रविवार का पंचांग, Raviwar Ka Panchag, 18 जनवरी का पंचांग 2026 का पंचांग,

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18 जनवरी 2026 का पंचांग, 18 January 2026 ka Panchang,

अवश्य पढ़ें :-  मनचाही नौकरी चाहते हो, नौकरी मिलने में आती हो परेशानियाँ  तो अवश्य करें ये उपाय 

Panchang, पंचाग, आज का पंचांग, aaj ka panchang, Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)



पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे । जानिए रविवार का पंचांग, Ravivar Ka Panchang।

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18 जनवरी 2026 का पंचांग, 18 Jaanuary 2026 ka Panchang,

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आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
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भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
।। आज का दिन अत्यंत मंगलमय हो ।।

👉🏽दिन (वार) रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।

इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।

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रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है । अत: रविवार के दिन मंदिर में भैरव जी के दर्शन अवश्य करें ।

रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।

* विक्रम संवत् – 2082, वर्ष
* शक संवत – 1947, वर्ष
* कलि संवत 5127, वर्ष
* कलयुग – 5127, वर्ष
* अयन – उत्तरायण,
* ऋतु – शरद ऋतु,
* मास – माघ माह
* पक्ष – कृष्ण पक्ष
* चंद्र बल – मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, मकर, मीन,

रविवार को सूर्य देव की होरा :-

प्रात: 7.12 AM से 7.59 AM तक

दोपहर 01.05 PM से 01.59 PM तक

रात्रि 19.45 PM से 8.58 PM तक

रविवार को सूर्य की होरा में अधिक से अधिक अनामिका उंगली / रिंग फिंगर पर थोड़ा सा घी लगाकर मसाज करते हुए सूर्य देव के मंत्रो का जाप करें ।

सुख समृद्धि, मान सम्मान, सरकारी कार्यो, नौकरी, साहसिक कार्यो, राजनीती, कोर्ट – कचहरी आदि कार्यो में सफलता के लिए रविवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

रविवार के दिन सूर्य देव की होरा में सूर्य देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में सूर्य ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

मौनी अमावस्या के दिन इस उपाय को करने से खुल जायेंगे भाग्य के द्वार,

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सूर्य देव के मन्त्र :-

ॐ भास्कराय नमः।।

अथवा

ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।

आज माघ माह की अमावस्या अति शुभ मौनी अमावस्या हैं। माघ माह की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता हैं । इस दिन स्नान से पूर्व मौन रहकर गंगा / यमुना / सरयू / गोदावरी किसी पवित्र नदी , जलाशय अथवा घर में जल में तिल और गंगाजल डालकर स्नान करना चाहिए ।

शास्त्रों के अनुसार माघ में पड़ने वाली मौनी अमावस्या के दिन पवित्र संगम तीर्थ में तैंतीस कोटी देवताओं का निवास होता है इसलिए माघ अमावस्या पर संगम में स्नान से अमृत स्नान का पुण्य मिलता है।

मौनी अमावस्या के दिन प्रातः गंगा नदी / पवित्र नदी या घर में जल में गंगा जल डाल कर स्नान करने से पितृदोष से, गृहक्लेश से मुक्ति मिलती है, सभी तरह के संकटो एवं दुर्घटना से रक्षा होती है।

एक मान्यता ऐसी भी है कि इस दिन मनु ऋषि का भी जन्म हुआ था जिसके कारण भी इस दिन को मौनी अमावस्या के रूप में मनाया जाता है।

मौनी अमावस्या के दिन प्रात: जल में दूध, काले तिल, अक्षत और सफ़ेद पुष्प डाल कर पितरो का तर्पण करने से पितरो को स्वर्ग में स्थान मिलता है, पितरो का पूर्ण आशीर्वाद मिलता है ।

इस दिन पितरो के निमित दान और घर पर ब्राह्मण भोजन से सभी मनोरथ निश्चय ही पूर्ण होते है ।

इस दिन किसी शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग का अभिषेक, भगवान शंकर की आरधना अवश्य ही करें ।

मौनी अमावस्या के दिन स्नान के बाद तिल के लड्डू, तिल का तेल, आंवला, घी, कम्बल, चावल, वस्त्रादि किसी गरीब ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद को दान देने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है।

मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन किसी भूखे को भोजन कराने से जो पुण्य मिलता है वह पुण्य जन्म जन्मांतर तक अक्षय होता है, अत: इस दिन किसी भूखे को भोजन अवश्य ही करवाएं या किसी गरीब असहाय की मदद अवश्य करें।

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नक्षत्र :- पूर्वाषाढ़ा 10.14 AM तक तत्पश्चात उत्तराषाढ़ा

नक्षत्र के स्वामी :-      पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के देवता (अष्ट वसुओं में से एक जल के देवता) और स्वामी शुक्र देव है ।  

