करण के स्वामी, स्वभाव :- गर करण के स्वामी भूमि तथा स्वभाव सौम्य है ।
द्वितीय करण :- वणिज 05.24 AM शुक्रवार 6 मार्च तक
करण के स्वामी, स्वभाव :- वणिज करण की स्वामी लक्ष्मी देवी और स्वभाव सौम्य है ।
ब्रह्म मुहूर्त : 5.04 AM से 5.53 AM तक
विजय मुहूर्त : 14.30 PM से 15.16 PM तक
गोधूलि मुहूर्त : 18.21 PM से 18.46 PM तक
अमृत काल : 03.11 AM से 04.52 AM शुक्रवार 6 मार्च तक
दिशाशूल (Dishashool)– बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
गुलिक काल : – गुलिक 09:30 AM से 11 AM बजे तक ।
राहुकाल (Rahukaal)– दिन – 1:30 PM से 3:00 PM तक।
सूर्योदय – प्रातः 06:42
सूर्यास्त – सायं 18.23
विशेष – द्वितीया को बैगन, कटहल और नींबू का सेवन नहीं करना चाहिए ।
“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
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बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang, 4 मार्च 2026 का पंचांग,
Panchang, पंचाग, आज का पंचांग, aaj ka pancahng, Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang,
पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi) 2:- वार (Day) 3:- नक्षत्र (Nakshatra) 4:- योग (Yog) 5:- करण (Karan)
पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे । जानिए बुधवार का पंचांग, Budhvar Ka Panchang, आज का पंचांग, aaj ka panchang,
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बुधवार का पंचांग (Budhwar Ka Panchang)
4 मार्च 2026 का पंचांग, ( Panchang ), 4 March 2026 ka Panchang,
गणेश गायत्री मंत्र : ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
।। आज का दिन मंगलमय हो ।।
* दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है। बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
तिथि (Tithi) – प्रतिपदा 16.48 PM तक तत्पश्चात द्वितीया,
तिथि के स्वामी – प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव जी और द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्मा जी है ।
होलिका दहन के दूसरे दिन होली / धुलेंडी का पर्व मनाया जाता है । आज लोग एक दूसरे को रंग, अबीर-गुलाल लगाते हैं, इसे धुलेंडी कहा जाता है, इस दिन हुलियारों की टोलियाँ ढोल बजा बजा घूम,घूम कर होली खेलती है । इस दिन लोग एक दूसरे के घर जा कर रंग लगाते है और गले मिलते है।
इस बार रंगो का यह पर्व मंगलवार 3 मार्च को चंद्र ग्रहण लगने के कारण होलिका दहन के बाद एक दिन छोड़कर आया है ।
धुलेंडी / होली क्यों मनाते है : पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्री विष्णु जी ने त्रेतायुग के प्रारम्भ में धूलि वंदन किया था, इसलिए इस दिन को धुलेंडी कहा जाने लगा ।
प्रेम के देवता कामदेव जी का पुनर्जन्म : एक बार भगवान शंकर जी ने कामदेव को भस्म कर दिया था लेकिन रति के विलाप और देवताओं के अनुरोध पर उन्होंने कामदेव को दुबारा जीवित कर दिया था जो की होली / धुलंडी का दिन था । इसलिए धुलेंडी को कामदेव के पुनर्जन्म और उनकी पत्नी देवी रति को प्राप्त वरदान की खुशी में मनाया जाता है ।
असत्य पर सत्य की जीत : धुलेंडी जिस दिन रंग खेला जाता है, यह होलिका दहन के अगले दिन मनाई जाती है, जो असत्य पर सत्य की जीत का धोतक है ।
