आप सभी को माघ माह की पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनायें
रविवार का पंचांग, Raviwar Ka Panchag,
1 फरवरी 2026 का पंचांग, 1 February 2026 ka Panchang,
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Panchang, पंचाग, आज का पंचांग, aaj ka panchang, Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-
1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)
पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे । जानिए रविवार का पंचांग, Ravivar Ka Panchang।
रविवार का पंचांग, Ravivar Ka Panchang,
1 फरवरी 2026 का पंचांग, 1 February 2026 ka Panchang,
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भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
।। आज का दिन अत्यंत मंगलमय हो ।।
👉🏽दिन (वार) रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
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रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है । अत: रविवार के दिन मंदिर में भैरव जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।

* विक्रम संवत् – 2082, वर्ष
* शक संवत – 1947, वर्ष
* कलि संवत 5127, वर्ष
* कलयुग – 5127, वर्ष
* अयन – उत्तरायण,
* ऋतु – बसंत ऋतु,
* मास – माघ माह
* पक्ष – शुक्ल पक्ष
* चंद्र बल – वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर, कुम्भ,
रविवार को सूर्य देव की होरा :-
प्रात: 7.12 AM से 8.02 AM तक
दोपहर 01.05 PM से 02.04 PM तक
रात्रि 19.48 PM से 9.06 PM तक
रविवार को सूर्य की होरा में अधिक से अधिक अनामिका उंगली / रिंग फिंगर पर थोड़ा सा घी लगाकर मसाज करते हुए सूर्य देव के मंत्रो का जाप करें ।
सुख समृद्धि, मान सम्मान, सरकारी कार्यो, नौकरी, साहसिक कार्यो, राजनीती, कोर्ट – कचहरी आदि कार्यो में सफलता के लिए रविवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।
रविवार के दिन सूर्य देव की होरा में सूर्य देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में सूर्य ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

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सूर्य देव के मन्त्र :-
ॐ भास्कराय नमः।।
अथवा
ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
- तिथि (Tithi) – पूर्णिमा 03.38 AM सोमवार 2 फरवरी तक,
- तिथि के स्वामी :- पूर्णिमा तिथि के स्वामी भगवान चंद्र देव जी है ।
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आज अति शुभ माघ माह की पूर्णिमा / माघी पूर्णिमा है । माघ माह की पूर्णिमा को अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है । प्रयागराज में कुम्भ एवं माघ मेले में इस दिन स्नान का बड़ा महत्त्व बताया गया है ।
शास्त्रों के अनुसार कर्क राशि में चंद्रमा और मकर राशि में सूर्य का प्रवेश होता है तब माघ पूर्णिमा, Magh Purnima का अति पवित्र योग बनता है। इस योग में स्नान के करने से सूर्य और चंद्रमा युक्त दोषों से मुक्ति मिलती है।
ब्रह्मवैवर्त पुराण में कहा गया है कि माघी पूर्णिमा Magh Purnima पर खुद भगवान श्री विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं। अत: इस पावन समय में गंगाजल के स्पर्शमात्र से भी समस्त पापों का नाश हो जाता है।
यह भी मान्यता है कि इस दिन सूर्योदय से पूर्व जल में भगवान विष्णु का तेज रहता है जो हर तरह के पाप का नाश करता है, इसलिए माघ पूर्णिमा के दिन स्नान करने वाले पर भगवान श्री विष्णु कि सदैव असीम कृपा रहती है, जातक को धन, यश सुख-सौभाग्य, सुयोग्य संतान कि प्राप्ति होती है ।
मान्यता है कि माघ पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण की कथा सुनने / पढ़ने से भगवान श्री विष्णु और माँ लक्ष्मी की असीम कृपा की प्राप्ति होती है ।
इस दिन भगवान शंकर की पूजा विशेष फलदायी होती है । माघ पूर्णिमा के महात्म्य के विषय में भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठिïर को बताया था कि इस दिन स्नान-दान, पितरों के तर्पण व सूर्य देव को अर्ध्य देने तथा गर्म वस्त्रों का दान करने से व्यक्ति बैकुण्ठ में जाता है।
पूर्णिमा तिथि को चन्द्रमा सम्पूर्ण होता है। पूर्णिमा तिथि माँ लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है, इस दिन सुख समृद्धि के लिए माँ लक्ष्मी की विधि पूर्वक उपासना अवश्य करें।
पूर्णिमा तिथि को संध्या के समय में सत्यनारायण भगवान की पूजा तथा कथा की जाती है एवं चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है।
पूर्णिमा तिथि के स्वामी चन्द्र देव जी है, पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति को चन्द्र देव की पूजा नियमित रुप से अवश्य ही करनी चाहिए।
पूर्णिमा तिथि के दिन चन्द्र देव जी के मन्त्र
ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:। अथवा
ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम:।
का जाप करने से कुंडली में चन्द्रमा के शुभ फल मिलने लगते है ।
इस दिन सफ़ेद वस्त्र पहने और चन्द्रमा की चांदनी में अवश्य बैठें ।
पूर्णिमा के दिन लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा आदि का सेवन नहीं ना करें, इस दिन परिवार में सुख-शांति बनायें रखे इस दिन क्रोध और हिंसा से दूर रहना चाहिए ।
पूर्णिमा के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना, सहवास करना निषिद्ध है।
पूर्णिमा के दिन ब्रह्यचर्य का पालन करना चाहिए । पूर्णिमा के दिन गरीब या जरुरतमंद को दान करने से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
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नक्षत्र :- पुष्य नक्षत्र 23.58 PM तक
नक्षत्र के स्वामी :- पुष्य नक्षत्र के देवता देव गुरु बृहस्पति और स्वामी शनि देव जी है, इस दिन चंद्र देव कर्क राशि में गोचर करते हैं ।
आज अति शुभ रवि पुष्य नक्षत्र है, पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रो का राजा भी कहते है, उसमें भी रवि पुष्य नक्षत्र एवं गुरु पुष्य नक्षत्र बहुत ही शुभ माने जाते है। इस अवसर पर किया गया शुभ कार्य अति लाभ दायक और चिरस्थाई होता है।
पुष्य नक्षत्र का नक्षत्र आराध्य वृक्ष: पीपलं तथा नक्षत्र का स्वाभाव शुभ माना जाता है।
शास्त्रों में लिखा है कि पुष्य नक्षत्र में शुरू किये गए सभी कार्य पुष्टिदायक, सर्वथा सिद्ध होते ही हैं, निश्चय ही फलीभूत होते हैं ।
पुष्य नक्षत्र माँ लक्ष्मी जी को अत्यंत प्रिय है । पुष्य नक्षत्र के दिन माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए श्री सूक्त, श्री महा लक्ष्मी अष्टकम का पाठ करना अत्यंत पुण्य दायक माना जाता है।
पुष्य नक्षत्र में जन्मे जातक सुन्दर, शांत, महत्वाकांक्षी, साहसी, सुखी, भोगी, लोकप्रिय, बुद्धिमान, परोपकारी, कड़ी मेहनत करने वाले तथा पुत्र मित्रादि से युक्त होता है।
लेकिन पुष्य नक्षत्र के लोग स्वार्थी, अत्यधिक बोलने वाले, जिद्दी, घमंडी, कट्टरपंथी और अत्यधिक संवेदनशील भी होते हैं।
पुष्य नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 8 और 2, भाग्यशाली रंग लाल, नीला, भाग्यशाली दिन शनिवार, सोमवार और बुधवार होता है ।
पुष्य नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ बृहस्पतये नम: “। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।
गुरु पुष्य नक्षत्र किसी भी तरह के वस्त्र, वाहन, सोना, चांदी, आभूषण, भूमि और भवन की खरीदारी के लिए उत्तम समय माना गया है ।
घर के बैडरूम में अगर है यह दोष तो दाम्पत्य जीवन में आएगी परेशानियाँ, जानिए बैडरूम के वास्तु टिप्स
- योग (Yog) – प्रीति 10.19 AM तक तत्पश्चात आयुष्मान
- योग के स्वामी :- प्रीति योग के स्वामी विष्णु एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है ।
- प्रथम करण : – विष्टि 16.42 PM तक
- करण के स्वामी, स्वभाव :- विष्टि करण के स्वामी यम और स्वभाव क्रूर है ।
- द्वितीय करण : – बव 03.38 AM सोमवार 2 फरवरी तक
- करण के स्वामी, स्वभाव :- बव करण के स्वामी इंद्र देव और स्वभाव सौम्य है ।
- ब्रह्म मुहूर्त : 5.24 AM से 6.17 AM तक
- विजय मुहूर्त : 14.23 PM से 15.07 PM तक
- गोधूलि मुहूर्त : 17.58 PM से 18.24 PM तक
- अमृत काल :- अमृत काल 17.59 PM से 21.29 PM
- दिशाशूल (Dishashool)- रविवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से पान या घी खाकर जाएँ ।
- गुलिक काल : – अपराह्न – 3:00 से 4:30 तक ।
- राहुकाल (Rahukaal)-सायं – 4:30 से 6:00 तक ।
- सूर्योदय – प्रातः 07:13
- सूर्यास्त – सायं 17:54
आँखों की रौशनी बढ़ाने, आँखों से चश्मा उतारने के लिए अवश्य करें ये उपाय - विशेष – रविवार को बिल्ब के वृक्ष / पौधे की पूजा अवश्य करनी चाहिए इससे समस्त पापो का नाश होता है, पुण्य बढ़ते है।
रविवार के दिन भगवान सूर्य देव को आक का फूल अर्पण करना किसी भी यज्ञ के फल से कम नहीं है, इससे सूर्य देव की सदैव कृपा बनी रहती है ।
रविवार को तुलसी जी को जल देना, तुलसी जी को तोड़ना वर्जित है ऐसा करने से पुण्य नष्ट होते है 1 - पूर्णिमा और व्रत के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना, सहवास करना, क्रोध करना, हिंसा करना मना है । ऐसा करने से दुर्भाग्य आता है, दुःख, कलह और दरिद्रता के योग बनते है ।
- पर्व त्यौहार- माघ माह की पूर्णिमा, रवि पुष्य नक्षत्र,
- मुहूर्त (Muhurt) –
एकादशी के इन उपायों से पाप होंगे दूर, सुख – समृद्धि की कोई कमी नहीं रहेगी
“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
आप का आज का दिन अत्यंत शुभ फलो वाला हो ।
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आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।
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