गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 30 July 2026 Ka Panchang,

मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9425203501 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद

बृहस्पतिवार का पंचांग, Brahaspativar ka panchang,

  • Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।

* शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
* वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
* नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
* योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
* करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।

इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए । नित्य पंचाग पढ़ने से भाग्य चमकने लगता है ।

जानिए आज गुरुवार का पंचांग, Guruwar Ka Panchag,


आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है, आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,

इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है ।

मंगल श्री विष्णु मंत्र :-

मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥

आज का पंचांग, aaj ka panchang, गुरुवार का पंचाग, Guruvar Ka Panchag,

गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag,

30 जुलाई 2026 का पंचांग, 30 July 2026 Ka Panchang,

आप सभी शिवभक्तों को सावन माह के प्रारंभ की, सावन माह के प्रथम दिवस की शुभकामनायें


  • गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 30 जुलाई 2026 का पंचांग,
  • दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
  • गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए ।

    गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
  • गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
    इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
  • गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।
    इस उपाय को करने से कार्यो में अड़चने दूर होती है, भाग्य चमकने लगता है, बृहस्पति देव की कृपा मिलती है।

यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।
और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।

गुरुवार को विष्णु जी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, गुरुवार को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ परम फलदाई है

जीवन में कोई भी मनोकामना हो हनुमान जी के जन्मोत्सव के दिन अवश्य ही करें ये उपाय, 

  • *विक्रम संवत् – 2083,
  • * शक संवत – 1948,
    *कलि संवत- 5128,
    * अयन – दक्षियायणं,
    * ऋतु – वर्षा ऋतु,
    * मास – श्रावण माह
    * पक्ष – कृष्ण पक्ष
    *चंद्र बल – मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, मकर, मीन,

गुरुवार को बृहस्पति देव की होरा :-

प्रात: 5.42 AM से 6.49 AM तक

दोपहर 01.35 PM से 2.43 PM तक

रात्रि 20.58 PM से 21.51 PM तक

आज गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा के समय दाहिने हाथ की तर्जनी ऊंगली ( अंगूठे के बगल वाली उंगली ) के नीचे गुरु पर्वत और उस पूरी ऊंगली पर बृहस्पति देव के मंत्र का जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य ) I

गुरुवार को बृहस्पति की होरा में अधिक से अधिक बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करें । शिक्षा, मान – सम्मान, व्यापार, कारोबार, नए कार्यो के प्रारम्भ के लिए गुरुवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा में बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

