Shukrwar ka panchag, शुक्रवार का पंचांग, 28 अगस्त 2026 का पंचांग,
आप सभी को रक्षा बंधन के महा पर्व की हार्दिक शुभकामनायें
गुरुवार का पंचांग शनिवार का पंचांग
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शुक्रवार का पंचांग, shukrwar ka panchang,
- Panchang, पंचाग, Panchang 2026 हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang, पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-
1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)
पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है, नित्य पंचांग पढ़ने से कुंडली के ग्रहो के शुभ फल मिलने लगते है, इसीलिए भगवान श्रीराम भी नित्य पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए, Shukravar Ka Panchang, शुक्रवार का पंचांग, आज का पंचांग, aaj ka panchang,
28 अगस्त 2026 का पंचांग, 28 August 2026 ka Panchang,

- महालक्ष्मी मन्त्र : ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥
- ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
मित्रो हम पिछले 25 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है, अगर आप भी पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।
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आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
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आज का पंचांग, aaj ka panchang,
दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय
“श्री सूक्त”,“महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नामो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में जीवन में समस्त सुख 🎁 , ऐश्वर्य 🎉 की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन 💝 सुखमय होता है बड़ा भवन 🏬, विदेश यात्रा ✈️ के योग बनते है।
* विक्रम संवत् – 2083 वर्ष
* शक संवत – 1948 वर्ष
* कलि संवत – 5128 वर्ष
* कलयुग – 5128 वर्ष
* अयन – दक्षिणायन,
* ऋतु – वर्षा ऋतु,
* मास – सावन माह
* पक्ष – शुक्ल पक्ष
* चंद्र बल – वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुम्भ,,
कोई भद्रा, चंद्र ग्रहण, पंचक से ना डरें, रक्षाबंधन के दिन सिर्फ इस समय को छोड़कर अपने भाइयों को बांधे राखी, यह है सबसे शुभ मुहूर्त
आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,
इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं ।
पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है, देवता प्रसन्न होते है ।
शुक्रवार को शुक्र देव की होरा :-
प्रात: 05.57 AM से 7.01 AM तक
दोपहर 01.26 PM से 2.31 PM तक
रात्रि 20.39 PM से 21.35 PM तक

दाहिने हाथ के अंगूठे से नीचे के हिस्से ( शुक्र का स्थान ) और अंगूठे पर थोड़ा सा इत्र लगाकर, ( इत्र ना मिले तो उसके बिना भी कर सकते है) बाएं हाथ के अंगूठे से उस हिस्से को शुक्र की होरा में “ॐ शुक्राये नम:” या
‘ॐ द्रांम द्रींम द्रौंम स: शुक्राय नम:।’ मंत्र का अधिक से अधिक जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य )I
यह उपाय आप कोई भी काम करते हुए चुपचाप कर सकते है इसके लिए किसी भी विधि विधान की कोई आवश्यकता नहीं है I
सुख समृद्धि 💰, ऐश्वर्य 💎, बड़ा भवन 🏬, विदेश यात्रा ✈️, प्रेम, रोमांस 💞, सुखी दाम्पत्य जीवन 👩❤️👨 के लिए शुक्रवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।
शुक्रवार के दिन शुक्र की होरा में शुक्रदेव देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में शुक ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो 🎉 की प्राप्ति होती है ।