भक्त प्रह्लाद और होलिका की कथा : प्रह्लाद, जो राक्षस राज हिरण्यकश्यप का पुत्र और भगवान श्री विष्णु जी का परम भक्त था, उसको मरने के लिए होलिका उसे गॉड में लेकर अग्नि में बैठ गयी थी लेकिन प्रह्लादजी के प्राण बच गए परन्तु होलिका जल गई, इसलिए यह पर्व धुलेंडी असत्य पर सत्य की जीत के रूप में मनाया जाता है और लोग हर्ष उल्लास से आपस में रंग खेलते है ।
होली के दिन लोग पुरानी से पुरानी कटुता को भूला कर गले मिलकर फिर से दोस्त बन जाते हैं। होली में आपस में वैर भाव मिटा कर खुद पहल करके दुश्मनो से भी रंग खेलकर सभी से साफ मन से गले मिलना चाहिए ।
मान्यता है कि इस दिन पहल करके शत्रुता भुलाने से वर्ष भर आप के शत्रु आपसे पराजित होते रहेंगे ।होली पर रंग सभी व्यक्तियों को जरूर ही खेलना चाहिए, इससे घर परिवार में प्रेम, सौहार्द्य और सुख का वास होता है ।
होली के दिन जिस दिन रंग खेलते है उस दिन सुबह स्नान के बाद लाल गुलाल लेकर उसे सबसे पहले घर के मंदिर में देवी देवताओं की मूर्ति / चित्र पर लगाएं फिर घर के बड़े बुजुर्गों को रंग लगाकर उनसे आशीर्वाद लेकर ही रंग खेलना शुरू करना चाहिए ।
शास्त्रों के अनुसार देवता भी होली खेलते है, जो कार्य देवताओं को भी प्रिय है उसे तो हमें अवश्य करना ही चाहिए ।
नक्षत्र (Nakshatra) – पूर्वाफाल्गुनी 07.39 AM तक तत्पश्चात उत्तराफाल्गुनी
नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी- पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के देवता भग (धन व ऐश्वर्य के देवता) और स्वामी शुक्र देव जी है ।
आकाश मंडल में पूर्वा फाल्गुनी को 11वां नक्षत्र माना जाता है। इस नक्षत्र का प्रतीक बिस्तर के सामने के दो पैर हैं जो आराम, अच्छे भाग्य का भी प्रतीक है।
यह नक्षत्र सुख, धन, कामुक प्रसन्नता, प्रेम और मनोरंजन को दर्शाता हैं। इस नक्षत्र काआराध्य वृक्ष : पलाश तथा स्वाभाव शुभ माना गया है। पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र सितारे का लिंग महिला है।
इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक पर जीवनभर सूर्य और शुक्र का प्रभाव बना रहता है।
पूर्वा फाल्गुनी में जन्मा जातक सुन्दर, विलासी, स्त्रियों का प्रिय, साहसी, चतुर, वाकपटु, खुले दिल वाला और घूमने फिरने का शौक़ीन होता है, इन्हे स्त्री और धन-संपत्ति का पूर्ण सुख मिलता है।
लेकिन यदि सूर्य और शुक्र शुभ नहीं है तो जातक बहुत कामुक, विलासी, धूर्त, घमंडी, जुए – सट्टे का लती और क्रोधी हो सकता है।
इस नक्षत्र में जन्म लेने वाली स्रियाँ धार्मिक, दयालु, आकर्षक, मिलनसार, आसानी से दूसरो को प्रभावित करने वाली, वैसी प्रवर्ति की होती है। यह आसानी से जीवन में सफलता प्राप्त कर लेती हैं।
पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 9, भाग्यशाली रंग, चाकलेटी, हल्का भूरा, भाग्यशाली दिन शुक्रवार और रविवार माना जाता है ।
पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ भगाय नमः”। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।
संकटो से रक्षा के लिए इस नक्षत्र के जातको को नित्य भगवान शंकर की आराधना करनी चाहिए । पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे जातको को नित्य तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन माँ लक्ष्मी जी की आराधना से कभी भी धन की कमी नहीं होती है ।
“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।
