शनिवार का पंचांग, Shaniwar Ka Panchang, 21 मार्च 2026 का पंचांग ,

शनिवार का पंचांग, Shaniwar Ka Panchang, 21 मार्च 2026 का पंचांग ,

आप सभी को नवरात्री के तीसरे दिन की हार्दिक शुभकामनायें , जय माँ चंद्रघंटा


Shaniwar Ka Panchang, शनिवार का पंचांग, 21 March 2026 ka Panchang,

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  • Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)


पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए शनिवार का पंचांग, (Shanivar Ka Panchang), आज का पंचांग, aaj ka panchang, saturday ka panchang।

  • शनिवार का पंचांग, (Shanivar Ka Panchang, )

    21 मार्च
     2026 का पंचांग, 21 March 2026 ka Panchang,
  • दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
  • शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।

*विक्रम संवत् – 2083,
* शक संवत – 1948,
* कलि संवत – 5128,

* कलयुग 51278वर्ष
* अयन – उत्तरायण,
* ऋतु – बसंत
 ऋतु,
* मास – 
चैत्र माह,
* पक्ष – 
शुक्ल पक्ष,
*चंद्र बल – 
मेष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, कुम्भ,

शनिवार को शनि महाराज की होरा :-

प्रात: 6.25 AM से 7.26 AM तक

दोपहर 01.29 PM से 2.30 PM तक

रात्रि 20.30 PM से 9.30 PM तक

शनिवार को शनि की होरा में अधिक से अधिक शनि देव के मंत्रो का जाप करें । श्रम, तेल, लोहा, नौकरो, जीवन में ऊंचाइयों, त्याग के लिए शनि की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

शनिवार के दिन शनि की होरा में शनि देव देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में शनि ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

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शनि देव के मन्त्र :-

ॐ शं शनैश्चराय नमः।

अथवा

ऊँ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्‌। छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्‌।।

  • तिथि (Tithi) – तृतीया 23.56 PM तक तत्पश्चात चतुर्थी
  • तिथि का स्वामी – तृतीया तिथि की स्वामी माँ गौरी और कुबेर देव जी तथा चतुर्थी तिथि के स्वामी विघ्हर्ता गणेश जी है ।

नवरात्री के तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। माँ का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है, इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी के नाम से जाना जाता है।

माँ चंद्रघंटा के शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है। माता के दस हाथ हैं जिनमे तलवार, त्रिशूल, खड्ग, बाण आदि अस्त्र विभूषित हैं।  माता का वाहन सिंह है।  

मां चंद्रघंटा देवी देवी पार्वती का विवाहित रूप हैं। भगवान भोलेनाथ जी से विवाह करने के बाद माता  ने अपने मस्तक पर अर्धचंद्र को सजाना शुरू कर दिया था, इसीलिए मां पार्वती को मां चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है।

नवरात्री के तीसरे दिन माता के भक्त का मन ‘मणिपूर’ चक्र में प्रविष्ट होता है।  माँ चंद्रघंटा  के घंटे की ध्वनि सदा अपने भक्तों की  रक्षा करती है।

मां चंद्रघंटा की कृपा से भक्तो के समस्त संकटो और पापो का नाश हो जाता हैं।   मान्यता है कि मां अपने भक्तों पर प्रसन्न होकर उन्हें उन्हें सुख-शांति व समृद्धि प्रदान करती हैं ।

आज माँ के मन्त्र का जाप अवश्य करें

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

 मां चन्द्रघंटा को नारंगी रंग प्रिय है। माँ की पूजां के समय भक्तो को नारंग, गेरुए  रंग के वस्त्र धारण करना चाहिए।

तीसरे  नवरात्रि Navratri के दिन माता चंद्रघंटा को मिश्री, खीर या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाकर इसका प्रसाद वितरित करें, इससे माता  के भक्तों के सभी दुख और भय दूर हो जाते है ।

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नक्षत्र (Nakshatra) – अश्विन 12.35 AM रविवार 22 मार्च तक

