सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang, 10 अगस्त 2026 का पंचांग,
आप सभी शिव भक्तो को सावन के सोमवार, सोम प्रदोष ब्रत की हार्दिक शुभकामनायें, हर हर महादेव
सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang, 10 अगस्त 2026 का पंचांग, 10 August 2026 ka Panchang,
मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है, अगर आप भी पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।
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आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
Panchang, पंचाग, आज का पंचांग, aaj ka panchang, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-
1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)
पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए, सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang।
सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang,
10 अगस्त 2026 का पंचांग, 10 August 2026 ka Panchang,
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
- दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
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*विक्रम संवत् – 2083,
* शक संवत – 1948,
*कलि संवत – 5128
*कलयुग – 5128 वर्ष
* अयन – दक्षिणायण,
* ऋतु – वर्षा ऋतु,
* मास – सावन माह,
* पक्ष – कृष्ण पक्ष
*चंद्र बल – वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर, कुम्भ,
सोमवार को चन्द्रमा की होरा :-
प्रात: 5.47 AM से 6.54 AM तक
दोपहर 01.33 PM से 2.39 PM तक
रात्रि 8.52 PM से 9.46 PM तक
सोमवार को चन्द्रमा की होरा में अधिक से अधिक चन्द्र देव के मन्त्र का जाप करें। यात्रा, प्रेम, प्रसन्नता, कला सम्बन्धी कार्यो के लिए चन्द्रमा की होरा अति उत्तम मानी जाती है।
आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,भारत की लगभग 150 करोड़ की आबादी में 0.001 % अर्थात लगभग 15 हज़ार आदमी ही नित्य पंचांग पढ़ पाते है।
आप पर ईश्वर की असीम कृपा है जो आपको नित्य पंचांग पढ़ने का, अपने भाग्य को प्रबल करने का, पापो के प्रायश्चित करने का अवसर मिल रहा है,
दुनिया के सारे उपाय एक तरफ है, और नित्य पंचाग पढ़ने का पुण्य उससे भी कहीं अधिक है, नित्य पंचांग पढ़ने से देवताओं का आशीर्वाद मिलता है, कार्य सिद्ध होने लगते है,
इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है ।

सोमवार के दिन चन्द्रमा की होरा में चंद्रदेव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में चंद्र देव मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।
चन्द्रमा के मन्त्र
ॐ सों सोमाय नम:।
ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम: ।

- तिथि (Tithi) – द्वादशी 08.00 AM तक तत्पश्चात त्रियोदशी,
- तिथि का स्वामी – द्वादशी तिथि के स्वामी भगवन श्री हरी विष्णु जी और त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी है ।
- हिंदू पंचाग की बाहरवीं तिथि द्वादशी (Dwadashi) कहलाती है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि, श्री विष्णु जी है ।
- इस तिथि का नाम यशोबला भी है, क्योंकि इस दिन भगवान श्री विष्णु जी / भगवान श्रीकृष्ण जी का आंवले, इलाइची, पीले फूलो से पूजन करने से यश, बल और साहस की प्राप्ति होती है।
- द्वादशी को श्री विष्णु जी की पूजा , अर्चना करने से मनुष्य को समस्त भौतिक सुखो और ऐश्वर्यों की प्राप्ति होती है, उसे समाज में सर्वत्र आदर मिलता है, उसकी समस्त मनोकामनाएं निश्चय ही पूर्ण होती है।
- द्वादशी तिथि के दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना अत्यन्त श्रेयकर होता है। द्वादशी के दिन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करें ।
- भगवान विष्णु के भक्त बुध ग्रह का जन्म भी द्वादशी तिथि के दिन माना जाता है। इस दिन विष्णु भगवान के पूजन से बुध ग्रह भी मजबूत होता है ।
- यदि द्वादशी तिथि सोमवार और शुक्रवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। द्वादशी यदि रविवार के दिन पड़ती है तो क्रकच योग बनाती है, यह अशुभ माना जाता है, इसमें भी शुभ कार्य करना मना किया गया हैं।
- लेकिन द्वादशी तिथि जब बुधवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है, ऐसे समय में किये गए कार्य कार्य सिद्ध होते है।