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4 मार्च 2026 का पंचांग, 4 March 2026 ka panchang, aaj ka panchang, aaj ka rahu kaal, aaj ka shubh panchang, Budhwar Ka Panchang, budhwar ka rahu kaal, budhwar ka shubh panchang, kal ka panchang, panchang, Wednesday ka panchang, आज का पंचांग, आज का राहुकाल, आज का शुभ पंचांग, कल का पंचांग, पंचांग, बुधवार का पंचांग, बुधवार का राहु काल, बुधवार का शुभ पंचांग, वेडनेस डे का पंचांग,
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होली holi हर्ष, उल्लास, जोश, रंगों, उमंगों और मौज मस्ती का पर्व है। पुराणों में होली के बारे में लिखा है कि हर मनुष्य को अपने पूरे हर्ष, उल्लास के साथ होली के पर्व को मनाना चाहिए, इससे जीवन में सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
मान्यता है कि सभी राशियों पर अलग अलग रंगो का प्रभाव होता है, और अगर आप अपने भाग्यशाली रंग से होली खेलें तो फिर आपका भाग्य आप पर अवश्य ही प्रसन्न रहेगा । यहाँ पर हम प्रत्येक राशि के अनुसार उनके भाग्यशाली रंग बता रहे है जिनसे उन राशि के जातकों को होली खेलनी चाहिए :–
मिथुन राशि का स्वामी बुध है और यह वायु तत्व की राशि है । बुध का हरे रंग का प्रतीक है अत: मिथुन राशि के जातक होली हरे रंग से खेले या रंग इनके लिए बहुत शुभ रंग रहेगा ।
इस रंग से होली खेलने से ना केवल इनका मान सम्मान बढ़ेगा वरन इनके सम्बन्धो में भी प्रगाढ़ता आएगी । इस राशि के जातक हरे रंगो के अतिरिक्त बैंगनी रंग से भी होली खेल सकते हैं।
इन दोनों रंगो के संयोग से इन्हे जीवन में बहुत आसानी से सुख, शांति, प्रेम और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होगी ।
इस राशि के लोग सबसे पहले अपने ईष्ट, प्रियजनों के माथे पर रंग लगाकर ही होली खेलने की शुरुआत करें ।
कर्क राशि का स्वामी चन्द्र है और यह जल तत्व की राशि है । कर्क राशि वाले व्यक्ति बहुत ही कल्पनाशील होते हैं और समान्यता: रंगों का पर्व होली इनका पसंदीदा त्योहार होता है। यह होली के रंग और अच्छे-अच्छे पकवान दोनों के ही शौक़ीन होते हैं।
चूँकि चन्द्रमा सफ़ेद रंग का प्रतीक है इसीलिए सफेद रंग के वस्त्र पहनकर होली खेलना इनके लिए शुभ होगा। यह इनको हर्ष, शांति और दिल से सकून प्रदान करेगा ।
कर्क राशि के जातक नीले और हरा रंग से होली खेले । यह लोग पीले रंग से भी होली खेल सकते है। इससे इन्हे धन, यश और वैभव की प्राप्ति होगी।
लेकिन लाल और नारंगी रंग से परहेज करें। यह रंग आपको गुस्से में उत्तेजित कर सकते हैं।
सिंह राशि Singh Rashi :-
सिंह राशि Singh Rashi का स्वामी सूर्य है और यह अग्नि तत्व की राशि है । सिंह राशि के लोग बहुत ही जिंदादिल होते है और यह सभी जगह अपने लिए बड़ी ही आसानी से महत्वपूर्ण स्थान बना लेते है ।
यह लोग गोल्डन पीले, लाल और नारंगी रंग से होली खेले । इससे ना केवल यह खुद ऊर्जावान रहेंगे वरन इनके सम्पर्क में आने वाले लोग भी उत्साह से ओत प्रोत रहेंगे।
सिंह राशि के जातक सुबह भगवान सूर्य को प्रणाम करके ही होली खेलने की शुरुआत करें तो इनके जीवन में धन धान्य की कोई भी कमी नहीं रहेगी ।
इस राशि के जातक होली के लिए किसी के आने इन्तज़ार न करें वरन खुद घर से निकल कर लोगो को अपने रंगो से रंगना शुरू करें ।
यह लोग अपने प्रियजन के चेहरे पर लाल, पीला अथवा गोल्डन रंग लगाएं और किसी को भी रंग लगाने से मना नहीं करें। इनकी यही खूबी तो इनके परिचितों से इनकी नजदीकियां बढ़ाती है।
