शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
* विक्रम संवत् – 2082 वर्ष
* शक संवत – 1947 वर्ष * कलि संवत – 5127 वर्ष * कलयुग – 5127 वर्ष * अयन – उत्तरायण, * ऋतु – शरद ऋतु, * मास – माघ माह * पक्ष – शुक्ल पक्ष * चंद्र बल – ,मेष, वृषभ, सिंह, कन्या, धनु, कुम्भ,
शुक्रवार को शुक्र देव की होरा :-
प्रात: 7.13 AM से 8.01 AM तक
दोपहर 01.06 PM से 2.02 PM तक
रात्रि 19.49 PM से 20.58 PM तक
दाहिने हाथ के अंगूठे से नीचे के हिस्से ( शुक्र का स्थान ) और अंगूठे पर थोड़ा सा इत्र लगाकर, ( इत्र ना मिले तो उसके बिना भी कर सकते है) बाएं हाथ के अंगूठे से उस हिस्से को शुक्र की होरा में “ॐ शुक्राये नम:” या
‘ॐ द्रांम द्रींम द्रौंम स: शुक्राय नम:।’ मंत्र का अधिक से अधिक जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य )I
यह उपाय आप कोई भी काम करते हुए चुपचाप कर सकते है इसके लिए किसी भी विधि विधान की कोई आवश्यकता नहीं है I
सुख समृद्धि, ऐश्वर्य, बड़ा भवन, विदेश यात्रा, प्रेम, रोमांस, सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए शुक्रवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।
शुक्रवार के दिन शुक्र की होरा में शुक्रदेव देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में शुक ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।
तिथि के स्वामी – पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता जी है I
आज बसंत पंचमी का महापर्व है । इस दिन ज्ञान की देवी माँ सरस्वती देवी की आराधना परम फलदाई मानी जाती है ।
माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 23 जनवरी शुक्रवार को प्रात: 2:30 AM से प्रारम्भ होगी, और यह 24 जनवरी शनिवार को तड़के 1:48 AM बजे समाप्त होगी ।
इसलिए उदया तिथि के आधार पर बंसन्त पंचमी का पर्व 23 जनवरी को ही मनाया जायेगा ।।
शास्त्रों के अनुसार माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी के शुभ दिन में पत्तों पर जल छिड़कने से ही विद्या की अधिष्ठात्री देवी का अवतरण हुआ जिनके एक हाथ में वीणा, दूसरा हाथ में वर मुद्रा और अन्य दोनों हाथों में पुस्तक और माला थी एवं जिनका वाहन मयूर ( मोर) था ।
बसंत पंचमी, basabt panchmi के दिन वाक सिद्धि प्राप्ति हेतु , इस मंत्र का जाप करें
“ॐ हृीं ऐं हृीं ओम् सरस्वत्यै नम:”
“ॐ ऐं सरस्वत्यै नम:”
इस दिन सभी के साथ संयमपूर्वक शुभ और प्रेम वचन बोलने से ईश कृपा प्राप्त होती है।
माँ सरस्वती मनुष्य के शरीर में उसके कंठ और जिह्वा में निवास करती है जो वाणी और स्वाद का स्वरूप है | मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन बोले गए वाक्य शीघ्र सफल होते है। अतः इस दिन शुभ वचन ही बोलने चाहिए ।
आज के दिन मेवे युक्त पीले मीठे चावल, पीली मिठाइयों, फलो को भगवान को अर्पित करके इनका सेवन करना चाहिए ।
बसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता के चरणों पर गुलाल चढ़ाकर देवी सरस्वती को श्वेत वस्त्र पहनाएं / अर्पण करें ।
भारतीय ज्योतिषशास्त्र के अनुसार वसंत पंचमी को अति शुभ माना गया है, इस दिन को स्वयंसिद्ध मुहूर्त घोषित किया गया है। अर्थात इस दिन कोई भी काम बिना मुहूर्त देखे ही किया जा सकता है।
सभी पवित्र कार्य जैसे मुंडन, यज्ञोपवीत, सगाई, विवाह , तिलक, गृहप्रवेश आदि सभी मांगलिक कार्य इस दिन अति शुभ फलदायी माने गए हैं।
बसंत पंचमी Basant Panchmi का दिन विवाह और किसी भी नए कार्य के प्रारम्भ के लिए उत्तम माना गया है ।
बसंत पंचमी Basant Panchmi के दिन होलिका का डाँड भी लगाया जाता है , इस दिन छोटे बच्चो को अक्षर ज्ञान, हाथ में कलम थमा कर उनकी शिक्षा की शुरुआत करायी जाती है ।
आज ही के दिन भगवान श्रीराम माता शबरी के आश्रम में आये थे ।