- द्वादशी तिथि में विष्टि करण होने के कारण इस तिथि को भद्रा तिथि भी कहते है।
- द्वादशी तिथि के दिन विवाह, तथा अन्य शुभ कार्य किये जाते है लेकिन इस तिथि में नए घर का निर्माण, ग्रह प्रवेश करना मना किया जाता है ।
- द्वादशी के दिन तुलसी तोड़ना निषिद्ध है। द्वादशी के दिन यात्रा नहीं करनी चाहिए, इस दिन यात्रा करने से धन हानि एवं असफलता की सम्भावना रहती है। द्वादशी के दिन मसूर का सेवन वर्जित है।
- द्वादशी की दिशा नैऋत्य मानी गई है इस दिन इस दिशा की ओर किए गए कार्य शुभ फल देने वाले माने जाते हैं।
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आज सावन माह का दूसरा सोमवार है । सावन माह गुरुवार 30 जुलाई से प्रारम्भ हो चूका है, भगवान भोलनाथ को सावन का सोमवार अत्यंत प्रिय है । मान्यता है की सावन माह में शिवलिंग पर मात्र जल चढ़ाने से भगवान शंकर जी अत्यंत प्रसन्न हो जाते है ।
ऐसी मान्यता है कि सावन के सोमवार का ब्रत रखने, इस दिन शिवलिंग का विधि पूर्वक अभिषेक करने से जीवन से सभी संकटो का नाश होता है, इस वर्ष सावन में 4 सोमवार पड़ रहे है ।
समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने समस्त सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था, और वह नीलकंठ महादेव कहलाएं । देवताओं ने उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए जल अर्पित किया। तभी से सावन में जलाभिषेक की परंपरा प्रचलित हुई।
सावन में भगवान शंकर और माँ पारवती की पूजा करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है, परिवार में प्रेम और सौहर्द का वातावरण बनता है ।
मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या सफल होने पर शिव-पार्वती का दिव्य मिलन हुआ। इसलिए अविवाहित कन्याएँ तथा युवक भी उत्तम जीवनसाथी की कामना से सावन के सोमवार का व्रत रखते हैं।
सावन के सोमवार का ब्रत रहने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन मधुर बनता है, स्वास्थ्य एवं मानसिक शांति मिलती है, संतान सुख एवं परिवार में मंगल बना रहता है, शिव कृपा से जीवन की समस्त बाधाएँ दूर होती हैं।
सावन के सोमवार के दिन शिवलिंग का पंचामृत, दूध, दही, घी, शहद, गन्ने का रस से अभिषेक करके, बेल पत्र, शमी पत्र, भांग, धतूरा, आक का पुष्प, काले तिल, अक्षत चढ़ाकर पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है ।
सावन के सोमवार के दिन ॐ नम: शिवाये,
श्री शिवाये नमस्तुभ्यं अथवा
महामृत्युंजय मन्त्र :-
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
का अधिक से अधिक जाप अवश्य ही करें ।
भगवान शिव की पूजा में रुद्राभिषेक का अत्यंत महत्व है। वैसे अन्य सभी माह में रुद्राभिषेक के लिए मुहूर्त देखना पड़ता है लेकिन सावन मास में प्रत्येक दिन ‘रुद्राभिषेक’ किया जाना बहुत शुभ माना जाता है।
‘शिवपुराण’ में लिखा भी है कि भगवान भोलेनाथ स्वयं ही जल हैं, इसलिए इसमें कोई भी संशय नहीं है की जल द्वारा शिवजी का अभिषेक उनकी कृपा प्राप्त करने के सर्वोत्तम मार्ग है।
कहते है कि भगवान शिव सावन के महीने में पृथ्वी पर अवतरित होकर अपनी ससुराल गए थे और वहां पर उनका स्वागत भव्य रूप से अभिषेक द्वारा किया गया था, इसलिए भी यह माह शिवजी को विशेष रूप से प्रिय है।
तभी से माना जाता है कि भगवान शिव प्रत्येक वर्ष सावन माह में अपनी ससुराल आते हैं और सभी मनुष्यो के लिए भगवान शिव की कृपा पाने का यह स्वर्णिम अवसर होता है।
सावन सोमवार के दिन क्या करें ?
प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग का गंगाजल, जल, दूध, दही, शहद, घी एवं शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करें।
बेलपत्र (तीन पत्तियों वाला), शमी पत्र, धतूरा, आक के फूल, भांग, सफ़ेद पुष्प, सफेद चंदन एवं फल अर्पित करें।
ॐ नमः शिवाय मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें।
इस दिन शिव चालीसा, शिव तांडव स्तोत्र, महामृत्युंजय मंत्र तथा रुद्राभिषेक का पाठ करें।
गरीबों एवं जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र एवं दक्षिणा का दान करें।
सावन के सोमवार के दिन यथाशक्ति व्रत रखें और इस दिन सात्विक भोजन करें।
इस दिन शिवलिंग पर हल्दी, केतकी का फूल तथा तुलसी दल अर्पित न करें।
“सावन का प्रत्येक सोमवार आपके जीवन में भगवान भोलेनाथ की असीम कृपा, उत्तम स्वास्थ्य, सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति लेकर आए।
हर हर महादेव! ॐ नमः शिवाय!”