नक्षत्र के स्वामी :-        अश्विनी नक्षत्र के देवता अश्विनीकुमार जी,  नक्षत्र का  स्वामी ग्रह मंगल एवं अधिपति ग्रह केतु जी है । 

अश्विन नक्षत्र 27 नक्षत्रों में से पहला नक्षत्र है और यह नक्षत्र अश्व मुख अर्थात घोड़े के सिर का प्रतीक है। अश्विनी नक्षत्र 3 तारो का समूह है जो अश्विनी नक्षत्र साहस, जीवन, और शक्ति का प्रतीक है।

अश्विनी एक देवता नक्षत्र है जिसे अत्यधिक शुभ माना जाता है। यह नाम अश्विनी-कुमारों से संबंधित है जो हिंदू देवता माने जाते हैं।

अश्विनी नक्षत्र का लिंग पुरुष है। अश्विन नक्षत्र का आराध्य वृक्ष कुचला और स्वभाव शुभ माना गया है । अश्विन नक्षत्र में जन्मे जातक समान्यता धनवान तथा भाग्यवान होते  है।  

इस नक्षत्र में चन्द्र देव जी  के होने के कारण जातक को आभूषण से प्रेम रहता है एवं जातक सुन्दर, सुखी और सौभाग्यशाली होता है।

मान्यता है कि इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक धन, स्त्री,आभूषण तथा पुत्रादि  का पूर्ण सुख प्राप्त करते है।  ऐसे जातक सक्रिय, उत्साही होते है यह अपने फैसलों पर दृढ़ रहते हैं।  

अश्विनी नक्षत्र के जातको के लिए भाग्यशाली संख्या 2, 7 और 9, भाग्यशाली रंग पीला, मैरून, ऑरेंज, गुलाबी, एवं भाग्यशाली दिन मंगलवार तथा गुरुवार होता है ।

आज अश्विनी नक्षत्र के मंत्र “ॐ अश्विनी कुमाराभ्यां नमः” का 108 बार जाप करें इससे अश्विनी नक्षत्र को बल मिलेगा।  

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अगर 50 की जगह 25, 60 की जगह 30 की उम्र चाहते है, जीवन में डाक्टर के पास ना जाना हो तो अवश्य करे ये उपाय   

  • योग (Yog) – इंद्र 19.01 PM तक तत्पश्चात वैधृति
  • योग के स्वामी, स्वभाव :-    इंद्र योग के स्वामी पितृ देव जी एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है ।
  • प्रथम करण : – तैतिल 13.14 PM तक,
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-     तैतिल करण के स्वामी विश्वकर्मा जी और स्वभाव सौम्य है ।
  • द्वितीय करण : – गर 23.56 PM तक तत्पश्चात वणिज
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-    गर करण के स्वामी भूमि तथा स्वभाव सौम्य है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.49 AM से 5.37 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.30 PM से 15.18 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.32 PM से 18.55 PM तक
  • अमृत काल : अमृत काल 17.58 PM से 19.27 PM तक
  • गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
  • दिशाशूल (Dishashool)- शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।

    यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
  • राहुकाल (Rahukaal)-सुबह – 9:00 से 10:30 तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 06:24 AM
  • सूर्यास्त – सायं 18:33 PM
  • विशेष – तृतीया तिथि को परवल का सेवन नहीं करना चाहिए, तृतीया तिथि को परवल का सेवन करने से शत्रुओं में वृद्धि होती है ।


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  • पर्व त्यौहार- नवरात्री का तीसरा दिन, जय माँ चंद्रघंटा
  • मुहूर्त (Muhurt) –

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

मित्रो हम इस साईट के माध्यम से वर्ष 2010 से निरंतर आप लोगो के साथ जुड़े है। आप भारत या विश्व के किसी भी स्थान पर रहते है, अपने धर्म अपनी संस्कृति को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए आचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय अध्यापक ज्योतिष परामर्श केंद्र रायपुर श्याम नगर छत्तीसगढ़ www.memorymuseum.net के साथ अवश्य जुड़ें, हमारा सहयोग करें ।

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )
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शनिवार का पंचांग, Shaniwar Ka Panchang, 21 मार्च 2026 का पंचांग ,

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