आप सभी शिव भक्तो को सावन के सोमवार की हार्दिक शुभकामनायें, हर हर महादेव
सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang, 17 अगस्त 2026 का पंचांग, 17 August 2026 ka Panchang,
मित्रो हम पिछले 35 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है, अगर आप भी पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।
कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।
आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
Panchang, पंचाग, आज का पंचांग, aaj ka panchang, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-
1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)
पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए, सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang।
सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang,
17 अगस्त 2026 का पंचांग, 17 August 2026 ka Panchang,
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
- दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
घर पर कैसा भी हो वास्तु दोष अवश्य करें ये उपाय, जानिए वास्तु दोष निवारण के अचूक उपाय
*विक्रम संवत् – 2083,
* शक संवत – 1948,
*कलि संवत – 5128
*कलयुग – 5128 वर्ष
* अयन – दक्षिणायण,
* ऋतु – वर्षा ऋतु,
* मास – सावन माह,
* पक्ष – शुक्ल पक्ष
*चंद्र बल – वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर, कुम्भ,
सोमवार को चन्द्रमा की होरा :-
प्रात: 5.51 AM से 6.57 AM तक
दोपहर 01.31 PM से 2.36 PM तक
रात्रि 20.48 PM से 21.42 PM तक
सोमवार को चन्द्रमा की होरा में अधिक से अधिक चन्द्र देव के मन्त्र का जाप करें। यात्रा, प्रेम, प्रसन्नता, कला सम्बन्धी कार्यो के लिए चन्द्रमा की होरा अति उत्तम मानी जाती है।
आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,भारत की लगभग 150 करोड़ की आबादी में 0.001 % अर्थात लगभग 15 हज़ार आदमी ही नित्य पंचांग पढ़ पाते है।
आप पर ईश्वर की असीम कृपा है जो आपको नित्य पंचांग पढ़ने का, अपने भाग्य को प्रबल करने का, पापो के प्रायश्चित करने का अवसर मिल रहा है,
दुनिया के सारे उपाय एक तरफ है, और नित्य पंचाग पढ़ने का पुण्य उससे भी कहीं अधिक है, नित्य पंचांग पढ़ने से देवताओं का आशीर्वाद मिलता है, कार्य सिद्ध होने लगते है,
इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है ।

सोमवार के दिन चन्द्रमा की होरा में चंद्रदेव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में चंद्र देव मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।
चन्द्रमा के मन्त्र
ॐ सों सोमाय नम:।
ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम: ।

- तिथि (Tithi) – पंचमी 17 PM तक तत्पश्चात षष्टी,
- तिथि का स्वामी – पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता जी और षष्टी तिथी के स्वामी भगवान कार्तिकेय जी है ।
- आज नाग पंचमी का पर्व है, नाग पंचमी का पर्व सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है । इस नाग देवता की पूजा करने का विधान है ।
मान्यताओं के अनुसार इस दिन नागो का पूजन करने वाले जातकों और उनके परिवार पर नागों की कृपा होती है, कुंडली के कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है । - इस बार सावन के सोमवार के दिन नाग पंचमी का पर्व आने पर इस पर का पर्व और भी अधिक बढ़ गया है। पंचमी तिथि का प्रारम्भ रविवार 16 अगस्त को सांय 16.53 से हुआ है इस तिथि का समापन आज सोमवार 17 अगस्त को सांय 17.00 होगा इसलिए उदया तिथि के अनुसार नाग पंचमी का पर्व सोमवार 17 अगस्त को मनाया जायेगा ।