आज सावन माह के सोमवार के दिन प्रदोष ब्रत का अति पुण्यदायक संयोग है, सोमवार को होने के कारण इसे सोम प्रदोष ब्रत कहा जायेगा । सावन माह में आने के कारण इस प्रदोष ब्रत का और भी अधिक महत्व हो गया है ।
प्रदोष तिथि को भगवान भोलेनाथ जी का ब्रत रखा जाता है। मान्यता है कि जो जातक प्रदोष का व्रत रख कर संध्या के समय शंकर जी की आराधना करते हैं उन्हें योग्य जीवन साथी मिलता है, दाम्पत्य जीवन में प्रेम और सहयोग बना रहता है ।
मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती का पूजन करने से जीवन में सुख – सौभाग्य की वर्षा होती है, साथ ही जातक के सभी संकट दूर हो जाते हैं । ।
प्रदोष व्रत में सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक पूजा करने का विशेष महत्त्व है । इस दिन सम्पूर्ण शिव परिवार का पूजन करने से भगवान शिव अपने भक्त पर बहुत प्रसन्न होते है ।
प्रदोष व्रत को महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखती हैं।प्रदोष ब्रत रखने वाले जातक के पूरे परिवार पर भगवान भोलनाथ और माँ पार्वती की सदैव असीम कृपा बनी रहती है ।
प्रदोष ब्रत के दिन शिव पंचाक्षर मन्त्र ॐ नम: शिवाय तथा
महामृत्युंजय मन्त्र :- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
का जाप करने से सहस्त्र गुना पुण्य की प्राप्ति होती है ।
प्रदोष को प्रदोष कहने के शास्त्रों में एक मिलती है। माना जाता है कि एक बार चंद्र देव को क्षय रोग हो गया, जिसके कारण उन्हें बहुत कष्ट हो रहा था।
अपने रोग के निवारण के लिए चंद्र देव जी भगवान शिव के पास गए, प्रभु ने चंद्र देव के क्षय रोग का निवारण त्रयो करके उन्हें त्रियोदशी के दिन ही पुन:जीवन प्रदान किया था तभी से इस दिन को प्रदोष कहा जाने लगा है ।
प्रदोष व्रत में फलाहार किया जाता है इस व्रत में अन्न, चावल, लाल मिर्च, सादा नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

नक्षत्र (Nakshatra) – आद्रा 12.26 PM तक तत्पश्चात पुनर्वसु
नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी- आर्द्रा नक्षत्र के देवता रुद्र (शिव) और नक्षत्र के स्वामी राहु जी है ।
आर्द्रा नक्षत्र आकाश मंडल में छठवां नक्षत्र है। यह मिथुन राशि में आता है और राहु का नक्षत्र है। आर्द्रा नक्षत्र कई तारों का समूह न होकर केवल एक तारा है। इसका आकार हीरे अथवा वज्र अथवा आँसू की तरह है।
आद्रा नक्षत्र का आराध्य वृक्ष कृष्णागरू,काला तेंदू और नक्षत्र स्वभाव तीक्ष्ण माना गया है ।
आर्द्रा नक्षत्र आकाश मंडल में छठवां नक्षत्र है। यह मिथुन राशि में आता है और राहु का नक्षत्र है। आर्द्रा नक्षत्र कई तारों का समूह न होकर केवल एक तारा है। इसका आकार हीरे अथवा वज्र अथवा आँसू की तरह है।
आर्द्रा नक्षत्र का आराध्य वृक्ष कृष्णागरू,काला तेंदू और नक्षत्र स्वभाव तीक्ष्ण माना गया है ।
आर्द्रा नक्षत्र में जन्मे जातको पर राहु का प्रभाव रहता है अत: इन्हे राहु का उपाय अवश्य करना चाहिए । इन्हे अनैतिक कार्यो से सदैव दूर रहना चाहिए अन्यथा इन्हे अपमान अपयश का सामना करना पड़ सकता है ।
आर्द्रा नक्षत्र के पुरुष हंसमुख, जिम्मेदार, आकर्षक व्यक्तित्व वाले, नए नए खोजो वाले लेकिन चालाक और अपना काम निकलने वाले होते है। लेकिन यदि बुध और राहु खराब हो तो जातक घमंडी, बुरे विचारों वाले, पराई स्त्री में आसक्त रहने वाले, दुखी स्वाभाव वाले भी होते हैं।
आर्द्रा नक्षत्र में पैदा हुई महिला बुद्विमान, व्यवहार कुशल और शांतिप्रिय होती हैं। यह खूब खर्चा करने वाली, लेकिन हमेशा मीन मेख निकालने वाली भी होती है।
समान्यता इनके माता-पिता में बहुत ही अनबन रहती है, अर्थात इन्हे घर में कलह देखना पड़ता है।
आर्द्रा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 2, 4, 7 और 9, भाग्यशाली रंग, लाल और बैंगनी, भाग्यशाली दिन मंगलवार तथा गुरुवार का माना जाता है ।