कन्या राशि Kanya Rashi का स्वामी बुध है और यह पृथ्वी तत्व की राशि है।
कन्या राशि के लोग हरे, भूरे अथवा नारंगी रंगो से होली खेले तो उनके लिए शुभ होगा । इन रंगो से होली खेलने से इनके जीवन के आर्थिक संकट दूर होते है ।
होली के अवसर पर यह अपने मन में किसी के लिए भी कटुता ना रखे इससे इनके सम्बन्ध घनिष्ठ होंगे इन्हे धन और यश की भी प्राप्ति होगी ।
कर्क राशि के जातक होली में किसी का भी दिल कदापि ना दुखाएं ।
कर्क राशि के लोग होली खेलते समय सामने वाले के सिर और माथे पर हरे, नारंगी रंग को लगाकर होली खेलना शुरू करें और गीले रंग में भूरे और बैंगनी रंग का प्रयोग करें। यह दोनों रंग भी कन्या राशि के लोगो के शुभ माने गए हैं।
तुला राशि Tula Rashi :-
तुला राशि Tula Rashi का स्वामी शुक्र है और यह वायु तत्व की राशि है।
यह सफेद और हलके गुलाबी रंग के वस्त्र पहनकर होली खेलें तो यह इनके लिए उत्तम रहेगा ।
तुला राशि के जातको को नीले, केसरिया अथवा गुलाबी रंगो से होली खेलना शुभ रहेगा ।
इससे यह ना केवल दूसरों के ह्रदय में अपना अलग स्थान ही बना पाएंगे वरन इनको धन की भी कोई कमी नहीं रहेगी ।
यह अपने प्रियजनों को बहुत प्रेम और साफ मन से खूब जी भरकर रंग लगाएं ।
वृश्चिक राशि Vrishchik Rashi :-
वृश्चिक राशि Vrishchik Rashi का स्वामी मंगल है और यह जल तत्व की राशि है।
इसी लिए इनके लिए लाल,मैरून और पीला रंग उत्तम है। इस राशि के जातको को होली विशेष रूप से पसंद होती है ।
लाल और मैरून रंग के प्रयोग से इनके जीवन के सभी आर्थिक संकट दूर रहते है ।
होली के अवसर पर यह अपने उच्चाधिकारियों से भी आसानी से नजदीकियां बढ़ा सकते हैं। विपरीत लिंग वाले जातक भी इनकी ओर आसानी से आकर्षित होंगे ।
यह अपने प्रियजनों के चेहरे पर लाल और पीला गुलाल लगाकर शरीर के अन्य अंगो पर लाल और मैरून रंग लगाएं। इन्हे नजदीकियाँ बढ़ाने के लिए होली के पर्व का अवश्य ही लाभ उठाना चहिये।
धनु राशि Dhanu Rashi :-
धनु राशि Dhanu Rashi का स्वामी गुरु है और यह अग्नि तत्व की राशि है। इसी कारण इस राशि के जातको के लिए लाल रंग एवं पीला रंग सर्वोत्तम है।
होली में यह दोनों रंग ऊर्जा और प्रसन्नता को बढ़ाएंगे । पीला रंग देवताओं का भी प्रिय रंग है। इस रंग के प्रभाव से जातक को गुरु ग्रह से संबंधित कोई भी परेशानियां नहीं होती है ।
आप लोग अपने किसी भी प्रियजन के साथ होली ना खेलकर उन्हें निराश बिलकुल भी ना करें ।
धनु राशि के जातक होली के अवसर पर अपने प्रियजन से प्यार का इजहार भी कर सकते हैं। यह लोग अपने संबधो में मजबूती लाने के लिए अपने प्रियजनों के गालों पर पीला, लाल रंग लगाएं।
ध्यान रहे कि आप लोग किसी भी प्रकार के घातक रासायनिक रंगो का कतई प्रयोग ना करें ।
मकर राशि Makar Rashi का स्वामी शनि है और यह पृथ्वी तत्व की राशि है।
मकर राशि के जातको को होली खेलना कोई विशेष नहीं भाता है लेकिन होली खेलना इनके लिए बहुत ही शुभ रहता है अत: इन्हे भी होली अवश्य ही खेलनी चाहिए ।
होली पर नीले अथवा काले रंग से होली खेलने से आपको अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में आसानी रहेगी, क्योंकि इन रंगो के प्रभाव से आप परिश्रमी और लक्ष्य के प्रति समर्पित होंगे ।
आपकी राशि के लिए लाल, भूरा और बैंगनी रंग भी उत्तम है।
चूँकि आप गहरे रंगो का प्रयोग कर रहे है इसलिए यह ध्यान अवश्य ही दीजिये कि यह रंग हानिकारक बिलकुल भी ना हो ।