- भविष्य पुराण के ब्रह्मा पर्व में नाग पंचमी की कथा के बारे में उल्लेख्य है उस के अनुसार सुमंतु मुनि ने शतानीक राजा को नाग पंचमी की कथा के बारे में बताया है । ऐसा मन जाता है कि सावन माह के शुक्ल पक्ष के पंचमी के दिन नाग लोक में बहुत बड़ा उत्सव मनाया जाता है ।
- वैसे तो वर्ष की सभी पंचमियों के दिन नाग देवता की पूजा स्मरण किया जाता है लेकिन सावन माह की पंचमी जिसे नाग पंचमी कहते है, इसके बारे में मान्यता है की जो व्यक्ति इस दिन नागों की पूजा करता है, उन्हें गाय के दूध से स्नान कराता है, नागो से उसके कुल को अभय दान मिल जाता हैं, उसको और उसके परिजनों को को सर्प का कभी भय नहीं रहता है, कुंडली के घातक दोषो, काल सर्प दोष से छुटकारा मिलता है ।
- सनातन परंपरा में नागों का भगवान शिव से अत्यंत गहरा संबंध है। भगवान शिव के कंठ में नागराज वासुकि सुशोभित होते हैं, उन्हें नागो का राजा भी कहा जाता है । समुद्र मंथन के दौरान वासुकि नाग को मंदराचल पर्वत पर रस्सी के रूप में लपेटा गया था। इसलिए श्रावण मास, शिव आराधना और नाग पूजा का संबंध विशेष रूप से दिखाई देता है।
- भगवान विष्णु का शेषनाग पर शयन भी नागों के दिव्य और ब्रह्मांडीय स्वरूप को दर्शाता है।
- नाग पंचमी के संदर्भ में भगवान श्रीकृष्ण का यह श्लोक विशेष रूप से महत्वपूर्ण है:
- ॥ अनन्तश्चास्मि नागानां ॥ — श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 10, श्लोक 29
- अर्थात्: “नागों में मैं अनन्त (शेषनाग) हूँ।”
- यहाँ भगवान श्रीकृष्ण नागों में अनन्त नाग को अपनी विभूति बताते हैं। इसलिए नाग पूजा को केवल सर्प पूजा न मानकर, भगवान की दिव्य शक्तियों के प्रति श्रद्धा के रूप में भी समझा जाता है।
- प्रसिद्ध ग्रन्थ महाभारत में जन्मेजय के नाग यज्ञ की कहानी का भी उल्लेख्य है जिसके अनुसार जन्मेजय द्वारा किये गए नाग यज्ञ के दौरान बड़े-बड़े विशाल, विकराल नाग अग्नि में आकर जलने लगे ।
- उस समय आचार्य आस्तिक जी ने इस सर्प यज्ञ को रोककर नागों की रक्षा की थी यह सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि ही थी, इसके बाद से ही इस दिन नाग पंचमी का पर्व मानाने की प्रथा का प्रारम्भ हो गया ।
- ऐसी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति आस्तिक ऋषि जी का 3 बार नाम लेता है उसे कभी भी सांप के काटे जाने का भय नहीं होता है ।
- नाग पंचमी व्रत-कथा परंपरा में राजा शतानिक और सुमन्तु मुनि का संवाद मिलता है। इसमें पंचमी तिथि को नागों के लिए विशेष प्रिय बताया गया है ।
- नाग पंचमी के दिन वाराणसी में “नाग कुआँ” नामक स्थान पर बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है । ऐसा माना जाता है कि इस स्थान वाराणसी में नाग राज तक्षक, गरूड़ जी के भय से बालक के रूप में काशी संस्कृत की शिक्षा लेने हेतु आये, परन्तु गूरू पत्नी के सखियों से गरुड़ जी तक्षक रुपी बालक के बारे में पता लग गया और उन्होंने तक्षक पर हमला कर दिया, परन्तु फिर अपने गुरू जी के प्रभाव के कारण गरूड़ जी ने शरणागत तक्षक नाग को अभय दान दे दिया ।
- उसी समय से वाराणसी में इस स्थान पर नाग पंचमी के दिन से नाग देवता की पूजा की जाती है, मान्यता है, कि जो भी नाग पंचमी के दिन वाराणसी में “नाग कुँआ” पर पूजा अर्चना कर नाग कुआँ का दर्शन करता है, उसकी कुन्डली से काल सर्प दोष का निवारण हो जाता है।
- नाग पंचमी के दिन घर की दीवाल पर गेरू पोतकर पूजा करने का स्थान बनाया जाता है। उसके बाद कच्चे दूध में कोयला घिसकर उससे गेरू पुती दीवाल के ऊपर घर जैसा चित्र बनाकर उसमें अनेक नागो की आकृति बनाई जाती हैं।