बृहस्पति देव के मन्त्र

ॐ बृं बृहस्पतये नमः।। अथवा

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः।।


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  • तिथि (Tithi) :- प्रतिपदा 21.30 PM तक तत्पश्चात द्वितीया,
  • तिथि का स्वामी – प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव जी है और द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्मा जी है I
  • आज प्रतिपदा तिथि  है । प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव हैं। प्रतिपदा को आनंद देने वाली कहा गया है।
  • रविवार एवं मंगलवार के दिन प्रतिपदा होने पर मृत्युदा होती है, लेकिन शुक्रवार को प्रतिपदा सिद्धिदा हो जाती है।
  • अग्नि देव इस पृथ्वी पर साक्षात् देवता हैं, देवताओं में सर्वप्रथम अग्निदेव की उत्पत्ति हुई थी । ऋग्वेद का प्रथम मंत्र एवं प्रथम शब्द अग्निदेव की आराधना से ही प्रारम्भ होता है।
  • हिन्दू धर्म ग्रंथो में  देवताओं में प्रथम स्थान अग्नि देव का ही दिया  गया  है। अग्नि देव सोने के भगवान के रूप में वर्णित है।
  • पुराणों में आठ दिशाओं के आठ रक्षक देवता हैं जिन्हें अष्ट-दिक‌्पाल कहते हैं। इनमें दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) दिशा के रक्षक अग्निदेव हैं। इसीलिए अग्निदेव की प्रतिमा मंदिर के दक्षिण-पूर्वी कोण में स्थापित होती है।
  • पौराणिक युग में अग्नि देव के ऊपर अग्नि पुराण नामक एक ग्रन्थ भी रचित हुआ। अग्निदेव सब देवताओं के मुख हैं और यज्ञ में इन्हीं के द्वारा देवताओं को समस्त यज्ञ-वस्तु प्राप्त होती है। 
  • अग्निदेव में प्रेम पूर्वक ‘‘स्वाहा‘‘ कहकर दी हुई आहुतियों को अग्नि देव अपनी सातो जिह्वाओं से ग्रहण करते है, इससे  तीनो देव ब्रह्मा – विष्णु – महेश तथा समस्त देव स्वत: ही तृप्त हो जाते है ।
  • प्रतिपदा तिथि को इष्टि भी कहते है, मान्यता है कि माह में दो बार आने वाली इस तिथि पर भगवान को प्रशाद चढ़ाने, भोग लगाने से पूरे 15 दिन का भोग लगाने का फल मिलता है अर्थात इस दिन दैनिक पूजा में अथवा मंदिर में भगवान, अपने इष्ट को भोग अवश्य ही लगाएं 
  • अग्नि देव की पत्नी का नाम स्वाहा हैं जो कि दक्ष प्रजापति तथा आकूति की पुत्री थीं। अग्निदेव की पत्नी स्वाहा के पावक, पवमान और शुचि नामक तीन पुत्र और पुत्र-पौत्रों की संख्या उनंचास है।
  • प्रतिपदा तिथि के दिन अग्नि देव के मन्त्र “ॐ अग्नये स्वाहा” का जाप अवश्य ही करें । शास्त्रों में अग्निदेव का बीजमन्त्र “रं” तथा मुख्य मन्त्र “रं वह्निचैतन्याय नम:” है।
  • शास्त्रों के अनुसार अग्नि देव की उपासना से धन, धान्य, यश, शक्ति, सुख – समृद्धि प्राप्त होती है, परिवारिक सुख मिलता है । 

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नक्षत्र (Nakshatra) – श्रवण 17.43 PM तक तत्पश्चात धनिष्ठा

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी –      श्रवण नक्षत्र के देवता विष्णु और सरस्वती जी तथा स्वामी चंद्र देव जी है ।

श्रवण नक्षत्र 22 वें नंबर का नक्षत्र  है। यह एक त्रिशूल के जैसा प्रतीत होता है। श्रवण नक्षत्र का आराध्य वृक्ष आक या  मंदार, और नक्षत्र का स्वभाव चर माना गया है । श्रावण नक्षत्र का लिंग पुरुष है।

श्रवण नक्षत्र के जातक पर शनि और चंद्र का प्रभाव जीवनभर बना रहता है।  श्रवण नक्षत्र के जातक बुद्धिमान और अपने कार्यो में निपुण होते हैं । 

श्रवण नक्षत्र में जन्म होने से जातक सुंदर, दानवान, आज्ञाकारी, सर्वगुण संपन्न, धनवान और अपने क्षेत्र में मान सम्मान प्राप्त करता है।

लेकिन यदि शनि और चंद्र की स्थिति ठीक नहीं है तो ऐसा जातक क्रोधी, कंजूस, भय-शंकित रहने वाला, लापरवाह, आलसी होता है। 

यदि शनि और चंद्र कुंडली में एक ही जगह है, तो जातक को जीवन में बहुत संघर्ष करना पड़ता है।

 इसलिए जातक को हनुमानजी की सदैव उपासना करना है। जातक को शराब, मांस आदि व्यसनों से दूर रहना चाहिए।

श्रवण नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 2 और 8, भाग्यशाली रंग, आसमानी, हल्का नीला, भाग्यशाली दिन गुरुवार, बुधवार और सोमवार माना जाता है ।

श्रवण नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ श्रवणाय नमः “। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।

पुष्य नक्षत्र के इस उपाय से हर कार्य में मिलेगी सफलता



🌿आज 30 जुलाई, गुरुवार से प्रारंभ हो रहा है पवित्र सावन माह 🌿

सावन (श्रावण) हिन्दू धर्म का सबसे पवित्र और पुण्यदायक महीना माना जाता है। यह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस पूरे माह में भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।

