मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang, 3 मार्च 2026 का पंचांग,

मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang, 3 मार्च 2026 का पंचांग,

आप सभी को फाल्गुन माह की पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनायें


मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang,

Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)




पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए मंगलवार का पंचांग (Mangalvar Ka Panchang)।

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

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हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।

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आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
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।। आज का दिन मंगलमय हो ।।

*विक्रम संवत् 2082,
*शक संवत – 194
7
*कलि सम्वत 5127
*अयन – 
उत्तरायण
*ऋतु – बसंत
 ऋतु
*मास –
 फाल्गुन माह,
*पक्ष – शुक्ल पक्ष
*चंद्र बल – मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, कुम्भ, मीन,

मंगलवार को मंगल की होरा :-

प्रात: 6.44 AM से 7.39 AM तक

दोपहर 01.15 PM से 8.18 PM तक

रात्रि 20.09 PM से 21.011 PM तक

मंगलवार को मंगल की होरा में हाथ की निम्न मंगल पर दो बूंद सरसो का तेल लगा कर उसे हल्के हल्के रगड़ते हुए अधिक से अधिक मंगल देव के मन्त्र का जाप करें ।

कृषि, भूमि, भवन, इंजीनियरिंग, खेलो, साहस, आत्मविश्वास

और भाई के लिए मंगल की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

मंगलवार के दिन मंगल की होरा में मंगल देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में मंगल मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

मंगल देव के मन्त्र

ॐ अं अंगारकाय नम: अथवा

ॐ भौं भौमाय नम:”

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तिथि :- पूर्णिमा 17.07 PM तक तत्पश्चात प्रतिपदा,

तिथि के स्वामी :- पूर्णिमा तिथि के स्वामी चंद्र देव जी और प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव जी है ।

आज फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि है। फाल्गुन मा​ह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि सोमवार 02 मार्च को शाम 17 बजकर 55 मिनट से शुरू हुई जो आज मंगलवार 3 मार्च को शाम 16 बजकर 46 मिनट तक है ।

फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका दहन का पर्व होता है, होलिका का दहन भद्रा रहित समय में किया जाता है । शास्त्रों के अनुसार अगर होलिका दहन के समय में भद्रा आ रही हो तो  होलिका दहन का मुहूर्त हमेशा भद्रा मुख का त्याग करके निर्धारित होता है क्योंकि भद्रा मुख में होलिका दहन बिलकुल वर्जित है, हाँ भद्रा की पुछ में होलिका दहन किया जा सकता है ।

इस वर्ष 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा पर सोमवार 2 मार्च को भद्रा तिथि सांय 17:46 पर पूर्णिमा तिथि लगते ही लग गई थी जो आज मंगलवार को सूर्योदय से पूर्व 05:19 तक रही थी ।

2 मार्च सोमवार को मध्य रात्रि में 12.30 AM से 02.10 AM के मध्य भद्रा का पुछ मिल रहा था जिसमे होलिका का दहन किया गया है, होलिका दहन के अगले दिन रंग खेला जाता है जिसे धुलंडी भी कहते है लेकिन आज चंद्र ग्रहण है जो भारत में भी नज़र आएगा । भारत में नज़र आने के कारण इसका सूतक भी मान्य है ग्रहण से 9 घंटे पहले ही लग जाता है ।

यह चंद्र ग्रहण भारतीय समय के अनुसार दोपहर 3 बजकर 21 मिनट को लगेगा और शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा ।

चंद्र ग्रहण लगने से 9 घंटे पहले सूतक लग जाता है और उसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है, सूतक चूँकि आज सुबह 6.21 AM से ही लग जायेगा जो ग्रहण की समाप्ति पर 6.47 PM तक रहेगा इसलिए इस वर्ष होली पर रंग होलिका दहन के बाद एक दिन छोड़कर अर्थात 3 मार्च मंगलवार की जगह 4 मार्च बुधवार को को खेला जायेगा ।

आज चंद्र ग्रहण के कारण प्रात: 06.21 से लगने वाले सूतक की वजह से मंदिरो के कपाट सुबह से ही बंद रहेंगे, जो चंद्र ग्रहण की समाप्ति पर सांय 6.47 के बाद ही खुलेंगे ।