- कई स्थानों पर हल्दी व चंदन की स्याही से अथवा गोबर से घर के मुख्य दरवाजे के दोनों तरफ पाँच फन वाले नागदेव की आकृति बनाकर उसकी पूजा की जाती हैं।
- नाग पंचमी के दिन “ॐ कुरुकुल्ये हुं फट् स्वाहा” का जाप करने से नाग देवता का आशीर्वाद मिलता है, भय बाधाएं दूर होती है ।
- इस दिन नागदेव का दर्शन करना बहुत शुभ माना जाता है । इस दिन बहुत सी जगहों पर सांप की बाँबी की भी पूजा की जाती है । नाग पंचमी के दिन जमीन को नहीं खोदना चाहिए अन्यथा साँप रुष्ट हो जाते है ।
- इस दिन भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग के ऊपर बनी सांप की आकृति पर दूध चढ़ाकर नाग की पूजा करने, शिवलिंग पर चांदी अथवा तांबे के नाग नागिन का जोड़ा अर्पित करने से भी काल सर्पदोष दूर होता है, कुंडली में राहु के शुभ फल मिलने लगते है ।
- नाग पंचमी के दिन नागो के अति पवित्र और पुण्यदायक नामो 1. अनंत (शेषनाग ), 2. वासुकि, 3. तक्षक, 4. कर्कोटक, 5. पद्म, 6. महापद्म, 7. शंख, 8. कुलिक, 9. धृतराष्ट्र और 10. कालिया का उच्चारण करने से काल सर्प दोष दूर होता है, कोई भी भय निकट नहीं रहता है, बल और साहस की प्राप्ति होती है ।
- पंचमी को नागो के पौराणिक नाम “अनंत, वासुकि, तक्षक, कर्कोटल, पिंगल” का कम से कम 11 बार उच्चारण अवश्य ही करें।
- हिन्दू पंचांग के अनुसार पंचमी तिथि को बसंत पंचमी, रंग पंचमी, विवाह पंचमी, नाग पंचमी, ऋषि पंचमी, लाभ पंचमी / सौभाग्य पंचमी आदि कई शुभ पर्व आते है ।
- पंचमी तिथि पूर्णा तिथियों की श्रेणी में आती है, इस तिथि में समस्त शुभ कार्य सिद्ध होते हैं, किन्तु पंचमी तिथि को कर्ज नहीं देना चाहिए।
- पंचमी को बेल खाना निषेध है, मान्यता है कि पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है।
अवश्य पढ़ें :- चाहते है बेदाग, गोरी त्वचा तो तुरंत करें ये उपाय, आप खुद भी आश्चर्य चकित हो जायेंगे,
आज सावन माह का तीसरा सोमवार, और नाग पंचमी का पर्व का उत्तम संयोग है । सावन माह गुरुवार 30 जुलाई से प्रारम्भ हो चूका है, भगवान भोलनाथ को सावन का सोमवार अत्यंत प्रिय है । मान्यता है की सावन माह में शिवलिंग पर मात्र जल चढ़ाने से भगवान शंकर जी अत्यंत प्रसन्न हो जाते है ।
ऐसी मान्यता है कि सावन के सोमवार का ब्रत रखने, इस दिन शिवलिंग का विधि पूर्वक अभिषेक करने से जीवन से सभी संकटो का नाश होता है, इस वर्ष सावन में 4 सोमवार पड़ रहे है ।
समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने समस्त सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था, और वह नीलकंठ महादेव कहलाएं । देवताओं ने उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए जल अर्पित किया। तभी से सावन में जलाभिषेक की परंपरा प्रचलित हुई।
सावन में भगवान शंकर और माँ पारवती की पूजा करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है, परिवार में प्रेम और सौहर्द का वातावरण बनता है ।
मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या सफल होने पर शिव-पार्वती का दिव्य मिलन हुआ। इसलिए अविवाहित कन्याएँ तथा युवक भी उत्तम जीवनसाथी की कामना से सावन के सोमवार का व्रत रखते हैं।
सावन के सोमवार का ब्रत रहने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन मधुर बनता है, स्वास्थ्य एवं मानसिक शांति मिलती है, संतान सुख एवं परिवार में मंगल बना रहता है, शिव कृपा से जीवन की समस्त बाधाएँ दूर होती हैं।
सावन के सोमवार के दिन शिवलिंग का पंचामृत, दूध, दही, घी, शहद, गन्ने का रस से अभिषेक करके, बेल पत्र, शमी पत्र, भांग, धतूरा, आक का पुष्प, काले तिल, अक्षत चढ़ाकर पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है ।
सावन के सोमवार के दिन ॐ नम: शिवाये,
श्री शिवाये नमस्तुभ्यं अथवा