धर्मग्रंथों के अनुसार सावन में किया गया जप, तप, व्रत, दान, पूजा और सेवा सामान्य दिनों की अपेक्षा अनेक गुना अधिक फलदायी होती है। इस माह में प्रकृति भी अपनी पूर्ण हरियाली और सौंदर्य से भगवान शिव की आराधना करती हुई प्रतीत होती है।

सावन माह का आरंभ : गुरुवार 30 जुलाई, सावन माह की अंतिम तिथि: शुक्रवार 28 अगस्त,

पहला सोमवार: 3 अगस्त 2026, दूसरा सोमवार: 10 अगस्त 2026, तीसरा सोमवार: 17 अगस्त 2026, चौथा सोमवार: 24 अगस्त 2026

🔱 सावन माह क्यों अति पुण्यदायक माना जाता है?

  1. समुद्र मंथन : समुद्र मंथन के समय निकले कालकूट विष को भगवान शिव ने समस्त सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया। तभी से सावन माह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है।
  2. शिव-पार्वती का मिलन : पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने अनेक वर्षों तक कठोर तपस्या कर इसी माह में भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया।
  1. देवताओं का पूजन : देवताओं और ऋषियों ने सावन माह में भगवान शिव की विशेष आराधना कर अनेक सिद्धियाँ और वरदान प्राप्त किए।
  1. वर्षा ऋतु का आध्यात्मिक महत्व : यह महीना वर्षा ऋतु का होता है, जब प्रकृति शुद्ध, हरी-भरी और जीवनदायिनी बन जाती है। यह समय आत्मशुद्धि, संयम और साधना के लिए श्रेष्ठ माना गया है।

🌸 सावन माह में क्या करना चाहिए?

✅ प्रतिदिन प्रातः स्नान कर भगवान शिव का पूजन करें। ✅ शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल आदि अर्पित करें।

✅ “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का अधिक से अधिक जाप करें। ✅ महामृत्युंजय मंत्र का नियमित जप करें। ✅ प्रत्येक सोमवार का व्रत रखें। ✅ रुद्राभिषेक कराएँ या स्वयं करें। ✅ गरीबों, गौशाला, मंदिर एवं जरूरतमंदों को दान दें। ✅ ब्रह्मचर्य, संयम और सदाचार का पालन करें।✅ क्रोध पर नियंत्रण रखें तथा मधुर वाणी बोलें। ✅ धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करें। ✅ शिव पुराण, रुद्राष्टक, शिव चालीसा और शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करें।

सावन माह में क्या नहीं करना चाहिए ?

❌ मांस, मछली, अंडा एवं मदिरा का सेवन न करें। ❌ तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट तथा अन्य नशे से दूर रहें। ❌ झूठ, छल, कपट, चुगली और अपशब्दों से बचें।
❌ किसी का अपमान न करें। ❌ पेड़-पौधों को अनावश्यक नुकसान न पहुँचाएँ। ❌ क्रोध, अहंकार और लोभ से बचें। ❌ हिंसा और किसी भी प्रकार के गलत कार्यों से दूर रहें।

🥗 सावन माह में क्या खाना चाहिए?

✔ सात्विक भोजन ✔ ताजे फल ✔ दूध एवं दुग्ध उत्पाद ✔ दही, छाछ ✔ साबूदाना ✔ सिंघाड़ा ✔ कुट्टू का आटा ✔ सामक के चावल ✔ मखाना ✔ मूंगफली
✔ सूखे मेवे ✔ नींबू पानी ✔ नारियल पानी ✔ पर्याप्त शुद्ध जल

📖 हमारे धर्मग्रंथों में सावन माह के बारे में क्या कहा गया है ?