कुम्भ राशि Kumbh Rashi :-
कुम्भ राशि Kumbh Rashi का स्वामी भी शनि देव है और यह वायु तत्व की राशि है।
शनि के शुभ प्रभाव को बनाए रखने के लिए काला, बैगनी अथवा लाल रंग का प्रयोग करना आपके लिए अच्छा होगा। इसके अलावा आप गुलाबी रंग भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
काला रंग परिश्रम, बैंगनी ऐश्वर्य, लाल प्रेम और गुलाबी सुख का प्रतीक माना जाता है ।
इन रंगों के शुभ प्रभाव से आप हर परिस्थितियों को अपने पक्ष में करने में आप सफल होंगे। आप में सभी को अपना बनाने की नैसर्गिक क्षमता है इसलिए आपको होली पूरे उत्साह से खेलकर इस अवसर का लाभ अवश्य ही उठाना चाहिए ।
इस राशि के जातको को काले कुत्तों की सेवा भी अवश्य ही करनी चाहिए ।
मीन राशि Meen Rashi :-
मीन राशि Meen Rashi का स्वामी गुरु है और यह जल तत्व की राशि है। पीला रंग गुरु का रंग होने के कारण इस रंग से होली खेलना आपके लिए शुभ होगा।
आप भगवान शिव के शिवलिंग पर पीला रंग चढ़ाकर होली खेलने की शुरुआत करें । साथ ही हरा और गुलाबी रंग भी आपके लिए शुभ रहेगा ।
इन रंगो से होली खेलने से आपको धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी ।
आपकी सौम्यता की वजह से आपके परिचित भी आपसे होली खेलने को लालायित रहते है ।
आप होली में किसी को भी निराश ना करें वरन बड़ चढ़ कर इस खुशियों के पर्व को अवश्य ही मनाएं ।
पं मुक्ति नारायण पाण्डेय ( कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ हर समस्या का समाधान आपकी कुंडली में ही है संपर्क सूत्र 9425203501 +7587346995+07714070168*) Updated On : 2025-01-15 03:15:55 PM
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पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे । जानिए मंगलवार का पंचांग (Mangalvar Ka Panchang)।
शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है । वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है। नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है । *करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है । इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
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हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
दोस्तों, हमारा whats up नंबर whats up ने रिस्ट्रीक्ड कर रखा है जिससे हम ब्राडकॉस्ट पर लोगो को मैसेज नहीं भेज पा रहे है। सिंगल सिंगल मैसेज भेजने से एकाउंट ब्लॉक हो जा रहा है ।
अब अगर आप 16 सालो से निरंतर बनते, भेजते पंचांग को पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।
यदि आपके पास कभी भी हमारा पंचांग पहुंचा है तो सप्ताह के जिस दिन का भी आपके पास लिंक है उस पर क्लिक करके आप उस दिन का पंचांग पढ़ सकते है और हर पंचांग पर उसके अगले और पीछे के दिन का लिंक लगा होता है, अर्थात यदि आपके पास हमारे किसी भी दिन के पंचांग का लिंक है तो आप सप्ताह के किसी भी दिन का पंचांग अवश्य पढ़ सकते है ।
हम अपने व्हाट्स अप नंबर के स्टेटस पर नित्य सुबह पंचांग को लगा देते है आप वहां से भी पढ़ सकते है और पंचांग को अपना व्हाट्स अप स्टेटस पर लगा सकते है जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग पंचांग का लाभ उठा सकें।
कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।
आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद 💰🔝💰🔝💰🔝💰🔝💰🔝💰🔝💰🔝💰
।। आज का दिन मंगलमय हो ।।
दिन (वार) – मंगलवार Mangalwar के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार Mangalwar को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
तिथि के स्वामी :- पूर्णिमा तिथि के स्वामी चंद्र देव जी और प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव जी है ।
आज फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि है। फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि सोमवार 02 मार्च को शाम 17 बजकर 55 मिनट से शुरू हुई जो आज मंगलवार 3 मार्च को शाम 16 बजकर 46 मिनट तक है ।
फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका दहन का पर्व होता है, होलिका का दहन भद्रा रहित समय में किया जाता है । शास्त्रों के अनुसार अगर होलिका दहन के समय में भद्रा आ रही हो तो होलिका दहन का मुहूर्त हमेशा भद्रा मुख का त्याग करके निर्धारित होता है क्योंकि भद्रा मुख में होलिका दहन बिलकुल वर्जित है, हाँ भद्रा की पुछ में होलिका दहन किया जा सकता है ।
इस वर्ष 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा पर सोमवार 2 मार्च को भद्रा तिथि सांय 17:46 पर पूर्णिमा तिथि लगते ही लग गई थी जो आज मंगलवार को सूर्योदय से पूर्व 05:19 तक रही थी ।
2 मार्च सोमवार को मध्य रात्रि में 12.30 AM से 02.10 AM के मध्य भद्रा का पुछ मिल रहा था जिसमे होलिका का दहन किया गया है, होलिका दहन के अगले दिन रंग खेला जाता है जिसे धुलंडी भी कहते है लेकिन आज चंद्र ग्रहण है जो भारत में भी नज़र आएगा । भारत में नज़र आने के कारण इसका सूतक भी मान्य है ग्रहण से 9 घंटे पहले ही लग जाता है ।
यह चंद्र ग्रहण भारतीय समय के अनुसार दोपहर 3 बजकर 21 मिनट को लगेगा और शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा ।
चंद्र ग्रहण लगने से 9 घंटे पहले सूतक लग जाता है और उसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है, सूतक चूँकि आज सुबह 6.21 AM से ही लग जायेगा जो ग्रहण की समाप्ति पर 6.47 PM तक रहेगा इसलिए इस वर्ष होली पर रंग होलिका दहन के बाद एक दिन छोड़कर अर्थात 3 मार्च मंगलवार की जगह 4 मार्च बुधवार को को खेला जायेगा ।
आज चंद्र ग्रहण के कारण प्रात: 06.21 से लगने वाले सूतक की वजह से मंदिरो के कपाट सुबह से ही बंद रहेंगे, जो चंद्र ग्रहण की समाप्ति पर सांय 6.47 के बाद ही खुलेंगे ।
पूर्णिमा के दिन प्रात: काल सूर्योदय से पूर्व पवित्र नदियों में स्नान अथवा घर पर ही जल में गंगा जल डाल कर स्नान करने से समस्त पापो का नाश होता है ।
पूर्णिमा तिथि को चन्द्रमा सम्पूर्ण होता है। पूर्णिमा तिथि माँ लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है, इस दिन सुख समृद्धि के लिए चंद्र ग्रहण के बाद माँ लक्ष्मी की विधि पूर्वक उपासना अवश्य करें।
पूर्णिमा तिथि के दिन माँ लक्ष्मी की आराधना करने, श्री सूक्त का पाठ एवं कनकधारा स्रोत्र का पाठ करने से उस घर में सदैव माँ लक्ष्मी जी का वास होता है ।
पूर्णिमा तिथि को संध्या के समय में सत्यनारायण भगवान की पूजा तथा कथा की जाती है एवं चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। आप सांय काल चंद्र ग्रहण के बाद सत्य नाराणय की कथा कहें या सुने इससे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होगी ।