महामृत्युंजय मन्त्र :-
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
का अधिक से अधिक जाप अवश्य ही करें ।
भगवान शिव की पूजा में रुद्राभिषेक का अत्यंत महत्व है। वैसे अन्य सभी माह में रुद्राभिषेक के लिए मुहूर्त देखना पड़ता है लेकिन सावन मास में प्रत्येक दिन ‘रुद्राभिषेक’ किया जाना बहुत शुभ माना जाता है।
‘शिवपुराण’ में लिखा भी है कि भगवान भोलेनाथ स्वयं ही जल हैं, इसलिए इसमें कोई भी संशय नहीं है की जल द्वारा शिवजी का अभिषेक उनकी कृपा प्राप्त करने के सर्वोत्तम मार्ग है।
कहते है कि भगवान शिव सावन के महीने में पृथ्वी पर अवतरित होकर अपनी ससुराल गए थे और वहां पर उनका स्वागत भव्य रूप से अभिषेक द्वारा किया गया था, इसलिए भी यह माह शिवजी को विशेष रूप से प्रिय है।
तभी से माना जाता है कि भगवान शिव प्रत्येक वर्ष सावन माह में अपनी ससुराल आते हैं और सभी मनुष्यो के लिए भगवान शिव की कृपा पाने का यह स्वर्णिम अवसर होता है।
सावन सोमवार के दिन क्या करें ?
प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग का गंगाजल, जल, दूध, दही, शहद, घी एवं शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करें।
बेलपत्र (तीन पत्तियों वाला), शमी पत्र, धतूरा, आक के फूल, भांग, सफ़ेद पुष्प, सफेद चंदन एवं फल अर्पित करें।
ॐ नमः शिवाय मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें।
इस दिन शिव चालीसा, शिव तांडव स्तोत्र, महामृत्युंजय मंत्र तथा रुद्राभिषेक का पाठ करें।
गरीबों एवं जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र एवं दक्षिणा का दान करें।
सावन के सोमवार के दिन यथाशक्ति व्रत रखें और इस दिन सात्विक भोजन करें।
इस दिन शिवलिंग पर हल्दी, केतकी का फूल तथा तुलसी दल अर्पित न करें।
“सावन का प्रत्येक सोमवार आपके जीवन में भगवान भोलेनाथ की असीम कृपा, उत्तम स्वास्थ्य, सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति लेकर आए।
हर हर महादेव! ॐ नमः शिवाय!”

नक्षत्र (Nakshatra) – चित्रा नक्षत्र 04.58 AM सोमवार 18 अगस्त तक
नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी- चित्रा नक्षत्र के देवता विश्वकर्मा जी एवं चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल देव जी है ।
चित्रा नक्षत्र नक्षत्र मंडल में उपस्थित 27 नक्षत्रों में 14 वां है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, चित्रा नक्षत्र का शासक ग्रह चंद्र देव जी है।
यह एक मोती या उज्ज्वल गहने की तरह है जो चमकते प्रकाश सा हमारे भीतर की आत्मा का प्रतीक है। 27 नक्षत्रों में चित्रा नक्षत्र सबसे ज्यादा चमकने वाला नक्षत्र भी बताया जाता है ।
चित्रा नक्षत्र कलात्मकता, रचनात्मकता का प्रतीक है, इसीलिए इस नक्षत्र के लोग अपने क्षेत्र में बहुत ही प्रवीण होते है वह साधारण चीज़ को भी और भी अधिक खूबसूरत, विशेष बनाते है, उसके मूल्य को बढ़ा देते हैं।
चित्रा नक्षत्र में जन्म लेने वाले पुरुष बहुत मेहनती होते हैं। इसके बावजूद सफलता प्राप्त करने में इन्हें 32 साल की उम्र तक संघर्ष करना पड़ता है।
इस नक्षत्र का आराध्य वृक्ष : बेल तथा स्वाभाव तीक्ष्ण माना गया है। चित्रा नक्षत्र स्टार का लिंग मादा है।
चित्रा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 5, 6 और 9, भाग्यशाली रंग, काला, भाग्यशाली दिन रविवार और बुधवार माना जाता है ।
चित्रा नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ चित्रायै नमः”l। मन्त्र माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।
- योग – शुभ 03.29 AM सोमवार 18 अगस्त तक
- योग केस्वामी:- शुभ योग की स्वामी माँ लक्ष्मी जी और स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है ।