आद्रा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातको को तथा सभी मनुष्यों को जिस दिन आर्द्रा नक्षत्र हो उस दिन ॐ रुद्राय नम: मन्त्र की एक माला का जप करना चाहिए, इससे आर्द्रा नक्षत्र के शुभ फल मिलते है ।
आर्द्रा नक्षत्र के जातक के लिए भगवान शिव की आराधना करना शुभदायक होता है। भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप करना चाहिए. सोमवार का व्रत एवं जाप इत्यादि करना उत्तम फल प्रदान करने वाला होता है।
- योग – वज्र 22.27 PM तक तत्पश्चात सिद्धि
- योग केस्वामी:- वज्र योग के स्वामी वरुण जी और स्वभाव हानिकारक माना जाता है ।
- प्रथम करण : – तैतिल 08.00 AM तक
- करण के स्वामी, स्वभाव :- तैतिल करण के स्वामी विश्वकर्मा जी और स्वभाव सौम्य है ।
अवश्य पढ़ें :- कुंडली में केतु अशुभ हो तो आत्मबल की होती है कमी, भय लगना, बुरे सपने आना, डिप्रेशन का होता है शिकार, केतु के शुभ फलो के लिए करे ये उपाय - द्वितीय करण : – गर 18.27 PM तक तत्पश्चात वणिज
- करण के स्वामी, स्वभाव :- गर करण के स्वामी भूमि तथा स्वभाव सौम्य है ।
- ब्रह्म मुहूर्त : 4.22 AM से 5.05 AM तक
- विजय मुहूर्त : 14.39 PM से 15.32 PM तक
- गोधूलि मुहूर्त : 19.05 PM से 19.27 PM तक
- अमृत काल :- 17.07 PM से 18.42 PM तक
- शिव वास :- नंदी पर 08.00 AM तक तत्पश्चात भोजन पर
शिव वास :- जब भगवान भोलेनाथ नन्दी जी पर विराजमान होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना सदैव बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों केअनुसार भगवान शंकर जी के नन्दी पर विराजमान के समय रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सफलता, शुभ समाचारो की प्राप्ति होती है।
शिव वास : शिव वास : भोजन में जब भगवान भोलेनाथ जी भोजन कर रहे हों या ध्यान में मग्न हों तो उस समय रुद्र अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। भगवान शंकर जी के रात्रि भोजन अथवा ध्यान करते समय रुद्रभिषेक करने से परेशानी का सामना करना पड़ता है। - अग्निवास : पाताल पर 08.00 AM तक तत्पश्चात पृथ्वी पर
जब पाताल में अग्नि वास है तो वह हवन से सम्बन्धित अनुष्ठानों के लिये शुभ नहीं मानी जाती है, यह अशुभ मानी गई है । अग्नि के पाताल वास के दौरान किये जाने वाले हवन सम्बन्धित अनुष्ठानों व्यक्ति को आर्थिक नुकसान करना पड़ता है उसका धन नष्ट हो सकता है।
अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।
- दिशाशूल (Dishashool)- सोमवार को पूर्व दिशा का दिशा शूल होता है ।
- यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दर्पण देखकर, दूध पीकर जाएँ ।
- गुलिक काल : – दोपहर 1:30 से 3 बजे तक ।
- राहुकाल (Rahukaal)– सुबह -7:30 से 9:00 तक।
अपनी आकृषण शक्ति, चुम्बकीय शक्ति बढ़ाना चाहते है तो अवश्य ही करें ये उपाय - * सूर्योदय – प्रातः 05:47
- * सूर्यास्त – सायं 19:05
- विशेष – द्वादशी के दिन तुलसी तोड़ना, मसूर का सेवन करना वर्जित है।
- द्वादशी के दिन यात्रा नहीं करनी चाहिए, इस दिन यात्रा करने से धन हानि एवं असफलता की सम्भावना रहती है।
- त्रियोदशी को बैगन नहीं खाना चाहिए , त्रियोदशी को बैगन खाने से पुत्र को कष्ट मिलता है ।
- पर्व त्यौहार- सावन का दूसरा सोमवार, सोम प्रदोष ब्रत
- मुहूर्त (Muhurt) –
“हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।
अपने धर्म, अपनी संस्कृति अपने नैतिक मूल्यों के प्रचार, प्रसार के लिए तन – मन – धन से अपना बहुमूल्य सहयोग करें । आप हमें अपनी इच्छा – सामर्थ्य के अनुसार सहयोग राशि 94252 03501 पर Google Pay कर सकते है ।
आप पर ईश्वर की असीम अनुकम्पा की वर्षा होती रहे ।
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