पूर्णिमा तिथि के स्वामी चन्द्र देव जी है, पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति को चन्द्र देव की पूजा नियमित रुप से अवश्य ही करनी चाहिए।
पूर्णिमा तिथि के दिन चन्द्र देव जी के मन्त्र
ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:। अथवा
ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम:।
का जाप करने से कुंडली में चन्द्रमा के शुभ फल मिलने लगते है ।
इस दिन सफ़ेद वस्त्र पहने और चन्द्रमा की चांदनी में अवश्य बैठें ।
पूर्णिमा के दिन लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा आदि का सेवन नहीं ना करें, इस दिन परिवार में सुख-शांति बनायें रखे इस दिन क्रोध और हिंसा से दूर रहना चाहिए ।
पूर्णिमा के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना, सहवास करना निषिद्ध है।
पूर्णिमा के दिन ब्रह्यचर्य का पालन करना चाहिए । पूर्णिमा के दिन गरीब या जरुरतमंद को दान करने से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
आज मंगलवार 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लग रहा है। इस साल भारत में सिर्फ यही ग्रहण दिखाई देगा। इस ग्रहण के दौरान चंद्रमा लाल रंग का नजर आएगा इसे ब्लड मून भी कहते है।
जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में आता है तब इस तरह का दृश्य नज़र आता है । इस समय सूर्य की रोशनी चंद्रमा तक पृथ्वी के वायुमंडल से मुड़कर पहुंचती है, जिससे चंद्रमा लाल या तांबे के रंग का नजर आने लगता है।
यह चंद्र ग्रहण भारतीय समय के अनुसार दोपहर 3 बजकर 21 मिनट को लगेगा और शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा अर्थात इस चंद्र ग्रहण की कुल अवधि लगभग 3 घंटे 26 मिनट की होगी । यह चंद्र ग्रहण भारत के अतिरिक्त , एशिया, ऑस्ट्रेलिया एवं अफ्रीका में दिखाई देगा ।
भारत में इस चंद्र ग्रहण का प्रारंभ शाम 6 बजकर 26 मिनट से होगा और इस ग्रहण का समापन शाम 6 बजकर 46 मिनट पर होगा। अर्थात भारत में चंद्र ग्रहण की अवधि लगभग 20 मिनट्स की होगी ।
चंद्र ग्रहण लगने से 9 घंटे पहले सूतक लग जाता है और उसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है, सूतक चूँकि आज सुबह 6.21 AM से ही लग जायेगा जो ग्रहण की समाप्ति पर 6.47 PM तक रहेगा इसलिए इस वर्ष होली पर रंग होलिका दहन के बाद एक दिन छोड़कर अर्थात 3 मार्च मंगलवार की जगह 4 मार्च बुधवार को को खेला जायेगा ।
ग्रहण के दौरान मंत्र का जप करना अत्यंत शुभ माना गया है । मान्यता है कि ग्रहण में जप और दान करने से उसका करोड़ गुना फल मिलता है ।
ग्रहण काल में भोजन पकाना, भोजन करना, सोना, देव प्रतिमा का स्पर्श करना, शुभ कार्य करना, तेल-मालिश करना, बाल-नाखून काटना, शारीरिक संबंध बनाना आदि कार्य वर्जित कहे गए हैं ।
चंद्र ग्रहण के समय अधिक से अधिक मंत्रो का मानसिक रूप से जाप करना चाहिए । चंद्र ग्रहण के समय ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम:। अथवा
ॐ सोम सोमाय नम : का अधिक से अधिक जाप करना परम फलदाई है ।
नक्षत्र (Nakshatra) – मघा 07.21 AM तक तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुनी
नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी – मघा नक्षत्र के देवता पितर देव और नक्षत्र स्वामी केतु जी है ।
मघा का अर्थ होता है महान। मघा नक्षत्र का आकाश में 10वां स्थान है। मघा नक्षत्र के चारों चरण सिंह राशि में हीआते हैं।