प्राचीन काल में बसंत पंचमी के दिन प्रेम के प्रतीक पर्व के रूप में कामोत्सव, मदनोत्सव, मनाया जाता था। यह दिन प्रेम का, प्रणय का, अपनी दिल की बात रखने का माना जाता था ।
अगर आप किसी से सच्चा प्यार करते है, या अपने किसी मित्र से अपनी गलती की क्षमा माँगना चाहते है तो उसे अपने मन की बात तुरंत कह दें।
आज के दिन किसी विष्णु / कृष्ण मंदिर में में अपनी वाणी में मधुरता, लोकप्रियता और अपने प्रेम की सफलता के लिए पीले फूल एवं इत्र अवश्य ही चढ़ाएँ ।
बसंत पंचमी Basant Panchmi के दिन घर में पीले मीठे चावल बनायें जिसमें अपनी सामर्थ्यानुसार मेवे जैसे काजू, बादाम, किशमिश, नारियल, इलाइची, केवड़ा आदि भी अवश्य ही डालें ।
इस मीठे पुलाव को सबसे पहले घर के मंदिर में भगवान को भोग लगाएं फिर प्रेम पूर्वक परिवार के सभी सदस्य इसे ग्रहण करें । इससे प्रभु के आशीर्वाद से परिवार में अटूट प्रेम बना रहता है घर में स्थाई लक्ष्मी का वास होता है ।
बसंत पंचमी के दिन स्त्रियों / कन्याओं को पीले वस्त्र, पीली चूड़ियाँ पहननी चाहिए , पीले पुष्प से श्रृंगार करना चाहिए इससे जीवन में प्रसन्नता और सौभाग्य आता है ।
बसंत पंचमी के दिन कामदेव का मन्त्र :- “ऊँ कामदेवाय विद्महे, रति प्रियायै धीमहि, तन्नो अनंग प्रचोदयात्।” का जाप करने से जातक रूपवान होता है ।
प्रत्येक पंचमी के दिन नागो के अति पवित्र और पुण्यदायक नमो 1. अनंत (शेषनाग ), 2. वासुकि, 3. तक्षक, 4. कर्कोटक, 5. पद्म, 6. महापद्म, 7. शंख, 8. कुलिक, 9. धृतराष्ट्र और 10. कालिया का उच्चारण करने से काल सर्प दोष दूर होता है, कोई भी भय निकट नहीं रहता है, बल और साहस की प्राप्ति होती है ।
पंचमी को नागो के पौराणिक नाम अनंत, वासुकि, तक्षक, कर्कोटल, पिंगल का कम से कम 11 बार उच्चारण अवश्य ही करें।
पंचमी तिथि पूर्णा तिथियों की श्रेणी में आती है, इस तिथि में समस्त शुभ कार्य सिद्ध होते हैं, किन्तु पंचमी तिथि को कर्ज नहीं देना चाहिए।
पंचमी को बेल खाना निषेध है, मान्यता है कि पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है।
नक्षत्र के स्वामी :– पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के देवता अजैकपाद तथा स्वामी देवगुरू बृहस्पति हैं ।
नक्षत्रों की श्रेणी में पूर्वाभाद्रपद 25 वां नक्षत्र है। पूर्वाभाद्रपद का अर्थ है ‘पहले आने वाला भाग्यशाली पैरों वाला व्यक्ति’।
पूर्व भाद्रपद नक्षत्र में जन्मे जातक वाकपटु होते है उन्हें भाषण कला में निपुणता होती है ।
पूर्व भाद्रपद नक्षत्र तारे का लिंग पुरुष है। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का आराध्य वृक्ष: आंबा, आम, तथा स्वाभाव उग्र होता है ।
इस नक्षत्र में जन्मे जातक आशावादी, ईमानदार, परोपकारी, मिलनसार, भरोसेमंद, धनवान और आत्मनिर्भर व्यक्ति होते हैं।
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक विपरीत परिस्थितियों से घबराते नहीं है, वरन अपने सकारत्मक रवैये के कारण यह हर परिस्तिथि को अपने अनुकूल करने की क्षमता रखते है । सामान्यता यह छल कपट, बेईमानी और नकारात्मक विचारो से दूर रहते हैं।
पूर्व भाद्रपद नक्षत्र के लिए भाग्यशाली अंक 3 और 8, भाग्यशाली रंग स्लेटी, भाग्यशाली दिन शनिवार और बुधवार है ।
पूर्व भाद्रपद नक्षत्र में जन्मे जातको को नित्य तथा अन्य सभी को आज नक्षत्र देवता नाममंत्र:- “ॐ अजैकपदे नमः” मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करना चाहिए।
पूर्वभाद्रपद नक्षत्र के जातको को भगवान शंकर की आराधना करनी चाहिए। उन्हें भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप करना चाहिए , इससे जीवन में सभी संकट दूर रहते है ।
इस नक्षत्र में जन्मे जातको को काले कपड़े एवं चमड़े से बनी वस्तुओं का प्रयोग करने से बचना चाहिए ।
“हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “। आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।
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