सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang, 14 सितम्बर 2026 का पंचांग, 14 September 2026 ka Panchang,

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आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद


Panchang, पंचाग, आज का पंचांग, aaj ka panchang, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए, सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang।

सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang,

14 सितम्बर 2026 का पंचांग, 14 September 2026 ka Panchang,

महा मृत्युंजय मंत्रॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।

  • दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।

    सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।

सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।

जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।

सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।

घर पर कैसा भी हो वास्तु दोष अवश्य करें ये उपाय, जानिए वास्तु दोष निवारण के अचूक उपाय

*विक्रम संवत् – 2083,
* शक संवत – 1948,
*कलि संवत – 5128
*कलयुग – 5128 वर्ष
* अयन – दक्षिणायण,
* ऋतु – वर्षा ऋतु,
* मास – भाद्रपद माह,
* पक्ष – शुक्ल पक्ष
*चंद्र बल – मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, मकर,

सोमवार को चन्द्रमा की होरा :-

प्रात: 6.05 AM से 7.07 AM तक

दोपहर 01.18 PM से 2.20 PM तक

रात्रि 20.24 PM से 21.22 PM तक

सोमवार को चन्द्रमा की होरा में अधिक से अधिक चन्द्र देव के मन्त्र का जाप करें। यात्रा, प्रेम, प्रसन्नता, कला सम्बन्धी कार्यो के लिए चन्द्रमा की होरा अति उत्तम मानी जाती है।


आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,भारत की लगभग 150 करोड़ की आबादी में 0.001 % अर्थात लगभग 15 हज़ार आदमी ही नित्य पंचांग पढ़ पाते है।

आप पर ईश्वर की असीम कृपा है जो आपको नित्य पंचांग पढ़ने का, अपने भाग्य को प्रबल करने का, पापो के प्रायश्चित करने का अवसर मिल रहा है,

दुनिया के सारे उपाय एक तरफ है, और नित्य पंचाग पढ़ने का पुण्य उससे भी कहीं अधिक है, नित्य पंचांग पढ़ने से देवताओं का आशीर्वाद मिलता है, कार्य सिद्ध होने लगते है,

इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है ।

अगर आज को चन्द्र देव के हो गए दर्शन, तो अपयश, झूंठा लांछन से बचने के लिए क्या करें उपाय

सोमवार के दिन चन्द्रमा की होरा में चंद्रदेव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में चंद्र देव मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

चन्द्रमा के मन्त्र

ॐ सों सोमाय नम:।

ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम: ।

आज 14 सितम्बर जीवन में किसी भी प्रकार के कलंक से बचने, चंद्रमा दर्शन के दोष को दूर करने के लिए गणेश चतुर्थी के दिन अवश्य करें ये उपाय

  • तिथि (Tithi) – तृतीया 07.06 AM तक तत्पश्चात चतुर्थी तिथि,
  • तिथि का स्वामी – तृतीया तिथि के स्वामी माँ गौरी और कुबेर देव जी और चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान गणपति गणेश जी है ।
     