शुक्र देव के मन्त्र :-
ॐ शुं शुक्राय नमः।। अथवा
” ॐ द्राम द्रीम द्रौम सः शुक्राय नमः “।।
राशिनुसार इस तरह से बंधवाएं राखी, कुंडली के ग्रहो के मिलेंगे शुभ फल
🕉️ शुक्रवार को अवश्य लें 10 महाविद्याओं के नाम 🕉️
- तिथि, (Tithi): पूर्णिमा 09.48 AM तक तत्पश्चात प्रतिपदा, तिथि, (Tithi) :-,
- तिथि के स्वामी – पूर्णिमा तिथि के स्वामी चंद्र देव जी और प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव जी है I
श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन / राखी का पर्व ना केवल भारत में वरन विश्व के बहुत से हिस्सों में जहाँ भारतीय रहते है हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाया जाता है।
धार्मिक ग्रंथो में बहुत जगह उल्लेख आया है कि देवता भी इस पर्व को हर्ष उल्लास के साथ मनाते है। मान्यता है कि सावन माह की पूर्णिमा के दिन शुभ मुहूर्त में बाँधा गया रक्षासूत्र का प्रभाव बहुत शक्तिशाली होता है।
इस साल 2026 को सावन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि गुरुवार 27 अगस्त को सुबह 09 बजकर 09 मिनट पर प्रारंभ हो रही है जो शुक्रवार 28 अगस्त को दोपहर 9 बजकर 49 मिनट तक रहेगी। इसलिए रक्षाबंधन का पर्व शुक्रवार 28 अगस्त को ही मनाया जायेगा इसमें कोई भी संशय नहीं है ।
इस बार बहुत से ज्योतिष, सोशल मिडिया के बहुत से तथा कथित विद्वान रक्षा बंधन पर भद्रा, चंद्र ग्रहण और पंचक का साया बताकर लोगो को डरा रहे है, इन बातो को हैडिंग में डालकर अपने पेज, साइट का ट्रैफिक बढ़ा रहे है जबकि यह कहीं से भी सत्य नहीं है ।
गुरुवार 27 अगस्त को भद्रा पूर्णिमा तिथि के प्रारम्भ होने के साथ ही अर्थात प्रात: 09.09 AM से ही लग जाएगी जो उसी रात को 9.29 PM तक रहेगी अर्थात शुक्रवार को जिस दिन रक्षा बंधन मनाया जायेगा उस दिन भद्रा नहीं है ।
गुरुवार 27 अगस्त को ही पंचक दोपहर में 1.36 PM पर लग जाएगा, पंचक पूरे पांच दिन रहते है जिसका समापन मंगलवार 1 सितंबर को प्रात: 3.24 PM पर होगा । शास्त्रों में पंचक में कोई भी शुभ कार्य करने को मना किया जाता है लेकिन पंचक के दौरान पूजा पाठ और धार्मिक कार्य किये जाते है उनपर किसी भी प्रकार का प्रतिबन्ध नहीं रखा गया है, इसलिए रक्षाबंधन पर्व पर पंचक का किसी भी तरह का कोई भी प्रभाव नहीं होगा ।
शुक्रवार 28 अगस्त को इस साल का अंतिम चंद्रग्रहण भी लगने जा रहा है जो सुबह 06.53 से दोपहर 12.32 PM तक रहेगा । लेकिन, चूँकि यह चंद्रग्रहण भारत में दिखाई ही नहीं देगा तो इसका सूतक भी नहीं लगेगा अर्थात इस ग्रहण का भारत के पर्व पर किसी भी प्रकार से कोई प्रभाव नहीं है । इसलिए आप इस दिन बिलकुल निश्चिंत होकर अपने भाइयों को राखी बांध सकती है, भाई राखी बंधवा सकते है ।
इस वर्ष 28 अगस्त को राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त पूर्णिमा तिथि के रहते ही प्रातः 5.37 AM से प्रारंभ होगा और यह सुबह 9.48 मिनट तक रहेगा, लेकिन फिर 10.24 AM तक भी राखी बाँधी जा सकती है उसके बाद राहु काल लग जायेगा।
फिर दोपहर 12.05 PM 1.25 PM तक शुभ मुहूर्त है उसके बाद सायं 4.30 PM से सांय 6.00 बजे तक भी शुभ महूर्त है लेकिन बहनें अपने भाइयों को दोपहर 12.05 से सांयकाल सूर्यास्त से पहले कभी भी राखी बांध सकती है ।
इस दिन शुक्रवार को राहु काल सुबह 10.30 AM से 12.00 PM तक है इस समय बहनो को अपने भाइयों को राखी नहीं बांधनी चाहिए ।