- प्रथम करण : – बालव 17.00 PM तक
- करण के स्वामी, स्वभाव :- बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।
अवश्य पढ़ें :- कुंडली में केतु अशुभ हो तो आत्मबल की होती है कमी, भय लगना, बुरे सपने आना, डिप्रेशन का होता है शिकार, केतु के शुभ फलो के लिए करे ये उपाय - द्वितीय करण : – कौलव 05.20 AM सोमवार 18 अगस्त तक
- करण के स्वामी, स्वभाव :- कौलव करण के स्वामी मित्र और स्वभाव सौम्य है ।
- ब्रह्म मुहूर्त : 4.24 AM से 5.08 AM तक
- विजय मुहूर्त : 14.36 PM से 15.29 PM तक
- गोधूलि मुहूर्त : 18.59 PM से 19.20 PM तक
- अमृत काल :- 22.16 PM से 23.57 PM तक
- शिव वास :- कैलाश पर 17.00 PM तक तत्पश्चात नंदी पर
शिव वास :- जब भगवान भोलेनाथ जी कैलाश पर होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान शंकर जी के कैलाश पर्वत पर रहने के दौरान रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सुखो की प्राप्ति होती है।
शिव वास :- जब भगवान भोलेनाथ नन्दी जी पर विराजमान होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना सदैव बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों केअनुसार भगवान शंकर जी के नन्दी पर विराजमान के समय रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सफलता, शुभ समाचारो की प्राप्ति होती है। - अग्निवास : पृथ्वी पर 17.00 PM तक तत्पश्चात आकाश पर
अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।
अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।
- दिशाशूल (Dishashool)- सोमवार को पूर्व दिशा का दिशा शूल होता है ।
- यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दर्पण देखकर, दूध पीकर जाएँ ।
- गुलिक काल : – दोपहर 1:30 से 3 बजे तक ।
- राहुकाल (Rahukaal)– सुबह -7:30 से 9:00 तक।
अपनी आकृषण शक्ति, चुम्बकीय शक्ति बढ़ाना चाहते है तो अवश्य ही करें ये उपाय - * सूर्योदय – प्रातः 05:51
- * सूर्यास्त – सायं 18:59
- विशेष – पंचमी तिथि को बेल का सेवन नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि पंचमी को बेल का सेवन करने से अपयश मिलता है।
- पंचमी तिथि को कर्ज भी नहीं देना चाहिए, पंचमी को कर्ज देने से धन डूब जाता है तथा धन के आगमन में भी रुकावटें आने लगती है ।
- पर्व त्यौहार- सावन का दूसरा सोमवार, नाग पंचमी का पर्व
- मुहूर्त (Muhurt) –
“हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।
अपने धर्म, अपनी संस्कृति अपने नैतिक मूल्यों के प्रचार, प्रसार के लिए तन – मन – धन से अपना बहुमूल्य सहयोग करें । आप हमें अपनी इच्छा – सामर्थ्य के अनुसार सहयोग राशि 9425203501 पर Google Pay कर सकते है ।
आप पर ईश्वर की असीम अनुकम्पा की वर्षा होती रहे ।
17 अगस्त 2026 का पंचांग, 17 August 2026 ka Panchang, aaj ka panchang, aaj ka rahu kaal, aaj ka shubh panchang, monday ka panchang, monday ka rahu kaal, panchang, somvar ka panchang, somvar ka rahu kaal, somvar ka shubh panchang,
आज का पंचांग, आज का राहुकाल, आज का शुभ पंचांग, पंचांग, मंडे का पंचांग, मंडे का राहुकाल, सोमवार का पंचांग, सोमवार का राहु काल, सोमवार का शुभ पंचांग
दोस्तों यह साईट बिलकुल निशुल्क है। यदि आपको इस साईट से कुछ भी लाभ प्राप्त हुआ हो, आपको इस साईट के कंटेंट पसंद आते हो तो मदद स्वरुप आप इस साईट को प्रति दिन ना केवल खुद ज्यादा से ज्यादा विजिट करे वरन अपने सम्पर्कियों को भी इस साईट के बारे में अवश्य बताएं …..धन्यवाद ।




कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
Comment form message