  • तृतीया: किसी भी पक्ष की तीसरी तारीख को तृतीया तिथि या तीज कहते है।  तृतीया तिथि को जया तिथि भी कहा गया है।
  • अपने नाम के अनुसार ही यह तिथि सभी शुभ कार्यों में जय दिलाने अर्थात सफलता दिलाने वाली कही गई है। लेकिन बुधवार को तृतीया तिथि होने से मृत्युदा कहलाती है, इसलिए बुधवार की तृतीया को कोई भी नया कार्य शुरु करना शुभ नहीं माना जाता  है।
  • तृतीया तिथि में माँ गौरी जी की पूजा अर्चना करने से जीवन में सुख सौभाग्य की वृद्धि होती है। तृतीया के दिन माँ गौरी का ध्यान करते हुए उन्हें दूध की मिठाई, फूल और चावल अर्पित करें एवं श्रद्धानुसार घी का दीपक जलाकर ’’ऊँ गौर्ये नमः’’ की एक माला का अवश्य ही जाप करें । 
  • कुबेर जी भी तृतीया तिथि के स्वामी माने गये हैं। शास्त्रों के अनुसार कुबेर जी देवताओं के कोषाध्यक्ष है अतः इस दिन इनकी भी पूजा करने से जातक को विपुल धन-धान्य, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
  • कुबेर देव Kuber dev धन सम्पदा की दिशा उत्तर के लोकपाल हैं। ये भूगर्भ के भी स्वामी कहे गए हैं।
  • जैसे देवताओं के गुरु बृहस्पति और राजा इन्द्र कहे गए है उसी प्रकार सम्पूर्ण ब्राह्मांडों के धनाधिपति कुबेर देव  कहे गए है।
  • कुबेर देव के पिता विश्रवा तथा माता का नाम इडविडा हैं ।
  • कुबेर देव  की पत्नी का नाम देवी श्रद्धा तथा दोनों पुत्रों के नाम ‘नल कुबेर’ व ‘नील ग्रीव’ है ।
  • कुबेर देव रावण के सौतेले भाई है और या भगवान शिव जी के प्रिय सेवक , परम मित्र भी माने जाती है। घर में कुबेर देवता की फोटो को उत्तर दिशा की ओर लगाना चाहिए  और इस दिशा को बिलकुल साफ रखना चाहिए । 
  • शास्त्रों के अनुसार जो भी जातक किसी भी पक्ष की तृतीया को घी का दीपक जलाकर नियम से नीचे दिए गए कुबेर मंत्र का जप दक्षिण दिशा की ओर मुख करके करता है उसे कुबेर देव की कृपा अवश्य ही प्राप्त होती है, उसे अपने कार्यक्षेत्र , व्यापार में आशातीत सफलता मिलती है। 
  • कुबेर मंत्र: “ऊँ श्रीं, ऊँ ह्रीं श्रीं, ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय: नम:”। यदि इस मंत्र का जप किसी शिव मंदिर में अथवा बिल्वपत्र वृक्ष की जड़ों के समीप बैठकर करा जाये तो या बहुत अधिक उत्तम होता है, उस जातक को भगवान भोलेनाथ और कुबेर जी दोनों की पूर्ण कृपा प्राप्त होती है ।
  • तृतीया को परवल का सेवन नहीं करना चाहिए, तृतीया को परवल का सेवन करने से शत्रुओं में वृद्धि होती है ।

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आज भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी अति शुभ गणेश चतुर्थी का पर्व है । पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश का जन्म हुआ था इसीलिए भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश का जन्मोत्सव विधि-विधान और धूम-धाम के साथ मनाया जाता है।

वास्तव में गणेश उत्सव का पर्व पूरे हर्ष और उल्लास के साथ भाद्र माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से चतुर्दशी / अनंत चतुर्दशी तक 10 दिनों तक बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इन दस दिनों में विघ्ननाशक भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है।

गणेश चतुर्थी / गणेश उत्सव में भक्त गण पूर्ण श्रद्धा और अपने सामर्थ्य के अनुसार अपने घर / प्रतिष्ठान में भगवान गणपति की स्थापना करते है या इन दिनों प्रभु गजानन की पूजा अर्चना करते है ।

गणेशजी को किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में स्मरण किया जाता है—

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभकार्येषु सर्वदा॥

भावार्थ: हे विशाल स्वरूप वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी गणेशजी! मेरे सभी शुभ कार्यों को सदैव विघ्नरहित करें।

वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी की शुरुआत 14 सितम्बर सोमवार से हो रही है जिसका समापन 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के दिन किया जाएगा ।

गणेश जी की स्थापना का शुभ मुहूर्त, आज सोमवार 14 सितम्बर को सुबह 11 बजकर 42 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक रहेगा, एवं

दोपहर 01 बजकर 40 मिनट से लेकर सांय 06 बजकर 02 मिनट तक का समय गणपति जी की मूर्ति की स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त रहेगा। आप इस अवधि में गणपति जी की मूर्ति की स्थापना कर सकते हैं।

गणेशजी से संबंधित कथाएँ और महात्म्य विशेष रूप से गणेश अथर्वशीर्ष, गणेश पुराण और मुद्गल पुराण में मिलते हैं। इनके अतिरिक्त विभिन्न पुराणों तथा स्मृति-परंपरा में भी गणपति की पूजा और उनके विघ्नहर्ता स्वरूप का उल्लेख मिलता है।

घर में बैठे हुए गणेश जी Ganesh ji और कार्यस्थल पर खड़े गणपतिजी का चित्र लगाना ही हितकर होता है। लेकिन ये ध्यान रखें कि गणेशजी Ganesh ji के दोनों पैर जमीन का स्पर्श करते हुए हों, ताकि कार्य में स्थिरता आए।