पूर्णिमा के दिन प्रात: काल सूर्योदय से पूर्व पवित्र नदियों में स्नान अथवा घर पर ही जल में गंगा जल डाल कर स्नान करने से समस्त पापो का नाश होता है ।

पूर्णिमा तिथि को चन्द्रमा सम्पूर्ण होता है। पूर्णिमा तिथि माँ लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है, इस दिन सुख समृद्धि के लिए चंद्र ग्रहण के बाद माँ लक्ष्मी की विधि पूर्वक उपासना अवश्य करें।

पूर्णिमा तिथि के दिन माँ लक्ष्मी की आराधना करने, श्री सूक्त का पाठ एवं कनकधारा स्रोत्र का पाठ करने से उस घर में सदैव माँ लक्ष्मी जी का वास होता है ।

पूर्णिमा तिथि को संध्या के समय में सत्यनारायण भगवान की पूजा तथा कथा की जाती है एवं चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। आप सांय काल चंद्र ग्रहण के बाद सत्य नाराणय की कथा कहें या सुने इससे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होगी ।

पूर्णिमा तिथि के स्वामी चन्द्र देव जी है, पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति को चन्द्र देव की पूजा नियमित रुप से अवश्य ही करनी चाहिए।

पूर्णिमा तिथि के दिन चन्द्र देव जी के मन्त्र

ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:। अथवा

ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम:।

का जाप करने से कुंडली में चन्द्रमा के शुभ फल मिलने लगते है ।

इस दिन सफ़ेद वस्त्र पहने और चन्द्रमा की चांदनी में अवश्य बैठें ।

पूर्णिमा के दिन लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा आदि का सेवन नहीं ना करें, इस दिन परिवार में सुख-शांति बनायें रखे इस दिन क्रोध और हिंसा से दूर रहना चाहिए ।

पूर्णिमा के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना, सहवास करना निषिद्ध है।

पूर्णिमा के दिन ब्रह्यचर्य का पालन करना चाहिए । पूर्णिमा के दिन गरीब या जरुरतमंद को दान करने से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।

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आज मंगलवार 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लग रहा है। इस साल भारत में सिर्फ यही ग्रहण दिखाई देगा। इस ग्रहण के दौरान चंद्रमा लाल रंग का नजर आएगा इसे ब्लड मून भी कहते है।

जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में आता है तब इस तरह का दृश्य नज़र आता है । इस समय सूर्य की रोशनी चंद्रमा तक पृथ्वी के वायुमंडल से मुड़कर पहुंचती है, जिससे चंद्रमा लाल या तांबे के रंग का नजर आने लगता है।

यह चंद्र ग्रहण भारतीय समय के अनुसार दोपहर 3 बजकर 21 मिनट को लगेगा और शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा अर्थात इस चंद्र ग्रहण की कुल अवधि लगभग 3 घंटे 26 मिनट की होगी । यह चंद्र ग्रहण भारत के अतिरिक्त , एशिया, ऑस्ट्रेलिया एवं अफ्रीका में दिखाई देगा ।

भारत में इस चंद्र ग्रहण का प्रारंभ शाम 6 बजकर 26 मिनट से होगा और इस ग्रहण का समापन शाम 6 बजकर 46 मिनट पर होगा। अर्थात भारत में चंद्र ग्रहण की अवधि लगभग 20 मिनट्स की होगी ।

चंद्र ग्रहण लगने से 9 घंटे पहले सूतक लग जाता है और उसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है, सूतक चूँकि आज सुबह 6.21 AM से ही लग जायेगा जो ग्रहण की समाप्ति पर 6.47 PM तक रहेगा इसलिए इस वर्ष होली पर रंग होलिका दहन के बाद एक दिन छोड़कर अर्थात 3 मार्च मंगलवार की जगह 4 मार्च बुधवार को को खेला जायेगा ।

ग्रहण के दौरान मंत्र का जप करना अत्यंत शुभ माना गया है । मान्यता है कि ग्रहण में जप और दान करने से उसका करोड़ गुना फल मिलता है ।

ग्रहण काल में भोजन पकाना, भोजन करना, सोना, देव प्रतिमा का स्पर्श करना, शुभ कार्य करना, तेल-मालिश करना, बाल-नाखून काटना, शारीरिक संबंध बनाना आदि कार्य वर्जित कहे गए हैं ।