मघा नक्षत्र को सिंहासन द्वारा दर्शाया गया है जो शक्ति, उच्च प्रतिष्ठा, गुणों का प्रतीक है। मघा नक्षत्र के जातको पर जीवन भर केतु और सूर्य का प्रभाव रहता है।
मघा नक्षत्र का आराध्य वृक्ष: बरगद एवं नक्षत्र का स्वभाव उग्र, क्रूर माना गया है।
मघा नक्षत्र में जन्मे जातक बुद्धिमान, स्पष्टवादी, दयालु, भरोसेमंद, साहसी, धीरे बोलने वाले, बड़ो का सम्मान करने वाले और अपनी स्त्री के वश में रहने वाले होते है। इन्हे भूमि, भवन और माता का पूर्ण सुख मिलता है।
लेकिन यदि चन्द्रमा, केतु और सूर्य खराब स्थिति में हैं तो जातक क्रोधी, शक्की, भावुक, बहुत अधिक चिंता करने वाला होता है।
इस नक्षत्र में जन्म लेने वाली स्रियाँ मददगार, परोपकारी, विलासी जीवन पर खर्च करने वाली लेकिन विवादों में शामिल होने वाली जल्द ही आवेश में आ जाने वाली होती है ।
मघा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 7 और 10, भाग्यशाली रंग, क्रीम, लाल , भाग्यशाली दिन शनिवार और मंगलवार का माना जाता है ।
मघा नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ पितृभ्यो नमः”। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।
मघा नक्षत्र के जातको को हर अमावस्या को पितरो के निमित ब्राह्मण भोजन और दान पुण्य करना चाहिए इससे पितरो के आशीर्वाद से जीवन से अस्थिरताएँ दूर होती है ।
इस नक्षत्र के जातको को भगवान शिव और माँ काली की आराधना भी श्रेष्ठ फलदाई कही गयी है ।
मघा नक्षत्र का पेड़ बरगद है, अतः मघा नक्षत्र में बरगद के पेड़ की पूजा करनी चाहिए। इस नक्षत्र के जातको को बरगद के पेड़ के एक पत्ते पर हल्दी से स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर उसे अपने घर के मंदिर में रखकर अगले दिन उस पत्ते को बहते पानी में प्रवाहित करना चाहिए ।
योग :- सुकर्मा 10.25 AM तक तत्पश्चात धृति
योग केस्वामी :- सुकर्मा योग के स्वामी इंद्र जी और स्वभाव शुभ माना जाता है ।
प्रथम करण : – बव 17.07 PM तक
करण के स्वामी, स्वभाव :- बव करण के स्वामी इंद्र देव और स्वभाव सौम्य है ।
द्वितीय करण : – बालव 04.34 AM बुधवार 4 मार्च तक
करण के स्वामी, स्वभाव :- बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।
ब्रह्म मुहूर्त : 05.05 AM से 5.55 AM तक
विजय मुहूर्त : 14.29 PM से 15.16 PM तक
गोधूलि मुहूर्त : 18.20 PM से 18.44 PM तक
अमृत काल : 01.13 AM से 02.49 AM बुधवार 04 मार्च तक
दिशाशूल (Dishashool)- मंगलवार को उत्तर दिशा का दिकशूल होता है।
यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से गुड़ खाकर जाएँ ।
गुलिक काल : – दोपहर 12:00 से 01:30 तक है ।
राहुकाल (Rahukaal) दिन – 3:00 से 4:30 तक।
सूर्योदय – प्रातः 06:44
सूर्यास्त – सायं 18:22
विशेष – पूर्णिमा और व्रत के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना, सहवास करना, क्रोध करना, हिंसा करना मना है ।
ऐसा करने से दुर्भाग्य आता है, दुःख, कलह और दरिद्रता के योग बनते है ।
पर्व – त्यौहार-फाल्गुन माह की पूर्णिमा, चंद्र ग्रहण
“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।
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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय ( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )9425203501. 7587346995
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