गणेश जी की स्थापना करते, उनकी पूजा आराधना करते समय घी का दीपक जलाकर मूर्ति पर सिंदूर / रोली से तिलक करते हुए उनकी मूर्ति पर 11 /21 / 51 /101 दूर्वा चढ़ाएँ । इन दिनों भगवान गजानन को नित्य मोदक / गुड़ या बूंदी के लड्डुओं का भी भोग लगाएं। लेकिन ध्यान रखें कि उन्हें तुलसी कतई ना चढ़ाएँ ।

गणेश जी की पूजा में लाल फूल और शमी पत्र चढ़ाना चाहिए । गणेश जी को सफ़ेद चन्दन और गेंदे का फूल भी नहीं चढ़ाना चाहिए ।

सबसे अंत में सभी गलतियों की छमा याचना करते हुए भगवान को प्रणाम करना चाहिए। गणपति का पूजन शुद्ध आसन पर बैठकर अपना मुख पूर्व अथवा उत्तर दिशा की तरफ करके करें।

गणेश चतुर्थी Ganesh Chaturthi के 10 दिनों में प्रातः एवं संध्या के समय गणेश चालीसा, गणेश स्तुति, श्रीगणेश सहस्रनामावली, गणेश जी Ganesh ji की आरती, संकटनाशन गणेश स्तोत्र आदि का पाठ करें।

गणेश चतुर्थी के दिन सभी को बहुत ही सात्विक रहना चाहिए । इस दिन विघ्हर्ता गणपति जी पृथ्वी पर अपने भक्तो के दुःख हरने, उनके समस्त संकटो को दूर करने, उनके जीवन को हर्ष – उल्लास, सुख – समृद्धि से भरने के लिए आते है अत: इन दिनों बहुत ही श्राद्ध और प्रेम पूर्वक गणेश जी की आराधना करनी चाहिए ।

मान्यता है कि गणेश उत्सव के इन 10 दिनों में घर आये अतिथियों का बहुत ही आदर, सत्कार करना चाहिए इससे ग्रह दोषो का निवारण होता है, जीवन में शुभ समय आता है ।

गणेश उत्सव, गणेश चतुर्थी के दिन ऐसे करें गणपति जी की आराधना, स्थापना,  कष्ट होंगे दूर, पूरी होगी सभी मनोकामना

आज विनायक चतुर्थी तिथि है। प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी कहते है  । चतुर्थी तिथि के स्वामी देवताओं में प्रथम पूज्य, भगवान शिव और माता पार्वती के सबसे छोटे पुत्र भगवान गणेश जी माने गए हैं।  

इस दिन भगवान गणेश की पूजा अर्चना से निश्चय ही समस्त मनोवाँछित फलो की प्राप्ति होती है।

अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी तो पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। विनायक चतुर्थी के दिन गणेश जी की पूजा दोपहर के समय में की जाती है ।

मान्यता है कि किसी भी कार्य के प्रारम्भ में विघ्हर्ता की पूजा आराधना करने से सभी ग्रह दोष शांत होते है ।

चतुर्थी को गणपित जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके, लड्डुओं या गुड़ का भोग लगाकर “ॐ गण गणपतये नम: मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करें ।

गणेश जी को मोदक / लड्डू, लाल रंग के फूल, दुर्वा (दूब), शमी-पत्र, और केला अति प्रिय है, बुधवार और चतुर्थी को गजानन को यह वस्तुएं अर्पित करने से जीवन में शुभ समय आता है ।

चतुर्थी को गणेश जी की आराधना से किसी भी कार्य में विघ्न नहीं आते है, कार्यो में श्रेष्ठ सफलता मिलती है ।

चतुर्थी को गणेश जी के परिवार के सदस्यों के नामो का स्मरण, उच्चारण करने से भाग्य चमकता है, शुभ समय आता है ।

चतुर्थी तिथि को रिक्ता तिथि कहते है इस दिन शुभ कार्यो का प्रारम्भ शुभ नहीं समझा जाता है ।

किसी भी पक्ष की चतुर्थी तिथि में मूली और बैंगन का सेवन करना मना है। चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है, और चतुर्थी को बैगन खाने से रोग बढ़ते है ।

क्या आप जानते है कि गणेश जी का दाँत कैसे टूटा था, चारो युग में गणेश जी के कौन कौन से वाहन है, अवश्य जानिए गणपति जी के बारे में विशेष बातें

नक्षत्र (Nakshatra) – चित्रा 13.55 PM तक तत्पश्चात स्वाति

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी-   चित्रा नक्षत्र के देवता विश्‍वकर्मा जी एवं चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल देव जी है ।