📚 शिव पुराण : श्रावण मास में भगवान शिव की श्रद्धापूर्वक पूजा करने वाला भक्त अनेक जन्मों के पापों से मुक्त होकर शिव कृपा प्राप्त करता है।

📚 स्कन्द पुराण : श्रावण मास का व्रत, दान, जप, तप और शिव आराधना करने वाला व्यक्ति समस्त कष्टों से मुक्त होकर सुख, समृद्धि और उत्तम लोक प्राप्त करता है।

📚 पद्म पुराण : इस माह में किए गए दान, व्रत और पूजा का पुण्य अक्षय माना गया है।

📚 ब्रह्मवैवर्त पुराण : श्रावण मास में भगवान शिव का अभिषेक, विशेषकर गंगाजल एवं बेलपत्र से, अत्यंत शुभ और मनोकामना पूर्ण करने वाला माना गया है।

📚 लिंग पुराण : श्रावण मास में “ॐ नमः शिवाय” का जप करने से मन, बुद्धि और आत्मा की शुद्धि होती है तथा भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

🌺 सावन माह के प्रमुख मंत्र

॥ ॐ नमः शिवाय ॥

॥ ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

🌿 सावन माह में मिलने वाले आध्यात्मिक लाभ

🌺 भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। 🌺 मनोकामनाएँ पूर्ण होने की मान्यता है। 🌺 परिवार में सुख-शांति एवं समृद्धि आती है। 🌺 मानसिक तनाव कम होता है। 🌺 आत्मबल एवं सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। 🌺 पापों का क्षय एवं पुण्य की वृद्धि होती है। 🌺 स्वास्थ्य, आयु एवं आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

🚩 हर-हर महादेव • ॐ नमः शिवाय 🚩

कैसा भी सिर दर्द हो उसे करें तुरंत छूमंतर, जानिए सिर दर्द के अचूक पा

योग :- आयुष्मान 12.05 AM शुक्रवार 31 जुलाई तक

योग के स्वामी, स्वभाव :-    आयुष्मान योग के स्वामी चंद्र देव एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है ।

प्रथम करण :- बालव 08.50 AM तक

करण के स्वामी, स्वभाव :-   बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।

द्वितीय करण :- कौलव 21.30 PM तक तत्पश्चात तैतिल

करण के स्वामी, स्वभाव :-    कौलव करण के स्वामी मित्र और स्वभाव सौम्य है ।

ब्रह्म मुहूर्त : 4.18 AM से 4.59 AM तक

विजय मुहूर्त : 14.43 PM से 15.37 PM तक

गोधूलि मुहूर्त : 19.14 PM से 19.34 PM तक

अमृत काल : 06.24 AM से 08.09 AM तक


अग्नि वास : पाताल में 21.30 PM तक तत्पश्चात पृथ्वी पर

 जब पाताल में अग्नि वास है तो वह हवन से सम्बन्धित अनुष्ठानों के लिये शुभ नहीं मानी जाती है, यह अशुभ मानी गई है । अग्नि के पाताल  वास के दौरान किये जाने वाले हवन  सम्बन्धित अनुष्ठानों व्यक्ति को आर्थिक नुकसान करना पड़ता है उसका  धन नष्ट हो सकता है।


अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।


शिव वास : माँ गौरी के साथ 21.30 AM तक तत्पश्चात सभा में

जब भगवान शंकर  गौरी मइय्या के साथ होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शंकर जी के देवी गौरी के साथ रहने के समय किये गए  रूद्रअभिषेक से घर कारोबार में सुख-समृद्धि आती है, स्थाई लक्ष्मी का वास होता है ।

  शिव वास जब सभा में होता है अर्थात जब भगवान शंकर अपनी सभा में होते हैं, तो उस सामान्य रुद्र अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शिव के सभा में होने पर रूद्र अभिषेक करने से दुःख का सामना करना पड़ सकता है।

  • दिशाशूल (Dishashool)– बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – गुलिक 09:30 AM से 11 AM बजे तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)– दिन – 1:30 PM से 3:00 PM तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 05:41
  • सूर्यास्त – सायं 19.14
  1. विशेष – प्रतिपदा के दिन कद्दू  /  पेठे का सेवन नहीं करना चाहिए, प्रतिपदा के दिन इनका सेवन करने से धन की हानि होती है । 
  • पर्व त्यौहार
  • मुहूर्त (Muhurt)

अवश्य पढ़ें :- अगर गिरते हो बाल तो ना होएं परेशान तुरंत करें ये उपाय, जानिए बालो का गिरना कैसे रोकें,

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )

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