चंद्र ग्रहण के समय अधिक से अधिक मंत्रो का मानसिक रूप से जाप करना चाहिए । चंद्र ग्रहण के समय ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम:। अथवा

ॐ सोम सोमाय नम : का अधिक से अधिक जाप करना परम फलदाई है ।

  • नक्षत्र (Nakshatra) – मघा 07.21 AM तक तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुनी
  • नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी –  मघा नक्षत्र के देवता पितर देव और नक्षत्र स्वामी केतु जी है ।

मघा का अर्थ होता है महान। मघा नक्षत्र का आकाश में 10वां स्थान है। मघा नक्षत्र के चारों चरण सिंह राशि में हीआते हैं।  

मघा नक्षत्र को सिंहासन द्वारा दर्शाया गया है जो शक्ति, उच्च प्रतिष्ठा, गुणों का प्रतीक है। मघा नक्षत्र के जातको पर जीवन भर केतु और सूर्य का प्रभाव रहता है।  

मघा नक्षत्र का आराध्य वृक्ष: बरगद एवं नक्षत्र का स्वभाव उग्र, क्रूर माना गया है।

मघा नक्षत्र में जन्मे जातक बुद्धिमान, स्पष्टवादी, दयालु, भरोसेमंद, साहसी, धीरे बोलने वाले, बड़ो का सम्मान करने वाले और अपनी स्त्री के वश में रहने वाले होते है। इन्हे भूमि, भवन और माता का पूर्ण सुख मिलता है।

लेकिन यदि चन्द्रमा, केतु और सूर्य खराब स्थिति में हैं तो जातक क्रोधी, शक्की, भावुक, बहुत अधिक चिंता करने वाला होता है।

इस नक्षत्र में जन्म लेने वाली स्रियाँ मददगार, परोपकारी, विलासी जीवन पर खर्च करने वाली लेकिन विवादों में शामिल होने वाली जल्द ही आवेश में आ जाने वाली होती है ।

मघा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 7 और 10, भाग्यशाली रंग, क्रीम, लाल , भाग्यशाली दिन शनिवार और मंगलवार का माना जाता है ।

मघा नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ पितृभ्यो नमः”। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।

मघा नक्षत्र के जातको को हर अमावस्या को पितरो के निमित ब्राह्मण भोजन और दान पुण्य करना चाहिए इससे पितरो के आशीर्वाद से जीवन से अस्थिरताएँ दूर होती है ।

इस नक्षत्र के जातको को भगवान शिव और माँ काली की आराधना भी श्रेष्ठ फलदाई कही गयी है ।

मघा नक्षत्र का पेड़ बरगद है, अतः मघा नक्षत्र में बरगद के पेड़ की पूजा करनी चाहिए। इस नक्षत्र के जातको को बरगद के पेड़ के एक पत्ते पर हल्दी से स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर उसे अपने घर के मंदिर में रखकर अगले दिन उस पत्ते को बहते पानी में प्रवाहित करना चाहिए ।

  • योग :- सुकर्मा 10.25 AM तक तत्पश्चात धृति
  • योग के स्वामी :-  सुकर्मा योग के स्वामी इंद्र जी और स्वभाव शुभ माना जाता है ।
  • प्रथम करण : – बव 17.07 PM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-   बव करण के स्वामी इंद्र देव और स्वभाव सौम्य है ।
  • द्वितीय करण : – बालव 04.34 AM बुधवार 4 मार्च तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-      बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 05.05 AM से 5.55 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.29 PM से 15.16 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.20 PM से 18.44 PM तक
  • अमृत काल : 01.13 AM से 02.49 AM बुधवार 04 मार्च तक
  • दिशाशूल (Dishashool)- मंगलवार को उत्तर दिशा का दिकशूल होता है।

    यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से गुड़ खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – दोपहर 12:00 से 01:30 तक है ।
  • राहुकाल (Rahukaal) दिन – 3:00 से 4:30 तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 06:44
  • सूर्यास्त – सायं 18:22
  • विशेष – पूर्णिमा और व्रत के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना, सहवास करना, क्रोध करना, हिंसा करना मना है ।
  • ऐसा करने से दुर्भाग्य आता है, दुःख, कलह और दरिद्रता के योग बनते है । 
  • पर्व – त्यौहार- फाल्गुन माह की पूर्णिमाचंद्र ग्रहण

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )
9425203501.    7587346995


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