  चित्रा नक्षत्र नक्षत्र मंडल में उपस्थित 27 नक्षत्रों में 14 वां है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, चित्रा नक्षत्र का शासक ग्रह चंद्र देव जी है।  

यह एक मोती या उज्ज्वल गहने की तरह है जो चमकते प्रकाश सा हमारे भीतर की आत्मा का प्रतीक है।  27 नक्षत्रों में चित्रा नक्षत्र सबसे ज्यादा चमकने वाला नक्षत्र भी बताया जाता है ।

चित्रा नक्षत्र कलात्मकता, रचनात्मकता का प्रतीक है, इसीलिए इस नक्षत्र के लोग अपने क्षेत्र में बहुत ही प्रवीण होते है वह साधारण चीज़ को भी और भी अधिक खूबसूरत, विशेष बनाते है,  उसके मूल्य को बढ़ा देते हैं।

चित्रा नक्षत्र में जन्म लेने वाले पुरुष बहुत मेहनती होते हैं। इसके बावजूद सफलता प्राप्त करने में इन्हें 32 साल की उम्र तक संघर्ष करना पड़ता है।

इस नक्षत्र का आराध्य वृक्ष : बेल तथा स्वाभाव तीक्ष्ण माना गया है। चित्रा नक्षत्र स्टार का लिंग मादा है।

चित्रा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 5, 6 और 9,  भाग्यशाली रंग, काला,  भाग्यशाली दिन रविवार और बुधवार माना जाता है ।

चित्रा नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ चित्रायै नमः”l। मन्त्र माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।

गणेश उत्सव के दिन अवश्य जानें कैसे हुआ गणेश जी का अवतरण, कैसे गणेश जी का सर हाथी के सर में बदल गया, कैसे कहलाएं भगवान गजानन

  अगर पश्चिम मुख का है आपका घर तो ऐसा रहना चाहिए आपके घर का वास्तु, जानिए पश्चिम दिशा के अचूक वास्तु टिप्स 


  • योग – ब्रह्म 12.47 PM तक तत्पश्चात इंद्र
  • योग केस्वामी:-    ब्रह्म योग के स्वामी अश्विनी कुमार जी एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है  ।।
  • प्रथम करण : – गर 07.06 AM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-     गर करण के स्वामी भूमि तथा स्वभाव सौम्य है ।

    अवश्य पढ़ें :- कुंडली में केतु अशुभ हो तो आत्मबल की होती है कमी, भय लगना, बुरे सपने आना, डिप्रेशन का होता है शिकार, केतु के शुभ फलो के लिए करे ये उपाय
  • द्वितीय करण : – वणिज 19.20 PM तक तत्पश्चात विष्टि
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-   वणिज करण की स्वामी लक्ष्मी देवी और स्वभाव सौम्य है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.32 AM से 5.19 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.20 PM से 15.10 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.28 PM से 18.51 PM तक
  • अमृत काल :- 07.18 AM से 08.57 AM तक
  • शिव वास :- सभा में 07.06 AM तक तत्पश्चात क्रीड़ा में

  • शिव वास जब सभा में होता है अर्थात जब भगवान शंकर अपनी सभा में होते हैं, तो उस सामान्य रुद्र अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शिव के सभा में होने पर रूद्र अभिषेक करने से दुःख का सामना करना पड़ सकता है।
  • जब भगवान शंकर जी क्रीड़ा में होते हैं, तो उस समय भी रुद्र अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान भोलेनाथ जी के कार्य अथवा क्रीड़ा के समय रूद्र अभिषेक करने से जीवन में तरह तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।  


  • अग्निवास : पाताल में 07.06 AM तक तत्पश्चात पृथ्वी पर


    जब पाताल में अग्नि वास है तो वह हवन से सम्बन्धित अनुष्ठानों के लिये शुभ नहीं मानी जाती है, यह अशुभ मानी गई है । अग्नि के पाताल  वास के दौरान किये जाने वाले हवन  सम्बन्धित अनुष्ठानों व्यक्ति को आर्थिक नुकसान करना पड़ता है उसका  धन नष्ट हो सकता है।

    अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।

  • विशेष –
  • पर्व त्यौहार- विनायक चतुर्थी, गणेश उत्सव प्रारम्भ
  • मुहूर्त (Muhurt) –

“हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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आप पर ईश्वर की असीम अनुकम्पा की वर्षा होती रहे ।

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*ॐ नमः शिवाय | जय सनातन* 


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