यह पर्व भाई – बहन के पवित्र स्नेह और विश्वास का प्रतीक है । इस दिन बहने अपने शुभ मुहूर्त में भाइयों के आरोग्य, सौभाग्य और दीर्घ आयु के लिए उनके दाहिने हाथ की कलाई में राखी / रक्षा सूत्र बांधती है और भाई अपनी बहनो को उपहार देकर उनकी रक्षा का वचन देते है ।
शास्त्रों के अनुसार सावन माह की पूर्णिमा के दिन जो जातक अपनी बहन / मुंहबोली बहन / पुरोहित से राखी बंधवाता है उसकी सभी संकटो से अवश्य ही रक्षा होती है ।
इस दिन भाइयों को अपनी बहनो के यहाँ उनके हाथ का बना भोजन अवश्य ही करना चाहिए, यदि भाई विवाहित हो तो उसे अपनी पत्नी के साथ अपनी बहन के यहाँ जाना चाहिए ।
बहुत से स्थानो पर भोजन के पश्चात बहने भाइयों के सौभाग्य के लिए अपने हाथ से पान भी खिलाती है।
इस दिन चाहे बहन छोटी हो या बड़ी उसे अपने भाई के सर और पीठ पर हाथ फेर कर उसे आशीर्वाद अवश्य ही देना चाहिए ।
हर घर में बहनो को भाइयों को राखी बांधने से पहले सर्वप्रथम एक राखी को भगवान कृष्ण / विष्णु के चित्र पर अर्पित करनी चाहिए।
फिर बहनें शुभ मुहूर्त में अपने भाइयों को पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठाते हुए उनके माथे पर कुमकुम, रोली एवं अक्षत से तिलक करके भाई की दाहिनी कलाई पर रेशम से बनी राखी बांधती हैं और,
अपने हाथ से मिठाई खिलाकर भाई का मुंह मीठा कराती हैं साथ ही अपने भाई की निरोगिता, दीर्घ आयु, सुख समृद्धि एवं उन्नति की कामना करती है।
इस दिन हर मनुष्य को हनुमान जी को राखी अवश्य बांधनी चाहिए, इससे जीवन हर संकटों, बुरे समय से रक्षा होती है।
विभिन्न युगो, कालखंडो में भी इस पर्व के मनाये जाने के बारे में पता चलता है ।
शास्त्रों के अनुसार सबसे पहले माता लक्ष्मी ने इस पर्व को मनाया था । उन्होंने राजा बलि को अपना भाई बनाकर उनके हाथ में रक्षा सूत्र बांधकर पाताल लोक से श्री विष्णु जी को वापस ले आयी थी ।
महाभारत में ही रक्षाबन्धन से सम्बन्धित कृष्ण और द्रौपदी की एक कथा के अनुसार जब भगवान श्री कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया तब उनकी तर्जनी में चोट आ गई और खून बहने लगा ।
यह देखकर द्रौपदी ने उसी समय बिना समय गँवाये अपनी साड़ी को फाड़कर श्रीकृष्ण जी की उँगली पर पट्टी बाँध दी। वह श्रावण मास की पूर्णिमा का ही दिन था। द्रोपदी के इसी स्नेह को देखकर वासुदेव ने द्रोपदी को उसकी रक्षा का वचन दिया।
रक्षा बंधन के दिन राखी बांधते समय बहने बोले यह मन्त्र, भाइयों की सदैव होगी हर संकटो से होगी रक्षा
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नक्षत्र ( Nakshatra ) : शतभिषा नक्षत्र 03.13 AM शनिवार 29 अगस्त तक
नक्षत्र के स्वामी :– शतभिषा नक्षत्र के देवता वरुण देव जी और शतभिषा के स्वामी राहु जी है ।
शतभिषा नक्षत्र का स्थान आकाश मंडल के नक्षत्रो में 24 वां है।। ‘शतभिषा’ का अर्थ है ‘सौ चिकित्सक’ अथवा ‘सौ चिकित्सा’। यह एक चक्र, एक बैल गाड़ी जो चिकित्सा का प्रतीक है जैसा प्रतीत होता है। ऐसे जातक पर राहु और शनि का प्रभाव रहता है।
शताभिषा नक्षत्र सितारे का लिंग तटस्थ है। शताभिषा नक्षत्र का आराध्य वृक्ष: कदंब, तथा स्वाभाव चर होता है ।
यदि कुंडली में राहु और शनि का प्रभाव अच्छा है तो जातक दार्शनिक, वैज्ञानिक, अच्छे आचरण वाला, आत्मविश्वास से भरा हुआ, महत्वाकांक्षी, साहसी, सदाचारी, दाता, धार्मिक लेकिन कठोर स्वाभाव वाला होता है।
लेकिन राहु के खराब होने पर जातक तंत्र मन्त्र पर बहुत विश्वास रखने वाला, वहमी, शक्की, पराई स्त्री पर आसक्त रहने वाला, कलह प्रिय, घर से दूर रहने की चाह रखने वाला, घर वालो को दुःख देने वाला होता है ।
अत: शतभिषा नक्षत्र के जातको को राहु को अपने अनुकूल करने का उपाय अवश्य जी करना चाहिए ।