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र 20वें नंबर का नक्षत्र  है। ‘पूर्वाषाढ़ा’ का अर्थ है ‘विजय से पूर्व’। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के देवता (अष्ट वसुओं में से एक जल के देवता) और स्वामी शुक्र देव है ।

शुक्र का प्रभाव पड़ने से जातक आकर्षक, प्रेम करने वाला, तथा जिंदादिल इंसान होता है। 

यह हाथी दांत या हाथ का पंखा जैसा नज़र आता है जो कि शक्ति और विजय को दर्शाता है।

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का लिंग पुरुष है।  पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का आराध्य वृक्ष वेत और नक्षत्र का स्वभाव उग्र माना गया है ।

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक निडर, आक्रामक, भगवान से डरने वाले, विनम्र, ईमानदार, पाखंड से कोसों दूर,संकल्प शक्ति वान होते हैं।

लेकिन यदि कुंडली में गुरु और शुक्र अशुभ हो तो ऐसे जातक बेहद जिद्दी, अस्थिर, झगड़ालू, निर्णय नहीं लेने वाले होते है इन्हे आर्थिक कठनाई लगी रहती है ।

पूर्वाषाढ़ा  नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 3 और 6, भाग्यशाली रंग, काला, गहरा भूरा,  भाग्यशाली दिन रविवार, शनिवार, शुक्रवार और गुरुवारका माना जाता है ।

पूर्वाषाढ़ा  नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ पूर्वाषाढाभ्यां नमः”। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।

 जीवन में निरंतर शुभ समय के लिए पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के जातको को माँ लक्ष्मी, माँ ललिता और देवी त्रिपुर सुंदरी की पूजा उपासना करनी चाहिए. ।

लक्ष्मी सहस्त्रनाम, ललिता सहस्त्रनाम, कनकधारा स्त्रोत, महालक्ष्मी अष्टक का पाठ करना जातक के लिए कल्याणकारी होता है. ।

 इसके अतिरिक्त पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के जातको को नित्य भगवान शंकर जी की आराधना भी बहुत शुभ फलदाई होती है ।

#मौनी_अमावस्या के दिन इस उपाय से भगवान शंकर जी की मिलेगी कृपा,


घर के बैडरूम में अगर है यह दोष तो दाम्पत्य जीवन में आएगी परेशानियाँ, जानिए बैडरूम के वास्तु टिप्स

  • योग (Yog) – हर्षण 21.11 PM तक तत्पश्चात वज्र
  • योग के स्वामी :-    हर्षण योग के स्वामी भग देव जी और स्वभाव श्रेष्ठ है ।
  • प्रथम करण : – चतुष्पाद 12. 45 PM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-  चतुष्पाद करण के स्वामी रूद्र और स्वभाव क्रूर है ।
  • द्वितीय करण : – नाग 1.21 AM सोमवार 19 जनवरी तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-    नाग करण के स्वामी नागदेव और स्वभाव क्रूर है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 5.27 AM से 6.21 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.17 PM से 15.00 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 17.46 PM से 18.13 PM तक
  • अमृत काल :- अमृत काल 05.02 AM से 06.44 AM सोमवार 19 जनवरी तक
  • दिशाशूल (Dishashool)- रविवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से पान या घी खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – अपराह्न – 3:00 से 4:30 तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)-सायं – 4:30 से 6:00 तक ।
  • सूर्योदय – प्रातः 07:12
  • सूर्यास्त – सायं 17:49

    आँखों की रौशनी बढ़ाने, आँखों से चश्मा उतारने के लिए अवश्य करें ये उपाय

  • विशेष – रविवार को बिल्ब के वृक्ष / पौधे की पूजा अवश्य करनी चाहिए इससे समस्त पापो का नाश होता है, पुण्य बढ़ते है।

    रविवार के दिन भगवान सूर्य देव को आक का फूल अर्पण करना किसी भी यज्ञ के फल से कम नहीं है, इससे सूर्य देव की सदैव कृपा बनी रहती है ।

    रविवार को तुलसी जी को जल देना, तुलसी जी को तोड़ना वर्जित है ऐसा करने से पुण्य नष्ट होते है 1

  • अमावस्या, पूर्णिमा, संक्रांति, चतुर्दशी,  श्राद्ध और व्रत के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना, सहवास करना निषिद्ध है। 
  • अमावस्या के दिन तुलसी के पत्ते, बिल्व पत्र या किसी भी तरफ के फूल पत्तो को बिलकुल भी नहीं तोडऩा चाहिए।

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत शुभ फलो वाला हो ।

मित्रो हम इस साईट के माध्यम से वर्ष 2010 से निरंतर आप लोगो के साथ जुड़े है। आप भारत या विश्व के किसी भी स्थान पर रहते है, अपने धर्म अपनी संस्कृति को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए www.memorymuseum.net के साथ अवश्य जुड़ें, हमारा सहयोग करें ।

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय 9425203501
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ 7587346995)

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शनिवार का पंचांग, Shaniwar Ka Panchang, 7 फरवरी 2026 का पंचांग ,

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