शतभिषा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 4 और 8, भाग्यशाली रंग हरा और नीला, भाग्यशाली दिन शुक्रवार, शनिवार और सोमवार होता है ।
शतभिषा नक्षत्र में जन्मे जातको को नित्य तथा अन्य सभी को आज नक्षत्र देवता नाममंत्र:- “ॐ वरुणाय नमः “ या नक्षत्र नाम मंत्र :- “ॐ शतभिषजे नमः” मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करना चाहिए।
शतभिषा नक्षत्र के जातको को भगवान शंकर जी की उपासना करने से आशातीत सफलता मिलती है ।
जीवन में कैसी भी हो समस्या रक्षाबंधन के दिन अवश्य करें ये अचूक उपाय
योग(Yog) :- अतिगण्ड 07.28 AM तक तत्पश्चात सुकर्मा
योग के स्वामी, स्वभाव :- अतिगण्ड योग के स्वामी चंद्र देव जी लेकिन स्वभाव हानिकारक है ।
प्रथम करण : – बव 09.48 AM तक
करण के स्वामी, स्वभाव :- बव करण के स्वामी इंद्र देव और स्वभाव सौम्य है ।
द्वितीय करण :- बालव 21.56 तक तत्पश्चात कौलव
करण के स्वामी, स्वभाव :- बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।
- दिशाशूल (Dishashool)- शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है ।
- ब्रह्म मुहूर्त : 4.28 AM से 5.12 AM तक
- विजय मुहूर्त : 14.31 PM से 15.22 PM तक
- गोधूलि मुहूर्त : 18.47 PM से 19.10 PM तक
- अमृत काल : 19.44 PM से 21.23 PM तक
- अग्नि वास : पाताल 09.48 AM तक तत्पश्चात पृथ्वी
जब पाताल में अग्नि वास है तो वह हवन से सम्बन्धित अनुष्ठानों के लिये शुभ नहीं मानी जाती है, यह अशुभ मानी गई है । अग्नि के पाताल वास के दौरान किये जाने वाले हवन सम्बन्धित अनुष्ठानों व्यक्ति को आर्थिक नुकसान करना पड़ता है उसका धन नष्ट हो सकता है।
अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है । - शिव वास : शमशान में 09.48 AM तक तत्पश्चात माँ गौरी के साथी
शिव वास श्मशान में – जब भगवान शिव का श्मशान में वास होता हैं, तो रुद्र अभिषेक आदि करना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ जी का श्मशान में वास के दौरान अभिषेक करने से मृत्यु समान परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
जब भगवान शंकर गौरी मइय्या के साथ होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शंकर जी के देवी गौरी के साथ रहने के समय किये गए रूद्रअभिषेक से घर कारोबार में सुख-समृद्धि आती है, स्थाई लक्ष्मी का वास होता है ।
दिशा शूल : शास्त्रों के अनुसार शुक्रवार को पश्चिम दिशा में दिशा शूल होता है, यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ । - गुलिक काल : – शुक्रवार का गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
- राहुकाल (Rahukaal)– दिन – 10:30 AM से 12:00 PM तक ।
- सूर्योदय – प्रातः 05:57
- सूर्यास्त – सायं : 18:47
- विशेष – पूर्णिमा और व्रत के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना, सहवास करना, क्रोध करना, हिंसा करना मना है । ऐसा करने से दुर्भाग्य आता है, दुःख, कलह और दरिद्रता के योग बनते है ।
- प्रतिपदा के दिन कद्दू / पेठे का सेवन नहीं करना चाहिए, प्रतिपदा के दिन इनका सेवन करने से धन की हानि होती है ।
- पर्व त्यौहार– रक्षाबंधन
- मुहूर्त (Muhurt) –
जानिए द्वारिका नगरी आखिर कैसे समुद्र में समा गयी, कैसे भगवान श्री कृष्ण और उनके भाई बलराम जी ने अपना शरीर छोड़ा
जरुर पढ़ें :- पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रो का राजा कहते है जानिए क्यों महत्वपूर्ण है पुष्य नक्षत्र,
“हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।
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